शुक्रवार, 17 मार्च 2023

मेरा कर्म

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒मेरा कर्म ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मार्च माह में आने वाली  21,22 चैत्र शुक्ल एकम, 24,26, व 27 तारीख को है। इस माह चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक बार एक छोटा सा पारिवारिक कार्यक्रम चल रहा था। उसमें बहुत लोग उपस्थित थे। उस कार्यक्रम में बहुत ही बढ़िया अत्यंत सुगंधित बासमती चावल का पुलाव बन रहा था, सभी का मन को पुलाव की लुभावनी सुगंध से बैचेन हो रहा था। 

खाने में देर हो रही थी,भूख भी खूब लग रही थी। आखिर खाने में पुलाव परोसा गया, खाना शुरू ही होने वाला था कि रसोईयें ने आकर कहा कि पुलाव सम्हल कर खाइयेगा क्योंकि शायद उसमें एक आध कंकड़ रह गया है वह किसी के भी मुँह में आ सकता हैं। मैंने बहुत से कंकड़ निकाल दिए हैं, फिर भी एक आध रह गया होगा तो दाँत के नीचे आ सकता हैं। 

यह सुनकर सभी लोग बहुत सम्भल कर खाना खाने लगे सभी को लग रहा था कि कंकड़ उसी के मुँह में आयेगा। यह सोचकर खाने का सारा मजा किरकिरा हो गया और पुलाव खाने की जो प्रबल इच्छा थी वह भी थम गई। सब लोग बिना कुछ बोले, बिना किसी हंसी मजाक के भोजन करने लगे। जब सबने खाना खा लिया तब उन्होंने रसोईये को बुलाया और पूछा कि तुमने ऐसा क्यों कहा था। 

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जबकि कंकड़ तो भोजन में था ही नहीं हममें से किसी के भी मुँह में नहीं आया । तब रसोईये ने कहा कि मैंने अच्छी तरह से चावल बिने थे, लेकिन चावल में कंकड़ भी ज्यादा थे इसलिए मुझे लगा शायद एक आध रह गया होगा। यह सुनकर सब एक दूसरे की तरफ देखने लगे। खाने के बाद किसी को कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था सब निराश हो गए थे क्योंकि सभी का ध्यान कंकड़ में था खाने का स्वाद कोई भी नहीं ले पा रहा था इसलिए सब निराश हो गए। 

यही परिस्थिति हमारी आज की हैं। एक वायरस को लेकर हम हमारी आजादी खो बैठे हैं। हर वस्तु, व्यक्ति, प्राणी पर शंका कर रहे हैं। आज तक जो लोग हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहे हैं, जैसे दूध वाला, फल वाला, सब्जीवाला, पेपर वाला इन लोगों पर से भी हमारा विश्वास उठ गया है, और हम हमारे आज के सुहाने दिन खो बैठे हैं। और शारीरिक रूप से भी थकान महसूस कर रहे हैं। यह सब, कुछ हद, तक हमारी सोच पर भी निर्भर हैं। इसलिए इससे बाहर निकलना है तो वाइरस को नहीं अपने आप को मजबूत करिये । अपने विचारों को सकारात्मक दिशा दीजिये। ईश्वर की भक्ति व स्वयं के पुरुषार्थ  से सब कुछ जल्दी ही अच्छा हो जाएगा। आज के सुंदर दिन के लिए सुंदर शुरुआत करिये । और अपने आप को मजबूत कीजिये । खाना खाते समय खाने  को पूरी रूचि से स्वाद लेकर खाइये, फिर देखिये हमारी जिंदगी कितनी बेहतर हो जाएगी।

*✅🎪↔️🙏⛳विशेष : - भव्य‌‌‌ आत्माओं, हमारा मन चंचल होने से यह एकाग्र नहीं रह सकता। हमें अपने लक्ष्य का ध्यान रखते हुए सुनियोजित क्रम से कार्य करने से मन शांत रहता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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