*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 भगवान जी का धन्यवाद करें ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल अष्टमी , 04 मई रविवार 2025 कलि काल के 15 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री धर्मनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री धर्मनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल नवमी , 05 मई सोमवार 2025 कलि काल के 5 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री सुमतिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री सुमतिनाथ भगवान जी का तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 मई 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04, 05,07,18, 22, 24, 26 ,27 ,30 तारीख को है।*
*👨👨👦👦🔔🐎 मई माह में अष्टमी तिथि 4 व 20 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 11 व 26 मई को है।*
*🔔🐎 श्रुत पंचमी पर्व याने मां जिनवाणी पूजा व्रत 31 मई को है।*
*👨👨👦👦🔔👉 मई माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 05,06,08,09,14, 16,17, 18, 22, 23, 28 मई को है।🔔*
*🐎✍️ पंचक 20 से 24 मई तक है।*
*👨👨👦👦🚙🚗 वाहन खरीदने का मुहूर्त 2,4,9,11,18 व 23 मई को है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*भगवान का धन्यवाद करें*
एक बार एक थिएटर में एक शॉर्ट फिल्म दिखाई गई। जब फिल्म शुरू हुई, तो स्क्रीन पर केवल एक सफेद पंखा दिखाई दे रहा था—बिल्कुल स्थिर, बिना किसी हलचल के।
यह दृश्य लगभग 6 मिनट तक चलता रहा। धीरे-धीरे दर्शकों की बेचैनी बढ़ने लगी। कुछ ने शिकायत की, तो कुछ उठकर बाहर जाने लगे।
6 मिनट के बाद, कैमरा धीरे-धीरे पंखे से नीचे खिसकता है और एक बिस्तर पर रुकता है, जहाँ एक अपाहिज बच्चा लेटा हुआ था। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट के कारण वह हिल-डुल भी नहीं सकता था और दिन-रात छत को ही निहारता रहता था।
तभी एक आवाज गूंजती है:
"अभी इस शॉर्ट फिल्म में केवल 6 मिनट तक एक ही दृश्य दिखाया गया, और आपमें से कई असहज हो गए, कुछ धैर्य खो बैठे और कुछ उठकर चले गए। सोचिए, वह बच्चा अपने जीवन के अधिकांश पल सिर्फ यही दृश्य देखकर बिताता है।"
यह संदेश हमें यह समझाने के लिए था कि कभी-कभी हमें अपनी परिस्थितियों को दूसरों की दृष्टि से भी देखना चाहिए।
जो कुछ हमारे पास है, उसकी अहमियत को समझें और इसके लिए भगवान का आभार व्यक्त करें।
हमेशा अपनी समस्याओं की तुलना उन लोगों से करें जो हमसे कहीं अधिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, लेकिन फिर भी साहस नहीं छोड़ते।
हमें भगवान का धन्यवाद करना चाहिए कि उन्होंने हमें यह सुंदर जीवन दिया, साथ ही हवा, पानी, धरती, आसमान, चाँद-सूरज, पेड़-पौधे और ऋतुओं जैसे अद्भुत उपहार भी दिए।
भगवान की इन नेमतों के लिए हम उनका जितना शुक्रिया अदा करें, वह कम है।
अब एक और कहानी से समझते हैं कि जीवन के अच्छे और बुरे दोनों समय में कृतज्ञता क्यों आवश्यक है:
एक बीमार पक्षी रेगिस्तान में अकेला रहता था। उसके पंख नहीं थे, खाना-पानी और आश्रय कुछ भी नहीं था।
एक दिन एक कबूतर वहाँ से गुज़रा। बीमार पक्षी ने पूछा, "तुम कहाँ जा रहे हो?"
कबूतर ने उत्तर दिया, "मैं स्वर्ग जा रहा हूँ। भगवान ने मुझे वहाँ आने-जाने की अनुमति दी है।"
पक्षी ने विनती की, "कृपया भगवान से पूछो, मेरी पीड़ा कब खत्म होगी?"
स्वर्ग पहुँचकर कबूतर ने देवदूत से यह प्रश्न किया।
देवदूत ने कहा, "अगले सात वर्षों तक इस पक्षी की पीड़ा समाप्त नहीं होगी।"
कबूतर बोला, "यह सुनकर वह निराश हो जाएगा। कोई उपाय?"
देवदूत ने कहा, "उसे सिर्फ इतना कहने को कहो:
‘हे भगवान, आपने जो भी दिया, उसके लिए आपका व प्रकृति का धन्यवाद।’"
कबूतर ने वह संदेश बीमार पक्षी तक पहुँचा दिया।
सात दिन बाद जब कबूतर दोबारा लौटा, तो देखा कि वह पक्षी खुश था, उसके पंख निकल आए थे, उसके पास एक छोटा तालाब था और हरा-भरा पौधा भी। पक्षी आनंद से नाच रहा था।
चकित कबूतर फिर स्वर्ग गया और देवदूत से पूछा, "आपने तो कहा था कि सात वर्षों तक कोई खुशी नहीं मिलेगी?"
देवदूत मुस्कराए और बोले,
"सही कहा था। लेकिन उसने भगवान व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जताई, हर परिस्थिति में धन्यवाद दिया। यही भाव उसकी नियति को बदल गया।"
जीवन में चाहे सुख हों या दुख, दोनों हमें कुछ न कुछ सिखाते हैं—
सुख मुस्कुराना सिखाते हैं,
दुख जीवन को गहराई से समझना सिखाते हैं।
वास्तविक विजेता वही होता है जो हर परिस्थिति में भगवान व प्रकृति का आभार जताते हुए आगे बढ़ता है। जब हम अपने दुखों को भी धन्यवादपूर्वक स्वीकार करते हैं, तभी वे अर्थपूर्ण बनते हैं।
तो आइए, हम हर दिन को—चाहे वह सुखद हो या चुनौतीपूर्ण—भगवान व प्रकृति का वरदान मानें और सच्चे दिल से उनका धन्यवाद करें।
यही सोच हमें भीतर से मजबूत बनाती है और आत्मिक विकास की ओर ले जाती है।
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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