मंगलवार, 31 जनवरी 2023

भारतीय संस्कृति

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 भारतीय संस्कृति ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.माघ शुक्ल 12 ,  गुरुवार दिनांक 2 फरवरी  2023 को चौथे तीर्थंकर सभी की चंचलता समाप्त करने वाले अभिनंदन भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव फरवरी माह में आने वाली  2,3,9,11,13,14,16,17,19,22,24,26, व 27 तारीख को है। पांच तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदल कर जीवन सफल करें।*

*हम हाथ से खाना क्यों खाएं.?*
*जानिये वैज्ञानिक कारण...*
*अंग्रेज, नकलची नहीं, भारतीय बनें...*

अधिकतर भारतीय अपने हाथों से खाना खाते हैं। लेकिन आजकल हमने पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण करते हुए चम्मच और कांटे से खाना शुरू कर दिया है।
*लेकिन क्या आप जानते हैं.?*
*कि अपने हाथों से खाना खाने के स्वास्थ्य से संबंधित कई फायदे हैं.!*
यह आपके प्राणाधार की एनर्जी को संतुलित रखता है.!
आयुर्वेद में कहा गया है, कि हम सब पांच तत्वों से बने हैं जिन्हें जीवन ऊर्जा भी कहते हैं, और ये पाँचों तत्व हमारे हाथ में मौजूद हैं...

■ आपका अंगूठा अग्नि का प्रतीक है,
■ तर्जनी अंगुली हवा की प्रतीक है,
■ मध्यमा अंगुली आकाश की प्रतीक है,
■ अनामिका अंगुली पृथ्वी की प्रतीक है और
■ सबसे छोटी अंगुली जल की प्रतीक है..!
इनमे से किसी भी एक तत्व का असंतुलन बीमारी का कारण बन सकता है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

जब हम हाथ से खाना खाते हैं तो हम अँगुलियों और अंगूठे को मिलाकर खाना खाते हैं और
यह जो मुद्रा है... यह मुद्रा विज्ञान है.!
यह मुद्रा का ज्ञान है और इसमें शरीर को निरोग रखने की क्षमता निहित है।
इसलिए जब हम खाना खाते हैं तो इन सारे तत्वों को एक जुट करते हैं जिससे भोजन ज्यादा ऊर्जादायक बन जाता है
और यह स्वास्थ्यप्रद बनकर हमारे "प्राणाधार" की "एनर्जी" को "संतुलित" रखता है।

*भोजन में हरी मिर्च खाने से होते हैं अचूक स्वास्थ लाभ..*

*इससे पाचन में सुधार होता है:*
टच हमारे शरीर का सबसे मजबूत अक्सर इस्तेमाल होने वाला अनुभव है।
जब हम हाथों से खाना खाते हैं
तो हमारा मस्तिष्क हमारे पेट को यह संकेत देता है कि हम खाना खाने वाले हैं।
इससे हमारा पेट इस भोजन को पचाने के लिए तैयार हो जाता है जिससे पाचन क्रिया सुधरती है।

*इससे खाने पे दिमाग लगता है:*
हाथ से खाना खाने में आपको खाने पर ध्यान देना पड़ता है।
इसमें आपको खाने को देखना पड़ता है और जो आपके मुह में जा रहा है उस पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है।
इसे माइंडफुल ईटिंग भी कहते है और यह मशीन की भांति चम्मच और कांटे से खाना खाने से ज्यादा स्वास्थयप्रद है।
माइंडफुल ईटिंग के कई फायदे हैं
इनमे से सबसे महत्वपूर्ण फायदा यह है कि इससे खाने के पोषक तत्व बढ़ जाते हैं जिससे पाचन क्रिया सुधरती है और यह आपको स्वस्थ रखता है।
यह आपके मुह को जलने से बचाता है,
आपके हाथ एक अच्छे तापमान संवेदक का काम भी करते हैं।
जब आप भोजन को छूते हैं तो आपको अंदाजा लग जाता है कि यह कितना गर्म है और
यदि यह ज्यादा गर्म होता है तो आप इसे मुह में नहीं लेते हैं।
इस प्रकार यह आपकी जीभ को जलने से बचाता है।

*🎤🌲🐥🐋✍️विशेष :-भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम सभी पुरानी संस्कृति को भूला रहें है इसके कारण से अनेक बीमारीयों का घर अपने शरीर को बना लिया है।हम सभी को अपनी प्राचीन संस्कृति की मर्यादाओं जीवित रखते हुए जीवन सार्थक करना चाहिए।एक बार कोशिश करके तो देखें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 30 जनवरी 2023

विनम्रता से

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 विनम्रता से ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🕉️1.माघ शुक्ल  10 , मंगलवार दिनांक 31 जनवरी  2023 को दुसरे तीर्थंकर सभी को विशालता प्रदान करने वाले अजितनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।31 जनवरी दिन मंगलवार तीर्थंकर अजितनाथ जी का है जन्म कल्याणक महोत्सव, शाश्वत नगरी अयोध्याजी में हुआ था | आज के ही दिन मातारानी विजयसेना ने तीर्थंकर को जन्म दिया था | तीर्थंकर अजितनाथ जी का तप कल्याणक , अयोध्याजी में हुआ था | आकाश से दमकती बिजली को नीचे गिरकर नष्ट होते हुए देखा – वैराग्य हुआ , संध्या के समय रोहिणी नक्षत्र के उदय में सप्तपर्ण वृक्ष के नीचे 1000 राजाओं के साथ जिन दीक्षा ली |*

*🕉️2.माघ शुक्ल 12 ,  गुरुवार दिनांक 2 फरवरी  2023 को चौथे तीर्थंकर सभी की चंचलता समाप्त करने वाले अभिनंदन भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव फरवरी माह में आने वाली  2,3,9,11,13,14,16,17,19,22,24,26, व 27 तारीख को है। पांच तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदल कर जीवन सफल करें।*

  डॉ साहब के घर पर एक अधेड़ उम्र का नौकर था। वह रोज देर से सोकर उठता था। उसकी इस आदत से घर वाले उससे परेशान थे। उन्होंने उस नौकर की शिकायत डॉ. साहब से कर दी और उसे बाहर करने को कहा। इसके जवाब में डॉ. साहब ने केवल यही कहा-‘उसे समझाओ।’ 

सबने उसे समझाया, पर इसके बावजूद उस पर कोई असर न हुआ। ‘अब आप ही समझाकर देखिए उस नौकर को!’ घरवालों ने डॉ.साहब से निवेदन किया।

अगले दिन सवेरे डॉ. साहब उठे। एक लोटा पानी भरकर उस नौकर के सिर के पास जाकर खड़े हो गए। नौकर अभी तक गहरी नींद में ही था। वे उसे धीरे से उठाते हुए बोले-‘उठिए मालिक! जागिए! सवेरा हो गया। 

मुंह हाथ धो लीजिए। मैं अभी आपके लिए चाय और स्नान के पानी का इंतजाम करता हूं।’ इतना कहकर वे चले गए। इधर नौकर परेशान कि ये हो क्या रहा है, कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा हूं। वह अभी बैठा-बैठा यह सोच ही रहा था।

तभी डॉ. साहब चाय लेकर आते दिखाई दिए। वे आकर बोले-‘मालिक, लीजिए चाय पीकर स्नान करने चलिए।’ नौकर बहुत घबराया। क्षमा मांगते हुए बोला-‘हुजूर! आज के बाद से मेरे देर तक सोकर उठने की शिकायत किसी को नहीं होगी।’ इस पर डॉ.साहब मुस्करा दिए। 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

अगले दिन सभी घरवालों के आश्चर्य का ठिकाना न रहा कि वह नौकर सबसे पहले उठकर घर का सारा काम कर रहा था। नौकर डॉक्टर साहब की विनयशीलता से अभिभूत हो गया। 


डॉ.साहब ने अपने घर के लोगों को समझाया- व्यक्ति के आचरण में निहित विनम्रता का कमाल यही है कि वह सामने वाले व्यक्ति पर बेहद सरलता के साथ अपना प्रभाव डाल देता है। समाज में अपने व्यवहार द्वारा प्रभाव पैदा करना है तो जीवन में विनम्रता को स्थान दें।

*🧑‍🦰⚖️⛱️🪔⏰विशेष : - भव्य आत्माओं, हमें किसी भी जीव से कभी भी प्रकार की परेशानी ना हो इसलिए हमें सभी जीवों के प्रति यथायोग्य विनय शीलता का पालन करना चाहिए।*

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*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 29 जनवरी 2023

धनवान व सुख प्राप्ति का मंत्र

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 धनवान व सुख प्राप्ति का मंत्र ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.माघ शुक्ल 10 , मंगलवार दिनांक 31 जनवरी  2023 को दूसरे तीर्थंकर सभी को विशालता प्रदान करने वाले  अजितनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव फरवरी माह में आने वाली  2,3,9,11,13,14,16,17,19,22,24,26, व 27 तारीख को है। तीन तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदल कर जीवन सफल करें।*

*▶️हृदय परिवर्तन का अनुभव*
*🐒सबसे अमीर आदमी का अनुभव*
जॉन डी रॉकफेलर दुनिया के सबसे अमीर आदमी और पहले अरबपति थे।

25 साल की उम्र में, वे अमेरिका में सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक के मालिक बने और 31 साल की उम्र में, वे दुनिया के सबसे बड़े तेल रिफाइनर बन गए।

38 साल उम्र तक, उन्होंने यू.एस. में 90% रिफाइंड तेल की कमान संभा ली और 50 की उम्र तक, वह देश के सबसे अमीर व्यक्ति हो गए थे।

जब उनकी मृत्यु हुई, तो वह दुनिया के सबसे अमीर आदमी थे।

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-भव्य महान आत्माओं आपने इस प्रकार की सत्य घटना हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानी पढ़ने से कुछ धर्म के आत्मकल्याण के संस्कार तो पड़ गए जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।जी हां जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने कीमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें। आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

एक युवा के रूप में वे अपने प्रत्येक निर्णय, दृष्टिकोण और रिश्ते को अपनी व्यक्तिगत शक्ति और धन को बढ़ाने में लगाते थे।

लेकिन 53 साल की उम्र में वे बीमार हो गए। उनका पूरा शरीर दर्द से भर गया और उनके सारे बाल झड़ गए।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

नियति को देखिए,उस पीड़ादायक अवस्था में, दुनिया का एकमात्र अरबपति जो सब कुछ खरीद सकता था, अब केवल सूप और हल्के से हल्के स्नैक्स ही पचा सकता था।

उनके एक सहयोगी ने लिखा, "वह न तो सो सकते थे, न मुस्कुरा सकते थे और उस समय जीवन में उसके लिए कुछ भी मायने नहीं रखता था।"

उनके व्यक्तिगत और अत्यधिक कुशल चिकित्सकों ने भविष्यवाणी की कि वह एक वर्ष ही जी पाएंगे।

उनका वह साल बहुत धीरे-धीरे, बहुत  पीड़ा से गुजर रहा था।

जब वह मृत्यु के करीब पहुंच रहे थे, एक सुबह उन्हें अहसास हुआ कि वह अपनी संपत्ति में से कुछ भी, अपने साथ अगली दुनिया में नहीं ले जा सकते।

जो व्यक्ति पूरी व्यापार की दुनिया को नियंत्रित कर सकता था, उसे अचानक एहसास हुआ कि उसका अपना जीवन ही उसके नियंत्रण में नहीं है।

उनके पास एक ही विकल्प बचा था। उन्होंने अपने वकीलों, एकाउंटेंट और प्रबंधकों को बुलाया और घोषणा की कि वह अपनी संपत्ति को अस्पतालों में, अनुसंधान के कार्यो में और धर्म-दान के कार्यों के लिए उपयोग में लाना चाहते हैं।

जॉन डी. रॉकफेलर ने अपने फाउंडेशन की स्थापना की।इस नई दिशा में उनके फाउंडेशन के अंतर्गत, अंततः पेनिसिलिन की खोज हुई,मलेरिया, तपेदिक और डिप्थीरिया का इलाज ईजाद हुआ।

लेकिन शायद रॉकफेलर की कहानी का सबसे आश्चर्यजनक हिस्सा यह है कि जिस क्षण उन्होंने अपनी कमाई का हिस्सा धर्मार्थ  देना शुरू किया, उसके शरीर की हालात आश्चर्यजनक रूप से बेहतर होती गई।

एक समय ऐसा लग रहा था कि वह 53 साल की उम्र तक ही जी पाएंगे, लेकिन वे 98 साल तक जीवित रहे।

रॉकफेलर ने कृतज्ञता सीखी और अपनी अधिकांश संपत्ति समाज को वापस कर दी और ऐसा करने से वह ना केवल ठीक हो गए बल्कि एक परिपूर्णता के अहसास में भर गए। उन्होंने बेहतर होने और परिपूर्ण होने का तरीका खोज लिया।

आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि रॉकफेलर ने जन कल्याण के लिए *अपना पहला दान स्वामी विवेकानंद के साथ बैठक के बाद दिया* और उत्तरोत्तर वे एक उल्लेखनीय परोपकारी व्यक्ति बन गए।

 स्वामी विवेकानंद ने रॉकफेलर को संक्षेप में समझाया कि उनका यह परोपकार, गरीबों और संकटग्रस्त लोगों की मदद करने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है।

*अपनी मृत्यु से पहले, उन्होंने अपनी डायरी में लिखा:*

मुझे जीवन ने काम करना सिखाया,

मेरा जीवन एक लंबी,सुखद यात्रा है,

काम और आनंद से भरपूर,

मैंने राह की चिंता छोड़ दी,

और ईश्वर ने मुझे हर रोज एक अच्छाई करने और अच्छा होने का अनुभव दिया!"

**देने का सुख ही जीवन जीने का सुख है*
*"दुनिया की सारी दौलत से ज्यादा जरूरी है मन की शांति।"*

*आप वो काम भले ना करे जिससे पर्मात्मा मिले,पर वो काम जरूर करें जिससे सबका आशीष मिले।*
*जो प्राप्त है-वही पर्याप्त है*
*जिसका मन मस्त है*
*उसके पास समस्त है!!*

*👪🔔⏰🪔🐎विशेष : - भव्य‌‌‌ आत्माओं,इस प्रकार के सत्य घटनाओं के हजारों उदाहरण वर्तमान में व शास्त्रों में हम सभी पढ़ते व गुरुओं के माध्यम से सुनते आ रहे है। अतः हमें भी वर्तमान समय में जागरूक रहते हुए कुछ ऐसा कार्य करें जिससे हमारा मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 28 जनवरी 2023

संस्कृति व देश की सुरक्षा

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒संस्कृति व देश की सुरक्षा ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.माघ शुक्ल 10 , मंगलवार दिनांक 31 जनवरी  2023 को दूसरे तीर्थंकर सभी को विशालता प्रदान करने वाले  अजितनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव फरवरी माह में आने वाली  2,3,9,11,13,14,16,17,19,22,24,26, व 27 तारीख को है। तीन तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदल कर जीवन सफल करें।*

राजस्थान के झुंझुनूं जिले का छोटा सा गांव था नयासर । शहर के कोलाहल से बहुत दूर , यहां शान्ति ही शान्ति थी । नंदाराम कस्वां अपने माता पिता और दो बडे भाईयो के साथ रहता था । बचपन मे उसने अपनी दादी जी से अपने दादा जी के फौज के बहुत से किस्से सुने हुए थे । बचपन मे मन बहुत कोमल होता है जो भी बात बैठ जाये , वह आजीवन नही निकलती । 
उसने भी बचपन मे ही प्रण ले लिया था कि वह भी अपने दादा जी की तरह फौज मे जाकर सेवा करेगा । उसका वह जोश उम्र के साथ साथ बढता गया । 

जबकि अन्य दोनो बडे भाई अपने पिता के साथ खेती करते थे ।
नंदाराम कस्वां का सपना पूरा हो गया , वह कठिन परीक्षा मे पास होकर फौज मे भर्ती हो गया और देश की सेवा करने लगा । फौज मे छुट्टी तो यदा कदा ही मिलती है ।

बडे दोनो भाई अपनी घर ग्रहस्थी मे लग गये । दोनो भाईयो के बच्चे भी हो गये । एक बार नंदाराम कस्वां मात्र पन्द्रह दिन की छुटटिया लेकर घर आ पाया , क्योंकि उसकी माता की तबियत बहुत खराब थी । 
उसकी मां ने पहले से उसके लिए एक रिश्ता देख रखा था । उन्हे अपनी परवरिश पर पूरा भरोसा था कि नंदाराम कस्वां मना नही करेगा । उसके आने के अगले ही  तीन दिन मे उसका विवाह एक सुशील लडकी इमरती देवी के साथ कर दिया । दस दिन ही दोनो ने साथ बिताये थे कि ड्युटी पर जाने का समय हो गया ।
वह खुशी खुशी अपने परिवार से विदा ले चला गया । दो महीने बाद वही उसे पता चला कि वह पिता बनने वाला है । परंतु सरहद पर गम्भीर स्थिति के कारण वह नही आ पाया ।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

उसने सोचा कि बच्चे के जन्म के समय चला जायेगा ,परन्तु उस समय भी दुश्मनो के हमले की आशंका के कारण छुटटी नही मिल पायी ।
जब उसका बालक रघुवीर सिंह छः महीने का हुआ तो वह उसके लिए बहुत से खिलौने और कपडे लिए, एक महीने की छुट्टी लेकर घर आया । अभी तीन दिन ही हुए थे , वह तो अपने बालक को अच्छे से प्यार करके अपने अरमान भी पूरे नही कर पाया था कि इमर्जेंसी के कारण नंदाराम कस्वां  को पुनः जाना पडा ।
इसके बाद वह दो साल बाद एक हफ्ताह की छुटटी लेकर घर आया । बच्चे बहुत मासूम होते है  जब घर मे वह अपने दोनो ताऊ जी के बेटो को लाड लडाते देखता तो उसका मन भी करता कि उसके पिता जी हर समय उसके साथ रहकर उसे प्यार करे । जब वह अपनी मां के अलावा अन्य स्त्रियो को सजे सवंरे और चहकते हुए , मगंलगीत गाते दगाता तो उसका मन करता कि काश उसकी मां भी ऐसे ही चहकती रहे । उसे भी अपनी मां और पिता का प्यार एक साथ मिले । वह छः वर्ष का हो चुका था , पिता का स्नेह और गोद उसे   न के बराबर ही मिली थी । एक दिन जब उसने सीमा पर हमले के कारण अपने दादा- दादी और मां के मुख पर चिंता देखी तो वह रात को घबराकर छत पर चला गया । उसने अपनी दादी से सुन रखा था कि टूटते तारो को देखकर कुछ भी मांगों वह पूरा हो जाता है । 
वह लगातार आकाश की तरफ देखता रहा फिर अचानक खुद से ही बोलने लगता है कि काश एक अनोखी दुनिया हो जाये । न कोई सरहद हो , न सीमा , सारी दुनिया मे प्यार हो जाये । जब ऐसा हो जायेगा तो सब आराम से रहेंगे। न लडाई होगी , न झगडा । उसके पिता भी घर पर होगे । वह भी अपने पिता की उगंली पकड खेतो मे जाया करेगा । जब भी घर के बाहर से उसके पिता आयेगे , उसे बाहों मे भर लेगें उसे फिर कंधे पर बैठा , पूरा गांव घुमायेगे । उसकी मां भी सज सवंर हर समय मंगलगीत गायेगी । दादा - दादी भी फिर चैन से सो पायेगे । 
फिर अगले दिन खबर मिली कि बेटा फ़ौज में शहीद हो गया।जब गांव में पार्थिव देह पहुँची तो बेटे ने देखा पूरा शहर उसके पिता नंदाराम कस्वां की पार्थिव देह के चारों तरह इक्कट्ठे होकर जयकारे लगा रहे है।अंतिम संस्कार के समय जब पिता को अग्नि देने का समय आया तो बेटे ने पिता को सेल्यूट करके जोर से जय हिंद कहकर शपथ ली कि वो भी बड़ा होकर देश की सेवा करेगा और पापा की तरह फौजी बनेगा।पूरा गांव ,शहर बच्चें की बहादुरी की तारीफ करते हुए आंसुओ की नदियां बहा रहे थे।

काश एक ऐसी अनोखी दुनिया सच मे बन जाये , चारों ओर हो अमन और शान्ति। हर बेटे रघुवीर को मिले सके पिता नंदाराम कस्वां और माता इमरती देवी का प्यार एक साथ। 

ऐसे परिवारो को कोटि नमन जो अपने घर के चिरागो को बारूद के ढेर पर भेजकर , देशसेवा मे अपना योगदान देते है ।

*🔔🪔👪🎪⏰विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम बिना किसी विकल्पों के धर्म अर्थ काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थ को निर्विकल्प कर पा रहे है।उसका मुख्य कारण यह है कि भारत की सीमाओं पर चौबीस घंटे इस धरती मां व सभी भारतवासियों की सुरक्षा के लिए सैनिक सेवा कर रहे है। अतः हमें भी अपनी संस्कृति व देश की सुरक्षा में सहयोगी बनना आवश्यक है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 27 जनवरी 2023

हमारा भारत

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 हमारा भारत ✍️🐒*


किसी बात पर पत्नी से अनबन हो गयी ! वह बड़बड़ाते हुए घर से बाहर निकला! सोचा कभी इस लड़ाकू औरत से बात नहीं करूँगा।

 पता नहीं,समझती क्या है खुद को? जब देखो झगड़ा,सुकून से रहने नहीं देती!
नजदीक के चाय के स्टॉल पर पहुँच कर,चाय ऑर्डर की और सामने रखे स्टूल पर बैठ गया!

तभी पीछे से एक आवाज सुनाई दी इतनी सर्दी में घर से बाहर चाय पी रहे हो?
गर्दन घुमा कर देखा तो पीछे के स्टूल पर बैठे एक बुजुर्ग थे।

आप भी तो इतनी सर्दी और इस उम्र में बाहर हैं बाबा....  बुजुर्ग ने मुस्कुरा कर कहा :-   मैं निपट अकेला,न कोई गृहस्थी,न साथी,तुम तो शादीशुदा लगते हो बेटा"।

पत्नी घर में जीने नहीं देती बाबा !! हर समय चिकचिक..., बाहर न भटकूँ तो क्या करूँ। जिंदगी नरक बना कर रख दी है।

बुजुर्ग : पत्नी जीने नहीं देती?
बरखुरदार ज़िन्दगी ही पत्नी से होती है।आठ बरस हो गए हमारी पत्नी को गए हुए। जब ज़िंदा थी,कभी कद्र नहीं की,आज कम्बख़्त चली गयी तो भुलाई नहीं जाती,घर काटने को दौडता है। बच्चे अपने अपने काम में मस्त, आलीशान घर,धन-दौलत सब है..., पर उसके बिना कुछ मज़ा नहीं। यूँ ही कभी कहीं,कभी कहीं,भटकता रहता हूँ! कुछ अच्छा नहीं लगता, उसके जाने के बाद पता चला, वह धड़कन थी! मेरे जीवन की ही नहीं, मेरे घर की भी। सब बेजान हो गया है... लेकिन तुम तो समझदार हो बेटा, जाओ !! अपनी जिंदगी खुशी से जी लो। वरना बाद में पछताते रहोगे, मेरी तरह। बुज़ुर्ग की आँखों में दर्द और आंसुओं का समंदर भी।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

चाय वाले को पैसे दिए। नज़र भर बुज़ुर्ग को देखा,एक मिनट गंवाए बिना घर की ओर मुड़ गया...
उसे दूर से ही देख लिया था, डबडबाई आँखो से निहार रही पत्नी,चिंतित दरवाजे पर ही ख़डी थी....कहाँ चले गए थे? जैकेट भी नहीं पहना, ठण्ड लग जाएगी तो ?, तुम भी तो "बिना स्वेटर के दरवाजे पर खड़ी हो!" कुछ यूँ, दोनों ने आँखों से,एक दूसरे के प्यार को पढ़ लिया था! उसके बाद फिर से कभी झगड़ा नही करने का वादा किया और दोनों हमेशा खुश रहने लगे।

कई बार हम लोग भी अपने जीवन में इसी तरह की गलतियां कर बैठते है। सिर्फ पत्नी ही नही,माँ-बाप,चाचा-ताऊ,भाई
बहिन या अज़ीज़ दोस्तोँ के साथ ऐसा क्रोध कर देते है जो सिर्फ हम को ही नही,उनको भी कष्ट देता है।

*🔔⏰👪🪔⛳विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं,छोटा सा जीवन है, कहीं क्षमा करके कहीं क्षमा मांगकर हँस कर गुजार दे।जिंदगी के सफर मे गुजर जाते है, जो समय आज मिला है वह दुबारा कभी नहीं मिलेगा। अतः हम सभी को प्रत्येक पल में ऐसा कार्य करना है जिस कार्य से सभी जीवों को सुख शांति मिलती रहें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 26 जनवरी 2023

संस्कारों का बीजारोपण

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 संस्कारों का बीजारोपण ✍️🐒*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जनवरी माह में आगामी  31 तारीख को है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक समय की बात है।  गांव में राजू नामक एक व्यक्ति रहता था। गांव में आपसी भाईचारा और प्रेम  बहुत था। इसलिए वहां के सभी समुदाय के लोग आपस में मिलजुल कर रहा करते थे।

राजू नामक व्यक्ति अधेड़ उम्र होने के कारण ‘चाचा नम्बरदार’  के नाम से पहचाने जाते थे। सभी उनका मान-सम्मान और आदर सत्कार किया करते थे।

उनका अपना मकान गांव की चौपाल पर छोटा-सा था। उसके अंदर आम का एक पुराना पेड़ था जिनके फल गांव के बच्चे, बूढ़े और जवान सभी खाया करते थे।

राजू चाचा का स्वभाव कुछ इस प्रकार का था कि वे बच्चों को कुछ ज्यादा ही प्यार किया करते थे।

राजू चाचा हर साल बरसात के मौसम में जब आम पक जाते थे, तो गांव के सभी बच्चों को विशेष तौर पर आम की दावत दिया करते थे।

किसी कारणवश पिछले दौ वर्षों से यह परंपरा टूट गई थी। बच्चे उनकी इस बात पर बहुत नाराज रहने लगे थे। परंतु वे कर कुछ नहीं सकते थे, क्योंकि राजू चाचा का रौब भी बच्चों पर कम नहीं था।

पहले साल तो बच्चे उनकी इस हरकत पर – कि चाचा ने एक बार उनको आम की दावत नहीं दी – आम की फसल बर्बाद कर गये।

लेकिन दूसरे साल जब आम के पेड़ पर बोर आया और आमिया छोटी-छोटी बनने लगी, तो बच्चों ने देखा कि चाचा राजू आज गांव में नहीं है। तब सब बच्चों ने मिलकर आम के पेड़ पर पथराव कर दिया। उनकी सारी आमिया झाड़ दी। आमिया उठा-उठाकर बच्चे अपने अपने घर ले गये। कुछ ने खायी और कुछ ने बर्बाद की।

राजू चाचा को जब इस बात का पता चला तो इन्हें गुस्सा तो बहुत आया, मगर वे अपने गुस्से को पी गये। किंतु फिर वे किसी अच्छे से मौके की तलाश में रहने लगे।

फिर तिसरे साल आम का मौसम आया। राजू चाचा ने अपने पेड़ के आमों के अलावा कुछ आम बाजार से भी मंगवाये और फिर गांव में ऐलान कर दिया- आज पूरे गांव के बच्चों की उनके घर पर आम की दावत है।

इस ऐलान को सुनकर बच्चे बड़े खुश हुए। लेकिन वे जितना खुश थे, उससे कहीं ज्यादा हैरान भी थे। उस दिन हल्की वर्षा हो रही थी।

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कुछ बच्चे तो डर के मारे नहीं गये थे और कुछ इस डर के मारे चले गए थे कि कहीं चाचा उनके न जाने पर नाराज न हो जायें। फिर भी गांव के लगभग आधे से अधिक बच्चे चाचा राजू के घर आम की दावत पर उपस्थित हुए।

हल्की हल्की बारिश पड़ रही थी । ठंडी ठंडी हवा चल रही थी। बच्चे मजे लेकर आम खा रहे थे ।

जब आम समाप्त हो गए और बच्चे को अंगड़ाई आने लगी, तो अनायास ही एक बच्चे की नजर चाचा के घर के एक कोने की तरफ उठ गयी जहां छप्पर के नीचे एक बहुत बड़ा किसी वस्तु का ढ़ेर पुआल से ढका हुआ था। उस बच्चे ने यह बात अन्य बच्चों को इशारे से बतायी।

तब अंत में एक बच्चे ने डरते-डरते चाचा राजू से पूछ ही लिया- “चाचा जी, इस ढ़ेर में आपने किसके लिए क्या छुपा रखा है?”

राजू चाचा उसकी बात सुनकर खिलखिलाकर हंस पड़े और फिर उन्होंने अपनी पिछली गलती पर बच्चों के सामने पश्चाताप किया।

फिर वे बोले- “सुनो बच्चों… आम तो तुम्हें हर साल मिलेंगे ही, लेकिन अगर तुम मेरे मरने के बाद भी आम खाना चाहते हो तो मेरे पीछे आओ।” चाचा उठकर छप्पर पर बने ढ़ेर की ओर चल पड़े। बच्चे भी उनके पीछे-पीछे चल दिये।

चाचा ने ढ़ेर के ऊपर से पुआल हटाई और बच्चों से कहा- “बच्चों ! अपने दोनों हाथों में भरकर जितने भी आम ले जा सको, ले जाऔ।” बच्चों ने खुशी-खुशी ढ़ेर से आम उठाकर अपने दोनों हाथों में ले लिये।

उनकी खुशी को देखकर चाचा राजु की आंखों में आंसू छलक आये। वे बोले- “सुनो बच्चों ! अपने-अपने घर जाकर इन आमों को खाओ और इनकी गुठलियों को अपने-अपने घरों में और गांव भर में बो दो।”

“और आम के लिए कितने दिनों तक इंतजार करना होगा ?” बच्चों के बीच से एक धीमा स्वर उभरा। परंतु उस धीमे स्वर को चाचा राजू ने सुन लिया था।

तब उन्होंने जाते बच्चों को रोका और अपने बेटे के कंधों पर हाथ रख कर बोले- “जब तक तुम्हारे द्वारा बोये गये पेड़ों पर आम आयें, तब तक तुम हमारे पेड़ से हर साल आम खाना, मेरा बेटा तो यही पर तुम्हारे बीच रहेगा। यह तुम्हें हर साल अपने पेड़ के इसी प्रकार आम खिलायेगा। फिर जब तुम्हारे पेड़ों पर फल आने लगेंगे तो तुम जिंदगी भर अपने पेड़ों से आम खाना।”

चाचा राजू की बात सुनकर बच्चे खुश हुए। वे हल्ला-गुल्ला करते उनके घर से बाहर निकल गये। कई ने ‘चाचा जिंदाबाद’ की आवाज बुलंद की और फिर अपने-अपने घरों को रवाना हो गये।

  परोपकारी व्यक्ति का स्वभाव यदि कुछ समय के लिए सो जाए तो जल्द ही पुन: जाग जाता है। स्वभाव से मजबूर आदमी अपने स्वभाव को त्याग नहीं पाता। जैसे कि चाचा राजू ने बच्चों को इस बात की भी सीख दी कि यदि तुम यदि भविष्य में सुखी रहना चाहते हो, तो उसके लिए प्रयास आज से शुरू करो।

*🔔👪⏰🪔🐎विशेष : - भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम सभी को अच्छे संस्कार आने वाली पीढ़ी को देना आवश्यक है। जबतक बच्चों में हम सच्चे संस्कार नहीं देंगे तबतक हम स्वयं व हमारा परिवार,  समाज, देश-विदेश का समुचित विकास असंभव है। जैन दर्शन में गर्भ में आने से पहले व मरण तक किस समय किस प्रकार क्या क्रिया करना आदि संस्कारों का आदिनाथ पुराण ग्रंथ में वर्णन है। इसे आप गूगल बाबा व यूट्यूब पर भी प्राप्त कर सकते है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 25 जनवरी 2023

स्वयं के सुधार का उपाय

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 स्वयं के सुधार का उपाय ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.माघ शुक्ल 6 , शुक्र गुरुवार दिनांक 26 जनवरी  2023 को तेरवें तीर्थंकर सभी को निर्मलता प्रदान करने वाले विमलनाथ भगवान जी का ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव फरवरी माह में आने वाली  2,3,9,11,13,14,16,17,19,22,24,26, व 27 तारीख को है। पांच तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदल कर जीवन सफल करें।*

एक गुरुकुल के आचार्य अपने शिष्य की सेवा से बहुत प्रभावित हुए । विद्या पूरी होने के बाद जब शिष्य विदा होने लगा तो गुरू ने उसे आशीर्वाद के रूप में एक "दर्पण" दिया... 

वह साधारण दर्पण नहीं था । उस दिव्य दर्पण में किसी भी व्यक्ति के मन के भाव को दर्शाने की क्षमता थी।

शिष्य,गुरू जी के इस आशीर्वाद से बड़ा प्रसन्न था । उसने सोचा कि चलने से पहले क्यों ना दर्पण की क्षमता की जांच कर ली जाए....

परीक्षा लेने की जल्दबाजी में उसने दर्पण का मुंह सबसे पहले गुरुजी के सामने कर दिया.... 

शिष्य को तो सदमा लग गया । दर्पण यह दर्शा रहा था कि गुरुजी के हृदय में मोह, अहंकार, क्रोध आदि दुर्गुण स्पष्ट नजर आ रहे हैं.... 

मेरे आदर्श,मेरे गुरू जी इतने अवगुणों से भरे हैं , यह सोचकर वह बहुत दुखी हुआ. दुखी मन से वह दर्पण लेकर गुरुकुल से रवाना तो हो गया लेकिन रास्ते भर मन में एक ही बात चलती रही कि जिन गुरुजी को समस्त दुर्गुणों से रहित एक आदर्श पुरूष समझता था लेकिन दर्पण ने तो कुछ और ही बता दिया..... 

उसके हाथ में दूसरों को परखने का यंत्र आ गया था, इसलिए उसे जो मिलता उसकी परीक्षा ले लेता... 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

उसने अपने कई इष्ट मित्रों तथा अन्य परिचितों के सामने दर्पण रखकर उनकी परीक्षा ली । सब के हृदय में कोई ना कोई दुर्गुण अवश्य दिखाई दिया.... 

जो भी अनुभव रहा सब दुखी करने वाला,वह सोचता जा रहा था कि संसार में सब इतने बुरे क्यों हो गए हैं , सब दोहरी मानसिकता वाले लोग हैं।

जो दिखते हैं दरअसल वे हैं नहीं....
इन्हीं निराशा से भरे विचारों में डूबा दुखी मन से वह किसी तरह घर तक पहुंचा.... 
उसे अपने माता पिता का ध्यान आया । उसके पिता की तो समाज में बड़ी प्रतिष्ठा है । उसकी माता को तो लोग साक्षात देवतुल्य ही कहते हैं,इनकी परीक्षा की जाए

उसने उस दर्पण से माता पिता की भी परीक्षा कर ली...उनके हृदय में भी कोई ना कोई दुर्गुण देखा । ये भी कि दुर्गुणों से पूरी तरह मुक्त कोई नहीं है । संसार सारा मिथ्या पर चल रहा है.... 
अब उस के मन की बेचैनी सहन के बाहर हो चुकी थी, 
उसने दर्पण उठाया और चल दिया गुरुकुल की ओर.....

शीघ्रता से पहुंचा और सीधा जाकर अपने गुरूजी के सामने खड़ा हो गया... 

गुरुजी उसके मन की बेचैनी देखकर सारी बात का अंदाजा लगा चुके थे... 

शिष्य ने गुरुजी से विनम्रतापूर्वक कहा:- 
गुरुदेव,मैंने आपके दिए दर्पण की मदद से देखा कि सबके दिलों में तरह तरह के दोष हैं,कोई भी दोषरहित सज्जन मुझे अभी तक क्यों नहीं दिखा... 

क्षमा के साथ कहता हूं कि स्वयं आपमें और अपने माता पिता में मैंने दोषों का भंडार देखा । इससे मेरा मन बड़ा व्याकुल है... 

तब गुरुजी हंसे और उन्होंने दर्पण का रुख शिष्य की ओर कर दिया....
शिष्य दंग रह गया.....
उसके मन के प्रत्येक कोने में राग-द्वेष, अहंकार, क्रोध जैसे दुर्गुण भरे पड़े थे, ऐसा कोई कोना ही न था जो निर्मल हो... 

गुरुजी बोले:- 
बेटा,यह दर्पण मैंने तुम्हें अपने दुर्गुण देखकर स्वयं के जीवन में सुधार लाने के लिए दिया था नाकि दूसरों के दुर्गुण खोजने के लिए... 
जितना समय तुमने दूसरों के दुर्गुण देखने में लगाया उतना समय यदि तुमने स्वयं को सुधारने में लगाया होता तो.....अब तक तुम्हारा व्यक्तित्व बदल चुका होता... !!

 जीवन मे दूसरों को सुधारने से पहले खुद को बदलना चाहिए ताकि समाज में बदलाव लाया जा सकें।

*🔔🎪⏰🪔⛳विशेष : - भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हमें स्वयं का सुधार करना है तो हमें सच्चे देव शास्त्र गुरु के सानिध्य में रहकर दिंगबर मुनिराज के दिशानिर्देश में रहकर जीवन को सफल बनाया जा सकता है। बिना सच्चे गुरु के किसी भी जीव का आत्मकल्याण नहीं हुआ।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 24 जनवरी 2023

सच्चा पुरुषार्थ

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सच्चा पुरुषार्थ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.माघ शुक्ल  4 , बुधवार दिनांक 25 जनवरी  2023 को तेरवें तीर्थंकर सभी को निर्मलता प्रदान करने वाले विमलनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🕉️2.माघ शुक्ल 6 , शुक्रवार दिनांक 27 जनवरी  2023 को तेरवें तीर्थंकर सभी को निर्मलता प्रदान करने वाले विमलनाथ भगवान जी का ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव फरवरी माह में आने वाली  2,3,9,11,13,14,16,17,19,22,24,26, व 27 तारीख को है। पांच तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदल कर जीवन सफल करें।*

एक बार एक शिष्य ने विनम्रतापूर्वक अपने गुरु जी से पूछा- ‘गुरु जी,कुछ लोग कहते हैं कि  जीवन एक संघर्ष है, कुछ अन्य कहते हैं कि जीवन एक खेल है और कुछ जीवन को एक उत्सव की संज्ञा देते हैं | इनमें कौन सही है?’

गुरु जी ने तत्काल बड़े ही धैर्यपूर्वक उत्तर दिया-

पुत्र,जिन्हें गुरु नहीं मिला उनके लिए जीवन एक संघर्ष है; जिन्हें गुरु मिल गया उनका जीवन एक खेल है और जो लोग गुरु द्वारा बताये गए मार्ग पर चलने लगते हैं, मात्र वे ही जीवन को एक उत्सव का नाम देने का साहस जुटा पाते हैं|

यह उत्तर सुनने के बाद भी शिष्य पूरी तरह से संतुष्ट न था| गुरु जी को इसका आभास हो गया |वे कहने लगे-‘लो, तुम्हें इसी सन्दर्भ में एक कहानी सुनाता हूँ|ध्यान से सुनोगे तो स्वयं ही अपने प्रश्न का उत्तर पा सकोगे |
उन्होंने जो कहानी सुनाई,वह इस प्रकार थी-

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

एक बार की बात है कि किसी गुरुकुल में तीन शिष्यों नें अपना अध्ययन सम्पूर्ण करने पर अपने गुरु जी से यह बताने के लिए विनती की कि उन्हें गुरुदाक्षिणा में, उनसे क्या चाहिए |गुरु जी पहले तो मंद-मंद मुस्कराये और फिर बड़े स्नेहपूर्वक कहने लगे-‘मुझे तुमसे गुरुदक्षिणा में एक थैला भर के सूखी पत्तियां चाहिए, ला सकोगे?’ वे तीनों मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए क्योंकि उन्हें लगा कि वे बड़ी आसानी से अपने गुरु जी की इच्छा पूरी कर सकेंगे |सूखी पत्तियाँ तो जंगल में सर्वत्र बिखरी ही रहती हैं| वे उत्साहपूर्वक एक ही स्वर में बोले-‘जी गुरु जी, जैसी आपकी आज्ञा |’

अब वे तीनों शिष्य चलते-चलते एक समीपस्थ जंगल में पहुँच चुके थे |लेकिन यह देखकर कि वहाँ पर तो सूखी पत्तियाँ केवल एक मुट्ठी भर ही थीं ,उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा | वे सोच में पड़ गये कि आखिर जंगल से कौन सूखी पत्तियां उठा कर ले गया होगा? इतने में ही उन्हें दूर से आता हुआ कोई किसान दिखाई दिया |वे उसके पास पहुँच कर, उससे विनम्रतापूर्वक याचना करने लगे कि वह उन्हें केवल एक थैला भर सूखी पत्तियां दे दे |

अब उस किसान ने उनसे क्षमायाचना करते हुए, उन्हें यह बताया कि वह उनकी मदद नहीं कर सकता क्योंकि उसने सूखी पत्तियों का ईंधन के रूप में पहले ही उपयोग कर लिया था | अब, वे तीनों, पास में ही बसे एक गाँव की ओर इस आशा से बढ़ने लगे थे कि हो सकता है वहाँ उस गाँव में उनकी कोई सहायता कर सके |

वहाँ पहुँच कर उन्होंने जब एक व्यापारी को देखा तो बड़ी उम्मीद से उससे एक थैला भर सूखी पत्तियां देने के लिए प्रार्थना करने लगे लेकिन उन्हें फिर से एकबार निराशा ही हाथ आई क्योंकि उस व्यापारी ने तो, पहले ही, कुछ पैसे कमाने के लिए सूखी पत्तियों के दोने बनाकर बेच दिए थे लेकिन उस व्यापारी ने उदारता दिखाते हुए उन्हें एक बूढी माँ का पता बताया जो सूखी पत्तियां एकत्रित किया करती थी|

पर भाग्य ने यहाँ पर भी उनका साथ  नहीं  दिया क्योंकि वह बूढी माँ तो उन पत्तियों को अलग-अलग करके कई प्रकार की ओषधियाँ बनाया करती थी |अब निराश होकर वे तीनों खाली हाथ ही गुरुकुल लौट गये |गुरु जी ने उन्हें देखते ही स्नेहपूर्वक पूछा- ‘पुत्रो,ले आये गुरुदक्षिणा ?’तीनों ने सर झुका लिया |गुरू जी द्वारा दोबारा पूछे जाने पर उनमें से एक शिष्य कहने लगा- ‘गुरुदेव,हम आपकी इच्छा पूरी नहीं कर पाये |हमने सोचा था कि सूखी पत्तियां तो जंगल में सर्वत्र बिखरी ही रहती होंगी लेकिन बड़े ही आश्चर्य की बात है कि लोग उनका भी कितनी तरह से उपयोग करते हैं

’गुरु जी फिर पहले ही की तरह मुस्कराते हुए प्रेमपूर्वक बोले- ‘निराश क्यों होते हो ?प्रसन्न हो जाओ और यही ज्ञान कि सूखी पत्तियां भी व्यर्थ नहीं हुआ करतीं बल्कि उनके भी अनेक उपयोग हुआ करते हैं; मुझे गुरुदक्षिणा के रूप में दे दो |’तीनों शिष्य गुरु जी को प्रणाम करके खुशी-खुशी अपने-अपने घर की ओर चले गये ।

वह शिष्य जो गुरु जी की कहानी एकाग्रचित्त हो कर सुन रहा था,अचानक बड़े उत्साह से बोला-‘गुरु जी,अब मुझे अच्छी तरह से ज्ञात हो गया है कि आप क्या कहना चाहते हैं |आप का  संकेत, वस्तुतः इसी ओर है न कि जब सर्वत्र सुलभ सूखी पत्तियां भी निरर्थक या बेकार नहीं होती हैं तो फिर हम कैसे, किसी भी वस्तु या व्यक्ति को छोटा और महत्त्वहीन मान कर उसका तिरस्कार कर सकते हैं? चींटी से लेकर हाथी तक और सुई से लेकर तलवार तक-सभी का अपना-अपना महत्त्व होता है |

गुरु जी भी तुरंत ही बोले-‘हाँ, पुत्र,मेरे कहने का भी यही तात्पर्य है कि हम जब भी किसी से मिलें तो उसे यथायोग्य मान देने का भरसक प्रयास करें ताकि आपस में स्नेह, सद्भावना,सहानुभूति एवं सहिष्णुता का विस्तार होता रहे और हमारा जीवन संघर्ष के बजाय उत्सव बन सके |

दूसरे,यदि जीवन को एक खेल ही माना जाए तो बेहतर यही होगा कि हम  निर्विक्षेप,स्वस्थ एवं शांत प्रतियोगिता में ही भाग लें और अपने निष्पादन तथा निर्माण को ऊंचाई के शिखर पर ले जाने का अथक प्रयास करें |’अब शिष्य पूरी तरह से संतुष्ट था |

यदि हम मन, वचन और कर्म- इन तीनों ही स्तरों पर इस कहानी का मूल्यांकन करें, तो भी यह कहानी खरी ही उतरेगी |सब के प्रति पूर्वाग्रह से मुक्त मन वाला व्यक्ति अपने वचनों से कभी भी किसी को आहत करने का दुःसाहस नहीं करता और उसकी यही ऊर्जा उसके पुरुषार्थ के मार्ग की समस्त बाधाओं को हर लेती है |वस्तुतः,हमारे जीवन का सबसे बड़ा ‘उत्सव’ पुरुषार्थ ही होता है-ऐसा विद्वानों का मत है |

*🔔⏰👪🔑विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम सभी को विभिन्न प्रकार से शिक्षा प्राप्त हो रही है।उस शिक्षा का हमें अपने शास्त्रों के अनुसार बुद्धि विवेक व परिस्थितियों के अनुसार इस्तेमाल करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 23 जनवरी 2023

कर्म , भाग्य बिना....

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒कर्म , भाग्य बिना....✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.माघ शुक्ल  4 , बुधवार दिनांक 25 जनवरी  2023 को तेरवें तीर्थंकर सभी को निर्मलता प्रदान करने वाले विमलनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🕉️2.माघ शुक्ल 6 , शुक्रवार दिनांक 27 जनवरी  2023 को तेरवें तीर्थंकर सभी को निर्मलता प्रदान करने वाले विमलनाथ भगवान जी का ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव फरवरी माह में आने वाली  2,3,9,11,13,14,16,17,19,22,24,26, व 27 तारीख को है। पांच तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदल कर जीवन सफल करें।*

एक पकोड़े वाला था। जब भी उसके पास पकोड़े खाने जाओ तो ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो। हर विषय पर उसको बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता था। कई बार उसे कहा कि भाई देर हो जाती है, जल्दी पकोड़े  लगा दिया करो पर उसकी बात ख़त्म ही नहीं होती। एक दिन अचानक उसके साथ मेरी कर्म और भाग्य पर बात शुरू हो गई।

तक़दीर और तदबीर की बात सुन मैंने सोचा कि चलो आज उसकी फ़िलासॉफ़ी देख ही लेते हैं। मैंने उससे एक सवाल पूछ लिया। मेरा सवाल उस पकोड़े  वाले से था कि आदमी मेहनत से आगे बढ़ता है या भाग्य से?

उसने जो जवाब दिया उसका जबाब को सुन कर मेरे दिमाग़ के सारे जालें ही साफ़ हो गए। वो पकोड़े  वाला मेरे से कहने लगा आपका किसी बैंक में लॉकर तो होगा.?

मैंने कहा हाँ, तो उस पकोड़े  वाले ने मेरे से कहा कि उस लॉकर की चाबियाँ ही इस सवाल का जवाब है। हर लॉकर की दो चाबियाँ होती हैं। एक आप के पास होती है और एक मैनेजर के पास। आप के पास जो चाबी है वह है परिश्रम और मैनेजर के पास वाली भाग्य।

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जब तक दोनों चाबियाँ नहीं लगतीं लॉकर का ताला नहीं खुल सकता। आप कर्मयोगी पुरुष हैं और मैनेजर भगवान! आपको अपनी चाबी भी लगाते रहना चाहिये। पता नहीं ऊपर वाला कब अपनी चाभी लगा दे। कहीं ऐसा न हो कि भगवान अपनी भाग्यवाली चाबी लगा रहा हो और हम परिश्रम वाली चाबी न लगा पायें और ताला खुलने से रह जाये।

*🔔⏰🪔⛳👪विशेष : -भव्य‌‌‌ आत्माओं, हम सभी के जीवन का लक्ष्य यह होना चाहिए कि शास्त्रों के अनुसार हमें प्रतिदिन षट् आवश्यक कर्तव्यों को करना है  सतकर्म करते रहिए, भाग्य भरोसे रहकर अपने लक्ष्य से दूर मत होइए।हम सभी के प्रति समय कर्तव्य पालन से ही हमारा वर्तमान व भविष्य निर्धारित होता है। यही प्रकृति का पहला व अंतिम संदेश है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 22 जनवरी 2023

संस्कारवान बहू


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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 संस्कारवान बहू ✍️🐒*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जनवरी माह में आगामी 25,27 व 31 तारीख को है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक धनी सेठ के सात बेटे थे। छः का विवाह हो चुका था। सातवीं बहू आयी, वह सत्संगी माँ-बाप की बेटी थी। बचपन से ही सत्संग में जाने से सत्संग के सुसंस्कार उसमें गहरे उतरे हुए थे। छोटी बहू ने देखा कि घर का सारा काम तो नौकर चाकर करते हैं, जेठानियाँ केवल खाना बनाती हैं उसमें भी खटपट होती रहती है। बहू को सुसंस्कार मिले थे कि अपना काम स्वयं करना चाहिए और प्रेम से मिलजुल कर रहना चाहिए। अपना काम स्वयं करने से स्वास्थ्य बढ़िया रहता है।

उसने युक्ति खोज निकाली और सुबह जल्दी स्नान करके, शुद्ध वस्त्र पहनकर पहले ही रसोईघर में जा बैठी। जेठानियों ने टोका लेकिन फिर भी उसने बड़े प्रेम से रसोई बनाई और सबको प्रेम से भोजन कराया। सभी बड़े तृप्त व प्रसन्न हुए।

दिन में सास छोटी बहू के पास जाकर बोली "बहू ! तू सबसे छोटी है, तू रसोई क्यों बनाती है ? तेरी छः जिठानियाँ हैं।"

बहू "मांजी ! कोई भूखा अतिथि घर आ जाय तो उसको आप भोजन क्यों कराते हो ?"

"बहू ! शास्त्रों में लिखा है कि अतिथि भगवान का स्वरूप होता है। भोजन पाकर वह तृप्त होता है तो भोजन कराने वाले को बड़ा पुण्य मिलता है।"

"मांजी ! अतिथि को भोजन कराने से पुण्य होता है तो क्या घरवालों को भोजन कराने से पाप होता है ? अतिथि में भगवान का स्वरूप है तो घर के सभी लोग भी तो भगवान का स्वरूप है क्योंकि भगवान का निवास तो जीव में ही है।वह दुसरो की धर्म के अनुसार सेवा करते हुए अपने आत्मा को परमात्मा बना सकता है। अन्न आपका, बर्तन आपके सब चीजें आपकी हैं, मैं जरा सी मेहनत करके सबमें भगवन के गुणों का चिंतवन करते हुए  रसोई बनाकर खिलाने की थोड़ी-सी सेवा कर लूं तो मुझे पुण्य होगा कि नहीं होगा ? सब प्रेम से भोजन करके तृप्त होंगे, प्रसन्न होंगे तो कितना लाभ होगा ! इसलिए मांजी ! आप रसोई मुझे बनाने दो। कुछ मेहनत करुंगी तो स्वास्थ्य भी बढ़िया रहेगा।"

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सास ने सोचा कि ʹबहु बात तो ठीक कहती है। हम इसको सबसे छोटी समझते हैं पर इसकी बुद्धि सबसे अच्छी है।ʹ

दूसरे दिन सास सुबह जल्दी स्नान करके रसोई बनाने बैठ गई। बहुओं ने देखा तो बोलीं- "मांजी ! आप परिश्रम क्यों करती हो ?"

सास ने विनम्रतापूर्वक बोला "तुम्हारी उम्र से मेरी उम्र ज्यादा है। मैं जल्दी मर जाऊंगी। मैं अभी पुण्य नहीं करुंगी तो फिर कब करुंगी ?"

बहुएं बोलीं- "मांजी ! इसमें पुण्य क्या है ? यह तो घर का काम है।"

सास बोली "घर का काम करने से पाप होता है क्या ? जब भूखे व्यक्तियों को, साधुओं को भोजन कराने से पुण्य होता है तो क्या घरवालों को भोजन कराने से पाप होता है ? सभी में ईश्वर बनने की शक्ति  है।"

सास की बातें सुनकर सब बहुओं को लगा कि ʹइस बात का तो हमने कभी ख्याल ही नहीं किया। यह युक्ति बहुत बढ़िया है !ʹ अब जो बहू पहले जग जाय वही रसोई बनाने बैठ जाएं। पहले जो भाव था कि ʹआप रसोई बना....ʹ तो छः बारी बंधी थीं लेकिन अब ʹमैं बनाऊं, मैं बनाऊं...ʹ यह भाव हुआ तो आठ पारी बंध गई। दो और बढ़ गए सास और छोटी बहू। काम करने में ʹ तू कर, तू कर....ʹ इससे काम बढ़ जाता है और आदमी कम हो जाते हैं पर ʹ मैं करू, मैं करु....ʹ इससे काम हलका हो जाता है और आदमी बढ़ जाते हैं।

छोटी बहू उत्साही थी, सोचा कि ʹ अब तो रोटी बनाने में चौथे दिन बारी आती है, फिर क्या किया जाय ?ʹ घर में गेहूं पीसने की चक्की पड़ी थी, उसने उससे गेहूं पीसने शुरु कर दिये। मशीन की चक्की का आटा गर्म-गर्म बोरी में भर देने से जल जाता है, उसकी रोटी स्वादिष्ट नहीं होती लेकिन हाथ से पीसा गया आटा ठंडा और अधिक पौष्टिक होता है तथा उसकी रोटी भी स्वादिष्ट होती है। छोटी बहू ने गेहूं पीसकर उसकी रोटी बनायी तो सब कहने लगे की ʹआज तो रोटी का जायका बड़ा विलक्षण है !ʹ

सास बोली "बहू ! तू क्यों गेहूं पीसती है ? अपने पास पैसों की कमी नहीं है।"

"माऔजी ! हाथ से गेहूं पीसने से व्यायाम हो जाता है और बीमारी नहीं आती। दूसरा, रसोई बनाने से भी ज्यादा पुण्य गेहूं पीसने का है।"

सास और जेठानियों ने जब सुना तो लगा कि बहू ठीक कहती है। उन्होंने अपने-अपने पतियों से कहा ʹघर में चक्की ले आओ, हम सब गेहूं पिसेंगी।ʹ रोजाना सभी जेठानियां चक्की में दो ढाई सेर गेहूं पीसने लगीं।

घर में झाड़ू लगाने नौकर आता था। अब छोटी बहू ने सुबह जल्दी उठकर झाड़ू लगा दी। सास ने पूछा " बहू ! झाड़ू तूने लगाई है ?"

"मांजी ! आप मत पूछीये। आपको बोलती हूं तो मेरे हाथ से काम चला जाता है।"

"झाड़ू लगाने का काम तो नौकर का है, तू क्यों लगाती है ?"

"मांजी ! ʹरामायणʹ में आता है कि वन में बड़े-बड़े ऋषि-मुनि रहते थे लेकिन भगवान उनकी कुटिया में न जाकर पहले शबरी की कुटिया में गए। क्योंकि शबरी रोज चुपके-से झाड़ू लगाती थी, रास्ता साफ करती थी कि कहीं आते-जाते ऋषि-मुनियों के पैरों में कंकड़ न चुभ जाए।"

सास ने देखा कि यह छोटी बहू तो सबको लूट लेगी क्योंकि यह सबका पुण्य अकेले ही ले लेती है। अब सास और सब बहुओं ने मिलके झाड़ू लगानी शुरू कर दी।

जिस घर में आपस में प्रेम होता है वहां लक्ष्मी बढ़ती है और जहां कलह होता है वहां निर्धनता आती है। सेठ का तो धन दिनों दिन बढ़ने लगा। उसने घर की सब स्त्रियों के लिए गहने और कपड़े बनवा दिए। अब छोटी बहू ससुर से मिले गहने लेकर बड़ी जेठानी के पास गई और बोली "आपके बच्चे हैं, उनका विवाह करोगी तो गहने बनवाने पड़ेंगे। मेरे तो अभी कोई बच्चा है नहीं। इसलिए इन गहनों को आप रख लीजिये।"

गहने जेठानी को देकर बहू ने कुछ पैसे और कपड़े नौकरों में बांट दिए। सास ने देखा तो बोली "बहू ! यह तुम क्या करती हो ? आपके ससुर ने सबको गहने बनवाकर दिए हैं और आपने वे जेठानी को दे दिए और पैसे, कपड़े नौकरों में बांट दिए !"

"मांजी ! मैं अकेले इतना संग्रह करके क्या करुंगी ? अपनी वस्तु किसी जरूरतमंद के काम आये तो आत्मिक संतोष मिलता है और दान करने का तो अमिट पुण्य होता ही है !"

सास को बहू की बात लग गई। वह सेठ के पास जाकर बोली "मैं नौकरों में धोती-साड़ी बांटूगी और आसपास में जो गरीब परिवार रहते हैं उनके बच्चों को फीस मैं स्वयं भरुंगी। अपने पास कितना धन है, किसी के काम आये तो अच्छा है। न जाने कब मौत आ जाय और सब यहीं पड़ा रह जाय ! जितना अपने हाथ से पुण्य कर्म हो जाए अच्छा है।"

सेठ बहुत प्रसन्न हुआ कि पहले नौकरों को कुछ देते तो लड़ पड़ती थी पर अब कहती है कि ʹ मैं खुद दूंगी।ʹ सास दूसरों को वस्तुएं देने लगी तो यह देख के दूसरी बहुएं भी देने लगीं। नौकर भी खुश हो के मन लगा के काम करने लगे और आस-पड़ोस में भी खुशहाली छा गई।

*यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।*
*स यत्प्रमाणं कुरूते लोकस्तदनुवर्तते।।*

ʹश्रेष्ठ मनुष्य जो-जो आचरण करता है, दूसरे मनुष्य वैसा-वैसा ही करते हैं। वह जो कुछ प्रमाण कर देता है, दूसरे मनुष्य उसी के अनुसार आचरण करते हैं।ʹ

छोटी बहू ने जो आचरण किया उससे उसके घर का तो सुधार हुआ ही, साथ में पड़ोस पर भी अच्छा असर पड़ा, उनके घर में भी सुधार हुआ । देने के भाव से आपस में प्रेम-भाईचारा बढ़ गया। इस तरह बहू को सत्संग से मिली सूझबूझ ने उसके घर के साथ अनेक घरों को खुशहाल कर दिया !

सेठजी व सभी बच्चों ने सलाह कर अपने नगर में विशाल पत्थरों का भव्य मंदिर बनवाया। उसमें आदिनाथ भगवान की वीतरागी प्रभु को पंचकल्याणक महोत्सव करवाने से नगर में राम राज्य की स्थापना हो गई।

*🔔👪⏰🎪↔️विशेष : -भव्य‌‌‌ आत्माओं, हमें अपनी सात पीढ़ी को संस्कारवान व सुरक्षित रखने केलिए अपनी आमदनी का छठवां हिस्सा सच्चे धर्म कार्यो में खर्च करना आवश्यक है।वह धर्म के अलावा हमारा साथी कोई नहीं है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 21 जनवरी 2023

सच्चा उत्तराधिकारी

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सही उत्तराधिकारी✍️🐒*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जनवरी माह में आगामी 25,27 व 31 तारीख को है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-भव्य महान आत्माओं आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानी पढ़ने से कुछ धर्म के आत्मकल्याण के संस्कार तो पड़ गए जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।जी हां जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने कीमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें। आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

बहुत समय पहले हरिशंकर नाम का एक राजा था। उसके तीन पुत्र थे और अपने उन तीनों पुत्रों में से वह किसी एक पुत्र को राजगद्दी सौंपना चाहता था। पर किसे? राजा ने एक तरकीब निकाली और उसने तीनो पुत्रों को बुलाकर कहा– अगर तुम्हारे सामने कोई अपराधी खड़ा हो तो तुम उसे क्या सजा दोगे?

पहले राजकुमार ने कहा कि अपराधी को मौत की सजा दी जाए तो दूसरे ने कहा कि अपराधी को काल कोठरी में बंद कर दिया जाये। अब तीसरे राजकुमार की बारी थी। उसने कहा कि पिताजी सबसे पहले यह देख लिया जाये कि उसने गलती की भी है या नहीं।

इसके बाद उस राजकुमार ने एक कहानी सुनाई– किसी राज्य में राजा हुआ करता था, उसके पास एक सुन्दर सा तोता था| वह तोता बड़ा बुद्धिमान था, उसकी मीठी वाणी और बुद्धिमत्ता की वजह से राजा उससे बहुत खुश रहता था। एक दिन की बात है कि तोते ने राजा से कहा कि मैं अपने माता-पिता के पास जाना चाहता हूँ। वह जाने के लिए राजा से विनती करने लगा।
 
तब राजा ने उससे कहा कि ठीक है पर तुम्हें पांच दिनों में वापस आना होगा। वह तोता जंगल की ओर उड़ चला, अपने माता-पिता से जंगल में मिला और खूब खुश हुआ। ठीक पांच दिनों बाद जब वह वापस राजा के पास जा रहा था तब उसने एक सुन्दर सा उपहार राजा के लिए ले जाने का सोचा।

वह राजा के लिए अमृत फल ले जाना चाहता था। जब वह अमृत फल के लिए पर्वत पर पहुंचा तब तक रात हो चुकी थी। उसने फल को तोड़ा और रात वहीँ गुजारने का सोचा। वह सो रहा था कि तभी एक सांप आया और उस फल को खाना शुरू कर दिया। सांप के जहर से वह फल भी विषाक्त हो चुका था।

जब सुबह हुई तब तोता उड़कर राजा के पास पहुँच गया और कहा– राजन मैं आपके लिए अमृत फल लेकर आया हूँ। इस फल को खाने के बाद आप हमेशा के लिए जवान और अमर हो जायेंगे। तभी मंत्री ने कहा कि महाराज पहले देख लीजिए कि फल सही भी है कि नहीं ? राजा ने बात मान ली और फल में से एक टुकड़ा कुत्ते को खिलाया।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

कुत्ता तड़प-तड़प कर मर गया। राजा बहुत क्रोधित हुआ और अपनी तलवार से तोते का सिर धड़ से अलग कर दिया। राजा ने वह फल बाहर फेंक दिया। कुछ समय बाद उसी जगह पर एक पेड़ उगा। राजा ने सख्त हिदायत दी कि कोई भी इस पेड़ का फल ना खाएं क्यूंकि राजा को लगता था कि यह अमृत फल विषाक्त होते हैं और तोते ने यही फल खिलाकर उसे मारने की कोशिश की थी।

एक दिन एक बूढ़ा आदमी उस पेड़ के नीचे विश्राम कर रहा था। उसने एक फल खाया और वह जवान हो गया क्यूंकि उस वृक्ष पर उगे हुए फल विषाक्त नहीं थे। जब इस बात का पता राजा को चला तो उसे बहुत ही पछतावा हुआ उसे अपनी करनी पर लज़्ज़ा हुई।

तीसरे राजकुमार के मुख से यह कहानी सुनकर राजा बहुत ही खुश हुआ और तीसरे राजकुमार को सही उत्तराधिकारी समझते हुए उसे ही अपने राज्य का राजा चुना।

किसी भी अपराधी को सजा देने से पहले यह देख लेना चाहिए कि उसकी गलती है भी या नहीं, कहीं भूलवश आप किसी निर्दोष को तो सजा देने नहीं जा रहे हैं। निरपराध को कतई सजा नहीं मिलनी चाहिए..!!

*⏰👪🔔✅⛳विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं,हम सभी के जीवन में छोटे बड़े अनेक प्रकार के फैसले हमें घर, परिवार, समाज व अन्य जगहों पर लेना होता है।उन सभी के बारे में हमें बुद्धि व न्याय पूर्वक निर्णय लेना चाहिए। हमारे लिए गए निर्णय से स्वयं का , दूसरों का अहित नहीं होना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 20 जनवरी 2023

हमारे कर्म

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🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 हमारे कर्म ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🕉️1.माघ कृष्ण शनि अमावस्या दिनांक 21 जनवरी  2023   शनिवार  को ग्यारवें तीर्थंकर सभी श्रेयता प्रदान करने वाले श्रेयांसनाथ भगवान का ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जनवरी माह में आने वाली 23, 25 26 व 31 तारीख को है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदल कर जीवन सफल करें।*

एक राजा अपनी वीरता और सुशासन के लिए प्रसिद्ध था। एक बार वो अपने गुरु के साथ भ्रमण कर रहा था, राज्य की समृद्धि और खुशहाली देखकर उसके भीतर घमंड के भाव आने लगे, और वो मन ही मन सोचने लगे, “सचमुच, मैं एक महान राजा हूँ, मैं कितने अच्छे से अपने प्रजा देखभाल करता हूँ !”

गुरु सर्वज्ञानी थे, वे तुरंत ही अपने शिष्य के भावों को समझ गए और तत्काल उसे सुधारने का निर्णय लिया।

रास्ते में ही एक बड़ा सा पत्थर पड़ा था, गुरु जी ने सैनिकों को उसे तोड़ने का निर्देश दिया।

जैसे ही सैनिकों ने पत्थर के दो टुकड़े किये एक अविश्वश्नीय दृश्य दिखा, पत्थर के बीचो-बीच कुछ पानी जमा था और उसमे एक छोटा सा मेंढक रह रहा था। पत्थर टूटते ही वो अपनी कैद से निकल कर भागा। सब अचरज में थे की आखिर वो इस तरह कैसे कैद हो गया और इस स्थिति में भी वो अब तक जीवित कैसे था ?

अब गुरु जी राजा की तरफ पलटे और पुछा, “अगर आप ऐसा सोचते हैं कि आप इस राज्य में हर किसी का ध्यान रख रहे हैं, सबको पालन-पोषन कर रहे हैं, तो बताइये पत्थरों के बीच फंसे उस मेंढक का ध्यान कौन रख रहा था.. बताइये कौन है इस मेंढक का रखवाला ?”

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

राजा को अपनी गलती का एहसास हो चुका था, उसने अपने अभिमान पर पछतावा होने लगा, गुरु की कृपा से वे जान चुके थे कि वो जीव के स्वयं के कर्म ही है जिसके कारण वह जीव चौरासी लाख योनियों में स्वयं के कर्मो के अनुसार स्थान निर्धारित करता है।जीव कर्म ही है जो स्वयं का ध्यान रखते है।

 *🔔⏰👪↔️🪔विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, हमारे द्वारा जीवन में कई बार अच्छा काम करने पर मिलने वाले यश और प्रसिद्धि से स्वयं के मन में अहंकार घर कर जाता है और अंततः यही हमारे अपयश और दुर्गति का कारण बनता है। अतः हमें ध्यान रखना चाहिए कि हम चाहे इस जीवन में किसी भी मुकाम पर पहुँच जाएं कभी घमंड न करें और सदा अपने अर्थपूर्ण जीवन के लिए उस सर्वशक्तिमान स्वयं के कर्मो से कृतज्ञ रहें। अतः हमें हमेशा सच्चे धर्म के अनुसार अच्छे कर्म करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 19 जनवरी 2023

सुखी कौन ?

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🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒सुखी कौन ? ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🐒नोट:-तेरस तिथी का क्षय है।*
*🕉️1. माघ कृष्ण चौदस दिनांक 20 जनवरी  2023  शुक्रवार  को प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव सभी को संस्कार प्रदान करने वाले   1008 श्री ऋषभदेव  भगवान जी का मोक्ष  कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*🕉️2.माघ कृष्ण शनि अमावस्या दिनांक 21 जनवरी  2023   शनिवार  को ग्यारवें तीर्थंकर सभी को श्रेयता प्रदान करने वाले श्रेयांसनाथ भगवान का ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जनवरी माह में आने वाली 23, 25 व 26 तारीख को है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदल कर जीवन सफल करें।*

एक भिखारी किसी किसान के घर भीख माँगने गया। किसान की स्त्री घर में थी, उसने चने की रोटी बना रखी थी। किसान जब घर आया, उसने अपने बच्चों का मुख चूमा, स्त्री ने उनके हाथ पैर धुलाये, उसके बाद वह रोटी खाने बैठ गया। स्त्री ने एक मुट्ठी चना भिखारी को डाल दिया, भिखारी चना लेकर चल दिया।

रास्ते में भिखारी सोचने लगा, “हमारा भी कोई जीवन है? दिन भर कुत्ते की तरह माँगते फिरते हैं। फिर स्वयं बनाना पड़ता है। इस किसान को देखो कैसा सुन्दर घर है। घर में स्त्री है, बच्चे हैं, अपने आप अन्न पैदा करता है। बच्चों के साथ प्रेम से भोजन करता है। वास्तव में सुखी तो यह किसान है।

इधर वह किसान रोटी खाते-खाते अपनी स्त्री से कहने लगा, “नीला बैल बहुत बुड्ढा हो गया है, अब वह किसी तरह काम नहीं देता, यदि कहीं से कुछ रुपयों का इन्तजाम हो जाये तो इस साल का काम चले। साधोराम महाजन के पास जाऊँगा, वह ब्याज पर दे देगा।” 

भोजन करके वह साधोराम महाजन के पास गया। बहुत देर चिरौरी विनती करने पर दो रुपए सैकड़ा सूद पर साधों ने रुपये देना स्वीकार किया। एक लोहे की तिजोरी में से साधोराम ने एक थैली निकाली और गिनकर रुपये किसान को दे दिये।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

रुपये लेकर किसान अपने घर को चला, वह रास्ते में सोचने लगा- “हम भी कोई आदमी हैं, घर में 5 रु. भी नकद नहीं। कितनी चिरौरी विनती करने पर उसने रुपये दिये हैं। साधो कितना धनी है, उसके पास सैकड़ों रुपये हैं।” वास्तव में सुखी तो यह साधो राम ही है। साधोराम छोटी सी दुकान करता था, वह एक बड़ी दुकान से कपड़े ले आता था और उसे बेचता था।

दूसरे दिन साधोराम कपड़े लेने गया, वहाँ सेठ पृथ्वीचन्द की दुकान से कपड़ा लिया। वह वहाँ बैठा ही था कि इतनी देर में कई तार आए कोई बम्बई का था तो कोई कलकत्ते का, किसी में लिखा था 5 लाख मुनाफा हुआ, किसी में एक लाख का। साधो महाजन यह सब देखता रहा, कपड़ा लेकर वह चला आया। रास्ते में सोचने लगा, “हम भी कोई आदमी हैं, सौ दो सौ जुड़ गये महाजन कहलाने लगे। पृथ्वीचन्द कैसे हैं, एक दिन में लाखों का फायदा। “वास्तव में सुखी तो यह है, उधर पृथ्वीचन्द बैठा ही था, कि इतने ही में तार आया कि 5 लाख का घाटा हुआ। वह बड़ी चिन्ता में था कि नौकर ने कहा, आज लाट साहब की रायबहादुर सेठ के यहाँ दावत है। आपको जाना है, मोटर तैयार है।” 

पृथ्वीचन्द मोटर पर चढ़ कर रायबहादुर की कोठी पर चला गया। वहाँ सोने चाँदी की कुर्सियाँ पड़ी थी, रायबहादुर जी से कलक्टर-कमिश्नर हाथ मिला रहे थे। बड़े-बड़े सेठ खड़े थे। वहाँ पृथ्वीचन्द सेठ को कौन पूछता, वे भी एक कुर्सी पर जाकर बैठ गया। लाट साहब आये, राय बहादुर से हाथ मिलाया, उनके साथ चाय पी और चले गये।

पृथ्वीचन्द अपनी मोटर में लौट रहें थे, रास्ते में सोचते आते हैं, हम भी कोई सेठ हैं, 5 लाख के घाटे से ही घबड़ा गये। राय बहादुर का कैसा ठाठ है, लाट साहब उनसे हाथ मिलाते हैं। “वास्तव में सुखी तो ये ही है।”
         
अब इधर लाट साहब के चले जाने पर रायबहदुर के सिर में दर्द हो गया, बड़े-बड़े डॉक्टर आये एक कमरे वे पड़े थे। कई तार घाटे के एक साथ आ गये थे। उनकी भी चिन्ता थी, कारोबार की भी बात याद आ गई। वे चिन्ता में पड़े थे, तभी खिड़की से उन्होंने झाँक कर नीचे देखा, एक भिखारी हाथ में एक डंडा लिये अपनी मस्ती में जा रहा था। राय बहदुर ने उसे देखा और बोले, “वास्तव में तो सुखी यही है, इसे न तो घाटे की चिन्ता न मुनाफे की फिक्र, इसे लाट साहब को पार्टी भी नहीं देनी पड़ती, सुखी तो यही है।”

इस प्रसंग से हमें यह पता चलता है कि हम एक-दूसरे को सुखी समझते हैं, पर वास्तव में सुखी कौन है, इसे तो वही जानता है जिसे आन्तरिक शान्ति है, जिसे आन्तरिक सुकून है। आप चाहे भिखारी हों चाहे करोड़पति हों। लेकिन आप के मन में जब तक शांति नहीं है तब तक आपको सुकून नहीं मिल सकता।

*🎪👪🪜🔑↔️विशेष : -भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज वर्तमान में जो व्यक्ति विशेष सच्चे देव-शास्त्र-गुरु के बताए हुए षट् आवश्यक कार्यो का पालन कर रहा है। वहीं व्यक्ति सुखी है। जो व्यक्ति पांच इंद्रियों के विषयों में सुख मान रहा है वह कभी भी सुखी नहीं हो सकता। अतः हम सभी को शास्त्रों के अनुसार आचरण करते हुए जीवन सफल करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 18 जनवरी 2023

उपकारी का उपकार

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 उपकारी का उपकार ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🐒नोट:-तेरस तिथी का क्षय है।*
*🕉️1. माघ कृष्ण  बारस दिनांक 19  जनवरी  2023  गुरुवार  को दसवें तीर्थंकर सभी को शीतलता प्रदान करने वाले   1008 श्री    शीतलनाथ भगवान जी का जन्म व तप   कल्याणक  महोत्सव हैं।तीर्थंकर शीतलनाथ जी का है जन्म तथा तप भूमि श्री ईटखोरी ( भद्दलपुर ) कोल्हुआ पहाड़ पर हुआ था | सभी वृक्ष ओस से आच्छादित थे, सूर्योदय होते ही ओस नष्ट – वैराग्य हुआ, संध्या के समय पूर्वाषाढ़ नक्षत्र में 1000 राजाओं के साथ जिन दीक्षा ली |यह पहाड़ गया जी के पास उत्तरप्रदेश में स्थित है।*
*🕉️2. माघ कृष्ण चौदस दिनांक 20 जनवरी  2023  शुक्रवार  को प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव सभी को संस्कार प्रदान करने वाले   1008 श्री ऋषभदेव  भगवान जी का मोक्ष  कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जनवरी माह में आने वाली 21, 23, 25 व 26 तारीख को है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

एक वन में एक ऋषि रहते थे। उनके डेरे पर बहुत दिनों से एक चूहा भी रहता आ रहा था। यह चूहा ऋषि से बहुत प्यार करता था। जब वे तपस्या में मग्न होते तो वह बड़े आनंद से उनके पास बैठा भजन सुनता रहता। यहाँ तक कि वह स्वयं भी ईश्वर की उपासना करने लगा था। लेकिन कुत्ते-बिल्ली और चील-कौवे आदि से वह सदा डरा-डरा और सहमा हुआ सा रहता।

एक बार ऋषि के मन में उस चूहे के प्रति बहुत दया आ गयी। वे सोचने लगे कि यह बेचारा चूहा हर समय डरा-सा रहता है, क्यों न इसे शेर बना दिया जाए। ताकि इस बेचारे का डर समाप्त हो जाए और यह बेधड़क होकर हर स्थान पर घूम सके। ऋषि बहुत बड़ी दैवीय शक्ति के स्वामी थे। उन्होंने अपनी शक्ति के बल पर उस चूहे को शेर बना दिया और सोचने लगे कि अब यह चूहा किसी भी जानवर से नहीं डरेगा और निर्भय होकर पूरे जंगल में घूम सकेगा।

लेकिन चूहे से शेर बनते ही चूहे की सारी सोच बदल गई।वह सारे वन में बेधड़क घूमता। उससे अब सारे जानवर डरने लगे और प्रणाम करने लगे। उसकी जय-जयकार होने लगी. किन्तु ऋषि यह बात जानते थे कि यह मात्र एक चूहा है, वास्तव में शेर नहीं है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

अतः ऋषि उससे चूहा समझकर ही व्यवहार करते।यह बात चूहे को पसंद नहीं आई कि कोई भी उसे चूहा समझ कर ही व्यवहार करे। वह सोचने लगा की ऐसे में तो दूसरे जानवरों पर भी बुरा असर पड़ेगा। लोग उसका जितना मान करते हैं, उससे अधिक घृणा और अनादर करना आरम्भ कर देंगे।

अतः चूहे ने सोचा कि क्यों न मैं इस ऋषि को ही मार डालूं,फिर न रहेगा बाँस, न बजेगी बांसुरी। यही सोचकर वह ऋषि को मारने के लिए चल पड़ा। ऋषि ने जैसे ही क्रोध से भरे शेर को अपनी ओर आते देखा तो वे उसके मन की बात समझ गये।उनको शेर पर बड़ा क्रोध आ गया।

अतः उसका घमंड तोड़ने के लिए  ऋषि ने अपनी दैवीय शक्ति से उसे एक बार फिर चूहा बना दिया।अंत मे चूहा अपने व्यवहार केलिए शर्मिदा हुआ।

 हमें कभी भी अपने हितैषी का अहित नहीं करना चाहिए, चाहे हम कितने ही बलशाली क्यों न हो जाए। हमें उन लोगों को हमेशा याद रखना चाहिए जिन्होंने हमारे बुरे वक्त में हमारा साथ दिया होता है। इसके अलावा हमें अपने बीते वक्त को भी नहीं भूलना चाहिए।चूहा यदि अपनी असलियत याद रखता तो उसे फिर से चूहा नहीं बनना पड़ता। बीता हुआ समय हमें घमंड से बाहर निकालता है..!!

*विशेष : -भव्य‌‌‌ आत्माओं,हम सभी के जीवन में हमारे उपर अनेक लोगों के उपकार है। अगर हम उन उपकारों को भूलकर अभिमान करते है तो हमारे कर्म ही हमारी असलीयत सभी के सामने प्रगट कर देंगे। अतः हमें कभी भी किसी व्यक्ति विशेष ने हमारे उपर उपकार किया है तो उसे भूलना नहीं चाहिए,उस प्रकार का उपकार अन्य लोगों पर करके ऋण मुक्त होना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 17 जनवरी 2023

एकता का परिणाम

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🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒एकता का परिणाम ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🐒नोट:-तेरस तिथी का क्षय है।*
*🕉️1. माघ कृष्ण  बारस दिनांक 19  जनवरी  2023  गुरुवार  को दसवें तीर्थंकर सभी को शीतलता प्रदान करने वाले   1008 श्री    शीतलनाथ भगवान जी का जन्म व तप   कल्याणक  महोत्सव हैं।तीर्थंकर शीतलनाथ जी का है जन्म तथा तप भूमि श्री ईटखोरी ( भद्दलपुर ) कोल्हुआ पहाड़ पर हुआ था | सभी वृक्ष ओस से आच्छादित थे, सूर्योदय होते ही ओस नष्ट – वैराग्य हुआ, संध्या के समय पूर्वाषाढ़ नक्षत्र में 1000 राजाओं के साथ जिन दीक्षा ली |यह पहाड़ गया जी के पास उत्तरप्रदेश में स्थित है।*
*🕉️2. माघ कृष्ण चौदस दिनांक 20 जनवरी  2023  शुक्रवार  को प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव सभी को संस्कार प्रदान करने वाले   1008 श्री ऋषभदेव  भगवान जी का ज्ञान  कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जनवरी माह में आने वाली 21, 23, 25 व 26 तारीख को है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

किसी जंगल में एक शेर रहता था जिससे सभी पशु-पक्षी बहुत डरते थे। शेर  किसी एक जानवर को मार कर अपना पेट भरता था। उसी जंगल में खरगोश, कछुआ, बंदर और हिरण, ये चारों पक्के और सच्चे दोस्त थे, जो हमेशा हर जानवर की मदद करने को तैयार रहते थे।

एक दिन एक भेड़िया उस जंगल में पहुंचा। रास्ते में उसे भालू मिला। भालू ने उसको जंगल के सारे कायदे कानून बताए कि यहां का राजा शेर  एक जानवर को मारकर खाता है, उससे बच कर रहना। चालाक भेड़िये ने सोचा, शेर से मित्रता करके उसका हितैषी बनकर, उसका दिल जीतना चाहिए, इससे मेरी जान तो बच जाएगी। 

भेड़िया शेर की गुफा में गया और सोए हुए शेर के पास बैठ गया। शेर नींद से जब जागा तो भेड़िए को खाने को उद्यत हुआ। भेड़िए ने कहा, महाराज, पशुलोक से पशु देवता ने आपकी सेवा के लिए मुझे भेजा है। अब आपको शिकार पर जाने की जरूरत नहीं। आज से आपको मैं शिकार लाकर दूंगा। शेर ने भेड़िए की बात मान ली।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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भेड़िए ने जंगल में यह ढिंढोरा पिटवाया कि मैं पशुलोक से राजा शेर का सेवक बन कर आया हूं।  जंगल के राजा की भूख मिटाने के लिए एक प्राणी मेरे साथ चलेगा। जंगल के सभी जानवर डर गए और भेड़िए की बात मानने को तैयार हो गए।

शेर के पास जाने के क्रम में एक दिन खरगोश की बारी आई और भेड़िया उसे ले जाने लगा। तभी वहां हिरण, बंदर और कछुआ भी आ पहुंचे और उसके साथ जाने की जिद करने लगे। शेर के सामने पहुंचकर चारों ने बारी-बारी अपनी बात शेर से कहीं। सबसे पहले खरगोश बोला, महाराज आज  आप मेरा भोजन किजीए। कछुआ बोला, नहीं महाराज आप अकेले खरगोश को नहीं खाइए, मुझे भी खाइए। तभी बंदर कहता है, महाराज इन तीनों को छोड़ दीजिए, मैं बड़ा हूं, मुझे अपना भोजन बना लीजिए। इतने में हिरण बोल पड़ा, महाराज, इन तीनों को छोड़ दीजिए, मैं अकेला ही तीनों के बराबर हूं, आप मुझे अपना शिकार बना लीजिए।

भेड़िया यह सब सुन रहा था। उसने कहा, महाराज, देर ना करें इन चारों की बातों में ना आए, एक झटके में इनको खत्म करके अपनी भूख मिटायें। तभी शेर ने चारों को अपने पास बुलाया और कहा, मैं तुम्हारी सच्ची एकता, मित्रता और त्याग देख कर बहुत खुश हुआ। यह कह कर शेर ने भेड़िए को अपना शिकार बना दिया।

किसी भी कार्य में सफलता पाने के लिए आपसी एकता होना बहुत जरूरी है। एकता के लिए चाहिए आपसी स्नेह और विश्वास। स्नेह के आधार से ही सहयोगी बन पाते हैं। सहयोगी बनने के लिए अपने को मिटाना पड़ता है अर्थात् अपने पुराने संस्कारों को मिटाना होता है। इसलिए आप हमेशा जरूरतमंदों की सहायता करते रहो..!!

*🔔👨‍👩‍👦‍👦💯✍️विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हमारे पतन का मुख्य कारण यह है कि हमारे परिवार, समाज, राष्ट्र व विश्व में एकता के अभाव में एक दुसरे के विकास में बाधक बनें हुए है। अतः हमें आज से ही अपने परिवार व समाज में एकता के लिए स्वयं को समर्पित करना होगा। वरना आज देश व विदेश की हालत आप सभी जानते है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 16 जनवरी 2023

कर्मों का जन्मों तक फल प्राप्त होता है

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 कर्मो का जन्मों तक कर्ज चुकाना पड़ता है ✍️🐒*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जनवरी माह में आने वाली 19, 20, 21, 23, 25 व 26 तारीख को है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

          👦एक सेठ जी बहुत ही दयालु थे। धर्म-कर्म में यकीन करते थे। उनके पास जो भी व्यक्ति उधार माँगने आता वे उसे मना नहीं करते थे। सेठ जी मुनीम को बुलाते और जो उधार माँगने वाला व्यक्ति होता उससे पूछते कि "भाई ! तुम उधार कब लौटाओगे ? इस जन्म में या फिर अगले जन्म में ?"
          जो लोग ईमानदार होते वो कहते - "सेठ जी ! हम तो इसी जन्म में आपका कर्ज़ चुकता कर देंगे।" और कुछ लोग जो ज्यादा चालक व बेईमान होते वे कहते - "सेठ जी ! हम आपका कर्ज़ अगले जन्म में उतारेंगे।" और अपनी चालाकी पर वे मन ही मन खुश होते कि "क्या मूर्ख सेठ है ! अगले जन्म में उधार वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है।" ऐसे लोग मुनीम से पहले ही कह देते कि वो अपना कर्ज़ अगले जन्म में लौटाएंगे और मुनीम भी कभी किसी से कुछ पूछता नहीं था। जो जैसा कह देता मुनीम वैसा ही बही में लिख लेता।
         एक दिन एक चोर भी सेठ जी के पास उधार माँगने पहुँचा। उसे भी मालूम था कि सेठ अगले जन्म तक के लिए रकम उधार दे देता है। हालांकि उसका मकसद उधार लेने से अधिक सेठ की तिजोरी को देखना था। चोर ने सेठ से कुछ रुपये उधार माँगे, सेठ ने मुनीम को बुलाकर उधार देने को कहा। मुनीम ने चोर से पूछा- "भाई ! इस जन्म में लौटाओगे या अगले जन्म में ?"  चोर ने कहा - "मुनीम जी ! मैं यह रकम अगले जन्म में लौटाऊँगा।"  मुनीम ने तिजोरी खोलकर पैसे उसे दे दिए। चोर ने भी तिजोरी देख ली और तय कर लिया कि इस मूर्ख सेठ की तिजोरी का धन आज रात में चोरी करुंगा ।
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          रात में ही सेठ के घर पहुँच गया और वहीं भैंसों के तबेले में छिपकर सेठ के सोने का इन्तजार करने लगा। अचानक चोर ने सुना कि दो भैंसे आपस में बातें कर रही हैं और वह चोर भैंसों की भाषा ठीक से समझ पा रहा है।
         एक भैंस ने दूसरी से पूछा- "तुम तो आज ही आई हो न, बहन !" उस भैंस ने जवाब दिया- “हाँ, आज ही सेठ के तबेले में आई हूँ, सेठ जी का पिछले जन्म का कर्ज़ उतारना है और तुम कब से यहाँ हो ?” उस भैंस ने पलटकर पूछा तो पहले वाली भैंस ने बताया- "मुझे तो सात साल हो गए हैं, बहन ! मैंने सेठ जी से कर्ज़ लिया था यह कहकर कि अगले जन्म में लौटाऊँगी। सेठ से उधार लेने के बाद जब मेरी मृत्यु हो गई तो मैं भैंस बन गई और सेठ के तबेले में चली आयी। अब दूध देकर उसका कर्ज़ उतार रही हूँ। जब तक कर्ज़ व चक्रवर्ती ब्याज की रकम  पूरी नहीं हो जाती तब तक यहीं रहना होगा।”
           चोर ने जब उन भैंसों की बातें सुनी तो होश उड़ गए और वहाँ बंधी भैंसों की ओर देखने लगा। वो समझ गया कि उधार चुकाना ही पड़ता है, चाहे इस जन्म में , फिर अगले जन्म में हो या अनेक जन्मों तक उसे चुकाना ही होगा। वह उल्टे पाँव सेठ के घर की ओर भागा और दूसरे दिन जो कर्ज़ उसने लिया था ब्याज सहित उसे फटाफट मुनीम को लौटाकर रजिस्टर से अपना नाम कटवा लिया।
     
      हम सब इस दुनिया में इसलिए आते हैं, क्योंकि हमें किसी से लेना होता है तो किसी का देना होता है। इस तरह से प्रत्येक को कुछ न कुछ लेने देने के हिसाब चुकाने होते हैं। इस कर्ज़ का हिसाब चुकता करने के लिए इस दुनिया में कोई बेटा बनकर आता है तो कोई बेटी बनकर आती है, कोई पिता बनकर आता है, तो कोई माँ बनकर आती है, कोई पति बनकर आता है, तो कोई पत्नी बनकर आती है, कोई प्रेमी बनकर आता है, तो कोई प्रेमिका बनकर आती है, कोई मित्र बनकर आता है, तो कोई शत्रु बनकर आता है, कोई पङोसी बनकर आता है तो कोई रिश्तेदार बनकर आता है। चाहे दुःख हो या सुख हिसाब तो सबको देना ही पड़ता हैं। यही प्रकृति का नियम है।

*⏰🔔🎪↔️विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज वर्तमान में हम दुसरो को जो भी मन वचन व शरीर के माध्यम से लेन-देन कर रहें है उसी के अनुसार हमारा भविष्य निर्धारित होता है।वह कर्म फल हमें तुरंत व बाद में भी फल देता है।उदा.जिस प्रकार एक आम का बीज कुछ वर्षो तक फल देता है।उसी प्रकार हमारे द्वारा किया कर्म भी कई बार हमें फल देता है।अतः हम जीवन पर्यन्त ऐसा व्यवहार करें कि वह कर्म फल जब हमें वापसी में प्राप्त हो तो हमें खुशी हो।यही प्रकृति का पहला व अंतिम नियम है।*

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*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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