बुधवार, 30 जून 2021

जामुन के साइड इफेक्ट

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🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞

🕉️🌞सच्चा साथी🌞🕉️

👨‍👩‍👧‍👦जामुन के साईड इफेक्ट👨‍👩‍👧‍👦
    ✍️➡️आइए जानते हैं आखिर किन लोगों को नहीं करना चाहिए जामुन का सेवन। 

         ✍️➡️जामुन एक सदाबहार वृक्ष है जिसके फल बैंगनी रंग के होते हैं | यह वृक्ष भारत एवं दक्षिण एशिया के अन्य देशों एवं इण्डोनेशिया आदि में पाया जाता है। इसे विभिन्न घरेलू नामों जैसे जामुन, राजमन, काला जामुन, जमाली, ब्लैकबेरी आदि के नाम से जाना जाता है। प्रकृति में यह अम्लीय और कसैला होता है और स्वाद में मीठा होता है।

➡️Side Effects of Jamun: 
   ▶️औषधीय गुणों से भरपूर जामुन व्यक्ति के शरीर को कई रोगों से बचाए रखने में मदद करता है। जामुन का सेवन करने से न सिर्फ इम्यूनिटी मजबूत होती है बल्कि शरीर में खून की कमी पूरी होने के साथ ,ब्लड शुगर भी नियंत्रित रहता है। जामुन का सेवन करने से मिलने वाले अनगिनत फायदों के बावजूद कुछ लोगों को इनका सेवन करने की मनाही होती है। आइए जानते हैं आखिर किन लोगों को नहीं करना चाहिए जामुन का सेवन। 

▶️ब्लड शुगर- 
आयुर्वेद के अनुसार जामुन का सेवन हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। ब्लड शुगर को भी नियंत्रित करने के लिए जामुन की गुठली का पाउडर या जामुन को डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। लेकिन कई बार लोग ब्लड शुगर पर जल्दी नियंत्रण पाने के लिए इसका अधिक सेवन कर लेते हैं। जिसकी वजह से उन्हें लो ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है। 

▶️कब्ज- 
जामुन में विटामिन सी प्रचूर मात्रा में मौजूद होता है। ऐसे में इसका अधिक सेवन व्यक्ति को कब्ज की समस्या पैदा कर सकता है। 

▶️मुंहासे- 
अगर आप जामुन का ज्यादा सेवन करते हैं, तो आपको चेहरे पर मुंहासे की समस्या हो सकती है।  

▶️उल्टी की समस्या- 
कई लोगों को जामुन खाने के बाद उल्टी का सामना करना पड़ता है। अगर आपको इस तरह की शिकायत है, तो बेहतर है कि उसका सेवन न करें। 

▶️सर्जरी
जामुन ब्लड शुगर के लेवल को कम कर सकता है। इसलिए सर्जरी के दौरान और बाद में इसका सेवन करने से बचना चाहिए। इससे आपका ब्लड शुगर स्थिर रहे। सर्जरी से कम से कम 2 सप्ताह पहले जामुन का सेवन बंद कर दें।

▶️खून के थक्के जमना
एथेरोस्क्लेरोसिस और रक्त के थक्के से संबंधित समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए जामुन का सेवन करने से बचना चाहिए।

▶️वात दोष
अगर आपको वात दोष संबंधी समस्या है तो जामुन का सेवन करने से बचना चाहिए।

Disclaimer- इस आलेख में दी गई जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
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घमंड से पतन की और?

😏 *घमंड से पतन की और* 😌

*👉कितना घमंड है आज के इंसान को। क्या समझता है खुद को ?आखिर किस बात का घमंड है इंसान को.?*

*👧सुंदरता पर घमंड👩* *➡️एक मामूली दुर्घटना में दो मिनट में ही इंसान की सुंदरता गायब हो जाती है। वो रोगी बन जाता है। चमड़ी देखने लायक नहीं होती। *

*👨‍👩‍👧‍👦बदन पर घमंड👨‍👩‍👧‍👦*

*🔜जब इंसान को लकवा हो जाता है तब वो खुद उठ नहीं सकता हिल नहीं सकता बार बार उसे सहारे की जरूरत पड़ती है। तब कहाँ जाता है उसका ये बदन। *

*🤗पैसे का घमंड🤗*
*➡️दो मिनट में इंसान का व्यापार ठप हो जाता है, पाई पाई का मोहताज बन जाता है। *

*😓औलाद का घमंड😓*

*➡️बेटा हो या बेटी कब कोई ऐसा कदम उठा ले कि सारा अहंकार धरा का धरा रह जाए। कब घर छोड़कर चला जाए*

*😇सत्ता का घमंड😇*

*➡️सत्ता कभी भी पलट सकती है। आप किसी भी समय हीरो से जीरो हो सकते हो। आपके साथ चलने वाले आपकी हाँ में हाँ मिलाने वाले दो ही पल में पलटी खायेगें। फिर सत्ता नहीं तो क्या करोगे। फिर भी इंसान को इतना घमण्ड क्यों?*

*😃इंसान क्या लेकर आया था क्या लेकर जाएगा कुछ भी नहीं खाली हाथ ही जाएगा। *

*🌝कोई साथ नहीं जाएगा*
*😛एक सुई तक भी साथ नहीं जाएगी। बस जाता है नाम, आपका नाम, आपका काम, आपके गुण, आपका प्यार, आपका अच्छा व्यवहार, और आपके अच्छे प्यारे बोल। *
*🥰छोड दें - दूसरों को नीचा दिखाना। *
*🐱छोड दें - दुसरो की सफलता से जलना। *
*✍छोड दें - दूसरों के धन से जलना। *
*👩‍🦰छोड दें - दूसरों की चुगली करना। *
*😃छोड दें - दूसरों की सफलता पर इर्ष्या करना। *

*✍ये सब मिथ्या है। ✍*

*🙏🏻✊जयभारत माता की 🌞✊*

पैसों की कहानी

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🕉️🌞वसुनंदी गुरुवे नमः🌞🕉️

🌞🕉️सच्चा साथी🕉️🌞

👨‍👩‍👧‍👦👇पैसे की सच्चाई👇👨‍👩‍👧‍👦

*वाह रे पैसा!* 
            *तेरे कितने नाम?*

मंदिर मे दिया जाये तो
*( चढ़ावा )* 

आश्रम मे दिया तो
*(दान)*

                    स्कुल में
                    *( फ़ीस )*
शादी में दो तो
*( दहेज )*
               तलाक देने पर
              *( गुजारा भत्ता )* 

आप किसी को देते
हो तो *( कर्ज )* 
                   अदालत में
                   *( जुर्माना )*

सरकार लेती है तो
*( कर )* 
                सेवानिवृत्त होने पे
                *( पेंशन )*

अपहर्ताओ के लिए
*( फिरौती )*
                 होटल में सेवा के लिए
                 *( टिप )*

बैंक से उधार लो तो
*( ऋण )*
                     श्रमिकों के लिए
                      *( वेतन )* 

मातहत कर्मियों के लिए
*( मजदूरी )*
            अवैध रूप से प्राप्त सेवा
             *( रिश्वत )*

और मुझे दोगे तो
*(गिफ्ट)*

            *मैं पैसा हूँ:!*
मुझे आप मरने के बाद ऊपर नहीं ले जा सकते;
मगर जीते जी मैं आपको बहुत ऊपर ले जा सकता हूँ।

             *मैं पैसा हूँ:!*
मुझे पसंद करो सिर्फ इस हद तक कि लोग आपको नापसन्द न करने लगें।

             *मैं पैसा हूँ:!*
मैं भगवान् नहीं मगर लोग मुझे भगवान् से कम नहीं मानते।

        *मैं पैसा हूँ:!*
मैं नमक की तरह हूँ। जो जरुरी तो है, मगर जरुरत से ज्यादा हो तो जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है।

         *मैं पैसा हूँ:!*
इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे जिनके पास मैं बेशुमार था;
मगर फिर भी वो मेरे और उनके लिए रोने वाला कोई नहीं था।

         *मैं पैसा हूँ:!*
मैं कुछ भी नहीं हूँ; मगर मैं निर्धारित करता हूँ कि लोग
आपको कितनी इज्जत देते है।

         *मैं पैसा हूँ:!*
मैं आपके पास हूँ तो आपका हूँ!
आपके पास नहीं हूँ तो,
आपका नहीं हूँ! मगर मैं 
आपके पास हूँ तो 
सब आपके हैं।

            *मैं पैसा हूँ:!*
मैं नई नई रिश्तेदारियाँ बनाता हूँ;
मगर असली औऱ पुरानी बिगाड़ देता हूँ।

            *मैं पैसा हूँ:!*

मैं सारे फसाद की जड़ हूँ;
मगर फिर भी न जाने क्यों
सब मेरे पीछे इतना पागल हैं?
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सोमवार, 28 जून 2021

जीवन का अर्थ

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🕉️🌞वसुनंदी गुरुवे नमः🌞🕉️

🌞🕉️सच्चा साथी🕉️🌞

*⏰😇मेरा चिंतन😇⏰*

      *✍जीवन का अर्थ✍*

 *जीवन"* का अर्थ है-- *"आशा" और "प्रगति"* । जिसे सही अर्थो में जीवन जीना आ गया, उसे पल भर को भी निराशा और दुःख की भावना उत्पीड़ित नहीं कर सकती । कठिन से कठिन परिस्थितियों में वह *"आशावादी व्यक्ति हँसते-मुस्कराते जीता है"* और अंततः लक्ष्य पा ही लेता है । *"जीवन"* का अभिप्राय है-- *"प्रगति,"* अर्थात प्रतिक्षण अपने भाव संस्थान को गुण, कर्म और स्वभाव को उत्कृष्ट बनाना । *"धन," "वैभव" तथा "अन्य लौकिक ऐषणाएँ तो क्षणजीवी हैं, नश्वर हैं,"* कामनाओं और वासनाओं को अधिकाधिक बढ़ाने वाली हैं, परन्तु जिसने अपनी आत्मा को निर्मल बना लिया, कषाय-कल्मषों से स्वयं को मुक्त कर लिया, *"वही सच्चा सुख प्राप्त करता है ।"*
👉 जिसे जीना आ गया,  उसका जीवन स्वतः ही पुष्प जैसा सुंदर, चंदन जैसा शीतल, सुगंधित तथा दीपक जैसा प्रकाशवान बन जाता है । *"वह पुष्प के सदृश हँसता-खिलखिलाता, "सत्यम्-शिवम्-सुन्दरम्" युक्त जीवन व्यतीत करता है ।"* चंदन के समान समीपवर्ती वातावरण को सुगंधित बनाए रखता है तथा घिसे जाने पर भी रोष, विद्वेष की भावना मन में नहीं लाता । दीपक के सदृश वह तिल-तिल जलकर अंधकार से लड़ता है तथा अंतिम बूँद तक दूसरों को प्रकाश देता रहता है । 
🌞✍️ जैनम् जयतु शासनम् ✍️🌞
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रविवार, 27 जून 2021

अभ्यास का महत्व

🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞

*🌞🕉️सच्चा साथी🕉️🌞*

*अभ्यास का महत्त्व*  

प्राचीन समय में विद्यार्थी गुरुकुल में रहकर ही पढ़ा करते थे। बच्चे को शिक्षा ग्रहण करने के लिए गुरुकुल में भेजा जाता था। 

बच्चे गुरुकुल में गुरु के सानिध्य में आश्रम की देखभाल किया करते थे और अध्ययन भी किया करते थे।
वरदराज को भी सभी की तरह गुरुकुल भेज दिया गया। 

वहां आश्रम में अपने साथियों के साथ घुलने मिलने लगा।
लेकिन वह पढ़ने में बहुत ही कमजोर था। 

गुरुजी की कोई भी बात उसके बहुत कम समझ में आती थी। इस कारण सभी के बीच वह उपहास का कारण बनता है।

उसके सारे साथी अगली कक्षा में चले गए लेकिन वो आगे नहीं बढ़ पाया।
गुरुजी जी ने भी आखिर हार मानकर उसे बोला, “बेटा वरदराज! मैने सारे प्रयास करके देख लिये है। 

अब यही उचित होगा कि तुम यहां अपना समय बर्बाद मत करो। 

अपने घर चले जाओ और घरवालों की काम में मदद करो।”

वरदराज ने भी सोचा कि शायद विद्या मेरी किस्मत में नहीं हैं। और भारी मन से गुरुकुल से घर के लिए निकल गया गया।

दोपहर का समय था। रास्ते में उसे प्यास लगने लगी। 

इधर उधर देखने पर उसने पाया कि थोड़ी दूर पर ही कुछ महिलाएं कुएं से पानी भर रही थी। वह कुवे के पास गया।
वहां पत्थरों पर रस्सी के आने जाने से निशान बने हुए थे,तो उसने महिलाओ से पूछा, “यह निशान आपने कैसे बनाएं।”
तो एक महिला ने जवाब दिया, “बेटे यह निशान हमने नहीं बनाएं। यह तो पानी खींचते समय इस कोमल रस्सी के बार बार आने जाने से ठोस पत्थर पर भी ऐसे निशान बन गए हैं।”
वरदराज सोच में पड़ गया। 

उसने विचार किया कि जब एक कोमल से रस्सी के बार-बार आने जाने से एक ठोस पत्थर पर गहरे निशान बन सकते हैं तो निरंतर अभ्यास से में विद्या ग्रहण क्यों नहीं कर सकता।

वरदराज ढेर सारे उत्साह के साथ वापस गुरुकुल आया और अथक कड़ी मेहनत की। 

गुरुजी ने भी खुश होकर भरपूर सहयोग किया।
कुछ ही सालों बाद यही मंदबुद्धि बालक वरदराज आगे चलकर संस्कृत व्याकरण का महान विद्वान बना। जिसने लघुसिद्धान्‍तकौमुदी, मध्‍यसिद्धान्‍तकौमुदी, सारसिद्धान्‍तकौमुदी, गीर्वाणपदमंजरी की रचना की।
शिक्षा-
*दोस्तो अभ्यास की शक्ति का तो कहना ही क्या हैं। यह आपके हर सपने को पूरा करेगी*। 
*अभ्यास बहुत जरूरी है चाहे वो खेल मे हो या पढ़ाई* में या किसी ओर चीज़ में। बिना *अभ्यास के आप सफल नहीं होतत्र सकते हो*।
*अगर आप बिना अभ्यास के केवल किस्मत के भरोसे बैठे रहोगे, तो आखिर मैं आपको पछतावे के सिवा और कुछ हाथ नहीं लगेगा। इसलिए अभ्यास के साथ धैर्य, परिश्रम और लगन रखकर आप अपनी मंजिल को पाने के लिए जुट जाए*

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भक्ति का फल

🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞

🌞✍सच्चा साथी✍🌞

*🕉️परमात्मा की भक्ति का फल* 

*✍एक अमीर व्यक्ति समुद्र में अकेले घूमने के लिए एक नाव बनवाई और छुट्टी के दिन वह नाव लेकर अकेले समुद्र की सैर करने निकल पड़ा। वह समुद्र में थोङा आगे पहुँचा ही था कि अचानक एक जोरदार तूफान आ गया। उसकी नाव पूरी तरह से तहस-नहस हो गइ लेकिन वह लाइफ जैकेट के साथ समुद्र में कूद गया।*
*जब तूफान शान्त हुआ तब वह तैरता-तैरता एक टापू पर जा पहुँचा। मगर वहाँ भी कोई नहीं था। टापू के चारों ओर समुद्र के अलावा क़ुछ भी नजर नहीं आ रहा था।उस आदमी ने सोचा कि जब मैंने पूरी जिंदगी में किसी का कभी बुरा नहीं किया तो मेरे साथ बुरा नहीं होगा। उसको लगा कि ईश्वर ने मौत से बचाया है तो आगे का रास्ता भी वही दिखाएँगे। धीरे-धीरे वह वहाँ पर उगे झाङ-फल-पत्ते खाकर दिन बिताने लगा।*
*🕉️मगर अब धीरे-धीरे उसे लगने लगा था कि वह इस टापू पर फंस गया है। मगर अब भी ईश्वर पर उसका भरोसा कायम था। उसने सोचा इतने दिनों से मैं इस टापू पर मारा-मारा फिर रहा हूँ, क्यों न यहाँ एक झोपड़ी बना लूं। पता नहीं अभी और कितने दिन यहाँ बिताने पड़ें। पूरे दिन लकडि़यां और पत्ते वगैरह इकट्ठा कर उसने झोंपड़ी बनानी शुरू की। रात होते-होते उसकी झोंपड़ी बनकर तैयार हो गई थी।*
*😇अभी वह झोंपड़ी के बाहर खड़ा होकर उसे देखते हुए सोच रहा था कि आज से झोंपडी में सोने को मिलेगा। मगर अचानक से मौसम बदला और बिजली जोर-जोर से कड़कने लगी और एक बिजली उसकी झोंपड़ी पर गिर गई। उसके देखते ही देखते झोंपड़ी जलकर खाक हो गई। यह देखकर वह व्यक्ति टूट गया।*
*🕉️उसने आसमान की तरफ देखकर बोला, हे ईश्वर ये तेरा कैसा इंसाफ है। तूने मुझ पर अपनी रहम की नजर क्यों नहीं की? मैंने हमेशा तुझ पर विश्वास बनाए रखा। फिर वह इंसान हताश और निराश होकर सर पर हाथ रखकर रोने लगा।*
*⏰अचानक ही एक नाव टापू के पास आई। नाव से उतर कर दो आदमी बाहर आए और बोले कि हम तुम्हें बचाने आए हैं। दूर से इस वीरान टापू में जलती हुई झोंपडी देखी तो लगा कि कोई उस टापू पर मुसीबत में है। अगर तुम अपनी झोंपडी नहीं जलाते तो हमें पता नहीं चलता कि टापू पर कोई है।उस आदमी की आंखों से आंसू गिरने लगे। उसने ईश्वर से माफी मांगी और बोला कि हे ईश्वर मुझे क्या पता था कि तूने मुझे बचाने के लिए मेरी झोंपडी जलाई थी। अब तो मुझे निश्चित हो गया कि आप अपने भक्त का हमेशा ख्याल रखते हैं। आपने मेरे सब्र का इम्तेहान लिया, लेकिन मैं उसमे फेल हो गया। मुझे माफ कर दें।*
*➡️इस कहानी से यही शिक्षा  मिलती है कि दिन चाहे सुख के हों या दुःख के, भगवान अपने भक्त के साथ हमेशा रहते हैं। हाँ हम एक बार ईश्वर से रूठ सकते हैं, लेकिन ईश्वर हमसे कभी नहीं वह हमेशा अच्छा ही करते है। अक्सर हमारे साथ भी ऐसे हालत बन जाते हैं, हम पूरी तरह निराश हो जाते हैं और अपने ईश्वर या नियति से रूठ जाते हैं और विश्वास खो देते हैं जिससे हमारे अर्थात आत्म विश्वास में भी गिरावट हो जाती है।*
*🙌लेकिन फिर बाद में हमें पता लगता है कि परमात्मा ने जो किया वह अच्छा ही किया था, नहीं तो आज मैं यहाँ न होता। इसलिए मुसीबत या दुःख के समय हार मानने की बजाय लगातार अपने कर्तव्य करते रहिए, और बाकी अपने परम पिता परमेश्वर छोड़ दीजिए, क्योंकि वह जो करेंगे निश्चित अच्छा ही करेंगे।*                                                              

  🌞✍️🌞✍️🌞✍️🌞✍️🌞✍️🌞
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शनिवार, 26 जून 2021

पहेली

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🕉️🌞वसुनंदी गुरुवे नमः🌞🕉️

🌞🕉️सच्चा साथी🌞🕉️ 
 
         *✍चार  मिले  चौंसठ  खिले* 
                  *⏰बीस  रहे  कर  जोड़!*
                *✍प्रेमी  सज्जन  दो  मिले* 
              *⏰खिल  गए   सात  करोड़!!*

 *➡️मुझसे एक बुजुर्गवार ने इस  कहावत का अर्थ पूछा       काफी  सोच-विचार  के  बाद  भी  जब  मैं  बता  नहीं  पाया,  तो  मैंने  कहा:  "बाबा  आप  ही  बताइए,  मेरी  समझ में  तो  कुछ  नहीं  आ  रहा !"*
         *😇तब  एक  रहस्यमयी  मुस्कान  के  साथ  बाबा  समझाने  लगे,  "देखो  बेटे,  यह  बड़े  रहस्य  की  बात  है…..  “चार  मिले”   का  मतलब  जब  भी  कोई  मिलता  है,  तो  सबसे पहले  आपस  में  दोनों  की  आंखें  मिलती  हैं।  इसलिए  कहा,  चार  मिले..*
           *😇फिर   कहा,  “चौसठ  खिले”  यानि   दोनों  के  बत्तीस-बत्तीस  दांत  कुल मिलाकर  चौंसठ  हो  गए,  इस  तरह   “चार  मिले, चौंसठ  खिले”   हुआ!"*
           *🤝“बीस  रहे  कर  जोड़”  दोनों  हाथों की  दस  उंगलियां,  दोनों व्यक्तियों की  बीस  हुईं , बीसों  मिलकर  ही  एक-दूसरे   को  प्रणाम  की  मुद्रा  में  हाथ  बरबस  उठ  ही  जाते  हैं!"*
           *🥰“प्रेमी   सज्जन   दो   मिले”,  जब दो  आत्मीय  जन  मिलें,  यह  बड़े  रहस्य  की  बात  है  क्योंकि  मिलने  वालों  में आत्मीयता  नहीं  हुई   तो  “न  बीस  रहे  कर जोड़”  होगा  और   न  "चौंसठ  खिलेंगे”*
          *✍उन्होंने  आगे  कहा,   वैसे  तो शरीर में  रोम  की  गिनती  करना  असम्भव  है,  लेकिन  मोटा-मोटा  साढ़े  तीन  करोड़  बताते  हैं,  बताने  वाले!  तो  अंतिम  रहस्य  “प्रेमी  सज्जन  दो  मिले”,   “खिल  गए  सात  करोड़”  का  अर्थ  हुआ  कि  जब  कोई आत्मीय  हमसे  मिलता  है,  तो  रोम-रोम खिलना  स्वाभाविक  ही  है  भाई  जैसे  ही  कोई  ऐसा  मिलता  है, तो   “खिल  गए  सात  करोड़”  यानि  हमारा  रोम-रोम  खिल  जाता है!"*

         *⏰इन्हीं कहावतों के जरिए हमारे बुजुर्ग,*
      *जिनको हम कम पढ़ा-लिखा समझते थे,*
          *हमारे  अंदर  गाहे-बगाहे  संस्कारो*
                 *✍का  बीज  बोते  रहते  थे।*
⏰🌞⏰🌞⏰🌞⏰🌞⏰🌞⏰🌞⏰

शुक्रवार, 25 जून 2021

मेरी भी सुनो

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🌞वसुनंदी गुरुवे नमः🌞

🌞🕉️सच्चा साथी🕉️🌞

⏰➡️👨‍👨‍👦‍👦✍एक साधारण परिवार से भारतीय रेलवे को चिठ्ठी

जैसे ही ट्रेन रवाना होने को हुई, 
एक  परिवार  एक ट्रंक लिए डिब्बे में चड़ पडे़।
दरवाजे के पास ही औरत तो बैठ गई पर आदमी चिंतातुर खड़ा था।
जानता था कि उसके पास जनरल टिकट है और ये रिज़र्वेशन डिब्बा है।
टीसी को टिकट दिखाते उसने हाथ जोड़ दिए।
" ये जनरल टिकट है।अगले स्टेशन पर जनरल डिब्बे में चले जाना।वरना आठ सौ की रसीद बनेगी।" 
कह टीसी आगे चला गया।
पति-पत्नी दोनों बेटी को पहला बेटा होने पर उसे देखने जा रहे थे।
सेठ ने बड़ी मुश्किल से दो दिन की छुट्टी और सात सौ रुपये एडवांस दिए थे।
 बीबी व लोहे की पेटी के साथ जनरल बोगी में बहुत कोशिश की पर घुस नहीं पाए थे।
 लाचार हो स्लिपर क्लास में आ गए थे। 
" साब, बीबी और सामान के साथ जनरल डिब्बे में चढ़ नहीं सकते।हम यहीं कोने में खड़े रहेंगे।बड़ी मेहरबानी होगी।" 
टीसी की ओर सौ का नोट बढ़ाते हुए कहा।
" सौ में कुछ नहीं होता।आठ सौ निकालो वरना उतर जाओ।"
" आठ सौ तो गुड्डो की डिलिवरी में भी नहीं लगे साब।नाती को देखने जा रहे हैं।गरीब लोग हैं, जाने दो न साब।" अबकि बार पत्नी ने कहा।
" तो फिर ऐसा करो, चार सौ निकालो।एक की रसीद बना देता हूँ, दोनों बैठे रहो।"
" ये लो साब, रसीद रहने दो।दो सौ रुपये बढ़ाते हुए आदमी बोला।
" नहीं-नहीं रसीद दो बनानी ही पड़ेगी। ऊपर से आर्डर है।रसीद तो बनेगी ही।
चलो, जल्दी चार सौ निकालो।वरना स्टेशन आ रहा है, उतरकर जनरल बोगी में चले जाओ।" 
इस बार कुछ डांटते हुए टीसी बोला।
आदमी ने चार सौ रुपए ऐसे दिए मानो अपना कलेजा निकालकर दे रहा हो।
 
दोनों पति-पत्नी उदास रुआंसे
ऐसे बैठे थे ,मानो नाती के पैदा होने पर नहीं उसके शोक  में जा रहे हो। 
कैसे एडजस्ट करेंगे ये चार सौ रुपए?
 क्या वापसी की टिकट के लिए समधी से पैसे मांगना होगा? 
नहीं-नहीं। 
आखिर में पति बोला- " सौ- डेढ़ सौ तो मैं ज्यादा लाया ही था। गुड्डो के घर पैदल ही चलेंगे। शाम को खाना नहीं खायेंगे। दो सौ तो एडजस्ट हो गए। और हाँ, आते वक्त पैसिंजर से आयेंगे। सौ रूपए बचेंगे। एक दिन जरूर ज्यादा लगेगा। सेठ भी चिल्लायेगा। मगर मुन्ने के लिए सब सह लूंगा।मगर फिर भी ये तो तीन सौ ही हुए।"
" ऐसा करते हैं, नाना-नानी की तरफ से जो हम सौ-सौ देनेवाले थे न, अब दोनों मिलकर सौ देंगे। हम अलग थोड़े ही हैं। हो गए न चार सौ एडजस्ट।" 
पत्नी के कहा।
 " मगर मुन्ने के कम करना....""
और पति की आँख छलक पड़ी।
" मन क्यूँ भारी करते हो जी। गुड्डो जब मुन्ना को लेकर घर आयेंगी; तब दो सौ ज्यादा दे देंगे। "
कहते हुए उसकी आँख भी छलक उठी।
फिर आँख पोंछते हुए बोली-
" अगर मुझे कहीं मोदीजी मिले तो कहूंगी-"
 इतने पैसों की बुलेट ट्रेन चलाने के बजाय, इतने पैसों से हर ट्रेन में चार-चार जनरल बोगी लगा दो, जिससे न तो हम जैसों को टिकट होते हुए भी जलील होना पड़े और ना ही हमारे मुन्ने के सौ रुपये कम हो।" 
उसकी आँख फिर छलक पड़ी।
" अरी पगली, हम गरीब आदमी हैं, हमें वोट देने का तो अधिकार है, पर सलाह देने का नहीं। रो मत।

(आपसभी से विनम्र निवेदन है जो भी इस कहानी को पढ़ चूका है उसे इस घटना से शायद ही इत्तिफ़ाक़ हो पर अगर ये कहानी शेयर करे ,कॉपी पेस्ट करे ,पर रुकने न दे शायद रेल मंत्रालय जनरल बोगी की भी परिस्थितियों को समझ सके। उसमे सफर करने वाला एक गरीब तबका है जिसका शोषण चिर काल से होता आया है।
   एक कोशिश परिवर्तनकीओर
                 .......एक साधारण परिवार से भारतीय रेलवे को चिठ्ठी,,,,,
🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️

गुरुवार, 24 जून 2021

दान

*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*

   🕉️🌞सच्चा साथी🌞🕉️    
    
*🌼चढ़ावा🌼*

⏰➡️पुरानी बात है एक सेठ के पास एक व्यक्ति काम करता था। सेठ उस व्यक्ति पर बहुत विश्वास करता था। जो भी जरुरी काम हो सेठ हमेशा उसी व्यक्ति से कहता था। वो व्यक्ति भगवान का बहुत बड़ा भक्त था l वह सदा भगवान के चिंतन भजन कीर्तन स्मरण सत्संग आदि का लाभ लेता रहता था।
          एक दिन उस ने सेठ से श्री जगन्नाथ धाम यात्रा करने के लिए कुछ दिन की छुट्टी मांगी सेठ ने उसे छुट्टी देते हुए कहा- भाई ! "मैं तो हूं संसारी आदमी हमेशा व्यापार के काम में व्यस्त रहता हूं जिसके कारण कभी तीर्थ गमन का लाभ नहीं ले पाता। तुम जा ही रहे हो तो यह लो 100 रुपए मेरी ओर से श्री जगन्नाथ प्रभु के चरणों में समर्पित कर देना।" भक्त सेठ से सौ रुपए लेकर श्री जगन्नाथ धाम यात्रा पर निकल गया।

         कई दिन की पैदल यात्रा करने के बाद वह श्री जगन्नाथ पुरी पहुंचा। मंदिर की ओर प्रस्थान करते समय उसने रास्ते में देखा कि बहुत सारे संत, भक्त जन, वैष्णव जन, हरि नाम संकीर्तन बड़ी मस्ती में कर रहे हैं। सभी की आंखों से अश्रु धारा बह रही है। जोर-जोर से हरि बोल, हरि बोल गूंज रहा है। संकीर्तन में बहुत आनंद आ रहा था। भक्त भी वहीं रुक कर हरिनाम संकीर्तन का आनंद लेने लगा। 

             फिर उसने देखा कि संकीर्तन करने वाले भक्तजन इतनी देर से संकीर्तन करने के कारण उनके होंठ सूखे हुए हैं वह दिखने में कुछ भूखे भी प्रतीत हो रहे हैं। उसने सोचा क्यों ना सेठ के सौ रुपए से इन भक्तों को भोजन करा दूँ। 
               उसने उन सभी को उन सौ रुपए में से भोजन की व्यवस्था कर दी। सबको भोजन कराने में उसे कुल 98 रुपए खर्च करने पड़े। उसके पास दो रुपए बच गए उसने सोचा चलो अच्छा हुआ दो रुपए जगन्नाथ जी के चरणों में सेठ के नाम से चढ़ा दूंगा l

           जब सेठ पूछेगा तो मैं कहूंगा पैसे चढ़ा दिए। सेठ यह तो नहीं कहेगा 100 रुपए चढ़ाए। सेठ पूछेगा पैसे चढ़ा दिए मैं बोल दूंगा कि, पैसे चढ़ा दिए। झूठ भी नहीं होगा और काम भी हो जाएगा।

         भक्त ने श्री जगन्नाथ जी के दर्शनों के लिए मंदिर में प्रवेश किया श्री जगन्नाथ जी की छवि को निहारते हुए अपने हृदय में उनको विराजमान कराया। अंत में उसने सेठ के दो रुपए श्री जगन्नाथ जी के चरणो में चढ़ा दिए। और बोला यह दो रुपए सेठ ने भेजे हैं।

        उसी रात सेठ के पास स्वप्न में श्री जगन्नाथ जी आए आशीर्वाद दिया और बोले सेठ तुम्हारे 98 रुपए मुझे मिल गए हैं यह कहकर श्री जगन्नाथ जी अंतर्ध्यान हो गए। सेठ जाग गया सोचने लगा मेरा नौकर तौ बड़ा ईमानदार है,

         पर अचानक उसे क्या जरुरत पड़ गई थी उसने दो रुपए भगवान को कम चढ़ाए ? उसने दो रुपए का क्या खा लिया ? उसे ऐसी क्या जरूरत पड़ी ? ऐसा विचार सेठ करता रहा।

         काफी दिन बीतने के बाद भक्त वापस आया और सेठ के पास पहुंचा। सेठ ने कहा कि मेरे पैसे जगन्नाथ जी को चढ़ा दिए थे  ? भक्त बोला हां मैंने पैसे चढ़ा दिए। सेठ ने कहा पर तुमने 98 रुपए क्यों चढ़ाए दो रुपए किस काम में प्रयोग किए। 

        तब भक्त ने सारी बात बताई की उसने 98 रुपए से संतो को भोजन करा दिया था। और ठाकुरजी को सिर्फ दो रुपए चढ़ाये थे। सेठ सारी बात समझ गया व बड़ा खुश हुआ तथा भक्त के चरणों में गिर पड़ा और बोला- "आप धन्य हो आपकी वजह से मुझे श्री जगन्नाथ जी के दर्शन यहीं बैठे-बैठे हो गए l

 भगवान को आपके धन की कोई आवश्यकता नहीं है। भगवान को वह 98 रुपए स्वीकार है जो जीव मात्र की सेवा में खर्च किए गए और उस दो रुपए का कोई महत्व नहीं जो उनके चरणों में नगद चढ़ाए गए...I

*भगवान को चढ़ावे की जरूरत नही होती। सच्चे मन से किसी जरूरतमंद की जरूरत को पूरा कर देना भी भगवान को भेंट चढ़ाने से भी कहीं ज्यादा अच्छा होता है !!! हम उस परमात्मा को क्या दे सकते हैं जिसके दर पर हम ही भिखारी हैं*

🌞🕉️👨‍👩‍👧‍👦✔️▶️नोट:- हमें भी अपने धन को सत कर्मों में खर्च करके अपना धन बढ़ाना चाहिये। हम सभी को शारीरिक मानसिक सामाजिक रूप से जैनधर्म के संस्कारों की स्वयं मे, परिवार, समाज ओर विश्व में वृद्धि करना आवश्यक है।

*🌹🙏जैनम् जयतु शासनम्🙏🌹*

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बुधवार, 23 जून 2021

क्षेत्रपाल बाबा की

🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️

🕉️🌞सच्चा साथी🌞🕉️

🔯🕉️क्षेत्रपाल बाबाजी🕉️🔯
               ▶️👨‍👩‍👧‍👦✍️ मंगू एक माली था, शहर में एक बड़ी सी कॉलोनी में जिसमें बहुत सारी बड़ी-बड़ी कोठिया बनी हुई थी, वह वहां जाता और वहां की 5-7 कोठियों के बगीचे की खूब रखवाली करता।
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जिस जिस के घर में भी वो काम करता सब घरवाले मंगू से बहुत खुश रहते थे। 
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कीमती लाल नाम का एक सेठ था। मंगु उसके घर में भी माली का काम करता था।
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मंगू जब भी कीमती लाल के घर के बगीचे में पौधों को पानी देता, मिट्टी खोदता तो एक ऐसी जगह होती जिस मे से उसको एक कोने में से मिट्टी के नीचे से थोड़ी थोड़ी आहट की आवाज आती।
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जैसे कि कोई मिट्टी को नीचे से खटखटा रहा हो, और बाहर निकलने की कोशिश कर रहा हो। 
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मंगू ने कई बार वह आवाज सुनी थी लेकिन उसने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया। उसने सोचा कि शायद कोई जानवर होगा। 
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लेकिन हर बार जब भी वह उस जगह जाता तो उसको आवाज जरूर आती। 
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एक दिन मंगू ने हिम्मत करके उस जगह को खोदा तो खोदते खोदते हैरान हो गया, उसमें से एक बहुत ही सुंदर से  क्षेत्रपाल बाबा की मूर्ति निकली। 
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मंगू ने क्षेत्रपाल बाबा को बाहर निकाला।क्षेत्रपाल बाबा का शरीर गर्म था और वह मिट्टी से लथपथ थे। 
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और मंगू को लगा कि शायद  क्षेत्रपाल बाबा की सांस भी चल रही है।
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यह देकर एकदम से हैरान हो गया। वह भागा भागा  क्षेत्रपाल बाबा को लेकर घर के अंदर गया और कीमती लाल की पत्नी को जाकर बोला.. 
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सेठानी जी यह देखो आपके बगीचे में से यह मुझे क्षेत्रपाल बाबा जी मिले हैं। 
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क्षेत्रपाल बाबा को देखकर कीमती लाल की पत्नी का रंग एकदम से पीला पड गया वह बोली तुम इसको क्यों निकाल कर लाए हो।
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तो मंगु बोला कि वहां से मुझे रोज आवाज आती थी, आज मिट्टी को खोदा तो उसमें से यह निकले... 
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मालकिन चीखती हुई बोली बड़ी मुश्किल से मैंने इससे पीछा छुड़वाया था। 
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कीमती लाल के दो बेटे थे कीमती लाल की पत्नी अपने बेटों को बहुत ही प्यार करती थी उनको सुबह उठकर तैयार करती,
नहलाती, स्कूल भेजती घर आते तो खाना खिलाती... 
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शाम को पढ़ाती रात को भी खाना खिलाकर लोरी सुना कर सुलाती। 
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कीमती लाल के घर एक  क्षेत्रपाल बाबा जी भी थे जिसको कीमती लाल की माता जी बहुत ही मानती थी। 
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माता जी के स्वर्गवास होने के बाद कीमती लाल ने अपने मंदिर में उस क्षेत्रपाल बाबा को बड़ी श्रद्धा से रखा हुआ था। 
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कीमती लाल भी क्षेत्रपाल बाबाजी को बहुत ही मानता था।
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लेकिन सेठानी जो थी उसको  क्षेत्रपाल बाबा की सेवा करना बड़ी मुश्किल लगता था... 
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कि सुबह उठकर इन को स्नान करवाऊ तो मेरे बेटे को कोन नहलाएगा, बाद में इन को भोग लगाऊ तो मेरे बेटे को खाना कौन खिलाएगा...
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रात को मैं इनको सुलाऊ तो मेरे बेटे को लोरी गाकर कोन सुलाएगा। बेटो के प्यार में वह अंधी हो चुकी थी। उसको यही बात बुरी लगती थी।
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इसी कारण उसने एक दिन निश्चय किया और घर के बगीचे में जाकर  क्षेत्रपाल बाबाजी को दबा दिया और कीमती लाल को बोल दिया कि  क्षेत्रपाल बाबाजी चोरी हो गए हैं। 
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 क्षेत्रपाल बाबा के चोरी होने पर कीमती लाल बहुत दुखी हुआ। लेकिन वह कर भी क्या सकता था। 
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आज जब क्षेत्रपाल बाबा को लेकर मंगु सेठानी के पास आ गया तो सेठानी चिढ़ गई और उसको बोली कि तुम इसको क्यों निकाल कर लाए हो। 
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मंगू ने कहा कि अब मैं इसका क्या करूं.. 
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मालकिन ने कहा तुम   क्षेत्रपाल बाबा को अपने पास रखो और दफा हो जाओ मेरे घर से आगे से यहां मत आना.. 
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क्योंकि सेठानी को डर था कि अगर यह सच कीमती लाल को मंगु ने बता दिया तो कीमती लाल उस पर बहुत गुस्सा करेगा और कीमती लाल की बीवी ने मंगु को नौकरी से निकाल दिया...
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अपने आसपास रहने वाले घर के लोगों को ही कह दिया की मंगू चोर है मैंने उस को अपने घर से नौकरी से निकाल दिया है...
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तुम लोग भी निकाल दो... तो सब लोगों ने कीमतीलाल की पत्नी की बात पर विश्वास कर लिया और मंगु को नौकरी से निकाल दिया। 
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मंगू इस बात से हैरान था कि मैंने क्या किया जो आज मुझे यह देख दिन देखना पड़ा.. 
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वह कपड़े में क्षेत्रपाल बाबा  जी को लपेट कर अपने घर गया.. 
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वह रोता हुआ अपनी पत्नी को इशारों में बताता है कि यह  क्षेत्रपाल बाबा जो मुझे सेठानी की घर से मिले.. लेकिन इसके मिलते ही मेरी सारी नौकरी छूट गई अब मैं इसका क्या करूं।
मंगु की पत्नी रुपाली ने बड़े प्यार से  क्षेत्रपाल बाबा को पकड़ा उसके शरीर पर लगी मिट्टी और जो भी लगा हुआ था उसको झाड़ कर एक कपड़े में बांध कर रख दिया.. 
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 क्षेत्रपाल बाबा को स्नान करा कर घर के कोने में बड़ी श्रद्धा से नीचे कपड़ा बिछा कर रख दिया। 
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मंगू जोकि बहुत उदास था उसको तो लग रहा था कि अब घर का गुजारा कैसे होगा.. 
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फिर उसने मन में सोचा कि  क्षेत्रपाल बाबा के मिलते ही मेरी नौकरी चली गई। यह सब  क्षेत्रपाल बाबा के कारण हुआ है... 
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लेकिन रुपाली ने उसको इशारों से समझाया कि  जी क्षेत्रपाल बाबा भगवान के रक्षक देव है यह सब देख लेंगे जो होता है अच्छे के लिए होता है।
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उसकी पत्नी ने कहा कि जो  क्षेत्रपाल बाबा के शरीर से मिट्टी उतरी है इसको कहां रखु.. 
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मंगू उस समय जो झल्लाया हुआ था वह बोला अपने घर के बाहर जो आंगन में मिट्टी है वहां फैंक दो।
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रूपाली ने वैसा ही किया। मंगु को चिंता के कारण नींद ना आई कि घर का गुजारा कैसे होगा लेकिन उसकी पत्नी तो बिल्कुल आराम से सोई थी...
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क्षेत्रपाल बाबा  को देखकर एक अजीब सा चैन मिला था और अजीब सी खुशी हुई थी और इसी आनन्द में वह सारी रात बड़ी सुकून से सोई।
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सुबह जब मंगु उठा तो उसने देखा कि आंगन में जिस जगह पर क्षेत्रपाल बाबा  के शरीर से मिट्टी उतार कर पत्नी ने फेंकी थी.. 
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उस जगह पर बहुत ही सुंदर फूल खिल गए हैं और उन फूलों की खुशबू सारे मोहल्ले में फैल गई। 
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सारे लोग सोचने लगे कि आज मोहल्ले में कैसी खुशबू आ रही हैं..  सब लोग देखने आए तो मंगु के आंगन में बहुत ही सुंदर फूल खिले हुए थे..
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तभी उधर से एक व्यक्ति गुजरा और उसने मंगु को कहा तूने अपने आंगन में इतने सुन्दर फूल खिला लिए हैं यह तो बहुत कीमती है... बाजार में तो इसकी बहुत कमाई होगी।
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यह सुनकर मंगु हैरान हो गया वह हाथ जोड़ता हुआ क्षेत्रपाल बाबा   जी के आगे गया और कहा कि मुझे क्षमा कर दो जो मैंने आप पर शंका की
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आपको सब का ख्याल है तो उसकी पत्नी मन्द मन्द मुस्कुराने लगी कि मंगु को भी अब क्षेत्रपाल बाबाजी पर विश्वास होने लगा है।
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मंगू ने वो फूलों को उतार कर पहले कुछ फूलों कोक्षेत्रपाल बाबाजी के चरणों मे रखा.. बाकि फूल बाजार में बेचे उसको बहुत ही अच्छे दाम मिले..
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अब तो वह फूल हर रोज मंगु के आंगन में खिलने लगे और फूलों को बेचकर मंगु माली से मालिक बन गया। 
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मंगू और उसकी पत्नी ने यह निश्चय किया था कि कीमती लाल की बीवी ने अपने बच्चों की परवरिश के कारण क्षेत्रपाल बाबाजी को मिट्टी में दबा दिया था... 
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आज से  क्षेत्रपाल बाबाजी ही हमारी संतान है ताकि हम भी अपनी संतान के कारण कहीं क्षेत्रपाल बाबा  जी की तरफ हमारा झुकाव कम ना हो जाए। 
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अब मंगु एक बहुत ही बड़ा फूलों का व्यापारी बन चुका था। उसने बहुत बड़ा आलीशान मकान ले लिया था। 
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एक दिन मंगू जब घर पर नहीं था और रूपाली घर पर अकेली थी... 
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तभी एक औरत बहुत बुरी अवस्था में जिसका शरीर बुढ़ापे के कारण बहुत कमजोर हो चुका था और उसको आंखों से भी नजर नहीं आ रहा था.. 
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तभी वह रूपाली के दरवाजे पर आकर भूख के कारण जिससे खड़ा नहीं हुआ जा रहा था वह बेहोश होकर गिर गई।
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रुपाली ने उसको जल्दी-जल्दी उठाया और अंदर ले गई.. 
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जब वह उठी तो उसने उस को भोजन कराया और इशारों से पूछा कि आप कौन हो... 
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लेकिन बहुत कमजोर होने के कारण वह कुछ ना बता सकी। 
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जब मंगू घर पर वापस आया तो उसने उस बूढ़ी औरत को देखा तो उसको पहचानने की कोशिश करने लगा।
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तभी उसको ध्यान आया यह तो वही कीमती लाल की पत्नी है..
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उसने पूछा कि माता जी आपका यह हाल कैसा हो गया, तो कीमती लाल की पत्नी बोली तुम कौन हो।
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मंगु ने बताया कि मैं वही आपका माली मंगु हूं जिस पर आप ने चोरी का इल्जाम लगाकर सारे मोहल्ले से नौकरी से निकलवा दिया था। 
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लेकिन आपके मुझ पर बहुत उपकार हैं।आपकी दिए हुए क्षेत्रपाल बाबा  के कारण ही आज मैं माली से मालिक बन गया हूं। 
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कीमती लाल की पत्नी यह सुनकर फफक फफक कर रोने लगी और मंगू के पैरों में गिरती हुई बोली मुझे क्षेत्रपाल बाबा  के पास ले चलो। 
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संतान के कारण मैंने क्षेत्रपाल बाबा  जी को जमीन मे गाड़ दिया था आज वही संतान ने मुझे घर से बाहर निकाल दिया है। 
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मेरे पति की मौत के बाद ही मेरे बच्चों ने मुझे आंखे दिखानी शुरू कर दी। 
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मेरा सब कुछ छीन कर अपनी पत्नीयों के कहने पर मुझे घर से धक्के मार कर बाहर निकाल दिया।
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शायद यह मेरे बुरे कर्मों का ही फल है जो मुझे मुझे सजा मिली है.. वह क्षेत्रपाल बाबाजी के चरणों गिरकर जोर जोर से रोने लगी कि मुझे क्षमा कर दो क्षेत्रपाल बाबाजी। 
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 क्षेत्रपाल बाबा  जी तो बहुत ही दयावान और कृपालु है।
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मंगू ने उस माताजी को उठाया और कहा आपको और कहीं जाने की जरूरत नहीं है.. 
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यह क्षेत्रपाल बाबा की कृपा है।आप हमारी माँ की तरह ही है आज से आप यही रहो.. 
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इसी तरह क्षेत्रपाल बाबा  जिस पर कृपा करते हैं उसको मालामाल कर देते हैं और पाप करने वालों को भी वो हमेशा क्षमा कर देते हैं।

बोलो क्षेत्रपाल बाबा जी की जय हो💐💐👏

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मंगलवार, 22 जून 2021

धारणाओं के कारण

🕉️🌞सच्चा साथी🌞🕉️

*✍️धारणाओं का असर!✍️*

*🔢एक अंधेरी रात में एक काफिला एक रेगिस्तानी सराय में जाकर ठहरा। उस काफिले में सौ ऊंट थे। उन्होंने खूंटियां गाड़कर ऊंट बांधे, किंतु अंत में पाया कि एक ऊंट अनबंधा रह गया है। उनकी एक खूंटी और रस्सी कहीं खो गई थी। अब आधी रात वे कहां खूंटी-रस्सी लेने जाएं?*

*🌞काफिले के सरदार ने सराय मालिक को उठाया - "बड़ी कृपा होगी यदि एक खूंटी और रस्सी हमें मिल जाती। 99 ऊंट बंध गए, एक रह गया - अंधेरी रात है, वह कहीं भटक सकता है।"*

*☸️वृद्ध बोले - मेरे पास न तो रस्सी है, और न खूंटी, किंतु एक युक्ति है। जाओ, और खूंटी गाड़ने का नाटक करो, और ऊंट से कह दो–सो जाए।*

 *❄️सरदार बोले - अरे, कैसा पागलपन है?*

*🕉️वृद्ध बोले - बड़े नासमझ हो, ऐसी खूंटियां भी गाड़ी जा सकती हैं जो न हों, और ऐसी रस्सियां भी बांधी जा सकती हैं जिनका कोई अस्तित्व न हो? अंधेरी रात है, आदमी धोखा खा जाता है, ये तो एक ऊंट है!* 

*🔯विश्वास तो नहीं था किंतु विवशता थी! उन्होंने गड्ढा खोदा, खूंटी ठोकी–जो नहीं थी। केवल आवाज हुई ठोकने की, ऊंट बैठ गया। खूंटी ठोकी जा रही थी। रोज-रोज रात उसकी खूंटी ठुकती थी, वह बैठ गया। उसके गले में उन्होंने हाथ डाला, रस्सी बांधी। रस्सी खूंटी से बांध दी गई–रस्सी, जो नहीं थी। ऊंट सो गया!*

*▶️वे बड़े हैरान हुए! एक बड़ी अदभुत बात उनके हाथ लग गई! सो गए! सुबह उठकर उन्होंने 99 ऊंटों की रस्सियां निकालीं, खूंटियां निकालीं–वे ऊंट खड़े हो गए! किंतु सौवां ऊंट बैठा रहा। उसको धक्के दिए, पर वह नहीं उठा!*

*✡️फिर वृद्ध से पूछा गया. वृद्ध बोले, "ऊंट भारतीयों की भांति बड़ा धार्मिक है! जाओ, पहले खूंटी निकालो! रस्सी खोलो!" सरदार बोले, "लेकिन रस्सी हो तब ना खोलूँ!*
*👨‍👩‍👧‍👦वृद्ध बोले - जैसा बांधने का नाटक किया था, वैसे ही खोलने का करो!"*

*✍️ऐसा ही किया गया, और ऊंट खड़ा हो गया! सरदार ने उस वृद्ध का धन्यवाद किया - "बड़े अदभुत हैं आप, ऊंटों के बाबत आपकी जानकारी बहुत गहरी है!"*

*🔯वृद्ध बोले, "यह सूत्र ऊंटों की जानकारी से नहीं, भारतीयों की जानकारी से निकला है!"*

*🌞वह भारतीय, जिसको अंग्रेजों ने जाने से पहले भारत की अधूरी राजनीति के खूंटे से बांध दिया था, आज भी वहीं बंधा है! वो आज भी अंग्रेजी भाषा और संस्कृति की गुलामी कर रहा है. उसे बार-बार बताने पर कि "तू स्वतंत्र हो गया है", खड़ा नहीं हो रहा! सहस्र वर्षों की गुलामी की रस्सी गले में लटका कर घूम रहा है! जो उसे धक्के देकर उठाना चाह रहा है, उसे शत्रु मान रहा है! फिर से गुलाम होना चाह रहा है!*

इस कहानी के माध्यम से हम सभी को शिक्षा लेनी चाहिए कि अनादि काल से मिथ्यात्व के प्रभाव से हमारे आत्मा पर भी कई प्रकार के कुसंस्कार पड़े हुए हैं। जिसके कारण हमारी आत्मा रत्नत्रय  को प्राप्त नहीं कर पा रही है। इसी कारण से हम चार गतियों में 8400000 योनियों में भ्रमण कर रहे हैं। अतः उस मिथ्यात्व के टुकड़े-टुकड़े करके हम रत्नत्रय  रूपी रत्न को धारण कर सकते हैं। यही हमारा जीवन का लक्ष्य होना चाहिए।

  *🌞🕉️जैनम् जयतु शासनम् 🌞🕉️*
🌞✍️🌞✍️❄️✍️🌞✍️🌞

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रविवार, 20 जून 2021

योग दिवस पर विशेष

🕉️🌞सच्चा साथी🌞🕉️

 👨‍👩‍👧‍👦अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्वसंध्या पर  विशेष👨‍👩‍👧‍👦

*॥ कपालभाती यह केवल एक प्राणायाम ही नही, बल्कि एक शुद्धी क्रिया भी है॥*

*डॉ. राजेश सिंघई, BA
MS, ने कपालभाती के विषय में अच्छी जानकारी दी है।*    

कपालभाती को बीमारी दूर करनेवाले प्राणायाम के रूप में देखा जाता है। मैने ऐसे पेशंट्स को देखा है, जो बिना बैसाखी के चल नही पाते थे, लेकिन नियमित कपालभाती करने के बाद उनकी बैसाखी छूट गई और वे ना सिर्फ चलने, बल्कि दौड़ने भी लगे। कपालभाती करने वाला साधक आत्मनिर्भर और स्वयंपूर्ण हो जाता है।

कपालभाती से हार्ट के ब्लॉकेजेस् पहिले ही दिन से खुलने लगते हैं और 15 दिन में बिना किसी दवाई के वे पूरी तरह खुल जाते है। 

कपालभाती करने वालों के हृदय की कार्यक्षमता बढ़ती है, जबकि हृदय की कार्यक्षमता बढ़ाने वाली कोई भी दवा उपलब्ध नही है। कपालभाती करनेवालों का हृदय कभी भी अचानक काम करना बंद नही करता, जबकि आजकल बड़ी संख्या में लोग अचानक हृदय बंद होने से मर जाते हैं। 
     
कपालभाती करने से  शरीरांतर्गत और शरीर के ऊपर की किसी भी तरह की गाँठ गल जाती है, क्योंकि कपालभाती से शरीर में जबर्दस्त उर्जा निर्माण होती है, जो गाँठ को गला देती है, फिर वह गाँठ चाहे ब्रेस्ट की हो अथवा अन्य कही की। ब्रेन ट्यूमर हो अथवा ओव्हरी की सिस्ट हो या यूटेरस के अंदर फाइब्रॉईड हो, क्योंकि सबके नाम भले ही अलग हो, लेकिन गाँठ बनने की प्रक्रिया एक ही होती है। 

कपालभाती से बढा हुआ कोलेस्टेरोल कम होता है। खास बात यह है कि, मैं कपालभाती शुरू करने के प्रथम दिन से ही मरीज की कोलेस्टेरॉल की गोली बंद करवाता हूँ।
    
कपालभाती से बढा हुआ इएसआर, युरिक एसिड, एसजीओ, एसजीपीटी, क्रिएटिनाईन, टीएसएच, हार्मोन्स, प्रोलेक्टीन आदि सामान्य स्तर पर आ जाते है। 

कपालभाती करने से हिमोग्लोबिन एक महिने में 12 तक पहुँच जाता है, जबकि हिमोग्लोबिन की एलोपॅथीक गोलियाँ खाकर कभी भी किसी का हिमोग्लोबिन इतना बढ़ नही पाता है। कपालभाती से हीमोग्लोबिन एक वर्ष में 16 से 18 तक हो जाता है। महिलाओं में हिमोग्लोबिन 16 और पुरुषों में 18 होना उत्तम माना जाता है।

कपालभाती से महिलाओं के मासिक धर्म की सभी शिकायतें एक महिने में सामान्य हो जाती है। 

कपालभाती से थायरॉईड की बीमारी एक महिने में ठीक हो जाती है। इसकी गोलियाँ भी पहिले दिन से बंद की जा सकती है।

इतना ही नही, बल्कि कपालभाती करने वाला साधक 5 मिनिट में मन के परे पहुँच जाता है। गुड़ हार्मोन्स का सीक्रेशन होने लगता है। स्ट्रेस हार्मोन्स गायब हो जाते है। मानसिक व शारीरिक थकान नष्ट हो जाती है। इससे मन की एकाग्रता भी आती है। 

*कपालभाति के कई विशेष लाभ भी हैं।* 

कपालभाती से खून में प्लेटलेट्स बढ़ते हैं। व्हाइट ब्लड सेल्स या रेड ब्लड सेल्स यदि कम या अधिक हुए हो, तो वे निर्धारित मात्रा में आकर संतुलित हो जाते हैं। कपालभाती से सभी कुछ संतुलित हो जाता है। ना तो कोई अंडरवेट रहता है, ना ही कोई ओव्हरवेट रहता है। अंडरवेट या ओव्हरवेट होना, दोनों ही बीमारियाँ है।
     
कपालभाती से कोलायटीस, अल्सरीटिव्ह कोलायटीस, अपच, मंदाग्नी, संग्रहणी, जीर्ण संग्रहणी, आँव जैसी बीमारियाँ ठीक होती है। काँस्टीपेशन, गैसेस, एसिडिटी भी ठीक हो जाती है। पेट की समस्त बीमारियाँ ठीक हो जाती है।

कपालभाती से सफेद दाग, सोरायसिस, एक्झिमा, ल्युकोडर्मा, स्कियोडर्मा जैसे त्वचारोग ठीक होते हैं। स्कियोडर्मा पर कोई दवाई उपलब्ध नही है, लेकिन यह कपालभाती से ठीक हो जाता है। अधिकतर त्वचा रोग पेट की खराबी से होते है। जैसे जैसे पेट ठीक होता है, ये रोग भी ठीक होने लगते हैं।

कपालभाती से छोटी आँत को शक्ति प्राप्त होती है, जिससे पाचन क्रिया सुधर जाती है। पाचन ठीक होने से शरीर को कैल्शियम, मैग्नेशियम, फॉस्फरस, प्रोटीन्स इत्यादि उपलब्ध होने से कुशन्स, लिगैमेंट्स, हड्डियाँ ठीक होने लगती हैं और 3 से 9 महिनों में अर्थ्राइटीस, एस्ट्रो अर्थ्राइटीस, एस्ट्रो पोरोसिस जैसे हड्डियों के रोग हमेशा के लिए ठीक हो जाते हैं। 

*ध्यान रखिये की कैल्शियम, प्रोटीन्स, हिमोग्लोबिन, व्हिटैमिन्स आदि को शरीर बिना पचाए, बाहर निकाल देता है, क्योंकि केमिकल्स से बनाई हुई इस प्रकार की औषधियों को शरीर द्वारा सोखे जाने की प्रक्रिया हमारे शरीर के प्रकृति में ही नही है।*

हमारे शरीर में रोज 10 % बोनमास चेंज होता रहता है। यह प्रक्रिया जन्म से मृत्यु तक निरंतर चलती रहती है। अगर किसी कारणवश यह बंद हुई, तो हड्डियों के विकार हो जाते हैं। कपालभाती इस प्रक्रिया को निरंतर चालू रखती है। इसीलिए कपालभाती नियमित रूप से करना आवश्यक है।

सोचिए, यह सिर्फ एक क्रिया कितनी लाभकारी है। इसीलिए नियमित रूप से कपालभाति करना, यह एक उत्तम व्यायाम प्रक्रिया है।
🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
नोट :- कोई भी व्यक्ति विशेष अपनी विशेष परेशानी होने पर वह हमारे 📲  9461956111 व्हाट्सएप नंबर पर अपने मैसेज देकर अपनी समस्या का निराकरण कर सकता है। जैसे भी हमारे पास समय होगा समय के अनुसार हम उसकी समस्या का निराकरण करने का प्रयास करेंगे।

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जैसी करनी वैसा फल

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🕉️🌞सच्चा साथी🌞🕉️

🔯जैसी करणी वैसा फल🔯

👨‍👩‍👧‍👦सत्य घटनाओं पर आधारित👨‍👩‍👧‍👦

    👨‍👩‍👧‍👦पदचिह्न....

सुधा....सुधा ....आँफिस से घरमे घुसते ही खुशी से झूमते  मोहन लगभग चिल्लाते हुए बोला...
अरे...अरे...कया बात है आज तो आपके चेहरे का अलग ही रंग है बडे खुश लग रहे हो मोहनजी.... हमें भी तो बताओ आखिर इस खुशी का राज कया है....
सुधा ...तुम सुनोगी तो तुमभी झूम उठोगी ....मेरा प्रमोशन हो गया है और मुझे कम्पनी टांसफर के तहत दिल्ली जाना है दिल्ली..... बडे भैया भाभी के शहर....
अब हम लोग भैया भाभी से मिल पाएंगे सुधा ...देखना वे हमें देखकर कितने खुश होते है.....
खबर सुनकर सुधा भी मुस्कुरा उठी ....
थोड़े दिनो मे मोहन दिल्ली शिफ्ट हो गया.... और अगले ही दिन वह कर सुधा के साथ भैया-भाभी से मिलने चल पड़ा...
घण्टी बजाने पर एक लड़की ने दरवाजा खोला.....
जी.....
रोहनबाबू ....
लडकी बिना कुछ बोले साइट हट गई...
मोहन लगभग दौडते हुए अंदर गया तो देखा भैया एक कमरे में लेटे हुए थे.....
मुंह कुछ टेढापन सा हाथों की भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी मोहन को समझते देर नहीं लगी ....उन्हें लकवा हो गया है...तबतक भाभी भी रसोईघर से बाहर आ गई थी
भाभी भी इतने वर्षों में काफी कमजोर हो चुकी थी जिनके चेहरे पर वेदना व दुख को साफ तौर पर महसूस किया जा सकता था
भाभी.....भैया आपकी यह हालत कैसे हो गई ...
और बच्चे कहां हैं आपकी देखभाल करने के लिए कोई नहीं है क्या...ये लडकी कौन है....
बडे भैया की आंखों से तो केवल गंगा जमुना ही बह रही थी...
तब भाभी ने ही बताया ....मोहन ....मेरे दोनों बच्चे अपनी अपनी गृहस्थी में मस्त है यहां आकर हमें सम्भालने के लिए उनके पास समय ही नही है...
तुम्हारे भैया को अब अच्छे डाक्टर और देखभाल की जरूरत है जो पैसों की कमी की वजह से नही हो पा रही है....जैसे तैसे मे लोगों के यहां से कपडे सिलने के लाकर गुजारा कर रही हूं ....पीछे से इनकी देखभाल के लिए ये लडकी रहती है ....कहकर भाभी सुबक पडी...
ये सुनते ही मोहन को धक्का लगा और यादों की परत दर पर खुलती हुई उस दिन पर जा अटकी जब भैया का सामान पैक हो चुका था वह उसे और मां को छोड़कर जा रहे थे....शहर ...
भैया.....आप हमें इस तरह छोड़ कर नहीं जा सकते...
मैं आपके बिना नहीं रह पाऊंगा ...प्लीज भाभी---आप ही भैया को समझाओ ना.... हम कम खाकर गुजारा कर लेंगे लेकिन अलग नहीं रहेंगे....
उसवक्त भाभी ने भी उस समय बडे भैया को समझाने की कोशिश की थी लेकिन वह भी भैया की जिद तोड़ने में कामयाब ना हो पाई थी...
मोहन गिड़गिड़ाए जा रहा था लेकिन भैया संवेदनाओं को नकारते हुए उसे और मां को अनदेखा करते घर छोडकर चले गए.......
जब मोहन के पिताजी की मृत्यु हुई तब वो केवल आठ वर्ष का था उसवक्त बडे भैया का स्नेह भरा हाथ सिरपर पाकर वो हमेशा पिता की रिक्तियों को पूरा समझते हुए बड़ा हो रहा था....
लेकिन थोडे समय बाद  पता नहीं नई नौकरी का मोह था या बडे भैया को जिम्मेदारियां भारी लगने लगी थी....उन्होंने गांव छोडकर शहर में रहने का फैसला कर लिया था....वो निष्ठुर होकर उसे और बुजुर्ग मां को छोड़ कर सपरिवार शहर चले गए थे...
कुछ सालों तक भैया ने आना जाना व पैसे भेजना निरन्तर जारी रखा परन्तु बाद में वह सब भी बंद हो गया था लेकिन समय भी कहा किसे के रोके रुकता है...
अच्छा निकले या बुरा निकलता जाता है....
गांव में दोनों मां-बेटे भी अपनी जिंदगी को किसी तरह जीने की कोशिश कर रहे थे....मोहन पढ़ाई में अच्छा था , सो छात्रवृति के सहारे अच्छा पढ लिख गया... कुछ बच्चों को ट्यूशन पढ़ानी भी शुरू कर दी थी जिससे खर्च चलाना आसान हो गया था...मां के हौंसलो और उसकी निरन्तर मेहनत से एक ऊंचाई को नापता हुआ वह एक बड़ी कम्पनी मे अच्छी पद का अधिकारी बन गया था...
सुधा से शादी के वक्त भी भैया-भाभी औपचारिकता के लिए केवल दो दिन आए थे....
उसके बाद बीते कयी वर्षों में कभी मिलना भी नही हुआ....यदाकदा चिठ्ठी मिल जाती थी खैरखबर की फिर वो भी बंद हो गई ....फिर मां सहित वो मुम्बई शिफ्ट हो गया ....और वही का होकर रह गया था...
भैया की गर्र गर्र ररर की आवाज से वो अतितो से वर्तमान में लौट आया...मोहन ने उनकी और देखा तो लगा जैसे वह कुछ कहना चाह रहे है....
भाभी को देखते हुए मोहन कहा ...भैया...भाभी.... आप चिंता मत करिए आज से हम लोग एक साथ ही रहेंगे और भैया का अच्छा इलाज़ भी करवाएंगे....
तभी सुधा बोल उठी ....हां भाभी ....
आप बिलकुल चिंता मत करिए सब ठीक हो जाएगा इतने वर्षों तक इनकी आंखों में मैंने एक सूनापन देखा है जो भैया के घर छोड़कर जाते हुए पदचिन्हों का हमेशा पीछा करता रहा है और आज आप लोगों को देख कर उनके चेहरे पर जो चमक आई है वह किसी सपने के पूरे होने से कम नही है...
भैया की आँखें एक तरफ़ घूमकर वहां मेज पर रखी उनकी बच्चों के साथ तस्वीर पर अटक गई जहां उनके दोनों बच्चे भैया के कंधे पर बैठे थे....
आंखों से अनवरत बहते आँसू शायद कह रहे थे ...
देख रोहन...तू जैसा पदचिन्ह छोड़कर आया था...उन्हीं का अनुसरण तुम्हारे पुत्र कर रहे है.....इसलिए वह भी तुझे छोडकर ....और मेरा भाई ....मेरे पिताजी के पदचिन्हों का....जो आज भी मेरी गलतियों को दरकिनार करते हुए मेरे साथ खडा है ....

शनिवार, 19 जून 2021

जीवन के अनमोल यादगार

🌞🕉️सच्चा साथी🕉️🌞

🕉️▶️मेरे अपने जीवन के महत्वपूर्ण यादगार....

✏️🖍️✏️🖍️✏️🖍️
उल्टी यात्रा
बुढ़ापे से
बचपन की तरफ़
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जो 60वर्ष की आयु को पार कर गये हैं उनके लिए यह खास
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मेरा मानना है कि , दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है,  हमारे बाद की किसी पीढ़ी को , "शायद ही " इतने बदलाव देख पाना असंभव हो....

# हम_वो आखिरी_पीढ़ी_हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिका जेट देखे हैं। बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है , और "वर्चुअल मीटिंग जैसी" असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को सम्भव होते हुए देखा है। 

🙏 हम_वो_ "पीढ़ी" _हैं 🇳🇪
जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर , परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं हैं। जमीन पर बैठकर खाना खाया है। प्लेट में डाल डाल कर चाय पी है।

🙏 हम 🇳🇪 वो " लोग " हैं ?
जिन्होंने बचपन में मोहल्ले के मैदानों में अपने दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे जैसे खेल , खेले हैं ।

🙏हम आखरी पीढ़ी 🇳🇪 के वो लोग हैं ?
 जिन्होंने चांदनी रात , डीबली , लालटेन , या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है। और दिन के उजाले में चादर के अंदर छिपा कर नावेल पढ़े हैं।  

🙏हम वही 🇳🇪 पीढ़ी के लोग हैं ? 
जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं। और उन ख़तो के पहुंचने और जवाब के वापस आने में महीनों तक इंतजार किया है।

🙏हम उसी 🇳🇪 आखरी पीढ़ी के लोग हैं ?
जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही  बचपन गुज़ारा है। और बिजली के बिना भी गुज़ारा किया है।

🙏हम वो 🇳🇪 आखरी लोग हैं ?
जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे।

🙏हम वो आखरी पीढ़ी 🇳🇪 के लोग हैं ?
जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी,  किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। तख़्ती पर सेठे की क़लम से लिखा है और तख़्ती धोई है।

🙏हम वो आखरी 🇳🇪 लोग हैं ?
जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है। और घर में शिकायत करने पर फिर मार खाई है।

🙏हम वो 🇳🇪 आखरी लोग हैं ?
जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर, नुक्कड़ से भाग कर, घर आ जाया करते थे। और समाज के बड़े बूढों की इज़्ज़त डरने की हद तक करते थे।

 🙏 हम वो 🇳🇪 आखरी लोग हैं ?
जिन्होंने अपने स्कूल के सफ़ेद केनवास शूज़ पर, खड़िया का पेस्ट लगा कर चमकाया हैं।

 🙏हम वो 🇳🇪 आखरी लोग हैं ?
जिन्होंने गोदरेज सोप की गोल डिबिया से साबुन लगाकर शेव बनाई है। जिन्होंने गुड़  की चाय पी है। काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है और कभी कभी तो नमक से या लकड़ी के कोयले से दांत साफ किए हैं। 

🙏हम निश्चित ही वो 🇳🇪 लोग हैं ?
जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो, बिनाका गीत माला और हवा महल जैसे  प्रोग्राम पूरी शिद्दत से सुने हैं।

🙏हम वो 🇳🇪 आखरी लोग हैं ?
जब हम सब शाम होते ही छत पर पानी का छिड़काव किया करते थे। उसके बाद सफ़ेद चादरें बिछा कर सोते थे। एक स्टैंड वाला पंखा सब को हवा के लिए हुआ करता था। सुबह सूरज निकलने के बाद भी ढीठ बने सोते रहते थे। वो सब दौर बीत गया। चादरें अब नहीं बिछा करतीं। डब्बों जैसे कमरों में कूलर, एसी के सामने रात होती है, दिन गुज़रते हैं।

🙏हम वो 🇳🇪 आखरी पीढ़ी के लोग हैं ?
जिन्होने वो खूबसूरत रिश्ते और उनकी मिठास बांटने वाले लोग देखे हैं, जो लगातार कम होते चले गए। अब तो लोग जितना पढ़ लिख रहे हैं, उतना ही खुदगर्ज़ी, बेमुरव्वती, अनिश्चितता, अकेलेपन, व निराशा में खोते जा रहे हैं। 
और 
🙏हम वो 🇳🇪 खुशनसीब लोग हैं ?
जिन्होंने रिश्तों की मिठास महसूस की है...!!

🙏और हम इस दुनिया के वो लोग भी हैं , जिन्होंने एक ऐसा "अविश्वसनीय सा"  लगने वाला  नजारा देखा है ?

आज के इस करोना काल में परिवारिक रिश्तेदारों (बहुत से पति-पत्नी , बाप - बेटा ,भाई - बहन आदि ) को एक दूसरे को छूने से डरते हुए भी देखा है। 🙏पारिवारिक रिश्तेदारों की तो बात ही क्या करे , खुद आदमी को  अपने ही  हाथ से , अपनी ही नाक और मुंह को , छूने से डरते हुए भी देखा है। 🙏
" अर्थी " को बिना चार कंधों के , श्मशान घाट पर जाते हुए भी देखा है। 
"पार्थिव शरीर" को दूर से ही  "अग्नि दाग" लगाते हुए भी देखा है। 🙏

🙏हम आज के 🇳🇪 भारत की एकमात्र वह पीढी है ?
 जिसने अपने " माँ-बाप "की बात भी मानी , और " बच्चों " की भी मान रहे है। 🙏

शादी मे (buffet) खाने में वो आनंद नहीं जो पंगत में आता था  जैसे....  

.
सब्जी देने वाले को गाइड करना
हिला के दे
या तरी तरी देना!
.
👉 उँगलियों के इशारे से 2 लड्डू और गुलाब जामुन,
काजू कतली लेना
.
👉 पूडी छाँट छाँट के
और
गरम गरम लेना !.
👉 पीछे वाली पंगत में झांक के देखना क्या क्या आ
गया !
अपने इधर और क्या बाकी है।
जो बाकी है उसके लिए आवाज लगाना
.
👉 पास वाले रिश्तेदार के पत्तल में जबरदस्ती पूडी
🍪 रखवाना !
.
👉 रायते वाले को दूर से आता देखकर फटाफट रायते
का दोना पीना ।
.
👉 पहले वाली पंगत कितनी देर में उठेगी। उसके
हिसाब से बैठने की पोजीसन बनाना।
.
👉 और आखिर में पानी वाले को खोजना।
 😜 
..............
एक बात बोलूँ
इनकार मत करना
ये msg जीतने मरजी लोगों को send करो
जो इस msg को पढेगा
उसको उसका बचपन जरुर याद आयेगा.
वो आपकी वजह से अपने बचपन में चला जाएगा , चाहे कुछ देर के लिए ही सही।
और ये आपकी तरफ से उसको सबसे अच्छा गिफ्ट होगा.
😊.
~~~~~~~~~~~~
यह सभी बातें हमने अपने मित्रों के सहयोग से  लिखा है।
मैं इसे आपसभी को भेज
रहा हूँ। 🙏

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=931244677658255&id=291422034973859

शुक्रवार, 18 जून 2021

आज का सुविचार

🌹🌷🌹🌷🌷🌹🌷 🌹🌷🌹🌷🌹
       🌞🕉️👨‍👩‍👧‍👦 सच्चा साथी👨‍👩‍👧‍👦🕉️🌞

         ☸️🔯💪आज का सुविचार💪🔯☸️

*जिस धागे की ,गांठे खुल सकती है* 
*उस धागे पर कैंची नहीं चलानी चाहिए* 
 
*किसी की कोई बात बुरी लगे तो,*
*दो तरह से सोचे ,,*
*यदि व्यक्ति महत्वपूर्ण है ,*
    *तो बात भूल जाए*
           *और,*
*बात महत्वपूर्ण है तो,*
      *व्यक्ति को भूल जाए !!*

 *सफलता हमेशा अच्छे विचारों से आती हैं...*
        *और अच्छे विचार आप जैसे अच्छे लोगों के सम्पर्क से आते हैं...*
🙏🌹🙏
 ✍🏻✍🏻
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
*"सफलता” भी फीकी लगती है,*
*यदि कोई “बधाई देने वाला” नहीं हो।*
 *और “विफलता” भी सुन्दर लगती है,*
 *जब आपके साथ “कोई अपना खड़ा” हो।* 

*ना दूर रहने से रिश्ते टूट जाते हैं और* 
 *ना पास रहने से जुड़ जाते हैं*
 *यह तो एहसास के पक्के धागे है*
 *जो*
 *याद करने से*
 *और मज़बूत हो जाते है।*

 🌹🙏🏻 *प्रातः वंदन* 🙏🏻🌹
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
*दोस्त* , 
*किताब*, 
*रास्ता* , 
*और सोच!*

 *ये चारों जो जीवन में सही मिलें तो,*
   *ज़िंदगी निख़र.... जाती है ...*
    *वर्ना बिख़र ज़ाती है*
                           सुप्रभात🙏🏻

सकारात्मक पहल

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=875744356710287&id=100028241912934

🕉️🌞सच्चा साथी🌞🕉️

👨‍👩‍👧‍👦🔯सकारात्मक पहल🔯👨‍👩‍👧‍👦

*भीख में CASH देना बंद अभियान*

*भिखारी  को (भोजन + पानी) दें।   नकद में देने के लिए एक भी रुपया नहीं।*

*पूरे आगरा में एक अलग आंदोलन शुरू हो गया है, चाहे वह किसी भी तरह का भिखारी हो।*

*यदि किसी भी प्रकार का व्यक्ति (महिला / पुरुष / वृद्ध। विकलांग / बच्चे) भीख मांग रहा है, तो हम पैसे के बदले (भोजन + पानी) देंगे, लेकिन आज से वे पैसे की भीख नहीं मांगेंगे*

*परिणामस्वरूप, अंतर्राष्ट्रीय राष्ट्रीय / राज्य स्तर पर, भिखारियों' के गिरोह टूट जाएंगे और फिर बच्चों का अपहरण अपने आप बंद हो जाएगा। इस तरह के गिरोह आपराधिक दुनिया में खत्म हो जाएंगे।*

*आरंभ करें पोस्ट साझा करें ..*

*हम एक भी भिखारी को रुपया नहीं देंगे।*
*कार में 2 बिस्किट के पैकेट रखें लेकिन भीख मांगने रुपए/  पैसे का भुगतान न करें*

*यदि आप इस अभियान से सहमत हैं, तो इस विचार को अगले तीन समूहों में अग्रेषित करें।*

*क्योंकि किसी मां बाप के कलेजे के टुकड़े किडनैप होने और फिर उनकी दुर्गति होने से बचाने में आपकी पोस्ट फारवर्ड  बहुत बड़ा योगदान कर सकती है।🙏🏻🙏*