मंगलवार, 17 मार्च 2026

रहस्यमय उपाय

*🎪 सिद्धम नमः 🎪*
*⛳वसुनंदी गुरुवे नमः ⛳*
*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 रहस्यमय उपाय ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 चैत्र अमावस्या, 18 मार्च बुधवार 2026 कलि काल के  14 वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री अनंतनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार  के अनंत ज्ञान से सम्पन्न  हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अनंतनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 चैत्र अमावस्या, 18 मार्च बुधवार  2026 कलि काल के  18 वें  तीर्थंकर   सर्व सुखकारी  श्री अरनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार  के शुभ आचरण से सम्पन्न  हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अरनाथ भगवान जी का  मोक्ष  कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा  ,19 मार्च गुरुवार 2026 कलि काल के 19 वें  तीर्थंकर   सर्व सुख प्रदाता श्री मल्लिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार  के शुभ आचरण से सम्पन्न  हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मल्लिनाथ भगवान जी का  गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 मार्च 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 07,08,11,12,18,19,21,23,24,28 व 30 मार्च  को  कल्याणक महोत्सव है। 💯✅विशेष :- 18+18,23,24 व 28 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने चार दिन में पांच निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस मार्च माह में अष्टमी तिथि 11 व 26  फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 मार्च  को है।*
*🔔🐎 सोलह कारण महापर्व 4  मार्च से प्रारंभ है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त 10 व 12  मार्च  में  मुहूर्त है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त   05,06, 08,09 , 16,23, 27 मार्च को है।🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 02,03,  08, 09,13,  21,26, 27 ,28 फरवरी को है।✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त 04,06,14 मार्च को है।*
*🐎✍️ पंचक  16 से 20 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*रहस्यमय उपाय* 
*🔔आइए आज हम सभी इस सत्य घटना से अपनी आत्म शक्ति को जागृत करना सीख सकते है।*
अक्सर लोग एक उम्र के बाद यह मान लेते हैं कि अब जीवन में कुछ नया नहीं हो सकता। शरीर बूढ़ा हो गया है, ऊर्जा खत्म हो गई है और बदलाव की संभावना भी समाप्त हो गई है। लेकिन सच यह है कि इंसान की असली शक्ति उसके शरीर में नहीं, उसके मन में होती है। जब मन जागता है, तो उम्र की दीवारें भी छोटी पड़ जाती हैं।
⬇️⬇️⬇️✅⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W  9057115335 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️✅⬆️⬆️⬆️
साल 1979 में एक अनोखा प्रयोग हुआ। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक *डॉ. एलेन लैंगर* ने यह जानने का निश्चय किया कि क्या केवल सोच बदलने से इंसान की उम्र और क्षमता पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने लगभग 80 वर्ष के आठ बुज़ुर्गों को एक सप्ताह के लिए एक विशेष स्थान पर रहने के लिए बुलाया। 
इन लोगों की स्थिति सामान्य बुज़ुर्गों जैसी थी—किसी को चलने के लिए छड़ी की जरूरत थी, किसी के हाथ काँपते थे, तो किसी की दृष्टि कमजोर थी।

डॉ. लैंगर ने उस जगह को पूरी तरह बीस साल पीछे याने 1959 के माहौल में बदल दिया।

पुराने जमाने के अखबार, रेडियो पर वही संगीत, ब्लैक-एंड-व्हाइट टीवी और उस समय की खबरें—सब कुछ वैसा ही था जैसे बीस साल पहले हुआ करता था।

लेकिन उन सभी के लिये एक खास नियम था—
उन्हें यह मानकर जीना था कि अभी 1959 ही चल रहा है, और वे भी उसी समय के सक्रिय, ऊर्जावान लोग हैं। .

पहले दिन जब वे पहुँचे तो उन्हें उम्मीद थी कि कोई उनका सामान उठाकर कमरे तक पहुँचा देगा।
पर उन्हें साफ कह दिया गया—
“यहाँ हर काम आपको खुद करना होगा।”
थोड़ी नाराज़गी हुई, पर मजबूरी में उन्होंने अपना सामान खुद उठाया और सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर पहुँचे।
यहीं से उनके मन में एक छोटा-सा स्विच ऑन हुआ—
“मैं असहाय नहीं हूँ, मैं यह कर सकता हूँ।”
एक दिन बीता, दो दिन बीता, तीसरा दिन बीता।
वे पुराने दिनों की राजनीति, खेल और फिल्मों पर चर्चा करने लगे।
वे उसी उत्साह से बातें करने लगे जैसे अपनी पचपन-साठ साल की उम्र में किया करते थे।
कुछ ही दिनों में अद्भुत परिवर्तन दिखाई देने लगा।
जो व्यक्ति गठिया के कारण झुककर चलता था, वह अब सीधे बैठकर चर्चा कर रहा था।
जो कम सुनता था, वह अब रेडियो धीमी आवाज़ में सुन पा रहा था।
एक सप्ताह बाद सबसे चौंकाने वाला दृश्य सामने आया—
वे सभी बुज़ुर्ग मैदान में टच फुटबॉल खेल रहे थे, दौड़ रहे थे, हँस रहे थे।
अंत में जब उनके मेडिकल टेस्ट हुए, तो डॉक्टर भी हैरान रह गए।
उनकी पकड़ मजबूत हो गई थी, शरीर की लचक बढ़ गई थी, यहाँ तक कि दृष्टि और सुनने की क्षमता भी बेहतर हो गई थी।
सिर्फ उनका व्यवहार ही नहीं बदला था—लोगों को उनकी नई तस्वीरें देखने पर वे पहले से अधिक युवा लगे।
इस प्रयोग ने एक गहरी सच्चाई उजागर की—
*मन जैसा मान लेता है, शरीर वैसा ही बनने लगता है।*
जब हम बार-बार खुद से कहते हैं—
“अब मैं बूढ़ा हो गया हूँ, मुझसे नहीं होगा”,
तो हमारा शरीर भी वही संदेश स्वीकार कर लेता है।
लेकिन जैसे ही सोच बदलती है,
ऊर्जा भी बदलने लगती है।
और यह भी सच है—
*“जिस दिन इंसान सीखना और कोशिश करना छोड़ देता है, उसी दिन वह सच में बूढ़ा हो जाता है।”*
इसलिए यदि कभी मन कहे कि अब बहुत देर हो चुकी है, तो अपने भीतर का स्विच ऑन कीजिए और याद रखिए—
*“उम्र शरीर की गिनती है, लेकिन उत्साह मन की पहचान है।”*
*👨‍👨‍👦‍👦🌞▶️🔑विशेष : - भव्य आत्माओं, इंसान की असली उम्र उसकी आयु से नहीं, उसके विचारों और उत्साह से तय होती है। जब मन जवान रहता है, तो जीवन में बदलाव और नई शुरुआत हमेशा संभव होती है। अतः आज से और अभी से ही हम स्वयं अपनी सकारात्मक सोच के साथ आत्म शक्ति को जागृत कर विषम परिस्थितियों को समाप्त कर सकते है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मंगलवार, 10 मार्च 2026

करुणा की सीख

*🎪 सिद्धम नमः 🎪*
*⛳वसुनंदी गुरुवे नमः ⛳*
*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 करुणा की सीख ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 चैत्र कृष्ण अष्टमी, 11 मार्च बुधवार 2026 कलि काल के  10 वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री शीतलनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार  के शीतलता से सम्पन्न  हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शीतलनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 चैत्र कृष्ण 09 ,12 मार्च गुरुवार 2026 कलि काल के प्रथम  तीर्थंकर   सर्व सुखकारी संस्कार प्रदाता श्री आदिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार  के शुभ आचरण से सम्पन्न  हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री आदिनाथ भगवान जी का  जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 मार्च 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 07,08,11,12,18,19,21,23,24,28 व 30 मार्च  को  कल्याणक महोत्सव है। 💯✅विशेष :- 18+18,23,24 व 28 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने चार दिन में पांच निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस मार्च माह में अष्टमी तिथि 11 व 26  फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 मार्च  को है।*
*🔔🐎 सोलह कारण महापर्व 4  मार्च से प्रारंभ है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त 10 व 12  मार्च  में  मुहूर्त है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त   05,06, 08,09 , 16,23, 27 मार्च को है।🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 02,03,  08, 09,13,  21,26, 27 ,28 फरवरी को है।✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त 04,06,14 मार्च को है।*
*🐎✍️ पंचक  16 से 20 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*🔔👉प्रकृति हमें हर पल कुछ न कुछ सिखाती है। पेड़, नदी, पर्वत और पक्षी—ये सभी मानो जीवन का कोई गहरा संदेश लेकर हमारे सामने आते हैं। परंतु कई बार हम अपने स्वार्थ में इतने उलझ जाते हैं कि उस सरल सत्य को समझ ही नहीं पाते। जब मन में करुणा जागती है, तभी मनुष्य सच्चे अर्थों में मनुष्य बनता है। किसी ने ठीक ही कहा है—“जहाँ करुणा होती है, वहीं सच्चा धर्म जन्म लेता है।*

⬇️⬇️⬇️✅⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W  9057115335 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️✅⬆️⬆️⬆️

 *👉करुणा की सीख 👈* 
*🔔आइए आज हम इस कहानी के माध्यम से समझते है कि हमारे अंदर करुणा है या नहीं*
एक साधु घने जंगल के बीच एक छोटी-सी कुटिया बनाकर रहता था। वह स्थान अत्यंत रमणीय था। चारों ओर हरियाली ही हरियाली फैली हुई थी। पास ही एक स्वच्छ और शांत नदी बहती थी और दूर पर्वतों की ऊँची-ऊँची चोटियाँ आकाश को छूती प्रतीत होती थीं। उस शांत वातावरण में साधु दिन-रात भगवत भजन और साधना में लीन रहता और बड़ा प्रसन्न रहता था।

किन्तु एक बात उसे बार-बार परेशान कर देती थी। कुटिया के पास उसने थोड़े से अनाज और फल-फूल के पौधे लगाए थे। जंगल के पक्षी और छोटे-छोटे पशु अक्सर चुपके से आकर उन दानों और फलों को खा जाते थे। जब साधु उन्हें देख लेता तो लकड़ी उठाकर उन्हें भगाने लगता। उस समय तो वे डरकर उड़ जाते या भाग जाते, पर कुछ समय बाद फिर लौट आते। यह क्रम यूँ ही चलता रहता।

एक बार साधु तीर्थयात्रा के लिए निकल पड़ा। यात्रा करते-करते एक दिन वह एक गाँव से होकर गुजर रहा था। वहाँ दूर-दूर तक खेत ही खेत फैले हुए थे और उनमें पकी हुई फसल लहलहा रही थी।

साधु की नजर एक खेत पर पड़ी। उस खेत में एक मचान बना था, जिस पर एक वृद्धा माता बैठी थी और फसल की रखवाली कर रही थी। पर आश्चर्य की बात यह थी कि उसकी आँखों के सामने ही बहुत-सी चिड़ियाँ खेत में उतर-उतरकर अनाज के दाने चुग रही थीं।

यह दृश्य देखकर साधु को बड़ा अचरज हुआ। वह तुरंत उस वृद्धा के पास गया और बोला—
“अरे माई! तुम यहाँ बैठी क्या कर रही हो? देखो, चिड़ियाँ तो तुम्हारी फसल चुगती जा रही हैं।”

वृद्धा मुस्कुराई। उसके चेहरे पर संतोष और ममता का अद्भुत भाव था। उसने शांत स्वर में कहा—

“भैया, इन चिड़ियों को भी तो भगवान ने ही बनाया है। इनके घर में कहाँ अनाज भरा रहता है! बेचारी भूखी होती हैं, तभी तो दाने चुगने आती हैं। इनके पेट में थोड़ा-सा अनाज चला भी जाए तो मेरा क्या बिगड़ जाएगा? इनका पेट है ही कितना बड़ा!”

थोड़ा रुककर वह फिर बोली—
“और फिर, अगर हम भूखे को ही न खिलाएँ तो इंसान होने का क्या अर्थ?

इंसानियत तो देने में बसती है, छीनने में नहीं।”
वृद्धा की बात सुनकर साधु कुछ क्षण मौन रह गया। उसकी आँखें जैसे खुल गईं। उसे अपनी कुटिया के वे पशु-पक्षी याद आ गए, जिन्हें वह डंडा लेकर भगाया करता था।

आज उसके मन में उनके प्रति क्रोध नहीं, बल्कि करुणा और प्रेम उमड़ आया। उसे लगा मानो उस वृद्धा ने उसे जीवन का बहुत बड़ा सत्य समझा दिया हो।

उसने मन ही मन सोचा—
“सच्ची साधना वही है, जिसमें सबके लिए करुणा हो।”
और उसे यह भी समझ में आ गया कि

 *“वसुधैव कुटुम्बकम्* — यह पूरी धरती ही हमारा परिवार है।”
*👨‍👨‍👦‍👦💯🐎🌞✅ विशेष:- जो मनुष्य हर प्राणी में ईश्वर का अंश देखता है और दया, करुणा व सहअस्तित्व के साथ जीवन जीता है, वही सच्चे अर्थों में मानवता को समझता है।“धर्म पूजा से नहीं, करुणा से जीवित रहता है।”*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

शुक्रवार, 6 मार्च 2026

संस्कार शिक्षा के

*🎪 सिद्धम नमः 🎪*
*⛳वसुनंदी गुरुवे नमः ⛳*
*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 “संस्कार शिक्षा के” ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 चैत्र कृष्ण 4, 07 मार्च शनिवार 2026 कलि काल के  23 वें  तीर्थंकर उपसर्ग विजेता सर्व सुखकारी  श्री पार्श्वनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतू की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार  के वैभव से सम्पन्न  हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री पार्श्वनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 चैत्र कृष्ण पंचमी, 08 मार्च रविवार 2026 कलि काल के  अष्टम  तीर्थंकर   सर्व सुखकारी  श्री चन्द्रप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से चंद्र की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार  के शुभ आचरण से सम्पन्न  हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री चन्द्रप्रभ भगवान जी का  गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 मार्च 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 07,08,11,12,18,19,21,23,24,28 व 30 मार्च  को  कल्याणक महोत्सव है। 💯✅विशेष :- 18+18,23,24 व 28 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने चार दिन में पांच निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस मार्च माह में अष्टमी तिथि 11 व 26  फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 मार्च  को है।*
*🔔🐎 सोलह कारण महापर्व 4  मार्च से प्रारंभ है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त 10 व 12  मार्च  में  मुहूर्त है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त   05,06, 08,09 , 16,23, 27 मार्च को है।🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 02,03,  08, 09,13,  21,26, 27 ,28 फरवरी को है।✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त 04,06,14 मार्च को है।*
*🐎✍️ पंचक  16 से 20 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*🔑“संस्कार शिक्षा के”🔑*
*👨‍👨‍👦‍👦धन जीवन को साधन देता है, पर उद्देश्य नहीं। वैभव सुविधा दे सकता है, पर संतोष नहीं। सच्ची अमीरी तब जन्म लेती है जब मनुष्य अपनी संपन्नता को दूसरों की मुस्कानों से जोड़ देता है। कभी-कभी एक साधारण-सी मुलाक़ात हमारी पूरी सोच बदल देती है।*

महानगर की चकाचौंध में पला-बढ़ा आर्यमान सिंघानिया एक बड़े उद्योगपति राजवीर सिंघानिया का इकलौता पुत्र था। आलीशान गाड़ियाँ, महँगे शौक, देर रात तक चलने वाली पार्टियाँ—यही उसकी दुनिया थी। उसे लगता था कि जिंदगी का असली आनंद खर्च करने और दिखाने में है।
राजवीर जी अक्सर समझाते—
“बेटा, पैसा साधन है, साध्य नहीं।”
पर आर्यमान के लिए ये शब्द बस हवा की तरह थे।

⬇️⬇️⬇️✅⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W  9057115335 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️✅⬆️⬆️⬆️

एक बरसाती शाम, सिग्नल पर उसकी गाड़ी रुकी। उसकी नज़र फुटपाथ के किनारे पड़ी—कुछ बच्चे टिमटिमाती स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर पढ़ रहे थे। सामने खड़ी थी एक युवती—नंदिनी प्रकाश।
नंदिनी का व्यक्तित्व अत्यंत साधारण था—सादे सूती सलवार-कुर्ते में, बिना किसी आडंबर के। पर उसके चेहरे की सौम्य सुंदरता और आँखों का आत्मविश्वास उसे असाधारण बना रहे थे। उसकी आवाज़ में अपनापन था और शब्दों में दृढ़ता।
वह बच्चों से कह रही थी—
“गलतियाँ करना बुरा नहीं, कोशिश न करना बुरा है।”

आर्यमान अनायास गाड़ी से उतर आया।
“आप ये सब क्यों कर रही हैं? इससे क्या बदल जाएगा?”
उसने कुछ हल्के व्यंग्य से पूछा।

नंदिनी ने शांत मुस्कान के साथ उत्तर दिया—
“मैं पास की ही सोसायटी में रहती हूँ। एम.बी.ए. कर रही हूँ… पर डिग्री से पहले इंसान बनना जरूरी है। यहाँ आती हूँ क्योंकि अगर मेरे थोड़े-से समय से किसी एक बच्चे की भी दिशा बदल जाए, तो मेरी पढ़ाई सफल हो जाएगी।”
फिर उसने गंभीर होकर कहा—
“ मुझे पता है सब कुछ संभव नही, पर मेरी कोशिश से कुछ तो संभव है।”
उसकी बातों में बनावट नहीं थी—सिर्फ विश्वास था।
उस रात आर्यमान बेचैन रहा। आलीशान कमरे में भी उसे खालीपन महसूस हुआ। पहली बार उसने सोचा—“मेरे पास सब कुछ है, पर क्या मैं सच में खुश हूँ?”
अगले दिन वह फिर उसी स्थान पर गया। इस बार दर्शक नहीं, सहभागी बनकर।
धीरे-धीरे वह बच्चों को पढ़ाने में सहयोग करने लगा। किताबें लाया, स्टेशनरी बाँटी, अपने मित्रों को भी जोड़ा।
समय के साथ उसमें परिवर्तन स्पष्ट दिखने लगा।
अब उसकी रातें पार्टियों में नहीं, योजनाओं में बीतने लगीं।
अब उसका पैसा दिखावे में नहीं, बच्चों की शिक्षा में लगने लगा।
एक दिन उसने अपने पिता से कहा—
“पापा, मैं आपकी विरासत को आगे बढ़ाना चाहता हूँ… पर एक नई दिशा में।”
राजवीर जी ने बेटे की आँखों में पहली बार जिम्मेदारी की चमक देखी।
उन्होंने स्नेह से कहा—
“आज तुमने सच में मेरा नाम रोशन किया है।”
कुछ ही महीनों में आर्यमान और नंदिनी ने मिलकर एक संस्था की स्थापना की—
 *“प्रेरणा दीप”।* 
जहाँ सैकड़ों जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास का पाठ पढ़ाया जाने लगा।
नंदिनी का सरल सौंदर्य और दृढ़ संकल्प, तथा आर्यमान की संसाधन-सम्पन्नता—दोनों ने मिलकर उस छोटे-से प्रयास को एक बड़े अभियान में बदल दिया।

 *🎪💖👨‍👨‍👦‍👦🔔🔑विशेष:-असली विरासत धन नहीं, संवेदनशीलता है।सच्ची सुंदरता रूप में नहीं, आत्मविश्वास और उद्देश्य में होती है। और जब संपन्नता सेवा से जुड़ जाती है, तब समाज में परिवर्तन की ज्योति अवश्य जलती है। हम संकल्प करते है कि आज से ही हम अपने परिवार से यह लाभकारी योजना आज से ही शुरू करेंगे।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

रविवार, 22 फ़रवरी 2026

अकेलापन या एकांत

*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 अकेलापन या एकांत ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 फाल्गुन शुक्ल सप्तमी, 23 फरवरी सोमवार 2025 कलि काल के 8 वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री चन्द्रप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से चंद्रमा की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  चन्द्रप्रभ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 फाल्गुन शुक्ल अष्टमी, 24 फरवरी मंगलवार 2025 कलि काल के  तृतीय तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री संभवनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से सर्व सुख समृद्धि प्रदाता गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मोक्ष मार्ग  संभव हो जाता है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री संभवनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,05,07,08,10,13,14,16,17,22,23 व 24 फरवरी ( 22 को पंचमी/ षष्ठी तिथि और 23 को सप्तमी तिथि मान्य होगी )।तारीख को  कल्याणक महोत्सव है। 💯✅विशेष :- 5,8,14, 22 व 23 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 09 व 24  फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी  को है।*
*🔔🐎 अष्टान्हिका महापर्व 24  फरवरी से प्रारंभ है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त 4,5,10,19,20,21  फरवरी माह में  मुहूर्त है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त   1,6,18, 26,27 फरवरी को है।🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 1, 2, 12,13, 21,26,27 फरवरी को है।✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त 19,20, 21,26 को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
☀️ *अकेलापन और एकांत* ☀️
‘अकेलापन’ इस संसार की सबसे बड़ी सज़ा है और ‘एकांत’ जीवन का सबसे बड़ा वरदान।
दिखने में ये दोनों शब्द एक जैसे लगते हैं, पर इनके अर्थों के बीच आकाश–पाताल का अंतर है।
 *अकेलेपन में छटपटाहट होती है* 
जबकि *एकांत में विश्राम।* 
अकेलेपन में घबराहट है,
और एकांत में शांति।
जब तक हमारी दृष्टि बाहर की ओर भटकती रहती है, हम अकेलापन महसूस करते हैं। जैसे ही नज़र भीतर की ओर मुड़ती है, एकांत का अनुभव होने लगता है।
“अकेलापन दूसरों की अनुपस्थिति है, और एकांत स्वयं की उपस्थिति।”
वास्तव में जीवन और कुछ नहीं,
अकेलेपन से एकांत की ओर की यात्रा है—
एक ऐसी यात्रा जिसमें रास्ता भी हम हैं,
राही भी हम हैं
और मंज़िल भी हम स्वयं हैं। 🙏
 *अकेलापन क्या है?* 
अकेलेपन में मन किसी न किसी की यादों में उलझा रहता है।
यादें दुःख लाती हैं, दुःख कार्यक्षमता छीन लेता है।
मन उदास हो जाता है, शरीर थक जाता है।
इंसान भीतर से कमज़ोर पड़ जाता है—
मुरझाए हुए पत्तों की तरह।
“अकेलापन मन को खोखला करता है,
जबकि एकांत मन को मजबूत बनाता है।”
 *एकांत क्या है?* 
एकांत स्वयं से और ईश्वर से मिलने का अवसर है।
क्षण भर का सच्चा एकांत भी
मन को शांति और संतोष से भर देता है।
योग, ध्यान और मौन—
सब एकांत के ही द्वार हैं।
यदि मन व्याकुल हो,
तो आँखें बंद कीजिए
और मात्र पाँच मिनट ईश्वर का स्मरण कीजिए—
लेकिन पूर्ण एकांत में।
निश्चय ही शांति का अनुभव होगा।
“जो एकांत में मुस्कुरा सकता है,
वह संसार की भीड़ में कभी नहीं टूटता।”
यदि आप अकेलापन और एकांत का अंतर समझ गए हैं,
तो यकीन मानिए—
खुशी आपसे अधिक दूर नहीं है।

⬇️⬇️⬇️✅⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️✅⬆️⬆️⬆️

दो घनिष्ठ मित्रों के बीच एक दिन शर्त लगती है।
शर्त यह थी कि यदि उनमें से एक मित्र
पूरे एक महीने तक
एक कमरे में बिना किसी से मिले,
बिना बातचीत किए,
एकांत में रह ले—
तो दूसरा मित्र उसे 10 लाख रुपये देगा।
पहला मित्र शर्त स्वीकार कर लेता है।
उसे शहर से दूर एक खाली मकान में रखा जाता है।
सिर्फ दो समय का भोजन
और कुछ किताबें दी जाती हैं।
शुरुआत के एक-दो दिन किताबों में बीत गए,
पर फिर मन खिन्न होने लगा।
हर घंटा युगों जैसा लगने लगा।
कभी वह चीखता, कभी रोता,
कभी अपने बाल नोचता—
पर शर्त की याद उसे घंटी बजाने से रोक लेती।
अकेलेपन की पीड़ा भयानक थी,
पर वह डटा रहा।
कुछ दिन बीते…
और फिर धीरे-धीरे उसके भीतर
एक अनोखी शांति उतरने लगी।
अब उसे किसी की ज़रूरत महसूस नहीं होती।
वह मौन बैठा रहता—
पूर्णतः शांत।
उधर, उसका मित्र चिंतित होने लगा।
महीना समाप्ति की ओर था
और इसी बीच उसका व्यापार भी चौपट हो गया।
वह दिवालिया हो गया।
अब उसे डर सताने लगा—
“अगर वह शर्त जीत गया,
तो मैं पैसे कहाँ से दूँगा?”
आख़िर वह उसे मारने की नीयत से
उस मकान की ओर निकल पड़ा।
लेकिन वहाँ पहुँचकर
उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
मित्र एक दिन पहले ही
मकान छोड़कर जा चुका था।
सिर्फ एक पत्र छोड़ गया था।
पत्र में लिखा था—
“प्रिय मित्र,
इन एक महीनों में मैंने वह पा लिया
जिसका कोई मूल्य नहीं चुका सकता।
अकेले रहकर मैंने असीम शांति को जाना है।
मैंने समझ लिया है कि
जितनी कम ज़रूरतें,
उतना अधिक आनंद।
इसलिए मैं स्वयं यह शर्त तोड़ रहा हूँ—
अब मुझे तुम्हारे पैसों की आवश्यकता नहीं।”
*🌞🎪👨‍👨‍👦‍👦🔔विशेष:-  “खुशी बाहर नहीं, भीतर है।” जितना हम संसार के बंधनों से मुक्त होते हैं, उतना ही एकांत हमें प्रिय लगने लगता है। यदि हम अकेलेपन को एकांत में बदलना सीख लें, तो वही अकेलापन हमारे लिए वरदान बन सकता है। भीड़ से मत भागिए, पर कभी-कभी स्वयं से मिलने के लिए एकांत अवश्य चुनिए। एकांत में अपने बारे में चिंतन करो कि मैं स्वयं जो भी कर रहा हूं वह कहां तक मेरे लिए सही है। क्या मैं अपने कर्तव्यों को पूरा कर रहा हूं या नहीं इस बात का विचार अवश्य करें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

सच्चा व योग्य प्यार

*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  सच्चा व योग्य प्यार ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 फाल्गुन शुक्ल तृतीया, 20 फरवरी शुक्रवार 2025 कलि काल के  18 वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री अरनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  अरनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।(🔔नोट:-यह कल्याणक उत्तर पुराण के अनुसार नहीं है। उत्तर पुराण के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष की तृतीया को सम्पन्न हो गया है।)*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 फाल्गुन शुक्ल पंचमी, 22 फरवरी रविवार 2025 कलि काल के  19 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री मल्लिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से सर्व सुख समृद्धि प्रदाता केतु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के,धनके सभी विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मल्लिनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,05,07,08,10,13,14,16,22,23 व 24 फरवरी ( 22 को पंचमी/ षष्ठी तिथि और 23 को सप्तमी तिथि मान्य होगी )।तारीख को  कल्याणक महोत्सव है। 💯✅विशेष :- 5,8,14, 22 व 23 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 09 व 24  फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी  को है।*

*🔔🐎 अष्टान्हिका महापर्व 24  फरवरी से प्रारंभ है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त 4,5,10,19,20,21  फरवरी माह में  मुहूर्त है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त   1,6,18, 26,27 फरवरी को है।🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 1, 2, 12,13, 21,26,27 फरवरी को है।✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त 19,20, 21,26 को है।*
*🐎✍️ पंचक  17 से 21 फरवरी तक  है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*सच्चा व योग्य प्रेम* 

कहानी पढ़कर शायद आपको लगे *—"क्या सचमुच ऐसा भी होता है?"* पर यही तो कहानी का सौंदर्य है। कहानीकार की कल्पना साधारण से हटकर होती है। उसके अनुसार प्रेम केवल शब्दों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण का वह भाव है, जहाँ अपने सुख-दुःख को भूलकर हम प्रियजन की सहजता और शांति को सबसे ऊपर रखते हैं। यही प्रेम रिश्तों की आत्मा और जीवन का सबसे सुंदर अलंकार है। सच्चा प्यार वहां से शुरू होता है जहां से वासनाओं का अंत होता है। जहां वासना है वहां पर प्यार हो वह चौरासी लाख योनियों में भ्रमण करवाता है। अतः इस कहानी को एक बार नहीं जब तक समझ में ना आए पढ़ते रहोगे तो कुछ सकारात्मक ऊर्जा अवश्य ही प्राप्त होगी।

⬇️⬇️⬇️✅⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️✅⬆️⬆️⬆️

रात गहरा चुकी थी। थके कदमों से पति घर लौटा और बिस्तर पर गिरते ही धीमे स्वर में बोला—
 *“पानी ला दो… नींद बहुत भारी है।”* 

पत्नी तुरंत रसोई में गई, कुल्हड़ में ठंडा पानी भरकर जब तक लौटी, लेकिन तब तक पति गहरी नींद में सो चुका था। उसने ठिठककर उसका चेहरा देखा—थकान से भरा, पर शांति से नहाया हुआ। वह चाहती तो कुल्हड़ पास रखकर स्वयं भी आराम कर लेती, या धीरे से उसे जगा देती।

पर मन ने कहा—
*“अब तो नींद लग गई है… अगर जगा दूं तो सारी थकान व्यर्थ हो जाएगी। और अगर प्यास लगी होगी तो नींद खुलने पर और भी ज्यादा सताएगी।”*

यही सोचकर पत्नी ने निर्णय लिया—वह पूरी रात जागेगी, पर पति की नींद नहीं तोड़ेगी। हाथ में पानी लिए वह सिरहाने बैठी रही। घड़ी की सुइयाँ खिसकती रहीं, रात सरकती रही, हवा बहती रही—पर उसकी निगाहें पति पर टिकी रहीं। वह हर क्षण उसके श्वासों की लय सुनती रही, कहीं करवट तो नहीं बदली, कहीं प्यास से बेचैन तो नहीं हो रहा? लेकिन पति गहरी नींद में सोता रहा और पत्नी प्रेम में जागती रही।

सुबह की पहली किरणें आईं तो पति की आँख खुली। उसने देखा—पत्नी अब भी हाथ में पानी थामे बैठी है। चौंककर बोला—
 *“तुम… पूरी रात नहीं सोई?”* 

पत्नी ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
 *“तुमने पानी माँगा था। डर था कि रात में प्यास लगे और मैं सो जाऊँ। इसलिए जागती रही।”* 

उस एक वाक्य ने पति के भीतर की कठोरता पिघला दी। उसने पानी पिया और भावुक होकर कहा—
 *“तुम्हारे जैसा प्रेम… कोई नहीं कर सकता।”* 
*विशेष :- सच्चा प्रेम मीठे शब्दों में नहीं, बल्कि निस्वार्थ कर्मों में झलकता है। प्रेम का असली सौंदर्य वही है, जहाँ अपने प्रिय की सुविधा के लिए स्वयं को भूल जाया जाए।*

*🌞✅💖👨‍👨‍👦‍👦▶️उपरोक्त कहानी में पति -पत्नी का उदाहरण देकर समझाया है कि आप सच्चे श्रावक है तो क्या आप सच्चे देव शास्त्र गुरु के मार्गदर्शन बिना जीवन कैसे व्यतित कर रहे हो। अगर आप अपनी आत्मा पर सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान ,सम्यक चारित्र रुपी रत्नत्रय का बीजारोपण करना चाहते है तो आज से ही अपने जीवन में शुरुआत अवश्य करें। यहां पर अब आपके सामने यह प्रश्न नहीं आना चाहिए कि इस अवस्था में मैं देवदर्शन, अभिषेक पूजन और गुरु की सेवा कैसे करुंगा? मुझे परिवार वाले, समाज वाले क्या बोलेंगे और सोचेंगे।इन सभी बातों को ध्यान में नहीं रखते हुए आप अपनी शक्ति अनुसार भक्ति करोगे तो नियम से मोक्ष रुपी रेलगाड़ी में आपकी सीट सुरक्षित रहेगी।इस रिजर्वेशन में और भी बहुत से आपके कई जन्मों के रिश्तेदार आपको मिल जाएंगे।यह चिंता मत करना कि मेरा क्या होगा। बस पंच परमेष्ठियों का स्मरण करते हुए जीवन की सभी परेशानियों का अंत हो जाएगा।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

रविवार, 15 फ़रवरी 2026

प्रेरणास्त्रोत

*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 प्रेरणास्त्रोत  ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 फाल्गुन शाश्वत तिथि चतुर्दशी, 16 फरवरी सोमवार 2025 कलि काल के  12 वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री वासुपूज्य भगवान जी जिनकी आराधना से मंगल की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार  के मंगल से सम्पन्न  हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री वासुपूज्य श भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,05,07,08,10,13,14,16,17,22,23 व 24 फरवरी (10 व11 को नवमी तिथि और 23 को षष्ठी तिथि का क्षय सप्तमी तिथि मान्य होगी )तारीख को  कल्याणक महोत्सव है। 💯✅विशेष :- 5,8,14, 22,23 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 09 व 24  फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी  को है।*
*🔔🐎 अष्टान्हिका महापर्व 24  फरवरी से प्रारंभ है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त 4,5,10,19,20,21  फरवरी माह में  मुहूर्त है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त   1,6,18, 26,27 फरवरी को है।🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 1, 2, 12,13, 21,26,27 फरवरी को है।✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त 19,20, 21,26 को है।*
*🐎✍️ पंचक  23 से 26 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*प्रेरणास्त्रोत* 
आज हम सभी के जीवन कोई ना कोई प्रेरणास्त्रोत होता ही है। जिनकी प्रेरणा से हम बहुत कुछ सीख कर इंसानियत को समझकर जीवन सार्थक कर सकते है।

 *एक प्रेरक अनुभव, एक गहरी सीख* 

सुख की खोज में मनुष्य सदियों से भटकता आया है। कुछ को लगता है कि धन में सुख है, कुछ को मान-सम्मान में, और कुछ को पद-प्रतिष्ठा में। लेकिन सच्चा सुख वहां नहीं होता जहां हम उसे ढूंढते हैं — वह तो भीतर की स्थिति है। संतोष ही वह कुंजी है जो मनुष्य को स्थायी प्रसन्नता प्रदान करती है।
असंतोषी व्यक्ति के पास चाहे जितनी भी सुविधाएं हों, वह कभी संतुष्ट नहीं रह सकता। सुख इस पर निर्भर नहीं करता कि हमारे पास क्या है, बल्कि इस पर निर्भर करता है कि हम उसमें कितना संतोष अनुभव करते हैं। सोने के महल में भी मनुष्य दुःखी हो सकता है यदि इच्छाओं की भूख कभी शांत न हो, और एक साधारण झोपड़ी में भी व्यक्ति परम आनंद पा सकता है यदि वह "जो है, वही पर्याप्त है" की भावना रखता हो।
⬇️⬇️⬇️✅⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️✅⬆️⬆️⬆️

आप लोग यदि *"कौन बनेगा करोढपति"* सीरियल देखते  थे तो आपने एक एपिसोड में यह जरूर देखा होगा ।

"फास्टेस्ट फिंगर" राउंड में सबसे तेज़ जवाब देकर डॉ. नीरज सक्सेना, एक वैज्ञानिक व कुलपति, हॉट सीट पर पहुंचे। शांत, गंभीर और सौम्य स्वभाव वाले नीरज जी का परिचय ही इतना प्रभावशाली था — उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान व्यक्तित्व के साथ कार्य किया था।
नीरज जी ने खेल शुरू किया। आत्मविश्वास के साथ उन्होंने कुछ प्रश्नों का उत्तर दिया, और ₹3,20,000 की राशि जीत ली। खेल में उनकी तीन लाइफलाइन भी शेष थीं, और उनके ज्ञान को देखते हुये आगे बढ़कर करोड़पति बनने की पूरी संभावना थी।
लेकिन जब ब्रेक के बाद अमिताभ बच्चन ने अगला सवाल पेश करने के लिए कहा, तो नीरज जी ने एक चौंकाने वाला निर्णय लिया — *"मैं क्विट करना चाहूंगा, सर।"* 
अमिताभ जी और दर्शक स्तब्ध रह गए। इतने अच्छे खेल और साधनों के बावजूद, वे क्यों रुकना चाहते थे? उनका उत्तर अत्यंत सरल, पर गहन था — "अन्य खिलाड़ी प्रतीक्षा कर रहे हैं, वे मुझसे छोटे हैं, उन्हें भी एक मौका मिलना चाहिए। मैंने पर्याप्त जीत लिया है। _*मुझे और की आवश्यकता नहीं है।"*_ 
यह केवल त्याग नहीं था, यह सच्चा संतोष था। यह समझना कि दूसरों को अवसर देना भी एक महान कार्य है। नीरज जी के निर्णय ने मंच पर मौन भर दिया, फिर तालियों की गड़गड़ाहट में बदल गया।
उनके हटने के बाद जो लड़की हॉट सीट पर पहुंची, उसकी कहानी और भी भावुक थी — “मेरे पिता ने मेरी मां और हमें इसलिए घर से निकाल दिया क्योंकि हम तीन बेटियां हैं। अब हम अनाथालय में रहते हैं...” उस दिन नीरज जी ने सिर्फ खेल नहीं छोड़ा, बल्कि किसी जरूरतमंद को जीवन बदलने का अवसर दे दिया।
 *सीख* : यह घटना केवल एक खेल शो की कहानी नहीं, बल्कि जीवन का आईना है। आज जब लोग विरासत के लिए अपनों से झगड़ते हैं, जब पैसा रिश्तों से बड़ा बन गया है, तब डॉ. नीरज सक्सेना जैसे लोग समाज को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करते हैं।
संतोष का भाव न केवल आत्मा को शांति देता है, बल्कि समाज को भी सुंदर बनाता है। जब हमारी आवश्यकताएं पूरी हो जाती हैं, तब रुक जाना चाहिए। अपनी इच्छाओं की सीमा तय कर, दूसरों के लिए स्थान छोड़ना ही मानवता का असली रूप है। डॉ नीरज ने बताया कि मैं डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान व्यक्तित्व के साथ कार्य कर चुका उन्होंने जो भी किया भारत वासियों के विकास के लिए किया। उन्होंने बड़े पद पर कार्यरत होने के बावजूद जैन धर्म का एक सूत्र अपने जीवन में उतारा *जियो और जीने दो* राष्ट के सर्वोच्च पद पर बैठने के बाद भी उन्होंने स्वयं के लिए किसी प्रकार का परिग्रह नहीं जोड़ा।बस वें सभी भारतवासीयो के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत बनकर इंसानियत को जिंदा रखा।
डॉ. नीरज का यह उदाहरण हमें सिखाता है कि धन की नहीं, मन की संपन्नता सुख का आधार है। अगर समाज में अधिक लोग “मुझे और नहीं चाहिए” कहने लगें, तो यह दुनिया और भी सुंदर बन सकती है।
 *विशेष: हमारे जीवन में भी कोई एक प्रेरणास्त्रोत होना चाहिए जिसकी प्रेरणा से हम इंसानियत को समझकर जीवन सार्थक करें। अंततः संतोष ही सुख की सबसे सच्ची परिभाषा है। संतोषी बनें, और जीवन को सुखमय बनाएं।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

पाप की गठरी

*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 पाप की गठरी ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 फाल्गुन कृष्ण ग्यारस, 13 फरवरी शुक्रवार 2025 कलि काल के  प्रथम  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  संस्कार प्रदाता श्री आदिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  आदिनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 फाल्गुन कृष्ण ग्यारस, 13 फरवरी शुक्रवार 2025 कलि काल के  11 वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री श्रेयांसनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  श्रेयांसनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 फाल्गुन कृष्ण बारस , 14 फरवरी शनिवार 2025 कलि काल के  20 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से सर्व सुख समृद्धि प्रदाता शनि की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के,धनके सभी विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,05,07, 08,13,14, 16,17,22, 23 व 24 फरवरी ( 10 व 11 को नवमी तिथि और 23 को षष्ठी तिथि का क्षय सप्तमी तिथि मान्य होगी ) तारीख को  कल्याणक महोत्सव है। 💯✅विशेष :- 5,8,14, 22 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 09 व 24  फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी  को है।*

*🔔🐎 अष्टान्हिका महापर्व 24  फरवरी से प्रारंभ है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त 4,5,10,19,20,21  फरवरी माह में  मुहूर्त है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त   1,6,18, 26,27 फरवरी को है।🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 1, 2, 12,13, 21,26,27 फरवरी को है।✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त 19,20, 21,26 को है।*
*🐎✍️ पंचक  23 से 26 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*पाप की गठरी* 

मानव जीवन में सच्ची महानता संपत्ति या पद से नहीं, बल्कि दूसरों की सहायता करने की भावना से मापी जाती है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि जिनसे हम सबसे कम उम्मीद रखते हैं, वही सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आते हैं और यही संदेश इस कहानी के माध्यम से मिलता है।

एक नगर में सेठ और एक गरीब का घर आमने-सामने था। सेठ को कभी इस बात की परवाह नहीं थी कि उसका पड़ोसी गरीब है। गरीब की बेटी रुक्मणि अब विवाह योग्य हो चुकी थी।
⬇️⬇️⬇️✅⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️✅⬆️⬆️⬆️
एक दिन गरीब पड़ौसी ने सेठ से बेटी के विवाह के लिए कुछ धन उधार माँगा, लेकिन सेठ ने यह सोचकर मना कर दिया कि गरीब आदमी ऋण लौटा नहीं पाएगा।

उसी रात सेठ के घर एक चोर घुस आया। संयोगवश सेठ और सेठानी जाग रहे थे, इसलिए चोर छिपकर उनकी बातें सुनने लगा।

सेठानी बोली—“देखते ही देखते देखो ना पड़ौसी की रुक्मणि सयानी हो गई है। अब उसके पिता को शादी कर देनी चाहिए।” 

सेठ ने उत्तर दिया—“आज उन्होंने मुझसे धन माँगा था, पर मैंने इनकार कर दिया। अब सोचता हूँ, शायद मुझे उसकी मदद करनी चाहिए थी।”

यह सुनकर चोर के मन में हलचल हुई, पर कुछ देर बाद दोनों पति-पत्नी सो गए और चोर ने घर से धन चुरा लिया।

घर से निकलते समय चोर को याद आया कि उसकी पत्नी ने बर्तन लाने को कहा था। जोखिम उठाकर दोबारा सेठ के घर जाना ठीक न लगा, तो वह पड़ौसी गरीब के घर पहुँच गया। वहाँ भी पति पत्नी जाग रहे थे। माता-पिता बेटी के भविष्य की चिंता में व्याकुल थे।

गरीब ने कहा—“सेठ ने मदद से इनकार कर दिया, पर अपनी जगह वो सही भी है।” 

पत्नी की आँखों में आँसू थे—“चार महीने में रुक्मणि की शादी करनी है, वरना…” गरीब की लाचारी देखकर चोर को अपनी संतान को खोने का दर्द याद आ गया। उसका हृदय पिघल गया।

उसने कुछ बर्तन झोली में डाले और आँगन की मिट्टी पर कोयले से लिख दिया— 
“सेठ की तरफ से रुक्मणि के विवाह के लिए दिया गया धन – एक चोर” 
और धन की पोटली वहीं छोड़कर वह चला गया।

सुबह को जब यह बात फैली तो हलचल मच गई—सेठ के घर चोरी और गरीब के यहाँ धन! 

गरीब पहले तो दुविधा में पड़ा, पर फिर ईमानदारी से वह पोटली लेकर सेठ के पास पहुँचा और सारी बात बता दी।

सेठ ने संदेश पढ़ा और गहरे विचार में डूब गया। 
“एक चोर भी इतना नेक हो सकता है कि चुराया हुआ धन किसी की भलाई में लगा दे, और मैं इतना धनी सेठ होते हुए भी मदद न कर सका!”

यह सोचकर सेठ ने गरीब को पोटली का आधा धन विवाह हेतु दे दिया और कहा— “इसे लौटाने की कोई आवश्यकता नहीं। यह बेटी रुक्मणि की शादी के लिए है।”

गरीब भावुक होकर बोला—“सेठ जी, आप सचमुच महान हैं।” 
सेठ मुस्कराए—“न मैं महान हूँ, न तुम। महान तो वह चोर है, जिसने हमें भलाई का असली अर्थ समझा दिया। काश, ऐसे भले चोर दुनिया में और भी होते।”

इतना कहकर सेठ ने गरीब को गले से लगा लिया।
  💖 विशेष💖:- सच्ची भलाई  वही है, जो बिना स्वार्थ और दिखावे के की जाए। कभी-कभी अच्छाई वहाँ से मिलती है, जहाँ से हम सबसे कम उम्मीद करते हैं। इसलिए हमें भी अपने मन में करुणा और मदद की भावना जीवित रखनी चाहिए।
*👨‍👨‍👦‍👦⏰🔔समझें:- आज वर्तमान में सभी व्यापार नौकरी करते है।उस व्यापार नौकरी में बहुत कुछ करना आज के मानव अनिवार्य हो गया है।उस अनिवार्य के कारण व्यक्ति विशेष को कुछ पाप भी संग्रह हो रहें है।उस संग्रहीत पाप की गठरी को समाप्त करने के लिए पूर्वाचार्यों ने अत्यंत ही सरल विधि बताई। व्यक्ति विशेष को अपनी आमदनी का छठवां हिस्सा ( याने जैसे किसी की किसी भी माध्यम से सौ रुपए की आमदनी होगी तो उसे सत्रह रुपए धर्म कार्य में खर्च करना अनिवार्य है।)धर्म कार्य में खर्च करने से वह पाप की गठरी का भार बढ़ता नहीं है। अतः सभी अपनी पाप की गठरी को अपने ही हाथों से उसका वजन कम करते जाओ।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏