शनिवार, 7 जनवरी 2023

वाणी व दान का महत्व

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 वाणी व दान का महत्व ✍️🐒*

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-भव्य महान आत्माओं आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानी पढ़ने से कुछ धर्म के आत्मकल्याण के संस्कार तो पड़ गए जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।जी हां जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने कीमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें। आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

एक भिखारी रोज एक दरवाजें पर जाता और भीख के लिए आवाज लगाता, और जब घर मालिक बाहर आता तो उसे गंदी गंदी गालियां और ताने देता, मर जाओ, काम क्यूं नही करतें, जीवन भर भीख मांगते रहोगे। कभी कभी गुस्से में उसे धकेल भी देता, पर भिखारी बस इतना ही कहता, ईश्वर तुम्हें सद्बुद्धि दे ताकि आप स्वयं के पापों की क्षमायाचना कर सको।

एक दिन सेठ बड़े गुस्से में था, शायद व्यापार में घाटा हुआ था, वो भिखारी उसी वक्त भीख मांगने आ गया, सेठ ने आव देखा ना ताव, सीधा उसे पत्थर से दे मारा, भिखारी के सर से खून बहने लगा, फिर भी उसने सेठ से कहा ईश्वर तुम्हें सद्बुद्धि दे ताकि आप स्वयं के पापों की क्षमायाचना कर सको। भीखारी वहां से जाने लगा, सेठ का थोड़ा गुस्सा कम हुआ, तो वहां सोचने लगा मैंने उसे पत्थर से भी मारा पर उसने बस दुआ दी, इसके पीछे क्या रहस्य है जानना पड़ेगा, और वहां भिखारी के पीछे चलने लगा।

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भिखारी जहां भी जाता सेठ उसके पीछे जाता, कही कोई उस भिखारी को कोई भीख दे देता तो कोई उसे मारता, जलील करता गालियां देता, पर भिखारी इतना ही कहता, ईश्वर तुम्हें सद्बुद्धि दे ताकि आप स्वयं के पापों की क्षमायाचना कर सको।

 अब वह घर को जा रहा  था, रास्ते में एक पेड़ के नीचे प्राप्त सामग्री में से कुछ सामग्री पक्षियों के लिए डाल दी।

भिखारी अपने घर लौट रहा था, सेठ भी उसके पीछे था, भिखारी जैसे ही अपने घर लौटा, एक टूटी फूटी खाट पे, एक महिला सोई थी, जो भिखारी की पत्नी थी, जैसे ही उसने अपने पति को देखा उठ खड़ी हुई और भीख का कटोरा देखने लगी, उस भीख के कटोरे मे मात्र दो  बासी रोटी व सब्जी थी, उसे देखते ही बुढिया बोली बस इतना ही और कुछ नही, और ये आपका सर कहा फूट गया?

भिखारी बोला, हां बस इतना ही जिसके पास जो था  उसने वही दिया। किसी ने कुछ  गालियां दी, पत्थर मारें, इसलिए ये सर फूट गया, भिखारी ने फिर कहा सब अपने ही पूर्व कर्मो का परिणाम हैं, याद है ना तुम्हें, कुछ वर्षो पहले हम कितने रईस हुआ करते थे, क्या नही था हमारे पास, पर हमने कभी दान नही किया, याद है तुम्हें वो अंधा भिखारी, बुढिया की ऑखों में ऑसू आ गये और उसने कहा हाँ,
कैसे हम उस अंधे भिखारी का मजाक उडाते थे, कैसे उसे रोटियों की जगह खाली कागज रख देते थे, कैसे हम उसे जलील करते थे, कैसे हम उसे कभी-कभी मार वा धकेल देते थे। अब महिला ने कहा हां सब कुछ याद है मुझे,  मैंने भी उसे राह नही दिखाई और घर के पास बनें नालें में गिरा दिया था, जब भी वहां रोटी मांगता मैंने बस उसे गालियां दी, एक बार तो उसका कटोरा तक फेंक दिया।

और वो अंधा भिखारी हमेशा कहता था, तुम्हारे पापों का हिसाब ईश्वर करेंगे, मैं नही, आज उस भिखारी की बद्दुआ और हाय हमें ले डूबी।

फिर भिखारी ने कहा, पर मैं किसी को बद्दुआ नही देता, चाहे मेरे साथ कितनी भी ज्यादती क्यू ना हो जाए, मेरे चेहरे पर हमेशा दुआ रहती हैं, मैं अब नही चाहता, की कोई और इतने बुरे दिन देखे, मेरे साथ अन्याय करने वालों को भी मैं दुआ देता हूं, क्यूंकि उनको मालूम ही नही, वो क्या पाप कर रहें है। जो सीधा ईश्वर देख रहा हैं, जैसी हमने भुगती है, कोई और ना भुगते, इसलिए मेरे दिल से बस अपना हाल देख दुआ ही निकलती हैं।

सेठ चुपके चुपके सब सुन रहा था, उसे अब सारी बात समझ आ गई थी। उन्होंने दोनो मिलकर खाया, और प्रभु की महिमा है बोल कर सो गए।

अगले दिन, वहां भिखारी भीख मांगने सेठ के यहां गया, सेठ ने पहले से ही रोटियां निकाल  के रखी थी। उसने भिखारी को दी और हल्की से मुस्कान भरे स्वर में कहा, माफ करना बाबा, गलती हो गई, भिखारी ने कहा, ईश्वर आपको सद्बुद्धि दे ताकि आप स्वयं अपना  भला कर सको और वो वहां से चला गया,
सेठ को एक बात समझ आ गई थी। इंसान से तो आटोमेटिक  दुआ-बद्दुआ निकलती है पर पूरी वह करता है जिसे सभी ईश्वर कहते है।वो जादू हमारे कर्मो के हिसाब से हमें प्राप्त होता है।

हो सके तो बस अच्छा करें, वो दिखता नही है तो क्या हुआ।

 सब का हिसाब पक्का रहता है कर्मो के पास।

*👪⏰🎪🪔🪜विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम दुसरो को जो भी दे रहे है वहीं भविष्य में हमें प्राप्त होगा। अतः हम सभी को सभी जीवों की यथायोग्य सहायता करनी चाहिए। जैसा बीज बोओ वैसे ही फल की प्राप्ति होगी।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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