मंगलवार, 31 मई 2022

जीवनोपयोगी शिक्षा

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒जीवनोपयोगी शिक्षा👨‍👩‍👧‍👦😇*

गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त कर रहे शिष्यों  में आज काफी उत्साह था , उनकी प्रथम वर्ष की शिक्षा आज पूर्ण हो रही थी ।  गुरु जी भी अपने शिष्यों की शिक्षा-दीक्षा से प्रसन्न थे और गुरुकुल की परंपरा के अनुसार शिष्यों को प्रथम वर्ष का जीवनोपयोगी उपदेश देने की तैयारी कर रहे थे।

उन्होंने ऊँची आवाज़ में कहा , ” आप सभी एक जगह एकत्रित हो जाएं , मुझे आपको इस वर्ष का उपदेश देना है .”

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए सभी शिष्य एक जगह एकत्रित हो गए .

गुरु जी ने अपने हाथ में कुछ लकड़ी के खिलौने पकडे हुए थे , उन्होंने शिष्यों को खिलौने दिखाते हुए कहा , ” आप को इन तीनो खिलौनों में अंतर ढूँढने हैं।”

सभी शिष्य ध्यानपूर्वक खिलौनों को देखने लगे , तीनो लकड़ी से बने बिलकुल एक समान दिखने वाले गुड्डे थे . सभी चकित थे की भला इनमे क्या अंतर हो सकता है ?

तभी किसी ने कहा , ” अरे , ये देखो इस गुड्डे के में एक छेद  है .”

यह संकेत काफी था ,जल्द ही शिष्यों ने पता लगा लिया और गुरु जी से बोले ,

” गुरु जी इन गुड्डों में बस इतना ही अंतर है कि –

एक के दोनों कान में छेद है

दूसरे के एक कान और एक मुंह में छेद है ,
और तीसरे के सिर्फ एक कान में छेद है  “

गुरु जी बोले , ” बिलकुल सही , और उन्होंने धातु का एक पतला तार देते हुए उसे कान के छेद में डालने के लिए कहा ।

 शिष्यों  ने वैसा ही किया . तार पहले गुड्डे के एक कान से होता हुआ दूसरे कान से निकल गया , दूसरे गुड्डे के कान से होते हुए मुंह से निकल गया और तीसरे के कान में घुसा पर कहीं से निकल नहीं पाया ।

तब  गुरु जी ने शिष्यों से गुड्डे अपने हाथ में लेते हुए कहा , ” प्रिय शिष्यों , इन तीन गुड्डों की तरह ही आपके जीवन में तीन तरह के व्यक्ति आयेंगे ।

पहला गुड्डा ऐसे व्यक्तियों को दर्शाता है जो आपकी बात एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल देंगे ,आप ऐसे लोगों से कभी अपनी समस्या साझा ना करें ।

दूसरा गुड्डा ऐसे लोगों को दर्शाता है जो आपकी बात सुनते हैं और उसे दूसरों के सामने जा कर बोलते हैं , इनसे बचें , और कभी अपनी महत्त्वपूर्ण बातें इन्हें ना बताएँ।

और  तीसरा गुड्डा ऐसे लोगों का प्रतीक है जिनपर आप भरोसा कर सकते हैं , और उनसे किसी भी तरह का विचार – विमर्श कर सकते हैं , सलाह ले सकते हैं , यही वो लोग हैं जो आपकी ताकत है और इन्हें आपको कभी नहीं खोना चाहिए।

*🔔👨‍👩‍👧‍👦➡️इस प्रकार गुरुकुल में बारह वर्षो मे जीवनोपयोगी सभी बातों को सिखाया जाता था।अब वर्तमान में यह पध्दति विलुप्ति के कगार पर है।भारत के कुछ स्थानों पर वर्तमान में भी यह शिक्षा उपलब्ध हैं।पाश्चात्य संस्कृति के कारण आज बच्चों में संस्कार विहीन शिक्षा दी जा रही है।इसी शिक्षा पध्दति के कारण आज भारतियों का सर्वांगीण विकास बाधित हो रहा है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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सोमवार, 30 मई 2022

गधे की बुध्दिमानी

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒गधे की बुद्धिमानी🤗😇*

बहुत समय पहले की बात है , किसी  गाँव में एक किसान रहता था । उसके पास बहुत सारे जानवर थे , उन्ही में से एक गधा भी था ।एक दिन वह चरते चरते खेत में बने एक पुराने सूखे हुए कुएं के पास जा पहुचा और अचानक ही उसमे  फिसल कर गिर गया . गिरते ही उसने जोर -जोर से चिल्लाना शुरू किया -” ढेंचू-ढेंचू ….ढेंचू-ढेंचू ….”

उसकी आवाज़ सुन कर खेत में काम कर रहे लोग कुएं के पास पहुचे, किसान को भी बुलाया गया।

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किसान ने स्थिति का जायजा लिया , उसे गधे पर दया तो आई लेकिन उसने मन में सोचा  कि इस बूढ़े गधे को बचाने से कोई लाभ नहीं है और इसमें मेहनत भी बहुत लगेगी और साथ ही कुएं की भी कोई ज़रुरत नहीं है , फिर उसने बाकी लोगों से कहा , “मुझे नहीं लगता कि हम किसी भी तरह इस गधे को बचा सकते हैं अतः  आप सभी अपने-अपने काम पर लग जाइए, यहाँ समय गंवाने से कोई लाभ नहीं.”

और ऐसा कह कर वह आगे बढ़ने को ही था की एक मजदूर बोला, ” मालिक , इस गधे ने सालों तक आपकी सेवा की है , इसे इस तरह तड़प-तड़प के मरने देने से अच्छा होगा की हम उसे इसी कुएं में दफना दें .”

किसान ने भी सहमती जताते हुए उसकी हाँ में हाँ मिला दी।

” चलो हम सब मिल कर इस कुएं में मिटटी डालना शुरू करते हैं और गधे को यहीं दफना देते हैं”, किसान बोला।

गधा ये सब सुन रहा था और अब वह और भी डर गया  , उसे लगा कि  कहाँ उसके मालिक को उसे बचाना चाहिए तो उलटे वो लोग उसे दफनाने की योजना बना रहे हैं .  यह सब  सुन  कर वह भयभीत हो गया , पर उसने हिम्मत नहीं हारी और भगवान् को याद कर वहां से निकलने के बारे में सोचने लगा।

अभी वह अपने विचारों में खोया ही था कि  अचानक उसके ऊपर मिटटी की बारिश होने लगी, गधे ने मन ही मन सोचा कि भले कुछ हो जाए वह अपना प्रयास नहीं छोड़ेगा और आसानी से हार नहीं मानेगा। और फिर वह पूरी ताकत से उछाल मारने लगा।

किसान भी औरों की तरह मिटटी से भरी एक बोरी कुएं में झोंक दी और उसमे  झाँकने लगा , उसने देखा की जैसे ही मिटटी गधे के ऊपर पड़ती वो उसे अपने शरीर से झटकता  और उचल कर उसके ऊपर चढ़ जाता ।
जब भी उसपे मिटटी डाली जाती वह यही करता ….झटकता और ऊपर चढ़ जाता …. झटकता और ऊपर चढ़ जाता ….।

किसान भी समझ चुका  था कि अगर वह यूँही मिटटी डलवाता रहा तो गधे की जान बच सकती है।

फिर क्या था वह मिटटी डलवाता गया और देखते-देखते गधा कुएं के मुहाने तक पहुँच गया, और अंत में कूद कर बाहर आ गया।

*💐💐 ग्रहण करने योग्य 💐💐*

*🔔▶️👨‍👩‍👧‍👦महान आत्माओं, हमारी ज़िन्दगी भी इसी तरह होती है , हम चाहे जितनी भी सावधानी बरतें कभी न  कभी मुसीबत रुपी गड्ढे में गिर ही जाते हैं .पर  गिरना प्रमुख नहीं है, प्रमुख है संभलना  . बहुत से लोग बिना प्रयास किये ही हार मान लेते हैं , पर जो प्रयास करते हैं भगवान् भी किसी न किसी रूप में उनके लिए मदद भेज देता है। यदि गधा लगातार बचने का प्रयास नहीं करता तो किसान के दिमाग में भी यह बात नहीं आती को उसे बचाया जा सकता है* … *🤝इसलिए जब अगली बार आप किसी मुसीबत में पड़ें तो कोशिश यह करना  कि  आप भी उसे संघर्ष समझकर यथायोग्य प्रयास से समाप्त करें।सकारात्मक विचारों से अपनी मंजिल तक का सफर पूरा करें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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रविवार, 29 मई 2022

श्रध्दावान पुजारी

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒श्रध्दावान पुजारी💐💐*

*🔔तीर्थंकर प्रभु के पंचकल्याणक की  सूचना🔔*
*आज 30  मई 2022 सोमवार ,ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को दुसरे  तीर्थंकर 1008 श्री अजितनाथजी भगवान का गर्भ कल्याणक महोत्सव  हैं।*

एक बार की बात है कि एक समृद्ध व्यापारी , जो सदैव अपने गुरू से परामर्श करके कुछ न कुछ सुकर्म किया करता था, गुरु से बोला-“गुरुदेव, धनार्जन हेतु मैं अपना गाँव पीछे ज़रूर छोड़ आया हूँ, पर हर समय मुझे लगता रहता है कि वहाँ पर एक ऐसा देवालय बनाया जाये जिसमें देवपूजन हो। धार्मिक बंधुओं केलिए   देवपूजा के साथ-साथ धर्मशाला भोजन की भी व्यवस्था हो,अच्छे संस्कारों से लोगों को सुसंस्कृत किया जाये इसलिये पाठशाला, अशरण को शरण मिले, वस्त्रहीन का तन ढके ,रोगियों को दवा और चिकित्सा मिले ,बच्चे अपने धर्म के वास्तविक स्वरूप से अवगत हो सकें |”  सुनते ही गुरु प्रसन्नतापूर्वक बोले-“केवल गाँव में ही क्यों,तुम ऐसा ही एक मंदिर अपने इस नगर में भी बनवाओ |” व्यापारी को सुझाव पसंद आया और उसने ने दो मंदिर,दो धर्मशाला सभी श्रद्धालुओं के सहयोग से एक अपने गाँव और दूसरा अपने नगर में,जहाँ वह अपने परिवार के साथ रहता था,बनवा दिए |

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
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दोनों देवालय शीघ्र ही लोगों की श्रद्धा के केंद्र बन गये |लेकिन कुछ दिन ही बीते थे कि व्यापारी ने देखा कि नगर के लोग गाँव के मन्दिर में आने लगे हैं ,जबकि वहाँ पहुँचने का रास्ता काफी कठिन है |उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है ?

कुछ भारी मन से वह गुरु जी के पास गया और सारा वृत्तांत कह सुनाया |गुरु जी ने कुछ विचार किया  और फिर उसे यह परामर्श दिया कि वह गाँव के मंदिर के पुजारी को नगर के मन्दिर में सेवा के लिए बुला ले | उसने ऐसा ही किया नगर के पुजारी को गाँव और गाँव के पुजारी को नगर में सेवा पर नियुक्त कर दिया |कुछ ही दिन बीते थे कि वह यह देखकर स्तब्ध रह गया कि अब गाँव के लोग नगर के मन्दिर की ओर रुख करने लगे हैं | अब तो उसे हैरानी के साथ-साथ परेशानी भी अनुभव होने लगी |बिना एक क्षण की देरी के वह गुरुजी के पास जा कर हाथ जोड़ कर,कहने लगा –“आपकी आज्ञानुसार मैंने दोनों पुजारियों का स्थानांतरण किया लेकिन समस्या तो पहले से भी गम्भीर हो चली है कि अब तो  मेरे गाँव के परिचित और परिजन, कष्ट सहकर और किराया –भाड़ा खर्च करके, नगर के देवालय में आने लगे हैं |मुझसे यह नहीं देखा जाता |”

व्यापारी की बात सुनते ही गुरु जी सारी बात समझ गये और बोले- हैरानी और परेशानी छोड़ो |दरअसल,जो गाँव वाले पुजारी हैं ,उनका अच्छा स्वभाव ही है जो लोग उसी देवालय में जाना चाहते हैं,जहाँ वे होते हैं | उनका लोगों से निःस्वार्थ प्रेम, उनके दुःख से दुखी होना ,उनके सुख में प्रसन्न होना, उनसे मित्रता का व्यवहार करना ही लोगों को उनकी और आकर्षित करता है और लोग स्वतः ही उनकी और खिंचे चले आते हैं |”अब सारी बात व्यापारी की समझ में आ चुकी थी |अतः आप एक नया पुजारी जो श्रद्धा पूर्वक भगवान की भक्ति व श्रद्धालुओं की सेवा में तत्पर हो उसकी व्यवस्था करें।व्यापारी ने योग्य निर्देश का पालन किया।

*💐💐 ग्रहण करने योग्य 💐💐*
*👨‍👩‍👧‍👦महान आत्माओं, हमें भी यह  बात अच्छे से समझनी चाहिए कि हमारा व्यक्तित्व  हमारे बाहरी रंग-रूप से नहीं हमारे व्यवहार से निर्धारित होता है, बिलकुल एक समान ज्ञान और वेश-भूषा वाले दो पुजारियों में लोग कष्ट सह कर भी उसी के पास गए जो अधिक संवेदनशील और व्यवहारी था। इसी तरह हम चाहे जिस कार्य क्षेत्र से जुड़े हों, हमारी सफलता में हमारे व्यवहार का बहुत बड़ा योगदान होता है। हम सभी को इस परम सत्य का बोध होना चाहिए कि इस धरती पर मात्र अपने लिए ही नहीं आये हैं, हमें अपने दुःखो की चिंता के साथ-साथ दूसरों के दुखों को ज़रूर समाप्त करना चाहिए, उनसे  मित्रतापूर्ण व्यवहार करना चाहिए ताकि हम जहाँ पर उपस्थित हों, वहाँ पर स्वत: ही एक अच्छा वातावरण बना रहे  और सकारात्मकता की तरंगों से हमारा जीवन-सागर लहलहाता रहे |यही सफल जीवन का मूलमंत्र है।*

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शनिवार, 28 मई 2022

दृष्टिकोण

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒दृष्टिकोण का फर्क💐💐*

*🔔तीर्थंकर प्रभु के पंचकल्याणक की  सूचना🔔*
*आज 29 मई 2022   रविवार ,ज्येष्ठ कृष्ण चौदस को 16 वे तीर्थंकर 1008 श्री     शान्तिनाथजी भगवान का जन्म , तप व मोक्ष कल्याणक महोत्सव  हैं।*
*🔔तीर्थंकर प्रभु के पंचकल्याणक की अग्रिम सूचना🔔*
*30  मई 2022 सोमवार ,ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को दुसरे वे तीर्थंकर 1008 श्री अजितनाथजी भगवान का गर्भ कल्याणक महोत्सव  हैं।*

▶️बहुत पुरानी बात है एक गांव में कुछ मजदूर पत्थर के खंभे बना रहे थे। तभी वहां से एक संत गुजरे। 

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

उन्होंने एक मजदूर से पूछा यहां क्या बन रहा है? उसने कहा देखते नहीं पत्थर काट रहा हूं?

 संत ने कहा हां, देख तो रहा हूं। लेकिन यहां बनेगा क्या? 
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मजदूर झुंझला कर बोला मालूम नहीं।

क्या बनेगा? मजदूर बोला देखिए साधु बाबा, यहां कुछ भी बने।
चाहे मंदिर बने या जेल, मुझे क्या।

 मुझे तो दिन भर की मजदूरी के रूप में 70 रुपए मिलते हैं। 

बस शाम को रुपए मिलें और मेरा काम बने। मुझे इससे कोई मतलब नहीं कि यहां क्या बन रहा है। 

साधु आगे बढ़े तो तीसरा मजदूर मिला। 

साधु ने उससे पूछा यहां क्या बनेगा? मजदूर ने कहा मंदिर।
इस गांव में कोई बड़ा मंदिर नहीं था। 

इस गांव के लोगों को दूसरे गांव में उत्सव मनाने जाना पड़ता था। 

मैं भी इसी गांव का हूं। ये सारे मजदूर इसी गांव के हैं। 

मैं एक-एक छेनी चला कर जब पत्थरों को गढ़ता हूं तो छेनी की आवाज में मुझे मधुर संगीत सुनाई पड़ता है। मैं आनंद में हूं।

कुछ दिनों बाद यह मंदिर बन कर तैयार हो जाएगा और यहां धूमधाम से पूजा होगी। मेला लगेगा। कीर्तन होगा। मैं यही सोच कर मस्त रहता हूं। 

मेरे लिए यह काम, काम नहीं है। मैं हमेशा एक मस्ती में रहता हूं। मंदिर बनाने की मस्ती में।

 मैं रात को सोता हूं तो मंदिर की कल्पना के साथ और सुबह जगता हूं तो मंदिर के खंभों को तराशने के लिए चल पड़ता हूं।
बीच-बीच में जब ज्यादा मस्ती आती है तो भजन गाने लगता हूं। 

जीवन में इससे ज्यादा काम करने का आनंद कभी नहीं आया। साधु ने कहा- यही जीवन का रहस्य है मेरे भाई। बस दृष्टिकोण का फर्क है।

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शुक्रवार, 27 मई 2022

बोध्द भिक्षु

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*कल 29 मई 2022   रविवार ,ज्येष्ठ कृष्ण चौदस को 16 वे तीर्थंकर 1008 श्री     शान्तिनाथजी भगवान का जन्म , तप व मोक्ष कल्याणक महोत्सव  हैं।*

*एक  बौद्ध भिक्षुक भोजन  बनाने  के  लिए  जंगल  से  लकड़ियाँ  चुन  रहा  था कि  तभी  उसने  कुछ अनोखा   देखा, “कितना अजीब है ये  !”, उसने   बिना  पैरों  की  लोमड़ी  को  देखते  हुए  मन  ही  मन   सोचा ।*

“ आखिर  इस  हालत  में  ये  जिंदा  कैसे  है ?” उसे  आशचर्य  हुआ , “ और  ऊपर  से  ये  बिलकुल   स्वस्थ  है ।

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वह  अपने ख़यालों  में  खोया  हुआ  था  की   अचानक  चारो  तरफ  अफरा – तफरी  मचने  लगी ;  जंगल  का  रजा  शेर  उस  तरफ  आ  रहा  था .  भिक्षुक भी  तेजी  दिखाते  हुए  एक  ऊँचे  पेड़  पर  चढ़  गया , और  वहीँ  से  सब  कुछ  देखने  लगा ।

 शेर  ने  एक हिरन  का  शिकार  किया  था  और  उसे  अपने  जबड़े  में  दबा  कर  लोमड़ी  की  तरफ   बढ़  रहा  था , पर  उसने  लोमड़ी   पर  हमला  नहीं  किया  बल्कि  उसे  भी  खाने के  लिए  मांस  के   कुछ  टुकड़े  डाल  दिए ।

“ ये  तो घोर आश्चर्य है , शेर लोमड़ी को मारने की बजाये उसे भोजन दे रहा है .” , भिक्षुक बुदबुदाया,उसे  अपनी  आँखों  पर  भरोसा  नहीं  हो  रहा  था  इसलिए  वह  अगले  दिन  फिर  वहीँ  आया  और  छिप  कर  शेर  का  इंतज़ार  करने  लगा ।आज  भी  वैसा  ही  हुआ , शेर  ने  अपने  शिकार  का  कुछ  हिस्सा  लोमड़ी  के  सामने  डाल   दिया ।

“यह  भगवान्  के  होने  का  प्रमाण  है !” भिक्षुक  ने  अपने  आप  से  कहा . “ वह जिसे पैदा करता है उसकी रोटी का भी इंतजाम कर देता है , आज  से  इस  लोमड़ी  की  तरह  मैं  भी  ऊपर  वाले  की दया पर जीऊंगा , इश्वर  मेरे  भी  भोजन   की  व्यवस्था करेगा .” और  ऐसा  सोचते  हुए  वह  एक   वीरान  जगह  पर जाकर एक पेड़  के नीचे  बैठ  गया ।

पहला  दिन  बीता  , पर  कोई  वहां  नहीं  आया ,  दूसरे  दिन  भी  कुछ  लोग  उधर  से  गुजर  गए  पर  भिक्षुक  की  तरफ  किसी  ने  ध्यान  नहीं  दिया . इधर  बिना  कुछ  खाए -पीये  वह  कमजोर  होता  जा  रहा  था । इसी तरह कुछ  और  दिन  बीत  गए , अब  तो  उसकी  रही  सही  ताकत  भी  खत्म  हो  गयी …वह  चलने -फिरने  के  लायक  भी  नहीं  रहा .  उसकी  हालत बिलकुल  मृत  व्यक्ति  की  तरह  हो  चुकी  थी  की  तभी  एक  महात्मा  उधर  से  गुजरे  और  भिक्षुक  के  पास  पहुंचे ।

उसने अपनी सारी कहानी  महात्मा  जी  को  सुनाई  और  बोला , “ अब  आप  ही  बताइए कि  भगवान्  इतना  निर्दयी  कैसे  हो  सकते  हैं , क्या  किसी  व्यक्ति  को  इस  हालत  में पहुंचाना  पाप  नहीं  है ?”

“ बिल्कुल है ,”, महात्मा  जी ने  कहा , “ लेकिन  तुम इतना  मूर्ख  कैसे  हो  सकते  हो ? तुम  ये  क्यों  नहीं  समझे  कि  भगवान्  तुम्हे  उसे  शेर  की  तरह  बनते  देखना  चाहते  थे , लोमड़ी  की  तरह  नहीं !!!” 
अतः हमसभी को सच्चे शास्त्रों के अनुसार अपना जीवन व्यापन करना चाहिए।

*💐💐ग्रहण करने योग्य💐💐*
 *🔔🤝↔️👨‍👩‍👧‍👦महान आत्माओं , हमारे जीवन में भी ऐसा कई बार होता है कि हमें चीजें जिस तरह समझनी चाहिए उसके विपरीत समझ लेते हैं। हमारे पूर्वोपार्जित कर्मो  ने हम सभी के अन्दर कुछ न  कुछ ऐसी शक्तियां दी हैं जो हमें महान बना सकती हैं , ज़रुरत हैं कि  हम उन्हें पहचाने , उस भिक्षुक का सौभाग्य था की उसे उसकी गलती का अहसास कराने के लिए महात्मा जी मिल गए पर हमें खुद भी चौकन्ना रहना चाहिए की कहीं हम शेर की जगह लोमड़ी तो नहीं बन रहे हैं।किसी भी जीव की शक्ति अनुसार शुभ कार्यो में मदत करते रहने से हमें किसी पर आश्रित नहीं रहेंगे।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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गुरुवार, 26 मई 2022

क्या बोले, क्यों सुनें

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒क्या बोले, क्यों सुनें ?💐💐*

*🔔तीर्थंकर प्रभु के पंचकल्याणक की अग्रिम सूचना🔔*
*1.🤗 27 मई 2022  गुरुवार ,ज्येष्ठ कृष्ण बारस को 14 वे तीर्थंकर 1008 श्री    अनंतनाथजी भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव  ।*
*🔔तीर्थंकर प्रभु के पंचकल्याणक की अग्रिम सूचना🔔*
*29 मई 2022   रविवार ,ज्येष्ठ कृष्ण चौदस को 16 वे तीर्थंकर 1008 श्री     शान्तिनाथजी भगवान का जन्म , तप व मोक्ष कल्याणक महोत्सव  हैं।*

➡️प्राचीन यूनान में सुकरात को महाज्ञानी माना जाता था. एक दिन उनकी जान पहचान का एक व्यक्ति उनसे मिला

और बोला, ” क्या आप जानते हैं मैंने आपके एक दोस्त के बारे में क्या सुना ?”

“एक मिनट रुको,” सुकरात ने कहा, ” तुम्हारे कुछ बताने से पहले मैं चाहता हूँ कि तुम एक छोटा सा टेस्ट पास करो. इसे ट्रिपल फ़िल्टर टेस्ट कहते हैं।”
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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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“ट्रिपल फ़िल्टर ?”

” हाँ, सही सुना तुमने.”, सुकरात ने बोलना जारी रखा.” इससे पहले की तुम मेरे दोस्त के बारे कुछ बताओ , अच्छा होगा कि हम कुछ समय लें और जो तुम कहने जा रहे हो उसे फ़िल्टर कर लें. इसीलिए मैं इसे ट्रिपल फ़िल्टर टेस्ट कहता हूँ. पहला फ़िल्टर है सत्य.

क्या तुम पूरी तरह आश्वस्त हो कि जो तुम कहने जा रहे हो वो सत्य है?

“नहीं”, व्यक्ति बोला, ” दरअसल मैंने ये किसी से सुना है और ….”

” ठीक है”, सुकरात ने कहा. ” तो तुम विश्वास के साथ नहीं कह सकते कि ये सत्य है या असत्य. चलो अब दूसरा फ़िल्टर ट्राई करते हैं, अच्छाई का फ़िल्टर. ये बताओ कि जो बात तुम मेरे दोस्त के बारे में कहने जा रहे हो क्या वो कुछ अच्छा है ?”

” नहीं , बल्कि ये तो इसके उलट…..”

“तो”, सुकरात ने कहा , ” तुम मुझे कुछ बुरा बताने वाले हो , लेकिन तुम आश्वस्त नहीं हो कि वो सत्य है. कोई बात नहीं, तुम अभी भी टेस्ट पास कर सकते हो, क्योंकि अभी भी एक फ़िल्टर बचा हुआ है: उपयोगिता का फ़िल्टर. मेरे दोस्त के बारे में जो तू बताने वाले हो क्या वो मेरे लिए उपयोगी है?”

“हम्म्म…. नहीं , कुछ ख़ास नहीं…”

“अच्छा,” सुकरात ने अपनी बात पूरी की , ” यदि जो तुम बताने वाले हो वो ना सत्य है , ना अच्छा और ना ही उपयोगी तो उसे सुनने का क्या लाभ?” और ये कहते हुए वो अपने काम में व्यस्त हो गए।


*💐💐ग्रहण करने योग्य💐💐*
*➡️🤝👨‍👩‍👧‍👦↔️किसी की सुनी सुनाई बातों को हम बिना किसी जांच परख के आगे बढाते है तो ये उस व्यक्ति के साथ गलत होगा।अतः हमसभी को बुद्धि विवेक के अनुसार ही कुछ बोलना चाहिए।क्यों किसी बात को सुनरहे है,इसका भी विचार करना चाहिए।शब्दों के कारण ही महाभारत व रामायण हुई थी।*
 
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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बुधवार, 25 मई 2022

संगति का प्रभाव

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒संगति का प्रभाव💐💐*

*🔔तीर्थंकर प्रभु के पंचकल्याणक की अग्रिम सूचना🔔*
*2.🤗 कल 27 मई 2022  गुरुवार ,ज्येष्ठ कृष्ण बारस को 14 वे तीर्थंकर 1008 श्री    अनंतनाथजी भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव  ।*

▶️👨‍👩‍👧‍👦एक बार एक राजा शिकार के उद्देश्य से अपने काफिले के साथ किसी जंगल से गुजर रहा था। दूर-दूर तक शिकार नजर नहीं आ रहा था, वे धीरे धीरे घनघोर जंगल में प्रवेश करते गए। अभी कुछ ही दूर गए थे की उन्हें कुछ डाकुओं के छिपने की जगह दिखाई दी।जैसे ही वे उसके पास पहुचें कि पास के पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा :–

पकड़ो पकड़ो एक राजा आ रहा है इसके पास बहुत सारा सामान है लूटो लूटो जल्दी आओ जल्दी आओ।
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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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तोते की आवाज सुनकर सभी डाकू राजा की और दौड़ पड़े. डाकुओ को अपनी और आते देख कर राजा और उसके सैनिक दौड़ कर भाग खड़े हुए। भागते-भागते कोसो दूर निकल गए. सामने एक बड़ा सा पेड़ दिखाई दिया. कुछ देर सुस्ताने के लिए उस पेड़ के पास चले गए , जैसे ही पेड़ के पास पहुचे कि उस पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा ।

आओ राजन हमारे साधु महात्मा की कुटी में आपका स्वागत है. अन्दर आइये पानी पीजिये और विश्राम कर लीजिये।

तोते की इस बात को सुनकर राजा हैरत में पड़ गया , और सोचने लगा की एक ही जाति के दो प्राणियों का व्यवहार इतना अलग-अलग कैसे हो सकता है। राजा को कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह तोते की बात मानकर अन्दर साधु की कुटिया की ओर चला गया, साधु महात्मा को प्रणाम कर उनके समीप बैठ गया और अपनी सारी कहानी सुनाई. और फिर धीरे से पूछा, “ऋषिवर इन दोनों तोतों के व्यवहार में आखिर इतना अंतर क्यों है।”

साधु महात्मा धैर्य से सारी बातें सुनी और बोले ,” ये कुछ नहीं राजन बस संगति का असर है. डाकुओं के साथ रहकर तोता भी डाकुओं की तरह व्यवहार करने लगा है और उनकी ही भाषा बोलने लगा है। अर्थात जो जिस वातावरण में रहता है वह वैसा ही बन जाता है।
*💐💐ग्रहण करने योग्य💐💐*
 *🔔👨‍👩‍👧‍👦🤝कहने का तात्पर्य यह है कि मूर्ख भी विद्वानों के साथ रहकर विद्वान बन जाता है और अगर विद्वान भी मूर्खों के संगत में रहता है तो उसके अन्दर भी मूर्खता आ जाती है. इसिलिय हमें संगति सोच समझ कर करनी चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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मंगलवार, 24 मई 2022

कौन बचायेगा

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒कौन बचाएगा ? 🤗🔔*

*🔔तीर्थंकर प्रभु के पंचकल्याणक की  सूचना🔔*
*1.🤗आज 25 मई 2022  बुधवार , ज्येष्ठ कृष्ण दशमी को 13 वे तीर्थंकर 1008 श्री   विमलनाथजी भगवान का गर्भ   कल्याणक महोत्सव 25 मई 2022  बुधवार को है ।*

*🔔तीर्थंकर प्रभु के पंचकल्याणक की अग्रिम सूचना🔔*
*2.🤗 27 मई 2022  गुरुवार ,ज्येष्ठ कृष्ण बारस को 14 वे तीर्थंकर 1008 श्री    अनंतनाथजी भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव  ।*

एक समय की बात है किसी गाँव  में  एक  साधु रहता  था, वह  भगवान का बहुत बड़ा भक्त था और निरंतर एक पेड़ के नीचे  बैठ  कर  भगवान के नाम का जप  किया करता  था |  उसका  भागवान  पर  अटूट   विश्वास   था और गाँव वाले भी उसकी इज्ज़त करते थे|

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
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एक बार गाँव  में बहुत भीषण बाढ़  आ  गई |  चारो तरफ पानी ही पानी दिखाई देने लगा, सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊँचे स्थानों की तरफ बढ़ने लगे | जब लोगों ने देखा कि साधु महाराज अभी भी पेड़ के नीचे बैठे भगवान का नाम जप  रहे हैं तो उन्हें यह जगह छोड़ने की सलाह दी| पर साधु ने कहा-

 ” तुम लोग अपनी  जान बचाओ मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा!”

धीरे-धीरे पानी  का  स्तर बढ़ता गया , और पानी साधु के कमर तक आ पहुंचा , इतने में वहां से एक नाव  गुजरी|

मल्लाह ने कहा- ” हे साधू महाराज आप इस नाव पर सवार हो जाइए मैं आपको सुरक्षित स्थान तक पहुंचा दूंगा |”

“नहीं, मुझे तुम्हारी मदद की आवश्यकता नहीं है , मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा !! “, साधु ने उत्तर दिया.

नाव वाला चुप-चाप वहां से चला गया.

कुछ देर बाद बाढ़ और प्रचंड हो गयी , साधु ने पेड़ पर चढ़ना उचित समझा और वहां बैठ कर ईश्वर को याद करने लगा | तभी अचानक उन्हें गड़गडाहत की आवाज़ सुनाई दी, एक हेलिकोप्टर उनकी मदद के लिए आ पहुंचा, बचाव दल  ने एक रस्सी लटकाई  और साधु को उसे जोर से पकड़ने का आग्रह किया|

पर साधु फिर बोला-” मैं इसे नहीं पकडूँगा, मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा |”

उनकी हठ के आगे बचाव दल भी उन्हें लिए बगैर वहां से चला गया |

कुछ ही देर में पेड़ बाढ़ की धारा में बह गया और साधु की मृत्यु हो गयी |

मरने  के  बाद  साधु महाराज की आत्मा यमराज के पहुचे और  बोले  -. ” हे  न्यायकर्ता  मैंने    पूरी  लगन   के  साथ भगवान के नाम की आराधना की… तपस्या  की पर जब  मै  पानी में डूब कर मर  रहा  था  तब   मुझे  बचाने  कोई नहीं  आया, ऐसा क्यों  ?

यमराज बोले , ”  हे साधु महात्मा   भक्ति व जाप से तुम्हारी रक्षा करने एक  नहीं बल्कि तुम्हें तीन  बार मौका दिया  , पहला, ग्रामीणों के रूप में , दूसरा  नाव  वाले  के   रूप   में , और तीसरा ,हेलीकाप्टर  बचाव दल  के  रूप   में. किन्तु तुम अपने पुण्यफल के इन अवसरों को पहचान नहीं पाए |”

*जो भी व्यक्ति विशेष भगवान को कर्ता मानता है वह व्यक्ति विशेष अभी भगवान की शक्ति को पहचान नहीं सका है।जिस प्रकार कोई भी व्यक्ति जैसा कर्म करता है, उसी कर्म के अनुसार उसे फल प्राप्त होता है।सृष्टि का नियम है कि नीम बोने पर आम की प्राप्ति नहीं हो सकती।भगवान ने हमें सभी मार्ग बताये है, अब हमारा जैसा पुरषार्थ होगा वैसी मंजिल प्राप्त होगी । भगवान में कोई भी शक्ति नहीं है किंतु भगवान के भक्ति में इतनी शक्ति है कि वह भक्त एक दिन भगवान बन जाता है ।उन परम सिद्ध आत्माओं ने हमें बताया है कि हम किस प्रकार इस संसार से मुक्त हो सकते हैं किंतु हम उस रास्ते को न पहचानते हुए अन्य रास्तों में सुख ढूंढ रहे हैं। इसीलिए आज हम सभी दुखी हो रहे हैं।*

*💐💐शिक्षा💐💐*
*महान आत्माओं, इस जीवन में हमारा समिचीन पुरषार्थ हमें कई अवसर देता है , इन अवसरों की प्रकृति कुछ ऐसी होती  है कि वे  किसी  की प्रतीक्षा  नहीं  करते  है , वे  एक  दौड़ते  हुये  घोड़े के सामान होते हैं जो हमारे सामने से तेजी से गुजरते हैं  , यदि हम उन्हें पहचान कर उनका लाभ उठा लेते  है  तो  वे  हमें   हमारी  मंजिल   तक  पंहुचा  देते  है, अन्यथा हमें बाद में पछताना ही पड़ता है|भगवान सृष्टि का कर्ता नहीं है, हमारे कर्म ही हमें जैसा वर्तमान का पुरषार्थ व कर्म का उदय होगा वैसा फल प्राप्त होता है।*

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सोमवार, 23 मई 2022

मुफ्त की सलाह

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒मुफ्त सलाह से😇🔔*

सुन्दर  वन  में  ठण्ड  दस्तक  दे  रही  थी , सभी  जानवर  आने  वाले  कठिन  मौसम  के  लिए  तैयारी   करने  में  लगे  हुए  थे । सुगरी  चिड़िया  भी  उनमे  से  एक  थी  , हर  साल  की  तरह  उसने  अपने  लिए  एक  शानदार  घोंसला  तैयार  किया  था  और  अचानक  होने  वाली  बारिश  और  ठण्ड  से  बचने के लिए उसे  चारो  तरफ  से  घांस -फूंस  से  ढक  दिया  था ।

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सब  कुछ  ठीक  चल  रहा  था  कि  एक  दिन  अचानक  ही  बिजली  कड़कने  लगी  और  देखते – देखते  घनघोर  वर्षा   होने  लगी , बेमौसम  आई  बारिश  से  ठण्ड  भी  बढ़ गयी  और  सभी  जानवर  अपने -अपने  घरों   की  तरफ  भागने  लगे . सुगरी  भी  तेजी  दिखाते  हुए  अपने  घोंसले  में वापस आ गई  , और  आराम  करने  लगी ।उसे  आये   अभी  कुछ  ही  वक़्त  बीता  था  कि  एक  बन्दर  खुद  को  बचाने  के  लिए  पेड़  के  नीचे  आ  पहुंचा ।

सुगरी  ने  बन्दर  को  देखते  ही  कहा  – “ तुम  इतने  होशियार  बने फिरते  हो  तो भला ऐसे  मौसम  से  बचने  के  लिए  घर  क्यों  नहीं  बनाया ?” यह  सुनकर  बन्दर  को  गुस्सा  आया  लेकिन  वह  चुप  ही  रहा और  पेड़  की  आड़  में  खुद  को  बचाने  का प्रयास करने लगा ।

थोड़ी देर शांत रहने के बाद सुगरी फिर बोली, ” पूरी गर्मी इधर उधर आलस में बिता दी…अच्छा होता अपने लिए एक घर बना लेते!!!” यह सुन बन्दर ने गुस्से में कहा, ” तुम अपने से मतलब रखो , मेरी चिंता छोड़ दो ।”

सुगरी शांत हो गयी।

बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी और हवाएं भी तेज चल रही थीं, बेचारा बन्दर ठण्ड से काँप रहा था, और खुद को ढंकने की भरसक कोशिश कर रहा था,पर सुगरी ने तो मानो उसे छेड़ने की कसम खा रखी थी, वह फिर बोली, ” काश कि तुमने थोड़ी अकल दिखाई होती तो आज इस हालत….”

सुगरी ने अभी अपनी बात ख़तम भी नहीं की थी कि बन्दर बौखलाते हुए बोला, ” एक दम चुप, अपना ये बार-बार  फुसफुसाना बंद करो ….. ये ज्ञान की बाते अपने पास रखो और पंडित बनने की कोशिश मत करो.” सुगरी चुप हो गयी।

अब तक काफी पानी गिर चुका था , बन्दर बिलकुल भीग गया था और बुरी तरह काँप रहा था। इतने में सुगरी से रहा नहीं गया और वो फिर बोली , ” कम से कम अब घर बनाना सीख लेना.” इतना सुनते ही बन्दर तुरंत पेड़ पर चढ़ने लगा ,……. “भले मैं घर बनाना नहीं जानता लेकिन मुझे तोडना अच्छे से आता है..”, और  ये कहते हुए उसने सुगरी का घोंसला तहस नहस कर दिया। अब सुगरी भी बन्दर की तरह बेघर हो चुकी थी और ठण्ड से काँप रही थी।

*💐💐ग्रहण करने योग्य💐💐*
महान आत्माओं, ऐसा बहुत बार होता है कि लोग मुसीबत में पड़े व्यक्ति की मदद करने की बजाये उसे दुनिया भर की नसीहत देने लगते हैं. वयस्क होने के नाते हर कोई अपनी स्थिति के लिए खुद जिम्मेदार है. हम एक शुभचिंतक के रूप में उसे एक-आध बार सलाह तो  दे सकते है पर उसकी किसी कमी के लिए बारबार कोसना हमें सुगरी चिड़िया की हालत में पंहुचा सकता है. इसलिए किसी मुश्किल में पड़े व्यक्ति की मदद कर सकते हैं तो करिए पर उसे बेकार के उपदेश मत दीजिये।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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रविवार, 22 मई 2022

हाथी का वर्णन

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒हाथी का वर्णन💐💐*

*🔔↔️🫠बहुत समय पहले की बात है , किसी गावं में 6 अंधे आदमी रहते थे. एक दिन गाँव वालों ने उन्हें बताया , ” अरे , आज गावँ में हाथी आया है.”  उन्होंने आज तक बस हाथियों के बारे में सुना था पर कभी छू कर महसूस नहीं किया था. उन्होंने ने निश्चय किया, ” भले ही हम हाथी को देख नहीं सकते , पर आज हम सब चल कर उसे महसूस तो कर सकते हैं ना?” और फिर वो सब उस जगह की तरफ बढ़ चले जहाँ हाथी आया हुआ था।*

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 सभी ने हाथी को छूना शुरू किया।

” मैं समझ गया, हाथी एक खम्भे की तरह होता है”,  पहले व्यक्ति ने हाथी का पैर छूते हुए कहा.।

“अरे नहीं, हाथी तो रस्सी की तरह होता है.” दूसरे व्यक्ति ने पूँछ पकड़ते हुए कहा।

“मैं बताता हूँ,  ये तो पेड़ के तने की तरह है.”,  तीसरे व्यक्ति ने सूंढ़ पकड़ते हुए कहा।

” तुम लोग क्या बात कर रहे हो, हाथी  एक बड़े हाथ के पंखे की तरह होता है.” , चौथे व्यक्ति ने कान छूते हुए सभी को समझाया।

“नहीं-नहीं , ये तो एक दीवार की तरह है.”, पांचवे व्यक्ति ने पेट पर हाथ रखते हुए कहा।

” ऐसा नहीं है , हाथी तो एक कठोर नली की तरह होता है.”, छठे व्यक्ति ने अपनी बात रखी।

और फिर सभी आपस में बहस करने लगे और खुद को सही साबित करने में लग गए.. ..उनकी  बहस तेज होती गयी और ऐसा लगने लगा मानो वो आपस में लड़ ही पड़ेंगे।

तभी वहां से एक बुद्धिमान व्यक्ति गुजर रहा था. वह रुका और उनसे पूछा,” क्या बात है तुम सब आपस में झगड़ क्यों रहे हो?”

” हम यह नहीं तय कर पा रहे हैं कि आखिर हाथी दीखता कैसा है.” , उन्होंने ने उत्तर दिया।

और फिर बारी बारी से उन्होंने अपनी बात उस व्यक्ति को समझाई।

बुद्धिमान व्यक्ति ने सभी की बात शांति से सुनी और बोला ,” तुम सब अपनी-अपनी जगह सही हो. तुम्हारे वर्णन में अंतर इसलिए है क्योंकि तुम सबने हाथी के अलग-अलग भाग छुए
हैं, पर देखा जाए तो तुम लोगो ने जो कुछ भी बताया वो सभी बाते हाथी के वर्णन के लिए सही बैठती हैं।”

” अच्छा !! ऐसा है.” सभी ने एक साथ उत्तर दिया . उसके बाद कोई विवाद नहीं हुआ ,और सभी खुश हो गए कि वो सभी सच कह रहे थे।

*💐ग्रहण करने योग्य💐* :- *👨‍👩‍👧‍👦महान आत्माओं,  कई बार ऐसा होता है कि हम अपनी  बात को लेकर अड़ जाते हैं कि हम ही सही हैं और बाकी सब गलत है. लेकिन यह संभव है कि हमें सिक्के का एक ही पहलु दिख रहा हो और उसके आलावा भी कुछ ऐसे तथ्य हों जो सही हों. इसलिए हमें अपनी बात तो रखनी चाहिए पर दूसरों की बात भी सब्र से सुननी चाहिए , और कभी भी बेकार की बहस में नहीं पड़ना चाहिए. वेदों में भी कहा गया है कि एक सत्य को कई तरीके से बताया जा सकता है। तो , जब अगली बार आप ऐसी किसी बहस में पड़ें तो याद कर लीजियेगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आपके हाथ में सिर्फ पूँछ  है और बाकी हिस्से किसी और के पास हैं।आज हमें किसी व्यक्ति या वस्तु के बारे में सम्पूर्ण जानकारी के लिए सभी दृष्टिकोण से विचार कर निर्णय लेना चाहिए।एक वस्तु मे अनेक गुण होते है।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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शनिवार, 21 मई 2022

पुजारी की भक्ति

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒पुजारी की भक्ति*

एक राजा ने  श्रीकृष्ण का एक मंदिर बनवाया और पूजा के लिए एक पुजारी को लगा दिया। पुजारी बड़े भाव से श्रीकृष्ण बिहारीजी की सेवा करने लगे. 
 की पूजा-अर्चना और सेवा-टहल करते पुजारी की उम्र बीत गई. राजा रोज एक फूलों की माला सेवक के हाथ से भेजा करता था.पुजारी वह माला बिहारीजी को पहना देते थे।

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

 जब राजा दर्शन करने आता तो पुजारी वह माला बिहारीजी के गले से उतारकर राजा को पहना देते थे. यह रोज का नियम था।

एक दिन राजा किसी वजह से मंदिर नहीं जा सका. उसने एक सेवक से कहा- माला लेकर मंदिर जाओ. पुजारी से कहना आज मैं नहीं आ पाउंगा। सेवक ने जाकर माला पुजारी को दे दी

 और बता दिया कि आज महाराज का इंतजार न करें। सेवक वापस आ गया. पुजारी ने माला बिहारीजी को पहना दी. फिर उन्हें विचार आया कि आज तक मैं अपने बिहारीजी की चढ़ी माला राजा को ही पहनाता रहा। कभी ये सौभाग्य मुझे नहीं मिला।

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जीवन का कोई भरोसा नहीं कब रूठ जाए. आज मेरे श्रीकृष्ण ने मुझ पर बड़ी कृपा की है. राजा आज आएंगे नहीं, तो क्यों न माला मैं पहन लूं. यह सोचकर पुजारी ने बिहारीजी के गले से माला उतारकर स्वयं पहन ली।

इतने में सेवक आया और उसने बताया कि राजा की सवारी बस मंदिर में पहुंचने ही वाली है।यह सुनकर पुजारी कांप गए. उन्होंने सोचा अगर राजा ने माला मेरे गले में देख ली तो मुझ पर क्रोधित होंगे।

इस भय सेउन्होंने अपने गले से माला उतारकर बिहारीजी को फिर से पहना दी।जैसे ही राजा दर्शन को आया तो पुजारी ने नियम अुसार फिर से वह माला उतार कर राजा के गले में पहना दी।
माला पहना रहे थे तभी राजा को मालामें एक सफ़ेद बाल दिखा।

राजा को सारा माजरा समझ गया कि पुजारी ने माला स्वयं पहन ली थी और फिर निकालकर वापस डाल दी होगी। पुजारी ऐसा छल करता है, यह सोचकर राजा को बहुत गुस्सा आया।

उसने पुजारी जी से पूछा- पुजारीजी यह सफ़ेद बाल किसका है. ? 

पुजारी को लगा कि अगर सच बोलता हूं तो राजा दंड दे देंगे इसलिए जान छुड़ाने के लिए पुजारी ने कहा-महाराज यहसफ़ेद बाल तो बिहारीजी का है।

अब तो राजा गुस्से सेआग- बबूला हो गया कि ये पुजारी झूठ पर झूठ बोले जा रहा है.भला बिहारीजी के बाल भी कहीं सफ़ेद होते हैं।

राजा ने कहा- पुजारी अगर यह सफेद बाल बिहारीजी का है तो सुबह शृंगार के समय मैं आउंगा और देखूंगा कि बिहारीजी के बाल सफ़ेद है या काले। अगर बिहारी जी के बाल काले निकले तो आपको फांसी हो जाएगी. राजा हुक्म सुनाकर चला गया।

अब पुजारी रोकर बिहारीजी से विनती करने लगे-
प्रभु मैं जानता हूं आपके सम्मुख मैंने झूठ बोलने का अपराध किया. अपने गले में डाली माला पुनः आपको पहना दी।

आपकी सेवा करते-करते वृद्ध हो गया. यह लालसा ही रही कि कभी आपको चढ़ी माला पहनने का सौभाग्य मिले। इसी लोभ में यह सब अपराध हुआ. मेरे ठाकुरजी पहली बार यह लोभ हुआ और ऐसी विपत्ति आ पड़ी है।

मेरे नाथ अब नहीं होगा ऐसा अपराध। अब आप ही बचाइए नहीं तो कल सुबह मुझे फाँसी पर चढा दिया जाएगा. पुजारी सारी रात रोते रहे.
सुबह होते ही राजा मंदिर में आ गया।

 उसने कहा कि आज प्रभु का शृंगार वह स्वयं करेगा. इतना कहकर राजा ने जैसे ही मुकुट हटाया तो हैरान रह गया। बिहारीजी के सारे बाल सफ़ेद थे. राजा को लगा, पुजारी ने जान बचाने के लिए बिहारीजी के बाल रंग दिए होंगे. गुस्से से तमतमाते हुए उसने बाल की जांच करनी चाही।

 बाल असली हैं या नकली यब समझने के लिए उसने जैसे ही बिहारी जी के बाल तोडे, बिहारीजी के सिर से खून की धार बहने लगी।
राजा ने प्रभु के चरण पकड़ लिए और क्षमा मांगने लगा।

 बिहारीजी की मूर्ति से आवाज आई- राजा तुमने आज तक मुझे केवल मूर्ति ही समझा इसलिए आज से मैं तुम्हारे लिए मूर्ति ही हूँ. 

पुजारी जी मुझे साक्षात भगवान् समझते हैं. उनकी श्रद्धा की लाज रखने के लिए आज मुझे अपने बाल सफेद करने पड़े व रक्त की धार भी बहानी पड़ी तुझे समझाने के लिए.

इसलिए कहते हैं- समझो तो देव नहीं तो पत्थर.श्रद्धा हो तो उन्हीं पत्थरों में भगवान सप्राण होकर भक्त से मिलने आ जाएंगे ।

*🔔🤝आत्मकल्याण केलिए श्रावकों को पंचपरमेष्ठी पर शास्त्रोक्त श्रद्धा रखते हुए अपनी शक्ति के अनुसार पूजन करना चाहिए।ऐसा करने से ही मोक्षमार्ग प्रशस्त होता है।आपको समझ में आये इसलिये श्रीकृष्ण के बारे मे उदाहरण देकर समझाया गया है।जैनदर्शन के अनुसार भगवान कुछ भी नहीं देते ,किंतु भगवान के गुणों की भक्ति करनेवाले एक दिन भगवान बन जाते है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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शुक्रवार, 20 मई 2022

संत का मार्गदर्शन

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒संत का मार्गदर्शन🤗😇*

*🔔तीर्थंकरों के पंचकल्याणक की  सूचना🔔*
*1.🤗आज ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी 21 मई 2022 शनिवार को   11 वे तीर्थंकर 1008 श्री  श्रेयांसनाथजी भगवान का गर्भ   कल्याणक महोत्सव  है ।*

एक गरीब विधवा के पुत्र ने एक बार अपने राजा को देखा। राजा को देख कर उसने अपनी माँ से पूछा- माँ! क्या कभी मैं राजा से बात कर पाऊँगा?
माँ हंसी और चुप रह गई।
पर वह लड़का तो निश्चय कर चुका था। उन्हीं दिनों गाँव में एक संत आए हुए थे। तो युवक ने उनके चरणों में अपनी इच्छा रखी।
संत ने कहा- अमुक स्थान पर राजा का महल बन रहा है, तुम वहाँ चले जाओ और मजदूरी करो। पर ध्यान रखना, वेतन न लेना। अर्थात् बदले में कुछ माँगना मत। निष्काम रहना।
वह लड़का गया। वह मेहनत दोगुनी करता पर वेतन न लेता।

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एक दिन राजा निरीक्षण करने आया। उसने लड़के की लगन देखी। प्रबंधक से पूछा- यह लड़का कौन है, जो इतनी तन्मयता से काम में लगा है? इसे आज अधिक मजदूरी देना।
प्रबंधक ने विनय की- महराज! इसका अजीब हाल है, दो महीने से इसी उत्साह से काम कर रहा है। पर हैरानी यह है कि यह मजदूरी नहीं लेता। कहता है मेरे घर का काम है। घर के काम की क्या मजदूरी लेनी?
राजा ने उसे बुला कर कहा- बेटा! तूं मजदूरी क्यों नहीं लेता? बता तूं क्या चाहता है?
लड़का राजा के पैरों में गिर पड़ा और बोला- महाराज! आपके दर्शन हो गए, आपकी कृपा दृष्टि मिल गई, मुझे मेरी मजदूरी मिल गई। अब मुझे और कुछ नहीं चाहिए।
राजा उसे मंत्री बना कर अपने साथ ले गया। और कुछ समय बाद अपनी इकलौती पुत्री का विवाह भी उसके साथ कर दिया। राजा का कोई पुत्र था नहीं, तो कालांतर में उसे ही राज्य भी सौंप दिया।
जीव के कर्म कहते है कि भगवान ही राजा हैं। हम सभी भगवान के मजदूर हैं। भगवान का भजन करना ही मजदूरी करना है। संत ही मंत्री है। भक्ति ही राजपुत्री है। मोक्ष ही वह राज्य है।
हम भगवान के भजन के बदले में कुछ भी न माँगें तो वे भगवान स्वयं दर्शन देकर, पहले संत बना देते हैं और अपनी भक्ति प्रदान कर, कालांतर में मोक्ष ही दे देते हैं।
वह लड़का सकाम कर्म करता, तो मजदूरी ही पाता, निष्काम कर्म किया तो राजा बन बैठा। यही सकाम और निष्काम कर्म के फल में भेद है।
"तुलसी विलम्ब न कीजिए, निश्चित भजिए राम।
जगत मजूरी देत है, क्यों राखे भगवान॥"

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गुरुवार, 19 मई 2022

सुखी कौन

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒सुखी कौन?💐💐*

एक जिज्ञासु किसी सुखी पुरुष की तलाश में निकला।सबसे पहले वह एक निर्धन किसान के पास पहुंँचा और उसने किसान से पूछा-'किसान भाई! आप तो सुखी होंगे?

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किसान ने कहा-'भाई साहब, मैं तो निर्धन हूंँ, भला मैं कैसे सुखी हो सकता हूंँ। गांँव का धन सम्पन्न व्यक्ति सुखी है आप उसके पास जाइये।तब जिज्ञासु धनाढ्य व्यक्ति के पास पहुंँचा। उसने धनाढ्य व्यक्ति से पूछा- महानुभव आप तो सुखी होंगे?

 उसने कहा-'प्यारे भाई,भला मैं कैसे सुखी हो सकता हूंँ क्योंकि मेरे पास तो धन वैभव है,किन्तु उसकी सुरक्षा का कोई समुचित प्रबन्ध नहीं है। दिन-रात चिन्ता और दुख है कि कहीं मेरे धन- वैभव को लुटेरा ले ना जायें।तब जिज्ञासु ने पूछा-'फिर सुखी कौन होगा?

उसने कहा-आप राजा के पास जाइये,वह सुखी होगा। तब जिज्ञासु राजा के पास पहुंँचा तथा नमस्कार कर पूछा-'राजन!आप तो अवश्य सुखी होंगे?

राजा ने कहा-ये भाग्य की कैसी विडम्बना है कि प्रभु ने बहुतों को तो भोग-पदार्थ दिए ही नहीं, तो वह उनके अभाव में दुखी है, किन्तु मेरे पास सब कुछ रहते हुए भी मैं उसका उपभोग नहीं कर सकता, क्योंकि डाक्टरों ने बताया है कि आपको बहुत सारा रोग है।जिसके लिए आपको इन सारे भोग पदार्थ को त्यागना होगा, नहीं तो बीमारी और भी बढ़ जाएगी। इसलिए मैं भी बहुत दुखी हूंँ।

 राजा ने फिर कहा-इस धरातल में कोई भी व्यक्ति सुखी नहीं होगा अगर आप सुखी आत्मा की खोज में है तो आप देवराज इन्द्र के पास जाइये।जिज्ञासु इन्द्र के पास भी पहुंँचा तथा उसने अपने पुराना प्रश्न उसके पास भी दोहराया।

देवराज इन्द्र ने कहा-"भाई मेरे,मैं भी चिन्तित और दुखी हूंँ। जिज्ञासु ने विस्मिता होकर पूछा-'आप और दुखी!क्यों कैसे? इन्द्र ने कहा-'मुझे एक ही चिंन्ता दिन-रात सताती रहती है कि कहीं कोई भजन-अभ्यासी साधु भक्त महात्मा भजन-सुमिरण कर मेरे इन्द्रासन को न छीन ले।अतः मैं भी दुखी हूंँ।

जिज्ञासु ने पूछा- जब इतनी भोग सामग्री पाकर आप भी दुखी हैं तो इस संसार में सुखी कौन होगा? इन्द्र ने कहा-'आप ब्रह्मा जी के पास जाइये, शायद वह सुखी हों। जिज्ञासु ब्रह्मा जी के पास पहुंँचा तथा उन्हें प्रणाम कर पूछा-पितामह!आप तो सुखी और निश्चिंत होंगे?

ब्रह्मा जी ने कहा-"भाई!मैंने सारे सृष्टि की रचना की है और यह विधान बनाया गया है कि प्रत्येक पुत्र का यह कर्तव्य है कि वह अपने पिता का आज्ञा की पालन करें, किन्तु मेरी कोई सन्तान मेरी कोई आज्ञा नहीं मानती।अतः मैं भी दुखी हूंँ। आप भगवान शंँकर के पास जाइये,वह सुखी होंगे।

जिज्ञासु भगवान शंँकर के चरणों में उपस्थित हुआ तथा प्रणाम कर पूछा भगवन!"आप तो सुखी होंगे"। शंँकर जी ने कहा-"वत्स! मेरे घर में भी बड़ी समस्या है मेरा पुत्र गणेश जब मेरे पास चूहे की सवारी पर आता है तो मेरी गले का नाग(सर्प)उसके चूहे को खाने भागता है और उसका चूहा बिल में घुस जाता है l

तब अपनी सवारी की बिना गणेश दुखी हो जाता है और जब पुत्र दुखी हो जाता है तब पिता का दुखी होना स्वभाविक ही है। और जब मेरा पुत्र कार्तिकेय मुझसे मिलने आता है तो अपनी सवारी मोर पर बैठकर आता है। उसका मोर मेरे गले के नाग(सर्प)को खाने बढ़ता है और मेरे गले का नाग(सर्प)भाग  कर विल में घुस जाता है।तब अपने गले की माला नाग(सर्प)के बिना मैं दुखी हो जाता हूंँ।

और जब पिता दुखी हो जाता है तो स्वभावतः पुत्र भी दुखी हो जाता है।मेरी कुटिया एक है,झोपड़ी भी छोटी है, मेरा वाहन बैल है और मेरी अर्धांगिनी पार्वती का वाहन शेर है।अब उस छोटी सी कुटिया में बैल और शेर को कैसे रखा जाये, क्योंकि शेर का आहार बैल है।पार्वती का शेर दहाड़ता है और मेरा बैल खूटा उखाड़ कर भाग जाता है।अतः हमारे घर में भी बड़ी समस्या है l

हांँ इन समस्याओं से परेशान होकर मैं जब वीतरागी भगवान का ध्यान करता हूंँ तो हमें बड़ी शान्ति मिलती है और मैं सुखी हो जाता हूंँ। तुम  विष्णुजी के पास जाओ, "मात्र वही सुखी स्वरुप है"।

 जिज्ञासु- विष्णु के पास पहुंँचा और श्री चरणों में  प्रणाम कर उनसे निवेदन किया-प्रभु!मैं बहुत भटकता हुआ आपके पास यह जानने के लिए आया हूंँ कि आप तो सुखी होंगें।

 जिज्ञासु को समझाते हुए विष्णु  कहने लगे-'भाई!मैं भी तो भक्तों के दुख से सदा दुखी रहता हूंँ।न जाने कब कौन दुष्ट मेरे किसी भक्त को दुखी कर दे अतः यदि तुम सुखी पुरुष की तलाश में हो तो सुनो,वीतरागी भगवान का भक्त सुखी है। जिसने ् वीतरागी भगवान के बतायें मार्ग  को अपने जीवन का आधार बना लिया है।" विश्व की का एकमात्र दिगंबर जैनधर्म ही जीव को भगवान बनने की कला सिखाता है।
 बाकी सारे संसार के विभिन्न धर्मों में भगवान को ही कर्ता माना है इस कारण से जीव दुखी है"।जैनदर्शन कहता है कि जीव जैसा कर्म करेगा उसे वैसा फल प्राप्त होगा।उदाहरण से समझे कोई भी जीव जहर का सेवन करता है तो वह मृत्यु को प्राप्त होता है।
इसलिए किसी सन्त ने कहा है:--

निर्धन कहे धनवान सुखी,
धनवान कहे सुखी राजा हमारा।

 राजा कहे महाराजा सुखी, 
महाराजा कहे सुखी इन्द्र हमारा।।

 इन्द्र कहे ब्रह्मा जी सुखी,
ब्रह्मा जी कहे शिव शंँकर प्यारा।

शंँकर कहे विष्णु जी सुखी,
विष्णु जी कहे सुखी  वीतरागी भगवान का भक्त हमारा।।

"भक्त सुखी जो नाम भजे,
और बाकी दुखिया सब संसार।

नानक दुखिया सब संसारा,सुखिया सोई जिन नाम आधारा।।

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बुधवार, 18 मई 2022

सच्चा आनंद

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
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*💪👩‍🚒सच्चा आनंद*

*👩‍🦰बड़े प्यार के साथ माँ ने अपने पुत्र से कहा – बेटा ये लो दो टुकड़े मिठाई के हैं |  इनमें से यह बड़ा टुकड़ा तू स्वयं खा लेना और छोटा टुकड़ा अपने साथी को दे देना |*

अच्छा माँ ! कह बालक दोनों टुकड़े लेकर घर से बाहर आ गया | वह साथी को मिठाई का बड़ा टुकड़ा देकर स्वयं छोटा खाने लगा | माँ सब खिड़की में से देख रही थी |

उसने आवाज देकर बालक को बुलाया और बोली – अरे क्यों रे ! मैंने तुझसे बड़ा टुकड़ा खाने और छोटा उस बच्चे को देने के लिए कहा था परंतु तू छोटा स्वयं खाकर बड़ा उसे क्यों दिया ?

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बालक सहज बोली में बोला – माँ दूसरों को अधिक देने और अपने लिए कम से कम लेने में मुझे मालूम नहीं क्यों अधिक आनंद आता है | वह बालक था “बाल गंगाधर तिलक” |

माँ गंभीर हो गई | माँ बहुत देर विचार करती रही – बालक की इन उदार भावनाओं के संबंध में ! सचमुच यहीं मानवीय आदर्श हैं और इसी में विश्व की शांति की, एकता की सारी संभावनाएँ निर्भर हैं |

मनुष्य अपने लिए कम चाहे और दूसरों को अधिक देने का प्रयत्न करें तो समस्त संघर्षों की समाप्ति और स्नेह की  परिस्थितियाँ सहज हीं उत्पन्न हो सकती हैं।

*🔔👨‍👩‍👧‍👦🎪👑💪➡️इसी व्यवहार से जीव वर्तमान में भी इस पृथ्वी लोक पर स्वर्ग का सुख प्राप्त करता है। आयु के अंत मरणोपरांत नियम से स्वर्ग लोक में उत्पन्न होकर सच्चेसुख भोगते हुये  वह भगवान के समवशरण मे जाकर यथार्थ ज्ञान प्राप्त कर भविष्य में वह भी भगवान बनता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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मंगलवार, 17 मई 2022

धर्म का पुल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒धर्म पुरषार्थ का पुल🤝👨‍👩‍👧‍👦*


             एक निर्धन विद्वान व्यक्ति चलते चलते पड़ोसी राज्य में पहुँचा। संयोग से उस दिन वहाँ हस्तिपटबंधन समारोह था जिसमें एक हाथी की सूंड में माला देकर नगर में घुमाया जाता था। वह जिसके गले में माला डाल देता था उसे 5 वर्ष के लिए वहां का राजा बना दिया जाता था।
       वह व्यक्ति भी समारोह देखने लगा। हाथी ने उसके ही गले में माला डाल दी। सभी ने जयजयकार करते हुए उसे 5 वर्ष के लिए वहां का राजा घोषित कर दिया।

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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      राजपुरोहित ने उसका राजतिलक किया और वहाँ के नियम बताते हुए कहा कि आपको केवल 5 वर्ष के लिए राजा बनाया जा रहा है। 5 वर्ष पूर्ण होते ही आपको मगरमच्छों व घड़ियालों से युक्त नदी में छोड़ दिया जाएगा।

      यदि आप में ताकत होगी तो आप उनका मुकाबला करके नदी के पार वाले गाँव में पहुँच सकते हो। आप को वापिस इस नगर में आने नहीं दिया जाएगा।

      वह निर्धन विद्वान व्यक्ति तो सिहर गया पर उसने सोचा कि अभी तो 5 वर्ष का समय है। कोई उपाय तो निकल ही जाएगा।

     उसने 5 वर्ष तक विद्वत्तापूर्वक राज्य किया। राज्य की संचालन प्रक्रिया को पूरे मनोयोग से निभाया और इस प्रकार केवल राज्य पर ही नहीं लोगों के दिलों पर भी राज्य करने लगा। जनता ने ऐसा प्रजावत्सल राजा कभी नहीं देखा था।

      5 वर्ष पूर्ण हुए। नियमानुसार राजा को फिर से हाथी पर बैठाकर जुलूस निकाला गया। 

      लोगों की आँखों से आँसुओं की झड़ी लग गई। नदी के तट पर पहुँच कर राजा हाथी से उतरा। राजपुरोहित ने कहा कि अब आप नदी पार करके दूसरी ओर जा सकते हैं।

     अश्रुपूरित विदाई समारोह के बीच उसने कहा कि मैं इस राज्य के नियमों का सम्मान करता हूँ। अब आप मुझे आज्ञा दें।

      जैसे ही राजा ने नदी की ओर कदम बढाए, लोगों ने अपनी सजल आँखों को ऊपर उठाया। जानते हो वहाँ ऐसा क्या था जिसे देखकर वे लोग खुशी से नाचने लगे?

      नदी पर इस पार से उस पार तक राजा के द्वारा बनवाया गया एक पुल था जिस पर राजा शांत भाव से चला जा रहा था, नदी के उस पार वाले सुंदर से गाँव की ओर।............

  . क्या ऐसा ही कुछ हमारे साथ भी घटित नहीं हो रहा? हम भी तो एक निश्चित समय के लिए श्वांसो की अनमोल पूंजी देकर इस अमूल्य जीवन की बागडोर सौंपी गई है।

समय पूरा होते ही हमें यह राज्य छोड़ कर भवसागर के उस पार वाले लोक में जाना है जहां से हमें फिर से इस राज्य में आने की आज्ञा नहीं है।

यदि हमने धर्म ध्यान का पुल नहीं बनाया तो हमें भी मगरमच्छों व घड़ियालों से युक्त नरकों में डाल दिए जाएगा और हम उनका ग्रास बन जाएंगे।
      ...और...अगर हम शांत भाव से भवसागर के उस पार वाले लोक में जाना चाहते हैं तो अभी से वह पुल बनाने की शुरूआत कर देनी चाहिए क्योंकि आयु काल पूरा होने के बाद तो निश्चित ही जाना है।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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सोमवार, 16 मई 2022

स्विसबैंक व भारतवासी

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️महत्वपूर्ण जानकारी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒स्विसबैंक व भारतवासी🤗👨‍👩‍👧‍👦*

*आज हम सभी स्विट्जरलैंड व स्विसबैंक के बारे मे आवश्यक जानकारी जानेंगे।*

नाम तो आपने सुना ही होगा 'स्विट्जरलैंड'। 
ऐसा देश जहाँ दुनियां का हर शादीशुदा जोड़ा अपना हनीमून मनाने के ख्वाब देखता हैं।
 बर्फीली वादियों से ढका ये देश सुंदरता की अद्भुत कृति है। हरियाली हो या बर्फ, आंखे जिधर भी जाये पलक झपकना भूल जाये। 

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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दुनिया का सबसे सम्पन्न देश हैं स्विट्जरलैंड! हर प्रकार से सम्पन्न इस देश की एक रोचक जानकारी बताता हूँ।

आज से लगभग 50 साल पहले स्विट्जरलैंड में एक प्राइवेट बैंक की स्थापना हुई जिसका नाम था 'स्विसबैंक'। 

इस बैंक के नियम दुनिया की अन्य बैंको से भिन्न थे।

 ये स्विसबैंक अपने ग्राहकों से उसके पैसे के रखरखाव और गोपनीयता के बदले उल्टा ग्राहक से पैसे वसूलती थी। 

साथ ही गोपनीयता की गारंटी।

न ग्राहक से पूछना की पैसा कहां से आया ?
न कोई सवाल न बाध्यता।

सालभर में इस बैंक की ख्याति विश्वभर में फैल चुकी थी।

चोर, बेईमान नेता, माफिया, तस्कर और बड़े बिजनेसमेन इन सबकी पहली पसंद बन चुकी थी स्विस बैंक। 

बैंक का एक ही नियम था। 

रिचार्ज कार्ड की तरह एक नम्बर खाता धारक को दिया जाता, साथ ही एक पासवर्ड दिया जाता बस। 

जिसके पास वह नम्बर होगा बैंक उसी को जानता था। 

न डिटेल, न आगे पीछे की पूछताछ होती।

लेकिन 
*बैंक का एक नियम था कि अगर सात साल तक कोई ट्रांजेक्शन नही हुआ या खाते को सात साल तक नही छेड़ा गया तो बैंक खाता सीज करके रकम पर अधिकार जमा कर लेगा।*

*सात वर्ष तक ट्रांजेक्शन न होने की सूरत में रकम बैंक की।*

अब रोज दुनियाभर में न जाने कितने माफिया मारे जाते हैं। नेता पकड़े जाते हैं। 

कितने तस्कर पकड़े या मारे जाते है, कितनो को उम्रकैद होती है।  

ऐसी स्थिति में न जाने कितने ऐसे खाते थे जो बैंक में सीज हो चुके थे। 

सन् 2000 की नई सदी के अवसर पर बैंक ने ऐसे खातों को खोला 
तो उनमें मिला कालाधन पूरी दुनिया के 40% काले धन के बराबर था। 

*पूरी दुनियां का लगभग आधा कालाधन।*

ये रकम हमारी कल्पना से बाहर हैं। 

शायद 
*बैंक भी नही समझ पा रहा था कि क्या किया जाए इस रकम का।*

क्या करें, क्या करे।

ये सोचते सोचते बैंक ने एक घोषणा की और 
*पूरे स्विट्जरलैंड के नागरिकों से राय मांगी की इस रकम का क्या करे।*

 साथ ही बैंक ने कहा कि 
*देश के नागरिक चाहे तो ये रकम बैंक उन्हें बांट सकता हैं*

और प्रत्येक नागरिक को एक करोड़ की रकम मिल जाएगी।

 सरकार की तरफ से 15 दिन चले सर्वे में 99.2% लोगों की राय थी कि इस रकम को देश की सुंदरता बढ़ाने में और विदेशी पर्यटकों की सुख सुविधाओं और विकास में खर्च किया जाए।

सर्वे के नतीजे हम भारतीयों के लिये चौंकाने वाले है 
लेकिन राष्ट्रभक्त स्विटरजरलैंड की जनता के लिये ये साधारण बात थी। 

*उन्होंने हराम के पैसों को नकार दिया। मुफ्त नही चाहिये ये स्पष्ट सर्वे हुआ।*

चौंकाने वाला काम दूसरे दिन हुआ। 
25 जनवरी 2000 को स्विट्जरलैंड की जनता बैनर लेकर सरकारी सर्वे चैनल के बाहर खड़ी थी।

 उनका कहना था जो 0.8% लोग हैं मुफ्त की खाने वाले, उनके नाम सार्वजनिक करो।

ये समाज पर और स्विट्जरलैंड पर कलंक है।

 काफी मशक्कत के बाद सरकार ने मुफ्त की मांग करने वालो को दंडित करने का आश्वासन दिया, तब जनता शांत हुई।
और हमारे भारत में सब कुछ मुफ्त चाहिए। इसके अलावा  टैक्स चोरी, बिजली चोरी, कामचोरी,,,,,, मेरा भारत महान,,,,।

  🤔🤔🤔🤔🤔
             *VVV  IMPORTANT...*
             *क्या भारत का सिस्टम*
        *आम जनता को धोखा देता है ?*

 आप खुद देखिये....
    
*🔔1- नेता चाहे तो दो सीट से एक साथ चुनाव*   
     *लड़ सकता है ! लेकिन...*.
     *आप दो जगहों पर वोट नहीं डाल सकते,*

*👉🏿2-आप जेल मे बंद हो तो वोट नहीं डाल*  
    *सकते..लेकिन*
     *नेता जेल मे रहते हुए चुनाव लड सकता है.*

*🤗3-आप कभी जेल गये थे, तो*
    *अब आपको* *जिंदगी भर* 
     *कोई सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी,*

*लेकिन*……
*😛नेता चाहे जितनी बार भी हत्या या बलात्कार के मामले मे  जेल गया हो, फिर भी वो प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति जो चाहे बन सकता है*,

*😇4-बैंक में मामूली नौकरी पाने के लिये आपका ग्रेजुएट होना जरूरी है*..

*लेकिन,*
*👑नेता अंगूठा छाप हो तो भी भारत का फायनेन्स मिनिस्टर बन सकता है।*

*☺️5-आपको सेना में एक मामूली*
*सिपाही की नौकरी पाने के लिये डिग्री के साथ 10 किलोमीटर दौड़ कर भी दिखाना होगा,*

*लेकिन*....
*🫠नेता यदि अनपढ़-गंवार और लूला-लंगड़ा है* 
*😢तो भी वह आर्मी, नेवी और ऐयर फोर्स का चीफ यानि डिफेन्स मिनिस्टर बन सकता है*

*और*
*🔔जिसके पूरे खानदान में आज तक कोई स्कूल नहीं गया.. वो नेता देश का शिक्षामंत्री बन सकता है*

*और*
*☺️जिस नेता पर हजारों केस चल रहे हों*.. 
*👍वो नेता पुलिस डिपार्टमेंट का चीफ यानि कि गृह मंत्री बन सकता है*.

*यदि*
*👨‍👩‍👧‍👦आपको लगता है की इस सिस्टम को बदल देना चाहिये*..
*नेता और जनता, दोनो के लिये एक ही कानून होना चाहिये*.. 
तो
*इस संदेश को फार्वड करके देश में* 
*🔔जागरुकता लाने में अपना सहयोग दें*..

*👨‍👩‍👧‍👦अगर फोरवर्ड नहीं किया तो आप किसी भी नेता को दोषी मत कहना* ....,
*नहीं किया तो नुकसान का जिम्मेदार आप खुद होगें।आज बढती महगाई व भारत की गिरती हालातों के प्रत्येक भारतीय जवाबदार है।*
*👑🎪😛भ्रष्ट पार्टियों व नेताओं के सर्वांगीण विकास में भारतीयों का पूर्ण सहयोग है।*
*👨‍👩‍👧‍👦🔔सरकारी कर्मचारी 30 से 35 वर्ष की संतोष जनक सेवा करने के उपरांत भी पेशन का हकदार नहीं ? जब कि मात्र 5 वर्ष के लिए विधायक / सांसद को पेंशन यह कहाँ का न्याय है...?जितने बार विधायक / सांसद उसकी पेंशन बढती जायेगी।एकबार की पेंशन 30 से 50 हजार रुपए।पांच बार जीतने पर उसे पाँच गुणा पेंशन मिलेगी। विधायक / सांसद  को जो भी पैसा दिया जाता है वह सभी(अमिर - गरीब परिवारों ) भारतीयों से विभिन्न प्रकार के टेक्स से वसूली की जाती हैं।यह मात्र भारत देश में ही लागू है।अमेरिका जैसे राष्टों मे ऐसे कानून को मान्यता नहीं है।चाहे राष्ट्रपति हो या अन्य सदस्य।*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦🔔महान आत्माओं आप स्वयं समझदार हो इसलिये बाकी की शेष बातों को समझकर सतर्कता पूर्वक कम से कम तीन लोगों तक यह संदेश भेजकर।इस भारत को दुबारा सोने की चिडिया बनाने में सहयोगी बनकर नया इतिहास लिखने में सहायक बनें ।*

*🔔शेष शुभम भवतु🔔*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
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रविवार, 15 मई 2022

शिक्षा व संस्कार

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒शिक्षा व संस्कार*

एक बार एक शक्तिशाली राजा घने वन में औषधीय पौधों की खोज में थे। अचानक आकाश में बादल छा गए और मूसलाधार वर्षा होने लगी। सूर्य अस्त हो गया और धीरे-धीरे अँधेरा छाने लगा। अँधेरे में राजा अपने महल का रास्ता भूल गया और सिपाहियों से अलग हो गया। भूख प्यास और थकावट से व्याकुल राजा जंगल के किनारे एक टीले पर बैठ गया। थोड़ी देर बाद उसने वहाँ तीन बालकों को देखा।

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तीनों बालक अच्छे मित्र थे। वे गाँव की ओर जा रहे थे। सुनो बच्चों! ‘जरा यहाँ आओ।’ राजा ने उन्हें बुलाया। बालक जब वहाँ पहुंचे तो राजा ने उनसे पूछा – ‘क्या कहीं से थोड़ा भोजन और जल मिलेगा?’ मैं बहुत प्यासा हूँ और भूख भी बहुत लगी है।

बालकों ने उत्तर दिया – ‘अवश्य ‘। हम घर जा कर अभी कुछ ले आते है। वे गाँव की ओर भागे और तुरंत जल और भोजन ले आये। राजा बच्चों के उत्साह और प्रेम को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ।

राजा बोला – “प्यारे बच्चों! तुम लोग जीवन में क्या करना चाहते हो? मैं तुम सब की सहायता करना चाहता हूँ।”

कुछ देर सोचने के बाद एक बालक बोला – ‘ मुझे धन चाहिए। मैंने कभी दो समय की रोटी नहीं खायी है। कभी सुन्दर वस्त्र नहीं पहने है इसलिए मुझे केवल धन चाहिए। 

राजा मुस्कुरा कर बोले – ठीक है। मैं तुम्हें इतना धन दूँगा कि जीवन भर सुखी रहोगे। यह शब्द सुनते ही बालकों की ख़ुशी का ठिकाना न रहा।

दूसरे बालक ने बड़े उत्साह से पूछा – “क्या आप मुझे एक बड़ा-सा बँगला और घोड़ागाड़ी देंगे?’ राजा ने कहा – अगर तुम्हे यही चाहिए तो तुम्हारी इच्छा भी पूरी हो जाएगी।

तीसरे बालक ने कहा – “मुझे न धन चाहिए न ही बंगला-गाड़ी। मुझे तो आप ऐसा आशीर्वाद दीजिए जिससे मैं पढ़-लिखकर संस्कारवान विद्वान बन सकूँ और शिक्षा समाप्त होने पर मैं अपने देश की योग्य सेवा कर सकूँ। तीसरे बालक की इच्छा सुनकर राजा बहुत प्रभावित हुआ। उसने उसके लिए उत्तमधार्मिक संस्कार व शिक्षा का प्रबंध किया। वह परिश्रमी बालक था इसलिए दिन-रात एक करके उसने पढाई की और बहुत बड़ा विद्वान बन गया और समय आने पर राजा ने उसे अपने राज्य में मंत्री पद पर नियुक्त कर लिया।

एक दिन अचानक राजा को वर्षों पहले घटी उस घटना की याद आई। उन्होंने मंत्री से कहा, ” वर्षों पहले तुम्हारे साथ जो दो और बालक थे, अब उनका क्या हाल-चाल है… मैं चाहता हूँ की एक बार फिर मैं एक साथ तुम तीनो से मिलूं, अतः पोर्णिमा पर अपने उन दोनों मित्रों को भोजन पर आमंत्रित कर लो।”

मंत्री ने दोनों को संदेशा भिजवा दिया और पौर्णिमा के दिन सभी एक साथ राजा के सामने उपस्थित हो गए।

‘आज तुम तीनो को एक बार फिर साथ देखकर मैं बहुत प्रसन्न हूँ। इनके बारे में तो मैं जानता हूँ…पर तुम दोनों अपने बारे में बताओ। “, राजा ने मंत्री के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

जिस बालक ने धन माँगा था वह दुखी होते हुए बोला, “राजा साहब, मैंने उस दिन आपसे धन मांग कर बड़ी गलती की। इतना सारा धन पाकर मैं आलसी बन गया और बहुत सारा धन बेकार की चीजों में खर्च कर दिया, मेरा बहुत सा धन चोरी भी हो गया ….और कुछ एक वर्षों में ही मैं वापस उसी स्थिति में पहुँच गया जिसमे आपने मुझे देखा था।”

बंगला-गाडी मांगने वाले बालक भी अपना रोना रोने लगा, ” महाराज, मैं बड़े ठाट से अपने बंगले में रह रहा था, पर वर्षों पहले आई बाढ़ में मेरा सबकुछ बर्वाद हो गया और मैं भी अपने पहले जैसी स्थिति में पहुँच गया।

*🔔🎪👁️🌞उनकी बातें सुनने के बाद राजा बोले, ” इस बात को अच्छी तरह गाँठ बाँध लो धन-संपदा सदा हमारे पास नहीं रहते पर संस्कारित ज्ञान जीवन-भर मनुष्य के काम आता है और उसे कोई चुरा भी नहीं सकता। शिक्षा ही मानव को विद्वान और बड़ा आदमी बनाती है, इसलिए सबसे बड़ा धन “विद्या” ही है।”*
*👨‍👩‍👧‍👦राजा ने उन दोनों को उनकी योग्यता अनुसार राज्य में काम देकर उन्हें प्रोत्साहित कर, उनका जीवन सफल किया।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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शनिवार, 14 मई 2022

भगवान की भक्ति

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒भगवान की भक्ति🎪🤝*

एक बुजुर्ग नदी के किनारे पर जा रहे थे। एक जगह देखा कि नदी  की सतह से एक कछुआ निकला और पानी के किनारे पर आ गया। 
*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

उसी किनारे से एक बड़े ही जहरीले बिच्छु ने  नदी  के अन्दर छलांग लगाई और कछुए की पीठ पर सवार हो गया। कछुए ने तैरना शुरू कर दिया। वह बुजुर्ग बड़े हैरान हुए। उन्होंने उस कछुए का पीछा करने की ठान ली। इसलिए  नदी में तैर कर उस कछुए का पीछा किया। वह कछुआ  नदी के दूसरे किनारे पर जाकर रूक गया और बिच्छू उस की पीठ से छलांग लगाकर दूसरे किनारे पर उतर गया और आगे चलना शुरू कर दिया। वह बुजुर्ग भी उसके पीछे चलते रहे। आगे जाकर देखा कि जिस तरफ बिच्छू जा रहा था। उसके रास्ते में एक  भगवान का भक्त बड़े ध्यान में आँखे बन्द कर  भगवान की याद में लगा हुआ था। 

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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उस बुजुर्ग ने सोचा कि अगर यह बिच्छू उस नौजवान को काटना चाहेगा, तो मैं करीब पहुंचने से पहले ही उसे अपनी लाठी से मार डालूंगा। लेकिन वह चंद कदम आगे बढे ही थे कि उन्होंने देखा दूसरी तरफ से एक काला जहरीला साँप तेजी से उस नौजवान को डसने के लिए आगे बढ़ रहा था। इतने में बिच्छू भी वहां पहुंच गया। उस बिच्छू ने ऐन उसी समय सांप को डंक मार कर उसे बेसुध कर दिया। जिस की वजह से बिच्छू का जहर सांप के शरीर में दाखिल हो गया। और वह सांप वहीं अचेत हो कर गिर पड़ा। इस के बाद वह बिच्छू अपने रास्ते पर वापस चला गया।
थोड़ी देर बाद जब  भगवान का भक्त उठा, तब उस बुजुर्ग ने उसे बताया कि  भगवान ने तेरी मदद के लिए कैसे उस कछुवे को दरिया के किनारे लाया,और कैसे उस बिच्छु को कछुए की पीठ पर बैठा कर साँप से आपकी रक्षा के लिए भेजा। वह  भगवान का भक्त उस अचेत पड़े सांप को देखकर हैरान रह गया। उसकी आंखों से आंसू निकल आए। और वह आँखें बन्द कर अपने  भगवान को याद कर धन्यवाद अदा करने लगा। तभी  भगवान के सेवक ने उस भक्त से कहा- जब वो बुजुर्ग जो तुम्हे जानता तक नही था। वो तेरी जान बचाने के लिए लाठी उठा सकता है। और फिर तू तो मेरे भगवान के ध्यान  में लगा हुआ था। तो फिर तुझे बचाने के लिये मेरी लाठी तो हमेशा से ही तैयार रहती है। अतः हमें किसी भी परिस्थिति में किसी भी कठिनाई में किसी भी समय प्रभु पर भरोसा रखना चाहिए। मारने वाला कोई भी हो अगर हमारे अंदर भगवान की भक्ति है तो बचाने वालें है भगवान के सेवक।
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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