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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒हिरण का पुण्यकर्म ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मार्च माह में आने वाली 21,22 चैत्र शुक्ल एकम, 24,26, व 27 तारीख को है। चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨👩👦👦आप सभी धर्मानुरागी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ निर्मल परिणामों से यथाशक्ति उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदलकर जीवन सार्थक करें।*
▶️एक बार एक हिरण जंगल में पानी की तलाश में घूम रही थी। उसको बहुत प्यास लगी हुई थी इसलिए वो इधर उधर पानी की तलाश में भटक रही थी। वह पानी की तलाश में काफी देर तक भटकती रही, लेकिन उसे कहीं पर भी पानी नही मिला।
थोड़ी देर ओर जंगल में इधर-उधर भटकने के बाद वो एक पेड़ के नीचे बैठ जाती है, तो इतने में उसे नदी के बहने की आवाज सुनाई देती है, तो हिरण उसे पेड़ के नीचे से उठकर फौरन पानी की आवाज की तरफ आगे बढ़ती है।
तो वह देखती है उसे के सामने एक बड़ी सी नदी बह रही है, जैसे ही वो हिरण नदी को देखती है बहुत खुश होती है मानो उसे फिर से एक नई जिंदगी मिल गई हो।
वह तुरंत दौड़ती हुई नदी के पास जाती है और जैसे ही पानी पीने के लिए अपना सिर को झुकाती है, तो उसकी नजर अपने राइट साइड पर पड़ती है, वह जैसे ही अपने राइट में देखती है तो उसे शिकारी नजर आता है, हाथ में तीर लिए हुऐ निशाना तान के खड़ा हुआ। फिर जैसे ही हिरण की नजर अपने लेफ्ट साइड में पडती है, उसे झाड़ियों के पीछे एक शेर नजर आता है, अब हिरण पानी वानी सब भूल जाती है।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
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फिर वो पलट के पीछे देखती है तो उसे भयंकर आग लगी हुई दिखाई देती है, जो कि धीरे-धीरे उस उस की तरफ बढ़ रही थी अब हिरण जाएं भी तो जाएं कहां।
बेचारी हिरण राइट में देख रही तो शिकारी नजर आ रहा था जो कि निशाना तान के खड़ा था और अपने लेफ्ट में देख रही तो शेर खड़ा नजर आ रहा था और सामने गहरी लंबी चौड़ी नदी अपने तेज वेग से बह रही थी और पीछे आग लगी हुई थी, मतलब उसके लिए चारों रास्ते बंद हो चुके थे, चारों तरफ से मुसीबत आ चुकी थी।
अब हिरण सोच में पड़ जाती है, अब वो यह सोचती है कि चारों तरफ से मुसीबत आ चुकी है तो में अपना काम करके क्यों ना मरू, क्योंकि मुझे वैसे भी तो मरना है। तो में पानी पीकर क्यों ना मरू।
इतना सोचकर वह हिरण अपना पानी पीने में लग जाती है लेकिन थोड़ी देर के बाद जैसे ही हिरण पानी पी रही थी उतने में ऊपर से काले बादल छा जाते है।
बादलों से बारिश होने लग जाती है तो जो आग लगी हुई थी वह आग बुझ जाती है और पानी के कारण शिकारी का निशाना चूक कर शेर को लग जाता है और शेर की नजर पड़ती है सीधा शिकारी पर तो शेर शिकारी के पीछे लग जाता है।
जैसे ही हिरण पानी पीकर अपना सर उठाती है तो वह अपने राइट में देखती है, उसे शेर भी नजर नहीं आता, वह अपने पीछे मुड़कर देखती है, जो आग थी जो भूझ गई, मतलब सबकुछ सामान्य हो गया।
*🔔🎪✍️⏰🪔विशेष :- भव्य आत्माओं,हिरण ने पूर्व में किसी जीव की सहायता की थी वह पुण्य कर्म ने उसे बचा लिया।हम सभी के जीव ने भी अनेकों प्रकार के पाप कर्मों को बांध रखा है।उन पाप कर्मों से बचने के लिए हमें भी प्रतिदिन किसी भी जीव की यथाशक्ति सहायता करना चाहिए। ऐसा करने से हमारे पाप कर्म समाप्त हो सकते है। अतः हमें अपने कर्तव्यों का दृढ़ता पूर्वक पालन करते हुए सभी जीवों का ध्यान रखना चाहिए।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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