गुरुवार, 27 मार्च 2025

मन की सच्चाई

*🔔 पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी 🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मन की सच्चाई ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔🪔 चैत्र अमावस्या, शनिवार 29 मार्च 2025 कलि काल के  14 वें  तीर्थंकर अनंत गुणों को प्रदान करने की शक्ति प्रदाता श्री अनंतनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अनंतनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 चैत्र अमावस्या , शनिवार 29 मार्च 2025 कलि काल के 18 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री अरनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी संस्कार प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अरनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल एकम, रविवार 30 मार्च 2025 कलि काल के  19 वें  तीर्थंकर अनंत गुणों को प्रदान करने की शक्ति प्रदाता श्री मल्लिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मल्लिनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 चैत्र शुक्ल तृतीया , सोमवार 31मार्च 2025 कलि काल के 17 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री कुंथुनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी संस्कार प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री कुंथुनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।🔔 नोट :- आज के दिन दूज व तृतीया तिथि समाहित है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎 इस मार्च माह में  चतुर्दशी तिथि  28 मार्च को है।*
*🔔🐎 सोलह कारण शाश्वत पर्व व व्रत 15 मार्च से 14 अप्रेल तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 14 मार्च शाम 6:50 से मल मास प्रारंभ होने से शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि पर 14 अप्रैल तक पाबंदी रहेगी । 🔔*
*🐎✍️ पंचक 26,27,28,29,30 मार्च को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*👨‍👨‍👦‍👦हम सभी के मन की सच्चाई इस कहानी से कुछ सीखो🔔* 

हमारे पास पाँच ज्ञानेंद्रियाँ हैं—चक्षु (आँखें), कर्ण (कान), नासिका (नाक), जिह्वा (जीभ) और त्वचा। लेकिन इनके अतिरिक्त एक और शक्ति है—मन महा-इंद्रिय। यह मन ही है जो हमें भोगों की ओर आकर्षित करता है। जो व्यक्ति वासना के वशीभूत होता है, वह इन्हीं पाँच ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से भोगों का अनुभव करता है। लेकिन क्या भोग वास्तव में भोगे जा सकते हैं? नहीं, क्योंकि भोगों की कोई निश्चित परिसीमा नहीं होती।

आइए, इसे एक पुराण प्रसंग के माध्यम से समझते हैं।

राजा ययाति की कथा

राजा ययाति की कथा भागवत पुराण, महाभारत, और मत्स्य पुराण में वर्णित है। वे चंद्रवंशी राजा नहुष के पुत्र थे। उनकी कथा में वासना, महत्वाकांक्षा, तपस्या और वैवाहिक जीवन से जुड़े अनेक प्रसंग मिलते हैं।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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ययाति के सौ पुत्र थे। जब उनके मृत्यु का समय आया, तो यमदूत उनके प्राण लेने पहुँचे। यह सुनकर राजा ययाति भयभीत हो गए और गिड़गिड़ाकर प्रार्थना करने लगे—

"कृपया मेरे प्राण मत लीजिए। मैंने अभी तक भोगों का पूर्णतः आनंद नहीं लिया है। मुझे कुछ और समय दीजिए ताकि मैं अच्छे से भोग-विलास कर सकूँ।"

यमदूतों ने उत्तर दिया—
"यह संभव नहीं है, तुम्हें अब चलना ही होगा।"

ययाति ने विनती की—
"बस और सौ वर्ष दे दो।"

यमदूतों ने शर्त रखी—
"यदि तुम्हारे पुत्रों में से कोई अपने जीवन के सौ वर्ष तुम्हें दे दे, तो तुम्हें समय मिल सकता है।"

यह सुनकर राजा ययाति अत्यंत प्रसन्न हो गए। उन्होंने अपने सबसे ज्येष्ठ पुत्र को बुलाकर सारा प्रसंग बताया। परंतु ज्येष्ठ पुत्र ने सोच-विचार कर उत्तर दिया—

"पिताजी, आपकी उम्र सौ वर्ष हो चुकी है, अब तो भोग-विलास की मेरी अवस्था है। मैं अपना जीवन आपको नहीं दे सकता।"

ययाति ने अन्य पुत्रों से भी आग्रह किया, लेकिन सभी ने जाने से इंकार कर दिया।

किन्तु उनका सबसे कनिष्ठ पुत्र इस प्रस्ताव को स्वीकार कर यमदूतों के साथ जाने के लिए तैयार हो गया। यह देखकर यमदूत आश्चर्यचकित रह गए।

उन्होंने पूछा—
"तुम तो अभी बालक हो, तुम्हारे भोग-विलास के दिन हैं। तुम क्यों मरना चाहते हो?"

कनिष्ठ पुत्र ने उत्तर दिया—
"मैंने यह समझ लिया है कि भोगों से तृप्ति नहीं होती। जब मेरे पिता, जिन्होंने इतने वर्षों तक भोग-विलास किया, अभी भी अतृप्त हैं, तो मैं कैसे तृप्त हो सकता हूँ? इसीलिए मैं सहर्ष अपना जीवन त्याग रहा हूँ।"

मन की वासना की सीमा नहीं होती

यह तो एक कथा है, लेकिन क्या यह पूर्णतः सत्य नहीं है?

जो व्यक्ति मन को खुली छूट दे देता है, उसकी वासना कभी समाप्त नहीं होती, बल्कि निरंतर बढ़ती जाती है। यदि कामनाओं पर नियंत्रण पाना है, तो मन को नियंत्रित करना सीखना होगा।

 *जिस व्यक्ति का मन पर पूर्ण नियंत्रण हो जाता है,* 
🐎* उसका जीवन श्रद्धा, आत्मज्ञान और धर्म से भर जाता है।
🌞* वह अपने शरीर को निष्क्रिय भाव से देखता है।
🎪* उसके सभी कर्म प्रमेय (समता में स्थित) हो जाते हैं।
*🪔वह शून्य से शिखर की यात्रा करता है।
✅* आत्मा और शरीर का भेद समाप्त हो जाता है।
*🌞परम तत्व से उसका अनायास ही जुड़ाव हो जाता है।
*✅धर्म की स्थापना ही उसके जीवन का एकमात्र उद्देश्य बन जाती है।
👨‍👨‍👦‍👦* जन्म-मरण के बंधनों से वह मुक्त हो जाता है।
*⏰वह पाप और पुण्य दोनों से विरक्त हो जाता है।
*↔️उसके शरीर के कण-कण में दिव्यता प्रकट होती है।
*💯माया का प्रभाव भी उसके सूक्ष्म शरीर को छू नहीं पाता।
*⛳वह संसार में रहते हुए भी उससे परे होता है, जैसे जल में कमल।
⏰* उसका रोम-रोम परम तत्व से एकाकार हो जाता है।

> _*वासना और इच्छाओं की कोई सीमा नहीं होती। जितना इन्हें पोषित किया जाता है, ये उतनी ही अधिक प्रबल हो जाती हैं। अतः जीवन में सच्चा आनंद पाने के लिए, आत्मिक उन्नति के लिए मन पर नियंत्रण आवश्यक है। यही सच्ची साधना और परम सुख की कुंजी है।*_

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 20 मार्च 2025

भक्ति कैसे करें

*🎪 सिध्दम नमः 🎪*
*🐎तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव व उपयोगी कहानी🙏*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 ईश्वर की सच्ची भक्ति – कर्म करना या मंदिर जाना? ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र कृष्ण शाश्वत पर्व अष्टमी, शनिवार 22 मार्च 2025 कलि काल के  10 वें  तीर्थंकर शीतलता प्रदान करने की शक्ति प्रदाता श्री शीतलनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शीतलनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 चैत्र कृष्ण नवमी, रविवार 23 मार्च 2025 कलि काल के  प्रथम तीर्थंकर सर्व सुखकारी संस्कार प्रदाता श्री आदिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी संस्कार प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री आदिनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 मार्च 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,06,07, 18 19,22,23,29 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎 इस मार्च माह में अष्टमी तिथि  22 मार्च को है। चतुर्दशी तिथि  28 मार्च को है।*
*🔔🐎 सोलह कारण शाश्वत पर्व व व्रत 15 मार्च से 14 अप्रेल तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 14 मार्च शाम 6:50 से मल मास प्रारंभ होने से शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि पर 14 अप्रैल तक पाबंदी रहेगी । 🔔*
*🐎✍️ पंचक 26,27,28,29,30 मार्च को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*ईश्वर की सच्ची भक्ति – कर्म करना या मंदिर जाना?* 

एक गांव में एक पुजारी थे, जो अपनी भक्ति, मधुर वाणी, और हर किसी के प्रति सम्मान के लिए प्रसिद्ध थे। वह प्रतिदिन मंदिर में सुबह से लेकर शाम तक भगवान की पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन करते थे। लोग उनकी भक्ति को देखकर उन्हें बहुत मानते और अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए उनके पास आते।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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एक ओर, उसी गांव में एक तांगेवाला रहता था। उसकी आजीविका तांगा चलाने पर निर्भर थी, और उसे अपना बड़ा परिवार भी पालना था। वह ईश्वर में आस्था रखता था, परंतु काम में व्यस्त रहने के कारण मंदिर नहीं जा पाता था। यह बात उसे भीतर ही भीतर कचोटती थी। उसे लगता था कि वह ईश्वर से दूर हो गया है और उसका यह ‘पाप’ उसे नरक का भागी बना देगा।

एक दिन वह अपनी इस समस्या के साथ मंदिर पहुंचा। पुजारी के पास जाकर उसने कहा,
"पुजारी जी, मैं सुबह से शाम तक तांगा चलाता हूं। परिवार पालने की जिम्मेदारी के कारण मुझे मंदिर आने का समय नहीं मिलता। पूजा-पाठ तो दूर की बात है। मुझे डर है कि इस कारण ईश्वर मुझसे नाराज़ हो जाएंगे। क्या मैं तांगा चलाना छोड़कर रोज मंदिर में पूजा शुरू कर दूं?"

पुजारी ने तांगेवाले की आंखों में अपराधबोध और डर देखा। उन्होंने शांत स्वर में पूछा,
"तुम्हारे तांगे में कभी ऐसा हुआ है कि तुमने किसी बूढ़े, अपाहिज, या जरूरतमंद को बिना पैसे लिए अपनी गाड़ी में बिठा लिया हो?"

तांगेवाले ने सिर झुकाकर कहा,
"जी हां, ऐसा कई बार हुआ है। जब भी कोई जरूरतमंद दिखता है, तो मैं उसे अपने तांगे में बैठा लेता हूं, चाहे वह पैसे दे पाए या नहीं।"

यह सुनकर पुजारी मुस्कुराए और बोले,
"तुम्हें अपना काम बंद करने की आवश्यकता नहीं है। *जरूरतमंदों की सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है।* जिनके मन में दया और सेवा की भावना है, उनके लिए पूरा संसार ही मंदिर है।"

पुजारी ने समझाया,
"मंदिर में आने की जरूरत उन लोगों को होती है, जो अपने कर्मों से ईश्वर की प्रार्थना नहीं कर पाते। लेकिन तुम तो अपनी सेवा और दया से पहले ही ईश्वर के करीब हो। ईमानदारी से अपने परिवार का भरण-पोषण करना और दूसरों की मदद करना, यही सच्ची पूजा है। यदि तुम यह काम छोड़ दोगे, तो ईश्वर को प्रसन्नता नहीं होगी।"

 *👨‍👨‍👦‍👦🌞🐎🔔⛳विशेष:-भव्य आत्मन, :सच्ची भक्ति पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। दूसरों के प्रति करुणा, सेवा, और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना ही ईश्वर की सच्ची उपासना है। मंदिर जाना आत्मिक शांति के लिए है, पर संसार के जीवों की सेवा करना ईश्वर की सेवा करना ही है। मंदिर जी हम सभी को भगवान के गुणों की प्राप्ति के लिए आराधना करनी चाहिए।🔔 मंदिर जी आकर भगवन्तों की पूजा पाठ व भक्ति से हमें अभिमान आता है तो अभी हमारी श्रद्धा में कमी है।*

 *👨‍👨‍👦‍👦"सतकर्म ही पूजा है, और सच्ची सेवा ही सच्ची भक्ति।"🐎*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 16 मार्च 2025

विचारों में कल्पना की आदत खतरनाक होती है।

*🔔पंच कल्याणक महोत्सव व उपयोगी कहानी की सूचना👨‍👨‍👦‍👦*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 विचारों में कल्पना की आदत  ख़तरनाक होती है ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र कृष्ण 4, मंगलवार 18 मार्च 2025 कलि काल के  23 वें उपसर्ग विजेता तीर्थंकर विषम परिस्थितियों को सहन करने की शक्ति प्रदाता श्री पार्श्वनाथ  भगवान जी जिनकी आराधना से केतु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री पार्श्वनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 चैत्र कृष्ण पंचमी, बुधवार  19 मार्च 2025 कलि काल के  अष्टम  तीर्थंकर सर्व सुखकारी मोक्ष प्रदाता श्री चंद्रप्रभ  भगवान जी जिनकी आराधना से चंद्र की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मानसिक शांति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री चंद्रप्रभ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 मार्च 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,06,07, 18 19,22,23,29 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस मार्च माह में अष्टमी तिथि 7 व 22 मार्च को है। चतुर्दशी तिथि 13 व 28 मार्च को है।*
*🔔🐎 सोलह कारण शाश्वत पर्व व व्रत 15 मार्च से 14 अप्रेल तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 14 मार्च शाम 6:50 से मल मास प्रारंभ होने से शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि पर 14 अप्रैल तक पाबंदी रहेगी । 🔔*
*🐎✍️ पंचक 26,27,28,29,30 मार्च को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
" *विचारों में कल्पना की आदत  ख़तरनाक होती है"* 

मिस्टर रुनवाल शहर के एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, बताते है कुछ महीने पहले, उन्हे एक स्कूल के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। सभागार में प्रवेश करते ही, उन्होंने कुछ परिचित चेहरों को देखा और उनसे अभिवादन करने लगे। उन्होने सभी से हाथ मिलाया, यहाँ तक कि अजनबियों से भी। लेकिन तभी, एक व्यक्ति की ओर हाथ बढ़ाया लेकिन उसने अनदेखा कर दिया।
बहुत बुरा लगा उन्हे। उनका मन क्रोध और अपमान से भर गया।  सोचा, "यह आदमी खुद को क्या समझता है?" उनके दिमाग में उसके प्रति कई नकारात्मक विचार उमड़ने लगे। गुस्से में उसे घूरा और अपनी सीट पर बैठ गये।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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थोड़ी देर बाद भी उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ। वे बार-बार उसे देखने लगे कि वह औरों के साथ कैसा व्यवहार करता है। तभी उन्होंने देखा कि लोग उससे हाथ मिलाने से पहले हल्का स्पर्श करते हैं। उन्हे आश्चर्य हुआ, और फिर सच्चाई का एहसास हुआ—वह व्यक्ति *दृष्टिहीन* था!

उन्हे अपने विचारों पर शर्मिंदगी महसूस हुई। बाद में उन्हे पता चला कि वह तो उनका प्रशंसक था, जो खासतौर पर उनकी बात सुनने के लिए आया था। 

रुनवाल जी कहते है, "उस पल मेरी सोच बदल गई। मैंने अपनी पूरी स्पीच का विषय बदलकर रखा"—
 _*"विचारों में कल्पना की आदत ख़तरनाक ।"*_
 
हम अनुमान लगाते हैं, सत्यापन नहीं करते:-
* कोई फोन नहीं उठाता, हम मान लेते हैं कि वह हमें नज़रअंदाज कर रहा है।
* कोई हमें आर्थिक मदद नहीं करता, तो हम उसे कंजूस और स्वार्थी समझ लेते हैं।
* कोई हमें कॉल या मैसेज नहीं करता, तो हम सोचते हैं कि उसे हमारी परवाह नहीं है।

हम यह कभी नहीं सोचते कि शायद वे किसी समस्या में हों।
हर व्यक्ति का जीवन अलग होता है।
* जिसने आपको पैसे देने का वादा किया था, हो सकता है उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई हो।
* जिसने फोन नहीं उठाया, हो सकता है वह व्यस्त हो।

 *तो क्या करें* 

* पुष्टि करें, अनुमान नहीं लगाएं: 
* प्रतिक्रिया देने से पहले अपने विचारों को सत्यापित करें।
* नाराज़ होना अपरिपक्वता है:हर छोटी बात पर आहत होना बचकाना है।
 *उदाहरण:* 
किसी ने आपको शादी में आमंत्रित नहीं किया – 
आप नाराज़ हो जाते हैं।
किसी ने जन्मदिन की शुभकामनाएँ नहीं दी – 
आप नाराज़ हो जाते हैं।
किसी ने आपकी सोशल मीडिया पोस्ट को लाइक नहीं किया – आप नाराज़ हो जाते हैं।
दादाजी की अंत्येष्टि के समय 500 लोग आये, 5 लोग जिन्हें भी आना चाहिये थे नहीं आये । बार बार यह सोचकर
आप नाराज हो जाते है
 *याद रखें:* 
हर कोई अपने जीवन में संघर्षों से जूझ रहा है।
जिनसे आप मदद की उम्मीद रखते हैं, वे भी किसी न किसी समस्या से जूझ रहे होते हैं।
हर बात को व्यक्तिगत न लें।
कई बार लोग अपने जीवन में व्यस्त होते हैं।
नाराजगी से ऊपर उठें
निराशा को समझदारी से संभालें और रिश्तों को बनाए रखें।
अनावश्यक मनमुटाव से बचें और मित्रता बनाए रखें।

*👨‍👨‍👦‍👦🎪🌞🔔विशेष:-भव्य आत्माओं, इस पंचम काल में सभी जीव किसी ना किसी बात से दुखी हैं। जैसे:- किसी को नौकरी नहीं लगी।, किसी की शादी तो हो गई किंतु जीवनसाथी सही नहीं है।, विवाह हुए सात वर्ष  हो गया संतान नहीं हुई।, परिवार में सबकुछ है फिर भी मन अशांत रहता है।ऐसी अनेकों समस्याओं का पहाड़ सभी के सामने दिखाई देता है।इन सभी का मुख्य कारण यह है कि हमारे पूर्वार्ध के कर्म सही नहीं थे। इसके लिए हम सभी को अपने वर्तमान के आचरण को सुरक्षित करने पर सभी समस्याओं से छुटकारा प्राप्त होगा। स्वयं विचार करें और अपनी समस्याओं को समाप्त करने में सकारात्मक प्रयास करें। जब तक स्वयं सक्रिय ना हो तब तक दूसरों का सहारे से जीवन में दुखों के अलावा कुछ भी प्राप्त नहीं होता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 5 मार्च 2025

कर्ज वाली लक्ष्मी का रहस्य

*तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी कर्ज वाली लक्ष्मी का रहस्य*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 कर्ज वाली लक्ष्मी का रहस्य ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 फाल्गुन शुक्ल सप्तमी , गुरुवार 6  मार्च 2025 कलि काल के  अष्टम  तीर्थंकर सर्व सुखकारी ओज तेज प्रदाता श्री चन्द्रप्रभ  भगवान जी जिनकी आराधना से चंद्र की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री चन्द्रप्रभ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 फाल्गुन शुक्ल शाश्वत पर्व अष्टमी, शुक्रवार 7 मार्च 2025 कलि काल के  तृतीय  तीर्थंकर सर्व सुखकारी मोक्ष प्रदाता श्री संभवनाथ  भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री संभवनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 मार्च 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,06,07, 18 19,22,23,29 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस मार्च माह में अष्टमी तिथि 7 व 22 मार्च को है। चतुर्दशी तिथि 13 व 28 मार्च को है।*
*🔔🐎इस मार्च माह में 8 मार्च नवमी तिथि का क्षय होने से दसमीं तिथि होगी।11 व 12 मार्च को तेरस तिथि रहेगी।*
*🔔🐎अष्टान्हिका महापर्व 7 से 14 मार्च को है। सोलह कारण व्रत 15 मार्च से 14 अप्रेल तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त मार्च माह में    1,2, 5,6, 7,12 व 14 मार्च  को है। 🔔 गृह प्रवेश मुहूर्त 01,06 व 14 मार्च को है।।*
*🐎✍️ पंचक 26,27,28,29,30 मार्च को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

आज हम सभी समझें कि हमारे घर में परेशानी क्यों रहती है इस कहानी में ...
*कर्ज वाली लक्ष्मी का रहस्य* 

15 साल के एक बच्चे ने अपने पापा से कहा, "पापा, दीदी के होने वाले ससुर और सास कल आ रहे हैं। अभी जीजाजी ने फोन पर बताया।"

उसकी बड़ी बहन की सगाई कुछ दिन पहले एक अच्छे घर में तय हुई थी, लेकिन दीनदयाल जी पहले से ही चिंतित बैठे थे। उन्होंने गहरी सांस ली और बोले, "हाँ बेटा, उनका कल ही फोन आया था कि वे दहेज की बात करने आ रहे हैं... बड़ी मुश्किल से यह अच्छा रिश्ता मिला था। अगर उनकी मांग बहुत ज़्यादा हुई, तो मैं पूरी नहीं कर पाऊँगा।" कहते-कहते उनकी आँखें भर आईं।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 9783831296 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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घर में चिंता का माहौल था। बेटी भी उदास हो गई थी।

अगले दिन...

समधी-समधिन का घर में स्वागत किया गया। कुछ देर बाद लड़के के पिता बोले, "दीनदयाल जी, अब काम की बात हो जाए?"

दीनदयाल जी की धड़कन तेज हो गई। वे घबराते हुए बोले, "हाँ समधी जी, जो आप हुकुम करें।"

लड़के के पिता ने धीरे से उनकी कुर्सी के पास खिसकते हुए कहा, "मुझे 'दहेज' के बारे में बात करनी है।"

यह सुनते ही दीनदयाल जी के हाथ कांपने लगे। वे आँखों में पानी लिए हाथ जोड़कर बोले, "बताइए समधी जी, जो आपको उचित लगे, मैं पूरी कोशिश करूँगा।"

तब समधी जी ने उनका हाथ पकड़कर धीरे से कहा, "आप कन्यादान में कुछ भी दें या न दें, थोड़ा दें या ज़्यादा दें, मुझे कोई आपत्ति नहीं... लेकिन कृपया कर्ज लेकर एक रुपया भी मत देना। वह मुझे स्वीकार नहीं। जो बेटी अपने पिता को कर्ज में डुबो दे, वैसी ' *कर्ज वाली लक्ष्मी* ' मुझे नहीं चाहिए। मुझे ऐसी बहू चाहिए जो मेरे घर आकर मेरी संपत्ति को दोगुना कर दे, न कि पिता का सिर झुका दे।"

यह सुनते ही दीनदयाल जी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। वे भावुक होकर समधी जी से गले लग गए और बोले, "समधी जी, आपने तो मुझे चिंता मुक्त कर दिया। सच कहूँ, अगर हर पिता को आपके जैसे समधी मिल जाएँ, तो कोई भी बेटी के विवाह को लेकर चिंतित न रहे। आपके विचार न केवल मेरे लिए, बल्कि समाज के लिए भी मिसाल हैं। काश, सभी लोग इसी सोच को अपनाएँ, तो हर बेटी अपने घर से मुस्कुराते हुए विदा होगी, न कि अपने पिता के कर्ज की बोझ तले दबकर।"

समधी जी भी मुस्कुराते हुए बोले, "बेटियाँ लक्ष्मी होती हैं, लेकिन हमें ऐसी लक्ष्मी चाहिए जो घर-परिवार को संवारने आए, न कि पिता को कर्ज में डुबोने की वजह बने। हमें अपने समाज को यह समझाना होगा कि दहेज का लेन-देन सिर्फ एक गलत परंपरा ही नहीं, बल्कि कई परिवारों के दुख का कारण भी है। जब हम इसे रोकेंगे, तभी बेटियों का सम्मान और माता-पिता की इज्जत बरकरार रह पाएगी।"

आज दीनदयाल जी को न सिर्फ एक अच्छा समधी मिला था, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने वाला एक सच्चा मार्गदर्शक भी।

> *विशेष: - भव्य आत्माओं यह एक सच्चाई है कि जिस घर में कर्ज वाली बहू जाती है वह घर में अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए आप सभी के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है कि "कर्ज वाली लक्ष्मी ना कोई विदा करे और ना ही कोई स्वीकार करे!" यदि समाज इस सोच को अपनाए, तो हर बेटी अपने घर से खुशी-खुशी विदा होगी, और कोई भी पिता अपनी संतान के ' विवाह के लिए कर्ज के बोझ तले दबने को मजबूर नहीं होगा। इससे मायके व ससुराल पक्ष में दिन दुगनी रात चौगुनी वृद्धि होगी।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 3 मार्च 2025

दान कैसे करें

*📲पंचकल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी दान कैसे करें🔔* 
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒दान कैसे करें ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 फाल्गुन शुक्ल पंचमी ,   4 मार्च मंगलवार 2025 कलि काल के 19 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी मार्ग प्रदाता श्री मल्लिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मल्लिनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 मार्च 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,06,07, 18 19,22,23,29 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस मार्च माह में अष्टमी तिथि 7 व 22 मार्च को है। चतुर्दशी तिथि 13 व 28 मार्च को है।*
*🔔🐎इस मार्च माह में 8 मार्च नवमी तिथि का क्षय होने से दसमीं तिथि होगी।11 व 12 मार्च को तेरस तिथि रहेगी।*
*🔔🐎अष्टान्हिका महापर्व 7 से 14 मार्च को है। सोलह कारण व्रत 15 मार्च से 14 अप्रेल तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त मार्च माह में    1,2, 5,6, 7,12 व 14 मार्च  को है। 🔔 गृह प्रवेश मुहूर्त 01,06 व 14 मार्च को है।।*
*🐎✍️ पंचक 26,27,28,29,30 मार्च को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

🔔आइए हम सभी इस कहानी के माध्यम से अपनी सच्चाई को समझें।👨‍👨‍👦‍👦
*दान कैसे करें* 

हर धर्म में दान का विशेष महत्व माना गया है। दान से न केवल मोह से मुक्ति मिलती है, बल्कि जीवन के दोष भी दूर होते हैं। जैन दर्शन में धर्म के चार स्तंभ बताए गए हैं—दान, शील, तप और भावना। इनमें दान को सर्वोपरि स्थान दिया गया है। दान करने वाले को स्वर्ग और मोक्ष का अधिकारी माना गया है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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कहते है सही दान तो वही होता है, जिसमें दाएं हाथ से दिया जाए और बाएं हाथ को पता न चले। यदि दान के पीछे पुण्य अर्जित करने या प्रसिद्धि पाने की इच्छा हो, तो वह वास्तविक दान नहीं रह जाता।

एक कथा के अनुसार, दो मित्र मृत्यु के पश्चात स्वर्गलोक पहुंचे। वहाँ एक को स्वर्ग में स्थान दिया गया और दूसरे को नरक जाने को कहा गया। स्वर्ग जाने वाले ने अनुरोध किया कि वह अपने आधे पुण्य देकर मित्र को भी स्वर्ग में ले जाना चाहता है। जब यह बात ईश्वर तक पहुँची, तो उन्होंने उनके कर्मों का लेखा-जोखा देखा और कहा,
"तुम्हारे पास केवल एक पुण्य है। या तो स्वयं रखो या मित्र को दे दो।"

यह सुनकर व्यक्ति हैरान रह गया और बोला, "मैंने धर्मशालाएँ बनवाईं, कुएँ खुदवाए और अनेक दान किए, फिर भी केवल एक पुण्य?"

ईश्वर ने उत्तर दिया, "तुमने ये सब कार्य प्रसिद्धि पाने के लिए किए थे। धर्मशालाओं और कुओं पर अपना नाम अंकित करवाया था। लेकिन एक बार बरसात के दिन तुमने एक भूखी कुतिया को बिना किसी स्वार्थ के रोटी दी थी और फिर उसे भूल गए थे। वही तुम्हारा सच्चा पुण्य है। अब तय करो, इसे स्वयं रखोगे या मित्र को दोगे।"

इस कथा से स्पष्ट होता है कि *सच्चा पुण्य वही होता है, जिसमें किसी भी प्रकार का स्वार्थ न हो। जब दान के पीछे कुछ पाने की इच्छा होती है, तो वह दान नहीं रह जाता।*

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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 1 मार्च 2025

आलोचकों से सीखें

*🔔सूचना:- पंच कल्याणक महोत्सव व उपयोगी कहानी*
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*💪👩‍🚒 आलोचकों से सीखें ✍️🐒*

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*🔔 मार्च 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,06,07, 18 19,22,23,29 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस मार्च माह में अष्टमी तिथि 7 व 22 मार्च को है। चतुर्दशी तिथि 13 व 28 मार्च को है।*
*🔔🐎इस मार्च माह में 8 मार्च नवमी तिथि का क्षय होने से दसमीं तिथि होगी।11 व 12 मार्च को तेरस तिथि रहेगी।*
*🔔🐎अष्टान्हिका महापर्व 7 से 14 मार्च को है। सोलह कारण व्रत 15 मार्च से 14 अप्रेल तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त मार्च माह में    1,2, 5,6, 7,12 व 14 मार्च  को है। 🔔 गृह प्रवेश मुहूर्त 01,06 व 14 मार्च को है।।*
*🐎✍️ पंचक 26,27,28,29,30 मार्च को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*आलोचना: एक सकारात्मक दृष्टिकोण* 

प्रत्येक सफल व्यक्ति को अपने जीवन में आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। जो लोग कुछ अलग, नया और समाज के हित में कार्य करते हैं, उनके आलोचक भी अधिक हो जाते हैं। परंतु, यह भी शत प्रतिशत बात सही है कि सच्ची सफलता उन्ही लोगों को ही मिलती है, जो आलोचनाओं से विचलित हुए बिना अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहते हैं।

आपने सुना या पढ़ा होगा अमेरिका के सर्वाधिक लोकप्रिय राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को भी अपने विरोधियों की आलोचनाओं का निरंतर सामना करना पड़ता था। जैसा कि अक्सर होता ही है उनके विरोधी बार बार अखबारों में उनके विरुद्ध लेख प्रकाशित करवाते रहते थे। किंतु लिंकन कभी भी इन आलोचनाओं का प्रतिउत्तर नहीं देते थे।

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*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 9783831296 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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एक दिन उनके एक मित्र ने उनसे कहा, “आपके विरोधी आपके बारे में तरह-तरह की बातें लिखते रहते हैं। आप उनका उत्तर क्यों नहीं देते? आपको भी अपने बचाव में कुछ कहना चाहिए, स्पष्टीकरण देना चाहिये।”

लिंकन मुस्कुराए और धैर्यपूर्वक उत्तर दिया, “मित्र! यदि मैं उनकी आलोचनाओं का उत्तर देने लगूंगा, तो मेरा तो सारा समय इन्हीं बातों में व्यर्थ चला जाएगा। फिर भला मैं जनता के हित में कोई कार्य नहीं कर पाऊंगा।"

"सुनो मित्र, जीवन के अंत में यदि मेरे कार्य मुझे एक बुरा व्यक्ति साबित करते हैं, तो मेरे द्वारा दी गई सफाई का कोई मूल्य नहीं होगा। लेकिन यदि मैं अपने कर्मों से एक अच्छा व्यक्ति साबित होता हूँ, तो फिर इन आलोचनाओं का भी कोई अर्थ नहीं रह जाता। इसलिए मैं इन बातों पर ध्यान दिए बिना चुपचाप अपना काम करता हूँ।”

*👨‍👨‍👦‍👦🔔✍️🐎विशेष: - भव्य आत्माओं,हमें आलोचनाओं से विचलित हुए बिना अपने कार्यों  करते हुए अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए। समय बर्बाद करने के बजाय, हमें अपने कर्मों को इतना श्रेष्ठ बनाना चाहिए कि वे ही हमारे उत्तर बन जाएं। महानता आलोचनाओं की नहीं, बल्कि कर्मों का परिणाम होती है। इसलिए दृढ़ता पूर्वक अपने लक्ष्य की ओर सकारात्मक कार्यों को करते हुए बढ़तें रहो कुछ समय में आप लक्ष्य प्राप्त कर सफल व्यक्ति बनोगे।*
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