शनिवार, 30 अप्रैल 2022

रसना इंद्रीय के कारण

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒रसना इंद्रिय के कारण💐💐*
🔔⬇️ *अग्रिम सूचना*⬇️🔔
*🤗वैशाख शुक्ल एकम को सत्रवे तीर्थंकर कुंथुनाथ भगवान का जन्म तप व मोक्षकल्याणक महोत्सव 31 अप्रैल 2022 रविवार को है । 👉🏿👨‍👩‍👧‍👦आपसभी इस  शुभ महोत्सव  का सपरिवार इष्टमित्रों सहित लाभ उठायें ।*

*😇उत्तरकाशी के एक एकांत स्थान पर ,एक वयोवृद्ध स्वामीजी रहते थे।वो तपस्वी महात्मा , वर्षों से कई कई घंटे समाधिस्थ रहते थे,किसी से बात नहीं करते थे। हमेशा मौन रहकर,साधुओं और ब्रह्मचरियों द्वारा चलाए जाने वाले क्षेत्र से ही भिक्षा लेकर जीवन यापन करते थे।*
 साधुओं ,ग्रहस्थों ,विद्यार्थियों ,दुकानदारों …. सबके मन में उनके लिए आदर सम्मान था। वो एक छोटी सी कुटिया में रहते थे और कपड़ों के नाम पर उनके पास केवल दो अंगोंछे और दो लंगोटियाँ थीं,एक भिक्षा पात्र और पानी के लिए कमण्डल। सच्चे आदर्श महात्मा थे वो ,कभी होटलों या मिठाई की दुकान से कुछ भी नहीं लेते थे वो। 
⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️
एक बार दिवाली का दिन था। 
यूँ तो सम्पूर्ण उत्तरकाशी जगमगा रही थी। किंतु इकलोती मिठाई की दुकान सबसे ज़्यादा सजी हुई थी। और तरह तरह की मिठाइयाँ बनी थीं। जलेबियों और मैसूरपाक के पर्वत बना कर सजा दिए गए थे। शाम का समय हुआ तो दुकान पर ग्राहक टूट पड़े थे। ऐसे में दुकान मलिक के तीन बेटे और नौकर चाकर सब मिल कर काम सम्भालने में लगे थे। 
आज तो ये स्वामीजी भी जलेबियों के ढेर के पास एक कोने में खड़े थे। दुकानदार ने स्वामीजी को सादर दुकान के अंदर बिठाया और स्वामी जी से उनकी मनपसंद मिठाई खाने के लिए बार बार आग्रह करने लगा। स्वामीजी ने नम्रता के साथ मना कर दिया। 
थोड़ी देर बात दुकान पर उपस्थित सब लोग बड़े अचंभित हो रहे थे कि -स्वामीजी विक्रय के लिए रखे जलेबियों के ढेर को ऊपर से लेकर नीचे तक चाट रहे थे। 
सब जलेबियाँ झूठी हो गईं ,अब कौन ख़रीदेगा इन्हें?
दुकानदार के सभी बेटे ग़ुस्से में स्वामी जी की तरफ़ बढ़े और उनकी बहुत पिटाई कर दी ,शरीर से खून बहने लगा। बहुत चोट लगीं। जैसे तैसे वे अपनी कुटिया पर पहुँचे ।
अगले तीन दिनों तक वे कष्ट सहते रहे और भगवान का जप करते रहे मुस्कुराते हुए। 
स्वामी के नज़दीक की कुटिया में रहने वाले एक अन्य साधु चौथे दिन उनके लिए चाय पानी और दवा मलहम लेकर आए 
सेवा पूरी होने के बाद उन्होंने पूछा -स्वामीजी आपने ये अविश्वसनीय कार्य क्यों किया कृपया बताएँ ?
स्वामी बोले -
सारा जीवन मैंने नियम संयम अपनाया ,राग द्वेष वासना कामना कुछ भी ना रह गई। 
लेकिन बचपन से मेरे मन में जलेबियों की तृष्णा रही ,खूब कोशिश की पर इससे छूट ना सका। 
मन को हर तरह से समझाया पर ये ना माना। 
थक हार कर मैंने इसे ये कठोर सीख देने का निर्णय किया। ताकि इसे शेष जीवन में ठीक से याद रहे ,मैंने जानबुझ कर सभी जलेबियों को चाँटा ताकि मेरी जम कर पिटाई हो। 
सो अब यह मन जलेबी के नाम से भी कंपने लगता है  
न जयेत रसनम यावत
   जितं सर्वं जितें रसे।।
🔔👨‍👩‍👧‍👦👉 *महानआत्माओं हमसभी पाँचों इंद्रियों के वर्तमान में गुलाम बने हुए है।विश्व का कोई भी जीव पाँचों इंद्रियों मे से कोई भी एक इंद्रिय मे आशक्ति रखने से दुर्गति का पात्र होरहा है।इसलिए हम सभी को चौबीस घंटे में कम से कम रात्रि विश्राम के पहले थोड़ा विचार करना चाहिए कि हमारा क्या होगा ?।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें