शुक्रवार, 31 मई 2024

सुखी कैसे बनें....?

*सुखी कैसे बनें ..?*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सुखी कैसे बनें ..? ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 जेष्ठ कृष्ण 10, शनिवार  , 01 जून  2024 कलिकाल के 13 वें तीर्थंकर विमलनाथ भगवान बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री विमलनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 जेष्ठ कृष्ण 10, सोमवार  , 03 जून  2024 कलिकाल के 14 वें तीर्थंकर अनंतनाथ भगवान बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री विमलनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जून माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 5, 6, 10 18, 23, 27,29 को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 जून माह में  अष्टमी तिथि  8 व 29 जून को है। चतुर्दशी तिथि 5 व 20 जून को है।*
*🙆इस जून माह कोई भी विवाह मुहूर्त नहीं है। विवाह मुहूर्त 9 जुलाई से प्रारंभ होकर 15 जुलाई तक ही है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

 *अब समझे इस कहानी के माध्यम से कि हम सभी सुखी कैसे बनें ..?*

एक भिखारी किसी किसान के घर भीख माँगने गया। किसान की स्त्री घर में थी, उसने चने की रोटी बना रखी थी। किसान जब घर आया, उसने अपने बच्चों का मुख चूमा, स्त्री ने उनके हाथ पैर धुलाये, उसके बाद वह रोटी खाने बैठ गया। स्त्री ने एक मुट्ठी चना भिखारी को डाल दिया, भिखारी चना लेकर चल दिया।

रास्ते में भिखारी सोचने लगा, “हमारा भी कोई जीवन है? दिन भर कुत्ते की तरह माँगते फिरते हैं। फिर स्वयं बनाना पड़ता है। इस किसान को देखो कैसा सुन्दर घर है। घर में स्त्री है, बच्चे हैं, अपने आप अन्न पैदा करता है। बच्चों के साथ प्रेम से भोजन करता है। वास्तव में सुखी तो यह किसान है।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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इधर वह किसान रोटी खाते-खाते अपनी स्त्री से कहने लगा, “नीला बैल बहुत बुड्ढा हो गया है, अब वह किसी तरह काम नहीं देता, यदि कहीं से कुछ रुपयों का इन्तजाम हो जाये तो इस साल का काम चले। साधोराम महाजन के पास जाऊँगा, वह ब्याज पर दे देगा।” 

भोजन करके वह साधोराम महाजन के पास गया। बहुत देर उत्तर चिरौरी विनती करने पर 1रु. सैकड़ा सूद पर साधों ने रुपये देना स्वीकार किया। एक लोहे की तिजोरी में से साधोराम ने एक थैली निकाली और गिनकर रुपये किसान को दे दिये।

रुपये लेकर किसान अपने घर को चला, वह रास्ते में सोचने लगा- “हम भी कोई आदमी हैं, घर में 5 रु. भी नकद नहीं। कितनी चिरौरी विनती करने पर उसने रुपये दिये हैं। साधो कितना धनी है, उसके पास सैकड़ों रुपये हैं।” वास्तव में सुखी तो यह साधो राम ही है। साधोराम छोटी सी दुकान करता था, वह एक बड़ी दुकान से कपड़े ले आता था और उसे बेचता था।

दूसरे दिन साधोराम कपड़े लेने गया, वहाँ सेठ पृथ्वीचन्द की दुकान से कपड़ा लिया। वह वहाँ बैठा ही था कि इतनी देर में कई फोन आए कोई बम्बई का था तो कोई कलकत्ते का, किसी ने कहां था 5 लाख मुनाफा हुआ, किसी में एक लाख का। साधो महाजन यह सब सुनता रहा, कपड़ा लेकर वह चला आया। रास्ते में सोचने लगा, “हम भी कोई आदमी हैं, सौ दो सौ जुड़ गये महाजन कहलाने लगे। पृथ्वीचन्द कैसे हैं, एक दिन में लाखों का फायदा। “वास्तव में सुखी तो यह है, उधर पृथ्वीचन्द बैठा ही था, कि इतने ही में फोन आया कि 5 लाख का घाटा हुआ। वह बड़ी चिन्ता में था कि नौकर ने कहा, आज लाट साहब की रायबहादुर सेठ के यहाँ दावत है। आपको जाना है, मोटर तैयार है।” 

पृथ्वीचन्द मोटर पर चढ़ कर रायबहादुर की कोठी पर चला गया। वहाँ सोने चाँदी की कुर्सियाँ पड़ी थी, रायबहादुर जी से कलक्टर-कमिश्नर हाथ मिला रहे थे। बड़े-बड़े सेठ खड़े थे। वहाँ पृथ्वीचन्द सेठ को कौन पूछता, वे भी एक कुर्सी पर जाकर बैठ गया। लाट साहब आये, राय बहादुर से हाथ मिलाया, उनके साथ चाय पी और चले गये।

पृथ्वीचन्द अपनी मोटर में लौट रहें थे, रास्ते में सोचते आते हैं, हम भी कोई सेठ हैं, 5 लाख के घाटे से ही घबड़ा गये। राय बहादुर का कैसा ठाठ है, लाट साहब उनसे हाथ मिलाते हैं। “वास्तव में सुखी तो ये ही है।”
         
अब इधर लाट साहब के चले जाने पर रायबहदुर के सिर में दर्द हो गया, बड़े-बड़े डॉक्टर आये एक कमरे वे पड़े थे। कई फोन आए घाटे के एक साथ आ गये थे। उनकी भी चिन्ता थी, कारोबार की भी बात याद आ गई। वे चिन्ता में पड़े थे, तभी खिड़की से उन्होंने झाँक कर नीचे देखा, एक भिखारी हाथ में एक डंडा लिये अपनी मस्ती में जा रहा था। राय बहदुर ने उसे देखा और बोले, “वास्तव में तो सुखी यही है, इसे न तो घाटे की चिन्ता न मुनाफे की फिक्र, इसे लाट साहब को पार्टी भी नहीं देनी पड़ती, सुखी तो यही है।”

*👨‍👨‍👦‍👦शिक्षा ग्रहण करने के लिए:-*
*🔔इस प्रसंग से हमें यह पता चलता है कि हम एक-दूसरे को सुखी समझते हैं, पर वास्तव में सुखी कौन है, इसे तो वही जानता है जिसे आन्तरिक शान्ति है, जिसे आन्तरिक सुकून है। आप चाहे भिखारी हों चाहे करोड़पति हों। लेकिन आप के मन में जब तक शांति नहीं है तब तक आपको सुकून नहीं मिल सकता।*

*🔔🎪👨‍👨‍👦‍👦⏰✍️विशेष :- भव्य आत्माओं,जो भी व्यक्ति विशेष मन की, शरीर की,धन की, सभी प्रकार की शान्ति चाहते हों तो आप अपने कर्तव्यों का पालन प्रतिदिन करना प्रारंभ करें। देखिए ऐसा बदलाव आएगा जिसके बारे में हमने सपने में भी नहीं सोचा था।यह चमत्कार केवल आपके कर्तव्य ही कर सकते है इसके लिए किसी की आवश्यकता नहीं होती है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 28 मई 2024

हमारे कर्म ही हमारा आईना है

*हमारे कर्म ही हमारा आईना है*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒हमारे कर्म ही हमारा आईना है  ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 जेष्ठ कृष्ण 6, बुधवार  , 29 मई  2024 कलिकाल के 11 वें तीर्थंकर श्रेयांसनाथ भगवान गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री श्रेयांसनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जून माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 1,3,5,6,10 18, 23,27,29 को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 जून माह में  अष्टमी तिथि  8 व 29 जून को है। चतुर्दशी तिथि पांच व बीस जून को है।*
*🙆इस जून माह कोई भी विवाह मुहूर्त नहीं है। विवाह मुहूर्त 9 जुलाई से प्रारंभ होकर 15 जुलाई तक ही है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

👨‍👨‍👦‍👦एक दिन सभी कर्मचारी जब ऑफिस पहुंचे तो उन्हें गेट पर एक बड़ा सा नोटिस लगा दिखा :” इस कंपनी में जो व्यक्ति आपको आगे बढ़ने से रोक रहा था कल उसकी मृत्यु हो गयी ।हम आपको उसे आखिरी बार देखने का मौका दे रहे हैं , कृपया बारी-बारी से मीटिंग हॉल में जाएं और उसे देखने का कष्ट करें ।
जो भी नोटिस पढता उसे पहले तो दुःख होता लेकिन फिर जिज्ञासा हो जाती की आखिर वो कौन था जिसने उसकी ग्रोथ रोक रखी थी … और वो हॉल की तरफ चल देता …देखते देखते हॉल के बाहर काफी भीड़ इकठ्ठा हो गयी , गार्ड्स ने सभी को रोक रखा था और उन्हें एक -एक कर के अन्दर जाने दे रहा था।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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सबने देखा की अन्दर जाने वाला व्यक्ति काफी गंभीर हो कर बाहर निकलता , मानो उसके किसी करीबी की मृत्यु हुई हो !… इस बार अन्दर जाने की बारी एक पुराने कर्मचारी की थी …उसे सब जानते थे ,सबको पता था कि उसे हर एक चीज से शिकायत रहती है …. कंपनी से , सहकर्मियों से , वेतन से हर एक चीज से !

पर आज वो थोडा खुश लग रहा था …उसे लगा कि चलो जिसकी वजह से उसकी लाइफ में इतनी प्रोब्लम्स थीं वो गुजर गया …अपनी बारी आते ही वो तेजी से ताबूत के पास पहुंचा और बड़ी जिज्ञासा से उचक कर अन्दर झाँकने लगा …पर ये क्या अन्दर तो एक बड़ा सा आइना रखा हुआ था।

यह देख वह क्रोधित हो उठा और जोर से चिल्लाने के हुआ कि तभी उसे आईने के बगल में एक सन्देश लिखा दिखा –
“इस दुनिया में केवल एक ही व्यक्ति है जो आपकी ग्रोथ रोक सकता है और वो आप खुद हैं . इस पूरे संसार में आप वो अकेले व्यक्ति हैं जो आपकी ज़िन्दगी में क्रांति ला सकता है .

आपकी ज़िन्दगी तब नहीं बदलती जब आपका अधिकारी या स्थान बदलता है , जब आपके दोस्त बदलते हैं , जब आपके पार्टनर बदलते हैं , या जब आपकी कंपनी बदलती है …. ज़िन्दगी तब बदलती है जब आप बदलते हैं , जब आप अपनी मर्यादाएं  तोड़ते हैं , जब आप इस बात को समझते हैं कि अपनी ज़िंदगी के लिए सिर्फ और सिर्फ आप जिम्मेदार हैं । सबसे अच्छा रिश्ता जो आप बना सकते हैं वो खुद से बनाया रिश्ता है । खुद को देखिये , समझिये …कठिनाइयों से घबराइए नहीं उन्हें पीछे छोडिये … विजेता बनिए , खुद का विकास करिए और अपनी उस वास्तविकता का निर्माण करिए जिसका करना चाहते हैं !

*विशेष:-भव्य आत्माओं ,दुनिया एक आईने की तरह है : वो इंसान को उसके शशक्त विचारों का प्रतिबिम्ब प्रदान करती है । ताबूत में पड़ा आइना दरअसल आपको ये बताता है की जहाँ आप अपने विचारों की शक्ति से अपनी दुनिया बदल सकते हैं वहां आप जीवित होकर भी एक मृत के समान जी रहे हैं। हमें इसी वक़्त दहन कर दीजिये उस पुराने  ‘मैं’  को और एक नए  ‘मैं’  का सृजन कीजिये मैं किसी भी कार्य का कर्ता नहीं हूं यह जो भी आवश्यक कार्य है यह मेरा कर्तव्य है!!*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 12 मई 2024

कंजूस व्यक्ति

*‼️कंजूस व्यक्ति‼️*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒‼️कंजूस व्यक्ति‼️  ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल षष्ठी, सोमवार  , 13 मई  2024 कलिकाल के चतुर्थ  तीर्थंकर अभिनंदन नाथ भगवान गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री कुंथुनाथ भगवान जी का गर्भ व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल 8 शाश्वत पर्व, बुधवार , 15 मई  2024 कलिकाल के 15 वें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री धर्मनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल नवमी, गुरुवार  , 16 मई  2024 कलिकाल के 5 वें तीर्थंकर सुमतिनाथ भगवान गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री सुमतिनाथ भगवान जी का तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔मई माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  18 को महावीर स्वामी का ज्ञान व 29 को श्रेयांसनाथ का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉मई माह में  शुक्ल पक्ष में अष्टमी तिथि  पंद्रह मई को है। चतुर्दशी तिथि बाईस मई को है।*
*🙆इस माह कोई भी विवाह मुहूर्त नहीं है। विवाह मुहूर्त 9 जुलाई से प्रारंभ होकर 15 जुलाई तक ही है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
       
एक समय की बात है एक नगर में एक कंजूस सेठ रहता था।

उसकी कंजूसी सर्वप्रसिद्ध थी वह खाने, पहनने तक में भी कंजूस था।

एक बात उसके घर से एक लौटा गुम हो गया इसी लौटा के दुःख में उस ने तीन दिन तक कुछ न खाया परिवार के सभी सदस्य उसकी कंजूसी से दुखी थे ।

मोहल्ले में उसकी कोई इज्जत न थी, क्योंकि वह किसी भी सामाजिक कार्य में दान नहीं करता था।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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एक बार उस  के मोहल्ले में धार्मिक कथा का आयोजन हुआ वेदमंत्रों व् उपनिषदों पर आधारित कथा हो रही थी उस को सद्बुद्धि आई तो वह भी कथा सुनने के लिए सत्संग में पहुँच गया।

 प्रवचन के प्राकृतिक सिद्धांतों को सुनकर उसको भी रस आने लगा क्योंकि प्राकृतिक सिद्धान्त व्यावहारिक व् वास्तविकता पर आधारित एवं सत्य-असत्य का बोध कराने वाले होते है।

कंजूस को और रस आने लगा उसकी कोई कदर न करता फिर भी वह प्रतिदिन कथा में आने लगा। 

कथा के समाप्त होते ही वह सबसे पहले शंका पूछता इस तरह उसकी रूचि बढती गई।

सनातन कथा के अंत में नगर भोज का आयोजन था इसलिए कथावाचक ने इसकी सूचना दी कि रविवार को नगर के सभी लोगों के सहयोग से भोजन होगा इसके लिए जो श्रद्धा से कुछ भी लाना चाहे या दान करना चाहे तो कर सकता है।

अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार सभी लोग कुछ न कुछ लाए कंजूस के हृदय में जो सच्चे देव शास्त्र गुरु के प्रति श्रद्धा पैदा हुई वह भी एक गठरी बांध सर पर रखकर लाया।

भीड़ काफी थी कंजूस को देखकर उसे कोई भी आगे नहीं बढ़ने देता इस प्रकार सभी दान देकर यथास्थान बैठ गए।

अब कंजूस की बारी आई तो सभी लोग उसे देख रहे थे कंजूस को संत की ओर बढ़ता देख सभी को हंसी आ गई क्योंकि सभी को मालूम था कि यह महाकंजूस है।

उसकी गठरी को देख लोग तरह-तरह के अनुमान लगाते ओर हँसते, लेकिन कंजूस को इसकी परवाह न थी।

कंजूस ने आगे बढ़कर संत  को प्रणाम किया जो गठरी अपने साथ लाया था, उसे उसके चरणों में रखकर खोला तो सभी लोगों की आँखें फटी-की-फटी रह गई। 

कंजूस के जीवन की जो भी अमूल्य संपत्ति गहने, जेवर, हीरे-जवाहरात आदि थे उसने सब कुछ को दान कर घोषणा की इस संपत्ति से नगर में एक संतभवन का निर्माण कार्य किया जाएं। यहां पर संतो का निवास होने से हमें और हमारी पिढ़ी को सच्चे ज्ञान की प्राप्ति होगी । जिससे वे अपने बहुमूल्य वोट का सही इस्तेमाल कर भ्रष्टाचार युक्त राजनीति को समाप्त कर तानाशाही राजनेताओं को आगे बढ़ने से रोका जा सकेगा।

उठकर वह यथास्थान जाने लगा तो संत महात्मा ने कहा, “महाराज! आप वहाँ नहीं, यहाँ बैठिये।”

कंजूस बोला, “संत जी! यह मेरा आदर नहीं है, यह तो मेरे धन का आदर है, अन्यथा मैं तो रोज आता था और यही पर बैठता था, तब मुझे कोई न पूछता था।”

संत महात्मा ने कहा , “नहीं, महाराज! यह आपके धन का आदर नहीं है, बल्कि आपके महान त्याग (दान) का आदर है। 

यह धन तो थोड़ी देर पहले आपके पास ही था, तब इतना आदर-सम्मान नहीं था जितना की अब आपके त्याग (दान) में है इसलिए आप आज से एक सम्मानित व्यक्ति बन गए है।

*🎪🔔👨‍👨‍👦‍👦✍️🔑विशेष:-भव्य आत्माओं, मनुष्य को कमाना भी चाहिए और दान भी अवश्य देना चाहिए इससे उसके जीवन में कभी भी दरिद्रता नही आयेगी।समाज में सम्मान और यहलोक तथा परलोक में भी धनवान के घर जन्म मिलता है।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 9 मई 2024

सुनहरा मौका तीर्थंकर बनने का

*🌲सुनहरा मौक़ा तीर्थंकर बनने का🌲**.... 

*🌞श्री शान्तीसागराय नम:⏰*

*👪"सच्चा साथी"👪*

*जैनम् जयतु शासनम*

*🌲दान दिवस अक्षय तृतीया पर सुनहरा मौका तीर्थंकर बनने का🌲*

*ओम ह्रीं नम:*
       *महानुभावों,*
      *🌲भारत सरकार के द्वारा देवस्थान विभाग जयपुर(राजस्थान) से रजिस्टर्ड संस्था सन् 2013 से सतत् सभी साधु(त्यागीव्रृतियो) व धर्म प्रेमियों के लिए "श्री शांतिसागर समाधि साधना सेवा केंद्र ट्रस्ट "  की संस्था की स्थापना की गई है । इस संस्था का मुख्य उद्देश्य धर्म की नींव मजबूत करना है। यह संस्था सत्य धर्म के पालन करने वाले जीव को, जीव की आत्मा को परमात्मा बनाने में सहयोगी है ।जो भी जीव किसी जीव के समाधि मरण में सहयोगी बनता है , उस जीव का नियम से समाधि मरण होता है । जिस जीव का समाधिमरण होता है वह जीव सात आठ भव के अंदर 8⃣4⃣ लाख योनियो से छुटकारा पाकर सिद्यालय में अपना स्थान निर्धारित कर लेता है ।*जो इस संस्था से जुड़े हुए है, तथा जो व्यक्ति जुड़ना चाहते है।उनके लिए यह विशेष अवसर प्राप्त हो रहा है।अतः आप शक्ति के अनुसार सहयोग करते हुए अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग करें।*  

#https://youtu.be/jM9Qq3mEcMk
 
*➡️जानिए दान दिवस पर आपको क्या करना है । यह जानने के लिए उपरोक्त लिंक को क्लिक कीजिए और जानिए आचार्य 108 श्री विद्यासागरजी मुनिराज के धर्मप्रभावक शिष्य निर्यापक मुनिश्री सुधासागरजी के मुख से दान दिवस का महत्व*
  अक्षय तृतीया पर आप दान कर भविष्य में तीर्थंकर या प्रथम दानदाता राजा श्रेंयास भी बन सकते हो विस्तार से जानने के लिए https://youtu.be/mhcVRp4JlFk?si=K8Ks94da1-494JLk इस लिंक से सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करें ।
       *🌞आप सभी के लिए यह एक सुनहरा अवसर प्राप्त हो रहा है आप यथाशक्ति इस संस्था में दान कर पुण्यके सहभागी बने ।आप सभी से निवेदन है आप अपनी चंचला लक्ष्मी का स्वंय की आत्मा को परमात्मा बनाना चाहते हैं, तो आप इस संस्था में आज ही दान देकर अपना मोक्ष  की ट्रेन में अपना स्थान सुरक्षित करें ।*

*🕉व्यवहार में दान ही त्याग है। दान त्याग धर्म का व्यवहारिक रूप है। धानत राय ने पूजा में कहा भी है 'उत्तम त्याग कहो जग सारा, 'औषधि शास्त्र अभय आहारा,। निश्चय राग-द्वेष निरवारे, ज्ञाता दोनों दान संभारे'। निश्चय से राग-द्वेष निवारण ही त्याग है। व्यवहार में दान ही त्याग है।*

*👨‍👩‍👧‍👦प्रत्येक प्राणी को अपनी शक्ति के अनुसार दान अवश्य करना चाहिये। दान चार प्रकार के हैं- औषधि, ज्ञान, अभय व आहार। वृक्षादि एकेन्द्रिय प्राणी, गाय, भैंस आदि तिर्यंच प्राणी भी फल-फूल, दूध प्रदान करते हैं। हम तो पंचेन्द्रिय प्राणी हैं, मनुष्य भव में हैं। दान गृहस्थों का पुनीत कर्तव्य है। वर्तमान वातावरण में बढती हुई असमानता को सद् गृहस्थ दान के माध्यम से दूर कर सकते हैं।*

*🔯कभी हमारे देश में घी और दूध की नदियां बहती थी, परंतु आज कुछ भी नहीं है। क्या कारण है? अवश्य ही कोई मूल में गलती है। हमने त्याग, दान भूला दिया है। भारत कभी अतिथि सत्कार के लिए प्रसिद्ध था, आज हम इन बातों को भूलते जा रहे हैं।*
*🌲सम्यक्त्व चिंतामणि नामक ग्रंथ में लिखा है कि त्याग के बिना मुक्ति नहीं होती, त्याग के बिना हित का मार्ग नहीं है और त्याग ही लोकोत्तर अत्यंत श्रेष्ठ धर्म है। कर्म भूमि के मनुष्य का जीवन पारस्परिक सहयोग से ही चलता है। भूखे को भोजन देना, रोगी को औषध देना, अज्ञानी को ज्ञान देना और प्राण नाश की आशंका से भयभीत मनुष्य को अभय देना मनुष्य मात्र का कर्तव्य है। त्याग के द्वारा ही संसार के बङे-बङे काम चलते हैं।*

*➡"उत्तम त्याग करे जो कोई, भोग भूमि सुर शिवसुख होई"- उत्तम त्याग करने वाले व्यक्ति को मुक्ति सुंदरी स्वयंमेव वरण करती है तथा देवता भी उसे नमस्कार करते हैं।*

🤝 *किस्मत आपके हाथ में नहीं होती*
                 *परन्तु*
*निर्णय आपके हाथ में होता है*
*किस्मत आपका निर्णय नहीं बदल सकती*
                *परन्तु*
*आपका निर्णय आपकी किस्मत बदल सकता है*🤝
      🙏 🙏   🙏 🙏
*🙏बहुत से काम मनुष्य अकेला नही कर सकता। समाज की सेवा किसी स्वार्थ से नही की जाती । समाज की सेवा मनुष्य के जीवन का विनियोग हैं। समाज के लिए दान या सेवा मनुष्य का कर्तव्य है और कर्तव्य के लिए कोई मूल्य नही होता है।   इस पृथ्वी पर आपने मनुष्य भव प्राप्त किया है तो थोड़ा सा अपने आमदनी में से साधु (त्यागीव्रृतियो) सेवा में अवश्य खर्च करें ताकि आप भी  दिगंबर मुनि बन कर अपनी आत्मा का कल्याण कर सके।* 
*धन्यवाद ....धन्यवाद.... धन्यवाद*....
              .... *आप सभी का शुभचिंतक*....
                     *सेवाव्रतीस्वामीजी*
01.💐 Sevavrti Punjab National Bank*
*A/C No.5871000100010922*
*IFC Code PUNB 0587100* 
Durgapura JAIPUR (Rajasthan)
*आनलाइन पैसे ट्रांसफर करने वाले  9982411713 इस नंबर पर सभी प्रकार के पेटीएम,पे फोन, भीम एयरटेल आदि सभी पर ट्रांसफर कर धर्म लाभ प्राप्त कर सकते है।*
*सम्पर्क सूत्र:-*
*💐 1. 9461956111*  
*🕉 2. 09982411713*
          
*☸उपरोक्त नंबर पर आप पैसे भेजकर वाट्सएप द्वारा सूचना दे।*
🕉↔↔💐💐💐💐↔🔔🕘

*🙆‍♀अनंत काल से इस शरीर संरचना मे सहयोगी सभी जीवो का है हम सब पर कर्ज है।* 
*🌲इसीलिए तो प्रतिपल जयणा पूर्वक अहिंसामय जीवन जीना है हम सभीका फर्ज।*

*☸(प्रत्येक जीव के शरीर का एक एक कण किसी न किसी के सहयोग से पोषण प्राप्त करके बना है। हर एक जीव दुसरे जीव का सहयोगी है इस जगत मे। माता के गर्भ मे रहकर अपने शरीर को हम सभी ने पाया ये हमारी जननी का सहयोग है जिसने अपने शरीर से हमे सींचा है।*

*👨‍👩‍👧‍👦इस सम्पूर्ण जीवन मे कोई स्वेच्छा से सहयोग देते है तो कोई बिना स्वेच्छा के। कोई खुशी से तो कोई दुखी होकर। और इसी प्रकार कर्मबंधन करते है। पर सहयोग तो प्रतिपल प्राप्त होते ही आ रहा है। निगोद मे हो जीव या त्रसकाय, तिर्यच या मनुष्यकाय, स्वर्ग हो या नरक सभी ही जीव एकदूसरे का सहयोग पाते है। और साथ ही साथ इस प्रकृति के प्रत्येक कण और सम्पूर्ण आकाश और तारामंडल भी हमारे सहयोगी है अप्रत्यक्ष रूपमे।*

*🕉अब जब सहयोग प्राप्त किया है तो सहयोगी बनना भी तो हमारा फर्ज है। बस इसी लिए प्रत्येक क्षण प्रत्येक जीवो की जयणा रखना हमारा फर्ज बनता है। हमारे कारण कोई भी जीव की किसी भी प्रकार हिंसा न हो यह जानते और पालते हुए जीना ही धर्म है। जैन शास्त्र कहते है धर्म का अर्थ कोई प्रथा या पौराणिक आस्था के अनुसार चलना नही पर अपने आत्मा के स्वभाव मे रहना धर्म है। और हम सभी का स्वभाव एक दूसरे का सहयोगी बनना है और इस कारण किसीको भी हमारे कारण कोई पीड़ा न पहुचे यह ध्यान रखना धर्म है।*

*🤝इसीलिए कहा गया है परस्पराग्रहो जीवनाम जिसका अर्थ है हर एक जीव दूसरे जीवका उपकारी है। यानी हर एक जीव एकदूसरे का सहयोगी बनकर अपना जीवन व्यतीत करता है।इस प्रकार से समझे तो निश्चित रूप से जान लेंगे की किस प्रकार हम हिंसा करते जा रहे है प्रत्येक पल। अपने घर परिवार मे, अपने आसपास मे रहते लोगोके सहयोगी न बनना संघी पंचेन्द्रीय जीव की हिंसा, पशुपक्षी और अन्य तिर्यच जीवो की जयणा न पालकर अपने कार्य करना उन सभी जीवोकी हिंसा, देवी देवता या नारकी के जीवो प्रति दुर्भावना रखना उनके प्रति हिंसा, और जो मिला है उसमे संतुष्ट होकर इस प्रकृति के आभारी न होकर इस प्रकृति मे प्रतिपल अपने मन के कसायो को और दुर्भावो को प्रसारित करना समस्त लोक की हिंसा।*

*👨‍👩‍👧‍👦आओ आप और हम सभी मिलकर प्रतिदिन इस समस्त जगत के और सभी जीवोके उपकार के लिए प्रतिपल सदभावना भावे और प्रतिपल प्रत्येक जीवोकी जयणा करते हुए अपना कार्य करे।)*

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🐢🚩🕉👪 *आपसभी मंगलमय🍏☎🍭🔆आचरण को प्राप्त करकें यह जीवन सफल बनायें* ⚽🌲🌞🌍
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रविवार, 5 मई 2024

सभी के तीन प्रश्न

*सभी के तीन प्रश्न*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सभी के तीन प्रश्न  ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 वैशाख कृष्ण 13, सोमवार , 6 मई  2024 कलिकाल के 15 वें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री धर्मनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 वैशाख कृष्ण चतुर्दशी शाश्वत पर्व, मंगलवार 7 मई  2024 कलिकाल के 21 वें तीर्थंकर नमिनाथ भगवान बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री नमिनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल एकम, बुधवार  , 8 मई  2024 कलिकाल के 17 वें तीर्थंकर कुंथुनाथ भगवान बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री कुंथुनाथ भगवान जी का जन्म , तप व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है। आज के तारीख में अमावस्या व एकम दोनों तिथि मान्य है।*
*🔔मई माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव   8, 10, 13,15, 16,18, 29 इन दिनांकों में है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉मई माह में  शुक्ल पक्ष में एकम तिथि का क्षय है। अष्टमी तिथि  पंद्रह मई को है। चतुर्दशी तिथि सात व बाईस मई को है।*
*⛳10 मई को प्रथम दान दिवस याने प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव का प्रथम पारणा, अक्षय तृतीया व रोहिणी व्रत*।
*🙆इस माह कोई भी विवाह मुहूर्त नहीं है। विवाह मुहूर्त 9 जुलाई से प्रारंभ होकर 15 जुलाई तक ही है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

विख्यात रूसी साहित्यकार “टालस्टाय” अपनी कहानी “तीन प्रश्न” में लिखते हैं कि किसी राजा (वर्तमान में सभी व्यक्ति विशेष राजा ही है। जैनदर्शन के अनुसार राजा वह है जिसने पांच इंद्रियों के विषयों को स्वयं के आचरण से काबू में रखा हुआ है।) के मन में तीन प्रश्न अक्सर उठा करते थे जिनके उत्तर पाने के लिए वह अत्यंत अधीर था इसलिए उसने अपने राज्यमंत्री से परामर्श किया और अपने सभासदों की एक बैठक बुलाई। राजा ने उस सभा में जो अपने तीनों प्रश्न सबके सम्मुख रखे; वे थे —

1. सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य क्या होता है?

2. परामर्श के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति कौन होता है?

3. किसी भी निश्चित कार्य को करने का महत्त्वपूर्ण समय कौन सा होता है?

कोई भी राजा के प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर न दे पाया लेकिन उस सभा में राजा को एक ऐसे संन्यासी के बारे में पता चला जो सुदूर जंगल में एक कुटिया में रहते थे और सबकी जिज्ञासा का समाधान करने में समर्थ थे।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 राजा भी साधारण वेष में अपने कुछ सैनिकों एवं गुप्तचरों को साथ लेकर चल दिया उस संन्यासी के दर्शनों के लिए। दिल में एक ही आस थी कि अब उसे अपने प्रश्नों के उत्तर अवश्य ही मिल जायेंगे। जब वे सब सन्यासी की कुटिया के समीप पहुंचे तो राजा ने अपने सभी सैनिकों एवं गुप्तचरों को कुटिया से दूर रहने का आदेश दिया और स्वयं अकेले ही आगे बढ़ने लगा।

राजा ने देखा कि अपनी कुटिया के समीप ही सन्यासी खेत में कुदाल चला रहे हैं। कुछ ही क्षणों में उनकी दृष्टि राजा पर पड़ी। कुदाल चलाते-चलाते ही उन्होंने राजा से उसके आने का कारण पूछा और राजा ने भी बड़े आदर से अपने वही तीनों प्रश्न संन्यासी को निवेदित कर दिए। राजा अपने प्रश्नों के उत्तर की प्रतीक्षा करने लगा लेकिन यह क्या? साधु ने तो उत्तर देने की बजाय राजा को उसकी कुदाल लेने का संकेत कर डाला और राजा भी कुदाल लेकर खेत जोतने लगा। आख़िरकार राजा को अपने प्रश्नों के उत्तर भी तो चाहिए थे।

राजा के खेत जोतते-जोतते संध्या हो गयी। इतने में ही एक घायल व्यक्ति जो खून से लथपथ था और जिसके पेट से खून की धार बह रही थी, उस संन्यासी की शरण लेने आया। अब संन्यासी एवं राजा दोनों ने मिलकर उस घायल की मरहम पट्टी की। दर्द से कुछ राहत मिली तो घायल सो गया। प्रातः जब वह घायल आगंतुक राजा से क्षमायाचना करने लगा तो राजा के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। आगन्तुक राजा की स्थिति देख तत्काल अपना परिचय देते हुए बोला – “कल तक आपको मैं अपना घोर शत्रु मानता था क्योंकि आपने मेरे भाई को आजीवन कारावास की सज़ा दी थी। बदले का अवसर ढूढ़ता रहता था। कल मुझे पता लग गया था कि आप साधारण वेषभूषा में इस साधु के पास आये हैं। आपको मारने के उद्देश्य से मैं यहाँ आया था और एक झाड़ी के पीछे छिपकर बैठा था लेकिन आपके गुप्तचर मुझे पहचान गये और घातक हथियारों से मुझे चोट पहुँचाई लेकिन आपने अपना शत्रु होने के बावजूद भी मेरे प्राणों की रक्षा की। परिणामतः मेरे मन का द्वेष समाप्त हो गया है। अब मैं आपके चरणों का सेवक बन गया हूँ। आप चाहे दण्ड दें अथवा मुझे क्षमादान दें, यह आपकी इच्छा।”

घायल की बात सुनकर राजा स्तब्ध रह गया और मन ही मन इस अप्रत्याशित ईश्वरीय सहयोग के लिए के लिये प्रभु का धन्यवाद करने लगा। संन्यासी मुस्कुराया और राजा से कहने लगा – “राजन्, क्या अभी भी आपको अपने प्रश्नों के उत्तर नहीं मिले ?”

राजा कुछ दुविधा में दिखाई दे रहा था इसलिए संन्यासी ने ही बात आगे बढ़ाई – आपके पहले प्रश्न का उत्तर है — सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य वही होता है जो हमारे सामने होता है; जैसे आपने मुझे खेत जोतने में सहयोग दिया। यदि आप मुझे सहानुभूति न दिखाते तो आपके जीवन की रक्षा न हो पाती। जिस प्रकार के सुख हम चाहते है हमें भी उसी प्रकार का बीज बोना चाहिए।

आपका दूसरा प्रश्न था कि परामर्श के लिए कौन महत्त्वपूर्ण होता है जिसका उत्तर आपको स्वयं ही मिल चुका है कि जो व्यक्ति हमारे पास उपस्थित होता है, उसी से परामर्श मायने रखता है। जैसे उस घायल व्यक्ति को सहायता की आवश्यकता थी जिसके प्राण आपने बचाये। इस तरह आपका शत्रु भी आपका मित्र बन गया।जो भी व्यक्ति विशेष चाहे आपके परिवार का हो या अनुभवी हो जो आपकी समस्याओं को सुलझाने में आपका मार्गदर्शन करें उस व्यक्ति विशेष से अपने मन की दुविधाएं कहना चाहिए।

तीसरे प्रश्न का उत्तर यही है कि किसी भी निश्चित कार्य को करने का महत्त्वपूर्ण समय होता है “ हमारा वर्तमान”। स्थिति परिस्थिति व स्वयं की योग्यता अनुसार ही किसी भी योग्य जीव की सहायता की जा सकती है।वह पेड़ पौधे हो या व्यक्ति विशेष।

*🎪🔔👨‍👨‍👦‍👦🙏⛳विशेष :- भव्य आत्माओं,, महान् रूसी साहित्यकार टालस्टाय की यह कहानी हमें सावधान करती है कि वर्तमान के महत्त्व को कभी भी नहीं भूलना चाहिए। भविष्य की चिंता में वर्तमान यदि बिगड़ गया तो हम हाथ ही मलते रह जायेंगे। प्रस्तुत कार्य को मनोयोग से करना अथवा समय का सदुपयोग ही न केवल उज्ज्वल भविष्य की संभावनाओं की नींव होता है अपितु यही सर्वांगीण प्रगति का मूलमंत्र भी है..!!*


*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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