शुक्रवार, 31 मार्च 2023

दयालु कौन

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*दयालु कौन*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒दयालु कौन ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.चैत्र शुक्ल ग्यारस , शनिवार दिनांक 1अप्रैल  2023 को पांचवें तीर्थंकर सभी को  सुमति प्रदाता  सुमतिनाथ भगवान जी का मोक्ष  कल्याणक महोत्सव है। मोक्ष कल्याणक महोत्सव शिखरजी में अविचल कूट पर हुआ था | आज के ही  दिन संध्या के समय मघा नक्षत्र में मोक्ष पद को प्राप्त किया था | इस कूट से 1 कोड़ा कोड़ी 84 करोड़ 72 लाख 81 हजार 781 मुनि सिद्ध हुए |हम सभी शक्ति अनुसार दर्शन पूजन अभिषेक शांतिधारा करके अपने पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🕉️2.चैत्र शुक्ल ग्यारस , सोमवार दिनांक 03 अप्रैल  2023 को अंतिम तीर्थंकर सभी को  वीरता प्रदाता वर्धमान स्वामी इस कलिकाल के शासन नायक  का जन्म  कल्याणक महोत्सव है। हम सभी शक्ति अनुसार दर्शन पूजन अभिषेक शांतिधारा करके अपने पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली  03,06, 08, 14, 15,19,21,26,28,29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक शहर के बस स्टैण्ड में तीन दयालु व्यक्ति, और एक कहीं से भी दयालु नहीं लगने वाला एक व्यक्ति बैठा था । वो सभी बातें कर ही रहे थे कि इतने में एक बुढ़िया अपने दोनों बेटों के विक्षिप्त होने के कारण दाने-दाने को मोहताज़ होने की जानकारी देते हुए रोने लगी । 

इस पर पहले दयालु ने कहा-‘‘तुम लोग भूखे मर रहे हो इसका यह अर्थ हेै कि, राज्य नीति-निर्देशक तत्वों का पालन नहीं कर रहा है, मैं इस बात को विधानसभा और लोकसभा तक ले जाऊंगा ।’’

दूसरे दयालु ने कहा-‘‘ये तुम्हारे गांव वालों के लिये शर्म की बात है कि उनके होते हुए एक परिवार भूख से मर रहा है ।’’ 

तीसरे दयालु ने कहा-‘‘माई अब रोना-धोना बंद करो । मैं बड़ा ही भावुक  आदमी हूं। तुम्हें रोता देखकर मुझे भी रोना आ रहा है ।’’

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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चौथा व्यक्ति निस्पृह भाव से उनकी बातें सुनता रहा,और फिर उठकर वहां से चला गया ।

इस पर एक दयालु ने कहा-देखो तो लोग दो शब्द सांत्वना के भी नहीं बोल सकते। कुछ देर बाद वह चौथा व्यक्ति एक थैले में दस क़िलो चावल व अन्य सामग्री लेकर आया, और बड़ी ही खामोशी से उसने उस बुढिया को थैला सौंप दिया। 

अचानक तीनों दयालुओं का हाथ अपने-अपने गालों तक पहुंच गया । उन्हें ऐसा लगा, जैसे किसी ने उन्हें झन्नाटेदार थप्पड़ रसीद कर दिया हो ।

*🐒👨‍👩‍👦‍👦▶️💯✅विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज वर्तमान में प्रत्येक व्यक्ति दिखावे के लिए पुण्य कार्य करना चाहता है।इस कारण से वह पुण्य की जगह पाप का ही बंध करता है। हमें अपने ज्ञान से बुद्धि पूर्वक यथाशक्ति सभी असहाय जीवों की सहायता करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 30 मार्च 2023

मेरी श्रद्धा

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*मेरी श्रद्धा*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरी श्रद्धा✍️🐒*

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*🕉️1.चैत्र शुक्ल ग्यारस , शनिवार दिनांक 1अप्रैल  2023 को पांचवें तीर्थंकर सभी को  सुमति प्रदाता  सुमतिनाथ भगवान जी का मोक्ष  कल्याणक महोत्सव है। मोक्ष कल्याणक महोत्सव शिखरजी में अविचल कूट पर हुआ था | आज के ही  दिन संध्या के समय मघा नक्षत्र में मोक्ष पद को प्राप्त किया था | इस कूट से 1 कोड़ा कोड़ी 84 करोड़ 72 लाख 81 हजार 781 मुनि सिद्ध हुए |हम सभी शक्ति अनुसार दर्शन पूजन अभिषेक शांतिधारा करके अपने पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली  03,06, 08, 14, 15,19,21,26,28,29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।* 

     ✍️एक सन्त थे ,जो एक छोटे आश्रम का संचालन करते थे ! 
एक  दिन पास के ही रास्ते से एक राहगीर को पकड़ करके अन्दर ले आये ! 
और शिष्यों के सामने उस से प्रश्न किया, 
कि यदि तुम्हें सोने की अशर्फियों की एक थैली, 
रास्ते में, पड़ी मिल जाए ; तो तुम क्या करोगे ?

वह आदमी बोला - 
"मैं तत्क्षण उसके मालिक का पता लगा कर उसे वापस कर दूँगा अन्यथा राज-कोष में जमा करा दूँगा ! 

सन्त हँसे और राहगीर को विदा कर के शिष्यों से बोले -  
"यह आदमी मूर्ख है !"

शिष्य बड़े हैरान कि गुरुजी क्या कह रहे हैं ? 
इस आदमी ने ठीक ही तो कहा है तथा 
सभी को ही यह सिखाया गया है - 
कि ऐसे किसी परायी वस्तु को ग्रहण नहीं करना चाहिए !

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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थोड़ी देर बाद 
फिर सन्त किसी दूसरे व्यक्ति को अन्दर ले आये और उस से भी वही प्रश्न दोहरा दिया !

उस दूसरे राहगीर ने उत्तर दिया कि 
क्या मुझे निरा मूर्ख समझ रखा है ? 
जोकि स्वर्ण मुद्राएँ पड़ी मिलें और मैं लौटाने के लिए मालिक को खोजता फिरूँ ? 
तुम ने मुझे समझा क्या है ?
           
वह राहगीर जब चला गया - तो सन्त ने कहा, 
"यह व्यक्ति शैतान है !"

तो शिष्य बड़े हैरान हुए कि 
पहला मूर्ख और दूसरा शैतान, 
फिर गुरु जी चाहते क्या हैं ?
           
अबकी बार सन्त 
तीसरे राहगीर को पकड़ कर अन्दर ले आये और 
वही प्रश्न दोहराया !
           
तो उस राहगीर ने बड़ी ही सज्जनता से यह उत्तर दिया, 
"महाराज ! अभी तो कुछ कहना बड़ा मुश्किल है ! 
इस चाण्डाल मन का क्या भरोसा - कब धोखा दे जाए ? 
एक क्षण की खबर नहीं ! 
यदि परमात्मा की कृपा रही और सद्बुद्धि बनी रही, 
तो लौटा दूँगा !"

सन्त बोले - "यह आदमी ही सच्चा है ! 
इसने अपनी डोर परमात्मा को सौंप रखी है। 
ऐसे व्यक्तियों द्वारा कभी भी गलत निर्णय नहीं होता !"

ज्येष्ठ पाण्डव, सूर्य-पुत्र कर्ण, 
तो कर्म, धर्म का ज्ञाता था ! 
क्या कारण था कि 
वह अपने छोटे भाई अर्जुन से हार गया 
जबकि कर्म और धर्म दोनों में वह अर्जुन से श्रेष्ठ था ! कारण था कि 
अर्जुन ने तो अपने घर से निकलने से पहले ही 
अपने जीवन रथ की डोरी, 
भगवान श्री कृष्ण के हाथ में दे दी थी !

हमें भी इसी प्रकार अपने मन तथा जीवन की डोर गुरु-परमात्मा के हाथ में दे देनी चाहिए !

*👪✍️🌲⏰↔️विशेष:- भव्य‌‌‌ आत्माओं,इस कहानी के माध्यम से हमें यह समझना आवश्यक है कि आज हमारा जिस धर्म में जन्म हुआ है उस धर्म के अनुसार आचरण करने से हमें सत्य का ज्ञान होगा। जब वह सत्य हमारे जीवन का लक्ष्य  होगा तब हमारा आत्म कल्याण होगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 29 मार्च 2023

प्रभु की भक्ति से

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*प्रभु की भक्ति से*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 प्रभु की भक्ति से ✍️🐒*

एक महिला रोटी बनाते बनाते "ॐ नमो भगवते वासूपूज्याय नम:" का जाप कर रही थी, अलग से पूजा का समय कहाँ निकाल पाती थी बेचारी, तो बस काम करते करते ही..."ॐ नमो भगवते वासूपूज्याय  नम:"!

         एकाएक धड़ाम से जोरों की आवाज हुई और साथ मे दर्दनाक चीख। कलेजा धक से रह गया जब आंगन में दौड़ कर देखा तो आठ साल का चुन्नू चित्त पड़ा था, खुन से लथपथ। मन हुआ दहाड़ मार कर रोये। परंतु घर मे उसके अलावा कोई था नही, रोकर भी किसे बुलाती, फिर चुन्नू को संभालना भी तो था।

              दौड़ कर नीचे गई तो देखा चुन्नू आधी बेहोशी में माँ माँ की रट लगाए हुए है। अंदर की ममता ने आंखों से निकल कर अपनी मौजूदगी का अहसास करवाया। फिर 10 दिन पहले करवाये अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बावजूद ना जाने कहाँ से इतनी शक्ति आ गयी कि चुन्नू को गोद मे उठा कर पड़ोस के नर्सिंग होम की ओर दौड़ी। रास्ते भर प्रभु को जी भर कर कोसती रही, बड़बड़ाती रही, हे प्रभु  क्या बिगाड़ा था मैंने किसीका, जो मेरे ही बच्चे को..। खैर डॉक्टर साहब मिल गए और समय पर इलाज होने पर चुन्नू बिल्कुल ठीक हो गया।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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            चोटें गहरी नही थी, ऊपरी थीं तो कोई खास परेशानी नही हुई।... 

*रात को घर पर जब सब टीवी देख रहे थे तब उस औरत का मन बेचैन था। भगवान से विरक्ति होने लगी थी। एक मां की ममता प्रभु सत्ता को चुनौती दे रही थी।* 
               उसके दिमाग मे दिन की सारी घटना चलचित्र की तरह चलने लगी। कैसे चुन्नू आंगन में गिरा की एकाएक उसकी आत्मा सिहर उठी, कल ही तो पुराने चापाकल का पाइप का टुकड़ा आंगन से हटवाया है, ठीक उसी जगह था जहां चिंटू गिरा पड़ा था। अगर कल मिस्त्री न आया होता तो..? 
उसका हाथ अब अपने पेट की तरफ गया जहां टांके अभी हरे ही थे, ऑपरेशन के। आश्चर्य हुआ कि उसने 20-22 किलो के चुन्नू को उठाया कैसे, कैसे वो आधा किलोमीटर तक दौड़ती चली गयी? फूल सा हल्का लग रहा था चुन्नू। वैसे तो वो कपड़ों की बाल्टी तक छत पर नही ले जा पाती। 

फिर उसे ख्याल आया कि डॉक्टर साहब तो 2 बजे तक ही रहते हैं  और जब वो पहुंची तो साढ़े 3 बज रहे थे, उसके जाते ही तुरंत इलाज हुआ, मानो किसी ने उन्हें रोक रखा था। 

उसका सर प्रभु चरणों मे श्रद्धा से झुक गया। अब वो सारा खेल समझ चुकी थी। मन ही मन प्रभु से अपने शब्दों के लिए क्षमा मांगी।

तभी टीवी पर ध्यान गया तो प्रवचन आ रहा था :--- *प्रभु कहते हैं, "मैं तुम्हारे आने वाले संकट रोक नहीं सकता, लेकिन तुम्हे इतनी शक्ति दे सकता हूँ कि तुम आसानी से उन्हें पार कर सको, तुम्हारी राह आसान कर सकता हूँ। बस धर्म के मार्ग पर चलते रहो।"* उस औरत ने मन के मंदिर में झांक कर देखा, प्रभु मुस्कुरा रहे थे, मेरे प्रभु ..!! 

*🔔🙏🌲⛳✍️विशेष :-भव्य‌‌‌ आत्माओं , वर्तमान में हम सभी के अंदर अनेक क्षमता है,उन क्षमताओं को जागृत करने के लिए हमें प्रभु भक्ति करना आवश्यक है।जिस प्रकार की भक्ति होगी वैसा ही फल प्राप्त होता है। यही प्रकृति का नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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प्रभु भक्ति से

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*प्रभु की भक्ति से*
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*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
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एक महिला रोटी बनाते बनाते "ॐ नमो भगवते वासूपूज्याय नम:" का जाप कर रही थी, अलग से पूजा का समय कहाँ निकाल पाती थी बेचारी, तो बस काम करते करते ही..."ॐ नमो भगवते वासूपूज्याय  नम:"!

         एकाएक धड़ाम से जोरों की आवाज हुई और साथ मे दर्दनाक चीख। कलेजा धक से रह गया जब आंगन में दौड़ कर देखा तो आठ साल का चुन्नू चित्त पड़ा था, खुन से लथपथ। मन हुआ दहाड़ मार कर रोये। परंतु घर मे उसके अलावा कोई था नही, रोकर भी किसे बुलाती, फिर चुन्नू को संभालना भी तो था।

              दौड़ कर नीचे गई तो देखा चुन्नू आधी बेहोशी में माँ माँ की रट लगाए हुए है। अंदर की ममता ने आंखों से निकल कर अपनी मौजूदगी का अहसास करवाया। फिर 10 दिन पहले करवाये अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बावजूद ना जाने कहाँ से इतनी शक्ति आ गयी कि चुन्नू को गोद मे उठा कर पड़ोस के नर्सिंग होम की ओर दौड़ी। रास्ते भर प्रभु को जी भर कर कोसती रही, बड़बड़ाती रही, हे प्रभु  क्या बिगाड़ा था मैंने किसीका, जो मेरे ही बच्चे को..। खैर डॉक्टर साहब मिल गए और समय पर इलाज होने पर चुन्नू बिल्कुल ठीक हो गया।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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            चोटें गहरी नही थी, ऊपरी थीं तो कोई खास परेशानी नही हुई।... 

*रात को घर पर जब सब टीवी देख रहे थे तब उस औरत का मन बेचैन था। भगवान से विरक्ति होने लगी थी। एक मां की ममता प्रभु सत्ता को चुनौती दे रही थी।* 
               उसके दिमाग मे दिन की सारी घटना चलचित्र की तरह चलने लगी। कैसे चुन्नू आंगन में गिरा की एकाएक उसकी आत्मा सिहर उठी, कल ही तो पुराने चापाकल का पाइप का टुकड़ा आंगन से हटवाया है, ठीक उसी जगह था जहां चिंटू गिरा पड़ा था। अगर कल मिस्त्री न आया होता तो..? 
उसका हाथ अब अपने पेट की तरफ गया जहां टांके अभी हरे ही थे, ऑपरेशन के। आश्चर्य हुआ कि उसने 20-22 किलो के चुन्नू को उठाया कैसे, कैसे वो आधा किलोमीटर तक दौड़ती चली गयी? फूल सा हल्का लग रहा था चुन्नू। वैसे तो वो कपड़ों की बाल्टी तक छत पर नही ले जा पाती। 

फिर उसे ख्याल आया कि डॉक्टर साहब तो 2 बजे तक ही रहते हैं  और जब वो पहुंची तो साढ़े 3 बज रहे थे, उसके जाते ही तुरंत इलाज हुआ, मानो किसी ने उन्हें रोक रखा था। 

उसका सर प्रभु चरणों मे श्रद्धा से झुक गया। अब वो सारा खेल समझ चुकी थी। मन ही मन प्रभु से अपने शब्दों के लिए क्षमा मांगी।

तभी टीवी पर ध्यान गया तो प्रवचन आ रहा था :--- *प्रभु कहते हैं, "मैं तुम्हारे आने वाले संकट रोक नहीं सकता, लेकिन तुम्हे इतनी शक्ति दे सकता हूँ कि तुम आसानी से उन्हें पार कर सको, तुम्हारी राह आसान कर सकता हूँ। बस धर्म के मार्ग पर चलते रहो।"* उस औरत ने मन के मंदिर में झांक कर देखा, प्रभु मुस्कुरा रहे थे, मेरे प्रभु ..!! 

*🔔🙏🌲⛳✍️विशेष :-भव्य‌‌‌ आत्माओं , वर्तमान में हम सभी के अंदर अनेक क्षमता है,उन क्षमताओं को जागृत करने के लिए हमें प्रभु भक्ति करना आवश्यक है।जिस प्रकार की भक्ति होगी वैसा ही फल प्राप्त होता है। यही प्रकृति का नियम है।*

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*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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मंगलवार, 28 मार्च 2023

स्वयं को पहचानने की विधि

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*स्वयं का स्वभाव जानने की विधि*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
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एक राजा का दरबार लगा हुआ था, 
क्योंकि सर्दी का दिन था इसलिये 
राजा का दरवार खुले मे लगा हुआ था। 
पूरी आम सभा सुबह की धूप मे बैठी थी। 
महाराज के सिंहासन के सामने...
एक शाही मेज सजी हुई थी...
और उस पर कुछ कीमती चीजें रखी थी। 
पंडित लोग, मंत्री और दीवान आदि 
सभी दरबार मे बैठे थे 
और राजा के परिवार के सदस्य भी बैठे थे।

उसी समय एक व्यक्ति आया और प्रवेश माँगा..
प्रवेश मिल गया तो उसने कहा 
“मेरे पास दो वस्तुएं हैं, 
मै हर राज्य के राजा के पास जाता हूँ और 
अपनी वस्तुओं को रखता हूँ पर कोई परख नही पाता सब हार जाते है 
और मै विजेता बनकर घूम रहा हूं ”।
अब आपके नगर मे आया हूँ 

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राजा ने बुलाया और कहा “क्या वस्तु है” 
तो उसने दोनो वस्तुएं....
उस कीमती मेज पर रख दीं।

वे दोनों वस्तुएं बिल्कुल समान 
आकार, समान रुप रंग, समान 
प्रकाश सब कुछ नख-शिख समान था.. … .. 

राजा ने कहा ये दोनो वस्तुएं तो एक हैं।
तो उस व्यक्ति ने कहा हाँ दिखाई तो 
एक सी ही देती है लेकिन हैं भिन्न भिन्न।

इनमें से एक है बहुत कीमती हीरा 
और एक है काँच का टुकडा।

लेकिन रूप रंग सब एक है। 
कोई आज तक परख नही पाया क़ि 
कौन सा हीरा है और कौन सा काँच का टुकड़ा।

कोइ परख कर बताये की....
ये हीरा है और ये काँच.. 
अगर परख खरी निकली...
तो मैं हार जाऊंगा और..
यह कीमती हीरा मै आपके राज्य की तिजोरी मे जमा करवा दूंगा। 

पर शर्त यह है क़ि यदि कोई नहीं 
पहचान पाया तो इस हीरे की जो 
कीमत है उतनी धनराशि आपको 
मुझे देनी होगी.. 

इसी प्रकार से मैं कई राज्यों से...
जीतता आया हूँ..

राजा ने कहा मै तो नही परख सकूगा.. 
दीवान बोले हम भी हिम्मत नही कर सकते 
क्योंकि दोनो बिल्कुल समान है.. 
सब हारे कोई हिम्मत नही जुटा पा रहा था.. .. 

हारने पर पैसे देने पडेगे...
इसका कोई सवाल नही था, 
क्योंकि राजा के पास बहुत धन था, 
पर राजा की प्रतिष्ठा गिर जायेगी, 
इसका सबको भय था.. 

कोई व्यक्ति पहचान नही पाया.. .. 
आखिरकार पीछे थोडी हलचल हुई 
एक अंधा आदमी हाथ मे लाठी लेकर उठा.. 
उसने कहा मुझे महाराज के पास ले चलो...
मैने सब बाते सुनी है...
और यह भी सुना है कि....
कोई परख नही पा रहा है...
एक अवसर मुझे भी दो.. .. 

एक आदमी के सहारे....
वह राजा के पास पहुंचा.. 
उसने राजा से प्रार्थना की...
मै तो जनम से अंधा हू....
फिर भी मुझे एक अवसर दिया जाये..
जिससे मै भी एक बार अपनी बुद्धि को परखूँ..
और हो सकता है कि सफल भी हो जाऊं..

और यदि सफल न भी हुआ...
तो वैसे भी आप तो हारे ही है.. 

राजा को लगा कि.....
इसे अवसर देने मे क्या हर्ज है... 
राजा ने कहा क़ि ठीक है.. 
तो तब उस अंधे आदमी को...
दोनो चीजे छुआ दी गयी.. 

और पूछा गया.....
इसमे कौन सा हीरा है....
और कौन सा काँच….?? .. 
यही तुम्हें परखना है.. .. 

कथा कहती है कि....
उस आदमी ने एक क्षण मे कह दिया कि यह हीरा है और यह काँच.. .. 

जो आदमी इतने राज्यो को जीतकर आया था 
वह नतमस्तक हो गया.. 
और बोला....
“सही है आपने पहचान लिया.. धन्य हो आप… 
अपने वचन के मुताबिक.....
यह हीरा.....
मै आपके राज्य की तिजोरी मे दे रहा हूँ ” .. 

सब बहुत खुश हो गये 
और जो आदमी आया था वह भी 
बहुत प्रसन्न हुआ कि कम से कम 
कोई तो मिला परखने वाला.. 

उस आदमी, राजा और अन्य सभी 
लोगो ने उस अंधे व्यक्ति से एक ही 
जिज्ञासा जताई कि तुमने यह कैसे 
पहचाना कि यह हीरा है और वह काँच.. .. 

उस अंधे ने कहा की सीधी सी बात है मालिक 
धूप मे हम सब बैठे है.. मैने दोनो को छुआ .. 
जो ठंडा रहा वह हीरा.....
जो गरम हो गया वह काँच...

जीवन मे आप भी देखना.....
👇👇👇👇
जो बात बात मे गरम हो जाये, उलझ जाये...
वह व्यक्ति "काँच" है।
और 

जो विपरीत परिस्थिति मे भी ठंडा रहे.....
 वह व्यक्ति "हीरा" है..!!

*⏰🐎✍️🎪🙏विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं,इस कहानी में हम सभी के लिए महत्वपूर्ण अति आवश्यक स्वयं को पहचानने की विधि दी गई है।इस विधि से स्वयं को जानकर स्वयं का सुधार करें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 27 मार्च 2023

वाणी दोष

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*वाणी दोष*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒वाणी दोष  ✍️🐒*

एक बार एक बूढ़े आदमी ने अफवाह फैलाई कि उसके पड़ोस में रहने वाला नौजवान चोर है।

यह बात दूर - दूर तक फैल गई आस - पास के लोग उस नौजवान से बचने लगे।

नौजवान परेशान हो गया कोई उस पर विश्वास ही नहीं करता था।

तभी गाँव में चोरी की एक वारदात हुई और शक उस नौजवान पर गया उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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लेकिन कुछ दिनों के बाद सबूत के अभाव में वह निर्दोष साबित हो गया।

निर्दोष साबित होने के बाद वह नौजवान चुप नहीं बैठा उसने बूढ़े आदमी पर गलत आरोप लगाने के लिए मुकदमा दायर कर दिया।

पंचायत में बूढ़े आदमी ने अपने बचाव में सरपंच से कहा..

मैंने जो कुछ कहा था, वह एक टिप्पणी से अधिक कुछ नहीं था किसी को नुकसान पहुंचाना मेरा मकसद नहीं था।

सरपंच ने बूढ़े आदमी से कहा... आप एक कागज के टुकड़े पर वो सब बातें लिखें, जो आपने उस नौजवान के बारे में कहीं थीं..

...और जाते समय उस कागज के टुकड़े - टुकड़े करके घर के रस्ते पर फ़ेंक दें कल फैसला सुनने के लिए आ जाएँ..

बूढ़े व्यक्ति ने वैसा ही किया..

अगले दिन सरपंच ने बूढ़े आदमी से कहा कि फैसला सुनने से पहले आप बाहर जाएँ और उन कागज के टुकड़ों को...

जो आपने कल बाहर फ़ेंक दिए थे, इकट्ठा कर ले आएं...

बूढ़े आदमी ने कहा मैं ऐसा नहीं कर सकता.. उन टुकड़ों को तो हवा कहीं से कहीं उड़ा कर ले गई होगी...

अब वे नहीं मिल सकेंगें... मैं कहाँ - कहाँ उन्हें खोजने के लिए जाऊंगा ?

सरपंच ने कहा 'ठीक इसी तरह, एक सरल - सी टिप्पणी भी किसी का मान - सम्मान उस सीमा तक नष्ट कर सकती है...

जिसे वह व्यक्ति किसी भी दशा में दोबारा प्राप्त करने में सक्षम नहीं हो सकता।

इसलिए यदि किसीके बारे में कुछ अच्छा नहीं कह सकते, तो चुप रहें।

वाणी पर हमारा नियंत्रण होना चाहिए,ताकि हम शब्दों के दास न बनें..!!

*⏰✍️🔔🙏🐎विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, वर्तमान में हम सभी चौबीस घंटों में जो कुछ भी देखते है उसके बारे में कुछ गलत धारणाएं बना लेते है। समय के अनुसार वह धारणाएं शब्दों के द्वारा व्यक्त भी करते हैं।जिस कारण से कर्म बंध हो जाता है। अतः हम सभी को जब तक किसी के बारे में शास्त्रोक्त जानकारी ना हो तब तक नहीं बोलना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 26 मार्च 2023

महामारी का कारण

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*महामारी का कारण*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒महामारी  का कारण ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.चैत्र शुक्ल षष्ठी , सोमवार दिनांक 27 मार्च  2023 को तृतीय तीर्थंकर सभी को  संभवता  प्रदाता संभवनाथ भगवान जी का मोक्ष  कल्याणक महोत्सव है। मोक्ष कल्याणक शिखरजी में धवल कूट पर हुआ था | आज के ही दिन संध्या के समय मृगशिर नक्षत्र में 1000 मुनिराजों के साथ मोक्ष पद को प्राप्त किया था | इस कूट से 9 कोड़ा कोड़ी 12 लाख 42 हजार 500 मुनि सिद्ध भये | सभी धर्म प्रेमी दर्शन-पूजन करके अपने पुण्य को गाढ़ा करें।*
*यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक बार एक राजा के राज्य में महामारी फैल गयी। चारो ओर लोग मरने लगे। राजा ने इसे रोकने के लिये बहुत सारे उपाय करवाये मगर कुछ असर न हुआ और लोग मरते रहे। 

 राजा ने विशेष अनुष्ठान करके परमात्मा से प्रार्थना की कि यहां की प्रजा निरोगी व सुखी रहें। तभी अचानक आकाशवाणी हुई। आसमान से आवाज़ आयी कि हे राजा! तुम्हारी राजधानी के बीचों बीच जो पुराना सूखा कुंआ है, अगर अमावस्या की रात को राज्य के प्रत्येक घर से एक-एक लोटा दूध उस कुएं में डाला जाये तो अगली ही सुबह ये महामारी समाप्त हो जायेगी और लोगों का मरना बन्द हो जायेगा। राजा ने तुरन्त ही पूरे राज्य में यह घोषणा करवा दी कि महामारी से बचने के लिए अमावस्या की रात को हर घर से कुएं में एक-एक  लोटा  दूध डाला जाना अनिवार्य है। 

अमावस्या की रात जब लोगों को कुएं में दूध डालना था। उसी रात राज्य में रहने वाली एक चालाक एवं कंजूस बुढ़िया ने सोंचा कि सारे लोग तो कुंए में दूध डालेंगे, अगर मैं अकेली एक  लोटा  पानी डाल दूं तो किसी को क्या पता चलेगा। इसी विचार से उस कंजूस बुढ़िया ने रात में चुपचाप एक  लोटा  पानी कुंए में डाल दिया। अगले दिन जब सुबह हुई तो लोग वैसे ही मर रहे थे। कुछ भी नहीं बदला था क्योंकि महामारी समाप्त नहीं हुई थी। राजा ने जब कुंए के पास जाकर इसका कारण जानना चाहा तो उसने देखा कि सारा कुंआ पानी से भरा हुआ है। दूध की एक बूंद भी वहां नहीं थी। राजा समझ गया कि इसी कारण से महामारी दूर नहीं हुई और लोग अभी भी मर रहे हैं।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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दरअसल ऐसा इसलिये हुआ जब वहां की प्रजा ने भगवान की आकाशवाणी के अनुसार कार्य नहीं किया इस कारण से वह कर्म परेशानी का कारण बना। जो विचार उस बुढ़िया के मन में आया था वही विचार पूरे राज्य के लोगों के मन में आ गया और किसी ने भी कुंए में दूध नहीं डाला। 

जैसा इस प्रसंग में हुआ वैसा ही हमारे जीवन में भी होता है। जब भी कोई ऐसा काम आता है जिसे बहुत सारे लोगों को मिल कर करना होता है तो अक्सर हम अपनी जिम्मेदारियों से यह सोच कर पीछे हट जाते हैं कि कोई न कोई तो कर ही देगा और हमारी इसी सोच की वजह से स्थितियां वैसी की वैसी बनी रहती हैं। अगर हम दूसरों की परवाह किये बिना अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाने लग जाएं तो पूरे देश की जनता ऐसा बदलाव ला सकती हैं जिसकी आज हमें जरूरत है। 

*🔔🪔🙏⛳⏰विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, हमें अपना यह मनुष्य भव सार्थक करना है तो हमें शास्त्रों के अनुसार अपने कार्य करते हुए कुछ ऐसे कार्य जो अकेले में सम्पन्न होते है और कुछ ऐसे कार्य जो सामूहिक किए जाते है।उन सभी कार्यों में हमारा सहयोग होना आवश्यक है।कब किस कार्य के पुण्य की हमें आवश्यकता पड़ जाएं कुछ नहीं कह सकते। इसलिए जब भी हमें अवसर प्राप्त हो ऐसे अवसर का लाभ अवश्य ही लेना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 25 मार्च 2023

समझदार कौन

*समझदार कौन*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 समझदार कौन ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.चैत्र शुक्ल पंचमी , रविवार दिनांक 26 मार्च 2023 को द्वितीय तीर्थंकर सभी को विशालता प्रदाता अजितनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है। यह कल्याणक , शिखरजी में सिद्धवर कूट पर हुआ था | आज के ही दिन प्रातःकाल रोहिणी नक्षत्र के उदयकाल में मोक्ष पद को प्राप्त किया था | इस कूट से एक अरब 80 करोड़ 54 लाख मुनि सिद्ध भये |*
*🕉️2.चैत्र शुक्ल षष्ठी , सोमवार दिनांक 27 मार्च 2023 को तृतीय तीर्थंकर सभी को संभवता प्रदाता संभवनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
एक राजा जिसका बहुत बडा राज्य था। कोई कमी नहीं थी जो भी हुक्म करते वही हो जाता था। लेकिन राजा में एक आदत थी कि वह जो भी कोई थोड़ी सी गलती करता उसे तुरंत दस बडे खुंखार कुत्तों के सामने डालकर उसे कुत्तों से नुचवाता। राजा बडे गुस्से वाला था।

राजा की इस आदत से सभी परेशान थे। राजा का मंत्री भी राजा की इस आदत की आलोचना करता था। एक दिन उसी मंत्री से कोई गलती हो गयी। राजा को गलती का पता चला तो राजा ने तुरंत हुक्म दिया कि जाओ मंत्री को कुत्तों के सामने ले जाओ।

मंत्री ने राजा से गलती मानी, माफी मांगी लेकिन राजा ने कुछ नहीं सुना। और कहा कि जो कह दिया सो कह दिया। और सिपाहियों से कहा ले जाओ कुत्तों के बाडे में। मंत्री ने कहा ठीक है राजा जी लेकिन मेरी आखिरी इच्छा तो मान लो। राजा ने कहा ठीक है बताओ अपनी आखिरी इच्छा। मंत्री ने कहा मुझे दस दिन की महौलत दे दीजिए बस। राजा ने कहा ठीक है दस दिन की महौलत दे देते हैं।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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लेकिन ग्यारहवें दिन सजा जरूर मिलेगी। मंत्री दस दिन तक राजा के पास नहीं आया। और ग्यारहवें दिन राजा के सामने पेश हो गया। राजा ने मंत्री को देखा और सिपाहियों से कहा जो सजा रखी थी मंत्री के लिए उसे पूरी की जाए। सिपाही मंत्री को कुत्तों के बाडे में लेकर गये, कुत्तों को भी खोल दिया गया। लेकिन कुत्ते मंत्री पर प्रहार करने के बजाय मंत्री से प्यार से पेश आ रहे थे।

यह देखकर राजा चौंक गया कि जिन कुत्तों को प्रहार करने के लिए ट्रेन किया गया है वे इतने प्यार से पेश आ रहे हैं। राजा ने मंत्री से कहा कि ये चमत्कार कैसे हो गया! इन कुत्तों को क्या हो गया है। मंत्री ने जवाब दिया कि इन दस दिनों में मैंने इन कुत्तों की बहुत सेवा की है। इन्हें खाना खिलाया, नहलाया अब ये कुत्ते जान चुके हैं कि मैं इनके लिए कुछ अच्छा करता हूं ना कि बुरा। ये मुझ पर प्रहार नहीं करेंगे। मैंने आपकी इतने दिनों से सेवा की है, फिर भी आप मेरी एक गलती को माफ नहीं कर सके। आपसे ज्यादा अच्छे तो ये कुत्ते हैं जो अच्छा और बुरे को पहचानते हैं। राजा यह सब देखकर बड़ा शर्मिन्दा हुआ।

हमें हमेशा सोच समझ कर फैसले लेने चाहिए। किसी की एक गलती को लेकर ही उसे जिन्दगी भर के लिए सजा नहीं देनी चाहिये बल्कि उसे माफ करने की हिम्मत रखनी चाहिए..!!

*✅🪔⛳⏰🎪विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज वर्तमान समय में मनुष्यों के अंदर की इंसानियत कम हो रही है।वह इंसानियत आज कुछ जानवरों में दिखाई दे रही है। अतः हम सभी को अपने स्वभाव का समय रहते आकलन करना अनिवार्य है।*

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समझदार कौन

*🔔समझदार कौन🔔*
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*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 समझदार कौन ✍️🐒*

एक राजा जिसका बहुत बडा राज्य था। कोई कमी नहीं थी जो भी हुक्म करते वही हो जाता था। लेकिन राजा में एक आदत थी कि वह जो भी कोई थोड़ी सी गलती करता उसे तुरंत दस बडे खुंखार कुत्तों के सामने डालकर उसे कुत्तों से नुचवाता। राजा बडे गुस्से वाला था।

राजा की इस आदत से सभी परेशान थे। राजा का मंत्री भी राजा की इस आदत की आलोचना करता था। एक दिन उसी मंत्री से कोई गलती हो गयी। राजा को गलती का पता चला तो राजा ने तुरंत हुक्म दिया कि जाओ मंत्री को कुत्तों के सामने ले जाओ।

मंत्री ने राजा से गलती मानी, माफी मांगी लेकिन राजा ने कुछ नहीं सुना। और कहा कि जो कह दिया सो कह दिया। और सिपाहियों से कहा ले जाओ कुत्तों के बाडे में। मंत्री ने कहा ठीक है राजा जी लेकिन मेरी आखिरी इच्छा तो मान लो। राजा ने कहा ठीक है बताओ अपनी आखिरी इच्छा। मंत्री ने कहा मुझे दस दिन की महौलत दे दीजिए बस। राजा ने कहा ठीक है दस दिन की महौलत दे देते हैं।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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लेकिन ग्यारहवें दिन सजा जरूर मिलेगी। मंत्री दस दिन तक राजा के पास नहीं आया। और ग्यारहवें दिन राजा के सामने पेश हो गया। राजा ने मंत्री को देखा और सिपाहियों से कहा जो सजा रखी थी मंत्री के लिए उसे पूरी की जाए। सिपाही मंत्री को कुत्तों के बाडे में लेकर गये, कुत्तों को भी खोल दिया गया। लेकिन कुत्ते मंत्री पर प्रहार करने के बजाय मंत्री से प्यार से पेश आ रहे थे।

यह देखकर राजा चौंक गया कि जिन कुत्तों को प्रहार करने के लिए ट्रेन किया गया है वे इतने प्यार से पेश आ रहे हैं। राजा ने मंत्री से कहा कि ये चमत्कार कैसे हो गया! इन कुत्तों को क्या हो गया है। मंत्री ने जवाब दिया कि इन दस दिनों में मैंने इन कुत्तों की बहुत सेवा की है। इन्हें खाना खिलाया, नहलाया अब ये कुत्ते जान चुके हैं कि मैं इनके लिए कुछ अच्छा करता हूं ना कि बुरा। ये मुझ पर प्रहार नहीं करेंगे। मैंने आपकी इतने दिनों से सेवा की है, फिर भी आप मेरी एक गलती को माफ नहीं कर सके। आपसे ज्यादा अच्छे तो ये कुत्ते हैं जो अच्छा और बुरे को पहचानते हैं। राजा यह सब देखकर बड़ा शर्मिन्दा हुआ।

हमें हमेशा सोच समझ कर फैसले लेने चाहिए। किसी की एक गलती को लेकर ही उसे जिन्दगी भर के लिए सजा नहीं देनी चाहिये बल्कि उसे माफ करने की हिम्मत रखनी चाहिए..!!

*✅🪔⛳⏰🎪विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज वर्तमान समय में मनुष्यों के अंदर की इंसानियत कम हो रही है।वह इंसानियत आज कुछ जानवरों में दिखाई दे रही है। अतः हम सभी को अपने स्वभाव का समय रहते आकलन करना अनिवार्य है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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शुक्रवार, 24 मार्च 2023

संस्कारों का महत्व

*🔔संस्कारों का महत्व🔔*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 संस्कारों का महत्व ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.चैत्र शुक्ल पंचमी ,     रविवार दिनांक 26 मार्च  2023 को द्वितीय तीर्थंकर सभी को  विशालता  प्रदाता अजितनाथ भगवान जी का मोक्ष  कल्याणक महोत्सव है। यह कल्याणक , शिखरजी में सिद्धवर कूट पर हुआ था | आज के ही दिन प्रातःकाल रोहिणी नक्षत्र के उदयकाल में मोक्ष पद को प्राप्त किया था |  इस कूट से एक अरब 80 करोड़ 54 लाख मुनि सिद्ध भये |*
*🕉️2.चैत्र शुक्ल षष्ठी , सोमवार दिनांक 27 मार्च  2023 को तृतीय तीर्थंकर सभी को  संभवता  प्रदाता संभवनाथ भगवान जी का मोक्ष  कल्याणक महोत्सव है।*
*यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

*एक बूढ़ी माता मंदिर के सामने भीख माँगती थी। एक संत ने पूछा - आपका बेटा लायक है, फिर यहाँ क्यों ??*

*बूढ़ी माता बोली - बाबा, मेरे पति का देहांत हो गया है। मेरा पुत्र परदेस नौकरी के लिए चला गया। जाते समय मेरे खर्चे के लिए कुछ रुपए देकर गया था, वे खर्च हो गये इसीलिए भीख माँग रही हूँ।*

*संत ने पूछा - क्या तेरा बेटा तुझे कुछ नहीं भेजता ??*

*बूढ़ी माता बोली - मेरा बेटा हर महीने एक रंग-बिरंगा कागज भेजता है जिसे मैं दीवार पर चिपका देती हूँ।*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

*संत ने उसके घर जाकर देखा कि दीवार पर 60  बैंक ड्राफ्ट चिपकाकर रखे थे। प्रत्येक ड्राफ्ट ₹50,000 राशि का था। पढ़ी-लिखी न होने के कारण वह नहीं जानती थी कि उसके पास कितनी संपति है। संत ने उसे ड्राफ्ट का मूल्य समझाया।*

*हमारी स्थिति भी उस बूढ़ी माता की भाँति ही है।*

*हमारे पास धर्मगुरु, धर्मग्रंथ तो हैं पर माथे से लगाकर अपने घर में सुसज्जित कर के रखते हैं।*

*जबकि हम उनका वास्तविक लाभ तभी उठा पाएगें जब हम* 

*गुरु के मार्गदर्शन में उनका अध्ययन*, 
*चिंतन*, 
*मनन करके* 
*उन्हें अपने जीवन में उतारेगें*।

*विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हमें बड़े पुण्य से इस कलिकाल में मनुष्य पर्याय के साथ संस्कारों वाला परिवार प्राप्त हुआ है। आज हम सोशल मीडिया व अन्य लोगों को देखकर अपने संस्कारों को भूला रहें है।इस कारण से हमारे अंदर व परिवार में अनेक विपरीत परिस्थितियां निर्मित होने से हम अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने में असमर्थ हो रहें है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 23 मार्च 2023

हमारी भूल

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🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒हमारी भूल ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.चैत्र शुक्ल 3 ,    शुक्रवार दिनांक 24 मार्च  2023 को   17 वें तीर्थंकर सभी के सुख प्रदाता कुंथुनाथ भगवान जी का ज्ञान  कल्याणक महोत्सव है। ज्ञान कल्याणक  महोत्सव हस्तिनापुर में हुआ था | आज के ही दिन कृतिका नक्षत्र में तिलक वृक्ष के नीचे केवलज्ञान की प्राप्ति हुई थी |इस महोत्सव पर दर्शन-पूजन करें ताकि आपसभी का पुण्य गाढ़ा हो जाए।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मार्च माह में आने वाली   24,26, व 27 तारीख को है। इस माह चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

▶️एक बार किसी गाँव में एक बुढ़िया रात के अँधेरे में अपनी झोपडी के आगे कुछ खोज रही थी ।तभी गाँव के ही एक व्यक्ति की नजर उस पर पड़ी , “अम्मा इतनी रात में रोड लाइट के नीचे क्या ढूंढ रही हो ?” , व्यक्ति ने पूछा।

” कुछ नहीं मेरी सुई गम हो गयी है बस वही खोज रही हूँ .”, बुढ़िया ने उत्तर दिया।

फिर क्या था, वो व्यक्ति भी महिला की मदद करने के लिए रुक गया और साथ में सुई खोजने लगा।

कुछ देर में और भी लोग इस खोज अभियान में शामिल हो गए और देखते- देखते लगभग पूरा गाँव ही इकठ्ठा हो गया।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

सभी बड़े ध्यान से सुई खोजने में लगे हुए थे कि तभी किसी ने बुढ़िया से पूछा ,” अरे अम्मा ! ज़रा ये तो बताओ कि सुई गिरी कहाँ थी?”

” बेटा , सुई तो झोपड़ी के अन्दर गिरी थी .”, बुढ़िया ने ज़वाब दिया ।

ये सुनते ही सभी बड़े क्रोधित हो गए और भीड़ में से किसी ने ऊँची आवाज में कहा , ” कमाल करती हो अम्मा ,हम इतनी देर से सुई यहाँ ढूंढ रहे हैं जबकि सुई अन्दर झोपड़े में गिरी थी , आखिर सुई वहां खोजने की बजाये यहाँ बाहर क्यों खोज रही हो ?”

” क्योंकि रोड पर लाइट जल रही है…इसलिए .”, बुढ़िया बोली।

शायद ऐसा ही आज के युवा अपने भविष्य को लेकर सोचते हैं कि लाइट कहाँ जल रही है वो ये नहीं सोचते कि हमारा योग्यता क्या है वह कहां तक सही राह दिखा रही है।  हमारी सुई कहाँ गिरी है , हमें चाहिए कि हम ये जानने की कोशिश करें कि हम किस फील्ड में अच्छा कर सकते हैं और उसी में अपना करीयर बनाएं ना कि भेड़ चाल चलते हुए किसी ऐसी फील्ड में घुस जाएं जिसमे बाकी लोग जा रहे हों या जिसमे हमें अधिक पैसा नज़र आ रहा हो।
*⏰🌞👪🎪🔑विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज वर्तमान में हमें अपनी योग्यता के साथ अपने धर्म का ख्याल रखते हुए अपनी मंजिल निर्धारित करना चाहिए। जिससे भविष्य में हमें पश्चाताप नहीं करना पड़ेगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 22 मार्च 2023

मेरा आत्मविश्वास

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🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरा आत्मविश्वास ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.चैत्र शुक्ल 3 ,    शुक्रवार दिनांक 24 मार्च  2023 को   17 वें तीर्थंकर सभी के सुख प्रदाता कुंथुनाथ भगवान जी का ज्ञान  कल्याणक महोत्सव है। ज्ञान कल्याणक  महोत्सव हस्तिनापुर में हुआ था | आज के ही दिन कृतिका नक्षत्र में तिलक वृक्ष के नीचे केवलज्ञान की प्राप्ति हुई थी |इस महोत्सव पर दर्शन-पूजन करें ताकि आपसभी का पुण्य गाढ़ा हो जाए।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मार्च माह में आने वाली   24,26, व 27 तारीख को है। इस माह चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक बार एक गांव में एक सज्जन पुरूष रहते थे, वे बहुत ही दयालू तथा हृदय ग्राही थे, किसी को भी कभी अपशब्द नहीं कहते थे। जो भी उनके घर आता वे अच्छे से उसका आथित्य सत्कार करते। लोग उनसे सलाह मशविरा लेने आया जाया करते थे।

एक बार एक कैदी जेल से भाग जाता है, पुलिस उसके पीछे लगी रहती है। वह जब गांव के बीच पहुंचता है तो उसे एक घर का दरवाजा खुला दिखता है। वह घर उसी सज्जन पुरूष का था। वह बिना इजाजत के अन्दर प्रवेश करता है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

जैसे ही वह कैदी अन्दर पहुचता है तो वह सज्जन पुरूष बड़ी सौम्यता से कहते है, आइए महाराज आपका स्वागत है। उसे आराम से बिठाता है और कहता है कि तुम कौन हो और कहां से आ रहे हो। वह कैदी कहता है कि मैं रास्ता भटक गया हूं, क्या आप मुझे आज रात रहने की जगह दे सकते हैं। आपका बडा एहसान होगा।

वह पुरूष कहता है- क्यों नहीं आप आराम से यहां रहिए, आप नहा लिजिए मैं आपके लिये खाने सोने की व्यवस्था करता हूं। जब तक वह कैदी नहाता है तब तक वह सज्जन पुरूष उसके लिए सब व्यवस्था करता है। खाने के बाद सब सो जाते हैं। लेकिन उसकी नियत खराब हो जाती है और वह वहां से सोने की चीजें चुरा लेता है और फिर भाग जाता है।

रास्ते में पुलिस उसे पकड़ लेती है। और जब पूछताछ करती है तो वह कहता है कि मैंने उस सज्जन पुरूष के यहां से यह चुराया है। उस कैदी को उस पुरूष के सामने लाया जाता है। लेकिन वह पुरूष कहता है कि यह सोने की वस्तु मैंने ही इसे दान में दी है।

उस कैदी की आंखें खुल जाती है और उस पुरूष से माफी मांगता है। और कहता है कि जब भी तुम्हें किसी चीज की जरूरत हो तो मांग लेना चाहिए ना की चुराना।

इसीलिये कहा गया है कि विश्वास रखो तो सब कुछ सही हो जाता है।

*⛳👪🔔✅⏰विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हमारी असफलता का मुख्य कारण यह है कि हमनें स्वयं का आत्मविश्वास खो दिया है।इसे पुनः प्राप्त करने के लिए हमें अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए आचरण को शुद्ध करना आवश्यक है।आज से हमें संकल्प पूर्वक स्वयं के साथ परिवार व समाज का सहयोगी बनना है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 21 मार्च 2023

मेरा सपना

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरा सपना ✍️🐒*

*🔔🙏चैत्र शुक्ल एकम हिंदू मान्यताओं के अनुसार नववर्ष की विश्व के सभी भारत प्रेमियों को शुभकामनाएं🙏🔔*
*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.चैत्र शुक्ल एकम ,    बुधवार दिनांक 22 मार्च  2023 को  उन्नीसवें तीर्थंकर सभी की मलिनता हर्ता मल्लिनाथ भगवान जी का गर्भ  कल्याणक महोत्सव है। तीर्थंकर मल्लिनाथ जी का गर्भ कल्याणक , मिथिलापुरी ( सीतामढ़ी – बिहार ) में हुआ था | आज के ही दिन रात्रि के पिछले प्रहर व अश्विनी नक्षत्र में मातारानी प्रजापति के गर्भ में अवतीर्ण हुए थे | आप सभी दर्शन, पूजन ,अभिषेक, शांतिधारा व अन्य उत्सव करके अपने पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मार्च माह में आने वाली  24,26, व 27 तारीख को है। इस माह चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

✍️एक शहर में एक परिश्रमी, ईमानदार और सदाचारी बालक रहता था। माता-पिता, भाई-बहन, मित्र, रिश्तेदार सब उसे बहुत प्यार करते थे। सबकी सहायता को तत्पर रहने के कारण पड़ोसी से लेकर सहकर्मी तक उसका सम्मान करते थे।

  सब कुछ अच्छा था, किंतु जीवन में वह जिस सफ़लता प्राप्ति का सपना देखा करता था, वह उससे कोसों दूर था।

वह दिन-रात जी-जान लगाकर मेहनत करता, किंतु असफलता ही उसके हाथ लगती। उसका पूरा जीवन ऐसे ही निकल गया और अंत में जीवनचक्र से निकलकर वह कालचक्र में समा गया।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

चूंकि उसने जीवन में सुकर्म किये थे, इसलिए उसे स्वर्ग की प्राप्ति हुई. देवदूत उसे लेकर स्वर्ग पहुँचे। स्वर्गलोक का अलौकिक सौंदर्य देख वह मंत्रमुग्ध हो गया और देवदूत से बोला, “ये कौन सा स्थान है?”

“ये स्वर्गलोक है, तुम्हारे अच्छे कर्म के कारण तुम्हें स्वर्ग में स्थान प्राप्त हुआ है। अब से तुम यहीं रहोगे.” देवदूत ने उत्तर दिया।

यह सुनकर लड़का खुश हो गया। देवदूत ने उसे वह घर दिखाया, जहाँ उसके रहने की व्यवस्था की गई थी। वह एक आलीशान घर था।इतना आलीशान घर उसने अपने जीवन में कभी नहीं देखा था।

देवदूत उसे घर के भीतर लेकर गया और एक-एक कर सारे कक्ष दिखाने लगा। सभी कक्ष बहुत सुंदर थे। अंत में वह उसे एक ऐसे कक्ष के पास लेकर गया, जिसके सामने “स्वप्न कक्ष” लिखा हुआ था।

जब वे उस कक्ष के अंदर पहुँचे, तो लड़का यह देखकर दंग रह गया कि वहाँ बहुत सारी वस्तुओं के छोटे-छोटे प्रतिरूप रखे हुए थे। ये वही वस्तुयें थीं, जिन्हें पाने के लिए उसने आजीवन मेहनत की थी, किंतु हासिल नहीं कर पाया था। आलीशान घर, कार, उच्चाधिकारी का पद और ऐसी ही बहुत सी चीज़ें, जो उसके सपनों में ही रह गए थे।

वह सोचने लगा कि इन चीज़ों को पाने के सपने मैंने धरती लोक में देखे थे, किंतु वहाँ तो ये मुझे मिले नहीं। अब यहाँ इनके छोटे प्रतिरूप इस तरह क्यों रखे हुए हैं? वह अपनी जिज्ञासा पर नियंत्रण नहीं रख पाया और पूछ बैठा, “ये सब…यहाँ…इस तरह…इसके पीछे क्या कारण है?”

देवदूत ने उसे बताया, “मनुष्य अपने जीवन में बहुत से सपने देखता है और उनके पूरा हो जाने की कामना करता है। किंतु कुछ ही सपनों के प्रति वह गंभीर होता है और उन्हें पूरा करने का प्रयास करता है। जीव के कर्म अनुसार ईश्वर और ब्रह्माण्ड मनुष्य के हर सपने पूरा करने की तैयारी करते है। लेकिन कई बार असफलता प्राप्ति से हताश होकर और कई बार दृढ़ निश्चय की कमी के कारण मनुष्य उस क्षण प्रयास करना छोड़ देता है, जब उसके सपने पूरे होने वाले ही होते हैं। उसके वही अधूरे सपने यहाँ प्रतिरूप के रूप में रखे हुए है। तुम्हारे सपने भी यहाँ प्रतिरूप के रूप में रखे है। तुमने अंत समय तक हार न मानी होती, तो उसे अपने जीवन में प्राप्त कर चुके होते।”

लड़के को अपने जीवन काल में की गई गलती समझ आ गई। किंतु मृत्यु पश्चात् अब वह कुछ नहीं कर सकता था।

*🔔🪔🌞⛳🎪विशेष : - भव्य‌‌‌ आत्माओं,किसी भी सपने को पूर्ण करने की दिशा में काम करने के पूर्व यह दृढ़ निश्चय कर लें कि चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आये? चाहे कितनी बार भी असफलता का सामना क्यों न करना पड़े? अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में तब तक प्रयास करते रहेंगे, जब तब वे पूरे नहीं हो जाते,अन्यथा समय निकल जाने के बाद यह मलाल रह जाएगा कि काश मैंने थोड़ा प्रयास और किया होता। अपने सपनों को अधूरा मत रहने दीजिये, दृढ़ निश्चय और अथक प्रयास से उन्हें हकीक़त में तब्दील करके ही दम लीजिये..!!*


*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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सोमवार, 20 मार्च 2023

लक्ष्य प्राप्ति के लिए

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
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*💪👩‍🚒 लक्ष्य प्राप्ति के लिए ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*दो तीर्थंकरो का मोक्ष एक तिथि में*
*🕉️1.चैत्र अमावस्या ,    मंगलवार दिनांक 21 मार्च  2023 को  चौदहवें तीर्थंकर सभी के ज्ञान को अनंतता  प्रदाता अनंतनाथ भगवान जी का ज्ञान व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।तीर्थंकर अनन्तनाथ जी का  मोक्ष कल्याणक शाश्वत सम्मेद शिखरजी के स्वयंभु कूट पर हुआ था | आज के ही दिन उषाकाल में 6100 मुनिराजों के साथ मोक्ष पद को प्राप्त किया था | इस कूट से 96 कोड़ा कोड़ी 70 करोड़ 70 लाख 70 हजार 700 मुनि सिद्ध भये ।*
*आज ही के दिन अठारहवें तीर्थंकर सभी के दु:खहर्ता अरनाथ भगवान जी का  मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।21 मार्च दिन मंगलवार तीर्थंकर अरनाथ जी का है मोक्ष कल्याणक , शिखरजी में नाटक कूट पर हुआ था | आज के ही दिन रात्रि के पिछले प्रहर व रेवती नक्षत्र में 1000 राजाओं के साथ मोक्ष पद को प्राप्त किया था | इस कूट से 99 करोड़ 99 लाख 99 हजार 999 मुनि सिद्ध भये |आप सभी दोनों तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव शक्ति अनुसार दर्शन पूजन कर स्वयं के पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मार्च माह में आने वाली  21,22 चैत्र शुक्ल एकम, 24,26, व 27 तारीख को है। इस माह चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

✍️एक लड़के ने एक बार एक बहुत ही धनवान व्यक्ति को देखकर धनवान बनने का निश्चय किया। वह धन कमाने के लिए कई दिनों तक मेहनत कर धन कमाने के पीछे पड़ा रहा और बहुत सारा पैसा कमा लिया। इसी बीच उसकी मुलाकात एक विद्वान से हो गई। विद्वान के ऐश्वर्य को देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया और अब उसने विद्वान बंनने का निश्चय कर लिया और अगले ही दिन से धन कमाने को छोड़कर पढने-लिखने में लग गया। वह अभी अक्षर ज्ञान ही सिख पाया था, की इसी बीच उसकी मुलाकात एक संगीतज्ञ से हो गई। उसको संगीत में अधिक आकर्षण दिखाई दिया, इसीलिए उसी दिन से उसने पढाई बंद कर दी और संगीत सिखने में लग गया।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

इसी तरह काफी उम्र बित गई, न वह धनी हो सका ना विद्वान और ना ही एक अच्छा संगीतज्ञ बन पाया। तब उसे बड़ा दुख हुआ। एक दिन उसकी मुलाकात एक बहुत वृध्द महात्मा से हुई। उसने महात्मन को अपने दुःख का कारण बताया। महात्मा ने उसकी परेशानी सुनी और मुस्कुराकर बोले, “बेटा, दुनिया बड़ी ही चिकनी है, जहाँ भी जाओगे कोई ना कोई आकर्षण ज़रूर दिखाई देगा। एक निश्चय कर लो और फिर जीते जी उसी पर अमल करते रहो तो तुम्हें सफलता की प्राप्ति अवश्य हो जाएगी, नहीं तो दुनियां के झमेलों में यूँ ही चक्कर खाते रहोगे। बार-बार रूचि बदलते रहने से कोई भी उन्नत्ति नहीं कर
युवक महात्मा की बात को समझ गया और एक लक्ष्य निश्चित कर उसी का अभ्यास करने लगा।

*👨‍👩‍👦‍👦🐒💯💡🔔विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं,उपर्युक्त प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि हम जिस भी कार्य को करें, पूरे तन और मन से से एकाग्रचित होकर करें, बार-बार इधर-उधर भटकने से बेहतर यही की एक जगह टिककर मेहनत की जाएं, तभी सफलता प्राप्त की जा सकती है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 19 मार्च 2023

सपनों की दुनिया

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒सपनों की दुनिया ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.चैत्र अमावस्या ,    मंगलवार दिनांक 21 मार्च  2023 को  चौदहवें तीर्थंकर सभी के ज्ञान को अनंतता  प्रदाता अनंतनाथ भगवान जी का ज्ञान व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*आज ही के दिन अठारहवें तीर्थंकर सभी के दु:खहर्ता अरनाथ भगवान जी का  मोक्ष कल्याणक महोत्सव है। तीर्थंकर अनन्तनाथ जी का  मोक्ष कल्याणक शाश्वत सम्मेद शिखरजी के स्वयंभु कूट पर हुआ था | आज के ही दिन उषाकाल में 6100 मुनिराजों के साथ मोक्ष पद को प्राप्त किया था | इस कूट से 96 कोड़ा कोड़ी 70 करोड़ 70 लाख 70 हजार 700 मुनि सिद्ध भये |दर्शन पूजन अभिषेक करके स्वयं के पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मार्च माह में आने वाली  22 चैत्र शुक्ल एकम, 24,26, व 27 तारीख को है। इस माह चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

बहुत समय पहले की बात हैं, एक व्यक्ति था जो बेहद आलसी और साथ ही साथ गरीब भी था। वह कुछ भी मेहनत नहीं करना चाहता था। लेकिन अमीर बनने का सपना देखता रहता था। वह भिक्षा मांगकर अपना गुजारा करता था।

एक सुबह उसे भिक्षा के रूप में दूध से भरा एक घड़ा मिला। वह बहुत प्रसन्न हुआ और दूध का घड़ा लेकर घर चला गया।

उसने दूध को उबाला, उसमें से कुछ दूध पिया और बचा हुआ दूध, एक बर्तन में डाल दिया। दूध को दही में बदलने के लिए उसने बर्तन में थोड़ा सा दही डाला। इसके बाद वह सोने के लिए लेट गया। वह सोते समय दही के बर्तन के बारे में सोचने लगा।

उसने सोचा, “सुबह तक दूध दही बन जायेगा। मैं दही को मथकर उससे मक्खन बना लूंगा। फिर मक्खन को गर्म करके उससे घी बना लूंगा। फिर घी को बाजार में जाकर उसे बेच दूँगा और कुछ पैसे कमा लूंगा। उस पैसे से मैं एक मुर्गी खरीदूंगा। मुर्गी अंडे देगी, उन अंडो से बहुत सारे मुर्गे मुर्गी पैदा होंगे। फिर ये मुर्गियां सैकड़ों अंडे देगी और मेरे पास जल्द ही एक पोल्ट्री फार्म होगा।” वह कल्पना में डूबा रहा।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

फिर उसने सोचा, “मैं सारी मुर्गियां बेच दूंगा और फिर कुछ गाय भैंस खरीद लूंगा और दूध की डेयरी खोल दूंगा। शहर के सभी लोग मुझसे दूध खरीदने आएंगे और मैं बहुत जल्दी ही अमीर हो जाऊंगा। फिर में अमीर परिवार की खूबसूरत लड़की से शादी कर कर लूंगा। फिर मेरा एक सुंदर सा बेटा होगा। अगर वह कोई शरारत करेगा तो मुझे बहुत गुस्सा आएगा और उसे सबक सिखाने के लिए मैं उसे डंडे से ऐसे मारूंगा।”

यह सोचने के दौरान उसने बिस्तर के बगल में पड़ा डंडा उठाया और मारने का नाटक करने लगा। यही डंडा उसके दूध के बर्तन में लग गया और दूध का बर्तन टूट गया, इससे सारा दूध जमीन पर फैल गया।

बर्तन की आवाज सुनकर उस आदमी की नींद उड़ गई। फैला हुआ दूध देखकर उसने अपना सिर पकड़ लिया।

*⏰👪✍️🪔🔑विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, सपने देखो, लेकिन खाली सपने देखने से कुछ नहीं होगा। हमें कड़ी मेहनत करनी होगी। कुछ भी जिंदगी में आसानी से नहीं मिलता हैं। हमारी जिंदगी को बेहतरीन बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। क्योंकि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है।*
*🔔अगर आप केवल सपने ही देखते रहते हैं उनको साकार करने के लिए कोई कदम नहीं उठाते हैं, तो ऐसा करके आप खुद को धोखा दे रहे हैं। इसलिए पहले खुद का 100% दीजिए, फिर सफलता खुद आपके कदम चूमने आएगी।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 18 मार्च 2023

दुःख का स्वाद

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एक बार एक नवयुवक किसी जैन मास्टर के पास पहुंचा ।

“ मास्टरजी , मैं अपनी ज़िन्दगी से बहुत परेशान हूँ , कृपया इस परेशानी से  निकलने का उपाय बताएं !” , युवक बोला .

मास्टर बोले , “ पानी के ग्लास में एक मुट्ठी नमक डालो और उसे पीयो ।

युवक ने ऐसा ही किया ।

इसका स्वाद कैसा लगा ?”, मास्टर ने पुछा।

बहुत ही खराब … एकदम खारा .” – युवक थूकते हुए बोला ।

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मास्टर मुस्कुराते हुए बोले , “एक बार फिर अपने हाथ में एक मुट्ठी नमक लेलो और मेरे पीछे -पीछे आओ ।

दोनों धीरे -धीरे आगे बढ़ने लगे और थोड़ी दूर जाकर स्वच्छ पानी से बनी एक झील के सामने रुक गए ।

चलो ,अब इस नमक को पानी में डाल दो .” , मास्टर ने निर्देश दिया।
युवक ने ऐसा ही किया ।
“ अब इस झील का पानी पियो .” , मास्टर बोले .

युवक पानी पीने लगा …,

एक बार फिर मास्टर ने पूछा ,: “ बताओ इसका स्वाद कैसा है , क्या अभी भी तुम्हे ये खारा लग रहा है ?”

“नहीं , ये तो मीठा है , बहुत अच्छा है ”, युवक बोला ।

मास्टर युवक के बगल में बैठ गए और उसका हाथ थामते हुए बोले , “ जीवन के दुःख बिलकुल नमक की तरह हैं ; न इससे कम ना ज्यादा . जीवन में दुःख की मात्रा वही रहती है , बिलकुल वही ,लेकिन हम कितने दुःख का स्वाद लेते हैं ये इस पर निर्भर करता है कि हम उसे किस पात्र में डाल रहे हैं  इसलिए जब तुम दुखी हो तो सिर्फ इतना कर सकते हो कि खुद को बड़ा कर लो …ग्लास मत बने रहो।।

*⏰👪🪔🔔✅विशेष : -भव्य‌‌‌ आत्माओं, ऐसे विषम परिस्थितियों में हमें अपनी सहनशक्ति को जागृत कर पुरुषार्थ के द्वारा निराकरण करना चाहिए।*

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*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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शुक्रवार, 17 मार्च 2023

मेरा कर्म

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एक बार एक छोटा सा पारिवारिक कार्यक्रम चल रहा था। उसमें बहुत लोग उपस्थित थे। उस कार्यक्रम में बहुत ही बढ़िया अत्यंत सुगंधित बासमती चावल का पुलाव बन रहा था, सभी का मन को पुलाव की लुभावनी सुगंध से बैचेन हो रहा था। 

खाने में देर हो रही थी,भूख भी खूब लग रही थी। आखिर खाने में पुलाव परोसा गया, खाना शुरू ही होने वाला था कि रसोईयें ने आकर कहा कि पुलाव सम्हल कर खाइयेगा क्योंकि शायद उसमें एक आध कंकड़ रह गया है वह किसी के भी मुँह में आ सकता हैं। मैंने बहुत से कंकड़ निकाल दिए हैं, फिर भी एक आध रह गया होगा तो दाँत के नीचे आ सकता हैं। 

यह सुनकर सभी लोग बहुत सम्भल कर खाना खाने लगे सभी को लग रहा था कि कंकड़ उसी के मुँह में आयेगा। यह सोचकर खाने का सारा मजा किरकिरा हो गया और पुलाव खाने की जो प्रबल इच्छा थी वह भी थम गई। सब लोग बिना कुछ बोले, बिना किसी हंसी मजाक के भोजन करने लगे। जब सबने खाना खा लिया तब उन्होंने रसोईये को बुलाया और पूछा कि तुमने ऐसा क्यों कहा था। 

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जबकि कंकड़ तो भोजन में था ही नहीं हममें से किसी के भी मुँह में नहीं आया । तब रसोईये ने कहा कि मैंने अच्छी तरह से चावल बिने थे, लेकिन चावल में कंकड़ भी ज्यादा थे इसलिए मुझे लगा शायद एक आध रह गया होगा। यह सुनकर सब एक दूसरे की तरफ देखने लगे। खाने के बाद किसी को कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था सब निराश हो गए थे क्योंकि सभी का ध्यान कंकड़ में था खाने का स्वाद कोई भी नहीं ले पा रहा था इसलिए सब निराश हो गए। 

यही परिस्थिति हमारी आज की हैं। एक वायरस को लेकर हम हमारी आजादी खो बैठे हैं। हर वस्तु, व्यक्ति, प्राणी पर शंका कर रहे हैं। आज तक जो लोग हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहे हैं, जैसे दूध वाला, फल वाला, सब्जीवाला, पेपर वाला इन लोगों पर से भी हमारा विश्वास उठ गया है, और हम हमारे आज के सुहाने दिन खो बैठे हैं। और शारीरिक रूप से भी थकान महसूस कर रहे हैं। यह सब, कुछ हद, तक हमारी सोच पर भी निर्भर हैं। इसलिए इससे बाहर निकलना है तो वाइरस को नहीं अपने आप को मजबूत करिये । अपने विचारों को सकारात्मक दिशा दीजिये। ईश्वर की भक्ति व स्वयं के पुरुषार्थ  से सब कुछ जल्दी ही अच्छा हो जाएगा। आज के सुंदर दिन के लिए सुंदर शुरुआत करिये । और अपने आप को मजबूत कीजिये । खाना खाते समय खाने  को पूरी रूचि से स्वाद लेकर खाइये, फिर देखिये हमारी जिंदगी कितनी बेहतर हो जाएगी।

*✅🎪↔️🙏⛳विशेष : - भव्य‌‌‌ आत्माओं, हमारा मन चंचल होने से यह एकाग्र नहीं रह सकता। हमें अपने लक्ष्य का ध्यान रखते हुए सुनियोजित क्रम से कार्य करने से मन शांत रहता है।*

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गुरुवार, 16 मार्च 2023

हिरण का पुण्यकर्म

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*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मार्च माह में आने वाली 21,22 चैत्र शुक्ल एकम, 24,26, व  27 तारीख को है। चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी धर्मानुरागी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ निर्मल परिणामों से यथाशक्ति उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदलकर जीवन सार्थक करें।*

▶️एक बार एक हिरण जंगल में पानी की तलाश में घूम रही थी। उसको बहुत प्यास लगी हुई थी इसलिए वो इधर उधर पानी की तलाश में भटक रही थी। वह पानी की तलाश में काफी देर तक भटकती रही, लेकिन उसे कहीं पर भी पानी नही मिला।

थोड़ी देर ओर जंगल में इधर-उधर भटकने के बाद वो एक पेड़ के नीचे बैठ जाती है, तो इतने में उसे नदी के बहने की आवाज सुनाई देती है, तो हिरण उसे पेड़ के नीचे से उठकर फौरन पानी की आवाज की तरफ आगे बढ़ती है।

तो वह देखती है उसे के सामने एक बड़ी सी नदी बह रही है, जैसे ही वो हिरण नदी को देखती है बहुत खुश होती है मानो उसे फिर से एक नई जिंदगी मिल गई हो।

वह तुरंत दौड़ती हुई नदी के पास जाती है और जैसे ही पानी पीने के लिए अपना सिर को झुकाती है, तो उसकी नजर अपने राइट साइड पर पड़ती है, वह जैसे ही अपने राइट में देखती है तो उसे शिकारी नजर आता है, हाथ में तीर लिए हुऐ निशाना तान के खड़ा हुआ। फिर जैसे ही हिरण की नजर अपने लेफ्ट साइड में पडती है, उसे झाड़ियों के पीछे एक शेर नजर आता है, अब हिरण पानी वानी सब भूल जाती है।

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फिर वो पलट के पीछे देखती है तो उसे भयंकर आग लगी हुई दिखाई देती है, जो कि धीरे-धीरे उस उस की तरफ बढ़ रही थी अब हिरण जाएं भी तो जाएं कहां।

बेचारी हिरण राइट में देख रही तो शिकारी नजर आ रहा था जो कि निशाना तान के खड़ा था और अपने लेफ्ट में देख रही तो शेर खड़ा नजर आ रहा था और सामने गहरी लंबी चौड़ी नदी अपने तेज वेग से बह रही थी और पीछे आग लगी हुई थी, मतलब उसके लिए चारों रास्ते बंद हो चुके थे, चारों तरफ से मुसीबत आ चुकी थी।

अब हिरण सोच में पड़ जाती है, अब वो यह सोचती है कि चारों तरफ से मुसीबत आ चुकी है तो में अपना काम करके क्यों ना मरू, क्योंकि मुझे वैसे भी तो मरना है। तो में पानी पीकर क्यों ना मरू।

इतना सोचकर वह हिरण अपना पानी पीने में लग जाती है लेकिन थोड़ी देर के बाद जैसे ही हिरण पानी पी रही थी उतने में ऊपर से काले बादल छा जाते है।

बादलों से बारिश होने लग जाती है तो जो आग लगी हुई थी वह आग बुझ जाती है और पानी के कारण शिकारी का निशाना चूक कर शेर को लग जाता है और शेर की नजर पड़ती है सीधा शिकारी पर तो शेर शिकारी के पीछे लग जाता है।

जैसे ही हिरण पानी पीकर अपना सर उठाती है तो वह अपने राइट में देखती है, उसे शेर भी नजर नहीं आता, वह अपने पीछे मुड़कर देखती है, जो आग थी जो भूझ गई, मतलब सबकुछ सामान्य हो गया।

*🔔🎪✍️⏰🪔विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं,हिरण ने पूर्व में किसी जीव की सहायता की थी वह पुण्य कर्म ने उसे बचा लिया।हम सभी के जीव ने भी अनेकों प्रकार के पाप कर्मों को बांध रखा है।उन पाप कर्मों से बचने के लिए हमें भी प्रतिदिन किसी भी जीव की यथाशक्ति सहायता करना चाहिए। ऐसा करने से हमारे पाप कर्म समाप्त हो सकते है। अतः हमें अपने कर्तव्यों का दृढ़ता पूर्वक पालन करते हुए सभी जीवों का ध्यान रखना चाहिए।*

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बुधवार, 15 मार्च 2023

मेरी धर्मपत्नी

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
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*💪👩‍🚒 मेरी धर्मपत्नी ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.चैत्र कृष्ण नवमी  ,    गुरुवार दिनांक 16 मार्च  2023 को  प्रथम तीर्थंकर सभी को सुसंस्कार प्रदाता ऋषभनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।  तीर्थंकर ऋषभ देव जी का है जन्म कल्याणक , शाश्वत नगरी अयोध्याजी में हुआ था | आज के ही दिन प्रातःकाल उत्तम लग्न में मातारानी मरुदेवी ने तीर्थंकर को जन्म दिया था |  तीर्थंकर ऋषभ नाथ जी का है तप कल्याणक महोत्सव, प्रयागराज में संगम पर वट वृक्ष के नीचे  हुआ था | आज के ही दिन अप्सरा नीलांजना के नृत्य देखते हुए ,बीच में उसकी आयु समाप्त होने से वैराग्य हुआ | सांयकाल उत्तराषाढ नक्षत्र में 4000 हजार राजाओं ने भी  साथ जिन दीक्षा ली थी|आपभी दर्शन-पूजन कर जीवन सफल करें।**
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मार्च माह में आने वाली  21,22 चैत्र शुक्ल एकम, 24,26, व 27 तारीख को है। चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

ये क्या कर रही हो निशा तुम.....अपनी पत्नी निशा को कमरे में एक और चारपाई बिछाते देख मोहन ने टोकते हुए कहा ...

निशा -मां के लिए बिस्तर लगा रही हूं आज से मां हमारे पास सोएगी....

मोहन-क्या ..... तुम पागल हो गई हो क्या ...

यहां हमारे कमरे में ...और हमारी प्राइवेसी का क्या  ...

और जब अलग से कमरा है उनके लिए तो इसकी क्या  जरूरत...

निशा-जरूरत है मोहन .....जब से बाबूजी का निधन हुआ है तबसे मां का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता तुमने तो स्वयं देखा है पहले बाबूजी थे तो अलग कमरे में दोनों को एकदूसरे का सहारा था मगर अब ....मोहन बाबूजी के बाद मां बहुत अकेली हो गई है दिन में तो मैं आराध्या और आप उनका ख्याल रखने की भरपूर कोशिश करते है ताकि उनका मन लगा रहे वो अकेलापन महसूस ना करे मगर रात को अलग कमरे में अकेले ....नहीं वो अबसे यही सोएगी...

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*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

मोहन-मगर अचानक ये सब ...कुछ समझ नहीं  पा रहा तुम्हारी बातों को...।

निशा-मोहन हर बच्चे का ध्यान उसके माता पिता बचपन में रखते हैं सब इसे उनका फर्ज कहते हैं वैसे ही बुढ़ापे में  बच्चों का भी तो यही फर्ज होना चाहिए ना..._"और मुझे याद है मेरा तो दादी से गहरा लगाव था मगर दादी को मम्मी पापा ने अलग कमरा दिया हुआ था ...और उसरात दादी सोई तो सुबह उठी ही नहीं ..."_ डाक्टर कहते थे कि आधी रात उन्हें अटैक आया था जाने कितनी घबराहट परेशानी हुई होगी और शायद हममें यसे कोई वहां उनके पास होता तो... शायद दादी कुछ और वक्त हमारे साथ ...मोहन जो दादी के साथ हुआ वो मैं मां के साथ होते हुए नहीं देखना चाहती ...और फिर बच्चे वहीं सीखते है जो वो बड़ो को करते देखते हैं मैं नहीं चाहती कल आराध्या भी अपने ससुराल में अपने सास ससुर को अकेला छोड़ दे उनकी सेवा ना करें ...आखिर यही तो संस्कारों के वो बीज है जोकि आनेवाले वक्त में घनी छाया देनेवाले वृक्ष बनेंगे ...।

मोहन उठा और निशा को सीने से लगाते बोला-मुझे माफ करना निशा... अपने स्वार्थ में.. मैं अपनी मां को भूल गया अपने बेटे होने के कर्तव्य को भूल गया ...और फिर दोनों मां के पास गए और आदरपूर्वक उन्हें अपने कमरे मे ले आए....

*🌞🛕✅🪔⛳विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं,घर का प्रत्येक सदस्य अपना कर्तव्य क्या है ये बात जिस दिन समझ लेगा हमारा घर साक्षात स्वर्ग बन जायेगा!*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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