बुधवार, 30 नवंबर 2022

बुराईयों का अंत

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 बुराईयों का अंत ✍️🐒*

*🔔🎪🔊 तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना*
*🕉️1. मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी  2 दिसंबर  2022     शुक्रवार  को अठारवे तीर्थंकर अरनाथ सभी के मोक्ष प्रदाता 1008 श्री   भगवान जी का तप कल्याणक  महोत्सव हैं। तीर्थंकर अरनाथ जी का है तप कल्याणक हस्तिनापुर में हुआ था | बादलों का नष्ट होना देखकर , वैराग्य हुआ , दो दिन के उपवास की प्रतिज्ञा लेकर रेवती नक्षत्र में जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की |*
*आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सार्थक करें।*

🐒पंकज एक गुस्सैल लड़का था। वह छोटी-छोटी बात पर नाराज़ हो जाता और दूसरों से झगड़ा कर बैठता. उसकी इसी आदत की वजह से उसके अधिक दोस्त भी न थे।

पंकज के माता-पिता और सगे-सम्बन्धी उसे अपना स्वभाव बदलने के लिए बहुत समझाते पर इन बातों का उसपर कोई असर नहीं होता।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

एक दिन पंकज के पेरेंट्स को शहर के करीब ही किसी गाँव में रहने वाले एक सन्यासी बाबा का पता चला जो अजीबो-गरीब तरीकों से लोगों की समस्याएं दूर किया करता था।

अगले दिन सुबह-सुबह वे पंकज को बाबा के पास ले गए।

बाबा बोले, “जाओ और चिकनी मिटटी के दो ढेर तैयार करो।

पंकज को ये बात कुछ अजीब लगी लेकिन माता-पता के डर से वह ऐसा करने को तैयार हो गया।

कुछ ही देर में उसने ढेर तैयार कर लिया.

बाबा बोले, “अब इन दोनों ढेरों से दो दिल तैयार करो!”

पंकज ने जल्द ही मिटटी के दो हार्ट शेप तैयार कर लिए और झुंझलाते हुए बोला, “हो गया बाबा, क्या अब मैं अपने घर जा सकता हूँ?”

बाबा ने उसे इशारे से मना किया और मुस्कुरा कर बोले, “अब इनमे से एक को कुम्हार के पास लेकर जाओ और कहो कि वो इसे भट्टी में डाल कर पका दे.”

पंकज को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि बाबा करना क्या चाहते हैं पर अभी उनकी बात मानने के अलावा उसके पास कोई चारा न था.
दो-तीन घंटे बाद पंकज यह काम कर के लौटा।

“यह लो रंग और अब इस दिल को रंग कर मेरे पास ले आओ!”, बाबा बोले।

“आखिर आप मुझसे कराना क्या चाहते हैं? इन सब बेकार के टोटकों से मेरा गुस्सा कम नहीं हो रहा बल्कि बढ़ रहा है!”, पंकज बड़बड़ाने लगा।
बाबा बोले, “बस पुत्र यही आखिरी काम है!”

पंकज ने चैन की सांस ली और भट्टी में पके उस दिल को लाल रंग से रंगने लगा.।

रंगे जाने के बाद वह बड़ा ही आकर्षक लग रहा था. पंकज भी अब कहीं न कहीं अपनी मेहनत से खुश था और मन ही मन सोचा रहा था कि वो इसे ले जाकर अपने रूम में लगाएगा.

वह अपनी इस कृति को बड़े गर्व के साथ बाबा के सामने लेकर पहुंचा.

पहली बार उसे लग रहा था कि शायद बाबा ने उससे जो-जो कराया ठीक ही कराया और इसकी वजह से वह गुस्सा करना छोड़ देगा.
“तो हो गया तुम्हारा काम पूरा?”, बाबा ने पूछा.

“जी हाँ, देखिये ना मैंने खुद इसे लाल रंग से रंगा है!”, पंकज उत्साहित होते हुए बोला.

“ठीक है बेटा, ये लो हथौड़ा और मारो इस दिल पर.”, बाबा ने आदेश दिया.

“ये क्या कह रहे हैं आप? मैंने इतनी मेहनत से इसे तैयार किया है और आप इसे तोड़ने को कह रहे हैं?”, पंकज ने विरोध किया.
इस बार बाबा गंभीर होते हुए बोले, “मैंने कहा न मारो हथौड़ा!”

पंकज ने तेजी से हथौड़ा अपने हाथ में लिए और गुस्से से दिल पर वार किया.

जिस दिल को बनाने में पंकज ने आज दिन भर काम किया था एक झटके में उस दिल के टुकड़े-टुकड़े हो गए.

“देखिये क्या किया आपने, मेरी सारी मेहनत बर्बाद कर दी.”

बाबा ने पंकज की इस बात पर ध्यान न देते हुए अपने थैले में रखा मिट्टी का दूसरा दिल निकाला और बोले, “चिकनी मिट्टी का यह दूसरा दिल भी तुम्हारा ही तैयार किया हुआ है… मैं इसे यहाँ जमीन पर रखता हूँ… लो अब इस पर भी अपना जोर लगाओ…”

पंकज ने फ़ौरन हथौड़ा उठाया और दे मारा उस दिल पर.

पर नर्म और नम होने के कारण इस दिल का कुछ ख़ास नहीं बिगड़ा बस उसपर हथौड़े का एक निशान भर उभर गया.

“अब आप खुश हैं… आखिर ये सब कराने का क्या मतलब था… मैं जा रहा हूँ यहाँ से!”, पंकज यह कह कह कर आगे बढ़ गया.

“ठहरो पुत्र!,” बाबा ने पंकज को समझाते हुए कहा, “जिस दिल पर तुमने आज दिन भर मेहनत की वो कोई मामूली दिल नहीं था… दरअसल वो तुम्हारे असल दिल का ही एक रूप था.

तुम भी क्रोध की भट्टी में अपने दिल को जला रहे हो… उसे कठोर बना रहे हो… ना समझी के कारण तुम्हे ऐसा करना ताकत का एहसास दिलाता है… तुम्हे लगता है की ऐसा करने से तुम मजबूत दिख रहे हो… मजबूत बन रहे हो… लेकिन जब उस हथौड़े की तरह ज़िंदगी तुम पर एक भी वार करेगी तब तुम संभल नहीं पाओगे… और उस कठोर दिल की तरह तुम्हारा भी दिल चकनाचूर हो जाएगा!

समय है सम्भल जाओ! इस दूसरे दिल की तरह विनम्र बनो… देखो इस पर तुम्हारे वार का असर तो हुआ है पर ये टूट कर बिखरा नहीं… ये आसानी से अपने पहले रूप में आ सकता है… ये समझता है कि दुःख-दर्द जीवन का एक हिस्सा है और उनकी वजह से टूटता नहीं बल्कि उन्हें अपने अन्दर सोख लेता है…जाओ क्षमाशील बनो…प्रेम करो और अपने दिल को कठोर नहीं विनम्र बनाओ!”

पंकज बाबा को एक टक देखता रह गया. वह समझ चुका था कि अब उसे कैसा व्यवहार करना है।

*🔔🎪👪🐟↔️विशेष : -भव्य आत्माओं, आज हम सभी के अंदर अनेक प्रकार का स्वयं के कुविचारों(अज्ञानता) व वर्तमान के स्थानों के कारण से कुछ बुराईयों ने प्रवेश कर रखा है। अतः हम सभी को अपने अंदर प्रवेश किए हुए उन सभी बुराईयों को क्रमशः अपने आत्म प्रदेश से अपने संतुलित आचरण के द्वारा बाहर निकालना है।जब हम स्वयं इस कार्य के लिए तैयार होंगे तो हमारे साथ हमारा भगवान व अन्य लोगों का भी हमें सहयोग प्राप्त होगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मंगलवार, 29 नवंबर 2022

सच्ची प्रार्थना का फल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सच्ची प्रार्थना का फल ✍️🐒*

*एक वृद्ध महिला एक सब्जी की दुकान पर जाती है, उसके पास सब्जी खरीदने के पैसे नहीं होते है।*
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*वो दुकानदार से प्रार्थना करती है कि उसे सब्जी उधार दे दे पर दुकानदार मना कर देता है।*

*उसके बार-बार आग्रह करने पर दुकानदार खीज कर कहता है, तुम्हारे पास कुछ ऐसा है , जिसकी कोई कीमत हो , तो उसे इस तराजू पर रख दो,  मैं उसके वज़न के बराबर सब्जी तुम्हे दे दूंगा।*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
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*वृद्ध महिला कुछ देर सोच में पड़ जाती है।*
*क्योंकि उसके पास ऐसा कुछ भी नहीं था।*

*कुछ देर सोचने के बाद वह, एक मुड़ा-तुड़ा कागज़ का टुकड़ा निकालती है और उस पर कुछ लिख कर तराजू पर रख देती है।*
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*दुकानदार ये देख कर हंसने लगता है।*
*फिर भी वह थोड़ी सब्जी उठाकर तराजू पर रखता है।*
*आश्चर्य...!!!*
*कागज़ वाला पलड़ा नीचे रहता है और सब्जी वाला ऊपर उठ जाता है।*
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*इस तरह वो और सब्जी रखता जाता है पर कागज़ वाला पलड़ा नीचे नहीं होता।*
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*तंग आकर दुकानदार उस कागज़ को उठा कर पढता है और हैरान रह जाता है*

*👉-- कागज़ पर लिख था की परमात्मा आप सर्वज्ञ हो, अब सब कुछ तुम्हारे हाथ में है''..🙏*
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*दुकानदार को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था।*

*वो उतनी सब्जी वृद्ध महिला को दे देता है।*

*पास खड़ा एक अन्य ग्राहक दुकानदार को समझाता है, कि दोस्त, आश्चर्य मत करो।*
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*केवल परमात्मा ही जानते हैं की प्रार्थना का क्या मोल होता है।*

*वास्तव में प्रार्थना में बहुत शक्ति होती है।*
*चाहे वो एक घंटे की हो या एक मिनट की।*
*यदि सच्चे मन से की जाये, तो ईश्वर अवश्य सहायता करते हैं..!!* 
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*अक्सर लोगों के पास ये बहाना होता है, की हमारे पास वक्त नहीं।*

*मगर सच तो ये है कि परमात्मा को याद करने का कोई समय नहीं होता...!!* 

*प्रार्थना के द्वारा मन के विकार दूर होते हैं, और एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।*
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*जीवन की कठिनाइयों का सामना करने का बल मिलता है।*

*ज़रूरी नहीं की कुछ मांगने के लिए ही प्रार्थना की जाये।*
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*जो आपके पास है उसका धन्यवाद करना चाहिए।*

*इससे आपके अन्दर का अहम् नष्ट होगा और एक कहीं अधिक समर्थ व्यक्तित्व का निर्माण होगा।*
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*👉---श्रीअरिहंत वाणी कहती हैं की प्रार्थना करते समय मन को ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध घृणा जैसे विकारों से मुक्त रखें*

*🕉️👣🎪🧠⏰विशेष :-भव्य‌‌‌ आत्माओं ,वह माताजी जब वह सम्पन्न थे तो प्रतिदिन प्रातः उठने के बाद व सोने से पूर्व वीतरागी प्रभु का धन्यवाद करती थी। भगवान में आपके बताए गए कर्तव्यों का पालन नियमित करती रहूं।वह प्रतिदिन दोनों समय संकल्प को याद रखकर अपनी दैनंदिनी व्यतीत करती थी। यथाशक्ति जप-दान-परोपकार के कार्य किया करती थी। इसी कारण उसे विषम परिस्थितियों में भी भगवान का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। आज हम सभी देव शास्त्र गुरु की पूजा भक्ति केवल जब हम पर विषम परिस्थिति आती है तब ही करते है। इसी कारण से आज हम सफलता की अंतिम सिढ़ी चढ़ नहीं पा रहे है। यही प्रकृति का नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 28 नवंबर 2022

आवश्यक बदलाव

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒आवश्यक बदलाव✍️🐒*

जंगल के बीचो बीच जामुन का एक बहुत पुराना वृक्ष था। पीढ़ियों से गिलहरियों का एक परिवार उस वृक्ष पर रहता आ रहा था।

वह वृक्ष उन्हें हर वो चीज देता आ रहा था जो जीने के लिए ज़रूरी थी…खाने के लिए फल, रहने के लिए अपने खोखले तनों में आसरा और खतरनाक पक्षीयों और जानवरों से सुरक्षा। यही वजह थी कि आज तक गिलहरियों के कुनबे में से किसी ने कहीं और जाने की नहीं सोची थी।

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*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

लेकिन अब परिस्थितियां बदल रहीं थीं… हर चीज जो शुरू हुई है वो ख़त्म भी होती है…अब जामुन के पेड़ की भी आयु अंतिम पड़ाव पर थी…उसकी मजबूत जडें अब ढीली पड़ने लगी थीं… जामुन के फलों से लदे रहने वाले उसे पेड़ पर अब मुश्किल से ही जामुन खाने को मिल रहे थे।

यह एक आपात स्थिति थी और गिलहरी परिवार ज्यादा दिनों तक इसकी अनदेखी नहीं कर सकता था… अंततः एक मीटिंग बुलाई गयी।

सबसे बुजुर्ग होने के कारण अकड़ू गिलहरी ने मीटिंग की अध्यक्षता की और अपनी बात रखते हुए कहा, “मित्रों ये पेड़ ही हमारी दुनिया है… यही हमारा अन्न दाता है…इसने सदियों से हमारे पूर्वजों का पेट पाला है… हमारी रक्षा की है…आज भले ही इसपर फल आने कम हो गए हैं… इसकी जडें कमजोर पड़ गयी हैं पर फिर भी यह हम सबको आश्रय देने के लिए पर्याप्त है… और भगवान की कृपा हुई तो क्या पता ये कुछ दिनों में ये वापस ठीक हो जाए? अतः हम सबको यहीं रहना चाहिए और ईश्वर की प्रार्थना करनी चाहिए।

सभी गिलहरियों ने अकड़ू की हाँ में हाँ मिलायी लेकिन गिल्लू गिलहरी से रहा नहीं गया और उसने हाथ उठाते हुए कहा, “मुझे कुछ कहना है.”
“क्या कहना है? हम भी तो सुनें”, अकड़ू कुछ अकड़ते हुए बोला।

“क्यों न हम एक नया पेड़ तलाशें और अपना परिवार वहीँ ले चलें… क्योंकि इस पेड़ का अंत निकट है, हो सकता है हम कुछ महीने और यहाँ काट लें…पर उसके बाद क्या? हमें कभी न कभी तो इस पेड़ को छोड़ना ही होगा।

“बेकार की बात करना छोडो गिल्लू… नए खून के जोश में तुम ये भूल रहे हो कि इस पेड़ के बाहर कितना खतरा है… जो कोई भी यहाँ से जाने की सोचेगा उसे बाज, लोमड़ी या कोई अन्य जानवर मार कर खा जाएगा… और भगवान पर भरोसा भी तो कोई चीज होती है !” ,अकड़ू ने ऊँची आवाज़ में गिल्लू को समझाया।

“चाचा, खतरा कहाँ नहीं है… सच कहूँ तो इस समय नया घर खोजने का खतरा ना उठाना  ही हमारे परिवार के लिए सबसे खतरनाक चीज है…और जहाँ तक भगवान पर भरोसे की बात है तो अगर हम उस पर इस मरते हुए पेड़ में जान डालने का भरोसा कर सकते हैं तो नया घर खोजते वक़्त हमारी जान की रक्षा करने का भरोसा क्यों नहीं दिखा सकते…. आप लोगों को जो करना है करिए मैं तो चला नया घर ढूँढने!”, और ऐसा कहते हुए गिल्लू जामुन का पेड़ छोड़ कर चला गया।

गिल्लू के जाने के कई दिनों बाद तक उसकी कोई खबर नहीं आई। इस पर अकड़ू सबको यही कहता फिरता, “मैंने मना किया था… बाहर जान का खतरा है… पर वो सुनता तब तो… मारा गया बेकार में..।

बाकी गिलहरियाँ अकड़ू की बात सुनतीं पर समय के साथ-साथ उस धराशायी हो रहे पेड़ पर रहना मुश्किल होता जा रहा था। इसलिए गिलहरी परिवार ने एक और मीटिंग बुलाई। इस बार परिवार दो हिस्सों में बंट गया कुछ गिलहरियाँ गिल्लू की राह पर चलते हुए खतरा उठाने को तैयार हो गयीं और बाकी सभी अकड़ू की राह पर चलते हुए कोई खतरा नहीं उठाना चाहती थीं।

कुछ एक महीने और बीते, जामुन के पेड़ पर फल गायब हो चुके थे… उस पर रह रही गिलहरियाँ बिलकुल कमजोर हो चुकी थीं और अब उनमे कुछ नया करने की हिम्मत भी नहीं बची थी… धीरे-धीरे अकड़ू और बाकी गिलहरियाँ मरने लगीं और वहां से करीब 700 मीटर की दूरी पर गिल्लू और बाकी गिलहरियाँ एक दुसरे जामुन के पेड़ पर हंसी-ख़ुशी अपना जीवन जी रही थीं।

 हम सभी किसी न किसी जामुन के पेड़ पर बैठे हुए हैं… हम जिस भी उद्योग में हैं…जो भी व्यवसाय कर रहे हैं वह धीरे-धीरे अप्रचलित हो रहा है या उसे करने का तरीका तेजी से बदल रहा है… सरकारी नौकरियां भी अब पहले की तरह नहीं रहीं। ऐसे में अगर हम अकड़ू की तरह बदलाव का विरोध करेंगे…बदल रही परिस्थिति को नजर अंदाज करेंगे और खुद को नयी परिस्थितियों के हिसाब से नहीं ढालेंगे तो बहुत जल्द हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

*🕉️🔔👪🔑⏰विशेष : - भव्य आत्माओं , आज प्रत्येक जीव एक दुसरे के सहारे से जीवन व्यतीत कर रहा है। हमें अपने धर्म व परिवार के नियमानुसार  वर्तमान परिस्थितियों में कुछ आवश्यक बदलाव करना चाहिए। अगर हम दुनिया के अनुसार बदलाव करते है तो हमें कुछ धन तो प्राप्त होगा किन्तु सुख शांति समृद्धि की प्राप्ति नहीं होगी।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 27 नवंबर 2022

हमारी भूल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
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*💪👩‍🚒 हमारी भूल✍️🐒*
बहुत समय पहले की बात है, घास के मैदानों से भरा एक जंगल था जिससे भैंसों का एक झुण्ड गुजर रहा था। झुंड अभी कुछ ही आगे बढ़ा था कि अचानक शेरों ने उनपर हमला कर दिया।
बाकी भैंसे तो बच गयीं पर एक बेचारी भैंस झुण्ड से अलग हो गयी। शेर उसका पीछा करने लगे और वो घबराहट के मारे इधर-उधर भागने लगी… कभी दाएं…. कभी बाएँ…कभी ढलान पर … तो कभी चढ़ाई पर…।

भैंस इतनी डरी हुई थी कि उसने पलट कर देखा तक नहीं कि शेर कब के वापस लौट गए हैं…उसे तो बस अपने जान की फ़िक्र थी! काफी देर तक भागने के बाद जब वो रुकी तब उसे एहसास हुआ कि वह जंगल से बाहर निकल एक गाँव में आ चुकी है।

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*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

अगले दिन जंगली कुत्तों का झुण्ड घास के बीच मिल रही उस भैंस की गंध का पीछा करते-करते उसी रास्ते पर चल पड़ा।
अगले दिन भेडें भी घास के बीच बने रास्ते को देखकर उसी पर चल पड़ी..

ऐसे करते-करते बहुत से जानवर उसी रास्ते पर चलने लगे… और एक दिन जब जंगल में शिकार कर रहे नवयुवकों ने वो रास्ता देखा तो वो भी उसी पर चल पड़े और गाँव पहुँच कर बहुत खुश हुए कि उन्होंने जंगल से निकलने का एक जानवरों के द्वारा बनाया रास्ता खोज लिया है।

फिर क्या था गाँव वाले भी उसे रास्ते जंगल आने जाने लगे… धीरे-धीरे उस रास्ते पर बैल गाड़ियाँ चलने लगीं जिसपर किसान लकड़ियाँ काट कर गाँव ले जाते और फिर उसे शहर में बेच देते।

भैंस द्वारा बनाया गया वो रास्ता आज उस इलाके का मुख्य मार्ग बन चुका था…और बेहद बेढंगा…ऊँचा-नीचा और कठिन होने के बावजूद सब उसी रस्ते पर ख़ुशी-ख़ुशी चल रहे थे।

पर वो जंगल गाँव वालों की ख़ुशी देखकर मुस्कुरा रहा था… क्योंकि वो जानता था जंगल से गाँव जाने का इससे कठिन और कोई रास्ता हो ही नहीं सकता था…. आज एक भैंस की वजह से हज़ारों लोग 30 मिनट के रास्ते को तीन घंटे में बड़ी कठिनाई के साथ पार कर रहे थे…पर फिर भी वे खुश थे।

मित्रों आप किस रास्ते पर हैं ? क्या ये आपका सोचा-समझा रास्ता है या कोई विसंगत रास्ता है जिसपर हज़ारों लोग चल रहे हैं और इस वजह से वह तार्किक लग रहा है?

मत स्वीकार करिए उस रास्ते को जो आपने सिर्फ इस लिए चुना है क्योंकि सब उसे ही चुनते हैं…एक बार ठहरिये और समझने की कोशिश करिए…कहीं आप भी 30 मिनट का रास्ता 3 घंटे में तो नहीं पूरा कर रहे हैं… पूछिए खुद से
क्या आप सही रास्ते पर हैं?
*🌞🧑‍🦰🐴🧠⏰विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम अपने विचारों पर आधारित मान्यता के अनुसार चलने से समय, पैसा व बहुत कुछ गंवा रहे है। इसी कारण से हम स्वयं से, परिवार से,समाज से,व धर्म से दूरियां बढ़ाते जा रहें है। अतः हमें स्वयं को व्यवहारिक व संस्कारवान बनाना आवश्यक है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 26 नवंबर 2022

हमारे पतन का मुख्य कारण

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 हमारे पतन का मुख्य कारण ✍️🐒*

*यह वर्तमान की कड़वी सत्यता है लेकिन आज की सच्ची सच्चाई है...*
  
  *👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-भव्य महान आत्माओं आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के आत्मकल्याण के संस्कार तो पड़ गए जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।जी हां जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने कीमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें। आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*
  
हैदराबाद की एक पाठशाला में एक मित्र प्रधानाध्यापक हैं। उनके घर में दूध देने वाला कृष्णा एक दिन अचानक 'भागा भागा आया और उनके पैरों में गिर गया। बोला कि उसकी लड़की ने घर से भागकर एक मुसलमान लड़के से शादी कर ली है, और उसके परिवार के साथ ही रहने लगी है। उनसे प्रार्थना की कि मास्टरजी आप ही कुछ कीजिए, कृपया हमें इस बर्बादी से बचा लिजिये।

मेरे मित्र उनके एक जानकार मुसलमान व्यक्ति को साथ लेकर लड़की से बात करने लड़के के घर गए, लड़की उस मुसलमान परिवार के घर में थी। लड़की को देखकर मेरा मित्र आश्चर्यचकित रह गया, वह संपूर्णतः मुसलमान लड़की की वेशभूषा में थी। मित्र ने पूछा, बेटी तुमने ऐसा क्यों किया, तुम्हारे मां बाप बहुत परेशान हैं। 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

लड़की ने कहा कि वह उस मुसलमान लड़के के साथ पिछले एक साल से प्यार कर रही थी। इस दरमियान उस लड़के ने उसे इस्लाम की सारी आयत समझाया, सिखाया, अल्लाह को करामाती बताया, उसकी मां ने यानी अब उस लड़की की सास ने उसे कुरान सिखाया, घर में नमाज  करना सिखाया, अपने खाने पीने का रिवाज सिखाया, इस्लाम के लिए जान लेने और एक दूसरे के लिए जान तक कुर्बान करने की जज़्बा सिखाया।

वह बोली कि मेरे जन्म से 23 वर्ष में मेरे माता पिता ने मुझे कभी भी वेद, पुराण, गीता, रामायण, महाभारत, भगवान की प्रार्थना, नियमानुसार मंदिर जाना या अन्य ऐसा कोई धार्मिक बातें नहीं सिखाई। मैने तो इस लड़के के साथ आने के बाद ही जाना कि धर्म क्या है और अल्लाह की सच्ची इबादत, उसकी रहमत पाना सीखी! 

पापा को तो बस पैसे कमाने से फुरसत ही नही थी, उन्हें पूजा करते मैंनें कभी देखा ही नहीं, मां अपने साड़ी ब्लाउज के मैचिंग, टेलर के चक्कर काटने, मेकअप वगैरा में ही खुद भी और मुझे भी व्यस्त रखती थी। पिताजी और मां घर में अक्सर झगड़ते रहते थे, खास कर जब दादा-दादी आते तो मां घर में युद्ध छेड़ देती। 

मिजुलकर सम्मान से एक परिवार की तरह कभी शांति पूर्वक खुशी-खुशी रहते देखा नहीं, कभी ऐसे अच्छे अनुभव नहीं मिले। 
लेकिन अभावों के बावजूद अब यहां मुझे वो सब कुछ देखने को मिला और इसलिए इनके यहां आने पर मैं खुश हूं, अब बताइए, क्या मैं गलत हूँ ?

लड़की की सारी बात सही है। यह सब सुनकर मित्र कुछ नही कह सका और वापस लौट आया, कृष्ण से बस यह कहां कि जैसा बोएंगे, वैसा ही पाऐंगे।

अफसोस की बात यह है कि आज 80% भारतवासियों के परिवारों में धर्म की व व्यवहारिक शिक्षा नहीं होती है। माता पिता अपने आप में व्यस्त हैं,  कपड़ों के सिलेक्शन, मैचिंग में लगे हैं। अपने बच्चों को पढ़ाई लिखाई के अलावा धर्म, संस्कृति, परमपराएं, आचार-व्यवहार भी सिखाएं केवल सुख भोगना नहीं! रीति-रिवाज, शिष्टाचार बचपन से ही सिखाएं। आप बच्चों के आदर्श बनें। आज हम संस्कार विहीन होने से भारत के पतन का मुख्य कारण हम स्वयं है। जबतक भारत के संविधान में धार्मिकता का अभाव रहेगा तब तक भारतीयों का सम्पूर्ण विकास संभव नहीं है।

धर्मो रक्षति रक्षिताः अर्थात् धर्म उनकी रक्षा करता हैं जो धर्म की रक्षा करते हैं। अगर जीव में सत्यधर्म के संस्कार नहीं होगे तो वह नियम से सबकुछ प्राप्त करने के बाद भी उन चीजों का वह उपयोग नहीं कर सकता। यही हमारी सबसे बड़ी भूल है।

*विशेष - : भव्य आत्माओं, सावधान सचेत रहिए, पांचों इंद्रियों के मोहअंधकार को समझिए।यदि आप अपने बच्चों को , परिवार के अन्य सदस्यों को धार्मिक व व्यवहारिक ज्ञान नहीं सिखाएंगे, तो बाहर वाले उन्हे अपना धर्म सिखाकर आपके वंश को समाप्त कर देंगे। आज जैनियों के लिए आदिनाथ पुराण में गर्भ में जीव के आने से पहले व मरण तक की संस्कार विधि दी गई है। जिस परिवार में इन संस्कारों को विधी पूर्वक पालन किया गया है। उन्हें नरक व तिर्यंच गति का बंध नहीं होता।वे नियम से यही पर स्वर्ग का सुख प्राप्त कर नियम से स्वर्ग का सुख प्राप्त करते है। वर्तमान में यह सब बातों का ज्ञान गूगल बाबा व यूट्यूब पर अपलोड है। अतः जो व्यक्ति विशेष सुखी रहना चाहते है वे स्वयं को संस्कारवान बनाएं।*
*⭐🕉️💯✅जय अहिंसक सत्यधर्म की, जय संस्कारवान भारतीयों की 🚩🇮🇳*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 25 नवंबर 2022

खरगोश से कुछ सीखें

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 खरगोश से कुछ सीखें ✍️🐒*

एक बार की बात है, दो खरगोश थे। एक का नाम वाईजी था और दूसरे का नाम फूली। वाईजी अपने नाम के अनुसार वाइज यानी बुद्धिमान था और फूली अपने नाम के अनुरूप फूलिश यानी बेवकूफ था।
दोनों में गहरी दोस्ती थी। एक दिन उन्हें गाजर खाने का बड़ा मन किया और वे फ़ौरन इनकी खोज में निकल पड़े।

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कुछ दूर चलने पर उन्हें अगल-बगल लगे दो गाजर दिखे. एक गाजर के ऊपर बड़े-बड़े पत्ते लगे थे जबकि दूसरे के पत्ते काफी छोटे थे।

फूली बिना देर किये बड़े पत्तों वाले गाजर के पास दौड़ा और उसे उखाड़ते हुए कहने लगा, “ये वाला मेरा है… ये वाला मेरा है…”

वाईजी उसकी इस हरकत को देख कर मुस्कुराया और बोला, “ठीक है भाई तुम उसे ले लो मैं ये बड़ा वाला ले लेता हूँ?”

और जब उसने गाजर उखाड़ा तो सचमुच वो फूली के गाजर से बड़ा था।

यह देख कर फूली को बड़ा आश्चर्य हुआ, वह बोला, “लेकिन मेरे गाजर के पत्ते तो काफी बड़े थे!”

“तुम गाजर के पत्ते देखकर उसकी साइज़ का अनुमान नहीं लगा सकते!”, वाईजी ने समझाया।

गाजर चट कर दोनों दोस्त आगे बढ़ गए।

थोड़ी दूरी पर उन्हें फिर से दो गाजर दिखाई दिए।

फूली बोला, “जाओ इस बार तुम पहले अपना गाजर चुन लो।

वाईजी बारी-बारी से दोनों गाजरों के पास गया और सावधानी से उन्हें देखने लगा…. उसने उनके पत्ते छुए और कुछ देर सूंघने के बाद बड़े पत्ते वाला गाजर ही चुन लिया।

“ये क्या तुमने इस बार छोटा गाजर क्यों चुन लिया.” फूली बोला।

“मैंने छोटा नहीं बड़ा गाजर ही चुना है!” वाईजी ने जवाब दिया।

और सचमुच इस बार भी वाईजी का ही गाजर बड़ा था।

फूली कुछ नाराज़ होते हुए बोला, “लेकिन तुमने तो कहा था कि जिसके पत्ते बड़े होते हैं वो गाजर छोटा होता है!”

“ना-ना, मैंने तो बस इतना कहा था कि तुम गाजर के पत्ते देखकर उसकी साइज़ का अनुमान नहीं लगा सकते! कोई भी चुनाव करने से पहले सोच-विचार करना ज़रूरी है.” वाईजी बोला।

फूली ने हामी भरी और फिर दोनों ने गाजर के मजे उठाये और आगे बढ़ गए…

तीसरी बार भी उन्हें दो अलग-अलग साइज़ की पत्तियों वाले गाजर दिखे।

फूली कुछ कन्फ्यूज्ड दिख रहा था, उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। तभी वाईजी ने उससे कहा कि पहले वो अपना गाजर चुन सकता है।

बेचारा फूली धीरे-धीरे आगे बढ़ता है और गाजरों का निरिक्षण करने का दिखावा करता है, उसे समझ नहीं आता कि कौन सा गाजर चुने। वह मायूस हो वाईजी की ओर देखता है।

वाईजी मुस्कुराता है और कूद कर गाजरों के पास पहुँच जाता है। वह उन्हें सावधानी से देखता है और फिर एक गाजर उखाड़ लेता है।

फूली चुप-चाप दूसरे गाजर की ओर बढ़ने लगता है, तभी वाईजी उसे रोकते हुए कहता है, “नहीं, फूली, ये वाला गाजर तुम्हारा है।”

“लेकिन इसे तो तुमने चुना है और ये ज़रूर दूसरे वाले से बड़ा होगा। मुझे नहीं पता तुम ये कैसे करते हो, शायद तुम मुझसे अधिक बुद्धिमान हो।”  फूली उदासी भरे शब्दों में बोला।

इस पर वाईजी ने उसका हाथ थामते हुए कहा-

फूली, उस बुद्धी का क्या लाभ जिससे मैं अपने दोस्त की मदद ना कर सकूँ…  तुम मेरे दोस्त हो और मैं चाहता हूँ कि तुम ये गाजर खाओ। एक बुद्धिमान अनुभवी खरगोश जिसका पेट भरा हो पर उसका कोई दोस्त ना हो…क्या सचमुच बुद्धिमान कहलायेगा?

“सही कहा!”, फूली ने उसे गले लगाते हुए कहा।

और फिर दोनों दोस्त गाजर खाते-खाते अपने घरों को लौट गए।

*👪🌞⏰🐎✍️विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, ईश्वर ने हमें जो भी कला दी हैं उनका सही इस्तेमाल इसी में है कि वे औरों की मदद में काम आयें। सिर्फ अपने फायदे के लिए काम करने वाले लोगों के पास पैसा हो सकता है…प्रसन्नता नहीं! इसलिए अगर कोई ऐसा है जिसके जीवन में  आपकी मदद  से बेहतर बन सकती है तो उसकी मदद ज़रूर करिए। हमें अपने मन, वचन,काय व धन की वृद्धि के लिए इन चारों का उपयोग अपने अनुभव से स्व व पर के कल्याण में करना चाहिए।जो व्यक्ति विशेष स्व के ही कल्याण में चारों का उपयोग करता है उसका कभी भी आत्मकल्याण नहीं हो सकता। यही प्रकृति का अटूट नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 24 नवंबर 2022

कुछ नहीं का महत्व

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 कुछ नहीं का महत्व ✍️🐒*

तेनालीराम राजा कृष्ण देव राय के निकट होने के कारण बहुत से लोग उनसे जलते थे। उनमे से एक था रघु नाम का ईर्ष्यालु फल व्यापारी। उसने एक बार तेनालीराम को षड्यंत्र में फसाने की युक्ति बनाई। उसने तेनालीराम को फल खरीदने के लिए बुलाया। जब तेनालीराम ने उनका दाम पूछा तो रघु मुस्कुराते हुए बोला,

“आपके लिए तो इनका दाम ‘कुछ नहीं’ है।”

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यह बात सुन कर तेनालीराम ने कुछ फल खाए और बाकी थैले में भर आगे बढ़ने लगे। तभी रघु ने उन्हें रोका और कहा कि मेरे फल के दाम तो देते जाओ।

तेनालीराम रघु के इस सवाल से हैरान हुए, वह बोले कि अभी तो तुमने कहा की फल के दाम ‘कुछ नहीं’ है। तो अब क्यों अपनी बात से पलट रहे हो। तब रघु बोला की, मेरे फल मुफ्त नहीं है। मैंने साफ-साफ बताया था की मेरे फलों का दाम कुछ नहीं है। अब सीधी तरह मुझे ‘कुछ नहीं’ दे दो, वरना मै राजा कृष्ण देव राय के पास फरियाद ले कर जाऊंगा और तुम्हें कठोर दंड दिलाऊँगा।

तेनालीराम सिर पर हाथ फेरने लगे। और यह सोचते-सोचते वहाँ से अपने घर चले गए।

उनके मन में एक ही सवाल चल रहा था कि इस पागल फल वाले के अजीब षड्यंत्र का तोड़ कैसे खोजूँ। इसे कुछ नहीं कहाँ से लाकर दूँ।

अगले ही दिन फल वाला राजा कृष्ण देव राय के दरबार में आ गया और फरियाद करने लगा। वह बोला की तेनाली ने मेरे फलों का दाम ‘कुछ नहीं’ मुझे नहीं दिया है।

राजा कृष्ण देव राय ने तुरंत तेनालीराम को हाज़िर किया और उससे सफाई मांगी। तेनालीराम पहले से तैयार थे उन्होंने एक रत्न-जड़ित संदूक लाकर रघु फल वाले के सामने रख दिया और कहा ये लो तुम्हारे फलों का दाम।

उसे देखते ही रघु की आँखें चौंधिया, उसने अनुमान लगाया कि इस संदूक में बहुमूल्य हीरे-जवाहरात होंगे… वह रातों-रात अमीर बनने के ख्वाब देखने लगा। और इन्ही ख़यालों में खोये-खोये उसने संदूक खोला।

संदूक खोलते ही मानो उसका खाब टूट गया, वह जोर से चीखा, ” ये क्या? इसमें तो ‘कुछ नहीं’ है!”

तब तेनालीराम बोले, “बिलकुल सही, अब तुम इसमें से अपना ‘कुछ नहीं’ निकाल लो और यहाँ से चलते बनो।”

वहां मौजूद महाराज और सभी दरबारी ठहाका लगा कर हंसने लगे। और रघु को अपना सा मुंह लेकर वापस जाना पड़ा। एक बार फिर तेनालीराम ने अपने बुद्धि चातुर्य से सभी का मन जीत लिया था।

*🕉️⏰🎪🔔👪विशेष : -भव्य‌‌‌ आत्माओं,हमेशा कोई भी कार्य करे उसे अपने विवेकानुसार करें ताकि आप कभी भी किसी मुसीबत में ना फसें। आज वर्तमान में हम भी कुछ नहीं के चक्कर में अनावश्यक कार्यो के द्वारा अपना कीमती समय , पैसा , जीवन के अमूल्य क्षण आदि बहुत कुछ गंवा रहे है। इस अज्ञानता के कारण से आज हम अपनी संस्कृति को समाप्त कर रहे है। अतः हम सभी को अपने जीवन में अपने लक्ष्य को ध्यान रखकर अपनी दैनंदिनी बनाना चाहिए।हम स्वयं सुधरेंगे तो परिवार , समाज, राष्ट्र के सुधार का मार्ग प्रशस्त होगा।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
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बुधवार, 23 नवंबर 2022

सकारात्मक कोशिश

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सकारात्मक कोशिश ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. मार्गशीर्ष शुक्ल एकम कल 24 नवंबर  2022     गुरुवार  को नवें तीर्थंकर सभी को मोक्ष मार्ग के पथ प्रदर्शक 1008 श्री पुष्पदंत  भगवान जी का जन्म व  तप कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

हर साल सर्दी हो या  गर्मी  छुट्टियों में नितिन अपने दोस्तों के साथ किसी पहाड़ी इलाके में पर्वतारोहण के लिए जाता था। इस साल भी वे इसी मकसद से ऋषिकेश पहुंचे।

गाइड उन्हें एक फेमस माउंटेनियरिंग स्पॉट पर ले गया। नितिन और उसके दोस्तों ने सोचा नहीं था कि यहाँ इतनी भीड़ होगी। हर तरफ लोग ही लोग नज़र आ रहे थे।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

एक दोस्त बोला, ” यार यहाँ तो शहर जैसी भीड़ है…यहाँ चढ़ाई करने में क्या मजा??”

“क्या कर सकते हैं… अब आ ही गए हैं तो अफ़सोस करने से क्या फायदा…चलो इसी का मजा उठाते हैं…”, नितिन ने जवाब दिया।

सभी दोस्त पर्वतारोहण करने लगे और कुछ ही समय में पहाड़ी की चोटी पर पहुँच गए।

वहां पर पहले से ही लोगों का तांता लगा हुआ था।दोस्तों ने सोचा चलो अब इसी भीड़ में दो-चार घंटे कैम्पिंग करते हैं  और फिर  वापस चलते हैं। तभी नितिन ने सामने की एक चोटी की तरफ इशारा करते हुए कहा, “रुको-रुको… ज़रा उस चोटी  की  तरफ भी तो देखो… वहां तो बस मुट्ठी भर लोग ही दिख रहे हैं… कितना मजा आ रहा होगा… क्यों न हम वहां चलें।

“वहां!”, एक दोस्त बोला, “अरे वहां जाना सबके बस की बात नहीं है… उस पहाड़ी के बारे में मैंने सुना है, वहां का रास्ता बड़ा मुश्किल है और कुछ लकी लोग ही वहां तक पहुँच पाते हैं.”

बगल में खड़े कुछ लोगों ने भी नितिन का मजाक उड़ाते हुए कहा,” भाई अगर वहां जाना इतना ही आसान होता तो हम सब यहाँ झक नहीं मार रहे होते!”

लेकिन नितिन ने किसी की बात नहीं सुनी और अकेला ही चोटी की तरफ बढ़ चला और तीन घंटे बाद वह उस पहाड़ी के शिखर पर था।

वहां पहुँचने पर पहले से मौजूद लोगों ने उसका स्वागत किया और उसे प्रोत्साहित किया।

नितिन भी वहां पहुँच कर बहुत खुश था अब वह शांति से प्रकृति की ख़ूबसूरती का आनंद ले सकता था।

जाते-जाते नितिन ने बाकी लोगों से पूछा,”एक बात बताइये… यहाँ पहुंचना इतना मुश्किल तो नहीं था, मेरे विचार से तो जो उस भीड़-भाड़ वाली चोटी तक पहुँच सकता है वह अगर थोड़ी सी और मेहनत करे तो इस चोटी को भी छू सकता है…फिर ऐसा क्यों है कि वहां सैकड़ों लोगों की भीड़ है और यहाँ बस मुट्ठी भर लोग?”

वहां मौजूद एक बुजुर्ग  बोला, “क्योंकि ज्यादातर लोग बस उसी में खुश हो जाते हैं जो उन्हें आसानी से मिल जाता…वे सोचते ही नहीं कि उनके अन्दर इससे कहीं ज्यादा पाने का इरादा है… और जो थोड़ा पाकर खुश नहीं भी होते वे कुछ अधिक पाने के लिए खतरा नहीं उठाना चाहते… वे डरते हैं कि कहीं ज्यादा के चक्कर में जो हाथ में है वो भी ना चला जाए… जबकि हकीकत ये है कि अगली चोटी या अगली मंजिल पाने के लिए बस जरा सी कोशिश की ज़रुरत पड़ती है! पर साहस ना दिखा पाने के कारण अधिकतर लोग पूरी लाइफ बस भीड़ का हिस्सा ही बन कर रह जाते हैं… और साहस दिखाने वाली उन मुट्ठी भर लोगों को लकी बता कर खुद को तसल्ली देते रहते हैं।

*🕉️⏰👪🔔🧠विशेष : - भव्य‌‌‌ आत्माओं, अगर आप आज तक वो अगला साहसी कदम उठाने से खुद को रोके हुए हैं तो ऐसा मत करिए क्योंकि-अगली चोटी या अगली मंजिल पाने के लिए बस जरा से और कोशिश  की ज़रुरत पड़ती है!खुद को उस कार्य को करने से रोकिये मत … थोडा सा साहस… थोड़ी सी हिम्मत आपको भीड़ से निकाल कर उन मुट्ठी भर लोगों में शामिल कर सकती है जिन्हें दुनिया भाग्यशाली कहती है। अतः हमें अपने लक्ष्य के प्रति संकल्प सहित योजना बनाकर उसपर चलना चाहिए।*

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*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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मंगलवार, 22 नवंबर 2022

अंगूठी चोर

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒अंगूठी चोर ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. मार्गशीर्ष शुक्ल एकम 24 नवंबर  2022     गुरुवार  को नवें तीर्थंकर पुष्पदंत सभी के मोक्ष प्रदाता 1008 श्री पुष्पदंत  भगवान जी का जन्म व  तप कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

▶️महाराजा कृष्ण देव राय एक कीमती रत्न जड़ित अंगूठी पहना करते थे। जब भी वह दरबार में उपस्थित होते तो अक्सर उनकी नज़र अपनी सुंदर अंगूठी पर जाकर टिक जाती थी। राजमहल में आने वाले मेहमानों और मंत्रीगणों से भी वह बार-बार अपनी उस अंगूठी की चर्चा किया करते थे।

एक बार राजा कृष्ण देव राय उदास हो कर अपने सिंहासन पर बैठे थे। तभी तेनालीराम वहाँ आ पहुंचे। 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

उन्होने राजा की उदासी का कारण पूछा। तब राजा ने बताया कि उनकी पसंदीदा अंगूठी खो गयी है, और उन्हे पक्का शक है कि उसे उनके बारह अंग रक्षकों में से किसी एक ने चुराया है।

चूँकि राजा कृष्ण देव राय का सुरक्षा घेरा इतना चुस्त होता था की कोई चोर-उचक्का या सामान्य व्यक्ति उनके नज़दीक नहीं जा सकता था।
तेनालीराम ने तुरंत महाराज से कहा कि-

मैं अंगूठी चोर को बहुत जल्द पकड़ लूँगा। 

यह बात सुन कर राजा कृष्ण देव राय बहुत प्रसन्न हुए। उन्होने तुरंत अपने अंगरक्षकों को बुलवा लिया।

तेनालीराम बोले, “राजा की अंगूठी आप बारह अंगरक्षकों में से किसी एक ने चुराया है। लेकिन मैं इसका पता बड़ी आसानी से लगा लूँगा। जो सच्चा है उसे डरने की कोई ज़रुरत नहीं और जो चोर है वह कठोर दण्ड भोगने के लिए तैयार हो जाए।”

तेनालीराम ने बोलना जारी रखा, “आप सब मेरे साथ आइये हम सबको काली माँ के मंदिर जाना है।”

राजा बोले, ” ये क्या कर रहे हो तेनालीराम, हमें चोर का पता लगाना है मंदिर के दर्शन नहीं कराने हैं!”

“महाराज, आप धैर्य रखिये जल्द ही चोर का पता चल जाएगा।”, तेनालीराम ने राजा को सब्र रखने को कहा।

मंदिर पहुँच कर तेनालीराम पुजारी के पास गए और उन्हें कुछ निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने अंगरक्षकों से कहा, ” आप सबको बारी-बारी से  मंदिर में जा कर माँ काली की मूर्ति के पैर छूने हैं और फ़ौरन बाहर निकल आना है।

 ऐसा करने से माँ काली आज रात स्वप्न में मुझे उस चोर का नाम बता देंगी।

अब सारे अंगरक्षक बारी-बारी से मंदिर में जा कर माता के पैर छूने लगे। जैसे ही कोई अंगरक्षक पैर छू कर बाहर निकलता तेनालीराम उसका हाथ सूंघते और एक कतार में खड़ा कर देते। कुछ ही देर में सभी अंगरक्षक एक कतार में खड़े हो गए।

महाराज बोले, “चोर का पता तो कल सुबह लगेगा, तब तक इनका क्या किया जाए?”

नहीं महाराज, चोर का पता तो लग चुका है। सातवें स्थान पर खड़ा अंगरक्षक ही चोर है।

ऐसा सुनते ही वह अंगरक्षक भागने लगा, पर वहां मौजूद सिपाहियों ने उसे धर दबोचा, और कारागार में डाल दिया।

राजा और बाकी सभी लोग आशार्यचाकित थे कि तेनालीराम ने बिना स्वप्न देखे कैसे पता कर लिया कि चोर वही है।

तेनालीराम सबकी जिज्ञासा शांत करते हुए बोले,”मैंने पुजारी जी से कहकर काली माँ के पैरों पर तेज सुगन्धित इत्र छिड़कवा दिया था। जिस कारण जिसने भी माँ के पैर छुए उसके हाथ में वही सुगन्ध आ गयी। लेकिन जब मैंने सातवें अंगरक्षक के हाथ सूंघे  तो उनमे कोई खुशबु नहीं थी… उसने पकड़े जाने के डर से माँ काली की मूर्ति के पैर छूए ही नहीं। इसलिए यह साबित हो गया की उसी के मन में पाप था और वही चोर है।”

राजा कृष्ण देव राय एक बार फिर तेनालीराम की बुद्धिमत्ता के कायल हो गए। और उन्हें स्वर्ण मुद्राओं से सम्मानित किया।

*🌞⏰💪🔑👪विशेष : -भव्य‌‌‌ आत्माओं , अगर हम कही पर भी कार्य कर रहे है तो वो हमारी कर्मभूमि है,उसी के माध्यम से हमारा जीवन यापन होता है,लेकिन अगर उस जगह पर या कही और हम चोरी करेंगे तो उसका परिणाम बहुत बुरा होता है,इसलिए लालच में आकर कभी भी बुरा कार्य नही करना चाहिए,वरना आप के साथ साथ लोग आपके परिवार के संस्कारो पर भी अंगुलिया उठाने लग जाते है। अतः हमें ईमानदारी पूर्वक ही सभी के साथ व्यवहार करना चाहिए। यही हमारा पहला कर्तव्य है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 21 नवंबर 2022

सच्चा मित्र कौन

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सच्चा मित्र ✍️🐒*

*⏰🔔कल चौदस का महापर्व है  🔔⏰*
एक बेटे के अनेक मित्र थे जिसका उसे बहुत घमंड था। पिता का एक ही मित्र था लेकिन था सच्चा ।

एक दिन पिता ने बेटे को बोला कि तेरे बहुत सारे दोस्त है उनमें से आज रात तेरे सबसे अच्छे दोस्त की परीक्षा लेते है।

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 बेटा सहर्ष तैयार हो गया। रात को 2 बजे दोनों बेटे के सबसे घनिष्ठ मित्र के घर पहुंचे, बेटे ने दरवाजा खटखटाया, दरवाजा नहीं खुला,बार-बार दरवाजा ठोकने के बाद अंदर से बेटे का दोस्त उसकी माताजी को कह रहा था माँ कह दे मैं घर पर नहीं हूँ।यह सुनकर बेटा उदास हो गया, अतः निराश होकर दोनों लौट आए।

फिर पिता ने कहा कि बेटे आज तुझे मेरे दोस्त से मिलवाता हूँ। दोनों पिता के दोस्त के घर पहुंचे। पिता ने अपने मित्र को आवाज लगाई। 

उधर से जवाब आया कि ठहरना मित्र, दो मिनट में दरवाजा खोलता हूँ। जब दरवाजा खुला तो पिता के दोस्त के एक हाथ में रुपये की थैली और दूसरे हाथ में तलवार थी। पिता ने पूछा, यह क्या है मित्र। 

तब मित्र बोला....अगर मेरे मित्र ने दो बजे रात्रि को मेरा दरवाजा खटखटाया है, तो जरूर वह मुसीबत में होगा और अक्सर मुसीबत दो प्रकार की होती है,या तो रुपये पैसे की या किसी से विवाद हो गया हो। अगर तुम्हें रुपये की आवश्यकता हो तो ये रुपये की थैली ले जाओ और किसी से झगड़ा हो गया हो तो ये तलवार लेकर मैं तुम्हारें साथ चलता हूँ। तब पिता की आँखे भर आई और उन्होंने अपने मित्र से कहा कि, मित्र मुझे किसी चीज की जरूरत नहीं, मैं तो बस मेरे बेटे को मित्रता की सच्चाई समझा रहा था।

ज़िन्दगी में दो मित्र ज़रूर होने चाहिए,
एक कृष्ण जो ना लड़े फिर भी जीत पक्की कर दे
और दूसरा कर्ण जो हार सामने हो फिर भी साथ ना छोडे।

*विशेष : - भव्य‌‌‌ आत्माओं, हमारे जीवन में मित्र होना आवश्यक है।अगर आपका कोई सहयोगी मित्र नहीं है तो आप किसी भी व्यक्ति विशेष (रत्नत्रय में) के सहयोगी मित्र बन कर अपने अनेक सहयोगी मित्र बना सकते हो। आज प्रत्येक व्यक्ति दुसरो के रत्नत्रय में सहयोगी बनकर अपने रत्नत्रय को निर्विघ्न पालन कर सकता है। यही प्रकृति का अटूट नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 20 नवंबर 2022

इंजीनियर बेटा

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 इंजीनियर बेटा ✍️🐒*

पत्नी के अंतिम संस्कार व तेरहवीं के बाद रिटायर्ड पोस्टमैन मनोहर गाँव छोड़कर मुम्बई में अपने पुत्र सुनील के बड़े से मकान में आये हुए हैं। सुनील बहुत मनुहार के बाद यहाँ ला पाया है। यद्यपि वह पहले भी कई बार प्रयास कर चुका था किंतु अम्मा ही बाबूजी को यह कह कर रोक देती थी कि 'कहाँ वहाँ बेटे बहू की ज़िंदगी में दखल देने चलेंगे। यहीं ठीक है। सारी जिंदगी यहीं गुजरी है और जो थोड़ी सी बची है उसे भी यहीं रह कर काट लेंगे। ठीक है न!' 

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बस बाबूजी की इच्छा मर जाती। पर इस बार कोई साक्षात अवरोध नहीं था और पत्नी की स्मृतियों में बेटे के स्नेह से अधिक ताकत नहीं थी इसलिए मनोहर बम्बई आ ही गए हैं।

सुनील एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कम्पनी में इंजीनियर है। उसने आलीशान घर व गाड़ी ले रखी है।

घर में घुसते ही मनोहर ठिठक कर रुक गए। गुदगुदी मैट पर पैर रखे ही नहीं जा रहे हैं उनके। दरवाजे पर उन्हें रुका देख कर सुनील बोला - "आइये बाबूजी, अंदर आइये।"

- "बेटा, मेरे गन्दे पैरों से यह कालीन गन्दी तो नहीं हो जाएगी।"

- "बाबूजी, आप उसकी चिंता न करें। आइये यहाँ सोफे पर बैठ जाइए।"
सहमें हुए कदमों में चलते हुए मनोहर जैसे ही सोफे पर बैठे तो उनकी चीख निकल गयी - अरे रे! मर गया रे!

उनके बैठते ही नरम औऱ गुदगुदा सोफा की गद्दी अन्दर तक धँस गयी थी। इससे मनोहर चिहुँक कर चीख पड़े थे।

चाय पीने के बाद सुनील ने मनोहर से कहा - "बाबूजी, आइये आपको घर दिखा दूँ अपना।"

- "जरूर बेटा, चलो।"
- "बाबू जी, यह है लॉबी जहाँ हम लोग चाय पी रहे थे। यहाँ पर कोई भी अतिथि आता है तो चाय नाश्ता और गपशप होती है। यह डाइनिंग हाल है। यहाँ पर हम लोग खाना खाते हैं। बाबूजी, यह रसोई है और इसी से जुड़ा हुआ यह भण्डार घर है। यहाँ रसोई से सम्बंधित सामग्री रखी जाती हैं। यह बच्चों का कमरा है।"
- "तो बच्चे क्या अपने माँबाप के साथ नहीं रहते?"

- बाबूजी, यह शहर है और शहरों में मुंबई है। यहाँ बच्चे को जन्म से ही अकेले सोने की आदत डालनी पड़ती है। माँ तो बस समय समय पर उसे दूध पिला देती है और उसके शेष कार्य आया आकर कर जाती है।"
थोड़ा ठहर कर सुनील में आगे कहा,"बाबूजी यह आपकी बहू और मेरे सोने का कमरा है। और इस कोने में यह गेस्ट रूम है। कोई अतिथि आ जाय तो यहीं ठहरता है।

 यह छोटा सा कमरा पेट्स के लिए है। कभी कोई कुत्ता आदि पाला गया तो उसके लिए व्यवस्था कर रखी है।"
सीढियां चढ़ कर ऊपर पहुँचे सुनील ने लम्बी चौड़ी छत के एक कोने में बने एक टीन की छत वाले कमरे को खोल कर दिखाते हुए कहा - "बाबूजी यह है घर का कबाड़खाना। घर की सब टूटी फूटी और बेकार वस्तुएं यहीं पर एकत्र कर दी जाती हैं।
 और दीवाली- होली पर इसकी सफाई कर दी जाती है। ऊपर ही यह एक बाथरूम और टॉइलट भी बना हुआ है।"

मनोहर ने देखा कि इसी कबाड़ख़ाने के अंदर एक फोल्डिंग चारपाई पर बिस्तर लगा हुआ है और उसी पर उनका झोला रखा हुआ है। मनोहर ने पलट कर सुनील की तरफ देखा किन्तु वह नीचे जा चुका था। 

मनोहर चारपाई में बैठ कर सोचने लगे कि 'कैसा यह मकान है जहाँ भविष्य में पाले जाने वाले पशु के लिए कमरे का विधान कर लिया जाता है किंतु बूढ़े माँबाप के लिए नहीं। इनके लिए तो कबाड़ का कमरा ही उचित आवास मान लिया गया है। नहीं.. अभी मैं कबाड़ नहीं हुआ हूँ। सुनील की माँ की सोच बिल्कुल सही था। मुझे यहाँ नहीं आना चाहिए था।'

अगली सुबह जब सुनील मनोहर के लिए चाय लेकर ऊपर गया तो कक्ष को खाली पाया। बाबू जी का झोला भी नहीं था वहाँ। उसने टॉयलेट व बाथरूम भी देख लिये किन्तु बाबूजी वहाँ भी नहीं थे। वह झट से उतर कर नीचे आया तो पाया कि मेन गेट खुला हुआ है। उधर मनोहर टिकिट लेकर गाँव वापसी के लिए सबेरे वाली गाड़ी में बैठ चुके थे। उन्होंने कुर्ते की जेब में हाथ डाल कर देखा कि उनके 'अपने घर' की चाभी मौजूद थी। उन्होंने उसे कस कर मुट्ठी में पकड़ लिया। चलती हुई गाड़ीमें उनके चेहरे को छू रही हवा उनके इस निर्णय को और मजबूत बना रही थी।

*⏰👪🧠🙏🔐विशेष: -भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हमें जो भी खुशहाली प्राप्त हुई है वह हमारे माता पिता का आशीर्वाद ही है। जबकि हमारा कर्तव्य है कि उन्होंने हमें सम विषम परिस्थितियों में पालन कर जीवन जीने योग्य बनाया। आज हमारे पास सबकुछ होने के बाद हम उन्हें वृध्दाश्रम या घर के एक कोने में रखकर उनके साथ लावारिस कुत्तों जैसा व्यवहार करते है। यह कहां तक उचित है इस पर आप विचार करें।कल आप भी बूढ़े होंगे और आपके साथ आपके कर्म क्या व्यवहार करेंगे।इस पर चिंतन अवश्य ही करें।*
  
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
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शनिवार, 19 नवंबर 2022

सच्ची मेहनत का फल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒सच्ची मेहनत का फल✍️🐒*

एक नगर में प्रतिष्ठित व्यापारी रहते थे जिन्हें बहुत समय बाद एक पुत्र की प्राप्ति हुई थी।उसका नाम चंद्रकांत रखा गया। चंद्रकांत घर में सभी का दुलारा था।

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-भव्य महान आत्माओं आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के आत्मकल्याण के संस्कार तो पड़ गए जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।जी हां जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने कीमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें। आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे। यह कहानी आप लोगों के प्राप्त विचारों के अनुसार लिखने का प्रयास किया गया है।*

 अति कठिनाई एवं लंबे समय इंतजार के बाद संतान का सुख मिलने पर, घर के प्रत्येक व्यक्ति के मन में व्यापारी के पुत्र चंद्रकांत के प्रति विशेष लाड़ प्यार था जिसने चंद्रकांत को बहुत बिगाड़ दिया था। घर में किसी भी बात का अभाव नहीं था। चंद्रकांत की मांग से पहले ही उसकी सभी इच्छाये पूरी कर दी जाती थी। शायद इसी के कारण चंद्रकांत को ना सुनने की आदत नहीं थी और ना ही मेहनत के महत्व का आभास था । चंद्रकांत ने जीवन में कभी अभाव नहीं देखा था इसलिए उसका नजरिया जीवन के प्रति बहुत अलग था और वहीं व्यापारी ने कड़ी मेहनत से अपना व्यापार बनाया था।

ढलती उम्र के साथ व्यापारी को अपने कारोबार के प्रति चिंता होने लगी थी। व्यापारी को चंद्रकांत के व्यवहार से प्रत्यक्ष था कि उसके पुत्र को मेहनत के फल का महत्व नहीं पता। उसे आभास हो चूका था कि उसके लाड प्यार ने चंद्रकांत को जीवन की वास्तविक्ता और जीवन में मेहनत के महत्व से बहुत दूर कर दिया हैं
 गहन चिंतन के बाद व्यापारी ने निश्चय किया कि वो चन्द्रकांत को मेहनत के फल का महत्व, स्वयं सिखायेगा। चाहे उसके लिए उसे कठोर ही क्यूँ न बनना पड़े ।

व्यापारी ने चंद्रकांत को अपने पास बुलाया और बहुत ही तीखे स्वर में उससे बात की। उसने कहा कि तुम्हारा मेरे परिवार में कोई अस्तित्व नही हैं, तुमने मेरे कारोबार में कोई योगदान नहीं दिया और इसलिए मैं चाहता हूँ कि तुम अपनी मेहनत से धन कमाओं, तब ही तुम्हे तुम्हारे धन के मुताबिक दो वक्त का खाना दिया जायेगा। यह सुनकर चन्द्रकांत को ज्यादा कोई फर्क नहीं पड़ा, उसने उसे क्षण भर का गुस्सा समझ लिया लेकिन व्यापारी ने भी ठान रखी थी। उसने घर के सभी सदस्यों को आदेश दिया कि कोई चन्द्रकांत की मदद नहीं करेगा और नाही उसे बिना धन के भोजन दिया जायेगा।

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चन्द्रकांत से सभी बहुत प्यार करते थे जिसका उसने बहुत फायदा उठाया। वो रोज किसी न किसी के पास जाकर धन मांग लाता और अपने पिता को दे देता
 और व्यापारी उसे उन पैसो को कुँए में फेकने का बोलता जिसे चंद्रकांत बिना किसी अड़चन के फेक आता और उसे रोज भोजन मिल जाता। ऐसा कई दिनों तक चलता रहा लेकिन अब घर के लोगो को रोज-रोज धन देना भारी पड़ने लगा। सभी उससे अपनी कन्नी काटने लगे, जिस कारण चंद्रकांत को मिलने वाला धन कम होने लगा और उस धन के हिसाब से उसका भोजन भी कम होने लगा।

एक दिन चन्द्रकांत को किसी ने धन नहीं दिया और उसे अपनी भूख को शांत करने के लिए गाँव में जाकर कार्य करना पड़ा। उस दिन वो बहुत देर से थका हारा व्यापारी के पास पहुँचा और धन देकर भोजन माँगा। रोज के अनुसार व्यापारी ने उसे वो धन कुँए में फेंकने का आदेश दिया जिसे इस बार चंद्रकांत सहजता से स्वीकार नहीं कर पाया और उसने पलट कर जवाब दिया – पिताजी मैं इतनी मेहनत करके, पसीना बहाकर इस धन को लाया और आपने मुझे एक क्षण में इसे कुएं में फेंकने कह दिया। यह सुनकर व्यापारी समझ गया कि आज चंद्रकांत को मेहनत के फल का महत्व समझ आ गया हैं। व्यापारी भलीभांति जानता था कि उसके परिवार वाले चन्द्रकांत की मदद कर रहे हैं, तब ही चंद्रकांत इतनी आसानी से धन कुएं में डाल आता था लेकिन उसे पता था, एक न एक दिन सभी परिवारजन चन्द्रकांत से कन्नी काट लेंगे,उस दिन चन्द्रकांत के पास कोई विकल्प शेष नहीं होगा। व्यापारी ने चन्द्रकांत को गले लगा लिया और अपना सारा कारोबार उसे सोंप दिया।

आज के समय में उच्च वर्ग के परिवारों की संतानों को मेहनत के फल का महत्व पता नहीं होता और ऐसे में यह दायित्व उनके माता पिता का होता हैं कि वो अपने बच्चो को जीवन की सच्चाई से अवगत कराये। लक्ष्मी उसी घर में आती हैं जहाँ उसका सम्मान होता हैं ।

सच्ची मेहनत ही एक ऐसा हथियार हैं जो मनुष्य को किसी भी परिस्थिती से बाहर ला सकता हैं व्यापारी के पास इतना धन तो था कि चंद्रकांत और उसकी आने वाली पीढ़ी बिना किसी मेहनत के जीवन आसानी से निकाल लेते लेकिन अगर आज व्यापारी अपने पुत्र को मेहनत का महत्व नहीं बताता तो एक न एक दिन व्यापारी की आने वाली पीढ़ी व्यापारी को कोसती।

*🎪🕉️⏰🔐🔔विशेष : -भव्य‌‌‌ आत्माओं, आप सभी अपने बच्चों या परिवार के सदस्यों की जीवन में खुशहाली चाहते है तो जो भी सदस्य बिना अपने कर्तव्य के जीवन व्यतीत कर रहा है। उसके साथ घर के सभी सदस्यों को थोड़ा कठोर होकर उसे कर्तव्य परायण बनाने में सहयोगी बनना होगा। अगर आज आप ऐसा कठोर फैसला नहीं लेते हो तो वह सदस्य नियम से दुर्गुणों को ग्रहण कर स्वंय के साथ परिवार के नाम को भी कलंकित करेगा। अतः आप आज ही जाग जाओ ताकि आपके कारण घर के किसी सदस्य का जीवन सार्थक हो।*

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शुक्रवार, 18 नवंबर 2022

जीवन की यादें

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🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 जीवन की यादें ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी 19 नवंबर  2022    शनिवार  को अंतिम तीर्थंकर वर्तमान में शासन नायक सभी के विघ्न हरता 1008 श्री  महावीर भगवानजी का  तप कल्याणक  महोत्सव हैं। नोट: -यह तिथी जयपुर पंचांग जैन दर्शन के अनुसार ली गई है।आप सभी अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि निर्धारित करें।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

वो ट्रेन के रिजर्वेशन के डब्बे में बाथरूम के तरफ वाली एक्स्ट्रा सीट पर बैठी थी,……

उसके चेहरे से पता चल रहा था कि थोड़ी सी घबराहट है उसके दिल में कि कहीं टीसी ने आकर पकड़ लिया तो।
कुछ देर तक तो पीछे पलट-पलट कर टीसी के आने का इंतज़ार करती रही।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

शायद सोच रही थी कि थोड़े बहुत पैसे देकर कुछ निपटारा कर लेगी। देखकर यही लग रहा था कि जनरल डब्बे में चढ़ नहीं पाई इसलिए इसमें
आकर बैठ गयी, शायद ज्यादा लम्बा सफ़र भी नहीं करना होगा।

सामान के नाम पर उसकी गोद में रखा एक छोटा सा बेग दिख रहा था। मैं बहुत देर तक कोशिश करता रहा पीछे से उसे देखने की कि शायद चेहरा
सही से दिख पाए लेकिन हर बार असफल ही रहा।

फिर थोड़ी देर बाद वो भी खिड़की पर हाथ टिकाकर सो गयी। और मैं भी वापस से अपनी किताब पढ़ने में लग गया।
लगभग 1 घंटे के बाद टीसी आया और उसे हिलाकर उठाया।
“कहाँ जाना है बेटा”

“अंकल अहमदनगर तक जाना है”
“टिकेट है ?”
“नहीं अंकल …. जनरल का है ….

लेकिन वहां चढ़ नहीं पाई इसलिए इसमें बैठ गयी”
“अच्छा 300 रुपये का पेनाल्टी बनेगा”

“ओह … अंकल मेरे पास तो लेकिन 100 रुपये ही हैं”
“ये तो गलत बात है बेटा …. पेनाल्टी तो भरनी पड़ेगी”

“सॉरी अंकल …. मैं अलगे स्टेशन पर जनरल में चली जाउंगी …. मेरे पास सच में पैसे नहीं हैं …. कुछ परेशानी आ गयी, इसलिए
जल्दबाजी में घर से निकल आई …

और ज्यदा पैसे रखना भूल गयी…. ” बोलते बोलते वो लड़की रोने लगी टीसी उसे माफ़ किया और 100 रुपये में उसे अहमदनगर तक उस डब्बे
में बैठने की परमिशन देदी।

टीसी के जाते ही उसने अपने आँसू पोंछे और इधर-उधर देखा कि कहीं कोई उसकी ओर देखकर हंस तो नहीं रहा था।

थोड़ी देर बाद उसने किसी को फ़ोन लगाया और कहा कि उसके पास बिलकुल भी पैसे नहीं बचे हैं … अहमदनगर स्टेशन पर कोई
जुगाड़ कराके उसके लिए पैसे भिजा दे, वरना वो समय पर गाँव नहीं पहुँच पायेगी।

मेरे मन में उथल-पुथल हो रही थी, न जाने क्यूँ उसकी मासूमियत देखकर उसकी तरफ खिंचाव सा महसूस कर रहा था, 
दिल कर रहा था कि उसे पैसे देदूं और कहूँ कि तुम परेशान मत हो … और रो मत …. लेकिन एक अजनबी के लिए इस तरह की बात
सोचना थोडा अजीब था।

उसकी शक्ल से लग रहा था कि उसने कुछ खाया पिया नहीं है शायद सुबह से … और अब तो उसके पास पैसे भी नहीं थे।

बहुत देर तक उसे इस परेशानी में देखने के बाद मैं कुछ उपाय निकालने लगे जिससे मैं उसकी मदद कर सकूँ और फ़्लर्ट भी ना कहलाऊं। फिर
मैं एक पेपर पर नोट लिखा,

“बहुत देर से तुम्हें परेशान होते हुए देख रहा हूँ, जनता हूँ कि एक अजनबी हम उम्र लड़के का इस तरह तुम्हें नोट भेजना अजीब भी होगा और शायद तुम्हारी नज़र में गलत भी, लेकिन तुम्हे इस तरह परेशान देखकर मुझे बैचेनी हो रही है इसलिए यह 500 रुपये दे रहा हूँ , तुम्हे कोई अहसान न लगे इसलिए मेरा एड्रेस भी लिख रहा हूँ ….. जब तुम्हें सही लगे मेरे एड्रेस पर पैसे वापस भेज सकती हो ….वैसे मैं नहीं चाहूँगा कि तुम वापस करो । अगर कोई व्यक्ति विशेष इसी तरह परेशानी में हो तो आप उसकी मदत अवश्य करें।….. अजनबी शुभचिंतक ”

एक चाय वाले के हाथों उसे वो नोट देने को कहा, और चाय वाले को मना किया कि उसे ना बताये कि वो नोट मैंने उसे भेजा है। नोट मिलते ही उसने दो-तीन बार पीछे पलटकर देखा कि कोई उसकी तरफ देखता हुआ नज़र आये तो उसे पता लग जायेगा कि किसने भेजा। लेकिन मैं तो नोट भेजने के बाद ही मुँह पर चादर डालकर लेट गया था। थोड़ी देर बाद चादर का कोना हटाकर देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कराहट महसूस की। लगा जैसे कई सालों से इस एक मुस्कराहट का इंतज़ार था। उसकी आखों की चमक ने मेरा दिल उसके हाथों में जाकर थमा दिया …. फिर चादर का कोना हटा- हटा कर हर थोड़ी देर में उसे देखकर
जैसे सांस ले रहा था मैं। पता ही नहीं चला कब आँख लग गयी। जब आँख खुली तो वो वहां नहीं थी …

ट्रेन अहमदनगर स्टेशन पर ही रुकी थी। और उस सीट पर एक छोटा सा नोट रखा था ….. मैं झटपट मेरी सीट से उतरकर उसे उठा लिया .. और उस पर लिखा था…

Thank You मेरे अजनबी मदतगार ….

आपका ये अहसान मैं ज़िन्दगी भर नहीं भूलूँगी …. मेरी माँ आज मुझे छोड़कर चली गयी हैं …. घर में मेरे अलावा और कोई नहीं है इसलिए
आनन – फानन में घर जा रही हूँ।

आज आपके इन पैसों से मैं अपनी माँ को शमशान जाने से पहले एक बार देख पाऊँगी ….

उनकी बीमारी की वजह से उनकी मौत के बाद उन्हें ज्यादा देर घर में नहीं रखा जा सकता। आजसे मैं आपकी कर्ज़दार हूँ …

जल्द ही आपके पैसे लौटा दूँगी। उस दिन से उसकी वो आँखें और वो मुस्कराहट जैसे मेरे जीने की वजह थे …. हर रोज़ पोस्टमैन से पूछता था शायद किसी दिन उसका कोई ख़त आ जाये …. आज 1 साल बाद एक ख़त मिला … आपका क़र्ज़ अदा करना चाहती हूँ …. लेकिन ख़त के ज़रिये नहीं आपसे मिलकर … नीचे मिलने की जगह का पता लिखा था …. और आखिर में लिखा था .. 
अजनबी शुभचिंतक ……

*🕉️🌞⏰👪🔔विशेष : - भव्य आत्माओं, अगर आप अपने जीवन को खुशहाल रखना चाहते है तो, आपके जीवन में भी कुछ परेशान लोग अवश्य ही मिलेंगे उनकी आप अपनी शक्ति अनुसार इमरजेंसी मदत अवश्य करें।यह आपका करूणा दान किसी का सुखद आशीर्वाद के रूप में आपको अवश्य ही प्राप्त होगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

गुरुवार, 17 नवंबर 2022

कर्मो की पोटली

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🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 कर्मो की पोटली ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी 19 नवंबर  2022    शनिवार  को अंतिम तीर्थंकर वर्तमान में शासन नायक सभी के विघ्न हरता 1008 श्री  महावीर भगवानजी का  तप कल्याणक  महोत्सव हैं। नोट: -यह तिथी जयपुर पंचांग जैन दर्शन के अनुसार ली गई है।आप सभी अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि निर्धारित करें।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

  *एक बार एक दुःखी भक्त अपने ईश्वर से शिकायत कर रहा था। "आप मेरा ख्याल नहीं रखते ,मै आपका इतना बड़ा भक्त हूं। आपकी सेवा करता हूं।रात-दिन आपका स्मरण करता हूं।फिर भी मेरी जिंदगी में ही सबसे ज्यादा दुःख क्यों?*

  *परेशानियों का अम्बार लगा हुआ है।एक ख़तम होती नहीं कि दूसरी मुसीबत तैयार रहती है।दूसरो कि तो आप सुनते हो।उन्हें तो हर ख़ुशी देते हो।देखो आप ने सभी को सारे सुख दिए हैं, मगर मेरे हिस्से में केवल दुःख ही दिए।*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

भगवान् उसे समझाते हैं, *"नहीं ऐसा नहीं है बेटा सबके अपने-अपने दुःख -परेशानिया है। अपने कर्मो के अनुसार हर एक को उसका फल प्राप्त होता है। यह मात्र तुम्हारी गलतफहमी है।*

लेकिन नहीं। भक्त है कि सुनने को राजी ही नहीं।

   आखिर अपने इस नादान भक्त को समझा -समझा कर थक चुके भगवान् ने एक उपाय निकाला वे बोले। *"चलो ठीक है मै तुम्हे एक अवसर और देता हूं, अपनी किस्मत बदलने का।*

   *यह देखो यहां पर एक बड़ा सा , पुराना पेड़ है।इस पर सभी ने अपने -अपने दुःख-दर्द और तमाम परेशानियों,तकलीफे, दरिद्रता, बीमारियाँ तनाव, चिंता आदि सब एक पोटली में बांध कर उस पेड़ पर लटका दिए है।*

*जिसे भी जो कुछ भी दुःख हो , वो वहा जाए और अपनी समस्त परेशानियों की पोटली बना कर उस पेड़ पर टांग देता है। तुम भी ऐसा ही करो , इस से तुम्हारी समस्या का हल हो जाएगा।*

   *"भक्त तो खुशी के मारे उछल पडा।"धन्य है प्रभु जी धन्य है। अभी जाता हूं मै। "*

तभी प्रभु बोले, *"लेकिन मेरी एक छोटी सी शर्त है।"*

 *" कैसी शर्त भगवन ?"*

*"तुम जब अपने सारे दुखो की , परेशानियों की पोटली बना कर उस पर टांग चुके होंगे तब उस पेड़ पर पहले से लटकी हुई किसी भी पोटली को तुम्हे अपने साथ लेकर आना होगा। वो तुम्हारे लिए होगी .."*

  *भक्त को थोड़ा अजीब लगा लेकिन उसने सोचा चलो ठीक है। फिर उसने अपनी सारी समस्याओं की एक पोटली बना कर पेड़ पर टांग दी।चलो एक काम तो हो गया अब मुझे जीवन में कोई चिंता नहीं। लेकिन प्रभु जी ने कहा था की एक पोटली जाते समय साथ ले जाना।*

  *ठीक है। कौनसी वाली लू ...यह छोटी वाली ठीक रहेगी। दुसरे ही क्षण उसे ख्याल आया मगर पता नहीं इसमें क्या है। चलो वो वाली ले लेता हूं। अरे बाप रे! मगर इसमें कोई गंभीर बिमारी निकली तो। नहीं नहीं ..अच्छा यह वाली लेता हूं। मगर पता नहीं यह किसकी है और इसमें क्या क्या दुःख लिखे होंगे।"*

  हे भगवान् इतना कन्फ्यूजन।वो बहुत परेशान हो गया सच में " *बंद मुट्ठी लाख की ..खुल गयी तो ख़ाक की।* 

  *जब तक पता नहीं है की दूसरो की पोटलियों  में क्या दुःख -परेशानियां ,चिंता मुसीबतें है तब तक तो ठीक लग रहा था। मगर यदि इनमे अपने से भी ज्यादा दुःख निकले तो।*

*हे भगवान् कहाँ हो।*

   *भगवान् तुरंत आ गए " क्यों क्या हुआ पसंद आए वो उठा लो ..."* 

     *"नहीं- नहीं प्रभु क्षमा कर दो ..में नादान था जो अपने को सबसे दुखी समझ रहा था .. यहां तो मेरे जैसे अनगिनत है , और मुझे यह भी नहीं पता की उनका दुःख -चिंता क्या है ....मुझे खुद की परेशानियों , समस्याए कम से कम मालुम तो है ..., नहीं अब मै निराश नहीं होउंगा ...सभी के अपने -अपने दुःख है , मै भी अपनी चिंताओं -परेशानियों का साहस से मुकाबला करूंगा , उनका सामना करूंगा न की उनसे भागूंगा .।*

  *धन्यवाद प्रभु आप जब मेरे साथ है तो हर शक्ति मेरे साथ है।*

नोट:- इस पेड़ पर अनेक पोटली इसलिए थी कि आप जैसे बुध्दीमानों की विश्व में कमी नहीं होने से वह स्वयं के दु:खो की पोटली तो बांध गया किन्तु दूसरी पोटली नहीं ले गया। इस कारण से वह वर्तमान में जितना दुःखी था उससे अधिक इस समय दुःखी हैं।

भगवान् ने कहा यह *एक्सचेंज ऑफर* लौकिक नहीं। सदा के लिए सबके लिए खुला है।
*🎪⏰👪🔐✅विशेष: -भव्य आत्माओं, हमें विश्व की किसी भी शक्ति से नहीं डरना है। हमें मात्र एक ख्याल रखना है कि मेरे द्वारा किए गए कर्मो से मुझे व अन्य किसी भी जीव-अजीव को किसी प्रकार की तकलीफ ना हो। आपने इस नियम का जितना पालन करते जाओगे उतने सुखी होते जाओगे। यही प्रकृति का पहला व अंतिम नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 16 नवंबर 2022

हमारी अज्ञानता

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 हमारी अज्ञानता✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
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हमारे बगल के गाँव में रहने वाले एक शर्माजी है जिन्होंने अपने एकलौते लड़के को खूब पढ़ाया लिखा कर  इंजीनियर बनाया, बेटा अमेरिका में सेटल हो गया। वहीं पर जयपुर की रहने वाली एक अप्रवासी महिला डॉक्टर से लव मैरिज कर अमेरिकन नागरिकता भी हासिल कर लिया।

इधर बूढ़े शर्मा जी अपनी पत्नी के साथ बनारस के सारनाथ में फ्लैट लेकर, बेटे बहू की याद में जैसे तैसे अपना जीवन गुजर बसर कर रहे है।

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सात साल बाद अपने NRI बेटे बहू के आने सूचना पाकर, बड़े हर्ष के साथ शर्मा जी ने खूब सारी तैयारियां की। लेकिन यह क्या, बेटा भारत आकर भी मां बाप के सभी अरमानों पर पानी फेरते हुए, मां बाप से मिलने की जगह दीपावली इंजॉय करने अपनी पत्नी के मायके जयपुर चला गया।

और वहाँ से लौट कर मां बाप के मकान में न रहकर होटल ताज गैंगेज में रुक गया, और शाम को सिर्फ आधे घंटे के लिए कल मां बाप से मिलने जा पहुँचा। मां के हाथ की बनी कोई भी मिठाई व्यंजन खाने से इनकार कर दिया। उसे डर है कि बाहर का कोई भी चीज खाने से उसे संक्रमण हो जाएगा। उसने मां के हाथ का चाय पीने से भी सीधे-सीधे इंकार कर दिया।

अब उस वर्णशंकर मंद बुद्धि नकली अमेरिकन को कौन समझाये, कि संक्रमण मां के हाथ के बने पकवानों में नही उसके दो कौड़ी के दिमाग में है।

जिस मां बाप ने जन्म दिया उनके साथ रहने खाने पीने से उसे संक्रमण हो जाएगा। बेटा दो दिनों बाद वापस जाने की तैयारी कर रहा है, उसका यहाँ दम घुट रहा है ।

शर्मा जी ने बेटे को पढ़ा लिखाकर योग्य और सफल तो बना दिया, किंतु भारतीय संस्कार देना भूल गये।

इसलिए अपने बच्चों को शिक्षा के साथ साथ संस्कार भी देना बहुत जरूरी है, वरना अगले शर्मा जी आप भी हो सकते है।

*🕉️⏰👪🔔✅विशेष : -भव्य आत्माओं, आज हमारी सबसे बड़ी भूल यह है कि हम अपने बच्चों को हाई लेवल की पढ़ाई के लिए अपने पास से दूर भेजते है।उसे किसी प्रकार की तकलीफों का सामना ना करना पड़े इसलिए आवश्यकता से ज्यादा पैसा दिया जाता है।वह उन पैसों से अन्य सहपाठियों के साथ अनावश्यक रूप से अपव्यय करके व्यसनों का आदि हो जाता है। जैसे तैसे वह डिग्री प्राप्त कर लेता है।जब वह सर्विस के लिए अन्य शहरों में रहने लगता है तो उसके दिमाग में यह बात बैठ जाती है कि मैं अब कमा रहा हूं जो चाहे वह कर सकता हूं। उसके उपर किसी का नियंत्रण न होने से वह गलत निर्णय ले लेता है। माता पिता की इकलौती संतान होने से वह संतान के मोहवश कुछ नहीं करते। अतः हमें अपने बच्चों को बाहर पढ़ाई के लिए भेजने पर भी उनपर धार्मिक संस्कारों को मजबूत रखना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
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सोमवार, 14 नवंबर 2022

संघर्षों का फल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 संघर्षों का फल ✍️🐒*

नदी पहाड़ों की कठिन व लम्बी यात्रा के बाद तराई में पहुंची। उसके दोनों ही किनारों पर गोलाकार, अण्डाकार व बिना किसी निश्चित आकार के असंख्य पत्थरों का ढेर सा लगा हुआ था। इनमें से दो पत्थरों के बीच आपस में परिचय बढ़ने लगा। दोनों एक दूसरे से अपने मन की बातें कहने-सुनने लगे l

इनमें से एक पत्थर एकदम गोल-मटोल, चिकना व अत्यंत आकर्षक था जबकि दूसरा पत्थर बिना किसी निश्चित आकार के, खुरदरा व अनाकर्षक था।

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*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

एक दिन इनमें से बेडौल, खुरदरे पत्थर ने चिकने पत्थर से पूछा, ‘‘हम दोनों ही दूर ऊंचे पर्वतों से बहकर आए हैं फिर तुम  इतने गोल-मटोल, चिकने व आकर्षक क्यों हो जबकि मैं नहीं?’’

यह सुनकर चिकना पत्थर बोला, “पता है शुरुआत में मैं भी बिलकुल तुम्हारी तरह ही था लेकिन उसके बाद मैं निरंतर कई सालों तक बहता और लगातार टूटता व घिसता रहा हूं… ना जाने मैंने कितने तूफानों का सामना किया है… कितनी ही बार नदी के तेज थपेड़ों ने मुझे चट्टानों पर पटका है…तो कभी अपनी धार से मेरे शरीर को  काटा है… तब कहीं जाकर मैंने ये रूप पाया है।

जानते हो, मेरे पास हेमशा ये विकल्प था कि मैं इन कठनाइयों से बच जाऊं और आराम से एक किनारे पड़ा रहूँ…पर क्या ऐसे जीना भी कोई जीना है? नहीं, मेरी नज़रों में तो ये मौत से भी बदतर है!

तुम भी अपने इस रूप से निराश मत हो… तुम्हें अभी और संघर्ष करना है और निरंतर संघर्ष करते रहे तो एक दिन तुम मुझसे भी अधिक सुंदर, गोल-मटोल, चिकने व आकर्षक बन जाओगे।

मत स्वीकारो उस रूप को जो तुम्हारे अनुरूप ना हो… तुम आज वही हो जो मैं कल था…. कल तुम वही होगे जो मैं आज हूँ… या शायद उससे भी बेहतर!”, चिकने पत्थर ने अपनी बात पूरी की।

 संघर्ष में इतनी ताकत होती है कि वो इंसान के जीवन को बदल कर रख देता है। आज आप चाहे कितनी ही विषम पारिस्थति में क्यों न हों… संघर्ष करना मत छोड़िये…. अपने प्रयास बंद मत करिए. आपको बहुत बार लगेगा कि आपके प्रयत्नों का कोई फल नहीं मिल रहा लेकिन फिर भी प्रयत्न करना मत छोडिये। और जब आप ऐसा करेंगे तो दुनिया की कोई ताकत नहीं जो आपको सफल होने से रोक पाएगी।

*🕉️🌞🔔⏰👪विशेष:-भव्य आत्माओं , एक निर्जीव वस्तु ने संघर्षों का सामना करने से वह भी सुंदरता को प्राप्त हो जाती है।हम विश्व के सबसे बुद्धिमान है किन्तु हम स्वयं के नकारात्मक विचार व आचरण के कारण जीवन में आने वाले संघर्षों से भागकर स्वयं के सर्वांगीण विकास में बाधक है। हमें इस सच्चाई का विचार कर आचरण पर ध्यान देना आवश्यक है।*

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रविवार, 13 नवंबर 2022

मेरी अज्ञानता

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*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरी अज्ञानता ✍️🐒*

पुराने समय में लोग व्यापार करने के लिए दूर-दूर विदेशों में जाते थे और वर्षों बाद घर लौटते थे। कई बार दशकों के बाद भी। उन्हीं दिनों की जल्दबाजी में निर्णय ना लेने की सीख देती कहानीएक घटना है। एक व्यापारी व्यापार करने के लिए विदेश गया। वहाँ उसका कारोबार बहुत अच्छा चलने लगा। वह धन कमाने में इतना व्यस्त हो गया कि उसे समय का भान ही न रहा।

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-भव्य महान आत्माओं आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के आत्मकल्याण के संस्कार तो पड़ गये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।जी हां जितना हमारा समीचीन पूरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने कीमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें। आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

आखिर एक दिन घर लौटने का फैसला कर ही डाला और कमाया हुआ बहुत सारा धन लेकर घर के लिए चल पड़ा। जब घर पहुँचा तो रात हो चुकी थी। घर का मुख्य द्वार बंद था लेकिन एक शयनकक्ष की खिड़की से रोशनी बाहर आ रही थी। उसने खिड़की में से अंदर झाँककर देखा। उसने जो देखा सहसा उसे विश्वास ही नहीं हुआ। उसे अपने पैरों के नीचे से ज़मीन खिसकती हुई प्रतीत होने लगी।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
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उसने देखा कि शयनकक्ष में उसकी पत्नी के पास एक युवक भी लेटा हुआ है। ऐसी स्थिति में पत्नी के चरित्र पर संदेह होना अस्वाभाविक नहीं था। व्यापारी ने विचार किया कि ऐसे घर में रहने का क्या औचित्य हो सकता है जहाँ ऐसी स्त्री हो। उसने फौरन निर्णय लिया कि पत्नी और उसके पास लेटे युवक को मारकर चुपचाप वापस निकल जाऊँगा और अन्यत्र घर बसाने का प्रयास करूँगा। तभी उसकी नज़र शयनकक्ष की दीवार पड़ी जहाँ एक श्लोक लिखा था।

उसने पढ़ा-

सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्।

वृणुते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्ध स्वयमेव सम्पदः।।
*अर्थात् :-किसी कार्य को बिना विचारे एकाएक नहीं करना चाहिए क्योंकि सोच-विचार न करना बड़ी विपत्तियों का कारण है। जितनी भी प्रकार की संपत्तियाँ हैं सोच-समझकर कार्य करने वाले व्यक्तियों के गुणों से आकर्षित होकर स्वयं ही उसके पास आ जाती हैं, उसे समृद्ध कर देती हैं।*

यह पढ़ने के बाद व्यापारी ने अपना निर्णय बदल दिया और घर का दरवाज़ा खटखटाया। पत्नी ने दरवाज़ा खोलने से पहले काफी पूछताछ की और जब पूरी तरह से आश्वस्त हो गई कि दरवाज़ा खटखटाने वाला उसका पति ही है तो उसने शीघ्रता से दरवाज़ा खोल दिया।

पति को देखकर पत्नी की प्रसन्नता की सीमा न रही। उसने फौरन युवक को भी जगाया और पति से कहा कि ये आपका पुत्र है जो अब पूरे बीस वर्ष का हो गया है। अठारह वर्ष पहले जब आप विदेश गए थे तो ये दो साल का था। भावातिरेक में पिता की आँखों से आँसू बहने लगे। उसने पुत्र को हृदय से लगाकर प्यार किया। अब व्यापारी का संदेह ख़त्म हो चुका था।

एक श्लोक के सार्थक संदेश ने न केवल उसे पुत्रहंता होने के पाप से बचा लिया अपितु उसकी गृहस्थी भी उजड़ने से बच गई।

*⏰🔔🧠🔐👪विशेष:-भव्य आत्माओं,जीवन में भ्रांतियाँ अथवा समस्याएँ उत्पन्न होना स्वाभाविक है। जब अचानक कोई भ्रांति उत्पन्न हो जाए अथवा समस्या आ खड़ी होती हैं तो हम घबरा जाते हैं और फ़ौरन प्रतिक्रिया करते हैं। इससे कई बार समस्या सुधरने की बजाय और बिगड़ जाती है। अतः हमें कभी भी बिना सकारात्मक विचार विमर्ष किए बिना कोई कार्य नहीं करना चाहिए। कहा गया है कि जल्दी का काम शैतान का होता है। जिस प्रकार से रोग का उपचार करने के लिए उसका सही निदान अनिवार्य है उसी तरह से कोई समस्या हो अथवा भ्रांति उसे दूर करने के लिए भी सकारात्मक विचार-विमर्ष करना अत्यंत आवश्यक है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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