सोमवार, 3 मार्च 2025

दान कैसे करें

*📲पंचकल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी दान कैसे करें🔔* 
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒दान कैसे करें ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 फाल्गुन शुक्ल पंचमी ,   4 मार्च मंगलवार 2025 कलि काल के 19 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी मार्ग प्रदाता श्री मल्लिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री मल्लिनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 मार्च 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,06,07, 18 19,22,23,29 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस मार्च माह में अष्टमी तिथि 7 व 22 मार्च को है। चतुर्दशी तिथि 13 व 28 मार्च को है।*
*🔔🐎इस मार्च माह में 8 मार्च नवमी तिथि का क्षय होने से दसमीं तिथि होगी।11 व 12 मार्च को तेरस तिथि रहेगी।*
*🔔🐎अष्टान्हिका महापर्व 7 से 14 मार्च को है। सोलह कारण व्रत 15 मार्च से 14 अप्रेल तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त मार्च माह में    1,2, 5,6, 7,12 व 14 मार्च  को है। 🔔 गृह प्रवेश मुहूर्त 01,06 व 14 मार्च को है।।*
*🐎✍️ पंचक 26,27,28,29,30 मार्च को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

🔔आइए हम सभी इस कहानी के माध्यम से अपनी सच्चाई को समझें।👨‍👨‍👦‍👦
*दान कैसे करें* 

हर धर्म में दान का विशेष महत्व माना गया है। दान से न केवल मोह से मुक्ति मिलती है, बल्कि जीवन के दोष भी दूर होते हैं। जैन दर्शन में धर्म के चार स्तंभ बताए गए हैं—दान, शील, तप और भावना। इनमें दान को सर्वोपरि स्थान दिया गया है। दान करने वाले को स्वर्ग और मोक्ष का अधिकारी माना गया है।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 W 9783831296 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

कहते है सही दान तो वही होता है, जिसमें दाएं हाथ से दिया जाए और बाएं हाथ को पता न चले। यदि दान के पीछे पुण्य अर्जित करने या प्रसिद्धि पाने की इच्छा हो, तो वह वास्तविक दान नहीं रह जाता।

एक कथा के अनुसार, दो मित्र मृत्यु के पश्चात स्वर्गलोक पहुंचे। वहाँ एक को स्वर्ग में स्थान दिया गया और दूसरे को नरक जाने को कहा गया। स्वर्ग जाने वाले ने अनुरोध किया कि वह अपने आधे पुण्य देकर मित्र को भी स्वर्ग में ले जाना चाहता है। जब यह बात ईश्वर तक पहुँची, तो उन्होंने उनके कर्मों का लेखा-जोखा देखा और कहा,
"तुम्हारे पास केवल एक पुण्य है। या तो स्वयं रखो या मित्र को दे दो।"

यह सुनकर व्यक्ति हैरान रह गया और बोला, "मैंने धर्मशालाएँ बनवाईं, कुएँ खुदवाए और अनेक दान किए, फिर भी केवल एक पुण्य?"

ईश्वर ने उत्तर दिया, "तुमने ये सब कार्य प्रसिद्धि पाने के लिए किए थे। धर्मशालाओं और कुओं पर अपना नाम अंकित करवाया था। लेकिन एक बार बरसात के दिन तुमने एक भूखी कुतिया को बिना किसी स्वार्थ के रोटी दी थी और फिर उसे भूल गए थे। वही तुम्हारा सच्चा पुण्य है। अब तय करो, इसे स्वयं रखोगे या मित्र को दोगे।"

इस कथा से स्पष्ट होता है कि *सच्चा पुण्य वही होता है, जिसमें किसी भी प्रकार का स्वार्थ न हो। जब दान के पीछे कुछ पाने की इच्छा होती है, तो वह दान नहीं रह जाता।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें