रविवार, 26 सितंबर 2021

सत्कर्मों

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒डॉक्टर ने दिया नया जीवन💐💐*


एक जैनधर्म पर श्रृद्धा रखकर जीवन व्यतीत करनेवाले डॉक्टर बहुत ही होशियार थे ।
 
उनके बारे में यह कहा जाता था कि वह मौत के मुंह में से भी रोगी को वापस ले आते थे।

डॉक्टर के पास जो भी मरीज आता वह उससे एक फॉर्म भरवाते थे।

मरीज से यह पूछते की आप इस फार्म में लिखें कि यदि आप बच गए तो किस तरह से बाकी जिंदगी जियेगें और आपके जीवन में क्या करना शेष रह गया है जो आप करना चाहेंगें।

 *सभी मरीज अपने मन की बात लिखने लगे।* 

अगर मैं बच गया तो अपने परिवार के साथ अपना समय बिताउंगा।

मैं अपने पुत्र और पुत्री की संतानों के साथ जी भर कर खेलूंगा।

किसी ने जी भर कर पर्यटन, घूमने का शौक पूरा करने का लिखा।

किसी ने तो यह भी लिखा की मेरे द्वारा जिंदगी में यदि किसी से ठेस पहुंची है तो मैं उनसे माफी मागुंगा।

किसी ने लिखा कि मैं अपनी जिंदगी में मुस्कुराना बढ़ा दूंगा।

जिंदगी में किसी से भी शिकायत नहीं करूंगा और ना किसी को शिकायत का मौका दूंगा। किसी को भी मन दुख ना ऐसा काम करूंगा।

*🕉️✍️🔯सच्चे जैन श्रावक ने लिखा सच्चे देव शास्त्र गुरु की शरण में रहकर किसी से भी छलकपट, रागद्वेष ,मायाचारी न करते हुये अपने श्रावक धर्म को निभाते हुए आयु के अंत में समाधि मरण करके विदेह क्षेत्र में  अंतरंग बहिरंग लक्ष्मी के सहित  समवशरण मे विराजमान 1008 श्री सीमंधर भगवान के सानिध्य में स्व आत्मकल्याण करते हुए सभी साधर्मीयों के आत्मकल्याण मे सहयोगी बनकर अपना कर्तव्य पालन करूंगा।✍️🌞*

बहुत से लोगों ने तरह-तरह की बातें लिखी जो स्वयं को भविष्य में 84 लाख योनियों में भटकाने वाली थी।

डॉक्टर आपरेशन करने के पहले नित्यप्रतिदिन वीतरागी भगवान का अभिषेक पूजन करके आपरेशन करते थे।आपरेशन के बाद जब मरीज को छुट्टी देते तब वह लिखा हुआ फार्म उन्हे वापस कर देते थे।

मरीज से कहते की आपने जो फॉर्म में लिखा है वह आप अपनी जिंदगी में कितना पूरा कर पा रहे हैं उस पर निशान लगाते जाए्।जबभी  आप वापस आए तो मुझे बताएं कि आपने इसमें से किस तरह की जिंदगी जी है।

डॉक्टर ने कहा कि एक भी व्यक्ति ने ऐसा नहीं लिखा कि अगर मैं बच गया तो मुझे किसी से बदला लेना है।
 अपने दुश्मन को खत्म कर दूंगा।
 मुझे बहुत धन कमाना है।

अपने आपको बहुत व्यस्त रखना है।

 *प्रत्येक का जीवन जीने का नजरिया अपना-अपना था।* 

डॉक्टर ने प्रश्न किया की जब आप स्वस्थ थे तब आपने इस तरह का जीवन क्यों नहीं जिया, आप को कौन रोक रहा था। *अभी कौन सी देरी हो गई है???* 

 कुछ क्षण अपने जीवन के बारे में चिंतन मनन करें। हमें अपनी जिंदगी में किस तरह का जीवन जीना शेष रह गया है, जो हम जीवन जीना चाहते थे ?

बस इस तरह का जीवन जीना प्रारम्भ करें।

 *जीवन का आनंद तभी ही है की जीवन यात्रा पूर्ण हो तब कोई कामना नहीं रहे, कोई अफ़सोस न रहे।जो समय बितगया उसके बारे में सोचकर ,जो समय बाकी है उसे बर्बाद मत करो।आपकी जिंदगी में जो समय बचा हुआ है, उस समय मे शक्ति अनुसार श्रावक धर्म का पालन करते हुए अपने मरण को सुधार लें।*

 *मन में यह न रहे की मैं जैसा जीवन जीना चाहता था, वैसा जीवन नहीं जी सका।*

*सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।चिंता मत करो, अच्छे कर्म करो।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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