गुरुवार, 30 सितंबर 2021

अंत में

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒ये मिट्टी किसी को नही छोडेगी:-*
 
*एक राजा बहुत ही महत्त्वाकांक्षी था और उसे महल बनाने की बड़ी महत्त्वाकांक्षा रहती थी उसने अनेक महलों का निर्माण करवाया!*

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*रानी उनकी इस इच्छा से बड़ी व्यथित रहती थी की पता नही क्या करेंगे इतने महल बनवाकर!*

*एक दिन राजा नदी के उस पार एक महात्मा जी के आश्रम के वहाँ से गुजर रहे थे तो वहाँ एक संत की समाधी थी और सैनिकों से राजा को सूचना मिली की संत के पास कोई अनमोल खजाना था और उसकी सूचना उन्होंने किसी को न दी पर अंतिम समय मे उसकी जानकारी एक पत्थर पर खुदवाकर अपने साथ ज़मीन मे गढ़वा दिया और कहा की जिसे भी वो खजाना चाहिये उसे अपने स्वयं के हाथों से अकेले ही इस समाधी से चौरासी हाथ नीचे सूचना पड़ी है निकाल ले और अनमोल सूचना प्राप्त कर लेंवे और ध्यान रखे उसे बिना कुछ खाये पिये खोदना है और बिना किसी की सहायता के खोदना है अन्यथा सारी मेहनत व्यर्थ चली जायेगी !*

*राजा अगले दिन अकेले ही आया और अपने हाथों से खोदने लगा और बड़ी मेहनत के बाद उसे वो शिलालेख मिला और उन शब्दों को जब राजा ने पढ़ा तो उसके होश उड़ गये और सारी अकल ठिकाने आ गई!*

*उस पर लिखा था हॆ राहगीर संसार के सबसे भूखे प्राणी शायद तुम ही हो और आज मुझे तुम्हारी इस दशा पर बड़ी हँसी आ रही है तुम कितने भी महल बना लो पर तुम्हारा अंतिम महल यही है एक दिन तुम्हे इसी मिट्टी मे मिलना है!*

*सावधान राहगीर, जब तक तुम मिट्टी के ऊपर हो तब तक आगे की यात्रा के लिये तुम कुछ जतन कर लेना क्योंकि जब मिट्टी तुम्हारे ऊपर आयेगी तो फिर तुम कुछ भी न कर पाओगे यदि तुमने आगे की यात्रा के लिये कुछ जतन न किया तो अच्छी तरह से ध्यान रखना की जैसै ये चौरासी हाथ का कुआं तुमने अकेले खोदा है बस वैसे ही आगे की चौरासी लाख योनियों मे तुम्हे अकेले ही भटकना है और हॆ राहगीर ये कभी न भूलना की "मुझे भी एक दिन इसी मिट्टी मे मिलना है बस तरीका अलग अलग है"*

*फिर राजा जैसै तैसे कर के उस कुएँ से बाहर आया और अपने राजमहल गया पर उस शिलालेख के उन शब्दों ने उसे झकझोर के रख दिया और सारे महल जनता को दे दिये और "अंतिम घर" की तैयारियों मे जुट गया! ओर उन्होंने मुनिधर्म को अपनाकर आयु के अंत में बारह भावनाओं का चिंतन करते हुए समाधि मरण को प्राप्त करके विदेह क्षैत्र में विराजमान त्रिलोकीनाथ श्री 1008 सीमंधर भगवान के सानिध्य में है।वहां से आयुपूरी करके पुनः मनुष्य भव मे मुनिधर्म को धारण कर स्व आत्मकल्याण करते हुए परके आत्मकल्याण मे सहयोगी बनेंगे।*

*इस मिट्टी ने जब रावण जैसै सत्ताधारियों को नही बक्सा तो फिर साधारण मानव क्या चीज हैl सभी को एक दिन इसी मिट्टी मे मिलना है क्योंकि ये मिट्टी किसी को नही छोड़ने वाली है..!!*

*सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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मंगलवार, 28 सितंबर 2021

शिक्षा

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
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*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒जंगल के जंगली स्कूल की सच्चाई* 😗

हुआ यूँ कि जंगल के राजा शेर ने ऐलान कर दिया कि अब आज के बाद कोई अनपढ़ न रहेगा। हर पशु को अपना बच्चा स्कूल भेजना होगा। राजा साहब का स्कूल पढ़ा-लिखाकर सबको Certificate बँटेगा।

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सब बच्चे चले स्कूल। हाथी का बच्चा भी आया, शेर का भी, बंदर भी आया और मछली भी, खरगोश भी आया तो कछुआ भी, ऊँट भी और जिराफ भी।

FIRST UNIT TEST/EXAM हुआ तो हाथी का बच्चा फेल। 

"किस Subject में फेल हो गया जी?"

"पेड़ पर चढ़ने में फेल हो गया, हाथी का बच्चा।" 

"अब का करें?" 

"ट्यूशन दिलवाओ, कोचिंग में भेजो।" 

*अब हाथी की जिन्दगी का एक ही मक़सद था कि हमारे बच्चे को पेड़ पर चढ़ने में Top कराना है।*

किसी तरह साल बीता। Final Result आया तो हाथी, ऊँट, जिराफ सब  के बच्चे फेल हो गए। बंदर की औलाद first आयी। 

Principal ने Stage पर बुलाकर मैडल दिया। बंदर ने उछल-उछल के कलाबाजियाँ दिखाकर गुलाटियाँ मार कर खुशी का इजहार किया। 

*उधर अपमानित महसूस कर रहे हाथी, ऊँट और जिराफ ने अपने-अपने बच्चे कूट दिये*। 
नालायकों, इतने महँगे स्कूल में पढ़ाते हैं तुमको | ट्यूशन-कोचिंग सब लगवाए हैं। फिर भी आज तक तुम पेड़ पर चढ़ना नहीं सीखे। 
*सीखो, बंदर के बच्चे से सीखो कुछ, पढ़ाई पर ध्यान दो।*

फेल हालांकि मछली भी हुई थी। बेशक़ Swimming में First आयी थी पर बाकी subject में तो फेल ही थी। 

मास्टरनी बोली, *"आपकी बेटी  के साथ attendance की problem है*।

*मछली ने बेटी को आँखें दिखाई*!
बेटी ने समझाने की कोशिश की कि, *"माँ, मेरा दम घुटता है इस स्कूल में। मुझे साँस ही नहीं आती। मुझे नहीं पढ़ना इस स्कूल में। हमारा स्कूल तो तालाब में होना चाहिये न?"* 

 मां - नहीं, ये राजा का स्कूल है। 

*तालाब वाले स्कूल में भेजकर मुझे अपनी बेइज्जती नहीं करानी। समाज में कुछ इज्जत Reputation है मेरी। तुमको इसी स्कूल में पढ़ना है। पढ़ाई पर ध्यान दो।*"

हाथी, ऊँट और जिराफ अपने-अपने बच्चों को पीटते हुए ले जा रहे थे। 

रास्ते में बूढ़े बरगद ने पूछा, *"क्यों पीट रहे हो, बच्चों को?"* 

जिराफ बोला, *"पेड़ पर चढ़ने में फेल हो गए?"*

बूढ़ा बरगद सोचने के बाद पते की बात बोला,

 *"पर इन्हें पेड़ पर चढ़ाना ही क्यों है ?"* 
उसने हाथी से कहा, 

*"अपनी सूंड उठाओ और सबसे ऊँचा फल तोड़ लो। जिराफ तुम अपनी लंबी गर्दन उठाओ और सबसे ऊँचे पत्ते तोड़-तोड़ कर खाओ*।"
*ऊँट भी गर्दन लंबी करके फल पत्ते खाने लगा।*
 *हाथी के बच्चे को क्यों चढ़ाना चाहते हो पेड़ पर? मछली को तालाब में ही सीखने दो न?*

*दुर्भाग्य से आज स्कूली शिक्षा का पूरा Curriculum और Syllabus सिर्फ बंदर के बच्चे के लिये ही Designed है। इस स्कूल में 35 बच्चों की क्लास में सिर्फ बंदर ही First आएगा। बाकी सबको फेल होना ही है। हर बच्चे के लिए अलग Syllabus, अलग Subject और अलग स्कूल चाहिये।*

*हाथी के बच्चे को पेड़ पर चढ़ाकर अपमानित मत करो। जबर्दस्ती उसके ऊपर फेलियर का ठप्पा मत लगाओ। ठीक है, बंदर का उत्साहवर्धन करो पर शेष 34 बच्चों को नालायक, कामचोर, लापरवाह, Duffer, Failure घोषित मत करो।*

*मछली बेशक पेड़ पर न चढ़ पाये पर एक दिन वो पूरा समंदर नाप देगी।*

*शिक्षा - अपने बच्चों की क्षमताओं व प्रतिभा की कद्र करें चाहे वह पढ़ाई, खेल, नाच, गाने, कला, अभिनय,व्यापार, खेती, बागवानी, मकेनिकल, किसी भी क्षेत्र में हो और उन्हें उसी दिशा में अच्छा करने देंl उसे वह जिस क्षेत्र में वह रह रहा है, उसे उसी क्षैत्रीय भाषा में शिक्षा मिलनी चाहिये।वर्तमान में अग्रेज तो भारत से चले गये ।भारत के 60 प्रतिशत लोगों को अग्रेजी भाषा का गुलाम बना गये,अब सभी अपने बच्चों को जन्म से ही उस भाषा का गुलाम बनाने में तत्पर है।पहले शुध्द हिंदी भाषा बोली जाती थी।वर्तमान में हिन्दी की चटनी बनाकर हिग्लीश बना दी गई ।शुध्द हिंदी बोलने वाले भारत में मात्र 10 प्रतिशत लोग ही है।* 

*जरूरी नहीं कि सभी बच्चे पढ़ने में ही अव्वल हो! बस जरूरत हैं उनमें अच्छे संस्कार व नैतिक मूल्यों की जिससे बच्चे गलत रास्ते नहीं चुने l*

सभी अभिभावकों को सादर समर्पित 

*सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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सोमवार, 27 सितंबर 2021

मेरी बहन

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
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*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
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*💐💐मेरी अपनी बहन💐💐*

मेरी अपनी बहन की शादी को 7 साल हो गए हैं।

मैं कभी उसके घर नही गया। होली दीपावली, भइया दूज पर कभी-2 मम्मी पापा जाते हैं।

मेरी अपनी पत्नी  एक दिन मुझे कहने लगी आपकी बहन जब भी आती है उसके बच्चे घर के हाल बिगाड़ कर रख देते हैं। 
ख़र्च डबल हो जाता है और तुम्हारी मां हमसे छुप, छुपाकर कभी उसको आवश्यक सामग्री देती है,कभी कपड़े कभी सर्फ के डब्बे और कभी कभी तो चावल का थैला भर देती है ।
अपनी मां को बोलो ये हमारा घर है कोई ख़ैरात सेंटर नही। 

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मुझे बहुत गुस्सा आया मैं मुश्किल से ख़र्च पूरा कर रहा हूँ और मां सब कुछ बहन को दे देती है। बहन एक दिन घर आई हुई थी,उसके बेटे ने टीवी का रिमोट तोड़ दिया। मैं मां से गुस्से में कह रहा था मां बहन को बोलो कि यहा भैयादूज पर आया करे बस।

और ये जो आप साबुन सर्फ और चावल का थैला भर कर देती हैं ना उसको बन्द करें । 
मां चुप रही लेकिन बहन ने मेरी सारी बातें सुन ली थी, बहन कुछ ना बोली ।
4 बज रहे थे अपने बच्चों को तैयार किया और कहने लगी, भाई मुझे बस स्टॉप तक छोड़ आओ,
 मैंने झूठे मुँह कहा, रह लेती कुछ दिन और लेकिन वह मुस्कुराई नही भाई बच्चों की छुट्टियां ख़त्म होने वाली है।

फिर जब हम दोनों भाईयों में ज़मीन का बंटवारा हो रहा था तो मैंने साफ़ इनकार किया,भाई मैं अपनी ज़मीन से बहन को हिस्सा नही दूँगा।

बहन सामने बैठी थी।

वह खामोश थी, कुछ ना बोली मां ने कहा बेटी का भी हक़ होता है लेकिन मैंने गाली दे कर कहा कुछ भी हो जाये मैं बहन को हिस्सा नही दूँगा।

मेरी पत्नी भी बहन को बुरा भला कहने लगी। वह बेचारी खामोश रही।

बड़ा भाई अलग हो गया कुछ वक़्त बाद।
मेरे बड़े बेटे को टीबी हो गई,मेरे पास उसके इलाज करवाने के पैसे नहीं थे,मैं बहुत परेशान था, एक लाख रुपया कर्ज भी ले लिया था।

मैं बहुत परेशान था,कमरे में अकेला बैठा अपने हालात पर रो रहा था।

उस वक़्त वही बहन घर आ गई, मैंने गुस्से से बोला अब ये आ गई है मनहूस।

मैंने पत्नी  को कहा कुछ तैयार करो बहन के लिए ,तो पत्नी  मेरी पास आ गई ,कोई ज़रूरत नही कुछ भी पकाने की इसके लिए।

फिर एक घण्टे बाद बहन मेरे पास आई ,भाई परेशान हो.?
 बहन ने मेरे सर पर हाथ फेरा बड़ी बहन हूँ तुम्हारी।
अब देखो मुझसे भी बड़े लगते हो,फिर मेरे क़रीब हुई अपने पर्स से सोने की कंगन निकाले ,मेरे हाथ में रखे और आहिस्ता से बोली पागल तू ऐसे ही परेशान होता है,

ये कंगन बेचकर अपना कर्जा उतार कर कर बेटे का इलाज करवा। 
शक्ल तो देख ज़रा क्या हालत बना रखी तुमने,
मैं खामोश था बहन की तरफ देखे जा रहा था,वह आहिस्ता से बोली किसी को ना बताना कि कंगन के बारे में तुमको मेरी क़सम है।

मेरे माथे को चूमा  और एक हज़ार रुपये मुझे दिया ,
जो सौ ,पचास के नोट थे शायद उसकी जमा पूंजी थी मेरी जेब मे डालकर बोली बच्चों को कुछ खाने के लिए ला देना परेशान ना हुआ कर।

जल्दी से अपना हाथ मेरे सर पे रखा,, देख तेरे बाल सफ़ेद हो गए ,वह जल्दी से जाने लगी उसके पैरों की तरफ़ मैं देखा टूटी हुई जूती पहनी थी,पुराना सा दुपट्टा ओढ़ रखी थी जब भी आती थी वही दुपट्टा ओढ़ कर आती।

हम भाई कितने मतलब परस्त होते हैं, बहनों को पल भर में बेगाना कर देते हैं, और बहनें भाईयों का ज़रा सा दुख बर्दाश्त नही कर सकती।

वह हाथ में कंगन पकड़े ज़ोर ,ज़ोर से रो रहा था उसके साथ मेरी आँखें भी नम थी।
 
अपने घर में #भगवान जाने कितने दुख सह रही होती हैं।
कुछ लम्हा बहनों के पास बैठकर हाल पूछ लिया करें। शायद उनके चेहरे पे कुछ लम्हों के लिए एक सुकून आ जाये।

बहनें मां का रूप होती हैं।

 आजकल भाई अपनी बहनों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं ये बताने की जरूरत ही नहीं है और रही बात भाभियों की तो पूछिए ही मत,उनका व्यवहार अपनी नंद के प्रति कितना अच्छा होता है सभी जानते हैं।लगभग 2% से 3% ही कोई ऐसा भाई होंगे जो अपनी बहनों का अच्छे से ख्याल रखते होंगे या भाभियों का व्यवहार ननद के साथ अच्छा होगा।अपनी बहन आए तो कोई बात नहीं और जब पति की बहन आए तो मुसीबत आ जाती हैं।ऐसी सोच है हमारे समाज के अंदर लोगो की।आइए आज से हम सब मिलकर प्रण लें कि हम अपने बहनों का दिल कभी नहीं दुखायेंगे,उन्हें हमेशा घर बुलाएंगे,उनका मान सम्मान करेंगे,कभी कुछ ऐसा नहीं करेंगे जिससे उनके दिल को ठेस पहुंचे।बहन के घर आने से घर में रौनक आ जाती हैं।बहने मां का रूप होती हैं।ये पूज्यनीय हैं।आइए हम सब मिलकर इनका सम्मान करें और अपना सुख दुःख इनके साथ बांटे।


*सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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रविवार, 26 सितंबर 2021

सत्कर्मों

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒डॉक्टर ने दिया नया जीवन💐💐*


एक जैनधर्म पर श्रृद्धा रखकर जीवन व्यतीत करनेवाले डॉक्टर बहुत ही होशियार थे ।
 
उनके बारे में यह कहा जाता था कि वह मौत के मुंह में से भी रोगी को वापस ले आते थे।

डॉक्टर के पास जो भी मरीज आता वह उससे एक फॉर्म भरवाते थे।

मरीज से यह पूछते की आप इस फार्म में लिखें कि यदि आप बच गए तो किस तरह से बाकी जिंदगी जियेगें और आपके जीवन में क्या करना शेष रह गया है जो आप करना चाहेंगें।

 *सभी मरीज अपने मन की बात लिखने लगे।* 

अगर मैं बच गया तो अपने परिवार के साथ अपना समय बिताउंगा।

मैं अपने पुत्र और पुत्री की संतानों के साथ जी भर कर खेलूंगा।

किसी ने जी भर कर पर्यटन, घूमने का शौक पूरा करने का लिखा।

किसी ने तो यह भी लिखा की मेरे द्वारा जिंदगी में यदि किसी से ठेस पहुंची है तो मैं उनसे माफी मागुंगा।

किसी ने लिखा कि मैं अपनी जिंदगी में मुस्कुराना बढ़ा दूंगा।

जिंदगी में किसी से भी शिकायत नहीं करूंगा और ना किसी को शिकायत का मौका दूंगा। किसी को भी मन दुख ना ऐसा काम करूंगा।

*🕉️✍️🔯सच्चे जैन श्रावक ने लिखा सच्चे देव शास्त्र गुरु की शरण में रहकर किसी से भी छलकपट, रागद्वेष ,मायाचारी न करते हुये अपने श्रावक धर्म को निभाते हुए आयु के अंत में समाधि मरण करके विदेह क्षेत्र में  अंतरंग बहिरंग लक्ष्मी के सहित  समवशरण मे विराजमान 1008 श्री सीमंधर भगवान के सानिध्य में स्व आत्मकल्याण करते हुए सभी साधर्मीयों के आत्मकल्याण मे सहयोगी बनकर अपना कर्तव्य पालन करूंगा।✍️🌞*

बहुत से लोगों ने तरह-तरह की बातें लिखी जो स्वयं को भविष्य में 84 लाख योनियों में भटकाने वाली थी।

डॉक्टर आपरेशन करने के पहले नित्यप्रतिदिन वीतरागी भगवान का अभिषेक पूजन करके आपरेशन करते थे।आपरेशन के बाद जब मरीज को छुट्टी देते तब वह लिखा हुआ फार्म उन्हे वापस कर देते थे।

मरीज से कहते की आपने जो फॉर्म में लिखा है वह आप अपनी जिंदगी में कितना पूरा कर पा रहे हैं उस पर निशान लगाते जाए्।जबभी  आप वापस आए तो मुझे बताएं कि आपने इसमें से किस तरह की जिंदगी जी है।

डॉक्टर ने कहा कि एक भी व्यक्ति ने ऐसा नहीं लिखा कि अगर मैं बच गया तो मुझे किसी से बदला लेना है।
 अपने दुश्मन को खत्म कर दूंगा।
 मुझे बहुत धन कमाना है।

अपने आपको बहुत व्यस्त रखना है।

 *प्रत्येक का जीवन जीने का नजरिया अपना-अपना था।* 

डॉक्टर ने प्रश्न किया की जब आप स्वस्थ थे तब आपने इस तरह का जीवन क्यों नहीं जिया, आप को कौन रोक रहा था। *अभी कौन सी देरी हो गई है???* 

 कुछ क्षण अपने जीवन के बारे में चिंतन मनन करें। हमें अपनी जिंदगी में किस तरह का जीवन जीना शेष रह गया है, जो हम जीवन जीना चाहते थे ?

बस इस तरह का जीवन जीना प्रारम्भ करें।

 *जीवन का आनंद तभी ही है की जीवन यात्रा पूर्ण हो तब कोई कामना नहीं रहे, कोई अफ़सोस न रहे।जो समय बितगया उसके बारे में सोचकर ,जो समय बाकी है उसे बर्बाद मत करो।आपकी जिंदगी में जो समय बचा हुआ है, उस समय मे शक्ति अनुसार श्रावक धर्म का पालन करते हुए अपने मरण को सुधार लें।*

 *मन में यह न रहे की मैं जैसा जीवन जीना चाहता था, वैसा जीवन नहीं जी सका।*

*सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।चिंता मत करो, अच्छे कर्म करो।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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मंगलवार, 21 सितंबर 2021

संस्कार

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒संस्कारों का साक्षात्कार*

               ✍️➡️बड़ी दौड़ धूप के बाद ,मैं  आज एक ऑफिस में  पहुंचा। आज मेरा पाँचवां इंटरव्यू था ।घर से निकलते हुए मैं  सोच रहा था,काश ! इंटरव्यू में आज कामयाब हो गया , तो अपने
 पुश्तैनी मकान को अलविदा कहकर यहीं शहर में सेटल हो जाऊंगा, मम्मी पापा की रोज़ की चिक चिक,मग़जमारी से छुटकारा मिल जायेगा ।

            🌞सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक होने वाली चिक चिक  से परेशान हो गया हूँ ।

📲जब सो कर उठो , तो पहले बिस्तर ठीक करो , फिर बाथरूम जाओ,बाथरूम से निकलो तो फरमान जारी होता है,,,नल बंद कर दिया?
तौलिया सही जगह रखा या यूँ ही फेंक दिया?
नाश्ता करके घर से निकलो तो डांट पडती है 
पंखा बंद किया या चल रहा है?
क्या - क्या सुनें यार ,नौकरी मिले तो घर छोड़ दूंगा..

☸️वहाँ उस ऑफिस में बहुत सारे उम्मीदवार बैठे थे , बॉस का इंतज़ार कर रहे थे  ।

दस बज गए  ।

 ➡️मैने देखा वहाँ आफिस में बरामदे की बत्ती अभी तक जल रही है , 
माँ याद आ गई , तो मैने बत्ती बुझा दी ।

🤵ऑफिस में रखे वाटर कूलर से पानी टपक रहा था, 
पापा की डांट याद आ गयी , तो पानी बन्द कर दिया ।

🔯बोर्ड पर लिखा था , इंटरव्यू दूसरी मंज़िल पर होगा ।

➡️सीढ़ी की लाइट भी जल रही थी, बंद करके आगे बढ़ा , 
तो एक कुर्सी रास्ते में थी , उसे हटाकर ऊपर गया ।

 📲देखा पहले से मौजूद उम्मीदवार जाते और फ़ौरन बाहर आते ,
 पता किया तो मालूम हुआ बॉस
 फाइल लेकर कुछ पूछते नहीं ,
 वापस भेज देते हैं ।

 नंबर आने पर मैने फाइल
 मैनेजर की तरफ बढ़ा दी ।
 कागज़ात पर नज़र दौडाने के बाद उन्होंने कहा
 "कब ज्वाइन कर रहे हो?"

🌍 उनके सवाल से मुझे यूँ लगा जैसे
 मज़ाक़ हो , 
वो मेरा चेहरा देखकर कहने लगे , ये मज़ाक़ नहीं हक़ीक़त है ।

🌐आज के इंटरव्यू में किसी से कुछ पूछा ही नहीं , 
सिर्फ CCTV में सबका बर्ताव देखा , 
सब आये लेकिन किसी ने नल या लाइट बंद नहीं किया ।

*👨‍👩‍👧‍👦धन्य हैं तुम्हारे माँ बाप , जिन्होंने तुम्हारी इतनी अच्छी परवरिश की और अच्छे संस्कार दिए ।*

*जिस इंसान के पास Self discipline नहीं वो चाहे कितना भी होशियार और चालाक हो , मैनेजमेंट और ज़िन्दगी की दौड़ धूप में कामयाब नहीं हो सकता ।*

👨‍👩‍👧‍👦घर पहुंचकर मम्मी पापा के चरणस्पर्श कियाअपना माथा उनके चरणों से लगाया और उनसे माफ़ी मांगकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया ।साथ ही मन में सकल्प किया कितनी भी विषम परिस्थितियों में भी माँबाप का साथ नहीं छोड़ूंगा।इनका अनुभवी संस्कार ही सबसे बड़ी दौलत है।

✍️🌞➡️▶️नोट :- आपसभी महानुभावों से निवेदन है कि आप संस्कारों को जीवंत रखने के लिए इस पोस्ट को परिवार मित्रों और भी जिनमें संस्कारों की कमी है उनसभी तक पहुंचाकर पुण्य प्राप्त करें।

*अपनी ज़िन्दगी की आजमाइश में उनकी छोटी छोटी बातों पर रोकने और टोकने से , मुझे जो सबक़ हासिल हुआ , उसके मुक़ाबले , मेरे डिग्री की कोई हैसियत नहीं थी और पता चला ज़िन्दगी के मुक़ाबले में सिर्फ पढ़ाई लिखाई ही नहीं , तहज़ीब और संस्कार का भी अपना मक़ाम है...*

संसार में जीने के लिए संस्कार  जरूरी है ।
संस्कार के  लिए मां  बाप का सम्मान  जरूरी है ।
जिन्दगी रहे ना रहे , जीवित रहने का स्वाभिमान जरूरी है ।
*🕉️🌞जैनम् जयतु शासनम्🌞🕉️*
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