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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 मेरी गलतियां ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. पौष कृष्ण दूज दिनांक 10 दिसंबर 2022 शनिवार को उन्नीस वें तीर्थंकर मल्लिनाथ सभी की मलिनता के विनाशक 1008 श्री मल्लिनाथ भगवान जी का ज्ञान कल्याणक महोत्सव हैं। मल्लिनाथ तीर्थंकर भगवान जी जिन्हें मात्र 6 दिन के कठोर तप के बाद ही, केवल ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी - सभी 24 तीर्थंकरों में , मात्र 6 दिन, सबसे कम अवधि में केवल ज्ञान प्राप्त करने वाले, हमारे 19 वे तीर्थंकर हैं श्री मल्लीनाथ भगवान जी, जिन्हें पौष माह की कृष्णा की द्वितीया को अश्वनी नक्षत्र में अपराहन काल में, मनोहर वनके अशोक वृक्ष के नीचे, केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई थी ।*
*👨👩👦👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*
⏰↔️शहर से कुछ दूरी पर बसे एक मोहल्ले में रुचिका अपने पतिदेव के साथ रहती थी। उसके ठीक बगल में एक बुजर्ग व्यक्ति अकेले ही रहा करते थे, जिन्हें सभी “दादा जी” कह कर बुलाते थे।
एक बार मोहल्ले में एक पौधे वाला आया. उसके पास कई किस्म के खूबसूरत, हरे-भरे पौधे थे।
रुचिका और दादाजी ने बिलकुल एक तरह का पौधा खरीदा और अपनी-अपनी क्यारी में लगा दिया। रुचिका पौधे का बहुत ध्यान रखती थी। दिन में तीन बार पानी डालना, समय-समय पर खाद देना और हर तरह के कीटनाशक का प्रयोग कर वह कोशिश करती की उसका पौधा ही सबसे अच्छे ढंग से बड़ा हो।
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दूसरी तरफ दादा जी भी अपने पौधे का ख़याल रख रहे थे, पर रुचिका के तुलना में वे थोड़े बेपरवाह थे… दिन में बस एक बार ही पानी डालते, खाद डालने और कीटनाशक के प्रयोग में भी वे ढीले थे।
समय बीता. दोनों पौधे बड़े हुए।
रुचिका का पौधा हरा-भरा और बेहद खूबसूरत था। दूसरी तरफ दादा जी का पौधा अभी भी अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में नहीं आ पाया था।
यह देखकर रुचिका मन ही मन पौधों के विषय में अपनी जानकारी और देखभाल करने की लगन को लेकर गर्व महसूस करती थी।
फिर एक रात अचानक ही मौसम बिगड़ गया। हवाएं तूफ़ान का रूप लेने लगीं…बादल गरजने लगे… और रात भर आंधी-तूफ़ान और बारिश का खेल चलता रहा।
सुबह जब मौसम शांत हुआ तो रुचिका और दादा जी लगभग एक साथ ही अपने अपने पौधों के पास पहुंचे। पर ये क्या ? रुचिका का पौधा जमीन से उखड़ चुका था, जबकि दादा जी का पौधा बस एक ओर जरा सा झुका हुआ था।
“ऐसा क्यों हुआ दादाजी, हम दोनों के पौधे बिलकुल एक तरह के थे, बल्कि आपसे अधिक तो मैंने अपने पौधे की देख-भाल की थी… फिर आपका पौधा प्रकृति की इस चोट को झेल कैसे गया जबकि मेरा पौधा धराशायी हो गया?”, रुचिका ने घबराहट और दुःख भरे शब्दों में प्रश्न किया।
इस पर दादाजी बोले, “देखो बेटा, तुमने पौधे को उसके ज़रुरत की हर एक चीज प्रचुरता में दी… इसलिए उसे अपनी आवश्यकताएं पूरी करने के लिए कभी खुद कुछ नहीं करना पड़ा… न उसे पानी तलाशने के लिए अपनी जड़ें जमीन में भीतर तक गाड़नी पड़ीं, ना कीट-पतंगों से बचने के लिए अपनी प्रतिरोधक क्षमता पैदा करनी पड़ी…नतीजा ये हुआ कि तुम्हारा पौदा बाहर से खूबसूरत, हरा-भरा दिखाई पड़ रहा था पर वह अन्दर से कमजोर था और इसी वजह से वह कल रात के तूफ़ान को झेल नहीं पाया और उखड़ कर एक तरफ गिर गया।
जबकि मैंने अपने पौधे की बस इतनी देख-भाल की कि वह जीवित रहे इसलिए मेरे पौधे ने खुद को ज़िंदा रखने के लिए अपनी जडें गहरी जमा लीं और अपनी प्रतिरोधक क्षमता को भी विकसित कर लिया और आसानी से प्रकृति के इस प्रहार को झेल गया।”
रुचिका अब अपनी गलती समझ चुकी थी पर अब वह पछताने के सिवा और कुछ नहीं कर सकती थी।
*🔔आज हम सभी को भारत सरकार ने इसी प्रकार रासायनिक खाद युक्त अनाज , फल व सब्जियां उपलब्ध करा रही है।इस कारण से हम सभी की प्रतिरोधक क्षमता व कार्य करने की शक्ति कम होने से हमारा शरीर बीमारीयों का घर बनते जा रहा है। सरकार को तो अनेक प्रकार के टेक्सो से लाभ प्राप्त होता है।*
आज कल परिवार छोटे होने लगे हैं। अधिकतर जोड़ें 2 या सिर्फ 1 ही बच्चा कर रहे हैं. ऐसे में माता-पिता बच्चों का रख रखाव करने में उन्हें इतनी सुख सुविधाएं दे रहे हैं कि बच्चे को खुद कुछ करने और संघर्ष करने का मौका ही नहीं मिलता । वे भावनात्मक और शारिरिक मजबूत बनने की जगह कमजोर बनते जा रहे हैं।
बच्चों को पालना और पौधों की देखभाल करने में काफी समानतायें हैं… ऐसे ही छोड़ देने पर बच्चे और प्लांट्स दोनों बिगड़ जाते हैं और ज़रुरत से अधिक रख रखाव करने पर वे कमजोर हो जाते हैं… इसलिए बतौर अभिभावक ज़रुरी है कि हम एक सही अंतराल के साथ अपने बच्चों को पाले-पोसें और सही परवरिश दें ताकि वे उस पौधे की तरह बनें जो मुसीबतों के आने पर गिरें नहीं बल्कि अपना सीना चौड़ा कर उनका सामना कर सके।
*🌞⏰🌞🔔👪विशेष:-भव्य आत्माओं,यह कहानी के माध्यम से आपको सावधान किया जाता है कि आप वर्तमान में अपने बच्चों को उनके अनुसार जो भी सुख सुविधाएं दी जा रही है। इससे आपकी संतान परिवार व धर्म से दूरियां बढ़ा रही है।कल जब वह कुछ धन कमाने वाले बन जायेंगे तो वे परिवार से व अपने धर्म से भी बहुत दूर हो जायेंगे। प्रकृति सभी जीवों को बहुत कुछ दे रही है, उसे हमें हमेशा ग्रहण करते रहना चाहिए। जैसे :- ठंडके मौसम में ठंड सहन करने की शक्ति......। अतः आप उन्हें समय रहते हुए सच्चे धर्म संस्कारों से संस्कारवान बनाएं।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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