रविवार, 16 मार्च 2025

विचारों में कल्पना की आदत खतरनाक होती है।

*🔔पंच कल्याणक महोत्सव व उपयोगी कहानी की सूचना👨‍👨‍👦‍👦*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 विचारों में कल्पना की आदत  ख़तरनाक होती है ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 चैत्र कृष्ण 4, मंगलवार 18 मार्च 2025 कलि काल के  23 वें उपसर्ग विजेता तीर्थंकर विषम परिस्थितियों को सहन करने की शक्ति प्रदाता श्री पार्श्वनाथ  भगवान जी जिनकी आराधना से केतु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री पार्श्वनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 चैत्र कृष्ण पंचमी, बुधवार  19 मार्च 2025 कलि काल के  अष्टम  तीर्थंकर सर्व सुखकारी मोक्ष प्रदाता श्री चंद्रप्रभ  भगवान जी जिनकी आराधना से चंद्र की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मानसिक शांति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री चंद्रप्रभ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 मार्च 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,06,07, 18 19,22,23,29 व 30 तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस मार्च माह में अष्टमी तिथि 7 व 22 मार्च को है। चतुर्दशी तिथि 13 व 28 मार्च को है।*
*🔔🐎 सोलह कारण शाश्वत पर्व व व्रत 15 मार्च से 14 अप्रेल तक है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 14 मार्च शाम 6:50 से मल मास प्रारंभ होने से शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि पर 14 अप्रैल तक पाबंदी रहेगी । 🔔*
*🐎✍️ पंचक 26,27,28,29,30 मार्च को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
" *विचारों में कल्पना की आदत  ख़तरनाक होती है"* 

मिस्टर रुनवाल शहर के एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, बताते है कुछ महीने पहले, उन्हे एक स्कूल के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। सभागार में प्रवेश करते ही, उन्होंने कुछ परिचित चेहरों को देखा और उनसे अभिवादन करने लगे। उन्होने सभी से हाथ मिलाया, यहाँ तक कि अजनबियों से भी। लेकिन तभी, एक व्यक्ति की ओर हाथ बढ़ाया लेकिन उसने अनदेखा कर दिया।
बहुत बुरा लगा उन्हे। उनका मन क्रोध और अपमान से भर गया।  सोचा, "यह आदमी खुद को क्या समझता है?" उनके दिमाग में उसके प्रति कई नकारात्मक विचार उमड़ने लगे। गुस्से में उसे घूरा और अपनी सीट पर बैठ गये।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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थोड़ी देर बाद भी उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ। वे बार-बार उसे देखने लगे कि वह औरों के साथ कैसा व्यवहार करता है। तभी उन्होंने देखा कि लोग उससे हाथ मिलाने से पहले हल्का स्पर्श करते हैं। उन्हे आश्चर्य हुआ, और फिर सच्चाई का एहसास हुआ—वह व्यक्ति *दृष्टिहीन* था!

उन्हे अपने विचारों पर शर्मिंदगी महसूस हुई। बाद में उन्हे पता चला कि वह तो उनका प्रशंसक था, जो खासतौर पर उनकी बात सुनने के लिए आया था। 

रुनवाल जी कहते है, "उस पल मेरी सोच बदल गई। मैंने अपनी पूरी स्पीच का विषय बदलकर रखा"—
 _*"विचारों में कल्पना की आदत ख़तरनाक ।"*_
 
हम अनुमान लगाते हैं, सत्यापन नहीं करते:-
* कोई फोन नहीं उठाता, हम मान लेते हैं कि वह हमें नज़रअंदाज कर रहा है।
* कोई हमें आर्थिक मदद नहीं करता, तो हम उसे कंजूस और स्वार्थी समझ लेते हैं।
* कोई हमें कॉल या मैसेज नहीं करता, तो हम सोचते हैं कि उसे हमारी परवाह नहीं है।

हम यह कभी नहीं सोचते कि शायद वे किसी समस्या में हों।
हर व्यक्ति का जीवन अलग होता है।
* जिसने आपको पैसे देने का वादा किया था, हो सकता है उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई हो।
* जिसने फोन नहीं उठाया, हो सकता है वह व्यस्त हो।

 *तो क्या करें* 

* पुष्टि करें, अनुमान नहीं लगाएं: 
* प्रतिक्रिया देने से पहले अपने विचारों को सत्यापित करें।
* नाराज़ होना अपरिपक्वता है:हर छोटी बात पर आहत होना बचकाना है।
 *उदाहरण:* 
किसी ने आपको शादी में आमंत्रित नहीं किया – 
आप नाराज़ हो जाते हैं।
किसी ने जन्मदिन की शुभकामनाएँ नहीं दी – 
आप नाराज़ हो जाते हैं।
किसी ने आपकी सोशल मीडिया पोस्ट को लाइक नहीं किया – आप नाराज़ हो जाते हैं।
दादाजी की अंत्येष्टि के समय 500 लोग आये, 5 लोग जिन्हें भी आना चाहिये थे नहीं आये । बार बार यह सोचकर
आप नाराज हो जाते है
 *याद रखें:* 
हर कोई अपने जीवन में संघर्षों से जूझ रहा है।
जिनसे आप मदद की उम्मीद रखते हैं, वे भी किसी न किसी समस्या से जूझ रहे होते हैं।
हर बात को व्यक्तिगत न लें।
कई बार लोग अपने जीवन में व्यस्त होते हैं।
नाराजगी से ऊपर उठें
निराशा को समझदारी से संभालें और रिश्तों को बनाए रखें।
अनावश्यक मनमुटाव से बचें और मित्रता बनाए रखें।

*👨‍👨‍👦‍👦🎪🌞🔔विशेष:-भव्य आत्माओं, इस पंचम काल में सभी जीव किसी ना किसी बात से दुखी हैं। जैसे:- किसी को नौकरी नहीं लगी।, किसी की शादी तो हो गई किंतु जीवनसाथी सही नहीं है।, विवाह हुए सात वर्ष  हो गया संतान नहीं हुई।, परिवार में सबकुछ है फिर भी मन अशांत रहता है।ऐसी अनेकों समस्याओं का पहाड़ सभी के सामने दिखाई देता है।इन सभी का मुख्य कारण यह है कि हमारे पूर्वार्ध के कर्म सही नहीं थे। इसके लिए हम सभी को अपने वर्तमान के आचरण को सुरक्षित करने पर सभी समस्याओं से छुटकारा प्राप्त होगा। स्वयं विचार करें और अपनी समस्याओं को समाप्त करने में सकारात्मक प्रयास करें। जब तक स्वयं सक्रिय ना हो तब तक दूसरों का सहारे से जीवन में दुखों के अलावा कुछ भी प्राप्त नहीं होता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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