बुधवार, 25 जनवरी 2023

स्वयं के सुधार का उपाय

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 स्वयं के सुधार का उपाय ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.माघ शुक्ल 6 , शुक्र गुरुवार दिनांक 26 जनवरी  2023 को तेरवें तीर्थंकर सभी को निर्मलता प्रदान करने वाले विमलनाथ भगवान जी का ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव फरवरी माह में आने वाली  2,3,9,11,13,14,16,17,19,22,24,26, व 27 तारीख को है। पांच तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदल कर जीवन सफल करें।*

एक गुरुकुल के आचार्य अपने शिष्य की सेवा से बहुत प्रभावित हुए । विद्या पूरी होने के बाद जब शिष्य विदा होने लगा तो गुरू ने उसे आशीर्वाद के रूप में एक "दर्पण" दिया... 

वह साधारण दर्पण नहीं था । उस दिव्य दर्पण में किसी भी व्यक्ति के मन के भाव को दर्शाने की क्षमता थी।

शिष्य,गुरू जी के इस आशीर्वाद से बड़ा प्रसन्न था । उसने सोचा कि चलने से पहले क्यों ना दर्पण की क्षमता की जांच कर ली जाए....

परीक्षा लेने की जल्दबाजी में उसने दर्पण का मुंह सबसे पहले गुरुजी के सामने कर दिया.... 

शिष्य को तो सदमा लग गया । दर्पण यह दर्शा रहा था कि गुरुजी के हृदय में मोह, अहंकार, क्रोध आदि दुर्गुण स्पष्ट नजर आ रहे हैं.... 

मेरे आदर्श,मेरे गुरू जी इतने अवगुणों से भरे हैं , यह सोचकर वह बहुत दुखी हुआ. दुखी मन से वह दर्पण लेकर गुरुकुल से रवाना तो हो गया लेकिन रास्ते भर मन में एक ही बात चलती रही कि जिन गुरुजी को समस्त दुर्गुणों से रहित एक आदर्श पुरूष समझता था लेकिन दर्पण ने तो कुछ और ही बता दिया..... 

उसके हाथ में दूसरों को परखने का यंत्र आ गया था, इसलिए उसे जो मिलता उसकी परीक्षा ले लेता... 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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उसने अपने कई इष्ट मित्रों तथा अन्य परिचितों के सामने दर्पण रखकर उनकी परीक्षा ली । सब के हृदय में कोई ना कोई दुर्गुण अवश्य दिखाई दिया.... 

जो भी अनुभव रहा सब दुखी करने वाला,वह सोचता जा रहा था कि संसार में सब इतने बुरे क्यों हो गए हैं , सब दोहरी मानसिकता वाले लोग हैं।

जो दिखते हैं दरअसल वे हैं नहीं....
इन्हीं निराशा से भरे विचारों में डूबा दुखी मन से वह किसी तरह घर तक पहुंचा.... 
उसे अपने माता पिता का ध्यान आया । उसके पिता की तो समाज में बड़ी प्रतिष्ठा है । उसकी माता को तो लोग साक्षात देवतुल्य ही कहते हैं,इनकी परीक्षा की जाए

उसने उस दर्पण से माता पिता की भी परीक्षा कर ली...उनके हृदय में भी कोई ना कोई दुर्गुण देखा । ये भी कि दुर्गुणों से पूरी तरह मुक्त कोई नहीं है । संसार सारा मिथ्या पर चल रहा है.... 
अब उस के मन की बेचैनी सहन के बाहर हो चुकी थी, 
उसने दर्पण उठाया और चल दिया गुरुकुल की ओर.....

शीघ्रता से पहुंचा और सीधा जाकर अपने गुरूजी के सामने खड़ा हो गया... 

गुरुजी उसके मन की बेचैनी देखकर सारी बात का अंदाजा लगा चुके थे... 

शिष्य ने गुरुजी से विनम्रतापूर्वक कहा:- 
गुरुदेव,मैंने आपके दिए दर्पण की मदद से देखा कि सबके दिलों में तरह तरह के दोष हैं,कोई भी दोषरहित सज्जन मुझे अभी तक क्यों नहीं दिखा... 

क्षमा के साथ कहता हूं कि स्वयं आपमें और अपने माता पिता में मैंने दोषों का भंडार देखा । इससे मेरा मन बड़ा व्याकुल है... 

तब गुरुजी हंसे और उन्होंने दर्पण का रुख शिष्य की ओर कर दिया....
शिष्य दंग रह गया.....
उसके मन के प्रत्येक कोने में राग-द्वेष, अहंकार, क्रोध जैसे दुर्गुण भरे पड़े थे, ऐसा कोई कोना ही न था जो निर्मल हो... 

गुरुजी बोले:- 
बेटा,यह दर्पण मैंने तुम्हें अपने दुर्गुण देखकर स्वयं के जीवन में सुधार लाने के लिए दिया था नाकि दूसरों के दुर्गुण खोजने के लिए... 
जितना समय तुमने दूसरों के दुर्गुण देखने में लगाया उतना समय यदि तुमने स्वयं को सुधारने में लगाया होता तो.....अब तक तुम्हारा व्यक्तित्व बदल चुका होता... !!

 जीवन मे दूसरों को सुधारने से पहले खुद को बदलना चाहिए ताकि समाज में बदलाव लाया जा सकें।

*🔔🎪⏰🪔⛳विशेष : - भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हमें स्वयं का सुधार करना है तो हमें सच्चे देव शास्त्र गुरु के सानिध्य में रहकर दिंगबर मुनिराज के दिशानिर्देश में रहकर जीवन को सफल बनाया जा सकता है। बिना सच्चे गुरु के किसी भी जीव का आत्मकल्याण नहीं हुआ।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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