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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩🚒पत्नी का भूत💐💐*
*एक आदमी की पत्नी अचानक से बहुत बीमार पड़ गयी . मरने से पहले उसने अपने पति से कहा , “ मैं तुम्हे बहुत प्यार करती हूँ …. तुम्हे छोड़ कर नहीं जाना चाहती… मैं नहीं चाहती की मेरे जाने के बाद तुम मुझे भुला दो और किसी दूसरी औरत से शादी करो … वादा करो कि मेरे मरने के बाद तुम किसी और से प्रेम नहीं करोगे …वर्ना मेरी आत्मा तुम्हे चैन से जीने नहीं देगी और इतना कह कर वो चल बसी ।*
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उसके जाने के कुछ महीनो तक उस आदमी ने किसी दूसरी औरत की तरफ देखा तक नहीं पर एक दिन उसकी मुलाक़ात एक ऐसी लड़की से हुई जिसे वह चाहने लगा । बात बढ़ते -बढ़ते शादी तक आ गयी और उनकी शादी हो गयी ।
शादी के ठीक बाद आदमी को लगा कि कोई उससे कुछ कह रहा है , मुड़ कर देखा तो वो उसकी पहली पत्नी की आत्मा थी।
आत्मा बोली , “ तुमने अपना वादा तोड़ा है , अब मैं हर रोज तुम्हे परेशान करने आउंगी ।”
और इतना कह कर वो गायब हो गयी .
आदमी घबरा गया , उसे रात भर नींद नहीं आई ।
अगले दिन भी रात को उसे वही आवाज़ सुनाई दी .
“मैं तुम्हे चैन से नहीं जीने दूंगी…. मैं जानती हूँ कि आज तुमने अपनी नयी पत्नी से क्या-क्या बातें की ,..” और उसने आदमी को अक्षरश: एक -एक बात बता दी ।
आदमी डर कर कांपने लगा . अगले दिन वह शहर में विराजमान आचार्य 108 श्री वसुनंदी मुनिराज के पास गया और सारी बात बता दी ।
गुरुदेव बोले , “ ये प्रेत बहुत चालाक है ! ”
“बिलकुल है , तभी तो मेरी एक-एक बात उसे पता होती है …”, “ आदमी घबराते हुए बोला .
गुरुदेव बोले , “ कोई बात नहीं मेरे पास इसका भी इलाज़ है . इस बार जब तुम्हारी पत्नी का भूत आये तो मैं जैसा कहता हूँ तुम ठीक वैसा ही करना .”
उस रात जब आत्मा वापस आई तो आदमी बोला , “ तुम इतनी चालाक हो …मैं तुमसे कुछ भी नहीं छिपा सकता . और जैसा कि तुम चाहती हो मैं अपनी पत्नी को छोड़ने के लिए भी तैयार हूँ पर उसके लिए तुम्हे एक प्रश्न का उत्तर देना होगा …और अगर तुम उत्तर न दे पायी तो तुम्हे हमेशा -हमेशा के लिए मेरा पीछा छोड़ना होगा …”
पत्नी का भूत बोला ,” मंजूर है …पूछो अपना प्रश्न ”
आदमी ने फ़ौरन ज़मीन पर पड़े बहुत सारे छोटे -छोटे कंकड़ अपनी मुट्ठी में भर लिए और बोला , “बताओ मेरी मुट्ठी में कितने कंकड़ हैं ?”
और ठीक उसी समय भूत गायब हो गया .
कुछ हफ़्तों बाद वो एक बार फिर से शहर में विराजमान दिगंबराचार्य 108 श्री वसुनंदी मुनिराजी के पास उनका शुक्रिया अदा करने पहुंचा ।महाराज श्री आपके आशीर्वाद से हम धर्म करते हुए जीवन का आनंद ले रहे है।
“महाराज श्री , उस भूत से मेरा पीछा छुड़ाने के लिए मैं जीवन भर आपका आभारी रहूँगा .”, आदमी बोला , “ पर मैं ये नहीं समझ पाया की आखिर उस प्रश्न में ऐसा क्या था कि एक झटके में ही भूत गायब हो गया ?”
महाराज श्री बोले , “ बेटा , दरअसल कोई भूत था ही नहीं ! ”
“मतलब !”, आदमी आश्चर्य से बोला .
“ हाँ , कोई भूत था ही नही , दरअसल दूसरी शादी करने की वजह से तुम्हे एक अपराधबोध महसूस हो रहा था और उसी वजह से तुम्हारा दिमाग एक भ्रम की स्थिति पैदा कर तुम्हे भूत का अनुभव करा रहा था .”, मास्टर ने समझाया .
“ पर ऐसा था तो वो मेरी हर एक बात कैसे जान जाता था ?”, आदमी ने पुछा
महाराज श्री मुस्कुराये , “ क्योंकि वो तुम्हारा बनाया हुआ ही भूत था ,इसलिए जो कुछ तुम जानते थे वही वो भी जानता था . और यही कारण था कि मैंने तुम्हे वो कंकड़ वाला प्रश्न पूछने को कहा , क्योंकि मैं जानता था कि इसका उत्तर तुम्हे भी नहीं पता होगा और इसलिए भूत भी इसका उत्तर नहीं दे पायेगा और तुम्हे तुम्हारे दिमाग की ही उपज से छुटकारा मिल जायेगा. ”
आदमी अब पूरी बात समझ चुका था . उसने एक बार फिर महाराज श्री को बार बार प्रणाम किया और अपने घर लौट गया ।
महान आत्माओं , कई बार हमारे मन में भी किसी पुरानी बात को लेकर एक guilt feeling रह जाती है. कहानी में भूत का आना उसी तरह की फीलिंग का एक extreme form है। पर अधिकतर मामलों में हम किसी पुरानी घटना को याद कर अफ़सोस करते हैं और कभी-कभार खुद पर क्रोधित भी हो जाते हैं। ऐसा बार-बार करना गलत है , अपने भूत की वजह से अपने भविष्य और वर्तमान को बिगाड़ने में कोई समझदारी नहीं है। इसलिए अगर आप भी किसी पुरानी घटना की वजह से अपराधबोध महसूस करते हैं तो ऐसा ना करें , गलतियां करना मनुष्य का स्वाभाव है , सभी करते हैं , आपसे भी हुई तो कोई बात नहीं….उस घटना को पीछे छोड़ें और अपने जीवन को सार्थक बनाने की दिशा में काम करें।
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*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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