गुरुवार, 29 मई 2025

सन्यासी की आशक्ति

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
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*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔   ज्येष्ठ शुक्ल 4, 30 मई शुक्रवार 2025 कलि काल के 15 वें तीर्थंकर धर्मनाथ सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री धर्मनाथ  भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री धर्मनाथ भगवान जी का  मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🐎 श्रुत पंचमी पर्व याने मां जिनवाणी पूजा व्रत 31 मई को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*💐💐संन्यासी की आशक्ति💐💐*

एक संन्यासी था विरक्त भाव से शान्ति से जंगल में रहते हुए ईश्वर प्राप्ति हेतु तप करता रहता था। एक दिन वहाँ से इक राहगीर गुजरा और उसने विश्राम हेतु एक रात वहीं उन संन्यासी की कुटिया में बितायी।

वह संन्यासी के स्वभाव व सेवा से बहुत प्रसन्न हुआ और जाने से पहले उस व्यापारी ने संन्यासी को एक सुंदर कम्बल दान में दिया।
संन्यासी को वह कम्बल बहुत आकर्षक लगा।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 वह उसे बार-बार छू कर निहारता रहता। ऐसा सुन्दर व कोमल कम्बल उसने कभी नहीं देखा था, वह अब हर क्षण उस कम्बल को नज़रों के सामने रखता। अतः संन्यासी का दिनों दिन उस कम्बल से लगाव गहरा होता गया।

अब उसको हर वक़्त कम्बल की चिंता सताती कि वह ख़राब या गन्दा न हो जाये, या फिर कहीं कोई और उसे चुरा न ले आदि।

 समय के साथ साथ ऐसा परिवर्तन हुआ कि जो तरजीह – प्रेम व लगाव उसके मन में परमात्मा के लिये था उसका स्थान अब उस कम्बल ने लिया था।
अंततः कम्बल के प्रति आसक्ति के परिणामस्वरूप एक दिन जब आख़िरकार उसकी मृत्यु का क्षण आया तब भी उस वक़्त उसके मन में आख़िरी ख़्याल केवल कम्बल का ही आया।

जिसके कारणवंश वह संन्यासी जो परमात्मा से अत्यंत प्रेम करता था परन्तु कम्बल के प्रति गहन आसक्ति की वजह से उसके जीवन व हृदय में परमात्मा का स्थान दूसरे नम्बर पर हो गया था और वह कम्बल अब उसकी पहली प्राथमिकता हो गया था, अत: प्राण त्यागते वक़्त भी केवल कम्बल का विचार ही उसके मन में उत्पन्न हुआ।

जैसाकि श्रीकृष्ण ने गीता के 8:5 श्लोक में कहा है कि जो कोई भी, मृत्यु के समय, अपने शरीर को छोड़ते वक़्त केवल सत्य धर्म को स्मरण करते हुए शरीर का त्याग करता है, वह रत्नत्रय स्वभाव प्राप्त कर लेता है। इसमें कोई संदेह नहीं है।

परन्तु उस संन्यासी को परमात्मा से अधिक लगाव सांसारिक वस्तु — एक कम्बल से हो गया था अंततः उसी का ही ख़्याल उसे मरते समय आया।

परिणामस्वरूप अब वह संन्यासी अगले जन्म मे पतंगा (कपड़े का कीड़ा – moth) बन कर पैदा हुआ। और लगभग अगले एक सौ जन्मों तक जब तक वह कम्बल कीड़ों द्वार खा कर पूर्णतः नष्ट नहीं हो गया तब तक वह संन्यासी बार-बार वही पंतगे का कीट बन कर पैदा होता रहा।

अब इस कहानी के आधार पर अगर हम इस तथ्य का अवलोकन करें कि जीवन में हमें जो भी मिलता है क्या वह ईश्वर की कृपा है या हमारे कर्मों का फल! तो हम पाते हैं कि ईश्वर की कृपा तो सब के लिए बराबर मात्रा में बहती है परन्तु इस अस्थायी तथा नश्वर संसार के असंख्य सांसारिक आकर्षण व लगाव वह छतरियाँ हैं 

जिन्हें हम अपने सर पर छतरी की तरह खुला रखते हैं और परमात्मा की उस कृपा को स्वयं तक पहुँचने से स्वयं ही रोक देते हैं।
हमारे कर्म ने अपनी लीला द्वारा हर वस्तु का निर्माण किया है, व उनसे आनन्द पाने के लिये हमें इन्द्रियां भी प्रदान की है। व उसके साथ-साथ परमात्मा ने हमारे क्रमिक विकास व उसे जो जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है को हासिल करने के लिये – हमारे हृदय में सदा अतृप्त रहने वाली एक तड़प व बेचैनी का भाव भी भर दिया है।इन सभी को हम अपने सच्चे ज्ञान पूर्वक आचरण से बदल सकते है।

जिसके कारण हम इस संसार में जब भी परमात्मा के अलावा कुछ भी और प्राप्त करते हैं तो निश्चितता कुछ समय के पश्चात हमारे मन में उस वस्तु के प्रति असंतुष्टी का भाव या फिर उसे खोने का भय शीघ्र ही उत्पन्न हो कर हमें बेचैन करने लगता है।

*आप चाहे किसी भी समाज से हो, अगर आप अपने समाज के किसी उभरते हुए व्यक्तित्व से जलते हो या उसकी निंदा करते हो तो आप निश्चित रूप से उस समाज के लिए कलंक हो ।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 25 मई 2025

स्वयं की आत्मशक्ति

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 स्वयं की आत्मशक्ति ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔   ज्येष्ठ कृष्ण 14, 26 मई सोमवार 2025 कलि काल के 16 वें तीर्थंकर शान्तिनाथ सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री शान्तिनाथ  भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शान्तिनाथ भगवान जी का जन्म-तप व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔   ज्येष्ठ अमावस्या, 27 मई मंगलवार 2025 कलि काल के दूसरे तीर्थंकर अजितनाथ सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री  अजितनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  अजितनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है। 🔔नोट:- जयपुर जैन पंचांग के अनुसार आज अमावस्या व एकम दोनों तिथि मान्य है।*
*🎪 मई  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  04, 05,07,18, 22, 24, 26 ,27 ,30 तारीख को है।*
*🔔🐎 श्रुत पंचमी पर्व याने मां जिनवाणी पूजा व्रत 31 मई को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 मई माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 05,06,08,09,14, 16,17, 18, 22, 23, 28 मई को है।🔔*

 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

स्वयं की आत्मशक्ति 

आज इस कहानी के माध्यम से हम यह समझ सकते हैं कि अगर हमारा आत्मविश्वास सही कार्य के लिए है तो हमारी मंजिल हमसे दूर नहीं है।बस हमें अपनी योग्यता व संस्कृति के अनुसार आचरण करना आवश्यक है।

एक बार एक व्यक्ति रेगिस्तान में कहीं भटक गया ।

उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी बहुत चीजें थीं, वो जल्द ही ख़त्म हो गयीं थीं।

पिछले दो दिनों से वह पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था।

वह मन ही मन जान चुका था कि अगले कुछ घण्टों में अगर उसे कहीं से पानी नहीं मिला तो उसकी मौत निश्चित है ।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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पर कहीं न कहीं उसे ईश्वर पर यकीन था कि कुछ चमत्कार होगा और उसे पानी मिल जाएगा।

तभी उसे एक झोँपड़ी दिखाई दी।

उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ।

पहले भी वह मृगतृष्णा और भ्रम के कारण धोखा खा चुका था।

पर बेचारे के पास यकीन करने के अलावा कोई चारा भी तो न था।

आखिर यह उसकी आखिरी उम्मीद जो थी।

वह अपनी बची खुची ताकत से झोँपडी की तरफ चलने लगा।

जैसे-जैसे वह करीब पहुँचता, उसकी उम्मीद बढती जाती और इस बार भाग्य भी उसके साथ था।

सचमुच वहाँ एक झोँपड़ी थी।

पर यह क्य ?

झोँपडी तो वीरान पड़ी थी।

मानो सालों से कोई वहाँ भटका न हो।

फिर भी पानी की उम्मीद में वह व्यक्ति झोँपड़ी के अन्दर घुसा।

अन्दर का नजारा देख उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ।

वहाँ एक हैण्ड पम्प लगा था।

वह व्यक्ति एक नयी उर्जा से भर गया।

पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसता वह तेजी से हैण्ड पम्प को चलाने लगा।

लेकिन हैण्ड पम्प तो कब का सूख चुका था। 

वह व्यक्ति निराश हो गया, उसे लगा कि अब उसे मरने से कोई नहीं बचा सकता।

वह निढाल होकर वहीं गिर पड़ा।

तभी उसे झोँपड़ी की छत से बंधी पानी से भरी एक बोतल दिखाई दी।

वह किसी तरह उसकी तरफ लपका और उसे खोलकर पीने ही वाला था कि...

तभी उसे बोतल से चिपका एक कागज़ दिखा उस पर लिखा था -

*"इस पानी का प्रयोग हैण्ड पम्प चलाने के लिए करो और वापिस बोतल भरकर रखना ना भूलना ?"*

यह एक अजीब सी स्थिति थी।

उस व्यक्ति को समझ नहीं आ रहा था कि वह पानी पीये या उसे हैण्ड पम्प में डालकर चालू करे।

उसके मन में तमाम सवाल उठने लगे,

अगर पानी डालने पर भी पम्प नहीं चला तो। 

अगर यहाँ लिखी बात झूठी हुई।

और क्या पता जमीन के नीचे का पानी भी सूख चुका हो तो।

लेकिन क्या पता पम्प चल ही पड़े,

क्या पता यहाँ लिखी बात सच हो,

वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे?

फिर कुछ सोचने के बाद उसने बोतल खोली और कांपते हाथों से पानी पम्प में डालने लगा।

पानी डालकर उसने भगवान से प्रार्थना की और पम्प चलाने लगा।

एक, दो, तीन और हैण्ड पम्प से ठण्डा-ठण्डा पानी निकलने लगा।

वह पानी किसी अमृत से कम नहीं था।

उस व्यक्ति ने जी भरकर पानी पिया, उसकी जान में जान आ गयी।

दिमाग काम करने लगा।

उसने बोतल में फिर से पानी भर दिया और उसे छत से बांध दिया।

जब वो ऐसा कर रहा था, तभी उसे अपने सामने एक और शीशे की बोतल दिखी।

खोला तो उसमें एक पेंसिल और एक नक्शा पड़ा हुआ था, जिसमें रेगिस्तान से निकलने का रास्ता था।

उस व्यक्ति ने रास्ता याद कर लिया और नक़्शे वाली बोतल को वापस वहीँ रख दिया।

इसके बाद उसने अपनी बोतलों में (जो पहले से ही उसके पास थीं) पानी भरकर वहाँ से जाने लगा।

कुछ आगे बढ़कर उसने एक बार पीछे मुड़कर देखा।

फिर कुछ सोचकर वापिस उस झोँपडी में गया,

और पानी से भरी बोतल पर चिपके कागज़ को उतारकर उस पर कुछ लिखने लगा।

उसने लिखा - *"मेरा यकीन करिए यह हैण्ड पम्प काम करता है"*

यह कहानी सम्पूर्ण जीवन के बारे में है।

यह हमें सिखाती है कि बुरी से बुरी स्थिति में भी अपनी उम्मीद नहीं छोडनी चाहिए।

और इस कहानी से यह भी शिक्षा मिलती है कि कुछ बहुत बड़ा पाने से पहले हमें अपनी ओर से भी कुछ देना होता है।

जैसे उस व्यक्ति ने नल चलाने के लिए मौजूद पूरा पानी उसमें डाल दिया।

देखा जाए तो इस कहानी में पानी जीवन में मौजूद महत्वपूर्ण चीजों को दर्शाता है।

कुछ ऐसी चीजें हैं जिनकी हमारी नजरों में विशेष कीमत है।

किसी के लिए मेरा यह सन्देश ज्ञान हो सकता है,

तो किसी के लिए प्रेम,

तो किसी और के लिए पैसा।

यह जो कुछ भी है, उसे पाने के लिए पहले हमें *अपनी तरफ से* उसे *कर्म रुपी हैण्ड पम्प* में डालना होता है और फिर *बदले में* आप अपने *योगदान से कहीं अधिक* मात्रा में उसे *वापिस पाते* हैं।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 21 मई 2025

मेरे कर्मों का फल

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*


*🔔🪔   ज्येष्ठ कृष्ण  10, 22 मई गुरुवार 2025 कलि काल के 13वें तीर्थंकर विमलनाथ सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री विमलनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री विमलनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔   ज्येष्ठ कृष्ण 12, 24 मई शनिवार 2025 कलि काल के 14वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री अनंतनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अनंतनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 मई  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  04, 05,07,18, 22, 24, 26 ,27 ,30 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  मई माह में अष्टमी तिथि 4 व 20 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 11 व 26 मई को है।*
*🔔🐎 श्रुत पंचमी पर्व याने मां जिनवाणी पूजा व्रत 31 मई को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 मई माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 05,06,08,09,14, 16,17, 18, 22, 23, 28 मई को है।🔔*
*🐎✍️ पंचक 20 से 24 मई तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🚙🚗 वाहन खरीदने का मुहूर्त 2,4,9,11,18 व 23 मई को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*मेरे कर्म फल*

*🔔मेरे जीवन की सच्चाई आज में वर्तमान में मुझे सुख व दुःख की प्राप्ति हो रही है।वह मेरे कर्मों के द्वारा बोई गई फसल के फल है।उन फलों को में समता पूर्वक भोग रहा हूं। अब कर्मों के द्वारा ऐसे बीज नहीं बो रहा हूं जिससे मेरा वर्तमान व भविष्य खराब हो। मैं अब सभी के मोक्ष मार्ग में सहायक बनकर जीवन सार्थक कर रहा हूं। अब इस कहानी से कुछ सकारात्मक शब्दों में स्वयं का आकलन करना आवश्यक है।*

एक दिन एक राजा ने अपने तीन मन्त्रियो को दरबार में  बुलाया और  तीनों को  आदेश  दिया  कि वह एक  एक  थैला  ले  कर  बगीचे  में  जाएं.., 
और 
वहां  से  अच्छे  अच्छे  फल  जमा  करें.  
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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वो  तीनो  अलग  अलग  बाग़  में प्रविष्ट  हो  गए ,
पहले मन्त्री ने  कोशिश  की  कि राजा  के  लिए  उसकी पसंद  के  अच्छे  अच्छे  और  मज़ेदार  फल  जमा  किए जाएँ , उसने  काफी  मेहनत  के  बाद  बढ़िया और  ताज़ा  फलों  से  थैला  भर  लिया।

दूसरे मन्त्री  ने  सोचा  राजा  हर  फल  का परीक्षण  तो करेगा नहीं , इस  लिए  उसने  जल्दी  जल्दी  थैला  भरने  में  ताज़ा , कच्चे , गले  सड़े फल  भी  थैले  में  भर  लिए ,

तीसरे  मन्त्री  ने  सोचा  राजा  की  नज़र  तो  सिर्फ  भरे  हुए थैले  की  तरफ  होगी  वो  खोल  कर  देखेगा  भी  नहीं  कि  इसमें  क्या  है , उसने  समय बचाने  के  लिए  जल्दी  जल्दी  इसमें  घास और  पत्ते  भर  लिए  और  वक़्त  बचाया .

दूसरे  दिन  राजा  ने  तीनों मन्त्रियो  को  उनके  थैलों  समेत  दरबार  में  बुलाया  और  उनके  थैले  खोल  कर  भी  नही देखे  और  आदेश दिया  कि  तीनों  को  उनके  थैलों  समेत  दूर  स्थान की एक जेल  में 15 दिन के लिए  क़ैद  कर  दिया  जाए.

 अब  जेल  में  उनके  पास  खाने  पीने  को  कुछ  भी  नहीं  था  सिवाय उन फल से भरे थैलों  के ,
तो  जिस मन्त्री ने  अच्छे  अच्छे  फल  जमा  किये  वो  तो  मज़े  से  खाता  रहा  और  15 दिन  गुज़र  भी  गए ,

फिर  दूसरा  मन्त्री जिसने  ताज़ा , कच्चे  गले  सड़े  फल  जमा  किये  थे,  वह कुछ  दिन  तो  ताज़ा  फल  खाता  रहा  फिर  उसे  ख़राब  फल  खाने  पड़े , जिससे  वो  बीमार  हो गया  और  बहुत  तकलीफ  उठानी  पड़ी .

  तीसरा मन्त्री  जिसने  थैले  में  सिर्फ  घास  और  पत्ते  जमा  किये  थे  वो  कुछ  ही  दिनों  में  भूख  से  मर  गया .

अब आप अपने आप से  पूछिये कि आप क्या जमा कर  रहे हो ?

आप  इस समय जीवन के  बाग़  में हैं , यहाँ चाहें तो अच्छे कर्म जमा करें .. चाहें तो बुरे कर्म,
मगर याद रहे जो आप जमा करेंगे वही आपके जन्मों-जन्मों तक काम आयेगा

"जीवन का एक रहस्य... रास्ते पर गति की सीमा है। बैंक में पैसों की सीमा है। परीक्षा में समय की सीमा है। परंतु हमारी सोच (विचार शक्ति) की कोई सीमा नहीं है, इसलिए सदा श्रेष्ठ सोचें, श्रेष्ठ करें एवं श्रेष्ठ बोलें तब श्रेष्ठ पाएं ।
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 17 मई 2025

संस्कारों का महत्व

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 संस्कारों का महत्व ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔   ज्येष्ठ कृष्ण 6, 18 मई रविवार 2025 कलि काल के 11वें तीर्थंकर श्रेयांसनाथ सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री श्रेयांसनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री श्रेयांसनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*

*🎪 मई  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  04, 05,07,18, 22, 24, 26 ,27 ,30 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  मई माह में अष्टमी तिथि 4 व 20 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 11 व 26 मई को है।*
*🔔🐎 श्रुत पंचमी पर्व याने मां जिनवाणी पूजा व्रत 31 मई को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 मई माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 05,06,08,09,14, 16,17, 18, 22, 23, 28 मई को है।🔔*
*🐎✍️ पंचक 20 से 24 मई तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🚙🚗 वाहन खरीदने का मुहूर्त 2,4,9,11,18 व 23 मई को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

संस्कारों का महत्व 

*🔔👨‍👨‍👦‍👦🪔जब जीव गर्भ में नहीं आता तब से जीव गर्भ में आएं और जन्म तक अगर मां व परिवार के सभी सदस्य सच्चे संस्कारों का पालन करें तो आज सभी को स्वर्ग जैसी सभी सुखकारी सुविधाएं प्राप्त होती है।अब इस कहानी के माध्यम से अपने को समझकर जीवन में कुछ करना है।*

एक राजा के पास सुंदर घोड़ी थी। कई बार युद्ध में इस घोड़ी ने राजा के प्राण बचाए और घोड़ी राजा के लिए पूरी वफादार थी, कुछ दिनों के बाद इस घोड़ी ने एक बच्चे को जन्म दिया, बच्चा काना पैदा हुआ, पर शरीर हृष्ट पुष्ट व सुडौल था।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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बच्चा बड़ा हुआ, बच्चे ने मां से पूछा- मां मैं बहुत बलवान हूं, पर काना हूं...। यह कैसे हो गया, इस पर घोड़ी बोली- बेटा जब मैं गर्भवती थी, तब राजा ने मेरे ऊपर सवारी करते समय मुझे एक कोड़ा मार दिया, जिसके कारण तू काना हो गया। यह बात सुनकर बच्चे को राजा पर गुस्सा आया और मां से बोला- मां मैं इसका बदला लूंगा।

मां ने कहा, बेटा राजा ने हमारा पालन-पोषण किया है। तू जो स्वस्थ है, सुन्दर है, हृष्ट-पुष्ट है उसी के पोषण से तो है। यदि राजा को एक बार गुस्सा आ गया, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि हम उसे क्षति पहुचाएं। मगर, उस बच्चे के समझ में कुछ नहीं आया। उसने मन ही मन राजा से बदला लेने की ठान ली।

वह लगातार राजा से बदला लेने के बारे में सोचता रहता था और एक दिन यह मौका घोड़े को मिल गया। राजा उसे युद्ध  पर ले गया। युद्व लड़ते-लड़ते राजा एक जगह घायल हो गया। घोड़े के पास राजा को युद्ध के मैदान में छोड़कर भाग निकलने का पूरा मौका था।

यदि वह ऐसा करता, तो राजा या तो पकड़ा जाता या दुश्मनों के हाथों मार दिया जाता। मगर, उस वक्त घोड़े के मन में ऐसा कोई ख्याल ही नहीं आया और वह राजा को तुरंत उठाकर वापिस महल ले आया। इस पर घोड़े को स्वयं ताज्जूब हुआ और उसने मां से पूछा- मां आज तो राजा से बदला लेने का सबसे अच्छा मौका था, पर युद्व के मैदान में बदला लेने का ख्याल ही नहीं आया और न ही मैं राजा से बदला ले पाया।

मन ने गवाही नहीं दी, राजा से बदला लेने की। ऐसा क्यों हुआ मां। इस पर मां घोडी हंस कर बोली- बेटा तेरे खून में और तेरे संस्कार में धोखा है ही नहीं, तू जानबूझकर तो धोखा दे ही नहीं सकता है। तुझसे नमक हरामी हो ही नहीं सकती, क्योंकि तेरी नस्ल में तेरी मां का ही तो अंश है। मेरे संस्कार और सीख को तू कैसे झुठला सकता था।

*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🌞⏰विशेष:-भव्य आत्माओं,यह सत्य है कि जैसे हमारे संस्कार होते हैं, वैसा ही हमारे मन का व्यवहार होता है। हमारे पारिवारिक-संस्कार अवचेतन मस्तिष्क में गहरे बैठ जाते हैं, माता-पिता जिस संस्कार के होते हैं, उनके बच्चे भी उसी संस्कारों को लेकर पैदा होते हैं। हमारे कर्म ही 'संस्‍कार' बनते हैं और संस्कार ही प्रारब्धों का रूप लेते हैं । यदि हम कर्मों को सही व बेहतर दिशा दे दें, तो संस्कार अच्छे बनेंगे और संस्कार अच्छे बनेंगे, तो जो प्रारब्ध का फल बनेगा, वह अच्छा होगा*।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 6 मई 2025

महत्व किसका

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 महत्व किसका✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔🪔 वैशाख शुक्ल दशमी  , 07 मई बुधवार 2025 कलि काल के अंतिम तीर्थंकर शासन नायक सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री महावीर भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री महावीर भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 मई  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  04, 05,07,18, 22, 24, 26 ,27 ,30 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  मई माह में अष्टमी तिथि 4 व 20 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 11 व 26 मई को है।*
*🔔🐎 श्रुत पंचमी पर्व याने मां जिनवाणी पूजा व्रत 31 मई को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 मई माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 05,06,08,09,14, 16,17, 18, 22, 23, 28 मई को है।🔔*
*🐎✍️ पंचक 20 से 24 मई तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🚙🚗 वाहन खरीदने का मुहूर्त 2,4,9,11,18 व 23 मई को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
" *महत्व किसका* 

जीवन में अक्सर हम मूल्य  और महत्व  को एक ही समझ बैठते हैं। जो दिखने में बड़ा हो, महंगा हो, वही श्रेष्ठ है – यह सोच हमारे मन में घर कर जाती है। लेकिन सच्ची श्रेष्ठता तो उस व्यक्ति या वस्तु की होती है, जो दूसरों के लिए उपयोगी हो, भले ही उसका मूल्य थोड़ा ही क्यों न हो। इसी विचार को समझाने वाली एक प्रसंग  कहानी के द्वारा प्रस्तुत है...

एक दिन एक व्यक्ति की जेब में ₹500 का नोट और ₹1 का सिक्का साथ-साथ पड़े थे। सिक्का बड़े आदर से उस नोट को एकटक देखे जा रहा था।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 9057473389 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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नोट ने मुस्कुराकर पूछा, "क्या बात है छोटे? इतने ध्यान से क्यों देख रहे हो मुझे?"
सिक्का भावुक स्वर में बोला, "आप जैसे महान, मूल्यवान से कभी मिलने का सौभाग्य नहीं मिला। आपका मूल्य हमसे पांच सौ गुना अधिक है। आप तो न जाने कितनों के काम आए होंगे, कितनी जगहों की सैर की होगी! मैं तो बस छोटा-सा सिक्का हूँ..."
नोट थोड़ी देर चुप रहा, फिर एक गहरी साँस लेकर बोला – "भाई, तुम जिसे मेरी किस्मत समझ रहे हो, वो असल में एक लंबी कैद की कहानी है।
कभी एक उद्योगपति की तिजोरी में बंद रहा। फिर घूस के रूप में एक अधिकारी को सौंपा गया – लगा अब तो दुनिया देखूंगा, किसी ज़रूरतमंद के काम आऊंगा… पर नहीं, फिर बैंक में जाकर बंद हो गया महीनों के लिए।
कभी बंगला खरीदने में बिल्डर के पास गया, तो वहां बोरे में ठूंसा गया, एक अंधेरी कोठरी में फेंक दिया गया – न रोशनी, न हवा। मैं तड़पता रहा... जीते जी जैसे मर गया था।
कभी किसी की मुस्कान नहीं देखी, किसी ज़रूरतमंद के हाथ में नहीं गया। अभी कुछ दिन पहले ही इस आदमी की जेब में आया हूँ…"
इतना कहकर नोट चुप हो गया। उसकी आँखों में नमी थी।
फिर बोला – "अब तुम बताओ दोस्त, तुमने क्या देखा दुनिया में?"
सिक्का मुस्कुराया और बोला – "मैं तो हमेशा सफर में रहा। 
कभी भिखारी की कटोरी में गया, कभी बच्चों की चॉकलेट की खुशी बना, 
कभी माँ की पूजा की थाली में भगवान के चरणों तक पहुँचा, कभी मंदिरों की घंटियों की गूंज में नहाया। कभी तीर्थों में स्नान किया, 
कभी दुकानों में रौनक बढ़ाई। 
हर किसी के कुछ काम आया, चाहे वो छोटा बच्चा हो या बुजुर्ग। बस यही मेरा जीवन है – *घूमते रहना, मुस्कानें बाँटना।"* 
नोट की आँखें भर आईं। उसने धीरे से कहा – "सच में, मूल्य बड़ा नहीं, उपयोगिता बड़ी होती है।"
इस कहानी से यही सीख मिलती है कि हमारा मूल्य (पैसे या पद से) चाहे जो भी हो, हमारी असली पहचान इस बात से बनती है कि हम कितनों के लिए उपयोगी हैं। जिंदगी का असली आनंद दूसरों के काम आकर, उनकी मुस्कान बनकर ही मिलता है।
 *बड़े बनने से ज्यादा जरूरी है, किसी के लिए 'महत्वपूर्ण' बनना।* 
*⏰🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎विशेष:-भव्य आत्माओं इस कहानी को आईना बना कर हमें अपने आप को देखना आवश्यक है। अगर हमनें अपने सुधार के बारे में नहीं सोचा तो यह मनुष्य भव हमारे लिए दुबारा प्राप्त करना दुर्लभ होगा। अतः स्वयं के बारे में अभी से ही विचार करना शुरू करें तो सबकुछ संभव है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 3 मई 2025

भगवान जी का धन्यवाद करें

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 भगवान जी का धन्यवाद करें ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल अष्टमी  , 04 मई रविवार 2025 कलि काल के 15 वें  तीर्थंकर सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री धर्मनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री धर्मनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल नवमी  , 05 मई सोमवार 2025 कलि काल के 5 वें  तीर्थंकर सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री सुमतिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री सुमतिनाथ भगवान जी का तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 मई  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  04, 05,07,18, 22, 24, 26 ,27 ,30 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  मई माह में अष्टमी तिथि 4 व 20 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 11 व 26 मई को है।*
*🔔🐎 श्रुत पंचमी पर्व याने मां जिनवाणी पूजा व्रत 31 मई को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 मई माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 05,06,08,09,14, 16,17, 18, 22, 23, 28 मई को है।🔔*
*🐎✍️ पंचक 20 से 24 मई तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🚙🚗 वाहन खरीदने का मुहूर्त 2,4,9,11,18 व 23 मई को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*भगवान का धन्यवाद करें* 

एक बार एक थिएटर में एक शॉर्ट फिल्म दिखाई गई। जब फिल्म शुरू हुई, तो स्क्रीन पर केवल एक सफेद पंखा दिखाई दे रहा था—बिल्कुल स्थिर, बिना किसी हलचल के।
यह दृश्य लगभग 6 मिनट तक चलता रहा। धीरे-धीरे दर्शकों की बेचैनी बढ़ने लगी। कुछ ने शिकायत की, तो कुछ उठकर बाहर जाने लगे।

6 मिनट के बाद, कैमरा धीरे-धीरे पंखे से नीचे खिसकता है और एक बिस्तर पर रुकता है, जहाँ एक अपाहिज बच्चा लेटा हुआ था। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट के कारण वह हिल-डुल भी नहीं सकता था और दिन-रात छत को ही निहारता रहता था।

तभी एक आवाज गूंजती है:
"अभी इस शॉर्ट फिल्म में केवल 6 मिनट तक एक ही दृश्य दिखाया गया, और आपमें से कई असहज हो गए, कुछ धैर्य खो बैठे और कुछ उठकर चले गए। सोचिए, वह बच्चा अपने जीवन के अधिकांश पल सिर्फ यही दृश्य देखकर बिताता है।"

यह संदेश हमें यह समझाने के लिए था कि कभी-कभी हमें अपनी परिस्थितियों को दूसरों की दृष्टि से भी देखना चाहिए।
जो कुछ हमारे पास है, उसकी अहमियत को समझें और इसके लिए भगवान का आभार व्यक्त करें।

हमेशा अपनी समस्याओं की तुलना उन लोगों से करें जो हमसे कहीं अधिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, लेकिन फिर भी साहस नहीं छोड़ते।
हमें भगवान का धन्यवाद करना चाहिए कि उन्होंने हमें यह सुंदर जीवन दिया, साथ ही हवा, पानी, धरती, आसमान, चाँद-सूरज, पेड़-पौधे और ऋतुओं जैसे अद्भुत उपहार भी दिए।

भगवान की इन नेमतों के लिए हम उनका जितना शुक्रिया अदा करें, वह कम है।

अब एक और कहानी से समझते हैं कि जीवन के अच्छे और बुरे दोनों समय में कृतज्ञता क्यों आवश्यक है:

एक बीमार पक्षी रेगिस्तान में अकेला रहता था। उसके पंख नहीं थे, खाना-पानी और आश्रय कुछ भी नहीं था।
एक दिन एक कबूतर वहाँ से गुज़रा। बीमार पक्षी ने पूछा, "तुम कहाँ जा रहे हो?"
कबूतर ने उत्तर दिया, "मैं स्वर्ग जा रहा हूँ। भगवान ने मुझे वहाँ आने-जाने की अनुमति दी है।"
पक्षी ने विनती की, "कृपया भगवान से पूछो, मेरी पीड़ा कब खत्म होगी?"
स्वर्ग पहुँचकर कबूतर ने देवदूत से यह प्रश्न किया।

देवदूत ने कहा, "अगले सात वर्षों तक इस पक्षी की पीड़ा समाप्त नहीं होगी।"
कबूतर बोला, "यह सुनकर वह निराश हो जाएगा। कोई उपाय?"
देवदूत ने कहा, "उसे सिर्फ इतना कहने को कहो:
‘हे भगवान, आपने जो भी दिया, उसके लिए आपका व प्रकृति का धन्यवाद।’"

कबूतर ने वह संदेश बीमार पक्षी तक पहुँचा दिया।

सात दिन बाद जब कबूतर दोबारा लौटा, तो देखा कि वह पक्षी खुश था, उसके पंख निकल आए थे, उसके पास एक छोटा तालाब था और हरा-भरा पौधा भी। पक्षी आनंद से नाच रहा था।

चकित कबूतर फिर स्वर्ग गया और देवदूत से पूछा, "आपने तो कहा था कि सात वर्षों तक कोई खुशी नहीं मिलेगी?"
देवदूत मुस्कराए और बोले,
"सही कहा था। लेकिन उसने भगवान व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जताई, हर परिस्थिति में धन्यवाद दिया। यही भाव उसकी नियति को बदल गया।"

जीवन में चाहे सुख हों या दुख, दोनों हमें कुछ न कुछ सिखाते हैं—
सुख मुस्कुराना सिखाते हैं,
दुख जीवन को गहराई से समझना सिखाते हैं।

वास्तविक विजेता वही होता है जो हर परिस्थिति में भगवान व प्रकृति का आभार जताते हुए आगे बढ़ता है। जब हम अपने दुखों को भी धन्यवादपूर्वक स्वीकार करते हैं, तभी वे अर्थपूर्ण बनते हैं।

तो आइए, हम हर दिन को—चाहे वह सुखद हो या चुनौतीपूर्ण—भगवान व प्रकृति का वरदान मानें और सच्चे दिल से उनका धन्यवाद करें।
यही सोच हमें भीतर से मजबूत बनाती है और आत्मिक विकास की ओर ले जाती है।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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