मंगलवार, 19 अप्रैल 2022

सत्य से सीखते रहो

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒 सत्य से सीखते रहो💐💐*
*🔔एक बार गाँव के दो व्यक्तियों ने जयपुर शहर जाकर पैसे कमाने का निर्णय लिया। शहर जाकर कुछ महीने इधर-उधर छोटा-मोटा काम कर दोनों ने कुछ पैसे जमा किये। फिर उन पैसों से अपना-अपना व्यवसाय प्रारंभ किया। दोनों का व्यवसाय चल पड़ा। दो साल में ही दोनों ने अच्छी ख़ासी तरक्की कर ली। व्यवसाय को फलता-फूलता देख पहले व्यक्ति ने सोचा कि अब तो मेरे काम चल पड़ा है। अब तो मैं तरक्की की सीढ़ियाँ चढ़ता चला जाऊंगा। लेकिन उसकी सोच के विपरीत व्यापारिक उतार-चढ़ाव के कारण उसे उस साल अत्यधिक घाटा हुआ।*

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*🎂अब तक आसमान में उड़ रहा वह व्यक्ति यथार्थ के धरातल पर आ गिरा। वह उन कारणों को तलाशने लगा, जिनकी वजह से उसका व्यापार बाज़ार की मार नहीं सह पाया। सबसे पहले उसने उस दूसरे व्यक्ति के व्यवसाय की स्थिति का पता लगाया, जिसने उसके साथ ही व्यापार आरंभ किया था। वह यह जानकर हैरान रह गया कि इस उतार-चढ़ाव और मंदी के दौर में भी उसका व्यवसाय मुनाफ़े में है। उसने तुरंत उसके पास जाकर इसका कारण जानने का निर्णय लिया। अगले ही दिन वह दूसरे व्यक्ति के पास पहुँचा।*

*☺️दूसरे व्यक्ति ने उसका खूब आदर-सत्कार किया और उसके आने का कारण पूछा। तब पहला व्यक्ति बोला, “दोस्त! इस वर्ष मेरा व्यवसाय बाज़ार की मार नहीं झेल पाया। बहुत घाटा झेलना पड़ा। तुम भी तो इसी व्यवसाय में हो। तुमने ऐसा क्या किया कि इस उतार-चढ़ाव के दौर में भी तुमने मुनाफ़ा कमाया?” यह बात सुन दूसरा व्यक्ति बोला, “भाई! मैं तो बस सीखता जा रहा हूँ, अपनी गलती से भी और साथ ही दूसरों की गलतियों से भी। जो समस्या सामने आती है, उसमें से भी सीख लेता हूँ। इसलिए जब दोबारा वैसी समस्या सामने आती है। तो उसका सामना अच्छे से कर पाता हूँ और उसके कारण मुझे नुकसान नहीं उठाना पड़ता। बस ये सीखने की प्रवृत्ति ही है, जो मुझे जीवन में आगे बढ़ाती जा रही है।”* 
*🤗🙏🤗हाँ मै अजैन हूँ किंतु मुझे एक जैन सेठजी से शिक्षा मिली कि अहिंसक वस्तुओं का व्यापार करो।कम मुनाफे में मेरे ज्यादा ग्राहक बनने से मुझे अत्यधिक लाभ हुआ।वे एक दिन मुझे दिंगबर संत केपास ले गये।उन्होंने उपदेश दिया कि अपनी आमदनी का 17% धर्म कार्य में खर्च करना चाहिए।उनके उपदेश से मैंने अपनी आमदनी का दस प्रतिशत दान सेठजी को दिया ओर सेठजी से कहा आप इस पैसे को जैनधर्म के कार्यों में गुप्तदान कर देना।बस उसी समय से मेरा व्यापार प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।मुनिराज के उपदेशों से मै अब सात्विक भोजन करता हूँ।मुझे कोई भी व्यसन नहीं है।मैंने आलू ,प्याज लहसुन व जमीकंद जो पाँच इंद्रियों की इच्छाओं को जागृत करती है, उनका त्याग कर दिया है।अब जैनमंदिर के नित्य दर्शन करता हूँ।अन्य देवी-देवताओं के सामने अपना माथा नहीं झुकाता।बस यही मेरी सफलता का रहस्य है।*
 
*▶️दूसरे व्यक्ति की बात सुनकर पहले व्यक्ति को अपनी भूल का अहसास हुआ। सफ़लता के मद में वो अति-आत्मविश्वास से भर उठा था और सीखना छोड़ दिया था। वह यह प्रण कर वापस लौटा कि कभी सीखना नहीं छोड़ेगा।उसने यूट्यूब वीडियो से जैनदर्शन की जानकारी ली।【 जैनधर्म का प्राथमिक ज्ञान , जैनज्ञानशाला,जैनपाठशाला यह विडीयों देखकर जीवन का रहस्य समझा】। उसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और तरक्की की सीढ़ियाँ चढ़ता चला गया।*

*शिक्षा:-*
*भव्यआत्माओं , जीवन में कामयाब होना है, तो इसे पाठशाला मान हर पल सीखते रहिये। यहाँ नित नए परिवर्तन और नए विकास होते रहते हैं। यदि हम स्वयं को सर्वज्ञाता समझने की भूल करेंगे, तो जीवन की दौड़ में पिछड़ जायेंगे। क्योंकि इस दौड़ में जीतता वही है, जो लगातार सत्य के सहारे दौड़ता रहता है जिसने दौड़ना छोड़ दिया, उसकी हार निश्चित है। इसलिए सीखने की ललक खुद में बनाये रखें, फिर कोई बदलाव, कोई उतार-चढ़ाव आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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