मंगलवार, 30 नवंबर 2021

गुरु का मार्गदर्शन

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒गुरु का मार्गदर्शन*

एक गृहस्थ भक्त अपनी आजीविका  में दो दिन के खर्च के  लिए पैसे पत्नी को देकर अपने गुरुदेव के पास गया ।

दो दिन बाद उसने अपने गुरुदेव को निवेदन किया के अभी मुझे घर जाना है। मैं धर्मपत्नी को दो ही दिन का घर खर्च दे पाया हूं । घर खर्च खत्म होने पर मेरी पत्नी व बच्चे कहाँ से खायेंगे ।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

गुरुदेव के बहुत समझाने पर भी वो नहीं रुका। तो उन्होंने उसे एक चिट्ठी लिख कर दी। और कहा कि रास्ते में ये चिट्ठी मेरे एक भक्त को देते जाना।

वह चिट्ठी लेकर भक्त के पास गया। उस चिट्ठी में लिखा था कि जैसे ही मेरा यह भक्त तुम्हें ये खत दे तुम इसको 2 साल के लिए मौन साधना की सुविधा वाली जगह में बंद कर देना।

उस गुरु भक्त ने वैसे ही किया। वह गृहस्थी शिष्य 2 साल तक अन्दर गुरु के बताएं अनुसार नियमपूर्वक साधना करता रहा परंतु कभी कभी इस सोच में भी पड़ जाता कि मेरी पत्नी का क्या हुआ होगा, बच्चों का क्या हुआ होगा ?

उधर उसकी पत्नी समझ गयी कि शायद पतिदेव वापस नहीं लौटेंगे।तो उसने किसी के यहाँ खेती बाड़ी का काम शुरू कर दिया।

खेती करते करते उसे हीरे जवाहरात का एक मटका मिला।

उसने ईमानदारी से वह मटका  खेत के मालिक को दे दिया।

उसकी ईमानदारी से खुश होकर खेत के मालिक ने उसके लिए एक अच्छा मकान बनवा दिया व आजीविका हेतु ज़मीन जायदाद भी दे दी ।

अब वह अपनी ज़मीन पर खेती कर के खुशहाल जीवन व्यतीत करने लगी।

जब वह शिष्य 2 साल बाद घर लौटा तो देखकर हैरान हो गया और मन ही मन गुरुदेव के करुणा कृपा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने लगा कि सद्गुरु ने मुझे यहाँ अहंकार मुक्त कर दिया ।

मै समझता था कि मैं नहीं कमाकर दूंगा तो मेरी पत्नी और बच्चों का क्या होगा

करनेवाला तो सब परमात्मा है। लेकिन झूठे अहंकार के कारण मनुष्य समझता है कि मैं करनेवाला हूं।

वह अपने गुरूदेव के पास पहुंचा और उनके चरणों में पड़ गया। गुरुदेव ने उसे समझाते हुए कहा बेटा हर जीव का अपना अपना प्रारब्ध  होता है और उसके अनुसार उसका जीवन यापन होता है।

मैं भगवान के भजन में लग जाऊंगा तो मेरे घरवालों का क्या होगा ।

मैं सब का पालन पोषण करता हूँ मेरे बाद उनका क्या होगा यह अहंकार मात्र है।

वास्तव में जिस परमात्मा ने यह शरीर दिया है उसका भरण पोषण भी वही परमात्मा करता है..

*प्रारब्ध पहले रच्यो पीछे भयो शरीर*
*तुलसी चिंता क्या करे भज ले तू रघुबीर*

*शिष्य को अपनी गलती का अहसास हुआ और सद्गुरु के आश्रम में रहते हुए गुरु के बताए साधना मार्ग अनुसार अपने जीवन परम कल्याण परमार्थ प्राप्ति में लगा दिय़ा।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

सोमवार, 29 नवंबर 2021

भगवान से मिलन

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒भगवान से मिलना💐💐*

एक 6 साल का छोटा सा बच्चा अक्सर भगवान से मिलने की जिद किया करता था। उसे भगवान् के बारे में कुछ भी पता नहीं था, पर मिलने की तमन्ना, भरपूर थी। उसकी चाहत थी की एक समय की रोटी वो भगवान के साथ बैठकर खाये।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

एक दिन उसने एक थैले में 5,6 रोटियां रखीं और परमात्मा को को ढूंढने के लिये निकल पड़ा।

चलते चलते वो बहुत दूर निकल आया संध्या का समय हो गया। उसने देखा एक नदी के तट पर एक बुजुर्ग माता बैठी हुई हैं, जिनकी आँखों में बहुत ही गजब की चमक थी, प्यार था, किसी की तलाश थी , और ऐसा लग रहा था जैसे उसी के इन्तजार में वहां बैठी उसका रास्ता देख रहीं हों।

वो मासूम बालक बुजुर्ग माता के पास जा कर बैठ गया, अपने थैले में से रोटी निकाली और खाने लग गया।
फिर उसे कुछ याद आया तो उसने अपना रोटी वाला हाथ बूढी माता की ओर बढ़ाया और मुस्कुरा के देखने लगा, बूढी माता ने रोटी ले ली, माता के झुर्रियों वाले चेहरे पे अजीब सी खुशी आ गई आँखों में खुशी के आंसू भी थे।

बच्चा माता को देखे जा रहा था , जब माता ने रोटी खाली बच्चे ने एक और रोटी माता को दे दी।
माता अब बहुत खुश थी। बच्चा भी बहुत खुश था। दोनों ने आपस में बहुत प्यार और स्नेह केे पल बिताये।

जब रात घिरने लगी तो बच्चा इजाजत लेकर घर की ओर चलने लगा और वो बार- बार पीछे मुड़कर देखता ! तो पाता बुजुर्ग माता उसी की ओर देख रही होती हैं।

बच्चा घर पहुंचा तो माँ ने अपने बेटे को आया देखकर जोर से गले से लगा लिया और चूमने लगी,
बच्चा बहूत खुश था। माँ ने अपने बच्चे को इतना खुश पहली बार देखा तो खुशी का कारण पूछा,
तो बच्चे ने बताया!

माँ ! ....आज मैंने भगवान के साथ बैठकर रोटी खाई, आपको पता है माँ उन्होंने भी मेरी रोटी खाई,,, पर माँ भगवान् बहुत बूढ़े हो गये हैं,,, मैं आज बहुत खुश हूँ माँ....

उधर बुजुर्ग माता भी जब अपने घर पहुँची तो गांव वालों ने देखा माता जी बहुत खुश हैं, तो किसी ने उनके इतने खुश होने का कारण पूछा ..??

माता जी बोलीं,,,, मैं दो दिन से नदी के तट पर अकेली भूखी बैठी थी,, मुझे पता था भगवान आएंगे और मुझे खाना खिलाएंगे।
आज भगवान् आए थे, उन्होंने मेरे सांथ बैठकर रोटी खाई मुझे भी बहुत प्यार से खिलाई, बहुत प्यार से मेरी ओर देखते थे। जाते समय मुझे गले भी लगाया,, भगवान बहुत ही मासूम हैं बच्चे की तरह दिखते हैं।

इस कहानी का अर्थ बहुत गहराई वाला है।
वास्तव में बात सिर्फ इतनी है की दोनों के दिलों में ईश्वर के लिए अगाध सच्चा प्रेम था।
और प्रभु ने दोनों को, दोनों के लिये, दोनों में ही ( ईश्वर) खुद को भेज दिया।

जब मन ईश्वर भक्ति में रम जाता है तो, हमें हर एक जीव में वही नजर आता है।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

रविवार, 28 नवंबर 2021

संस्कारों का उपहार

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒संस्कारों का उपहार💐💐* 

      आज उसका जन्म दिन था। बच्चे व पत्नी स्वागत में व्यस्त थे। कुछ रिश्तेदार भी आए हुए थे ।टेबल सजाई जा रही थी। रंग बिरंगे गुब्बारे देख कर बच्चे चहक रहे थे।उपहारों के रंग बिरंगे पैकेट्स थे।सभी तैयारियों में लगे थे।बड़ा सा केक टेबल पर सजाया हुआ था।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

रिश्तेदार आए हुए थे। टेबल सजाई जा रही थी। रंग-बिरंगे गुब्बारे देख

बच्चे चहक रहे थे। उपहारों के रंग-बिरंगे पैकेट्स में सभी तैयारियों में

और यह न जाने कहाँ खो गया। उसको स्मृति उसे कई साल पीछे ले आई.. जब मात्र 12-13 साल की थी। शहर में एक पेड़ के नीचे बैठा रहता। आने-जाने वालों के सामने हाथ फैलाकर भीख मांगता। शाम तक इतना हो जाता कि उसका व उसकी मां का पेट फूल जाता। एक दिन वहां से एक साहब गुजरे। वे शहर में नए आए थे। अपने ऑफिस पैदल हो जाते थे। वह दौड़ कर उनके पास गया। हाथ जोड़कर नमस्ते करके हाथ फैला दिया। उसे कुछ ज्यादा ही उम्मीद थी कि साहब है, तो बीस का नोट तो हाथ में आएगा ही। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्टे उनके भाव से साफ जाहिर हुआ कि उसका इस तरह से हाथ फैलाना उन्हें बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। फिर भी पांच का सिक्का हथेली पर रख दिया।

एक-दो दिन तो इस तरह रोज मांगते रहने पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। दो पांच रुपए हाथ में रख दिया करते. पर उनके मिजाज से लगता था कि उन्हें भिखमंगों से नफरत है। एक दिन उन्हें गुस्सा आ हो गया। बुरी तरह से डांट दिया। कहने लगे 'शर्म नहीं आती भीख मांगते हुए अच्छे-भले सेहतमंद हो, मेहनत करके खाओ। तुम्हारी तरह सभी भीख मांगने लग जाए तो देश में कमाएगा कौन? हमारे देश के जितने भी भीख मांगने वाले हैं अगर मेहनत करने लग जाएं तो हमारी अर्थव्यवस्था को काफी गति मिल सकती है। साहब के चेहरे पर गुस्से को भापकर वह चुपचाप गर्दन नीची कर पेड़ की तरफ लौट गया।

अब साहब उसे रुपया नहीं देते। वह दौड़ कर उनके पास भी नहीं जाता। बस पेड़ की छाया में बैठा रहता। साहब भी तिरछी नजरों से घूरते हुए तेजी से निकल जाते। एक दिन साहब खुद उसके पास आए। पास बैठे और हालचाल पूछा। उसे लगा आज साहब मूड में हैं, उसे बीस-पचास का नोट दे देंगे, पर ऐसा नहीं हुआ। वे पैसों की जगह एक पैकेट देकर कहने लगे- 'आज मैं तेरे लिए एक उपहार लाया हूँ।' फिर पैकेट खोला, उसमें से निकली वजन तौलने वाली मशीन देते हुए बोले- 'आज से तुम्हें भीख मांगने की जरूरत नहीं। ये मशीन सामने रख देना। लोग अपने आप तुलेंगे और तुझे पांच रुपए देकर जाएंगे। इससे तुझे किसी के सामने हाथ भी फैलाना नहीं पड़ेगा। तुम अपने मेहनत की खाओगे।' कहकर उन्होंने गाल पर हल्की सी थपकी दी और चले गए। उसकी आंखें भर आई।

अब वे हमेशा उसके पास खुद रुकते। उसका हालचाल पूछते उसकी दिन भर की कमाई का पूछते। कभी-कभी हंस कर मजाक में कहते- 'पैसों की बचत करके रखना, तेरी शादी जो करनी है।'

धीरे-धीरे पैसों की भी बचत होने लगी। इस बीच उसने छोटीसी  दुकान भी खोल ली। दुकान चल निकली तो धंधे का विस्तार कर लिया। आज भरा पूरा परिवार, पैसा, गाड़ी अच्छे दोस्त सब कुछ है। किसी चीज की कमी नहीं है। पर साहब जाने कहां होंगे। उनका तो कुछ हो महीनों बाद तबादला हो गया था।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️नोट:- आप भी वर्तमान में किसी भूले भटकते व्यक्ति विशेष को इस प्रकार उसे संस्कारित करके अपना व अन्य किसी का कल्याण अवश्य ही करें।*
...........................
''हैप्पी बर्थडे टू यू' गाने के साथ उसका ध्यान टूटा। उसने मोमबत्तियां बुझाई। सब ने उपहार भेंट किए, पर उसे वह उपहार याद आ रहा था, जिसने उसकी जिंदगी को बदल दिया था। उसी उपहार ने उसे इस मक़ाम तक पहुंचाया। न जाने कहां होंगे वे साहब पर जहां भी होंगे सैंकड़ों को नई राह दिखा रहे होंगे। अपने साहब को याद करते हुए उसकी आंखें नम हो आई।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

शनिवार, 27 नवंबर 2021

मानवता

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒मानव धर्म की सच्चाई*

!! जीवन की मुस्कान !!*

एक फटी धोती और फटी कमीज पहने एक व्यक्ति अपनी 15-16 साल की बेटी के साथ एक बड़े होटल में पहुंचा। उन दोंनो को कुर्सी पर बैठा देख एक वेटर ने उनके सामने दो गिलास साफ ठंडे पानी के रख दिए और पूछा- आपके लिए क्या लाना है? 

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

उस व्यक्ति ने कहा- "मैंने मेरी बेटी को वादा किया था कि यदि तुम कक्षा दस में जिले में प्रथम आओगी तो मैं तुम्हें शहर के सबसे बड़े होटल में एक डोसा खिलाऊंगा। इसने वादा पूरा कर दिया। कृपया इसके लिए एक डोसा ले आओ।" वेटर ने पूछा- "आपके लिए क्या लाना है?" उसने कहा- "मेरे पास एक ही डोसे का पैसा है।" पूरी बात सुनकर वेटर मालिक के पास गया और पूरी कहानी बता कर कहा- "मैं इन दोनों को भर पेट नास्ता कराना चाहता हूँ। अभी मेरे पास पैसे नहीं है, इसलिए इनके बिल की रकम आप मेरी सैलेरी से काट लेना।" मालिक ने कहा- "आज हम होटल की तरफ से इस होनहार बेटी की सफलता की पार्टी देंगे।" 

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कुछ संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से फल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक फल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार संस्था के नंबर पर व्हाट्सएप करते हुए अवश्य ही भेजे।संस्था का एकमात्र उद्देश्य यह है कि इस भव मे आपसभी के रत्नत्रय मे दिन दुगुनी रात चौगुनी वृद्धि हो ओर समाधि मरण हो।*

होटल वालों ने एक टेबल को अच्छी तरह से सजाया और बहुत ही शानदार ढंग से सभी उपस्थित ग्राहकों के साथ उस गरीब बच्ची की सफलता का जश्न मनाया। मालिक ने उन्हें एक बड़े थैले में तीन डोसे और पूरे मोहल्ले में बांटने के लिए मिठाई उपहार स्वरूप पैक करके दे दी। इतना सम्मान पाकर आंखों में खुशी के आंसू लिए वे अपने घर चले गए।      
*🕉️👨‍👩‍👧‍👦✍️☸️🌞निवेदन :- आप यह कहानी परिवार के सदस्यों,मित्रों व अन्य किसी को भेजकर किसी के लिए आप प्रेरणा स्त्रोत बन सकते है।*
समय बीतता गया और एक दिन वही लड़की I.A.S. की परीक्षा पास कर उसी शहर में कलेक्टर बनकर आई।उसने सबसे पहले उसी होटल में एक सिपाही भेज कर कहलाया कि कलेक्टर साहिबा नास्ता करने आयेंगी। होटल मालिक ने तुरन्त एक टेबल को अच्छी तरह से सजा दिया।यह खबर सुनते ही पूरा होटल ग्राहकों से भर गया।

कलेक्टर रूपी वही लड़की होटल में मुस्कुराती हुई अपने माता-पिता के साथ पहुंची। सभी उसके सम्मान में खड़े हो गए। होटल के मालिक ने उन्हें गुलदस्ता भेंट किया और ऑर्डर के लिए निवेदन किया। उस लड़की ने खड़े होकर होटल मालिक और उस वेटर के आगे नतमस्तक होकर कहा- "शायद आप दोनों ने मुझे पहचाना नहीं। मैं वही लड़की हूँ जिसके पिता के पास दूसरा डोसा लेने के पैसे नहीं थे और आप दोनों ने मानवता की सच्ची मिसाल पेश करते हुए मेरे पास होने की खुशी में एक शानदार पार्टी दी थी और मेरे पूरे मोहल्ले के लिए भी मिठाई पैक करके दी थी। आज मैं आप दोनों की बदौलत ही कलेक्टर बनी हूँ। आप दोनों का एहसान मैं सदैव याद रखूंगी। आज यह पार्टी मेरी तरफ से है और उपस्थित सभी ग्राहकों एवं पूरे होटल स्टाफ का बिल मैं दूंगी। कल आप दोनों को "" श्रेष्ठ नागरिक "" का सम्मान एक नागरिक मंच पर किया जायेगा।  

*शिक्षा:-*
*किसी भी गरीब की गरीबी का मजाक बनाने के बजाय उसकी प्रतिभा का उचित सम्मान करें। संभव है आपके कारण कोई गुदड़ी का लाल अपनी मंजिल तक पहुंच जाए।*
     
*अपने दोस्तों और रिश्तेदार तक जरूर शेयर करना*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
********************************

शुक्रवार, 26 नवंबर 2021

मां की ममता

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒माँ की ममता*

*मानव और दानव में अंतर:-*
▶️✍️तीन दिन से भूखे थे शेर दम्पत्ति, मिल नही पाया था जंगल में कोई शिकार, घने पेड़ की छांव में अधलेटे राजा-रानी, नजर पड़ी एक जीव पर मिल गया आहार!

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

शेरनी ने मुँह उठाकर सूंघा उसकी गंध वाली दिशा में दौड़ पड़ी लगाकर पूरा जोर, गाय का नवजात बच्चा था अकेला खड़ा, मौत आती देखकर माँ-माँ चिल्लाया पुरजोर, शेरनी भी तेजी से दौड़ी आगे-आगे बच्चा अपनी कोशिश भर उसने भी भरी कुलांचें, नवजात शिशु भी अपनी माँ को रहा पुकार, थोड़ी देर में ही फूल गई उस अबोध की आंतें!

अचानक दोनों के बीच हुआ ह्रदय परिवर्तन, बच्चा स्वयं शेरनी को माँ-माँ कहकर पुकारा, अपनी माँ समझकर मांग रहा था दूध, ढूंढ रहा था स्तन पीने दूध बेचारा!

अपने मुँह से शेरनी पर कर रहा था प्रहार, माँ की ममता जीत गई हार गए पकवान, शेरनी ने भी त्याग दिया मारने का विचार, माँ शब्द की वेदना न समझ सका इन्सान?

ऐसा करिश्मा न देखा न सुना, तीन दिन की भूखी शेरनी छोड़ दिया आहार, खेलने लगी उसके साथ पशु प्रेम का खेल, अचानक देने लगी उसे अपने बच्चे सा प्यार,

ढूँढते-ढूँढते शेर पहुंचा शेरनी के पास, भूखी अतड़ियों में खुशी की लहर दौड़ी, झपट्टा मारकर बच्चे की तरफ दौड़ा शेर, मुँह में बच्चा दबाकर शेरनी गर्दन मोड़ी!

शेर को धमकाते हुए शेरनी गुर्राई, ये भी है किसी दुखियारी माँ का लाल, इसके मर जाने से इसकी माँ कितना रोएगी, कभी -कभी पशु भी दिखलाते मानवता बेमिसाल!

जंगल का राजा भी हो गया चुपचाप, ममतमामयी शेरनी अपने स्वामी से लड़ गई, तीन दिन की भूखी प्यासी ये प्रेमी जोड़ी, पापी पेट हार गया माँ की ममता जीत गई!

भूखी शेरनी का भी दिल पसीज गया, हम तो पढ़े-लिखे मानव कहलाते, माँ-माँ शब्द की आवाज से ही, कई   बच्चे क्यों दानव बन जाते!😳 
अदभुत, अविस्मरणीय प्रसंग....!

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

गुरुवार, 25 नवंबर 2021

क्रोध को जीतने का उपाय

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒क्रोध को जीतने का उपाय*

एक संत भिक्षा में मिले अन्न से अपना जीवत चला रहे थे। वे रोज अलग-अलग गांवों में जाकर भिक्षा मांगते थे। एक दिन वे गांव के बड़े सेठ के यहां भिक्षा मांगने पहुंचे। सेठ ने संत को थोड़ा अनाज दिया और बोला कि गुरुजी मैं एक प्रश्न पूछना चाहता हूं। 

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

संत ने सेठ से अनाज लिया और कहा कि ठीक है पूछो। सेठ ने कहा कि मैं ये जानना चाहता हूं कि लोग लड़ाई-झगड़ा क्यों करते हैं? संत कुछ देर चुप रहे और फिर बोले कि  मैं यहां भिक्षा लेने आया हूं, तुम्हारे मूर्खतापूर्ण सवालों के जवाब देने नहीं आया। 

ये बात सुनते ही सेठ एकदम क्रोधित हो गया। उसने खुद से नियंत्रण खो दिया और बोला कि तू कैसा संत है, मैंने दान दिया और तू मुझे ऐसा बोल रहा है। सेठ ने गुस्से में संत को खूब बातें सुनाई। संत चुपचाप सुन रहे थे। उन्होंने एक भी बार पलटकर जवाब नहीं दिया। 

कुछ देर बाद सेठ का गुस्सा शांत हो गया, तब संत ने उससे कहा कि भाई जैसे ही मैंने तुम्हें कुछ बुरी बातें बोलीं, तुम्हें गुस्सा आ गया। गुस्से में तुम मुझ पर चिल्लाने लगे। अगर इसी समय पर मैं भी क्रोधित हो जाता तो हमारे बीच बड़ा झगड़ा हो जाता।

*शिक्षा:-*
क्रोध ही हर झगड़े का मूल कारण है और शांति हर विवाद को खत्म कर सकती है। अगर हम क्रोध ही नहीं करेंगे तो कभी भी वाद-विवाद नहीं होगा। जीवन में सुख-शांति चाहते हैं तो क्रोध को नियंत्रित करना चाहिए। क्रोध को काबू करने के लिए रोज ध्यान करें..!!

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

बुधवार, 24 नवंबर 2021

कर्मो का फैसला

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒कर्मो का फैसला💐💐*


 एक साधु वर्षा के जल में प्रेम और मस्ती से भरा चला जा रहा था... कि इस साधु ने एक मिठाई की दुकान को देखा जहां एक कढ़ाई में गरम दूध उबला जा रहा था तो मौसम के हिसाब से दूसरी कढ़ाई में गरमा गरम जलेबियां तैयार हो रही थी।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

 साधु कुछ क्षणों के लिए वहाँ रुक गया..... शायद भूख का एहसास हो रहा था या मौसम का असर था.... साधु हलवाई की भट्ठी को बड़े गौर से देखने लगा साधु कुछ खाना चाहता था लेकिन साधु की जेब ही नहीं थी तो पैसे भला कहां से होते....

 साधु कुछ पल भट्ठी से हाथ सेंकने के बाद चला ही जाना चाहता था..... कि नेक दिल हलवाई से रहा न गया और एक प्याला गरम दूध और कुछ जलेबियां साधु को दें दी...

 साधु ने गरम जलेबियां गरम दूध के साथ खाई और फिर हाथों को ऊपर की ओर उठाकर हलवाई के लिऐ प्रार्थना की..... फिर आगे चल दिया..... साधु बाबा का पेट भर चुका था दुनिया के दु:खों से बेपरवाह वे फिर इक नए जोश से बारिश के गंदले पानी के छींटे उड़ाता चला जा रहा था.......

 वह इस बात से बेखबर था कि एक युवा नव विवाहित जोड़ा भी वर्षा के जल से बचता बचाता उसके पीछे चला आ रहा है ...... एक बार इस मस्त साधु ने बारिश के गंदले पानी में जोर से लात मारी..... बारिश का पानी उड़ता हुआ सीधा पीछे आने वाली युवती के कपड़ों को भिगो गया उस औरत के कीमती कपड़े कीचड़ से लथपथ हो गये.....

 उसके युवा पति से यह बात बर्दाश्त नहीं हुई..... इसलिए वह आस्तीन चढ़ाकर आगे बढ़ा और साधु को कपड़ों से पकड़ कर कहने लगा अंधा है...... तुमको नज़र नहीं आता तेरी हरकत की वजह से मेरी पत्नी के कपड़े गीले हो गये  हैं और कीचड़ से भर गये  हैं.....

 साधु हक्का-बक्का सा खड़ा था.... जबकि इस युवा को साधु का चुप रहना नाखुशगवार गुजर रहा था..... महिला ने आगे बढ़कर युवा के हाथों से साधु को छुड़ाना भी चाहा.... लेकिन युवा की आंखों से निकलती नफरत की चिंगारी देख वह भी फिर पीछे खिसकने पर मजबूर हो गई.....

 राह चलते राहगीर भी उदासीनता से यह सब दृश्य देख रहे थे लेकिन युवा के गुस्से को देखकर किसी में इतनी हिम्मत नहीं हुई कि उसे रोक पाते और आख़िर जवानी के नशे मे चूर इस युवक ने एक जोरदार थप्पड़ साधु के चेहरे पर जड़ दिया बूढ़ा मलंग थप्पड़ की ताब ना झेलता हुआ.... लड़खड़ाता हुऐ कीचड़ में जा पड़ा.....

 युवक ने जब साधु को नीचे गिरता देखा तो मुस्कुराते हुए वहां से चल दिया.. बूढे साधु ने आकाश की ओर देखा और उसके होठों से निकला वाह मेरे भगवान कभी गरम दूध जलेबियां और कभी गरम थप्पड़....

 लेकिन जो तू चाहे मुझे भी वही पसंद है........यह कहता हुआ वह एक बार फिर अपने रास्ते पर चल दिया.... दूसरी ओर वह युवा जोड़ा अपनी मस्ती को समर्पित अपनी मंजिल की ओर अग्रसर हो गया.....

 थोड़ी ही दूर चलने के बाद वे एक मकान के सामने पहुंचकर रुक गए......वह अपने घर पहुंच गए थे.... वे युवा अपनी जेब से चाबी निकाल कर अपनी पत्नी से हंसी मजाक करते हुए ऊपर घर की सीढ़ियां तय कर रहा था....

*🕉️👨‍👩‍👧‍👦✍️☸️🌞निवेदन :- आप यह कहानी परिवार के सदस्यों,मित्रों व अन्य किसी को भेजकर किसी के लिए आप प्रेरणा स्त्रोत बन सकते है।*
 बारिश के कारण सीढ़ियों पर फिसलन हो गई थी अचानक युवा का पैर फिसल गया और वह सीढ़ियों से नीचे गिरने लगा.... महिला ने बहुत जोर से शोर मचा कर लोगों का ध्यान अपने पति की ओर आकर्षित करने लगी जिसकी वजह से काफी लोग तुरंत सहायता के लिये युवा की ओर लपके.....

 लेकिन देर हो चुकी थी युवक का सिर फट गया था और कुछ ही देर मे ज्यादा खून बह जाने के कारण इस नौजवान युवक की मौत हो चुकी थी कुछ लोगों ने दूर से आते साधु बाबा को देखा तो आपस में कानाफुसी होने लगीं कि निश्चित रूप से इस साधु बाबा ने थप्पड़ खाकर युवा को शाप दिया है....

 अन्यथा ऐसे नौजवान युवक का केवल सीढ़ियों से गिर कर मर जाना बड़े अचम्भे की बात लगती है..... कुछ मनचले युवकों ने यह बात सुनकर साधु बाबा को घेर लिया एक युवा कहने लगा कि आप कैसे भगवान के भक्त हैं जो केवल एक थप्पड़ के कारण युवा को शाप दे बैठे......
 भगवान के भक्त में रोष व गुस्सा हरगिज़ नहीं होता ....आप तो जरा सी असुविधा पर भी धैर्य न कर सके..... साधु बाबा कहने लगा भगवान की क़सम मैंने इस युवा को शाप नहीं दिया....

 अगर आप ने शाप नहीं दिया तो ऐसा नौजवान युवा सीढ़ियों से गिरकर कैसे मर गया ?

 तब साधु बाबा ने दर्शकों से एक अनोखा सवाल किया कि आप में से कोई इस सब घटना का चश्मदीद गवाह मौजूद है ? एक युवक ने आगे बढ़कर कहा..... हाँ मैं इस सब घटना का चश्मदीद गवाह हूँ।

 साधु ने अगला सवाल किया.....मेरे क़दमों से जो कीचड़ उछला था क्या उसने युवा के कपड़े को दागी किया था ? युवा बोला..... नहीं.... लेकिन महिला के कपड़े जरूर खराब हुए थे।

 मलंग ने युवक की बाँहों को थामते हुए पूछा.. फिर युवक ने मुझे क्यों मारा ? युवा कहने लगा...... क्योंकि वह युवा इस महिला का प्रेमी था और यह बर्दाश्त नहीं कर सका कि कोई उसके प्रेमी के कपड़ों को गंदा करे..... इसलिए उस युवक ने आपको मारा....

 युवा की बात सुनकर साधु बाबा ने एक जोरदार ठहाका बुलंद किया और यह कहता हुआ वहाँ से विदा हो गया..... तो भगवान की क़सम मैंने शाप कभी किसी को नहीं दिया लेकिन कोई है जो मुझ से प्रेम रखता है....

 अगर उसका यार सहन नहीं कर सका तो मेरे यार को कैसे बर्दाश्त होगा कि कोई मुझे मारे और... वह इतना शक्तिशाली है कि दुनिया का बड़े से बड़ा राजा भी उसकी लाठी से डरता है ....
 उस परमात्मा की लाठी दिखती नहीं और आवाज भी नही करती लेकिन पडती हैं तो बहुत दर्द देती है।

 *हमारें कर्म ही हमें उसकी लाठ़ी से बचातें हैं बस कर्म अच्छे होने चाहिये.....*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मंगलवार, 23 नवंबर 2021

सच्ची सीख

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒सच्ची सीख*

सरकारी कार्यालय में लंबी लाइन लगी हुई थी । खिड़की पर जो क्लर्क बैठा हुआ था, वह तल्ख़ मिजाज़ का था और सभी से तेज स्वर में बात कर रहा था ।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

उस समय भी एक महिला को डांटते हुए वह कह रहा था, "आपको ज़रा भी पता नहीं चलता, यह फॉर्म भर कर लायीं हैं, कुछ भी सही नहीं । सरकार ने फॉर्म फ्री कर रखा है तो कुछ भी भर दो, जेब का पैसा लगता तो दस लोगों से पूछ कर भरतीं आप ।"

एक व्यक्ति पंक्ति में पीछे खड़ा काफी देर से यह देख रहा था, वह पंक्ति से बाहर निकल कर, पीछे के रास्ते से उस क्लर्क के पास जाकर खड़ा हो गया और वहीँ रखे मटके से पानी का एक गिलास भरकर उस क्लर्क की तरफ बढ़ा दिया ।

क्लर्क ने उस व्यक्ति की तरफ आँखें तरेर कर देखा और गर्दन उचका कर 'क्या है?' का इशारा किया ।

उस व्यक्ति ने कहा, "सर, काफी देर से आप बोल रहे हैं, गला सूख गया होगा, पानी पी लीजिये ।"

क्लर्क ने पानी का गिलास हाथ में ले लिया और उसकी तरफ ऐसे देखा जैसे किसी दूसरे ग्रह के प्राणी को देख लिया हो!

और कहा, "जानते हो, मैं कडुवा सच बोलता हूँ, इसलिए सब नाराज़ रहते हैं, चपरासी तक मुझे पानी नहीं पिलाता!"

वह व्यक्ति मुस्कुरा दिया और फिर पंक्ति में अपने स्थान पर जाकर खड़ा हो गया ।

अब उस क्लर्क का मिजाज बदल चुका था, काफी शांत मन से उसने सभी से बात की और सबको अच्छे से सेवाए देनी शुरू की ।

शाम को उस व्यक्ति के पास एक फ़ोन आया, दूसरी तरफ वही क्लर्क था, उसने कहा, "भाईसाहब, आपका नंबर आपके फॉर्म से लिया था, शुक्रिया अदा करने के लिये फ़ोन किया है ।

मेरी माँ और पत्नी में बिल्कुल नहीं बनती, आज भी जब मैं घर पहुंचा तो दोनों बहस कर रहीं थी, लेकिन आपका गुरुमन्त्र काम आ गया ।"

वह व्यक्ति चौंका, और कहा, "जी? गुरुमंत्र?"

"जी हाँ, मैंने एक गिलास पानी अपनी माँ को दिया और दूसरा अपनी पत्नी को और यह कहा कि गला सूख रहा होगा पानी पी लो । बस तब से हम तीनों हँसते-खेलते बातें कर रहे हैं । अब भाईसाहब, आज खाने पर आप हमारे घर आ जाइये ।"

"जी! लेकिन , खाने पर क्यों?"

क्लर्क ने भर्राये हुए स्वर में उत्तर दिया,

"गुरू माना है तो इतनी दक्षिणा तो बनेगी ना आपकी , और ये भी जानना चाहता हूँ, एक गिलास पानी में इतना जादू है तो खाने में कितना होगा?"

👉दूसरो के क्रोध को प्यार से ही दूर किया जा सकता है । कभी कभी हमारे एक छोटे से प्यार भरे बर्ताव से दूसरे इंसान में बहुत बड़ा परिवर्तन हो जाता है और प्यार भरे रिश्तो की एकाएक शुरूआत होने लगती है जिससे घर और कार्यस्थल पर मन को सुकुन मिलता है ।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
****************************************

सोमवार, 22 नवंबर 2021

पुरषार्थ से

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒पुरषार्थ से सबकुछ संभव*

*"दुखों को बढ़ाना या घटाना, बहुत कुछ आपके अपने हाथ में है।"*

         दुख तो जीवन में आते थे, आते हैं, और जब तक जीवन है, तब तक आते रहेंगे। इन से पूरी तरह बचने का तो केवल एक उपाय है, वह मोक्ष। *"मोक्ष प्राप्त कर लेने पर फिर दुख नहीं आते। क्योंकि मोक्ष में दुख का कारण शरीर नहीं होता। जितने भी दुख आते हैं वे सब शरीर के कारण आते हैं। ऐसा कोई व्यक्ति संसार में आज तक हुआ नहीं, जिसने शरीर धारण किया हो और वह दुख से बच गया हो।"* शास्त्रों में बता रखा है, कि जो भी व्यक्ति शरीर धारण करेगा, उसे कुछ न कुछ दुख तो भोगने ही पड़ेंगे।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

          *"कभी तो हम अपनी मूर्खता से अपने दुख बढ़ा लेते हैं। अनेक बार अन्य मनुष्यों या प्राणियों से भी दुख मिलते रहते हैं। और कभी-कभी प्राकृतिक दुर्घटनाओं से अर्थात आंधी तूफान बाढ़ सूखा आदि से भी दुख आते रहते हैं।"*
        यदि हम बुद्धिमत्ता दूरदर्शिता सभ्यता नम्रता आदि से सारे व्यवहार करें, तो हम बहुत सीमा तक अपनी मूर्खता से होने वाले दुखों से बच सकते हैं । यदि दूसरे मनुष्यों या सांप बिच्छू आदि प्राणियों से सावधान रहें, तो उनके आक्रमण से होने वाले दुखों से भी एक बड़ी सीमा तक हम बच सकते हैं। इसी प्रकार से यदि हम पहले से सावधानी का प्रयोग करें, तो आंधी तूफान बाढ़ सूखा आदि प्राकृतिक दुर्घटनाओं से होने वाले दुखों से भी काफी कुछ बच सकते हैं। *"परंतु हम बच तभी सकते हैं, जब अपने सोचने का ढंग ठीक कर लें। यदि सोचने का ढंग ठीक कर लिया, तो हम अपने सुखों को बढ़ा लेंगे, और दुखों को घटा लेंगे।"*
        सुखों को बढ़ाने तथा  दुखों को घटाने का उपाय इस प्रकार से है। जब भी दुख आए, तो *"सबसे पहली बात - चिंता न करें।"* क्योंकि चिंता करने से समाधान तो कोई निकलता नहीं, बल्कि दुख ही और बढ़ते रहते हैं। इसलिए सबसे पहली सावधानी यह रखें, कि दुख आने पर चिंता न करें।
       *"दूसरी बात - एकांत में बैठ कर उन दुखों या समस्याओं पर गंभीरता से चिंतन मनन करना चाहिए। उससे कोई न कोई समाधान भी निकल आता है।"* ऐसा करने से वे दुख कम हो जाते हैं/ हल्के हो जाते हैं। 
       यदि चिंतन आदि का अपना सामर्थ्य कम हो, तो फिर *"तीसरी बात - अन्य बुद्धिमान मनुष्यों तथा ईश्वर की सहायता लेनी चाहिए। उनसे प्रार्थना करनी चाहिए। तो समाज के बुद्धिमान मनुष्य और ईश्वर भी आप की समस्याओं को दूर कर देंगे।"* इसके लिए समाज के बुद्धिमान लोगों से सलाह लेवें। एकांत में बैठकर ईश्वर का ध्यान करें। आपकी समस्या का कोई न कोई समाधान निकल आएगा। 
         *"संसार में ऐसा कोई ताला आज तक नहीं बना, जिसकी कोई चाबी न हो।"* प्रत्येक ताले की कोई न कोई चाबी होती ही है। इसी प्रकार से सभी समस्याओं का कोई न कोई समाधान अवश्य होता है। लोग उस समाधान को ढूंढने का परिश्रम नहीं करते। इसलिए समाधान मिलता नहीं। *"यदि समाधान ढूंढने का परिश्रम किया जाए। अन्य लोगों की सहायता ली जाए, ईश्वर की भी सहायता ली जाए, तो निश्चित रूप से कोई न कोई समाधान निकल ही आएगा। जिससे आपके दुख समाप्त हो जाएंगे, और आप सुख शांति से अपना जीवन जी सकेंगे।"*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
********************************

रविवार, 21 नवंबर 2021

लालच का फल

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒लालच का फल*

*💪सैनिकों का चुनाव*
एक बार एक बुढ्ढा आदमी तीन गठरी उठा कर पहाड़ की चोटी की ओर बढ़ रहा था. रास्ते में उसके पास से एक हष्ट - पुष्ट नौजवान निकाला. बुढ्ढे आदमी ने उसे आवाज लगाई की बेटा क्या तुम मेरी एक गठरी अगली पहाड़ी तक उठा सकते हो ? मैं उसके बदले इस में रखी हुई पांच तांबे के सिक्के तुम को दूंगा. लड़का इसके लिए सहमत हो गया।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

निश्चित स्थान पर पहुँचने के बाद लड़का उस बुढ्ढे आदमी का इंतज़ार करने लगा और बुढ्ढे आदमी ने उसे पांच सिक्के दे दिए. बुढ्ढे आदमी ने अब उस नौजवान को एक और प्रस्ताव दिया कि अगर तुम अगली पहाड़ी तक मेरी एक और गठरी उठा लो तो मैं उसमें रखी चांदी के पांच सिक्के और पांच पहली गठरी में रखे तांबे के पांच सिक्के तुम को और दूंगा।

 नौजवान ने सहर्ष प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और पहाड़ी पर निर्धारित स्थान पर पहुँच कर इंतजार करने लगा. बुढ्ढे आदमी को पहुँचते - पहुँचते बहुत समय लग गया। 

जैसे निश्चित हुआ था उस हिसाब से बुजुर्ग ने सिक्के नौजवान को दे दिये. आगे का रास्ता ओर भी कठिन था.
बुजुर्ग व्यक्ति बोला कि आगे पहाड़ी और भी दुर्गम है. अगर तुम मेरी तीसरी सोने के मोहरों की गठरी भी उठा लो तो मैं तुम को उसके बदले पांच तांबे की मोहरे, पांच चांदी की मोहरे और पांच सोने की मोहरे दूंगा. नौजवान ने खुशी - खुशी हामी भर दी।

निर्धारित पहाड़ी पर पहुँचने से पहले नौजवान के मन में लालच आ गया कि क्यों ना मैं तीनों गठरी लेकर भाग जाऊँ। गठरियों का मालिक तो कितना बुजुर्ग है. वह आसानी से मेरे तक नहीं पहुंच पाएगा. अपने मन में आए लालच की वजह से उसने रास्ता बदल लिया।

कुछ आगे जाकर नौजवान के मन में सोने के सिक्के देखने की जिज्ञासा हुई. उसने जब गठरी खोली उसे देख कर दंग रह गया क्योंकि सारे सिक्के नकली थे।

उस गठरी में एक पत्र निकला. उसमें लिखा था कि जिस बुजुर्ग व्यक्ति की तुमने गठरी चोरी की है, वह जहाँ का राजा है. राजा जी भेष बदल कर अपने कोषागार के लिए ईमानदार सैनिकों का चयन कर रहे हैं। 

अगर तुम्हारे मन में लालच ना आता तो सैनिक के रूप में आज तुम्हारी भर्ती पक्की थी. जिसके बदले तुम को रहने को घर और अच्छा वेतन मिलता. लेकिन अब तुम को कारावास होगा क्योंकि तुम राजा जी का सामान चोरी कर के भागे हो. यह मत सोचना कि तुम बच जाओगे क्योंकि सैनिक लगातार तुम पर नज़र रख रहे हैं।

अब नौजवान अपना माथा पकड़ कर बैठ गया. कुछ ही समय में राजा के सैनिकों आकर उसे पकड़ लिया. उसके लालच के कारण उसका भविष्य जो उज्जवल हो सकता था, वह अंधकारमय हो चुका था. इसलिए कहते हैं लालच बुरी भला है।

*शिक्षा:-*
ज्यादा पाने की लालसा के कारण व्यक्ति लालच में आ जाता है और उसे जो बेहतरीन मिला होता है उसे भी वह खो देता है। 

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
****************************************

शनिवार, 20 नवंबर 2021

बुध्दिमान

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒बुद्धिमान कौन*

एक गाँव में एक व्यापारी रहता था, उसकी ख्याति दूर दूर तक फैली थी। 
.
*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कुछ संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से फल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक फल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार संस्था के नंबर पर व्हाट्सएप करते हुए अवश्य ही भेजे।संस्था का एकमात्र उद्देश्य यह है कि इस भव मे आपसभी के रत्नत्रय मे दिन दुगुनी रात चौगुनी वृद्धि हो ओर समाधि मरण हो।*

एक बार वहाँ के राजा ने उसे चर्चा पर बुलाया। काफी देर चर्चा के बाद राजा ने कहा – 

“महाशय, आप बहुत बड़े सेठ है, इतना बड़ा कारोबार है पर आपका लड़का इतना मूर्ख क्यों है ? उसे भी कुछ सिखायें। 

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

उसे तो सोने चांदी में मूल्यवान क्या है यह भी नहीं पता॥” यह कहकर राजा जोर से हंस पड़ा.. 
व्यापारी को बुरा लगा, वह घर गया व लड़के से पूछा “सोना व चांदी में अधिक मूल्यवान क्या है ?” 

“सोना”, बिना एक पल भी गंवाए उसके लड़के ने कहा।

“तुम्हारा उत्तर तो ठीक है, फिर राजा ने ऐसा क्यूं कहा-? सभी के बीच मेरी खिल्ली भी उड़ाई।” 

लड़के के समझ मे आ गया, वह बोला “राजा गाँव के पास एक खुला दरबार लगाते हैं, 

जिसमें सभी प्रतिष्ठित व्यक्ति  शामिल होते हैं। यह दरबार मेरे स्कूल जाने के मार्ग मे ही पड़ता है। 

मुझे देखते ही बुलवा लेते हैं, अपने एक हाथ में सोने का व दूसरे में चांदी का सिक्का रखकर, जो अधिक मूल्यवान है वह ले लेने को कहते हैं...
और मैं चांदी का सिक्का ले लेता हूं। सभी ठहाका लगाकर हंसते हैं व मज़ा लेते हैं। ऐसा तक़रीबन हर दूसरे दिन होता है।” 

“फिर तुम सोने का सिक्का क्यों नहीं उठाते, चार लोगों के बीच अपनी फजिहत कराते हो व साथ मे मेरी भी❓”

लड़का हंसा व हाथ पकड़कर पिता को अंदर ले गया और कपाट से एक पेटी निकालकर दिखाई जो चांदी के सिक्कों से भरी हुई थी। 

यह देख व्यापारी हतप्रभ रह गया। 

लड़का बोला “जिस दिन मैंने सोने का सिक्का उठा लिया उस दिन से यह खेल बंद हो जाएगा। 

वो मुझे मूर्ख समझकर मज़ा लेते हैं तो लेने दें, यदि मैं बुद्धिमानी दिखाउंगा तो कुछ नहीं मिलेगा।”

बनिये का बेटा हुं अक़्ल से काम लेता हूँ 

मूर्ख होना अलग बात है व समझा जाना अलग.. स्वर्णिम मॊके का फायदा उठाने से बेहतर है, हर मॊके को स्वर्ण में तब्दील करना। 

जैसे समुद्र सबके लिए समान होता है, कुछ लोग पानी के अंदर टहलकर आ जाते हैं, कुछ मछलियाँ ढूंढ पकड़ लाते हैं .. व कुछ मोती चुन कर आते हैं।
*🤴राजा का यह संकल्प था कि जिस दिन यह बालक सोने को लालच वश ले लेगा उसीदिन से इसे सिक्का मिलना बंद हो जायेगा।*
*🌞✍️▶️🕉️शिक्षा : - वर्तमान समय में सभी जीव पांच इंद्रियों के विषयों में फसकर यह जीवन बर्बाद कर रहें  है।अतः हमें अपनी मंजिल मोक्ष को प्राप्त करने के लिए भी कुछ शास्त्रोक्त आचरण करते हुए यह जीवन सफल करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

****************************************

शुक्रवार, 19 नवंबर 2021

पुण्यकर्म से

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒पिछले भव के पुण्य से देवी-देवताओं का सहयोग*

गोलू अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। गोलू की मां लोगों के घर काम करती थी। उसका पिता दिहाड़ी मजदूर का काम करता था।

गोलू के माता पिता गोलू को बहुत प्यार करते थे। वह कम ही कमाते पर गोलू की हर इच्छा को पूरा करते थे। सबसे पहले जो भी चीज आती गोलू का उस पर सबसे पहले अधिकार होता।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

एक दिन गोलू की मां जिस घर में बहुत सालों से काम करती थी उस घर की मालकिन अब बहुत बूढी हो चुकी थी। उसका बेटा बहू विदेश में रहते थे। गोलू की मां उसके घर का सारा काम करती थी।

 उसकी मालकिन के घर युगल सरकार की सेवा थी। अधिक बूढ़ी होने के कारण अब उसकी मालकिन युगल सरकार की सेवा नहीं कर पाती थी तो एक दिन उसने गोलू की मां को पूछा कि, क्या तुम मेरे इस युगल सरकार की सेवा को स्वीकार करोगी?

गोलू की मां जो कि काफी सालों से उसके घर काम कर रही थी और वह अपनी मालकिन को युगल सरकार की सेवा करते हुए देखती थी तो उसकी भी पूरी श्रद्धा  युगल सरकार के प्रति थी।

उसने जल्दी जल्दी से बोला - हां मां जी! क्यों नहीं? यह तो मेरा सौभाग्य होगा जो ठाकुर जी और किशोरी जी की सेवा मुझे प्राप्त होगी। मैं तो धन्य हो उंठूगी।

मालकिन ने कहा कि सोच लो इनकी सेवा बहुत कठिन है। इनको भोग लगाना, स्नान कराना नए-नए वस्त्र पहनाना क्या तुम कर लोगी?

 उसने कहा -  हां हां मांजी! क्यों नहीं? मुझे स्वीकार है। आप मुझे सेवा दे सकते हैं।

मालकिन ठाकुर जी और किशोरी जी को बहुत प्यार करती थी लेकिन वह उनकी सेवा ना कर पाने के कारण लाचार थी तो बड़ी मजबूरी में उसने भरी आंखों से किशोरी जी और ठाकुर जी को गोलू की मां की झोली में डाल दिया और कहा - आज से इनकी सेवा तुम्हारा जिम्मा!

यह मेरे घर का सबसे बड़ा खजाना है। आज से यह खजाना तुम्हारा हुआ।

गोलू की मां खुशी से झूमने लगी और घर आकर उसने एक साफ चौंकी पर कपड़ा बिछाकर युगल सरकार को स्थापित किया तभी बाहर से गोलू भागा भागा अंदर आया और मां से पूछता है कि, मां यह कौन है? क्या यह हमारे घर मेहमान आए हैं?

उसकी मां बोली - बेटा! यह मेहमान नहीं, यह हमारे घर के मालिक हैं। यह हमारे ईश्वर हैं। आज से यह हमारे घर ही रहेंगे।

गोलू हैरान होकर ठाकुर जी और किशोरी जी की  ओर तिरछी नजरों से देखने लगा कि यह ईश्वर कैसे हो सकते हैं? यह घर के मालिक कैसे हो सकते हैं? वह बोला कुछ नहीं और चुपचाप अंदर चला गया।
अब तो घर में जब भी कोई नई चीज बनती चाहे हलवा हो, चाहे कचोरी हो, चाहे खीर हो तो सबसे पहले ठाकुर जी और किशोरी जी को भोग लगता! पहले यह सब चीजें  गोलू को सबसे पहले मिलती थीं। अब ठाकुर जी को भोग लगता था तो गोलू बहुत चिढ़ता!

मां को कहता कि, यह क्या बात हुई? यह तो अब थोड़े दिनों पहले ही आए हैं और आप इनका इतना ध्यान रखती हो! मैं जो कि तेरा बेटा हूं, मुझे इनके बाद चीजें क्यों मिलती हैं?

मां हंसकर बोली - बेटा! यह हमारे भगवान हैं।भगवान को भोग लगाकर ही हम खाते हैं लेकिन गोलू को इन बातों से कोई मतलब नहीं था वह तो अब युगल सरकार से चिढ़ने लगा।

आते जाते उनको घूर कर जाता और मुंह में बड़बड़ करता जाता। जब से आए हैं तब से मुझे तो कोई पूछता ही नहीं है तो ठाकुर जी की प्रतिमा और किशोरी जी की प्रतिमा मंद-मंद मुस्कुराती रहती और गोलू और चिढ़ जाता कि यह मुझे चिढ़ाने के लिए हंस रहे हैं।

एक दिन गोलू की मां काम पर जाने लगी और गोलू को कहती कि गोलू! यमुना जी से मटके में जल भरकर लाना आज मैं थोड़ा देर से आऊंगी।
 
गोलू कुछ ना बोला। जब वह पानी भरने के लिए जाने लगा तो जाते-जाते किशोरी जी ठाकुर जी को कहता खाने के लिए तो सबसे पहले तैयार रहते हो लेकिन काम तो मुझे ही करना पड़ता है। काम करने के बावजूद भी मुझे तो आपसे बाद में खाना मिलता है। अगर यहां रहना है तो काम करो। कह  कर वह यमुना जी से जल भरने के लिए चल पड़ा।

जब यमुना जी में जल भरने लगा तो तभी उसे आवाज आई - ला गोलू! घडा मुझे दो। मैं भर देता हूं तो गोलू ने इधर-उधर देखा कि वहां कोई नहीं था,

फिर वही आवाज आई तो गोलू ने देखा यमुना जी के अंदर ठाकुर जी और किशोरी जी विराजमान है और दोनों बाजू ऊपर उठाकर कह रहे हैं  ला गोलू! घडा हम भर देते हैं।

गोलू उन दोनों को देखकर एकदम से हैरान हो गया तो बोला - नहीं नहीं! मैं अपने आप भर लूंगा लेकिन ठाकुर जी ने उसके हाथ से घड़ा ले लिया और भरकर उसके पीछे पीछे घर ले आए।

गोलू तो एकदम से हक्का-बक्का हो गया था। उसको कुछ नहीं सूझ रहा था। वह घर आकर चुपचाप एक कोने में बैठ गया और डर रहा था कि अगर मां को पता लगा कि मैंने ठाकुर जी और किशोरी जी से काम करवाया है तो आज तो मेरी पक्की पिटाई  होगी।

जब उसकी मां घर आई तो उनके आते ही गोलू बोला - मां मैंने नहीं कहा था इनको पानी भरने के लिए, यह खुद ही आ गए थे मेरे पीछे पीछे!

अब देखो गीले कपड़ों में बैठे हुए हैं तो गोलू की मां ने जब किशोरी जी और ठाकुर जी को गीले कपड़ों में देखा तो एकदम से हैरान हो गई और कहने लगी कि, यह जरूर तेरी शरारत है।

 तूने जरूर इन पर जल डाला है और अब बातें बना रहा है।

गोलू ने अपनी मां को समझाने का बहुत प्रयास किया लेकिन मां ने उसको डांट कर चुप करा दिया और ठाकुर जी के वस्त्र को बदलने लगी।

अब तो गोलू को युगल सरकार पर और गुस्सा आया। इनके कारण मुझे डांट पड़ी है मैंने तो  इनको नही बोला था काम करने के लिए!

अगले दिन मां फिर काम पर गई और गोलू को बोली - गोलू! तेरे बाबा कुछ काम से बाहर गए हैं और घर में अनाज नहीं है तो कुछ अनाज लेकर चक्की से पिसवा लाना तब तक मैं लोगों के घर का काम करके आती हूं

गोलू ने हामी भर दी। गोलू ने अनाज का कनस्तर धीरे से उठाया कि कहीं फिर ना युगल सरकार मेरे पीछे आ जाएँ और दबे पाँव घर से बाहर निकल गया लेकिन यह क्या ठाकुर जी और  किशोरी जी तो वहां पहले से ही खड़े थे और गोलू के हाथ से कनस्तर लेकर अनाज पिसवा कर घर ले आए।

घर आकर गोलू का डर के मारे फिर बुरा हाल था कि अगर मां को पता चल गया आज उन्होंने फिर काम किया है तो मां फिर मुझे डांट लगाएगी। वह चुपचाप दरवाजे की ओट में छिप गया।

जब मां आई तो उसने ठाकुर जी और किशोरी जी के वस्त्र ऊपर सूखा आटा पड़ा देखा तो वह गोलू-गोलू कह कर चिल्लाने लगी कि तुझे पता नहीं कि यह हमारे भगवान है और तू भगवान के साथ शरारत करता है।

आज तूने फिर इनके ऊपर आटा फैंका है तो गोलू शपथ लेकर कहने लगा - नहीं मां!

 यह तो मेरे हाथ से गेहूं का कनस्तर लेकर खुद पिसवा कर आए हैं।

 तो गोलू की मां आज बहुत गुस्सा हुई और बोली तू तो जानबूझकर किशोरी जी और ठाकुर जी पर इल्जाम लगा रहे हो। वह तो हमारे भगवान हैं।

 आज तुझे खाना नहीं मिलेगा। आज तुम्हारी यही सजा है।

गोलू मन ही मन ठाकुर जी और किशोरी जी पर गुस्सा करता हुआ अंदर कमरे में जाकर चुपचाप बैठ गया।

जब उसकी मां का थोड़ा गुस्सा शांत हुआ तो उसने आकर गोलू को बड़े प्यार से समझाया कि ऐसे हमें अपने भगवान को नहीं सताना चाहिए तो गोलू आंखों में आंसू भरकर रह गया लेकिन बोला कुछ नहीं।

अगले दिन फिर उसकी मां बोली - बेटा! आज तुम्हारे बाबा ने आ जाना है। बस आज का ही काम है। तुम जंगल से थोड़ी लकड़ियाँ ले आओ ताकि मैं आकर भोजन बना सकूं!

 अगर मैं लेने गई तो काफी समय लग जाएगा। बस आज का ही काम कर दो।

गोलू फिर डर गया। कहीं ठाकुर जी और किशोरी जी फिर मेरे पीछे ना आ जाएँ।

 गोलू ने मां को बोला कि, मैं चला तो जाऊंगा लेकिन अपनी युगल सरकार को समझा लो वह मेरे पीछे ना आएँ।

उसकी मां हंसकर बोली - हां-हां! समझा दूंगी। तुम जाओ तो सही। 

गोलू जल्दी-जल्दी लकड़ियां लेने जंगल में चला गया तो उसकी मां काम पर चली गई लेकिन उसकी मां काम से जल्दी वापस आ गई।

 जब घर वापस आई तो उसने देखा युगल सरकार अपनी चौकी पर विराजमान नहीं है वह तो एकदम से घबरा गई कि कहीं गोलू की शरारत तो नहीं कहीं युगल सरकार को कहीं रख तो नहीं आया।

  वह भागी भागी जंगल की तरफ गई तभी उसने देखा कि गोलू के साथ दो लोग और लकड़ियों को लेकर घर आ रहे हैं।

गोलू की मां यह देखकर हैरान हो गई कि यह तो किशोरी जी और ठाकुर जी हैं। वह तो एकदम से हैरान परेशान होकर मूर्छित होते होते बची। यह क्या हमारे भगवान हमारा काम कर रहे हैं? इसका अर्थ गोलू ठीक कह रहा था।

वह जल्दी-जल्दी भागकर ठाकुर जी और किशोरी जी के पास गई और लकड़ियाँ उनके हाथ से लेते हुए उनके चरणों में गिर कर रोती हुई बोली - हे भगवान!

हे लाडली जी सरकार!

यह आप क्या कर रहे हो? मुझ गरीब का काम क्यों कर रहे हो?

ठाकुर जी और किशोरी जी मुस्कुराते हुए बोले - हमे तो तेरे बेटे पर बहुत प्यार आता है। सब लोग हमें भगवान समझते हैं लेकिन एक तेरा बेटा ही था जो हम को अपना मानता था।

अपना मान कर वो हमें डांट भी देता था। हमारे साथ गुस्सा भी करता था। वह हमारे साथ ऐसा व्यवहार करता था कि जैसे हम उसके अपने हैं।

 शेष लोग तो हमें भगवान मानकर हमारी पूजा करते हैं और हमें जो एक बार अपना मान लेता है तो हम उसके मान के लिए उसके ही हो जाते हैं।

 तुम्हारा बेटा गोलू बहुत ही भोला है और उसके मन में कोई पाप नहीं इसलिए हमें गोलू के साथ काम करने में कोई लज्जा नहीं!

गोलू उनकी बातें सुन रहा था।

वह आकर अपनी मां के पास साथ बैठ गया और हाथ जोड़कर ठाकुर जी से प्रार्थना करने लगा - हे श्यामा श्याम जू! मुझे नहीं पता था कि आप भगवान हो!
*▶️👨‍👩‍👧‍👦✍️🌞🕉️नोट :- जैनदर्शन मे प्रथमानुयोग मे ऐसे अनेक उदाहरण आये है कि जीव ने पिछले भव मे किसी अन्य जीव पर उपकार किया था, उस उपकार के बदले देवी- देवताओं ने मदत की है।✍️◀️*

 मैंने भूलवश आपको कई बातें सुना दीं। मेरी भूल को क्षमा करदो। 

भगवान ने उसको उठाकर अपने हृदय से लगाते हुए कहा - नहीं नहीं गोलू!

 तू तो हमारा बहुत प्रिय सखा है। तुम जैसे भोले भाले भक्त हम को बहुत प्रिय हैं। पापी और दुराचारी लोगों से तो दुनिया भरी पड़ी है। तुम जैसे लोग तो  इस दुनिया में कम ही हैं।

*ठाकुर जी और किशोरी जी उस घर में ईश्वर के रूप में ना रहकर उनके घर का सदस्य बनकर रहने लगे।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

गुरुवार, 18 नवंबर 2021

अच्छे व बुरे की पहचान

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒अच्छे और बुरे लोगों की पहचान💐💐*

बहुत समय पहले की बात है। नदी के तट पर एक गांव बसा था और उसी के नजदीक एक संत का आश्रम था। एक बार संत अपने शिष्यों के साथ नदी में स्नान कर रहे थे, तभी एक राहगीर वहां आया और संत से पूछने लगा, ‘‘महाराज, मैं परदेस से आया हूं और इस जगह पर नया हूं। क्या आप बता सकते हैं कि इस गांव में किस तरह 
के लोग रहते हैं?’’ 

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

यह सुनकर संत ने उससे कहा, ‘‘भाई, मैं तुम्हारे सवाल का जवाब बाद में दूंगा। पहले तुम मुझे यह बताओ कि तुम अभी जहां से आए हो, वहां किस प्रकार के लोग रहते हैं?’’ 

इस पर वह व्यक्ति बोला, ‘‘उनके बारे में क्या कहूं महाराज! वहां तो एक से एक कपटी, दुष्ट और बुरे लोग बसे हुए हैं।’’
तब संत ने उससे कहा, ‘‘तुम्हें इस गांव में भी बिल्कुल उसी तरह के लोग मिलेंगे-कपटी, दुष्ट और बुरे।’’

इतना सुनकर वह राहगीर आगे बढ़ गया। कुछ समय बाद वहां से एक और राहगीर का गुजरना हुआ। वह भी किसी नई जगह पर बसने की इच्छा रखता था। उसने संत से पूछा, ‘‘महात्मन, मुझे यहां की आबोहवा ठीक लगती है। क्या आप बता सकते हैं कि इस गांव में कैसे लोग रहते हैं?’’
संत ने उससे भी वही सवाल पूछा, जो उन्होंने पहले राहगीर से पूछा था। इस पर राहगीर ने जवाब दिया, ‘‘महात्मन, मैं जहां से आया हूं, वहां तो बहुत ही सभ्य, सुलझे और नेक दिल इंसान रहते हैं।’’ 

तब संत ने उससे कहा, ‘‘तुम्हें यहां भी उसी तरह के लोग मिलेंगे। सभ्य, सुलझे हुए और नेकदिल। तुम्हें यहां रहने में कोई परेशानी नहीं होगी।’’ इतना सुनते ही वह राहगीर संत को प्रणाम कर आगे बढ़ गया। 

शिष्य यह सब देख रहे थे। राहगीर के जाते ही उन्होंने संत से पूछा, ‘‘गुरुदेव, आपने दोनों राहगीरों को एक ही स्थान के बारे में अलग-अलग बातें क्यों बताईं?’’ 

इस पर संत ने उनसे कहा, ‘‘वत्स, आमतौर पर हम चीजों को वैसे नहीं देखते, जैसी वे हैं। बल्कि उन्हें हम उसी हिसाब से देखते हैं, जैसे कि हम खुद हैं। हर जगह हर प्रकार के लोग होते हैं। अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम किस तरह के लोगों को देखना चाहते हैं। अगर हम अच्छाई देखना चाहें तो हमें अच्छे लोग मिलेंगे और बुराई देखना चाहें तो बुरे।’’ 

यह सुनकर शिष्यों को उनकी बात का मर्म समझ में आ गया और उन्होंने जीवन में सिर्फ अच्छाइयों पर ध्यान केंद्रित करने का निश्चय किया।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

बुधवार, 17 नवंबर 2021

माँ की ममता

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒माँ की ममता*
           
मेरी दवा की दुकान थी और उस दिन दुकान पर काफी भीड़ थी मैं ग्राहको को दवाई दे रहा था.. दुकान से थोड़ी दूर पेड़ के नीचे वो बुजुर्ग औरत खड़ी थी। मेरी निगाह दो तीन बार उस महिला पर पड़ी तो देखा उसकी निगाह मेरी दुकान की तरफ ही थी।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

मैं ग्राहकों को दवाई देता रहा लेकिन मेरे मन में उस बुजुर्ग महिला के प्रति जिज्ञासा भी थी कि वो वहां खड़े खड़े क्या देख रही है। जब ग्राहक कुछ कम हुए तो मैंने दुकान का काउंटर दुकान में काम करने वाले लड़के के हवाले किया और उस महिला के पास गया।

मैंने पूछा.."क्या हुआ माता जी कुछ चाहिए आपको.. मैं काफी देर से आपको यहां खड़े देख रहा हूं गर्मी भी काफी है इसलिए सोचा चलो मैं ही पूछ लेता हूं आपको क्या चाहिए?

बुजुर्ग महिला इस सवालपर कुछ सकपका सी गई फिर हिम्मत जुटा कर  उसने पूछा... "बेटा काफी दिन हो गए मेरे दो बेटे हैं। दोनो दूसरे शहर में रहते हैं। हर बार गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के साथ मिलने आ जाते हैं। इस बार उन्होंने कहीं पहाड़ों पर छुट्टियां मनाने का निर्णय लिया है। बेटा इसलिए इस बार वो हमारे पास नही आएंगे यह समाचार मुझे कल शाम को ही मिला.. कल सारी रात ये बात सोच सोच कर परेशान रही.. एक मिनट भी सो नही सकी.. आज सोचा था तुम्हारी दुकान से दवाई लूंगी लेकिन दुकान पर भीड़ देखकर यही खड़ी हो गई सोचा जब कोई नही होगा तब तुमसे दवा पूछूंगी..

"हां हां बताइये ना मां जी.. कौन सी दवाई चाहिये आपको अभी ला देता हूं.. आप बताइये..

_"बेटा कोई बच्चों को भूलने की दवाई है क्या.....?
  _अगर है तो ला दे बेटा.....
  भगवान तुम्हारा भला करेगा....?

इससे आगे के शब्द सुनने की मेरी हिम्मत ना थी। मेरे कान सुन्न हो चूके थे। मैं उसकी बातों का बिना कुछ जवाब दिये चुपचाप दुकान की तरफ लौट आया।

क्योंकि उस बुजुर्ग महिला की दवा उसके बेटों के पास थी। जो शायद विश्व के किसी मैडिकल स्टोर पर नही मिलेगी.. अब मैं काउंटर के पीछे खड़ा था..

मन में विचारों की आंधी चल रही थी लेकिन मैं उस पेड़ के नीचे खड़ी उस मां से नजरें भी नही मिला पा रहा था.. मेरी भरी दुकान भी उस महिला के लिए खाली थी.. मै कितना असहाय था.. या तो ये मैं जानता था या मेरा भगवान...!

अब जब भी अपने शहर में ये सुनता हूं कि "इस बार गर्मी की छुट्टियों में हम गांव न जाकर कहीं और घूमने जा रहे हैं तो वो पेड़ के नीचे उन माता जी की वेदना अंदर तक झंझोड़ देती है ।

    यह कहानी जो संसार में माँ के प्रेम
    की वेदना का अहसास करा रही है।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मंगलवार, 16 नवंबर 2021

मैत्री भाव

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒मैत्रीभाव*

आशीर्वाद का एक और प्राचीन भारतीय तरीका

माँ शारदा ने विवेकानंद को ऐसे आशीर्वाद दिया...

विवेकानंद अमरीका जाते थे। रामकृष्ण की तो मृत्यु हो गई थी। रामकृष्ण की पत्नी शारदा से वे आशा मांगने गए कि मैं जाता हूं परदेश, खबर ले जाना चाहता हूं धर्म की, सत्य की। मुझे आशीर्वाद दें कि मैं सफल होऊं।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

शारदा तो ग्रामीण स्त्री थी। वे उससे आशीर्वाद लेने गए। उन्होंने सोचा भी न था कि शारदा आशीर्वाद देने में भी सोच विचार करेगी। उसने विवेकानंद को नीचे से ऊपर तक देखा। वह अपने चौके में खाना बनाती थी। फिर बोली सोच कर बताऊंगी।

विवेकानंद ने कहा सिर्फ आशीर्वाद मांगने आया हूं शुभाशीष चाहता हूं तुम्हारी मंगलकामना कि मैं जाऊं और सफल होऊं।

उसने फिर उन्हें गौर से देखा और उसने कहा ठीक है। सोच कर कहूंगी।

विवेकानंद तो खड़े रह गए अवाक। कभी आशीर्वाद भी किसी ने सोच कर दिए हों और आशीर्वाद सिर्फ मांगते थे शिष्टाचारवश। वह कुछ सोचती रही और फिर उसने कहा विवेकानंद को कि नरेन्द्र, वह जो सामने पड़ी हुई छुरी है, वह उठा लाओ। सामने पड़ी हुई छुरी विवेकानंद उठा लाए और शारदा के हाथ में दी। हाथ में देते ही वह हंसी और उसकी हंसी से उन्हें आशीर्वाद बरस गए उनके ऊपर। उसने कहा कि जाओ। जाओ, तुमसे सबका मंगल ही होगा। विवेकानंद कहने लगे कि इस छुरी के उठाने में और तुम्हारे आशीर्वाद देने में कोई संबंध था क्या?

शारदा ने कहा संबंध था। मैं देखती थी कि छुरी उठा कर तुम किस भांति मुझे देते हो। मूठ तुम पकड़ते हो कि फलक तुम पकड़ते हो। मूठ मेरी तरफ करते हो कि फलक मेरी तरफ करते हो। और आश्चर्य कि विवेकानंद ने फलक अपने हाथ में पकड़ा था छुरी का और मूठ लकड़ी की शारदा की तरफ की थी। आमतौर से शायद ही कोई फलक को पकड़ कर और मूठ दूसरे की तरफ करे। मूठ कोई पकड़ेगा सहज, खुद। शारदा कहने लगी तुम्हारे मन में मैत्री का भाव है, तुम जाओ, तुमसे कल्याण होगा। तुमने फलक अपनी तरफ पकड़ा, मूठ मेरी तरफ। अपने को असुरक्षा में डाला। हाथ में चोट लग सकती है और मेरी सुरक्षा की फिकर की। तुम जाओ, आशीर्वाद मेरे तुम्हारे साथ हैं।

इतनी सी, छोटी सी घटना में मैत्री प्रकट होती है, साकार बनती है। बहुत छोटी सी घटना है! क्या है मूल्य इसका कि क्या पकड़ा आपने, फलक या मूठ? शायद हम सोचते भी नहीं। और सौ में निन्यानबे मौके पर कोई भी मूठ ही पकड़ता है। वह सहज मालूम होता है। अपनी रक्षा सहज मालूम होती है, आत्मरक्षा सहज मालूम होती है।

मैत्री आत्मरक्षा से भी ऊपर उठ जाती है। दूसरे की रक्षा, वह जो जीवन है हमारे चारों तरफ, उसकी रक्षा महत्वपूर्ण हो जाती है। मैत्री का अर्थ है. मुझसे भी ज्यादा मूल्यवान है सब कुछ जो है। वैर का अर्थ है मैं सबसे ज्यादा मूल्यवान हूं। सारा जगत मिट जाए, लेकिन मेरी रक्षा जरूरी है। मैं हूं केंद्र जगत का। वैर भाव का आधार है मैं हूं केंद्र जगत का। वैर भाव ईगोसेंट्रिक है। वह अहंकेंद्रित है। मैं हूं जगत का केंद्र। सारा जगत चलता है मेरे लिए, सारा जगत मिट जाए, लेकिन मैं बचूं।

मैत्री का केंद्र मैं नहीं हूं सर्व है। मैं मिट जाऊं, सब बचे। मैं खो जाऊं, सब रहे। मैत्री है मंगल की कामना, सर्वमंगल की। कामना ही नहीं, सक्रिय जीवन भी। उठूं, बैठूं, चलूं और मेरा उठना, बैठना, चलना, मेरा श्वास लेना भी सर्वमंगल के लिए समर्पित हो जाए; तो मनुष्य परमात्मा के दूसरे द्वार में प्रवेश पाता है।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

****************************************

सोमवार, 15 नवंबर 2021

निस्वार्थ सेवाफल

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒निस्वार्थ सेवा का फल*

एक बार राजस्थान के एक छोटे से गांव नयासर में एक गरीब औरत अपने परिवार के साथ रहती थी,उस गरीब औरत के एक बेटा था,वह बड़े घरों में काम करके वो अपना गुजारा करती थी,वह अपने बच्चे के लिए कभी खिलौना नही ला सकी। एक दिन उसे काम के बदले अनाज मिला।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

वह  अनाज को हाट में बेचने जाती है और जाते  समय उसने बेटे से पूछा, बोल, बेटे तेरे लिए हाट से क्या लेकर आऊं?" 

बेटे ने झट जवाब दिया, ढोल, मेरे लिए एक ढोल ले आना मां।'

मां जानती थी कि उसके पास कभी इतने पैसे नहीं होंगे कि वह बेटे के लिए ढोल खरीद सके। वह हाट गई, वहां अनाज बेचा और उन पैसों से कुछ बेसन और नमक ख़रीदा।

 उसे दुख था कि वह बेटे के लिए कुछ नहीं ला पाई। वापस आते हुए रास्ते में उसे लकड़ी का एक प्यारा-सा टुकड़ा दिखा। उसने उसे उठा लिया और आकर बेटे को दे दिया। बेटे की कुछ समझ में नहीं आया कि उसका वह क्या करे।

दिन के समय वह खेलने के लिए गया, तो उस टुकड़े को अपने साथ ले गया। एक बुढ़िया अम्मा चूल्हे में उपले(गोबर से बने हुए) जलाने की कोशिश कर रही थीं, पर सीले उपलों ने आग नहीं पकड़ी। 

चारों तरफ़ धुआं ही धुआं हो गया। धुए से अम्मा की आंखों में पानी आ गया। लड़का रुका और पूछा, 'अम्मा, रो क्यों रही हैं?" 

बूढ़ी अम्मा ने कहा, 'चूल्हा नहीं जल रहा है। चूल्हा नहीं जलेगा, तो रोटी कैसे बनेगी?

 लड़के ने कहा, 'मेरे पास लकड़ी का टुकड़ा है, चाहो तो उससे आग जला लो। अम्मा बहुत खुश हुई। उन्होंने चूल्हा जलाया, रोटियां बनाई और एक रोटी लड़के को दी।

रोटी लेकर वह चल पड़ा। चलते-चलते उसे एक कुम्हारिन मिली। उसका बच्चा मिट्टी में लोटते हुए ज़ोर-ज़ोर से रो रहा था। लड़का रुका और पूछा कि वह रो क्यों रहा है। 

कुम्हारिन ने कहा कि वह भूखा है और घर में खाने को कुछ नहीं है। लड़के ने अपनी रोटी बच्चे को दे दी। बच्चा चुप हो गया और जल्दी जल्दी रोटी खाने लगा। कुम्हारिन ने उसका बहुत आभार माना और एक घड़ा दिया।

वह आगे बढ़ा। चलते-चलते वह नदी पर पहुंचा। वहां उसने धोबी और धोबिन को झगड़ते हुए देखा। लड़के ने रुककर इसका कारण पूछा। धोबी ने कहा, 'चिल्लाऊं नहीं तो क्या करूं? इसने शराब के नशे में  घड़ा फोड़ दिया। अब मैं कपड़े किस में उबालूं?' लड़के ने कहा, 'झगड़ा मत करो।

 मेरा घड़ा ले लो। इतना बड़ा घड़ा पाकर धोबी खुश हो गया। बदले में उसने लड़के को एक कोट दिया।

कोट लेकर लड़का चल पड़ा। चलते-चलते वह एक पुल पर पहुंचा। वहां उसने मुक्त आदमी को ठंड से ठिठुरते हुए देखा। बेचारे के शरीर पर कुर्ती तक नहीं था। लड़के ने उसे पूछा कि उसका कुर्ता कहां गया। आदमी ने बताया, 'मैं इस घोड़े पर बैठकर शहर जा रहा था, रास्ते में डाकुओं ने सब छीन लिया और तो और, कुर्ता तक उतरवा लिया।' 

लड़के ने कहा, 'चिंता मत करो। लो, यह कोट पहन लो। आदमी ने कोट लेते हुए कहा, 'तुम बहुत भले हो, मैं तुम्हें यह घोड़ा भेंट करता हूं।"

लड़के ने घोड़ा ले लिया। थोड़ा आगे जाकर उसने एक बरात को देखा। लेकिन दूल्हा, बराती, गाने-बजाने वाले सब मुंह लटकाए हुए पेड़ के नीचे बैठे थे। लड़के ने पूछा कि वे उदास क्यों हैं। 


दूल्हे के पिता ने कहा, 'हमें लड़की वालों के यहां जाना है, पर दूल्हे के लिए घोड़ा नहीं है। जो घोड़ा लेने गया वह अभी तक लौटा नहीं। दूल्हा पैदल तो चलने से रहा। पहले ही बहुत देर हो गई है। कहीं विवाह का मुहूर्त न निकल जाए।' लड़के ने उन्हें अपना घोड़ा दे दिया। सबकी बांछे खिल गई। दूल्हे ने लड़के से पूछा, 'तुमने बड़ी मदद की। हम तुम्हारे लिए क्या कर सकते हैं? लड़के ने कहा, 'आप अगर कुछ देना चाहते हैं, तो यह ढोल दिला दें।' दूल्हे ने ढोल बजाने वाले से उसे ढोल दिला दिया।

लड़का भागा-भागा घर पहुंचा और ढोल बजाते हुए मां को पूरी कहानी सुनाने लगा कि उसकी दी हुईं लकड़ी से उसने ढोल कैसे प्राप्त किया। लड़का ढोल को पाकर बहुत खुश हो गया और माँ भगवान का धन्यवाद करने लगी।


*शिक्षा :- निस्वार्थ त्याग और सत्कर्म घूम फिर कर हमारे ही सामने आते है , उनका लाभ हमें ही मिलता है।इसलिए अच्छे कर्म करते रहिये ,भगवान हमारा हमेशा भला ही करेंगे।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

रविवार, 14 नवंबर 2021

रहस्यमयी मंत्र

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒रहस्यमयी मंत्र*

एक व्यक्ति मल्टीनेशनल कंपनी में सेल्स मैनेजर की जॉब करता था। उसने अपनी बचत से शहर के बाहर एक आलीशान मकान बनवाया. शहर के बाहर होने के कारण वह एरिया कुछ सुनसान था।

वह व्यक्ति अपनी पत्नि और बच्चों के साथ अपने नए घर में रहने लगा।सुबह होते ही वह काम पर निकल जाता और देर शाम तक लौटता।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

सुनसान जगह इतना आलीशान मकान देखकर चोरों के एक समूह ने वहाँ चोरी करने की योजना बनाई. चोरी के पहले वे मैनेजर घर के पास चक्कर मारकर उसके घर की गतिविधियों का जायज़ा लेने लगे।

पहले ही दिन उनकी नज़र मैनेजर की एक अजीब हरक़त पर पड़ी। घर आने के बाद वह सबसे पहले अपने बगीचे में लगे आम के पेड़ के पास गया और अपने ऑफिस बैग से एक-एक कर कुछ निकालने लगा और उसे पेड़ में कहीं डालने लगा।

मैनेजर की पीठ चोरों की तरफ होने के कारण चोर ये देख नहीं पाए कि उसने अपने बैग में से क्या निकाला और पेड़ में किस जगह डाला? उन्होंने अंदाज़ा लगाया कि ये अवश्य ही कोई कीमती चीज़ होगी।

चोर मैनेजर के घर के पास घात लगाकर बैठ गए और अंधेरा होने का इंतज़ार करने लगे। रात में जब घर की लाइट्स बुझ गई, तो उन्हें इत्मिनान हुआ कि घर में सब सो गए हैं।

वे दीवार फांद कर घर में घुसे और सीधे आम के पेड़ के पास पहुँचे।फिर बिना समय गंवायें वे वहाँ मैनेजर की छुपाई चीज़ खोजने लगे। लेकिन बहुत खोजने के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला। आखिरकार थक-हारकर वे वापस लौट गए।

अगले दिन वे फिर उस घर के पास छुपकर बैठ गए। मैनेजर जब ऑफिस से वापस आया, तो चोरों की नज़रें फिर उस पर ही गड़ गई। पिछले दिन की तरह वह सबसे पहले आम के पेड़ के पास गया और बैग से निकालकर उसमें कुछ डालने लगा. फिर वह घर के अंदर चला गया।

उस रात घर की लाइट्स बंद हो जाने के बाद फिर से चोर दीवार फांद आम के पेड़ के पास पहुँचे और जी-जान से उन चीजों को खोजने में लग गए, जो मैनेजर ने वहाँ छुपाई थी। लेकिन उन दिन उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ।

कुछ दिन तक वे रोज़ रात में आम के पेड़ के पास खोजबीन करते रहे. लेकिन उनके हाथ कुछ न लगा. वे परेशान हो गए कि मैनेजर आखिर कैसे उन चीज़ों को पेड़ में छुपाता है कि हम जैसे शातिर चोर भी उन्हें ढूंढ नहीं पा रहे हैं. अब चोरों में चोरी करने से ज्यादा इस रहस्य को जानने की जिज्ञासा पैदा हो गई।

आखिरकार अपनी जिज्ञासा शांत करने रविवार के दिन वे सभी मैनेजर से मिलने उसके घर पहुँचे. मैनेजर का उन्होंने शरीफ़ों की तरह अभिवादन किया।

फिर चोरों का सरदार बोला, “सर….प्लीज बुरा मत मानियेगा. एक बात आपसे पूछनी थी। हम लोग चोर हैं. पिछले कुछ दिनों से आपके घर चोरी करने की फ़िराक में हैं। हम रोज़ देखते हैं कि आप शाम को घर आकर आम के पेड़ में कुछ डालते हैं. लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी हम वो चीज़ें ढूंढ नहीं पाए।हम सब ये जानने को बेचैन हैं कि आप वहाँ चीज़ें कैसे छुपाते हैं कि वो मिलती नहीं हैं?”

चोरों की बात सुनकर मैनेजर हँस पड़ा, फिर बोला, “अरे भाई…..मैं वहाँ कुछ भी नहीं छुपाता. तुम लोगों को ग़लतफ़हमी हो गई है।

“नहीं सर, हमने देखा है।आप रोज़ शाम को अपने बैग में से कुछ निकालकर पेड़ में डालते हैं. आप वहाँ कुछ न कुछ तो छुपाते हैं.” चोर एक स्वर में बोले।

अब मैनेजर गंभीर हो गया और बोला, “मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में सेल्स मैनेजर हूँ। काम का दबाव बहुत अधिक रहता है। जिस कारण तनाव होना लाज़िमी है. किसी भी हाल में टारगेट पूरा करना ही होता है. इसके लिये रोज़ किसी न किसी से झिक-झिक होती है. कस्टमर के ताने सुनने पड़ते हैं. बॉस की डांट झेलनी पड़ती है. मानसिक तनाव इतना अधिक होता है कि घर आने पर भी नहीं जाता. पहले अक्सर मेरे तनाव को बेवजह मेरे परिवारजन झेलते थे.”

कुछ देर रुककर मैनेजर आगे बताने लगा, “….जब मैंने ये नया घर बनवाया, तो सोचा कि इस घर का माहौल मैं शांतिपूर्ण रखूंगा. कभी ऑफिस का तनाव घर लेकर नहीं लाऊंगा. इसलिए घर आने के बाद मैं सबसे पहले आम के पेड़ के पास जाता हूँ और अपना पूरा तनाव एक-एक कर वहाँ डाल देता हूँ. कमाल की बात ये है कि अगले दिन जब मैं वो उठाने जाता हूँ, तब तक आधा तनाव तो गायब हो जाता है. जो थोड़ा-बहुत बचता है, उसे मैं अपने साथ ले जाता हूँ. लेकिन फिर जब शाम को घर आता हूँ, तो तनाव पेड़ के पास छोड़ जाता हूँ. यही पेड़ का रहस्य है.”

मैनजर की बात सुनकर चोरों को पेड़ का रहस्य समझ आया. चोरी करने में तो वे सफ़ल नहीं हो सके. लेकिन जीवन की एक बहुत बड़ी सीख उन्हें ज़रूर मिली.

*शिक्षा:-*
मित्रों! आज के दौर में जिंदगी में सुख-सुविधाओं के साधन तो बढ़ते जा रहे हैं और ज़िन्दगी आरामदायक होती जा रही हैं. लेकिन कहीं न कहीं तनाव भी बढ़ता जा रहा है. अक्सर आपने देखा होगा कि लोग अपने काम का तनाव अपने घर ले आते हैं. इस तरह वे घर पर भी शांति से नहीं रह पाते हैं, साथ ही अपने तनाव से परिवारजनों को भी प्रभावित करते हैं. क्या हर समय तनाव का बोझ ढोना आवश्यक है? क्या इस तरह जिंदगी कुछ ज्यादा कठिन नहीं बनती जा रही? तनाव को एकदम से तो समाप्त नहीं किया जा सकता. लेकिन कम से कम घर पर परिवारजनों के साथ होने पर तो तनाव को दूर रखा जा सकता है और उनके साथ आनंदमय क्षण व्यतीत किये जा सकते हैं. इसलिए जब भी घर आयें, तनाव को बाहर ही छोड़ आयें।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

शनिवार, 13 नवंबर 2021

श्रृध्दालुओ के भगवन्

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒श्रृद्धालुओं के भगवान*

*💐💐ईश्वर की भक्ति में शक्ति होने से सबकी सुनता हैं,हर पल हम सभी को देख रहा है!!💐💐*

➡️👨‍👩‍👧‍👦शहर के बीचोबीच एक हाइ सोसाइटी की बिल्डिंग थीं !
उसमें सबसे ऊपर वाले फ्लोर पर अविनाश रहता था । वो रोज खाना खाने के बाद रात को 9 से 10 बजे तक ऊपर छत पर घूमता था । और उस बिल्डिंग के पास ही कुछ झुग्गी झोपड़ी बनी हुई थी ।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*

*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

पिछले एक-डेढ़ महीने से वो रोज उस बच्चे को देख रहा था, जो रोज एक गुब्बारे को छोड़ देता था और उसे तब तक देखता रहता जब तक वह आँखों से ओझल न हो जाए । 

एक दिन अविनाश दोस्त से बात करने में थोड़ा लेट हो गया । और जब ऊपर घूमने गया तो उसे वो बच्चा नहीं दिखा । अविनाश ने ऊपर देखा की कही गुब्बारा उड़ता हुआ दिख जाये । तो उसे वो गुब्बारा पानी की टंकी में अटका हुआ दिखा । अविनाश समझ गया की यह उस बच्चे का ही है । और उसने सोचा की उस गुब्बारे को निकालकर उड़ा दूँ । और वह टंकी पर चढ़ा उसने देखा गुब्बारे पर कुछ लिखा हुआ था। अविनाश उसे पढ़कर बैचेन हो गया । उस पर लिखा था कि .......

"हे ऊपर वाले ! मेरी माँ की तबियत बहुत खराब है और उसके इलाज के लिए किसी को भेज दें ! मेरे पास इतने सारे पैसे नहीं है ।"

यह पढ़कर अविनाश को रात भर नींद नहीं आयी । वह सबेरे उठकर उस लड़के से मिलने चला गया । उसने जाकर देखा तो सच में उसकी मां की तबियत खराब थीं ।

अविनाश ने उस लड़के से पुछा की तुम रोज गुब्बारे पर लिखकर क्यों भेजते हो और ये तुम्हें किसने बताया की ऐसा करने से ईश्वर तुम्हारी मदद करेगा ।

उस लड़के ने कहा ----ये सब मुझे भिखारी दादा ने कहा ।  एक दिन रात को मै  आ रहा था तो उन्होंने कहा कि मेरी तबियत खराब है । और मैं भीख मांगने नही जा सकता और मैं दो दिन से भूखा हूँ । क्या तुम मुझे खाना खिलाओगे ?  तो मैंने उन्हें खाना लाकर दे दिया तो उन्होंने कहा कि-- बेटा तेरी मदद ऊपरवाला करेगा ।  मैने पूछा वो सच में मेरी मदद करेगा क्या ? दादा ने कहा ---जैसे मेरे लिए उसने तुझे भेजा है न वैसे ही वो तेरे लिए भी किसी को भेज देगा ।

अविनाश ने पूछा---- तो गुब्बारे का किसने बोला और तुम रात को ही क्यों छोड़ते हो दिन में क्यों नहीं ।

वो लड़का बोला --- दादा ने कहा था ना कि ऊपरवाला मदद करेगा तो मै  रोज सोचता था की उस तक बात कैसे पहुंचाउ । एक दिन मैने गुब्बारे को बहुत ऊंचा जाते हुए देखा तो मुझे यही रास्ता समझ में आया । 

और मै  होटल में काम करता हूँ ना तो मुझे रोज रात को पैसे मिलते हैं इसलिए मै  रात में गुब्बारा छोड़ता हूँ !

उस बच्चे की बातें सुनकर अविनाश के आँखों में आँसू आ गये और उसने उस बच्चे को गले लगाते हुए कहा ---की बेटा वो दादा सही कह रहे थे वो ऊपर वाले ने तेरी मदद के  लिये मुझे भेज दिया ।

और अविनाश ने उसकी मां का इलाज कराया और उसका माँ के प्रति प्यार देखकर उसे बहुत सारी मदद करी और स्कूल में भी भर्ती करा दिया ।।

इस कहानी से हमें कुछ बातें समझ में आयी की ईश्वर उस बच्चे पर खुश क्यों हुआ । उसका माँ के लिए प्यार, गरीब होते हुए भी उसके मन में दूसरें के लिए दया ,उसका भोलापन और सबसे बड़ी बात उसका विश्वास जो उसने एक-डेढ़ महीने तक गुब्बारे में लिखकर ईश्वर के लिए भेजा । 

यदि ये बातें हम लोगों मे भी पैदा हो जाए तो इसमें कोई शक नहीं कि वो प्यारा ईश्वर हमारी तकलीफों में भी किसी ना किसी को भेज ही देगा ।

विश्वास करो वो ईश्वर हमें हर पल देख रहा हैं और हमें अच्छे से अच्छा जीवन देना चाहता हैं इसलिये  हमे  प्रभु  पर  भरोसा  रखना  चाहिये  !!
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏