शनिवार, 30 अप्रैल 2022

कर्म फल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒कर्म फल💐💐*
*🤗आज वैशाख शुक्ल एकम 1 मई 2022 रविवार को सत्रवे तीर्थंकर कुंथुनाथ भगवान का जन्म तप व मोक्षकल्याणक महोत्सव है । 😇🔔▶️👨‍👩‍👧‍👦अत: आप सभी इस  शुभ महोत्सव  का सपरिवार इष्टमित्रों सहित लाभ उठायें ।*
*👑एक राजा जिसका बहुत बडा राज्य था। कोई कमी नही थी जो भी हुक्म करते वही हो जाता था। लेकिन राजा मे एक आदत  थी कि वह जो भी कोई थोडी सी गलती करता उसे तुरंत दस बडे खुंखार कुत्तों के सामने डालकर उसे कुत्तों से नुचवाता। राजा बडे गुस्से वाला था।*

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के संस्कार तो पढ़गये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*
 राजा की इस आदत से सभी परेशान थे। राजा का मंत्री भी राजा की इस आदत की आलोचना करता था। एक दिन उसी मंत्री से कोई गलती हो गयी राजा को गलती का पता चला तो राजा ने तुरंत हुक्म दिया कि जाओ मंत्री को कुत्तों के सामने ले जाओ।

मंत्री ने राजा से गलती मानी माफी मांगी लेकिन राजा ने कुछ नही सुना। और कहा कि जो कह दिया सो कह दिया। और सिपाहियों से कहा ले जाओ कुत्तों के बाडे मे। मंत्री ने कहा ठीक है राजा जी लेकिन मेरी आखिरी इच्छा तो मान लो। राजा ने कहा ठीक है बताओ अपनी आखिरी इच्छा। मंत्री ने कहा मुझे दस दिन की महौलत दे दीजिए बस। राजा ने कहा ठीक है दस दिन की महौलत दे देते हैं।

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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लेकिन ग्यारहवें दिन सजा जरूर मिलेगी। मंत्री दस दिन तक राजा के पास नही आया। और ग्यारहवें दिन राजा के सामने पेश हो गया। राजा ने मंत्री को देखा और सिपाहियों से कहा जो सजा रखी थी मंत्री के लिए उसे पूरी की जाए। सिपाही मंत्री को कुत्तों के बाडे मे लेकर गये कुत्तों को भी खोल दिया गया। लेकिन कुत्ते मंत्री पर प्रहार करने के बजाय मंत्री से प्यार से पेश आ रहे थे।

 यह देखकर राजा चौक गया कि जिन कुत्तों को प्रहार करने के लिए ट्रेन किया गया है वे इतने प्यार से पेश आ रहे हैं। राजा ने मंत्री से कहा कि ये चमत्कार कैसे हो गया इन कुत्तों को क्या हो गया है। मंत्री ने जवाब दिया कि इन दस दिनों में मैंने इन कुत्तों की बहुत सेवा की है इन्हें खाना खिलाया, नहलाया अब इन कुत्ते जान चुके हैं कि मैं इनके लिए कुछ अच्छा करता हूँ ना कि बुरा। ये मुझपर प्रहार नही करेंगे। मैने आपकी इतने दिनो से सेवा की है फिर भी आप मेरी एक गलती को माफ नही कर सके। आपसे ज्यादा अच्छे तो ये कुत्ते हैं जो अच्छा और बुरे को पहचानते है। राजा यह सब देखकर बडा सर्मिन्दा हुआ।

ये कहानी हमें सिखाती हैं कि हमे हमेशा सोच समझ कर फैसले लेने चाहिए। किसी की एक गलती को लेकर ही उसे जिन्दगी भर के लिए सजा नही देनी चाहिये बल्कि उसे माफ करने की हिम्मत रखनी चाहिए।
*🔔🤗😇🐥✍️महान आत्माओं : - आपसभी से हमारा अनुरोध है कि हमें सुखी जीवन के लिए किसी भी जीव को नहीं सताना चाहिए।जितना हो उतना मोक्षमार्ग के राही( मुनिराज, माताजी, क्षुल्लक व श्रावक )के सहायक बनकर अपना मोक्षमार्ग प्रशस्त करें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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रसना इंद्रीय के कारण

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒रसना इंद्रिय के कारण💐💐*
🔔⬇️ *अग्रिम सूचना*⬇️🔔
*🤗वैशाख शुक्ल एकम को सत्रवे तीर्थंकर कुंथुनाथ भगवान का जन्म तप व मोक्षकल्याणक महोत्सव 31 अप्रैल 2022 रविवार को है । 👉🏿👨‍👩‍👧‍👦आपसभी इस  शुभ महोत्सव  का सपरिवार इष्टमित्रों सहित लाभ उठायें ।*

*😇उत्तरकाशी के एक एकांत स्थान पर ,एक वयोवृद्ध स्वामीजी रहते थे।वो तपस्वी महात्मा , वर्षों से कई कई घंटे समाधिस्थ रहते थे,किसी से बात नहीं करते थे। हमेशा मौन रहकर,साधुओं और ब्रह्मचरियों द्वारा चलाए जाने वाले क्षेत्र से ही भिक्षा लेकर जीवन यापन करते थे।*
 साधुओं ,ग्रहस्थों ,विद्यार्थियों ,दुकानदारों …. सबके मन में उनके लिए आदर सम्मान था। वो एक छोटी सी कुटिया में रहते थे और कपड़ों के नाम पर उनके पास केवल दो अंगोंछे और दो लंगोटियाँ थीं,एक भिक्षा पात्र और पानी के लिए कमण्डल। सच्चे आदर्श महात्मा थे वो ,कभी होटलों या मिठाई की दुकान से कुछ भी नहीं लेते थे वो। 
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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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एक बार दिवाली का दिन था। 
यूँ तो सम्पूर्ण उत्तरकाशी जगमगा रही थी। किंतु इकलोती मिठाई की दुकान सबसे ज़्यादा सजी हुई थी। और तरह तरह की मिठाइयाँ बनी थीं। जलेबियों और मैसूरपाक के पर्वत बना कर सजा दिए गए थे। शाम का समय हुआ तो दुकान पर ग्राहक टूट पड़े थे। ऐसे में दुकान मलिक के तीन बेटे और नौकर चाकर सब मिल कर काम सम्भालने में लगे थे। 
आज तो ये स्वामीजी भी जलेबियों के ढेर के पास एक कोने में खड़े थे। दुकानदार ने स्वामीजी को सादर दुकान के अंदर बिठाया और स्वामी जी से उनकी मनपसंद मिठाई खाने के लिए बार बार आग्रह करने लगा। स्वामीजी ने नम्रता के साथ मना कर दिया। 
थोड़ी देर बात दुकान पर उपस्थित सब लोग बड़े अचंभित हो रहे थे कि -स्वामीजी विक्रय के लिए रखे जलेबियों के ढेर को ऊपर से लेकर नीचे तक चाट रहे थे। 
सब जलेबियाँ झूठी हो गईं ,अब कौन ख़रीदेगा इन्हें?
दुकानदार के सभी बेटे ग़ुस्से में स्वामी जी की तरफ़ बढ़े और उनकी बहुत पिटाई कर दी ,शरीर से खून बहने लगा। बहुत चोट लगीं। जैसे तैसे वे अपनी कुटिया पर पहुँचे ।
अगले तीन दिनों तक वे कष्ट सहते रहे और भगवान का जप करते रहे मुस्कुराते हुए। 
स्वामी के नज़दीक की कुटिया में रहने वाले एक अन्य साधु चौथे दिन उनके लिए चाय पानी और दवा मलहम लेकर आए 
सेवा पूरी होने के बाद उन्होंने पूछा -स्वामीजी आपने ये अविश्वसनीय कार्य क्यों किया कृपया बताएँ ?
स्वामी बोले -
सारा जीवन मैंने नियम संयम अपनाया ,राग द्वेष वासना कामना कुछ भी ना रह गई। 
लेकिन बचपन से मेरे मन में जलेबियों की तृष्णा रही ,खूब कोशिश की पर इससे छूट ना सका। 
मन को हर तरह से समझाया पर ये ना माना। 
थक हार कर मैंने इसे ये कठोर सीख देने का निर्णय किया। ताकि इसे शेष जीवन में ठीक से याद रहे ,मैंने जानबुझ कर सभी जलेबियों को चाँटा ताकि मेरी जम कर पिटाई हो। 
सो अब यह मन जलेबी के नाम से भी कंपने लगता है  
न जयेत रसनम यावत
   जितं सर्वं जितें रसे।।
🔔👨‍👩‍👧‍👦👉 *महानआत्माओं हमसभी पाँचों इंद्रियों के वर्तमान में गुलाम बने हुए है।विश्व का कोई भी जीव पाँचों इंद्रियों मे से कोई भी एक इंद्रिय मे आशक्ति रखने से दुर्गति का पात्र होरहा है।इसलिए हम सभी को चौबीस घंटे में कम से कम रात्रि विश्राम के पहले थोड़ा विचार करना चाहिए कि हमारा क्या होगा ?।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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शुक्रवार, 29 अप्रैल 2022

रसना इंद्रीय के कारण

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*😇उत्तरकाशी के एक एकांत स्थान पर ,एक वयोवृद्ध स्वामीजी रहते थे।वो तपस्वी महात्मा , वर्षों से कई कई घंटे समाधिस्थ रहते थे,किसी से बात नहीं करते थे। हमेशा मौन रहकर,साधुओं और ब्रह्मचरियों द्वारा चलाए जाने वाले क्षेत्र से ही भिक्षा लेकर जीवन यापन करते थे।*
 साधुओं ,ग्रहस्थों ,विद्यार्थियों ,दुकानदारों …. सबके मन में उनके लिए आदर सम्मान था। वो एक छोटी सी कुटिया में रहते थे और कपड़ों के नाम पर उनके पास केवल दो अंगोंछे और दो लंगोटियाँ थीं,एक भिक्षा पात्र और पानी के लिए कमण्डल। सच्चे आदर्श महात्मा थे वो ,कभी होटलों या मिठाई की दुकान से कुछ भी नहीं लेते थे वो। 
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आज तो ये स्वामीजी भी जलेबियों के ढेर के पास एक कोने में खड़े थे। दुकानदार ने स्वामीजी को सादर दुकान के अंदर बिठाया और स्वामी जी से उनकी मनपसंद मिठाई खाने के लिए बार बार आग्रह करने लगा। स्वामीजी ने नम्रता के साथ मना कर दिया। 
थोड़ी देर बात दुकान पर उपस्थित सब लोग बड़े अचंभित हो रहे थे कि -स्वामीजी विक्रय के लिए रखे जलेबियों के ढेर को ऊपर से लेकर नीचे तक चाट रहे थे। 
सब जलेबियाँ झूठी हो गईं ,अब कौन ख़रीदेगा इन्हें?
दुकानदार के सभी बेटे ग़ुस्से में स्वामी जी की तरफ़ बढ़े और उनकी बहुत पिटाई कर दी ,शरीर से खून बहने लगा। बहुत चोट लगीं। जैसे तैसे वे अपनी कुटिया पर पहुँचे ।
अगले तीन दिनों तक वे कष्ट सहते रहे और भगवान का जप करते रहे मुस्कुराते हुए। 
स्वामी के नज़दीक की कुटिया में रहने वाले एक अन्य साधु चौथे दिन उनके लिए चाय पानी और दवा मलहम लेकर आए 
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स्वामी बोले -
सारा जीवन मैंने नियम संयम अपनाया ,राग द्वेष वासना कामना कुछ भी ना रह गई। 
लेकिन बचपन से मेरे मन में जलेबियों की तृष्णा रही ,खूब कोशिश की पर इससे छूट ना सका। 
मन को हर तरह से समझाया पर ये ना माना। 
थक हार कर मैंने इसे ये कठोर सीख देने का निर्णय किया। ताकि इसे शेष जीवन में ठीक से याद रहे ,मैंने जानबुझ कर सभी जलेबियों को चाँटा ताकि मेरी जम कर पिटाई हो। 
सो अब यह मन जलेबी के नाम से भी कंपने लगता है  
न जयेत रसनम यावत
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🔔👨‍👩‍👧‍👦👉 *महानआत्माओं हमसभी पाँचों इंद्रियों के वर्तमान में गुलाम बने हुए है।विश्व का कोई भी जीव पाँचों इंद्रियों मे से कोई भी एक इंद्रिय मे आशक्ति रखने से दुर्गति का पात्र होरहा है।इसलिए हम सभी को चौबीस घंटे में कम से कम रात्रि विश्राम के पहले थोड़ा विचार करना चाहिए कि हमारा क्या होगा ?।*

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गुरुवार, 28 अप्रैल 2022

अनोखा मदतगार

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
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 *🔔✍️आज वैशाख कृष्ण चतुर्दशी शुक्रवार दिनांक 29 अप्रैल 2022 को 21 वे तीर्थंकर नमिनाथ भगवान का मोक्षकल्याणक महोत्सव है।🚩*

🌐👉मैं कईं दिनों से बेरोजगार था , एक एक रूपये की कीमत जैसे करोड़ों लग रही थी , इस उठापटक में था कि कहीं नौकरी लग जाए। आज एक इंटरव्यू था , पर दूसरे शहर जाने के लिए जेब में सिर्फ दस रूपये थे . मुझे कम से कम दो सौ रुपयों की जरूरत थी। अपने इकलौते इन्टरव्यू वाले कपड़े रात में धो, पड़ोसी की प्रेस माँग के तैयार कर पहन, अपने योग्यताओं की मोटी फाइल बगल में दबाकर दो बिस्कुट खा के निकला। लिफ्ट ले पैदल जैसे तैसे चिलचिलाती धूप में तरबतर बस इस उम्मीद में स्टेंड पर पहुँचा कि शायद कोई पहचान वाला मिल जाए , जिससे सहायता लेकर इन्टरव्यू के स्थान तक पहुँच सकूँ।

काफी देर खड़े रहने के बाद भी कोई नहीं दिखा। मन में घबराहट और मायूसी थी , क्या करूँगा अब कैसे पँहुचूगा ?

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 पास के मंदिर पर जा पहुंचा , दर्शन कर सीढ़ियों पर बैठा था। मेरे पास में ही एक साधु बैठा था , उसके कटोरे में मेरी जेब और बैंक एकाउंट से भी ज्यादा पैसे पड़े थे।

मेरी नजरें और हालात समझ के बोला , "कुछ मदद चाहिए क्या ?"
 मैं बनावटी मुस्कुराहट के साथ बोला , "आप क्या मदद करोगे ?"
"चाहो तो मेरे पूरे पैसे रख लो ." वो मुस्कुराता बोला . मैं चौंक गया ! उसे कैसे पता मेरी जरूरत?

मैनें कहा "क्यों"?

"शायद आपको जरूरत है" वो गंभीरता से बोला।

 "हाँ है तो सही, पर तुम्हारा क्या होगा, तुम तो दिन भर माँग के कमाते हो ?" मैने उस का पक्ष रखते हुए कहा .

वो हँसता हुआ बोला , "मैं नहीं माँगता साहब ! लोग डाल जाते हैं मेरे कटोरे में, पुण्य कमाने के लिए। मैं तो साधु हूँ , मुझे इनका कोई मोह नहीं . मुझे सिर्फ भूख लगती है , वो भी एक टाइम . और कुछ दवाइयाँ . बस! मैं तो खुद ये सारे पैसे मंदिर की पेटी में डाल देता हूँ ." वो सहज था कहते कहते।

 मैनें हैरानी से पूछा , "फिर यहाँ बैठते क्यों हो..?" 

"जरूरतमंदों की मदद करने" कहते हुए वो मंद मंद मुस्कुरा रहा था।

मैं उसका मुँह देखता रह गया। उसने दो सौ रुपये मेरे हाथ पर रख दिए और बोला , "जब हो तब लौटा देना।" 
मैं उसका धन्यवाद करता हुआ वहाँ से अपने गंतव्य तक पँहुचा . मेरा इंटरव्यू हुआ , और सलेक्शन भी। मैं खुशी खुशी वापस आया, सोचा उस साधु को धन्यवाद दे दूँ।

मैं मंदिर पँहुचा , बाहर सीढ़़ियों पर भीड़ लगी थी , मैं भीड़ में घुस के अंदर पँहुचा , देखा वही साधु मरा पड़ा था। मैं भौंचक्का रह गया ! मैने दूसरों से पूछा यह कैसे हुआ ?

पता चला , वो किसी बीमारी से परेशान था . सिर्फ दवाईयों पर जिन्दा था . आज उसके पास दवाइयाँ नहीं थी और न उन्हें खरीदने के पैसे। 

मैं अवाक् सा उस साधु को देख रहा था। अपनी दवाईयों के पैसे वो मुझे दे गया था जिन पैसों पे उसकी जिंदगी का दारोमदार था।  उन पैसों से मेरी ज़िंदगी बना दी थी। 

भीड़ में से कोई बोला , अच्छा हुआ मर गया ये भिखारी भी साले बोझ होते हैं , कोई काम के नहीं।

मेरी आँखें डबडबा आयी!

अरे वो भिखारी कहाँ था , वो तो मेरे लिए भगवान ही था। अच्छाई का देवता।  मेरा भगवान! 

भगवान कौन हैं ? कहाँ हैं ?
किसने देखा है ? बस ! इसी तरह मिल जाते हैं।
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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बुधवार, 27 अप्रैल 2022

आनलाइन खरीदी

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*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒ऑनलाइन शॉपिंग💐💐*
 
*🔔🤗आज वैशाख कृष्ण तेरस दिनांक गुरुवार 28 अप्रैल 2022 को 15 वे तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान का गर्भकल्याणक महोत्सव है।🚩*
*🔔✍️कल वैशाख कृष्ण तेरस शुक्रवार दिनांक 29 अप्रैल 2022 को 21 वे तीर्थंकर नमिनाथ भगवान का मोक्षकल्याणक महोत्सव है।🚩*

▶️👨👉एक बार मैं अपने पड़ोसी अंकल के साथ एक बैंक में गया, क्यूँकि उन्हें कुछ पैसा कही ट्रान्सफ़र करना था।

ये स्टेट बैंक एक छोटे से क़स्बे के छोटे से इलाक़े में था। वहां एक घंटे बिताने के बाद जब हम वहां से निकले तो उन्हें पूछने से मैं अपने आप को रोक नहीं पाया।

अंकल क्यूँ ना हम घर पर ही इंटर्नेट बैंकिंग चालू कर ले?

अंकल ने कहा ऐसा मैं क्यूँ करूँ ?

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तो मैंने कहा कि अब छोटे छोटे ट्रान्सफ़र के लिए बैंक आने की और एक घंटा टाइम ख़राब करने की ज़रूरत नहीं, और आप जब चाहे तब घर बैठे अपनी ऑनलाइन शॉपिंग भी कर सकते हैं। हर चीज़ बहुत आसान हो जाएगी। मैं बहुत उत्सुक था उन्हें नेट बैंकिंग की दुनिया के बारे में विस्तार से बताने के लिए।
 
 इस पर उन्होंने पूछा ....अगर मैं ऐसा करता हूँ तो क्या मुझे घर से बाहर निकलने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी?

 मुझे बैंक जाने की भी ज़रूरत नहीं?

मैंने उत्सुकतावश कहा, हाँ आपको कही जाने की जरुरत नही पड़ेगी और आपको किराने का सामान भी घर बैठे ही डिलिवरी हो जाएगा और ऐमज़ॉन, फ़्लिपकॉर्ट व स्नैपडील सबकुछ घर पे ही डिलिवरी करते हैं।

उन्होने इस बात पे जो जवाब मुझे दिया उसने मेरी बोलती बंद कर दी।

उन्होंने कहा आज सुबह जब से मैं इस बैंक में आया, मै अपने चार मित्रों से मिला और मैंने उन कर्मचारियों से बातें भी की जो मुझे जानते हैं।
 मेरे बच्चें दूसरे शहर में नौकरी करते है और कभी कभार ही मुझसे मिलने आते जाते हैं, पर आज ये वो लोग हैं जिनका साथ मुझे चाहिए। मैं अपने आप को तैयार कर के बैंक में आना पसंद करता हुँ, यहाँ जो अपनापन मुझे मिलता है उसके लिए ही मैं वक़्त निकालता हूँ।

दो साल पहले की बात है मैं बहुत बीमार हो गया था। जिस मोबाइल दुकानदार से मैं रीचार्ज करवाता हूं, वो मुझे देखने आया और मेरे पास बैठ कर मुझसे सहानुभूति जताई और उसने मुझसे कहा कि मैं आपकी किसी भी तरह की मदद के लिए तैयार हूँ।

वो आदमी जो हर महीने मेरे घर आकर मेरे यूटिलिटी बिल्स ले जाकर ख़ुद से भर आता था, जिसके बदले मैं उसे थोड़े बहुत पैसे दे देता था उस आदमी के लिए कमाई का यही एक ज़रिया था और उसे ख़ुद को रिटायरमेंट के बाद व्यस्त रखने का तरीक़ा भी !

कुछ दिन पहले मोर्निंग वॉक करते वक़्त अचानक मेरी पत्नी गिर पड़ी, मेरे किराने वाले दुकानदार की नज़र उस पर गई, उसने तुरंत अपनी कार में डाल कर उसको घर पहुँचाया क्यूँकि वो जानता था कि वो कहा रहती हैं।

अगर सारी चीज़ें ऑन लाइन ही हो गई तो मानवता, अपनापन, रिश्ते - नाते सब ख़त्म ही नही हो जाएँगे !

मैं हर वस्तु अपने घर पर ही क्यूँ मँगाऊँ ?

मैं अपने आपको सिर्फ़ अपने कम्प्यूटर से ही बातें करने में क्यूँ झोंकू ?

मैं उन लोगों को जानना चाहता हूँ जिनके साथ मेरा लेन-देन का व्यवहार है, जो कि मेरी निगाहों में सिर्फ़ दुकानदार नहीं हैं।
इससे हमारे बीच एक रिश्ता, एक बन्धन क़ायम होता है !

क्या ऐमज़ॉन, फ़्लिपकॉर्ट या स्नैपडील ये रिश्ते-नाते , प्यार, अपनापन भी दे पाएँगे ?

फिर उन्होने बड़े पते की एक बात कही जो मुझे बहुत ही विचारणीय लगी, आशा हैं आप भी इस पर चिंतन करेंगे........
उन्होने कहां कि ये घर बैठे सामान मंगवाने की सुविधा देने वाला व्यापार उन देशों मे फलता फूलता हैं जहां आबादी कम हैं और लेबर काफी मंहगी है।

भारत जैसे 130 करोड़ की आबादी वाले गरीब एंव मध्यम वर्गीय बहुल देश मे इन सुविधाओं को बढ़ावा देना आज तो नया होने के कारण अच्छा लग सकता हैं पर इसके दूरगामी प्रभाव बहुत ज्यादा नुकसानदायक होंगे।

देश मे 80% जो व्यापार छोटे छोटे दुकानदार गली मोहल्लों मे कर रहे हैं वे सब बंद हो जायेगे और बेरोजगारी अपने चरम सीमा पर पहुंच जायेगी। तो अधिकतर व्यापार कुछ गिने चुने लोगों के हाथों मे चला जायेगा हमारी आदते ख़राब और शरीर इतना आलसी हो जायेगा की बहार जाकर कुछ खरीदने का मन नहीं करेगा। 
जब ज्यादातर धन्धे व् दुकाने ही बंद हो जायेंगी तो रेट कहाँ से टकराएँगे तब..... ये ही कंपनिया जो अभी सस्ता माल दे रही है वो ही फिर मनमानी कीमत हमसे वसूल करेगी। हमे मजबूर होकर सबकुछ ओनलाइन पर ही खरीदना पड़ेगा।और ज्यादातर जनता बेकारी की ओर अग्रसर हो जायेगी।
*🔔आज वर्तमान सरकार भारतीयों को निकम्मा बनाकर मारने की तैयारी कर रही है।जब से आनलाइन बैंकिंग सेवा चालू हुई है तब से ही भारत में ठगी की संख्या बढ गई है।प्रतिदिन अखबारों में समाचार आते है कि सम्पूर्ण भारत में करोड़ों रुपये की ठगी आम जनता के साथ प्रतिदिन हो रही है।◀️*
मैं आजतक उनको क्या जबाब दूं ये नही समझ पाया हूं,.....
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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मंगलवार, 26 अप्रैल 2022

प्रसिद्ध चित्रकार

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒प्रसिद्ध चित्रकार💐💐*
*🤗पिकासो (Picasso) स्पेन में जन्मे एक अति प्रसिद्ध चित्रकार थे उनकी पेंटिंग्स दुनिया भर में करोड़ों और अरबों रुपयों में बिका करती थीं!*

एक दिन रास्ते से गुजरते समय एक महिला की नजर पिकासो पर पड़ी और संयोग से उस महिला ने उन्हें पहचान लिया। वह दौड़ी हुई उनके पास आयी और बोली, 'सर, मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूँ। आपकी पेंटिंग्स मुझे बहुत ज्यादा पसंद हैं। क्या आप मेरे लिए भी एक पेंटिंग बनायेंगे ?

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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पिकासो हँसते हुए बोले, 'मैं यहाँ खाली हाथ हूँ। मेरे पास कुछ भी नहीं है मैं फिर कभी आपके लिए एक पेंटिंग बना दूंगा लेकिन उस महिला ने भी जिद पकड़ ली, 'मुझे अभी एक पेंटिंग बना दीजिये, बाद में पता नहीं मैं आपसे मिल पाऊँगी या नहीं।'

पिकासो ने जेब से एक छोटा सा कागज निकाला और अपने पेन से उसपर कुछ बनाने लगे। करीब 10 मिनट के अंदर पिकासो ने पेंटिंग बनायीं और कहा ये लो ये  मिलियन डॉलर की पेंटिंग है।'

महिला को बड़ा अजीब लगा कि पिकासो ने बस 10 मिनट में जल्दी से एक काम चलाऊ पेंटिंग बना दी है और बोल रहे हैं कि मिलियन डॉलर की पेंटिग है। उसने वह पेंटिंग ली और बिना कुछ बोले अपने घर आ गयी उसे लगा पिकासो उसको पागल बना रहा है। वह बाजार गयी और उस पेंटिंग की कीमत पता की। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि वह पेंटिंग वास्तव में मिलियन डॉलर की थी!

वह भागी-भागी एक बार फिर पिकासो के पास आयी और बोली 'सर आपने बिलकुल सही कहा था यह तो मिलियन डॉलर की ही पेंटिंग है।'

पिकासो ने हँसते हुए कहा 'मैंने तो आपसे पहले ही कहा था।'

वह महिला बोली 'सर, आप मुझे अपनी स्टूडेंट बना लीजिये और मुझे भी पेंटिंग बनानी सिखा दीजिये जैसे आपने 10 मिनट में मिलियन डॉलर की पेंटिंग बना दी, वैसे ही मैं भी 10 मिनट में न सही 10 घंटे में ही अच्छी पेंटिंग बना सकूँ मुझे ऐसा बना दीजिये।

पिकासो ने हँसते हुए कहा 'यह पेंटिंग जो मैंने 10 मिनट में बनायी है इसे सीखने में मुझे 30 साल का समय लगा है मैंने अपने जीवन के 30 साल सीखने में दिए हैं तुम भी दो सीख जाओगी!

वह महिला अवाक् और निःशब्द होकर पिकासो को देखती रह गयी!
*🥇↔️🔔आपको इस कहानी के माध्यम से शिक्षक का महत्व बताया जा रहा है।वह शिक्षक धर्मगुरु, वकील, शिक्षक या किसी भी अन्य हुनर मे पारंगत व्यक्ति हो सकता है।*
*एक अध्यापक को 40 मिनट के लेक्चर की जो तनख्वाह दी जाती है वही इस कहानी को बयां करती है। एक अध्यापक के एक वाक्य के पीछे उसकी सालों की मेहनत होती है ।*

समाज समझता है कि बस बोलना ही तो होता है अध्यापक को मुफ्त की नौकरी है! ये नहीं भूलना चाहिए कि आज विश्व मे जितने भी सम्मानित पदों पर लोग आसीन हैं उनमें से अधिकांश किसी न किसी अध्यापक की वजह से ही पहुँचते हैं"

अगर आप भी अध्यापक की तनख्वाह को मुफ़्त की ही समझते हैं तो एक बार 40 मिनट का प्रभावशाली और अर्थपूर्ण लेक्चर देकर दिखाएं आपको अपनी क्षमता का एहसास हो जाएगा!
सभी शिक्षकों को समर्पित!

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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सोमवार, 25 अप्रैल 2022

रंग बिरंगे कागज

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒रंग - बिरंगे कागज़💐💐*
*🎪एक बूढ़ी माता मंदिर के सामने भीख माँगती थी। एक संत ने पूछा - आपका बेटा लायक है, फिर यहाँ क्यों ??*
*⭐बूढ़ी माता बोली - बाबा, मेरे पति का देहांत हो गया है। मेरा पुत्र परदेस नौकरी के लिए चला गया।*
 
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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*▶️जाते समय मेरे खर्चे के लिए कुछ रुपए देकर गया था, वे खर्च हो गये इसीलिए भीख माँग रही हूँ।*

*🙏संत ने पूछा - क्या तेरा बेटा तुझे कुछ नहीं भेजता ??*

*🤗बूढ़ी माता बोली - मेरा बेटा हर महीने एक रंग-बिरंगा कागज भेजता है जिसे मैं दीवार पर चिपका देती हूँ।*

*🌲संत ने उसके घर जाकर देखा कि दीवार पर 60  बैंक ड्राफ्ट चिपकाकर रखे थे।*
 *🌐प्रत्येक ड्राफ्ट ₹50,000 राशि का था। पढ़ी-लिखी न होने के कारण वह नहीं जानती थी कि उसके पास कितनी संपति है।* 

*🕉️संत ने उसे ड्राफ्ट का मूल्य समझाया।*

*👉हमारी स्थिति भी उस बूढ़ी माता की भाँति ही है।*

*🔔🤗🕉️जैनदर्शन मे दिगंबराचार्यो ने सबसे महत्वपूर्ण सम्यकदर्शन - सम्यकज्ञान - सम्यकचारित्र इन तीनों की एकरूपता रत्नत्रय को धर्म कहाँ है।आज अत्यधिक लोगों ने मात्र कुछ धार्मिक क्रियाओं को ही धर्म मान लिया है।यह हम सभी के लिए दु:ख का व संसार में भटकने का मुख्य कारण है।आज वर्तमान में हमें सबसे पहले अपनी कमी को देखकर उसे शास्त्रोक्त विधि के द्वारा जानकर उसे दूर करने का प्रयास करना आवश्यक है।अतः हम सभी रत्नत्रय को समझकर अपनी शक्ति अनुसार अपने जीवन में उतारे तभी हमसभी का जीवन सफल होगा।✍️*

*🔔हमारे पास धर्मग्रंथ तो हैं पर माथे से लगाकर अपने घर में सुसज्जित कर के रखते हैं।ऐसा करने से कुछ भी नहीं होगा।उन ग्रंथों के अनुसार हमारा आचरण होना चाहिए।*

*👉🏿जबकि हम उनका वास्तविक लाभ तभी उठा पाएगें जब हम उनका अध्ययन, चिंतन, मनन करके उन्हें अपने जीवन में उतारेगें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
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रविवार, 24 अप्रैल 2022

पापों को पुण्य मे बदले

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒पापों को पुण्य मे बदले💐💐*

संत एकनाथ बहुत परोपकारी थे। वे महान संत थे लेकिन उनके आचरण, व्यवहार और वाणी में कोई दिखावा नहीं था। वे मूलतः महाराष्ट्र से थे, परन्तु उनके नेक कामों की सुगंध पूरी दुनिया में फैली।

एक बार संत एकनाथ के मन में यह विचार आया कि प्रयाग जाकर त्रिवेणी में स्नान किया जाए और त्रिवेणी का पवित्र जल कांवड़ में भरकर रामेश्वरम में चढ़ाया जाए। उन्होंने इस बारे में अपने साथियों से चर्चा की तो सभी तैयार हो गए। एकनाथ भजन-सत्संग करते हुए प्रयाग पहुँच गए। वहाँ उन्होंने त्रिवेणी में स्नान किया और उसका पवित्र जल कांवड़ में भरकर रामेश्वरम चल दिए।

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*
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 एकनाथ के साथी भजन-कीर्तन करते रामेश्वर जा रहे थे। शरीर में थकान तो थी लेकिन कांवड़ की उमंग उन्हें लगातार आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दे रही थी। चलते-चलते वे रामेश्वरम के निकट पहुँच गए। नगर में प्रवेश करने से पूर्व सभी साथियों ने निर्णय किया कि थोड़ी देर यहाँ विश्राम किया जाए। सभी विश्राम करने लगे।

उस जगह के नजदीक एक गधा भी लेटा हुआ था। तेज धूप और बीमारी की वजह से उसके पैरों में इतनी शक्ति नहीं थी कि वह कुछ दूर चलकर पानी पी सके। एकनाथ और उसके सभी साथियों ने उसे देखा। सभी उसकी ऐसी स्थिति पर चर्चा करने लगे। कोई कहता, भगवान ने ये कैसा संसार बनाया है ? इस जीव को जीवन तो दे दिया लेकिन आज उसे इतनी शक्ति भी नहीं दी कि यह कुछ दूर चलकर पानी पी सके। दूसरा कहता, इसे प्यास लगी है। अगर कोई पशुओं के लिए यहाँ पानी की व्यवस्था करा दे तो उसे कितना पुण्य प्राप्त हो लेकिन इस प्राणी के भाग्य में तो पानी भी नहीं लिखा। सभी अपनी राय देकर स्थिति को कोस रहे थे।

एकनाथ ने उस गधे की स्थिति देखी और उन्होंने अपनी कांवड़ से पवित्र जल का पात्र खोला। वे उसे गधे के मुँह के पास ले गए और पूरा जल उसे रामनाम सुनाते हुए पिला दिया। गर्मी के मौसम में ऐसा पवित्र रामनाम वालाजल पीकर उस जानवर की स्थिति में सुधार हुआ और वह उठकर चला गया। उसके नेत्रों में कृतज्ञता के आँसू थे।
 
कहा जाता है कि उस समय एकनाथ को ईश्वरीय वाणी सुनाई दी - एकनाथ, इस जीव पर दया कर व रामनाम सुनाकर तुमने महान पुण्य का कार्य किया है। तुमने उस प्राणी में साक्षात मेरे ही दर्शन किए हैं। मैं रामेश्वरम पहुँचने से पहले ही तुम्हारी कांवड़ स्वीकार करता हूँ।

*वास्तव में सभी धर्मों ने माना है कि जीवों की सेवा करना भी परमात्मा की ही सेवा करना है। जो इस सत्य को  समझकर अपने जीवन में उतार लेता है, उसे शीघ्र ईश्वरीय कृपा की प्राप्ति होती है।*

*🔔अतः आप सभी से निवेदन है कि आप किसी जीव के मोक्षमार्ग मे सहयोगी बनकर जीवन सफल करें।आप भी भविष्य मे मोक्ष जायेंगे उस समय आपका किसी के मोक्षमार्ग मे किया हुआ पुण्य ही आपका साथ देगा।अन्य विश्व की कोई भी शक्ति आपका साथ दे नहीं सकती किंतु आपकिसी जीव के मोक्षमार्ग मे सहयोगी बने वह आपका स्वयं का कमाया हुआ पुण्य है।उसे विश्व की कोई भी शक्ति छीन नहीं सकती।🔔*

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लकडी का कटोरा

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒लकड़ी का कटोरा💐💐*
एक वृद्ध व्यक्ति अपने बहु – बेटे के यहाँ शहर में रहने गया। उम्र के इस पड़ाव पर वह अत्यंत कमजोर हो चुका था, उसके हाथ कांपते थे और दिखाई भी कम देता था। वो एक छोटे से घर में रहते थे, पूरा परिवार और उसका चार वर्षीया पोता एक साथ डिनर टेबल पर खाना खाते थे। लेकिन वृद्ध होने के कारण उस व्यक्ति को खाने में बड़ी दिक्कत होती थी। कभी मटर के दाने उसकी चम्मच से निकल कर फर्श पे बिखर जाते तो कभी हाँथ से दूध छलक कर मेजपोश पर गिर जाता।

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बहु -बेटे एक -दो दिन ये सब सहन करते रहे पर अब उन्हें अपने पिता की इस काम से चिढ होने लगी।

“हमें इनका कुछ करना पड़ेगा ”, लड़के ने कहा।

बहु ने भी हाँ में हाँ मिलाई और बोली, “आखिर कब तक हम इनकी वजह से अपने खाने का मजा किरकिरा करते रहेंगे, और हम इस तरह चीजों का नुक्सान होते हुए भी नहीं देख सकते।”

अगले दिन जब खाने का वक़्त हुआ तो बेटे ने एक पुरानी मेज को कमरे के कोने में लगा दिया, अब बूढ़े पिता को वहीँ अकेले बैठ कर अपना भोजन करना था। यहाँ तक कि उनके खाने के बर्तनों की जगह एक लकड़ी का कटोरा दे दिया गया था, ताकि अब और बर्तन ना टूट-फूट सकें।

बाकी लोग पहले की तरह ही आराम से बैठ कर खाते और जब कभी -कभार उस बुजुर्ग की तरफ देखते तो उनकी आँखों में आंसू दिखाई देते। यह देखकर भी बहु-बेटे का मन नहीं पिघलता,वो उनकी छोटी से छोटी गलती पर ढेरों बातें सुना देते। वहां बैठा बालक भी यह सब बड़े ध्यान से देखता रहता, और अपने में मस्त रहता।

एक रात खाने से पहले, उस छोटे बालक को उसके माता -पिता ने ज़मीन पर बैठ कर कुछ करते हुए देखा, “तुम क्या बना रहे हो ?” पिता ने पूछा,

बच्चे ने मासूमियत के साथ उत्तर दिया-

अरे मैं तो आप लोगों के लिए एक लकड़ी का कटोरा बना रहा हूँ, ताकि जब मैं बड़ा हो जाऊं तो आप लोग इसमें खा सकें।
शिक्षक नवनीत
और वह पुनः अपने काम में लग गया। पर इस बात का उसके माता -पिता पर बहुत गहरा असर हुआ, उनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकला और आँखों से आंसू बहने लगे। वो दोनों बिना बोले ही समझ चुके थे कि अब उन्हें क्या करना है। उस रात वो अपने बूढ़े पिता को वापस डिनर टेबल पर ले आये, और फिर कभी उनके साथ अभद्र व्यवहार नहीं किया।

*💐💐शिक्षा💐💐* :-
*हम अक्सर अपने बच्चों को नैतिक शिक्षा के साथ संस्कारों की शिक्षा देने की बात करते हैं। पर हम ये भूल जाते हैं की असल शिक्षा शब्दों में नहीं हमारे कर्म में छुपी होती है। अगर हम बच्चों को बस ये उपदेश देते रहे कि बड़ों का आदर करो…सबका सम्मान करो…और खुद इसके उलट व्यवहार करें तो बच्चा भी ऐसा ही करना सीखता है। इसलिए कभी भी अपने परिवार के सदस्यों साथ ऐसा व्यवहार ना करें कि कल को आपकी संतान भी आपके लिए लकड़ी का कटोरा तैयार करने लगे!*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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शनिवार, 23 अप्रैल 2022

निर्मल परिणामी धोबी

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒निर्मल परिणामी धोबी💐💐*

*🔔🤗🕉️ आज रविवार 24 अप्रैल 2022 वैशाख कृष्ण नवमी बीसवें तीर्थंकर 1008 श्री मुनिसुव्रतनाथजी भगवान का  ज्ञानकल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🤗🎪कल सोमवार  25 अप्रैल 2022 वैशाख कृष्ण दसमी बीसवें तीर्थंकर 1008 श्री मुनिसुव्रतनाथजी भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*

▶️एक नदी तट पर स्थित बड़ी सी शिला पर एक महात्मा बैठे हुए थे। वहाँ एक धोबी आता है किनारे पर वही एकमात्र शिला थी जहां वह रोज कपड़े धोता था। उसने शिला पर महात्मा जी को बैठकर ध्यान करते देखा।  तो सोचा- अभी उठ जाएंगे, थोड़ीदेर इन्तजार कर लेता हूँ। अपना काम बाद में कर लूंगा। एक घंटा हुआ, दो घंटे हुए फिर भी महात्माजी नहीं उठे  !

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*
✍️अतः धोबी नें हाथ जोड़कर विनय पूर्वक निवेदन किया कि महात्मन् यह मेरे कपड़े धोने का स्थान है आप कहीं अन्यत्र बिराजें तो मै अपना कार्य निपटा लूं। महात्मा जी वहाँ से उठकर थोड़ी दूर जाकर बैठ गए। धोबी नें कपड़े धोने शुरू किए, पछाड़ पछाड़ कर कपड़े धोने की क्रिया में कुछ छींटे उछल कर महात्मा जी पर गिरने लगे।

👉🏿 महात्मा जी को क्रोध आया, वे धोबी को गालियाँ देने लगे। उससे भी शान्ति न मिली तो पास रखा धोबी का डंडा उठाकर उसे ही मारने लगे। सांप उपर से कोमल मुलायम दिखता है किन्तु पूंछ दबने पर ही असलियत की पहचान होती है।

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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🤝महात्मा को क्रोधित देख धोबी ने सोचा अवश्य ही मुझ से कोई अपराध हुआ है। अतः वह हाथ जोड़ कर महात्मा से माफी मांगने लगा। महात्मा ने कहा – दुष्ट तुझ में शिष्टाचार तो है ही नहीं, देखता नहीं तूं गंदे छींटे मुझ पर उड़ा रहा है? धोबी ने कहा – महाराज शान्त हो जाएं, मुझ गंवार से गलती हो गई, लोगों के गंदे कपड़े धोते धोते मेरा ध्यान ही न रहा, क्षमा कर दें। धोबी का काम पूर्ण हो चुका था, साफ कपडे समेटे और महात्मा जी से पुनः क्षमा मांगते हुए लौट गया।
🤗 महात्मा नें देखा धोबी वाली उस शिला से निकला गंदला पानी मिट्टी के सम्पर्क से स्वच्छ और निर्मल होकर पुनः सरिता के शुभ्र प्रवाह में लुप्त हो रहा था, लेकिन महात्मा के अपने शुभ्र वस्त्रों में तीव्र उमस और सीलन भरी बदबू बस गई थी। कौन धोबी कौन महात्मा? यथार्थ में धोबी ही असली महात्मा था, संयत रह कर समता भाव से वह लोगों के दाग़ दूर करता था।

👣महात्मा को अपनी गलती का एहसास हो गया था उन्होंने आगे चलकर अपने क्रोध पर नियंत्रण कर महान महात्मा बने।

“जिस तरह उबलते हुए पानी में हम अपना, प्रतिबिम्ब नहीं देख सकते उसी तरह क्रोध की अवस्था में यह नहीं समझ पाते कि हमारी भलाई किस बात में है..!!

*🔔🤗✍️ हम सभी महानआत्माओं को अपने जीवन में अपने ही विचारों को संतुलित करना चाहिए। उन विचारों को समता रुपी शस्त्र से शांत कर अपने परिणामों को निर्मल बनाना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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गुरुवार, 21 अप्रैल 2022

वर्तमान के बनिया

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒वर्तमान के बनिया💐💐*

किसी गांव में भोला नाम का एक लड़का रहता था। घर में वह और उसकी मां केवल दो प्राणी थे। पिता, उसके बचपन में ही चल बसे थे। भोला गरीबी के कारण स्कूल नहीं जा सका। कमाने के लिए वह एक सेठ के यहां नौकरी करने लगा। नाम के अनुसार ही वह भोला-भाला था। सेठ उसे समय समय पर ठगता रहता था। कम रुपए देता व काम ज्यादा लेता। भोला दुःखी रहता था।

किसी तरह उसे पता चला कि उसके गांव में साक्षरता कक्षा चल रही है। वह वहां पढ़ने जाने लगा। जल्दी ही वह हिसाब लगाने लगा। रुपयों पैसों का हिसाब वह अंगुलियों पर गिनकर कर लेता उसने सेठजी से बदला लेने की सोची।

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एक दिन उसने सेठ से सौ रुपए उधार मागे और काम छोड़कर चला गया।

काफी दिन तक वह सेठ के पास नहीं आया। सेठ तो था कंजूस। वह सौ रुपयों के बारे में सोच सोचकर परेशान रहता।

एक दिन रास्ते में भोला मिला। सेठ ने भोला से कहा, भोला, कुछ दिन पहले तुमने मुझसे सौ रुपए उधार लिए थे वह लौटा दो।” भोला ने आंखे मटकाते हुए कहा, “कौन से रुपए सेठ जी? वह तो कब के खर्च हो गए। सेठजी ने कहा, “किसमें खर्च हुए।”

भोला ने कहा, “सुनो सेठजी। मैं सारा हिसाब बताता हूं।”

दस के ले लिए आजरा-बाजरा, दस के ले लिए जौ, सेठजी अब काहै के सौ।”

इतना सुनते ही सेठजी अवाक् रह गए । वह झल्लाते हुए बोले “अरे अस्सी ही दे दो।”

भोला फिर मुस्कराते हुए बोला, “दस की ले ली लोटा बाल्टी दस की ले ली रस्सी, सेठजी अब काहे के अस्सी।”

सेठजी भोला की बातें सुनकर मन ही मन तिलमिला रहे थे गुस्से में उनका बुरा हाल था। वह बोले “साठ ही दे दो।”

भोला फिर आंखें मटकाते हुए बोला, “सुनो सेठ जी, दस के ले लिए इस्तर विस्तर, दस की ले ली खाट, सेठजी अब काहे के साठ।

सेठजी का बुरा हाल था। वह फिर बोले”भोला, कम से कम मेरे चालीस रुपए ही दे दो।”

भोला फिर बोला, “दस की ले ली जूता चप्पल, दस की ले ली पॉलिस, सेठजी अब काहे के चालीस।”

सेठ के पसीना छूट रहा था। वह बोले “कम से कम बीस ही दे दो।

भोला ने फिर आंखें मटकाते हुए कहा, “दस की ले ली कापी किताबें, दस की दे दी फीस। सेठजी अब काहे के बीस?”

यह सुनकर सेठजी को तो चक्कर आने लगे उन्होंने फिर कहा, भोला, कम से कम मुझे ब्याज ही दे दो।”

भोला फिर मुस्कराते बोला, “दस की ले ली सब्जी सब्जी, दस की ले ली मूँगफली, सेठजी अब काहे का ब्याज।”

इतना सुनते ही सेठजी के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह धड़ाम से नीचे गिर गए। भोला ने सेठ को बेईमानी का मज़ा चखा दिया था। सेठजी अपनी करनी पर पछता रहे थे।

*🔔🤗✍️महानुभावों, जिंदगी बीत गयीं लोगों को लूटते हुए।आप समझते है कि आपने लोगों को लूटा किंतु आपके कर्म कहते है कि आप स्वयं लूट गये।आपने जिनकों परेशान किया वह सभी जीव आपको 84 लाख योनियों मे  ब्याज सहित परेशान करेंगे।अतः आप किसी के मोक्षमार्ग मे सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी कभी मत बनना।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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बुधवार, 20 अप्रैल 2022

बुध्दिमान साधु

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒*बुद्धिमान साधु💐💐*

एक साधु घने जंगल से होकर जा रहा था। उसे अचानक सामने से बाघ आता हुआ दिखाई दिया। साधु ने सोचा कि अब तो उसके प्राण नहीं बचेंगे। यह बाघ निश्चय ही उसे खा जाएगा। साधु भय के मारे काँपने लगा। फिर उसने सोचा कि मरना तो है ही, क्यों न बचने का कुछ उपाय करके देखें।

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साधु ने बाघ के पास आते ही ताली बजा-बजाकर नाचना शुरू कर दिया। बाघ को यह देख कर बहुत आश्चर्य हुआ। वह बोला- “ओ रे मूर्ख! क्यों नाच रहे हो? क्या तुम्हें नहीं पता कि मैं तुम्हें कुछ ही देर में खा डालूंगा।”
साधु ने कहा- “हे बाघ, मैं प्रतिदिन बाघ का भोजन करता हूं। मेरी झोली में एक बाघ तो पहले से ही है किंतु वह मेरे लिए अपर्याप्त है। मुझे एक और बाघ चाहिए था। मैं उसी की खोज में जंगल में आया था। तुम अपने आप मेरे पास आ गए हो, इसीलिए मुझे खुशी हो रही है।”

साधु की बात सुन कर बाघ मन-ही-मन कुछ डरा। फिर भी उसे विश्वास नहीं हुआ। उसने साधु से कहा- “तुम अपनी झोली वाला बाघ मुझे दिखाओ। यदि नहीं दिखा सके तो मैं तुम्हें मार डालूँगा।”
साधु ने उत्तर दिया- “ठीक है, अभी दिखाता हूँ। तुम जरा ठहरो, देखो भाग मत जाना।”
इतना कहकर साधु ने अपनी झोली उठाई। उसकी झोली में एक शीशा था। उसने शीशे को झोली के मुख के पास लाकर बाघ से कहा- “देखो, यह रहा पहला वाला बाघ।”
बाघ साधु के पास आया। उसने जैसे ही झोली के मुंह पर देखा, उसे शीशे में अपनी ही परछाई दिखाई दी। इसके बाद वह गुर्राया तो शीशे वाला बाघ भी गुर्राता दिखाई दिया। अब बाघ को विश्वास हो गया कि साधु की झोली में सचमुच एक बाघ बंद है। उसने सोचा कि यहाँ से भाग जाने में ही कुशल है। वह पूँछ दबाकर साधु के पास से भाग गया।
वह अपने साथियों के पास पहुँचा और सब मिल कर अपने राजा के पास गए। राजा ने जब सारी घटना सुनी तो उसे बहुत क्रोध आया। वह बोला- “तुम सब कायर हो। कहीं आदमी भी बाघ को खा सकता है। चलो, मैं उस साधु को मजा चखाता हूं।”
बाघ का सरदार दूसरे बाघों के साथ साधु को खोजने चल पड़ा। इसी बीच साधु के पास एक लकड़हारा आ गया था। साधु उसे बाघ वाली घटना सुना रहा था। तभी बाघों का सरदार वहाँ पहुँचा। जब लकड़हारे ने बहुत से बाघों को अपनी ओर आते देखा तो डर के मारे उसकी घिग्घी बंध गई। वह कुल्हाड़ी फेंक कर पेड़ पर चढ़ गया। साधु को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता था। वह पेड़ के पीछे छिप कर बैठ गया।
जो बाघ साधु के पास से जान बचा कर भागा था, वह अपने सरदार से बोला, देखो सरदार सामने देखो, पहले तो एक ही साधु था, अब दूसरा भी आ गया है। एक नीचे छिप गया है और दूसरा पेड़ के ऊपर, चलो भाग चलें।”
बाघों का सरदार बोला, “मैं इनसे नहीं डरता। तुम सब लोग इस पेड़ को चारों तरफ से घेर लो, ताकि ये दोनों भाग न जाएं। मैं पेड़ के पास जाता हूं।”
इतना कह कर बाघों का सरदार पेड़ की तरफ बढ़ने लगा। साधु और लकड़हारा अपनी-अपनी जान की खैर मनाने लगे। अचानक लकड़हारे को एक चींटी ने काट खाया। जैसे ही वह दर्द से तिलमिलाया कि उसके हाथ से टहनी छूट गई। वह घने पत्तों और टहनियों से रगड़ खाता हुआ धड़ाम से नीचे आ गिरा। जब साधु ने उसे गिरते हुए देखा तो वह बहुत जोर से चिल्लाया, “बाघ के सरदार को पकड़ लो। जल्दी करो, फिर यह भाग जाएगा।”
धड़ाम की आवाज और साधु के चिल्लाने से बाघों का सरदार डर गया। उसने सोचा कि यह साधु सचमुच ही बाघों को खाने वाला है। वह उलटे पैरों भागने लगा। उसके साथी भी उसे भागता हुआ देखते ही सिर पर पैर रखकर भाग गए।

*शिक्षा:-*
बुद्धि बल पर भारी पड़ती है ।

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मंगलवार, 19 अप्रैल 2022

सत्य से सीखते रहो

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒 सत्य से सीखते रहो💐💐*
*🔔एक बार गाँव के दो व्यक्तियों ने जयपुर शहर जाकर पैसे कमाने का निर्णय लिया। शहर जाकर कुछ महीने इधर-उधर छोटा-मोटा काम कर दोनों ने कुछ पैसे जमा किये। फिर उन पैसों से अपना-अपना व्यवसाय प्रारंभ किया। दोनों का व्यवसाय चल पड़ा। दो साल में ही दोनों ने अच्छी ख़ासी तरक्की कर ली। व्यवसाय को फलता-फूलता देख पहले व्यक्ति ने सोचा कि अब तो मेरे काम चल पड़ा है। अब तो मैं तरक्की की सीढ़ियाँ चढ़ता चला जाऊंगा। लेकिन उसकी सोच के विपरीत व्यापारिक उतार-चढ़ाव के कारण उसे उस साल अत्यधिक घाटा हुआ।*

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*🎂अब तक आसमान में उड़ रहा वह व्यक्ति यथार्थ के धरातल पर आ गिरा। वह उन कारणों को तलाशने लगा, जिनकी वजह से उसका व्यापार बाज़ार की मार नहीं सह पाया। सबसे पहले उसने उस दूसरे व्यक्ति के व्यवसाय की स्थिति का पता लगाया, जिसने उसके साथ ही व्यापार आरंभ किया था। वह यह जानकर हैरान रह गया कि इस उतार-चढ़ाव और मंदी के दौर में भी उसका व्यवसाय मुनाफ़े में है। उसने तुरंत उसके पास जाकर इसका कारण जानने का निर्णय लिया। अगले ही दिन वह दूसरे व्यक्ति के पास पहुँचा।*

*☺️दूसरे व्यक्ति ने उसका खूब आदर-सत्कार किया और उसके आने का कारण पूछा। तब पहला व्यक्ति बोला, “दोस्त! इस वर्ष मेरा व्यवसाय बाज़ार की मार नहीं झेल पाया। बहुत घाटा झेलना पड़ा। तुम भी तो इसी व्यवसाय में हो। तुमने ऐसा क्या किया कि इस उतार-चढ़ाव के दौर में भी तुमने मुनाफ़ा कमाया?” यह बात सुन दूसरा व्यक्ति बोला, “भाई! मैं तो बस सीखता जा रहा हूँ, अपनी गलती से भी और साथ ही दूसरों की गलतियों से भी। जो समस्या सामने आती है, उसमें से भी सीख लेता हूँ। इसलिए जब दोबारा वैसी समस्या सामने आती है। तो उसका सामना अच्छे से कर पाता हूँ और उसके कारण मुझे नुकसान नहीं उठाना पड़ता। बस ये सीखने की प्रवृत्ति ही है, जो मुझे जीवन में आगे बढ़ाती जा रही है।”* 
*🤗🙏🤗हाँ मै अजैन हूँ किंतु मुझे एक जैन सेठजी से शिक्षा मिली कि अहिंसक वस्तुओं का व्यापार करो।कम मुनाफे में मेरे ज्यादा ग्राहक बनने से मुझे अत्यधिक लाभ हुआ।वे एक दिन मुझे दिंगबर संत केपास ले गये।उन्होंने उपदेश दिया कि अपनी आमदनी का 17% धर्म कार्य में खर्च करना चाहिए।उनके उपदेश से मैंने अपनी आमदनी का दस प्रतिशत दान सेठजी को दिया ओर सेठजी से कहा आप इस पैसे को जैनधर्म के कार्यों में गुप्तदान कर देना।बस उसी समय से मेरा व्यापार प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।मुनिराज के उपदेशों से मै अब सात्विक भोजन करता हूँ।मुझे कोई भी व्यसन नहीं है।मैंने आलू ,प्याज लहसुन व जमीकंद जो पाँच इंद्रियों की इच्छाओं को जागृत करती है, उनका त्याग कर दिया है।अब जैनमंदिर के नित्य दर्शन करता हूँ।अन्य देवी-देवताओं के सामने अपना माथा नहीं झुकाता।बस यही मेरी सफलता का रहस्य है।*
 
*▶️दूसरे व्यक्ति की बात सुनकर पहले व्यक्ति को अपनी भूल का अहसास हुआ। सफ़लता के मद में वो अति-आत्मविश्वास से भर उठा था और सीखना छोड़ दिया था। वह यह प्रण कर वापस लौटा कि कभी सीखना नहीं छोड़ेगा।उसने यूट्यूब वीडियो से जैनदर्शन की जानकारी ली।【 जैनधर्म का प्राथमिक ज्ञान , जैनज्ञानशाला,जैनपाठशाला यह विडीयों देखकर जीवन का रहस्य समझा】। उसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और तरक्की की सीढ़ियाँ चढ़ता चला गया।*

*शिक्षा:-*
*भव्यआत्माओं , जीवन में कामयाब होना है, तो इसे पाठशाला मान हर पल सीखते रहिये। यहाँ नित नए परिवर्तन और नए विकास होते रहते हैं। यदि हम स्वयं को सर्वज्ञाता समझने की भूल करेंगे, तो जीवन की दौड़ में पिछड़ जायेंगे। क्योंकि इस दौड़ में जीतता वही है, जो लगातार सत्य के सहारे दौड़ता रहता है जिसने दौड़ना छोड़ दिया, उसकी हार निश्चित है। इसलिए सीखने की ललक खुद में बनाये रखें, फिर कोई बदलाव, कोई उतार-चढ़ाव आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
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सोमवार, 18 अप्रैल 2022

पत्नी का भूत

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
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*एक आदमी की पत्नी अचानक से बहुत बीमार पड़ गयी . मरने से पहले उसने अपने पति से कहा , “ मैं तुम्हे बहुत प्यार करती हूँ …. तुम्हे छोड़ कर नहीं जाना चाहती… मैं नहीं चाहती की मेरे जाने के बाद तुम मुझे भुला दो और किसी दूसरी औरत से शादी करो … वादा करो कि मेरे मरने के बाद तुम किसी और से प्रेम नहीं करोगे …वर्ना मेरी आत्मा तुम्हे चैन से जीने नहीं देगी और इतना कह कर वो चल बसी ।*

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उसके जाने के कुछ महीनो तक उस आदमी ने किसी दूसरी औरत की तरफ देखा तक नहीं पर एक दिन उसकी मुलाक़ात एक ऐसी लड़की से हुई जिसे वह चाहने लगा । बात बढ़ते -बढ़ते शादी तक आ गयी और उनकी शादी हो गयी ।

शादी के ठीक बाद आदमी को लगा कि कोई उससे कुछ कह रहा है , मुड़ कर देखा तो वो उसकी पहली पत्नी की आत्मा थी।

आत्मा बोली , “ तुमने अपना वादा तोड़ा है , अब मैं हर रोज तुम्हे परेशान करने आउंगी ।”

और इतना कह कर वो गायब हो गयी .

आदमी घबरा गया , उसे रात भर नींद नहीं आई ।

अगले दिन भी रात को उसे वही आवाज़ सुनाई दी .

“मैं तुम्हे चैन से नहीं जीने दूंगी…. मैं जानती हूँ कि आज तुमने अपनी नयी पत्नी से क्या-क्या बातें की ,..” और उसने आदमी को अक्षरश: एक -एक बात बता दी ।

आदमी डर कर कांपने लगा . अगले दिन वह शहर में विराजमान आचार्य 108 श्री वसुनंदी मुनिराज  के पास गया और सारी बात बता दी ।

गुरुदेव बोले , “ ये प्रेत बहुत चालाक है ! ”

“बिलकुल है , तभी तो मेरी एक-एक बात उसे पता होती है …”, “ आदमी घबराते हुए बोला .

गुरुदेव बोले , “ कोई बात नहीं मेरे पास इसका भी इलाज़ है . इस बार जब तुम्हारी पत्नी का भूत आये तो मैं जैसा कहता हूँ तुम ठीक वैसा ही करना .”

उस रात जब आत्मा वापस आई तो आदमी बोला , “ तुम इतनी चालाक हो …मैं तुमसे कुछ भी नहीं छिपा सकता . और जैसा कि तुम चाहती हो मैं अपनी पत्नी को छोड़ने के लिए भी तैयार हूँ पर उसके लिए तुम्हे एक प्रश्न का उत्तर देना होगा …और अगर तुम उत्तर न दे पायी तो तुम्हे हमेशा -हमेशा के लिए मेरा पीछा छोड़ना होगा …”

पत्नी का भूत बोला ,” मंजूर है …पूछो अपना प्रश्न ”

आदमी ने फ़ौरन ज़मीन पर पड़े बहुत सारे छोटे -छोटे कंकड़ अपनी मुट्ठी में भर लिए और बोला , “बताओ मेरी मुट्ठी में कितने कंकड़ हैं ?”

और ठीक उसी समय भूत गायब हो गया .

कुछ हफ़्तों बाद वो एक बार फिर से शहर में विराजमान दिगंबराचार्य 108 श्री वसुनंदी मुनिराजी   के पास उनका शुक्रिया अदा करने पहुंचा ।महाराज श्री आपके आशीर्वाद से हम धर्म करते हुए जीवन का आनंद ले रहे है।

“महाराज श्री , उस भूत से मेरा पीछा छुड़ाने के लिए मैं जीवन भर आपका आभारी रहूँगा .”, आदमी बोला , “ पर मैं ये नहीं समझ पाया की आखिर उस प्रश्न में ऐसा क्या था कि एक झटके में ही भूत गायब हो गया ?”

 महाराज श्री बोले , “ बेटा , दरअसल कोई भूत था ही नहीं ! ”

“मतलब !”, आदमी आश्चर्य से बोला .

“ हाँ , कोई भूत था ही नही , दरअसल दूसरी शादी करने की वजह से तुम्हे एक अपराधबोध महसूस हो रहा था और उसी वजह से तुम्हारा दिमाग एक भ्रम की स्थिति पैदा कर तुम्हे भूत का अनुभव करा रहा था .”, मास्टर ने समझाया .

“ पर ऐसा था तो वो मेरी हर एक बात कैसे जान जाता था ?”, आदमी ने पुछा 

महाराज श्री मुस्कुराये , “ क्योंकि वो तुम्हारा बनाया हुआ ही भूत था ,इसलिए जो कुछ तुम जानते थे वही वो भी जानता था . और यही कारण था कि मैंने तुम्हे वो कंकड़ वाला प्रश्न पूछने को कहा , क्योंकि मैं जानता था कि इसका उत्तर तुम्हे भी नहीं पता होगा और इसलिए भूत भी इसका उत्तर नहीं दे पायेगा और तुम्हे तुम्हारे दिमाग की ही उपज से छुटकारा मिल जायेगा. ”

आदमी अब पूरी बात समझ चुका था . उसने एक बार फिर महाराज श्री  को बार बार प्रणाम किया और अपने घर लौट गया ।

महान आत्माओं , कई बार हमारे मन में भी किसी पुरानी बात को लेकर एक guilt feeling रह जाती है. कहानी में भूत का आना उसी तरह की फीलिंग का एक extreme form है। पर अधिकतर मामलों में हम किसी पुरानी घटना को याद कर अफ़सोस करते हैं और कभी-कभार खुद पर क्रोधित भी हो जाते हैं। ऐसा बार-बार करना गलत है , अपने भूत की वजह से अपने भविष्य और वर्तमान को बिगाड़ने में कोई समझदारी नहीं है। इसलिए अगर आप भी किसी पुरानी घटना की वजह से अपराधबोध महसूस करते हैं तो ऐसा ना करें , गलतियां करना मनुष्य का स्वाभाव है , सभी करते हैं , आपसे भी हुई तो कोई बात नहीं….उस घटना को पीछे छोड़ें और अपने जीवन को सार्थक बनाने की दिशा में काम करें।

*🔔🤗▶️अगर आप के जीवन में भी इस प्रकार की कोई घटना घट चुकी है।जिसके कारण आप के जीवन में भी किसी प्रकार की परेशानी है तो आप बिना किसी संकोच के संस्था के व्हाट्सएप नंबर 9461956111 पर सम्पर्क करें।आपकी समस्या को हल करने में यह संस्था सहयोगी बनेगीं।*

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*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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रविवार, 17 अप्रैल 2022

जीवन की कहानी

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒जीव की आसक्ति💐💐*
एक भ्रमर सायंकाल के समय एक कमल पर बैठकर उसका रस पी रहा था।  इतने में सूर्यास्त होने को आ गया। सूर्यास्त होने पर कमल सकुचित हो जाता है।  अत: कमल बंद होने लगा, पर रसलोभी मधुप विचार करने लगा - "अभी क्या जल्दी है, रात भर आनन्द से रसपान करते रहें - रात बीतेगी, सुन्दर प्रभात होगा, सूर्यदेव उदित होंगे,  उनकी किरणों से कमल पुन: खिल उठेगा, तब मैं बाहर निकल जाऊँगा।"  वह भ्रमर इस प्रकार विचार कर ही रहा था कि हाय ! एक जंगली हाथी ने आकर कमल को डंडी समेत उखाड़कर दाँतों में दबाकर पीस डाला। यों उस कमल के साथ भ्रमर भी हाथी का ग्रास बन गया। 
  
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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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इस प्रकार पता नहीं, कालरूपी हाथी कब हमारा ग्रास कर जाये। मृत्यु आने पर एक श्वास भी अधिक नहीं मिलेगा। मृत्युकाल आने पर एक क्षण के लिए भी कोई जीवित नहीं रह सकता। उस समय कोई कहे कि 'मैंने वसीयतनामा बनाया है। कागज  तैयार है, केवल हस्ताक्षर करने बाकी हैं।  एक श्वास से अधिक मिल जाय तो मैं सही कर दूँ।' पर काल यह सब नहीं सुनता। बाध्य होकर मरना ही पड़ता है। यही है हमारे जीवन कि स्थिति। अतएव मानव-जीवन कि सफलता के लिए हमें संसार के पदार्थों से ममता उठाकर सच्चे देव - शास्त्र - गुरु में ममता करनी चाहिए। हम प्राणी-पदार्थों में ममता बढ़ाते हैं, पर यह ममता स्वार्थमूलक है। स्वार्थ में जरा धक्का लगते ही यह ममता टूट जाती है।
       
इसीलिए भगवान् श्री रामचन्द्रजी विभीषण से कहते हैं -"माता, पिता, भाई, स्त्री, शरीर, धन, सुहृद, मकान, परिवार - सब की ममता के धागों को सब जगह से बटोर लो, ममता को धागा इसलिए कहा गया है कि उसे टूटते देर नहीं लगती।  फिर उन सब की एक मजबूत डोरी बट लो। उस डोरी से अपने मन को मेरे चरणों से बांध दो। अर्थात मेरे चरण ही तुम्हारे रहे, और कुछ भी तुम्हारा न हो। सारी ममता मेरे चरणों में ही आकर केन्द्रित हो जाय। ऐसा करने से क्या होगा ? ऐसे सत्पुरुष मेरे ह्रदय में वैसे ही बसते हैं, जैसे लोभी के ह्रदय में धन। अर्थात लोभी के धन की तरह मैं उन्हें अपने ह्रदय में रखता हूँ"। 
*👨‍👩‍👧‍👦अत: संसार के प्राणीयों-पदार्थों से रागद्वेष से लिपटी ममता हटाकर एकमात्र सच्चे देव - शास्त्र - गुरु   में ममता करे। समता की नाँव मे बैठकर सम्यग्दर्शन- सम्यकज्ञान- सम्यकचारित्र रुपी खेवटिया बनकर यह जीवन सफल करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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शनिवार, 16 अप्रैल 2022

मतभेद

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒मतभेद 💐💐*
*🕉️जैनदर्शन के अनुसार सम्यग्दर्शन के आठ अंग होते है।इन आठ अंगों में उपगूहन ओर स्थितिकरण इन दो अंगों के पालन करने वाले का सम्यग्दर्शन बना रहता है।*
*👨‍👩‍👧‍👦1.उपगूहन याने (घर, परिवार, समाज व विश्व मे रहने वाला व्यक्ति विशेष)साधर्मी के दोषों को ढकना।*
 *🤗2.  स्थितिकरण  :- उसे जैनधर्म के अनुसार उसे स्थापित करना।कुछ लोग इन दोनों अंगों का पालन नहीं करते जिसके कारण वह धर्म की क्रियाओं को करने के बाद भी 84 लाख योनियों में भ्रमण करते है।*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒मतभेद 💐💐*
*🕉️जैनदर्शन के अनुसार सम्यग्दर्शन के आठ अंग होते है।इन आठ अंगों में उपगूहन ओर स्थितिकरण इन दो अंगों के पालन करने वाले का सम्यग्दर्शन बना रहता है।*
*👨‍👩‍👧‍👦1.उपगूहन याने (घर, परिवार, समाज व विश्व मे रहने वाला व्यक्ति विशेष)साधर्मी के दोषों को ढकना।*
 *🤗2.  स्थितिकरण  :- उसे जैनधर्म के अनुसार उसे स्थापित करना।कुछ लोग इन दोनों अंगों का पालन नहीं करते जिसके कारण वह धर्म की क्रियाओं को करने के बाद भी 84 लाख योनियों में भ्रमण करते है।*

✍️महाभारत काल में जब पांडव वनवास काल में थे तो अपना जीवन एक कुटियाँ में रहकर बिता रहे थे जिसके बारे में जब दुर्योधन को पता चला तो उसने पांडवों को नीचा दिखाने के लिए पूर्ण ऐशवर्य के साथ वन में जाने की सोची ताकि वो पांडवो को इर्षा से जलता देख सके |
*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कुछ धर्म के संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*
👉जब दुर्योधन वन के लिए निकला | तब उसकी रास्ते में गंधर्वराज से मुलाकात हुई | उसी वक्त दुर्योधन ने सोचा कि गंधर्वकुमार को हराकर पांडवो को अपनी ताकत का प्रमाण देना का अच्छा मौका हैं | ऐसा सोच उन्होंने गंधर्व राज पर आक्रमण कर दिया लेकिन गन्धर्व राज अत्यंत शक्तिशाली थे | उन्होंने दुर्योधन को हरा दिया और उसे बंदी बना दिया | जब इसकी सुचना पांडवो को मिली तब युधिष्ठिर ने भाईयों को आदेश दिया कि वे जाकर दुर्योधन को वापस लायें | यह सुनकर भीम ने कहा – भ्राता ! यूँ तो दुर्योधन हमारा भाई हैं लेकिन वो सदैव हमारा अहित सोचता हैं तो ऐसे में उसकी मदद क्यूँ की जाये | तब युधिष्ठिर ने उत्तर दिया – भले ! हमारा और हमारे भाईयों का बैर हैं लेकिन वो एक घर की बात हैं जिसे जग जाहिर करना गलत हैं |पारिवारिक झगड़े परिवार में ही रहे उसी में परिवार की इज्जत हैं |इसे यूँ प्रदर्शित करना पूर्वजो का अपमान हैं |बड़े भाई की आज्ञा मान पांडव गंधर्वराज से युद्ध करते हैं और दुर्योधन को छुड़ा लाते हैं |
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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*
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👉👨‍👩‍👧‍👦आज कल घर,परिवार, समाज  में झगड़े बढ़ते ही जा रहे हैं लेकिन ये आम बात हैं परन्तु इनका बखान अन्य के सामने करना गलत हैं | इससे जग हँसाई होती हैं और आपके परिवार की कमजोरी सभी के सामने उजागर होती हैं |

👉👨‍👩‍👧‍👦घर,परिवार समाज में कितना ही बैर क्यूँ ना हो लेकिन विपत्ति में हमेशा अपनों का साथ देना चाहिये |

 👩आजकल आम बात में घर परिवार समाज में मनमुटाव होना लेकिन अगर इसकी भनक दूसरों को लगती हैं तो वे आपका मजाक उड़ाते हैं | साथ ही इसका फायदा उठाकर आपको नुकसान भी पहुँचा सकते हैं |जिस तरह से अंग्रेजों ने आपसी मतभेद का फायदा उठाकर कई सालों तक हमारे देश पर राज किया |

🔔अगर आप घर,परिवार व समाज के झगड़ों की बाते अन्य के सामने करते हैं तो आपके बुजुर्गों एवम उनके संस्कारों पर लोग प्रश्नचिन्ह लगाते हैं जिससे परिवार की साख मिट्टी में मिल जाती हैं | अतः जहाँ तक कोशिश करें पारिवारिक मनमुटाव को परिवार में ही रहने दे उसका बखान कर परिवार की नींव कमज़ोर ना करें |
*👉🏿👨‍👩‍👧‍👦जिस प्रकार पाँचों पांडवों ने सम्यग्दर्शन के अंगों का पालन कर अपनी आत्मा को परमात्मा बनाया।उसी प्रकार हम भी सम्यग्दर्शन के  अंगो का पालन करते हुए दुसरों के मोक्षमार्ग मे सहयोगी बनकर अपना मोक्षमार्ग प्रशस्त करें।*
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*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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शुक्रवार, 15 अप्रैल 2022

जीवन का आनंद

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒जीवन का आनंद💐💐*

बहुत समय पहले की बात है जब सिकंदर अपने शक्ति के बल पर दुनिया भर में राज करने लगा था वह अपनी शक्ति पर इतना गुमान करने लगा था कि अब वह अमर होना चाहता था उसने पता लगाया कि कहीं ऐसा जल है जिसे पीने से व्यक्ति अमर हो सकता है

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देश-दुनिया में भटकने के बाद आखिरकार सिकंदर ने उस जगह को खोज लिया जहां पर उसे अमृत प्राप्त हो सकता था वह एक पुरानी गुफा थी जहां पर कोई आता जाता नहीं था।

देखने में वह बहुत डरावनी लग रही थी लेकिन सिकंदर ने एक जोर से सांस ली और गुफा में प्रवेश कर गया वहां पर उसने देखा कि गुफा के अंदर एक अमृत का झरना बह रहा है

उसने जल पीने के लिए हाथ ही बढ़ाया था कि एक कौवे की आवाज आई कौवा गुफा के अंदर ही बैठा था कौवा जोर से बोला ठहर रुक जा यह भूल मत करना…।

सिकंदर ने कौवे की तरफ देखा।। वह बड़ी ही दयनीय अवस्था में था, पंख झड़ गए थे, पंजे गिर गए थे, वह अंधा भी हो गया था बस कंकाल मात्र ही शेष रह गया था

सिकंदर ने कहा तू कौन होता है मुझे रोकने वाला…?

मैं पूरी दुनिया को जीत सकता हूं तो यह अमृत पीने से मुझे तो कैसे रोकता है तब कौवे ने आंखों से आंसू टपकाते हुए बोला कि मैं भी अमृत की तलाश में ही इस गुफा में आया था

और मैंने जल्दबाजी में अमृत पी लिया। अब मैं कभी मर नहीं सकता, पर अब मैं मरना चाहता हूं लेकिन मर नहीं सकता।
देख लो मेरी हालत।। कौवे की बात सुनकर सिकंदर देर तक सोचता रहा सोचने के बाद फिर बीना अमृत पीए ही चुपचाप गुफा से बाहर वापस लौट आया।

सिकंदर समझ चुका था कि जीवन का आनंद उस समय तक ही रहता है जब तक हम उस आनंद को भोगने की स्थिति में होते है

*महान आत्माओं" जीवन में हमें हमेशा खुश रहना चाहिए हमें कभी भी खुश रहने के लिए बड़ी सफलता या समय का इंतजार नहीं करना चाहिए क्योंकि समय के साथ हम बूढ़े होते जाते हैं और फिर अपने जीवन का असली आनंद नहीं उठा पाते है।इसलिये हमें अपने कर्तव्यों को ध्यान में रखकर समय के अनुसार अपनी योग्यता अनुसार कार्य करना चाहिए।*

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गुरुवार, 14 अप्रैल 2022

तीन सवाल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒तीन सवाल💐💐*
    *🤗एक बार एक राजा था। एक दिन वह बड़ा प्रसन्न मुद्रा में था सो अपने वज़ीर के पास गया और कहा कि तुम्हारी जिंदगी की सबसे बड़ी ख़्वाहिश क्या हैं ? वज़ीर शरमा गया और नज़रे नीचे करके बैठ गया। राजा ने कहा तुम घबराओ मत तुम अपनी सबसे बड़ी ख़्वाहिश बताओ।* 
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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*
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वज़ीर ने राजा से कहा हुज़ूर आप इतनी बड़ी सल्लतनत के मालिक हैं और जब भी मैं यह देखता हूँ तो मेरे दिल में ये चाह जाग्रत होती हैं कि काश मेरे पास इस सल्लतनत का यदि दसवां हिस्सा होता तो मैं इस दुनिया का बड़ा खुशनसीब इंसान होता। ये कह कर वज़ीर खामोश हो गया। राजा ने कहा कि यदि मैं तुम्हें अपनी आधी जायदाद दे दूँ तो।
    वज़ीर घबरा गया और नज़रे ऊपर करके राजा से कहा कि हुज़ूर ये कैसे मुनकिन हैं? मैं इतना खुशनसीब इंसान कैसे हो सकता हूँ। राजा ने दरबार में आधी सल्लतनत के कागज तैयार करने का फरमान जारी करवाया और साथ के साथ वज़ीर की गर्दन धड़ से अलग करने का ऐलान भी करवाया। ये सुनकर वज़ीर बहुत घबरा गया। राजा ने वज़ीर की आँखों में आँखे डालकर कहा तुम्हारे पास तीस दिन हैं, इन तीस दिनों में तुम्हें मेरे तीन सवालों के जवाब पेश करना हैं।
    यदि तुम कामयाब हो जाओगे तो मेरी आधी संपति तुम्हारी हो जायेगी और यदि तुम मेरे तीन सवालों के जवाब तीस दिन के भीतर न दे पाये तो मेरे सिपाही तुम्हारा सिर धड़ से अलग कर देंगे। वज़ीर ओर ज्यादा परेशान हो गया। राजा ने कहा मेरे तीन सवाल लिख लो, वज़ीर ने लिखना शुरु किया। राजा ने कहा....
    1) इंसान की जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई क्या हैं?
    2) इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा धोखा क्या हैं?
    3) इंसान की जिंदगी की सबसे बड़ी कमजोरी क्या हैं?
    राजा ने तीनों सवाल समाप्त करके कहा तुम्हारा समय अब शुरु होता हैं। वज़ीर अपने तीन सवालों वाला कागज लेकर दरबार से रवाना हुआ और हर संतो-महात्माओं, साधु-फक़ीरों के पास जाकर उन सवालों के जवाब पूछने लगा। मगर किसी के भी जवाबों से वह संतुष्ट न हुआ। धीरे-धीरे दिन गुजरते हुए जा रहे थे।
    अब उसके दिन-रात उन तीन सवालों को लिए हुए ही गुजर रहे थे। हर एक-एक गाँवों में जाने से उसके पहने लिबास फट चुके थे और जूते के तलवे भी फटने के कारण उसके पैर में छाले पड़ गये थे। अंत में शर्त का एक दिन शेष रहा, वजीर हार चुका था तथा वह जानता था कि कल दरबार में उसका सिर धड़ से कलम कर दिया जायेगा और ये सोचता-सोचता वह एक छोटे से गांव में जा पहुँचा। वहाँ एक छोटी सी कुटिया में एक फक़ीर अपनी मौज में बैठा हुआ था और उसका एक कुत्ता दूध के प्याले में रखा दूध बड़े ही चाव से जीभ से जोर-जोर से आवाज़ करके पी रहा था।
    वज़ीर ने झोपड़ी के अंदर झाँका तो देखा कि फक़ीर अपनी मौज में बैठकर सुखी रोटी पानी में भिगोकर खा रहा था। जब फक़ीर की नजर वज़ीर की फटी हालत पर पड़ी तो वज़ीर से कहा कि जनाबेआली आप सही जगह पहुँच गये हैं और मैं आपके तीनों सवालों के जवाब भी दे सकता हूँ। वज़ीर हैरान होकर पूछने लगा आपने कैसे अंदाजा लगाया कि मैं कौन हूँ और मेरे तीन सवाल हैं? फक़ीर ने सूखी रोटी कटोरे में रखी और अपना बिस्तरा उठा कर खड़ा हुआ और वज़ीर से कहा साहिब अब आप समझ जायेंगे।
फक़ीर ने झुक कर देखा कि उसका लिबास हू ब हू वैसा ही था जैसा राजा उस वज़ीर को भेंट दिया करता था। फक़ीर ने वज़ीर से कहा मैं भी उस दरबार का वज़ीर हुआ करता था और राजा से शर्त लगा कर गलती कर बैठा। अब इसका नतीजा तुम्हारे सामने हैं। फक़ीर फिर से बैठा और सूखी रोटी पानी में डूबो कर खाने लगा। वज़ीर निराश मन से फक़ीर से पूछने लगा क्या आप भी राजा के सवालों के जवाब नहीं दे पाये थे।
    फक़ीर ने कहा कि नहीं मेरा केस तुम से अलग था। मैने राजा के सवालों के जवाब भी दिये और आधी सल्लतनत के कागज को वहीं फाड़कर इस कुटिया में मेरे कुत्ते के साथ रहने लगा। वज़ीर ओर ज्यादा हैरान हो गया और पूछा क्या तुम मेरे सवाल के जवाब दे सकते हो? फक़ीर ने हाँ में सिर हिलाया और कहा मैं आपके दो सवाल के जवाब मुफ्त में दूँगा मगर तीसरे सवाल के जवाब में आपको उसकी कीमत अदा करनी पड़ेगी।
    अब फक़ीर ने सोचा यदि बादशाह के सवालों के जवाब न दिये तो राजा मेरे सिर को धड़ से अलग करा देगा इसलिए उसने बिना कुछ सोचे समझे फक़ीर की शर्त मान ली। 
*फक़ीर ने कहा तुम्हारे पहले सवाल का जवाब हैं "मौत"। इंसान के जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई मौत हैं। मौत अटल हैं और ये अमीर-गरीब, राजा-फक़ीर किसी को नहीं देखती हैं। मौत निश्चित हैं।*
*👉🏿 अब तुम्हारे दूसरे सवाल का जवाब हैं "जिंदगी"। इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा धोखा हैं जिंदगी। इंसान जिंदगी में झूठ-फरेब और बुरे कर्मं करके इसके धोखे में आ जाता हैं।*
    *अब आगे फक़ीर चुप हो गया। वज़ीर ने फक़ीर के वायदे के मुताबिक शर्त पूछी, तो फक़ीर ने वज़ीर से कहा कि तुम्हें मेरे कुत्ते के प्याले का झूठा दूध पीना होगा। वज़ीर असमंजस में पड़ गया और कुत्ते के प्याले का झूठा दूध पीने से इंकार कर दिया। मगर फिर राजा द्वारा रखी शर्त के अनुसार सिर धड़ से अलग करने का सोचकर बिना कुछ सोचे समझे कुत्ते के प्याले का झूठा दूध बिना रुके एक ही सांस में पी गया।* 

*फक़ीर ने जवाब दिया कि यही तुम्हारे तीसरे सवाल का जवाब हैं "गरज"। इंसान की जिंदगी की सबसे बड़ी कमजोरी हैं "गरज"। गरज इंसान को न चाहते हुए भी वह काम कराती हैं जो इंसान कभी नहीं करना चाहता हैं। जैसे तुम! तुम भी अपनी मौत से बचने के लिए और तीसरे सवाल का जवाब जानने के लिए एक कुत्ते के प्याले का झूठा दूध पी गये। गरज इंसान से सब कुछ करा देती हैं। मगर अब वज़ीर बहुत प्रसन्न था क्योंकि उसके तीनों सवालों के  जवाब उसे मिल गये थे।*

 वज़ीर ने फक़ीर को शुक्रियाअदा किया और महल की ओर रवाना हो गया। जैसे ही वज़ीर महल के दरवाजे पर पहुँचा उसे एक हिचकी आई और उसने वहीं अपना शरीर त्याग दिया। उसको मौत ने अपने आगोश में ले लिया।
    अब हम भी विचार करें कि क्या कहीं हम भी तो जिंदगी की सच्चाई को भूले तो नहीं बैठे हैं? जी हाँ जिंदगी की सच्चाई ये मौत। ये मौत न छोटा देखती हैं न बड़ा, न सेठ साहूकार देखती हैं। ये तो न जाने कब किस को अपने आगोश में ले ले कुछ कहा नहीं जा सकता। क्योंकि ये अटल सत्य हैं और ये हर एक को आनी हैं। क्या हम जिंदगी के धोखे में तो नहीं आ पड़े हैं? हाँ जी बिल्कुल! हम धोखे में ही आये हुए हैं। हम जिंदगी को ऐसे जीते हैं जैसे ये जिंदगी कभी खत्म न होगी। हम जिंदगी में हर रोज नये-नये कर्मों का निर्माण करते हैं। इन कर्मों में कुछ अच्छे होते हैं तो कुछ बुरे। हम जिंदगी के धोखे में ऐसे फंसे हुए हैं कभी भूल से भी भगवान को याद  नहीं करते हैं, कभी सच्चे दिल से मालिक का भजन सिमरन नहीं करते हैं। बस जिंदगी को काटे जा रहे हैं। क्या हम भी तो जिंदगी की कमजोरी के शिकार तो नहीं बने बैठे हैं? जी हाँ, हम सभी गरज के तले दबे हुए हैं। कोई अपने परिवार को पालने की गरज में झूठ-फरेब की राह पर चलने लगता हैं तो कोई चोरी और लूटपाट। हम सभी गरज की दलदल में फंसे हुए हैं।
    *हमें भी चाहिए कि जिंदगी की सच्चाई मौत को ध्यान में रखते हुए, जिंदगी की झूठ में न फंसे। क्योंकि जितना हम जिंदगी की सच्चाई से मुख मोड़ेगें उतना ही हम धोखे का शिकार होते जायेंगे। अत: जिससे हम जीवन भर जिंदगी की कमजोरी गरज के दलदल में ही फंसे रहे और बाहर ही न निकल सकें। इसलिए समय रहते हुए मालिक का भजन सिमरन करते रहे और मालिक को याद करते हुए उनका शुक्रियाअदा करते रहें। क्योंकि न जाने कब मालिक का फरमान आ जाए। इसलिए सतगुरु द्वारा बताए गए सद्मार्ग पर चलें । और मालिक में ही समा जाए ।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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बुधवार, 13 अप्रैल 2022

हमारा प्रयास

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒हमारा  प्रयास 💐💐*
*🔔🙏आज चैत्र शुक्ल त्रयोदशी 14 अप्रैल 2022 इस भरत क्षेत्र के शासन नायक 1008 श्री महावीर स्वामी का 2021वाँ जन्म कल्याणक महा महोत्सव है।आप सभी अपनी शक्तिनुसार इसका लाभ ले।🙏🔔*
*👨‍👩‍👧‍👦महान आत्माओं, क्या आप जीवन मे लक्ष्य प्राप्त करने में असफल हो, कोई बात नहीं अब आप इस कहानी के माध्यम से अपनी दृढता को मजबूत करते हुए योगध्यान,भगवान की भक्ति व अपने सात्विक आहार के माध्यम से सफलता को प्राप्त करें।*

👉🏿एक समय की बात है। एक राज्य में एक प्रतापी राजा राज करता था। एक दिन उसके दरबार में एक विदेशी आगंतुक आया और उसने राजा को एक सुंदर पत्थर उपहार स्वरूप प्रदान किया।

राजा वह पत्थर देख बहुत प्रसन्न हुआ। उसने उस पत्थर से भगवान  की प्रतिमा का निर्माण कर उसे राज्य के मुख्य चैत्यालय मंदिर में स्थापित करने का निर्णय लिया और प्रतिमा निर्माण का कार्य राज्य के महामंत्री को सौंप दिया।

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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महामंत्री गाँव के सर्वश्रेष्ठ मूर्तिकार के पास गया और उसे वह पत्थर देते हुए बोला, “महाराज मंदिर में भगवान  की प्रतिमा स्थापित करना चाहते हैं। सात दिवस के भीतर इस पत्थर से भगवान  की प्रतिमा तैयार कर राजमहल पहुँचा देना। इसके लिए तुम्हें 500 स्वर्ण मुद्रायें दी जायेंगी।”

500 स्वर्ण मुद्राओं की बात सुनकर मूर्तिकार ख़ुश हो गया और महामंत्री के जाने के उपरांत प्रतिमा का निर्माण कार्य प्रारंभ करने के उद्देश्य से अपने औज़ार निकाल लिए। अपने औज़ारों में से उसने एक हथौड़ा लिया और पत्थर तोड़ने के लिए उस पर हथौड़े से वार करने लगा। किंतु पत्थर जस का तस रहा। मूर्तिकार ने हथौड़े के कई वार पत्थर पर किये। किंतु पत्थर नहीं टूटा।

कई बार प्रयास करने के उपरांत मूर्तिकार ने अंतिम बार प्रयास करने के उद्देश्य से हथौड़ा उठाया, किंतु यह सोचकर हथौड़े पर प्रहार करने के पूर्व ही उसने हाथ खींच लिया कि जब बार- बार वार करने से पत्थर नहीं टूटा, तो अब क्या टूटेगा।

वह पत्थर लेकर वापस महामंत्री के पास गया और उसे यह कह वापस कर आया कि इस पत्थर को तोड़ना नामुमकिन है। इसलिए इससे भगवान  की प्रतिमा नहीं बन सकती।

महामंत्री को राजा का आदेश हर स्थिति में पूर्ण करना था। इसलिए उसने भगवान  की प्रतिमा निर्मित करने का कार्य गाँव के एक साधारण से मूर्तिकार को सौंप दिया।
पत्थर लेकर मूर्तिकार ने महामंत्री के सामने ही उस पत्थर की पूजा की ओर अपने गुरु का स्मरण करते हुए कुछ मन में दृढता पूर्वक सभी औजारों के साथ वह शुभ कार्य मे लग गया।
उस पर श्रद्धा पूर्वक हथौड़े से प्रहार किया और वह पत्थर उसके प्रयास से  टूट गया।

पत्थर टूटने के बाद मूर्तिकार प्रतिमा बनाने में जुट गया। इधर महामंत्री सोचने लगा कि काश, पहले मूर्तिकार ने एक अंतिम प्रयास और किया होता, तो सफ़ल हो गया होता और 500 स्वर्ण मुद्राओं का हक़दार बनता।

*💐💐सीख💐💐*
*🔔महान आत्माओं, हम भी अपने जीवन में ऐसी परिस्थितियों से दो-चार होते रहते हैं। कई बार किसी कार्य को करने के पूर्व या किसी समस्या के सामने आने पर उसका निराकरण करने के पूर्व ही हमारा आत्मविश्वास डगमगा जाता है और हम प्रयास किये बिना ही हार मान लेते हैं। कई बार हम एक-दो प्रयास में असफलता मिलने पर आगे प्रयास करना छोड़ देते हैं। जबकि हो सकता है कि कुछ प्रयास और करने पर कार्य पूर्ण हो जाता या समस्या का समाधान हो जाता। यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है, तो बार-बार असफ़ल होने पर भी तब तक प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिये, जब तक सफ़लता नहीं मिल जाती। क्या पता, जिस प्रयास को करने के पूर्व हम हाथ खींच ले, वही हमारा अंतिम प्रयास हो और उसमें हमें कामयाबी प्राप्त हो जाये।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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