गुरुवार, 23 नवंबर 2023

धनवान बनने का मंत्र

*धनवान बनने का मंत्र*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 धनवान बनने का मंत्र ✍️🐒*
*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 कार्तिक शुक्ल 12, दिनांक 24 नवंबर शुक्रवार कलिकाल के 18  वें तीर्थंकर सभी प्रकार से सौम्य हितकारी वाणी के प्रभाव को बढ़ाने  वाली शक्ति के प्रदाता अरनाथ भगवान जी का केवलज्ञान  कल्याणक महोत्सव है। 🛕*

*🔔🪔 कार्तिक पूर्णिमा  , दिनांक 27 नवंबर सोमवार कलिकाल के तृतीय तीर्थंकर सभी कार्यों को संभव बनाने की शक्ति प्रदाता संभवनाथ स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव है। यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
एक गरीब औरत एक साधु के पास गई,"स्वामी जी! कोई ऐसा पवित्र मन्त्र लिख दीजिये जिससे मेरे बच्चों का रात को भूख से रोना बन्द हो जाये...।" 
साधु ने कुछ पल एकटक आकाश की ओर देखा फिर अपनी कुटिया में अन्दर गया और एक पीले कपड़े पर एक मन्त्र लिखकर उसे ताबीज की तरह लपेट-बाँधकर उस महिला को दे दिया।
 साधु ने कहा, "इस मन्त्र को घर में उस जगह रखना, जहाँ नेक कमाई का धन रखती हो।" महिला खुश होकर चली गई।

शुभ कर्मों की कृपा से उस उसके पति की आमदनी ठीक हुई और बच्चों को भोजन मिल गया। रात शान्ति से कट गई। अगले रोज़ भोर में ही उन्हें पैसों से भरी एक थैली घर के आंगन में मिली। थैली में धन के अलावा एक पर्चा भी निकला, जिस पर लिखा था, कोई कारोबार कर लें...।

इस बात पर अमल करते हुवे उस औरत के पति ने एक छोटी सी दुकान किराए पर ले ली और काम शुरू किया। धीरे धीरे कारोबार बढ़ा, तो दुकानें भी बढ़ती गईं...। जैसे पैसों की बारिश सी होने लगी...।

*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

पति की कमाई तिजोरी में रखते समय एक दिन उस महिला की नज़र उस मन्त्र लिखे कपड़े पर पड़ी...। "न जाने, साधु महाराज ने ऐसा कौन सा मन्त्र लिखा था कि हमारी सारी गरीबी दूर हो गई?" सोचते सोचते उसने वह मन्त्र वाला कपड़ा खोल डाला...।

लिखा था कि:

जब पैसों की तंगी ख़त्म हो जाये, तो सारा पैसा तिजोरी में छिपाने की बजाय कुछ पैसे ऐसे घर में डाल देना जहाँ से रात को बच्चों के रोने की आवाज़ें आती हों..!!
    
*सदैव प्रसन्न रहिये। जो प्राप्त है, वहीं पर्याप्त है।।*
*जिसका मन मस्त है। उसके पास समस्त है।।*
*🎪💯👪↔️विशेष:- भव्य आत्माओं , अगर आप अपने जीवन में हमेशा धनी बनें रहना चाहते है तो आप अपनी आमदनी का छठवां हिस्सा याने लगभग सत्रह प्रतिशत धन दुसरे जीवों के आत्मकल्याण में खर्च करें।यह किसी धर्म का विधान नहीं है अपितु यह प्रकृति का नियम सभी के लिए लागू है।जिसे गरीब ही बनें रहना है वे इस नियम का पालन ना करें।🔔*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मंगलवार, 14 नवंबर 2023

सच्चे संस्कार

*सच्चे संस्कार*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सच्चे संस्कार ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 कार्तिक शुक्ल 2, दिनांक 15 नवंबर बुधवार कलिकाल के 9  वें तीर्थंकर सभी प्रकार से शुक्र के प्रभाव को बढ़ाने  वाले सुविधिनाथ भगवान जी का केवलज्ञान  कल्याणक महोत्सव है। आज के ही दिन भाईदूज का भी अवसर है।🛕*
*🔔🪔 कार्तिक शुक्ल षष्ठी  , दिनांक 18 नवंबर शनिवार कलिकाल के  तीर्थंकर नेमीनाथ स्वामी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है। आज के दिन पंचमी व षष्ठी दोनों ही तिथि मान्य है।*
*इस माह में 24 व 27 तारीख को भी कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️

एक संत ने एक विश्वविद्यालय का आरंभ किया, इस विद्यालय का प्रमुख उद्देश्य था ऐसे संस्कारी युवक-युवतियों को प्रशिक्षित करना था जो समाज के विकास में सहभागी बन सकें।

एक दिन उन्होंने अपने विद्यालय में एक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसका विषय था- "जीवों पर दया एवं प्राणिमात्र की सेवा।"

निर्धारित तिथि को तयशुदा वक्त पर विद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में प्रतियोगिता आरंभ हुई।

*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

किसी छात्र ने सेवा के लिए संसाधनों की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि- हम दूसरों की तभी सेवा कर सकते हैं, जब हमारे पास उसके लिए पर्याप्त संसाधन हों।

वहीं कुछ छात्रों की यह भी राय थी कि सेवा के लिए संसाधन नहीं, भावना का होना जरूरी है।

इस तरह तमाम प्रतिभागियों ने सेवा के विषय में शानदार भाषण दिए।

आखिर में जब पुरस्कार देने का समय आया तो संत ने एक ऐसे विद्यार्थी को चुना, जो मंच पर बोलने के लिए ही नहीं आया था।

यह देखकर अन्य विद्यार्थियों और कुछ शैक्षिक सदस्यों में रोष के स्वर उठने लगे। 

संत ने सबको शांत कराते हुए बोले- 'प्यारे मित्रों व विद्यार्थियों, आप सबको शिकायत है कि मैंने ऐसे विद्यार्थी को क्यों चुना, जो प्रतियोगिता में सम्मिलित ही नहीं हुआ था। दरअसल, मैं जानना चाहता था कि हमारे विद्यार्थियों में कौन सेवाभाव को सबसे बेहतर ढंग से समझता है।

इसीलिए मैंने प्रतियोगिता स्थल के द्वार पर एक घायल बिल्ली को रख दिया था। आप सब उसी द्वार से अंदर आए, पर किसी ने भी उस बिल्ली की ओर आंख उठाकर नहीं देखा।

यह अकेला प्रतिभागी था, जिसने वहां रुक कर उसका उपचार किया और उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ आया। 

*विशेष:- भव्य आत्माओं , सेवा- सहायता डिबेट का विषय नहीं, जीवन जीने की कला है। 'जो अपने आचरण से शिक्षा देने का साहस न रखता हो, उसके वक्तव्य कितने भी प्रभावी क्यों न हों, वह पुरस्कार पाने के योग्य नहीं है'..!! आज वर्तमान में 90 प्रतिशत  लोग रट्टू तोता बने हुए हैं। स्वयं का आकलन स्वयं करें।*

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, वहीं पर्याप्त है।जो संतुष्ट है वहीं सुखी है।*
*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

रविवार, 12 नवंबर 2023

दीपावली

जैन कैसे मनाएं दीपावली?

आज से 2550 वर्ष पूर्व, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या की भोर में अंतिम तीर्थंकर वीर प्रभु को 72 वर्ष की अवस्था में निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। उसी के स्मरण स्वरुप जैन दीपावली मनाते हैं।

https://youtu.be/F9hTospNwdE?si=eQ-c7ePuhbBhlPrR

निर्वाण अर्थात क्या?

सिद्ध अवस्था को निर्वाण अवस्था कहा जाता है।

जैनधर्मानुसार, शरीर और आत्मा दोनों स्वभाव से ही भिन्न वस्तुएँ हैं। तथा जब ये बाहर में भी भिन्न हो जाते हैं, तब अशरीरी सिद्ध दशा प्रगट होती है।

जब शरीर होता है तो उसके पालन-पोषण हेतु आहार-विहार-निहार होता है। सुबह उठने से शाम सोने तक के सारे काम इस शरीर के लिए ही होते हैं। परंतु जब शरीर का ही अभाव हो जाता है, तो ये सारी क्रियाएँ छूट जाती हैं। यूँ कहें, इनकी आवश्यकता ही नहीं रहती।

संसार के सारे दुख इस शरीर और इसके सम्बन्धियों की ओर दृष्टि करने से होते हैं। पैसे, परिवार और अन्य सब कुछ, इस शरीर से सम्बन्ध मानने से ही हमसे जुड़ते हैं।

सबसे पहले शरीर आदि की दृष्टि (उनमें अपनापन) छूटती है, फिर वे सब बाहर में छूटते हैं (त्याग/ मुनिदशा) और पश्चात इन सबका पूर्णतः त्याग हो कर मुक्त (भगवान) अवस्था प्रगट होती है।

साथ ही उत्पत्ति होती है अनंत सुख की।हाँ, वही सुख जो हम यहाँ संसार के सभी कोनों में खोजते घूम रहे हैं। मात्र सुख ही नहीं, अपितु अनंत गुण- उनकी प्रगटता मोक्ष में होती है।

न वहाँ शरीर होता है, न उसके संयोग और न उनके आश्रय से होने वाला दुख।

ऐसी अनंत सुख स्वरूप दशा है मोक्ष।

पुनः दीपावली पर–

★ भारत में 4 मुख्य पर्व/त्योहार हैं–

रक्षाबंधन, दशहरा, दीपावली, होली

जैनों ने इन पर्वों में से मात्र दो अहिंसक पर्वों को अपनाया– रक्षाबन्धन और दीपावली।

रक्षाबंधन ब्राह्मणों का पर्व माना जाता है और दीपावली वैश्यों का।

रक्षाबंधन के बाद से जीव धर्म कार्यों में प्रवर्तना प्रारम्भ करते हैं और दीपावली के बाद से व्यापार की शुरुआत होती है। अतः इन्हें क्रमशः ब्राह्मणों (धार्मिक/श्रावक जनों) वैश्यों का पर्व कहा जाता है।

★ दीपावली संयोग का नहीं, वियोग का पर्व है।

यह पर्व हमारे पूज्य पिताजी के स्वर्गवास के दिन के समान है।

इस दिन, जो परम पिता हमारे साथ 30 वर्षों से थे, वे हमें छोड़ कर सिद्धालय में विराजमान हो गए थे। अतः यह हमारे लिए वियोग का पर्व है।

साथ ही, यह हमारे लिए आनंद का भी दिन है, क्योंकि इस दिन हमारे प्रभु ने उस लक्ष्य की प्राप्ति की थी, जिसके लिए वे कई भवों से प्रयासरत थे।

अतः इस प्रकार यह हर्ष मिश्रित विषाद का पर्व है।

अन्य शब्दों में कहें, तो, यह पर्व, बेटी की शादी के पश्चात उसकी विदाई की बेला के समान है।

धन्यतेरस क्यों?

तेरस के दिन प्रभु की अंतिम दिव्यध्वनि का लाभ भव्यजनों को प्राप्त हुआ था। अतः, उनकी अपेक्षा से यह तेरस “धन्य” कहलाई।

हम व्यापारी बुद्धि वालों ने इसका सम्बन्ध धन से जोड़ दिया।

रूप चौदस क्यों?

इस दिन दिव्यध्वनि रुकने के पश्चात, मात्र भगवान के दर्शन प्राप्त हो रहे थे। अतः, उनका रूप निरखने के अंतिम मौके की याद स्वरूप यह “रूप-चतुर्दशी” मनायी जाती है।

जैन कैसे मनाएं दीपावली?

जैसी दीपावली भगवान महावीर के प्रमुख शिष्य, उनके प्रथम गणधर, गौतम स्वामी ने मनाई, वैसी ही दीपावली हमें भी मनाना चाहिए।

जैसे ही वीर प्रभु को मोक्ष की प्राप्ति हुई, गौतम स्वामी ने केवलज्ञान की प्राप्ति की। इस प्रकार उन्होंने ज्ञान ज्योति को बुझने नहीं दिया।

उसी प्रकार, हमें भी गांव-गांव घर-घर में प्रत्येक व्यक्ति के अंदर ज्ञान-दीप प्रज्वलित करने हेतु पुरुषार्थ करना चाहिए।

महात्मा गांधी जी ने देश पर जान देने वालों की एक फौज तैयार की थी।

एक बार झंडा लेकर जलूस जा रहा था। हिदायत दी गई- “इसे छोड़कर चले जाओ, वरना गोली चला देंगे”।

बात नहीं मानी गई और गोली चला दी गई। मरने वाले के हाथ से झंडा छूटा तो, परंतु नीचे नहीं गिर पाया। उसे दूसरे व्यक्ति ने थाम लिया। इस प्रकार चलता रहा, चलता रहा। गोलियां खत्म हो गयीं, पर जान देने वाले नहीं।

इसी प्रकार, जैन धर्म के प्रचार का वह झंडा, जिसे महावीर भगवान ने सबसे पहले थामा था, वह आज हमारे हाथ में है।

यदि हमने उसे नहीं थामा और अपनी आगे की पीढ़ी तक नहीं पहुंचाया, तो हम वह अपराध करेंगे जो हमारी 125 पीढ़ियों ने नहीं किया।

★ हम अपने माता-पिता से मिली संपत्ति को, अपने बच्चों तक दुगना,तिगुना और चौगुना करके देना चाहते हैं।

तो हमारे माता-पिता ने जो हमें धर्म के संस्कारों की संपत्ति दी है उसे भी आगे दुगना-चौगुना करके पहुंचाने का हमारा कर्तव्य बनता है।

अगर हमने आज की पीढ़ी को संस्कार नहीं दिए, इस जिनवाणी के बारे में उन्हें नहीं बताया, तो यह बात आगे की पीढ़ी तक नहीं पहुंच पाएगी।

और इसके जिम्मेदार हम होंगे तथा इसकी सजा हमारी आगे की पीढ़ियों को भोगनी पड़ेगी।

अतः हम यह धर्म और उसके संस्कार आगामी पीढ़ी तक पहुंचाएं, आज के दिन हमारा यह कर्तव्य बनता है।

दीप जलाने की परंपरा?

जैसे सूर्य अस्त हो जाने पर छोटे-छोटे दीपक जल जाते हैं।

वैसे ही, जब केवलज्ञान रूपी सूर्य अस्त हो गया, तब प्रकाश के लिए गांव-गांव में छोटे-छोटे दीपक जल गए (विद्वान हो गये)।

हम गांव-गांव में पाठशाला खोलें यह वास्तविक दीपक जलाना है।

लड्डू क्यों चढ़ाना?

उस समय, लोगों के घर में लड्डू बन रहे थे। भगवान के निर्वाण का समाचार सुनकर सब वहां भागे और उदास होकर वे लड्डू वही भगवान के चरणों में समर्पित कर दिए।

तब से ही लड्डू चढ़ाने की परंपरा प्रारम्भ हो गयी।

परंतु, यह मात्र सांकेतिक कथन समझना।

★ लड्डू भगवान आत्मा का प्रतीक है- जिस प्रकार, लड्डू का कोई आरंभ अथवा अंत नहीं होता, उसी प्रकार आत्मा भी अनादि-अनंत है, मिष्ट है, रस का कंद है।

वास्तविकता में तो अहिंसक रीति से तैयार, गरी-गोला ही निर्वाण फ़ल के रूप में समर्पित करने योग्य है।

★ अतः, हमें शक्ति अनुसार जैन धर्म का प्रचार-प्रसार-प्रभावना करना चाहिए।

भगवान का शासन तो पंचम काल के अंत तक रहेगा। हम नहीं पढेंगे, तो भी यह जिनवाणी जीवित रहेगी।

परंतु हम और हमारी पीढ़ी इस अमृत से वंचित रह जाएँगे।

इसलिए आज ही हम अपनी जिम्मेदारी समझें।

स्वयं धर्म मार्ग में लगें, इसे समझने का प्रयास करें, तथा अपने बालकों को भी समझाएं।

गुरुवार, 9 नवंबर 2023

धन्य त्रयोदशी का महत्व


*धन्य तेरस का महत्व*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️ जैनधर्म की सच्चाई सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 धन्य तेरस का महत्व✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 कार्तिक कृष्ण 13, दिनांक 11 नवंबर शनिवार कलिकाल के छठवें तीर्थंकर सभी प्रकार से ओज तेज प्रदान करने वाले पदमप्रभ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है। आज के ही दिन भगवान महावीर स्वामी ने योग निरोध किया था।🛕*
*🔔 जयपुर पंचांग के अनुसार▶️ दिनांक 11 नवबंर शनिवार 13:58 बजे तक धन्य तेरस है।▶️12 नवंबर रविवार को दोपहर 14:45 तक रुप चौदस रहेंगी।✍️13 नवंबर सोमवार को 14:57 तक अमावस्या है।🔔*
*🔔🪔 कार्तिक अमावस्या , दिनांक 13 नवंबर सोमवार कलिकाल के अंतिम तीर्थंकर शासन नायक वर्धमान स्वामी का मोक्ष कल्याणक व आज ही संध्या काल में गौतम गणधर स्वामी को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसलिए दिगंबर कुंदकुंद आचार्य की मान्यता वाले विश्व के धर्मावलंबी घर पर दीपावली पर्व मनाते है। नोट इसकी सम्पूर्ण पूजा विधि पूजन पाठ प्रदीप दिल्ली व इंदौर जबलपुर से प्रकाशित लाल जिनवाणी में उपलब्ध है।*
*इस माह में 15,18,24,27 तारीख को भी कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

धन्य त्रयोदशी (धनतेरस) जी हां ! जैन धर्म मे धन्य तेरस का बहुत महत्व है लेकिन वैसा नहीं जैसा हम लोग मानते है की लक्ष्मी तथा धन की पूजा करो, जिस दिन भगवान महावीर की दिव्य ध्वनि अंतिम बार खीरी थी उस दिन त्रयोदशी थी, इसलिए उस दिन को धन्य माना गया क्योकि उस दिन  भगवान ने योग निरोध ( सभी कर्मों को समाप्त करने वाला ध्यान ) किया तथा अमावस्या के अंतिम पहर में मोक्ष प्राप्त कर लिया, लेकिन समय के प्रभाव से यह धन्य त्रयोदशी – धनतेरस में फिर सिर्फ धन की पूजा बन कर रह गई।

गणानां ईश:, गणेश:, गणधर – यह पर्यायवाची नाम श्री गौतम स्वामी जी के ही है, सब लोग इस बात को न समझ का गणेश, लक्ष्मी की पूजा करने लगे है वास्तव में गणधर देव, केवलज्ञान महालक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये।

दीपक केवलज्ञान रूपी ज्योति का प्रतिक है, हमको अन्धकार रूपी मोह का नाश करना है केवलज्ञान प्राप्त करने के लिए, हमें भगवान महावीर स्वामी – मोक्ष लक्ष्मी तथा गौतम स्वामी – गणों में ईश की पूजा करनी चाहिए, जो हम लौकिक गणेश व लक्ष्मी की पूजा करते है वो जैन धर्म में नहीं है, इस बारे में हम शास्त्रों तथा ग्रंथो में पढ़ सकते है तथा मुनि भगवन्तो से इस बारे में पूछना चाहिए, अन्यथा यहाँ गृहीत मिथ्यात्व कर्मो का बंध होता है

फटाके जलाना जिनेद्र देव की वाणी का अपमान है ! क्योकि
“अहिंसा परमो धर्म” यह जैनधर्म का प्रथम ओर अंतिम सिध्दांत है।

किसी भी देवी देवताओं की मात्र पूजा अर्चना करने से धन की प्राप्ति नहीं होती है। जबतक हमारे लाभांतराय कर्म का क्षय नहीं होगा तब तक हम जीवन भर भी किसी देवी देवताओं की पूजा करें तो हमारा समय ही व्यर्थ जाएगा। जिस प्रकार उचित समय में उचित भूमि में बीज बोने पर ही फल की प्राप्ति होती है।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️
*🔔👪💯⛳भव्य आत्माओं, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान महावीर स्वामी ने समवशरण का त्याग कर दिया था। ओर अपने सम्पूर्ण कर्मो को समाप्त करने केलिए ध्यान किया था।इस प्रकार जैन शास्त्रो में कहीं पर भी उल्लेख नहीं मिलता है कि हमें इस दिन किसी प्रकार की कोई वस्तु या रत्न खरीदना चाहिए। अगर हम इस दिन कुछ सामग्री खरीदते है तो यह समझ लेना कि अभी हम स्वयं अपना संसार बढ़ा रहे है। हां आज अगर आप अपने आपको भगवान महावीर स्वामी का वंशज मानते है तो आपको इस दिन वीतराग मंदिरजी के लिए ,नवदेवताओ के निमित्त से, किसी भी पिच्छीधारी या त्यागी व्रतियों के लिए अपनी शक्ति अनुसार दान कर पुण्य लाभ अर्जित कर सकते है।*

*🎪🔔👪नोट:-अगर आप अपने पुण्य को बढ़ाना चाहते है तो इस पोस्ट को अन्य लोगों को भेज सकते है।*

आप सभी इस लिंक के द्वारा प्रमाण सागरजी महाराज ने इस पर्व का जैन आगम से समझाया है।

*https://youtu.be/pPS0O44UKE0?si=QTIIDVhCvEwb70C7*

*विशेष :- भव्य आत्माओं, आज से ही आप अपनी नकारात्मकता को पहचान कर उसे सकारात्मक बनाए।जब आप अपने आप से संतुष्ट हो तो अपनी सकारात्मकता को योग्य समय व व्यक्ति को बांटकर अपना मनुष्य भव सार्थक करें।आप जिस प्रकार से वितरण करेंगे भविष्य में आपके पास वैसा ही लौटकर आयेगा। यही प्रकृति का नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

बुधवार, 8 नवंबर 2023

धन्य त्रयोदशी का महत्व

*धन्य तेरस का महत्व*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️ जैनधर्म की सच्चाई सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 धन्य तेरस का महत्व✍️🐒*

धन्य त्रयोदशी (धनतेरस) जी हां ! जैन धर्म मे धन्य तेरस का बहुत महत्व है लेकिन वैसा नहीं जैसा हम लोग मानते है की लक्ष्मी तथा धन की पूजा करो, जिस दिन भगवान महावीर की दिव्य ध्वनि अंतिम बार खीरी थी उस दिन त्रयोदशी थी, इसलिए उस दिन को धन्य माना गया क्योकि उस दिन  भगवान ने योग निरोध ( सभी कर्मों को समाप्त करने वाला ध्यान ) किया तथा अमावस्या के अंतिम पहर में मोक्ष प्राप्त कर लिया, लेकिन समय के प्रभाव से यह धन्य त्रयोदशी – धनतेरस में फिर सिर्फ धन की पूजा बन कर रह गई

गणानां ईश:, गणेश:, गणधर – यह पर्यायवाची नाम श्री गौतम स्वामी जी के ही है, सब लोग इस बात को न समझ का गणेश, लक्ष्मी की पूजा करने लगे है वास्तव में गणधर देव, केवलज्ञान महालक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये।

दीपक केवलज्ञान रूपी ज्योति का प्रतिक है, हमको अन्धकार रूपी मोह का नाश करना है केवलज्ञान प्राप्त करने के लिए, हमें भगवान महावीर स्वामी – मोक्ष लक्ष्मी तथा गौतम स्वामी – गणों में ईश की पूजा करनी चाहिए, जो हम लौकिक गणेश व लक्ष्मी की पूजा करते है वो जैन धर्म में नहीं है, इस बारे में हम शास्त्रों तथा ग्रंथो में पढ़ सकते है तथा मुनि भगवन्तो से इस बारे में पूछना चाहिए, अन्यथा यहाँ गृहीत मिथ्यात्व कर्मो का बंध होता है

फटाके जलाना जिनेद्र देव की वाणी का अपमान है ! क्योकि
“अहिंसा परमो धर्म” यह जैनधर्म का प्रथम ओर अंतिम सिध्दांत है।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️
*🔔👪💯⛳भव्य आत्माओं, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान महावीर स्वामी ने समवशरण का त्याग कर दिया था। ओर अपने सम्पूर्ण कर्मो को समाप्त करने केलिए ध्यान किया था।इस प्रकार जैन शास्त्रो में कहीं पर भी उल्लेख नहीं मिलता है कि हमें इस दिन किसी प्रकार की कोई वस्तु या रत्न खरीदना चाहिए। अगर हम इस दिन कुछ सामग्री खरीदते है तो यह समझ लेना कि अभी हम स्वयं अपना संसार बढ़ा रहे है। हां आज अगर आप अपने आपको भगवान महावीर स्वामी का वंशज मानते है तो आपको इस दिन वीतराग मंदिरजी के लिए ,नवदेवताओ के निमित्त से, किसी भी पिच्छीधारी या त्यागी व्रतियों के लिए अपनी शक्ति अनुसार दान कर पुण्य लाभ अर्जित कर सकते है।*

*🎪🔔👪नोट:-अगर आप अपने पुण्य को बढ़ाना चाहते है तो इस पोस्ट को अन्य लोगों को भेज सकते है।*

आप सभी इस लिंक के द्वारा प्रमाण सागरजी महाराज ने इस पर्व का जैन आगम से समझाया है।

*https://youtu.be/pPS0O44UKE0?si=QTIIDVhCvEwb70C7*

*विशेष :- भव्य आत्माओं, आज से ही आप अपनी नकारात्मकता को पहचान कर उसे सकारात्मक बनाए।जब आप अपने आप से संतुष्ट हो तो अपनी सकारात्मकता को योग्य समय व व्यक्ति को बांटकर अपना मनुष्य भव सार्थक करें।आप जिस प्रकार से वितरण करेंगे भविष्य में आपके पास वैसा ही लौटकर आयेगा। यही प्रकृति का नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏