बुधवार, 31 अगस्त 2022

जल्दबाज़ी ना करें

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒जल्दबाजी न करें 👨‍👩‍👧‍👦🔔*

सुंदरबन इलाके में रहने वाले ग्रामीणों पर हर समय जंगली जानवरों का खतरा बना रहता था। खासतौर पर जो युवक घने जंगलों में लकड़ियाँ चुनने जाते थे उनपर कभी भी बाघ हमला कर सकते थे । यही वजह थी की वे सब पेड़ों पर तेजी से चढ़ने-उतरने का प्रशिक्षण लिया करते थे .प्रशिक्षण, गाँव के ही एक बुजुर्ग दिया करते थे ; जो अपने समय में इस कला के महारथी माने जाते थे । आदरपूर्वक सब उन्हें बाबा-बाबा कह कर पुकारा करते थे ।

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्षमार्ग को सुरक्षित करें ।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

बाबा कुछ महीनो से युवाओं के एक समूह को पेड़ों पर तेजी से चढ़ने-उतरने की बारीकियां सिखा रहे थे और आज उनके प्रशिक्षण का आखिरी दिन था ।

बाबा बोले , ” आज आपके प्रशिक्षण का आखिरी दिन है , मैं चाहता हूँ , आप सब एक -एक बार इस चिकने और लम्बे पेड़ पर तेजी से चढ़ – उतर  कर दिखाएँ ।”

सभी युवक अपना कौशल दिखाने के लिए तैयार हो गए ।

पहले युवक ने तेजी से पेड़ पर चढ़ना शुरू किया और देखते -देखते पेड़ की सबसे ऊँची शाखा पर पहुँच गया . फिर उसने उतरना शुरू किया , और जब वो लगभग आधा उतर आया तो बाबा बोले , “सावधान , ज़रा संभल कर। … आराम से उतरो …क़ोइ जल्दबाजी नहीं….”

युवक सावधानी पूर्वक नीचे उतर आया ।

इसी तरह बाकी के युवक भी पेड़ पर चढ़े और उतरे , और हर बार बाबा ने आधा उतर आने के बाद ही उन्हें सावधान रहने को कहा ।

यह बात युवकों को कुछ अजीब लगी , और उन्ही में से एक ने पुछा , ” बाबा , हमें आपकी एक बात समझ में नहीं आई , पेड़ का सबसे कठिन हिस्सा तो एकदम  ऊपर वाला था , जहाँ पे चढ़ना और उतरना दोनों ही बहुत कठिन था , आपने तब हमें सावधान होने के लिए नहीं कहा , पर जब हम पेड़ का आधा हिस्सा उतर आये और बाकी हिस्सा उतरना बिलकुल आसान था तभी आपने  हमें सावधान होने के निर्देश क्यों दिए ? “

बाबा गंभीर होते हुए बोले , ““ बेटे ! यह तो हम सब जानते हैं कि ऊपर का हिस्सा सबसे कठिन होता  है , इसलिए वहां पर  हम सब खुद  ही सतर्क हो जाते हैं और पूरी सावधानी बरतते हैं. लेकिन जब हम अपने लक्ष्य के समीप पहुँचने लगते हैं तो वह हमें बहुत ही सरल लगने लगता है…. हम जोश में होते हैं और अति आत्मविश्वास से भर जाते हैं और इसी समय सबसे अधिक गलती होने की सम्भावना होती है । यही कारण है कि मैंने तुम लोगों को आधा पेड़ उतर आने के बाद सावधान किया ताकि तुम अपनी मंजिल के निकट आकर कोई गलती न कर बैठो ! “

युवक बाबा की बात समझ गए, आज उन्हें एक बहुत बड़ी सीख मिल चुकी थी .

*👨‍👩‍👧‍👦ग्रहण करने योग्य🔔*
*🔔👨‍👩‍👧‍👦🔑➡️भव्य आत्माओं, सफल होने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना बहुत ही जरूरी है, और ये भी बहुत ज़रूरी है कि जब हम अपने लक्ष्य को हासिल करने के करीब पहुँच जाएँ, मंजिल को सामने पायें तो कोई जल्दबाजी न करें और पूरे धैर्य के साथ अपना कदम आगे बढ़ाएं। बहुत से लोग लक्ष्य के  निकट पहुंच कर अपना धैर्य खो देते हैं और गलतियां कर बैठते हैं जिस कारण वे अपने लक्ष्य से चूक जाते हैं। इसलिए लक्ष्य के आखिरी पड़ाव पर पहुँच कर भी किसी तरह की असावधानी मत बरतिए और लक्ष्य प्राप्त कर के ही दम लीजिये ।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए पूर्वोपार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्षमार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 30 अगस्त 2022

पिज्जे का खर्चा

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 *पिज्जे का खर्चा* 

पत्नी ने कहा - आज धोने के लिए ज्यादा कपड़े मत निकालना…

पति- क्यों??
उसने कहा..- अपनी काम वाली बाई दो दिन नहीं आएगी…

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पति- क्यों??
पत्नी- गणपति के लिए अपने नाती से मिलने बेटी के यहाँ जा रही है, बोली थी…

पति- ठीक है, अधिक कपड़े नहीं निकालता…

पत्नी- और हाँ!!! गणपति के लिए पाँच सौ रूपए दे दूँ उसे? त्यौहार का बोनस..

पति- क्यों? अभी दिवाली आ ही रही है, तब दे देंगे…

पत्नी- अरे नहीं बाबा!! गरीब है बेचारी, बेटी-नाती के यहाँ जा रही है, तो उसे भी अच्छा लगेगा… और इस महँगाई के दौर में उसकी पगार से त्यौहार कैसे मनाएगी बेचारी!!

पति- तुम भी ना… जरूरत से ज्यादा ही भावुक हो जाती हो…

पत्नी- अरे नहीं… चिंता मत करो… मैं आज का पिज्जा खाने का कार्यक्रम रद्द कर देती हूँ… 

खामख्वाह पांच सौ रूपए उड़ जाएँगे, बासी पाव के उन चार टुकड़ों के पीछे…

पति- वा, वा… क्या कहने!! हमारे मुँह से पिज्जा छीनकर बाई की थाली में?? जो मर्जी करो ।

तीन दिन बाद.............

पोंछा लगाती हुई कामवाली बाई से पति ने पूछा...

पति- क्या बाई?, कैसी रही छुट्टी?
बाई- बहुत बढ़िया हुई साहब… दीदी ने पाँच सौ रूपए दिए थे ना.. त्यौहार का बोनस..

पति- तो जा आई बेटी के यहाँ…मिल ली अपने नाती से…?

बाई- हाँ साब… मजा आया, दो दिन में 500 रूपए खर्च कर दिए…

पति- अच्छा!! मतलब क्या किया 500 रूपए का??

*बाई- नाती के लिए 150 रूपए का शर्ट, 40 रूपए की गुड़िया, बेटी को 50 रूपए के पेडे लिए, 50 रूपए के पेडे मंदिर में प्रसाद चढ़ाया, 60 रूपए किराए के लग गए.. 25 रूपए की चूड़ियाँ बेटी के लिए और जमाई के लिए 50 रूपए का बेल्ट लिया अच्छा सा… बचे हुए 75 रूपए नाती को दे दिए कॉपी-पेन्सिल खरीदने के लिए… झाड़ू-पोंछा करते हुए पूरा हिसाब उसकी ज़बान पर रटा हुआ था*…

पति- 500 रूपए में इतना कुछ???
वह आश्चर्य से मन ही मन विचार करने लगा... उसकी आँखों के सामने चार टुकड़े किया हुआ बड़ा सा पिज्ज़ा घूमने लगा, एक-एक टुकड़ा उसके दिमाग में हथौड़ा मारने लगा… अपने एक पिज्जा के खर्च की तुलना वह कामवाली बाई के त्यौहारी खर्च से करने लगा… 
पहला टुकड़ा बच्चे की ड्रेस और पेढे का, दूसरा टुकड़ा मंदिर का प्रसाद और किराए का, तीसरा गुड़िया और चूडियों का, चौथा जमाई के बेल्ट और बच्चे की कॉपी-पेन्सिल का..
आज तक उसने हमेशा पिज्जा की एक ही साइड देखी थी, कभी पलटाकर नहीं देखा था कि पिज्जा पीछे से कैसा दिखता है… 
लेकिन आज कामवाली बाई ने उसे पिज्जा की दूसरी साइड दिखा दी थी…
 पिज्जा के चार टुकड़े उसे जीवन का अर्थ समझा गए थे… “जीवन के लिए खर्च” या “खर्च के लिए जीवन” का नवीन अर्थ एक झटके में उसे समझ आ गया ...
   
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 29 अगस्त 2022

प्रकृति का नियम

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
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*💪👩‍🚒प्रकृति का नियम🤝🫠*

पट्टू तोता बड़ा उदास बैठा था .

माँ ने पुछा , ” क्या हुआ बेटा तुम इतने  उदास क्यों हो ?”

” मैं अपनी इस अटपटी चोंच से नफरत करता हूँ !!”, पट्टू लगभग रोते हुए बोला .

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“तुम अपनी चोंच से नफरत क्यों करते हो ?? इतनी सुन्दर तो है !”, माँ ने समझाने की कोशिश की .

“नहीं , बाकी सभी पक्षियों की चोंच कहीं अच्छी है …. बिरजू बाज , कालू कौवा , कल्कि कोयल … सभी की चोंच मुझसे अच्छी है…. पर मैं ऐसा क्यों हूँ ?”, पट्टू उदास बैठ गया .

माँ कुछ देर शांति से बैठ गयी , उसे भी लगा कि शायद पट्टू सही कह रहा है , पट्टू को समझाएं तो कैसे …। तभी उसे सूझा कि क्यों ना पट्टू को  ज्ञानी काका के पास भेजा जाए , जो  पूरे जंगल में सबसे समझदार तोते के रूप में जाने जाते थे .

माँ  ने  तुरंत ही पट्टू को काका के  पास भेज दिया .

ज्ञानी काका जंगल  के बीचो -बीच एक बहुत पुराने  पेड़  की शाखा पर  रहते थे।

पट्टू उनके समक्ष जाकर बैठ गया और पुछा , ” काका , मेरी एक समस्या है !”

“प्यारे बच्चे तुम्हे क्या दिक्कत है , बताओ मुझे “, काका बोले .

पट्टू बताने लगा ,” मुझे मेरी चोंच पसंद नहीं है , ये कितनी अटपटी सी लगती है। ….. बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती … वहीँ मेरे दोस्त , बिरजू बाज , कालू कौवा , कल्कि कोयल … सभी की चोंच किनती सुन्दर है !”

काका बोले , ” सो तो है , उनकी चोंचें तो अच्छी हैं …. खैर ! तुम ये बताओ कि क्या तुम्हे खाने में केचुए और कीड़े -मकौड़े पसंद हैं ??”

” छी … ऐसी बेकार चीजें  तो मैं कभी न खाऊं … “, पट्टू ने झट से जवाब दिया .

“अच्छा छोड़ो , क्या तुम्हे मछलियाँ खिलाईं जाएं ….?”, काका ने पुछा .

…..” या फिर तुम्हे खरगोश और चूहे परोसे जाएं ..”


“वैक्क्क …. काका कैसी बातें कर रहे हैं  आप ? मैं एक तोता हूँ … मैं ये सब खाने के लिए नहीं बना हूँ …”, पट्टू नाराज़ होते हुए बोला .”

“बिलकुल सही “, काका बोले , ” यही तो मैं तुम्हे समझाना चाहता था …. ईश्वर ने तुम्हे कुछ अलग तरीके से बनाया है …, जो तुम पसंद करते हो , वो तुम्हारे दोस्तों को पसंद नहीं आएगा , और जो तुम्हारे दोस्त पसंद करते हैं वो तुम्हे नहीं  भायेगा . सोचो अगर तुम्हारी चोंच जैसी है वैसी नहीं होती तो क्या तुम अपनी फेवरेट ब्राजीलियन अखरोट खा पाते … नहीं न !!… इसलिए अपना जीवन ये सोचने में ना लगाओ कि दुसरे के पास क्या है – क्या नहीं , बस ये जानो कि तुम जिन गुणों के साथ पैदा हुए हो उसका सर्वश्रेष्ठ उपयोग कैसे किया जा सकता है और उसे अधिक से अधिक कैसे विकसित किया जा सकता है !”

पट्टू काका की बात समझ चुका था , वह ख़ुशी – ख़ुशी अपनी माँ के पास वापस लौट गया ।

*🤜➡️ग्रहण करने योग्य⬅️🤛*
*👨‍👩‍👧‍👦↔️👑🎪भव्य आत्माओं पट्टू तोते की तरह ही बहुत से लोग अक्सर अपने मै मोजूद सकारात्मकता को जान कर के खुश होने की बजाये दूसरों की योग्यताएं और उपलब्धियां देखकर तुलना में लग जाते हैं।दूसरों को देख कर कुछ सीखना और कुछ कर गुजरने के लिए प्रोत्साहित होना तो ठीक है पर बेकार की तुलना कर किसी से ईर्ष्या करना हमें निराश ही करता है. हमें इस बात को समझना चाहिए कि हम सब अपने आप में अद्भुत हैं और हमारे पास जो योग्यता और क्षमता हैं उन्ही का उपयोग कर दृढता के साथ हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं ! यही हमसभी के जीवन का लक्ष्य होना चाहिए।*

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रविवार, 28 अगस्त 2022

कर भला हो भला

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒कर भला हो भला🤝💪*

एक बार देवर्षि नारद अपने पिता ब्रम्हा जी के सामने “नारायण-नारायण” का जप करते हुए उपस्थित हुए और पूज्य पिताजी को दंडवत प्रणाम किया ।  नारद जी को सामने देख ब्रम्हा जी ने पुछा, “नारद! आज कैसे आना हुआ ? तुम्हारे मुख के भाव कुछ कह रहे हैं! कोई विशेष प्रयोजन है अथवा कोई नई समस्या ?”
नारद जी ने उत्तर देते हुए कहा, “ पिताश्री ऐसा कोई विशेष प्रयोजन तो नहीं है, कई दिनों से एक प्रश्न मन में खटक रहा है । आज आपसे इसका उत्तर जानने के लिए उपस्थित हुआ हूँ । ”

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“तो फिर विलम्ब कैसा? मन की शंकाओं का समाधान शीघ्रता से कर लेना ही ठीक रहता है! इसलिए निः संकोच अपना प्रश्न पूछो!”   – ब्रम्हाजी ने कहा ।

“पिताश्री आप सारे सृष्टि के परमपिता है, देवता और दानव आप की  ही संतान हैं । भक्ति और ज्ञान में देवता श्रेष्ठ हैं तो शक्ति तथा तपाचरण में दानव श्रेष्ठ हैं! परन्तु मैं इसी प्रश्न में उलझा हुआ हूँ कि इन दोनों में कौन अधिक श्रेष्ठ है। और आपने देवों को स्वर्ग और दानवों को पाताल लोक में जगह दी ऐसा क्यों? इन्हीं प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए मैं आपकी शरण में आया हूँ” – नारद ने ब्रम्हाजी से अपना प्रश्न बताते हुए कहा ।

नारद का प्रश्न सुन ब्रम्हदेव बोले, नारद इस प्रश्न का उत्तर देना तो कठिन है और इसका उत्तर मैं नहीं दे पाऊँगा क्योंकि देव और दानव दोनों ही मेरे पुत्र हैं एवं अपने ही दो पुत्रों की तुलना अपने ही मुख से करना उचित नहीं होगा! लेकिन फिर भी तुम्हारे प्रश्न का उत्तर ढूंढने में मैं तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ ।  तुम आज ही देवों और दानवों दोनों को मेरी और से भोजन का निमंत्रण भेजो ।  कल ही हम उनके लिए भोज का आयोजन करेंगे ।  और  कल ही तुम्हे तुम्हारे प्रश्न कि देव क्यों स्वर्ग-लोक में हैं तथा दानव पाताल-लोक में ; का उत्तर भी मिल जायेगा!

नारद तत्काल ही असुरों और देवों को निमंत्रण दे आये।

दुसरे दिन दानव ब्रम्ह-लोक में भोजन का आनंद लेने के लिए पहुँच गए और उन्होंने पहले पहुँचने के कारण भोजन की पहली शुरूआत खुद से करने के लिए ब्रम्हा जी से आग्रह किया ।

भोजन की थालियाँ परोसी गई, दानव भोजन करने के लिए बैठे, वे भोजन शुरू करने ही वाले थे कि ब्रम्हा जी हाथ में कुछ लकड़ियाँ लेकर उनके समक्ष उपस्थित हुए और उन्होंने कहा, “आज के भोजन की एक छोटी-सी शर्त है मैं यहाँ उपस्थित हर एक अतिथि के दोनों हाथों में इस प्रकार से लकड़ी बांधूंगा कि वो कोहनी से मुड़ नहीं पाए और इसी स्थिति में सभी को भोजन करना होगा । ”

कुछ देर बाद सभी असुरों के हाथों में लकड़ियाँ बंध चुकीं थीं। अब असुरों ने खाना शुरू किया , पर ऐसी स्थिति में कोई कैसे खा सकता था। कोई असुर सीधे थाली में मुँह डालकर खाने का प्रयास करने लगा तो कोई भोजन को हवा में उछालकर मुँह में डालने का प्रयत्न करने लगा ।  दानवों की ऐसी स्थिति देखकर नारद जी अपनी हंसी नहीं रोक पाए !

अपने सारे प्रयास विफल होते देख दानव बिना खाए ही उठ गए और क्रोधित होते हुए बोले, “हमारी यही दशा ही करनी थी तो हमें भोजन पर बुलाया ही क्यों? कुछ देर पश्चात् देव भी यहाँ पहुँचने वाले हैं ऐसी ही लकड़ियाँ आप उनके हाथों में भी बांधियेगा ताकि हम भी उनकी दुर्दशा का आनदं ले सकें…. ”

कुछ देर पश्चात् देव भी वहाँ पहुँच गए और अब देव भोजन के लिए बैठे, देवों के भोजन मंत्र पढ़ते ही ब्रम्हा जी ने सभी के हाथों में लकड़ियाँ बाँधी और भोजन की शर्त भी रखी ।

हाथों में लकड़ियाँ बंधने पर भी देव शांत रहे , वे समझ चुके थे कि खुद अपने हाथ से भोजन करना संभव नहीं है अतः वे थोड़ा आगे खिसक गए और थाली से अन्न उठा सामने वाले को खिलाकर भोजन आरम्भ किया । बड़े ही स्नेह के साथ वे एक दूसरे को खिला रहे थे, और भोजन का आनंद ले रहे थे, उन्होंने भोजन का भरपूर स्वाद लिया साथ ही दूसरों के प्रति अपना स्नेह, और सम्मान जाहिर किया ।

यह कल्पना हमे क्यों नहीं सूझी इसी विचार के साथ दानव बहुत दुखी होने लगे । नारद जी यह देखकर मुस्कुरा रहे थे । नारद जी ने ब्रम्हा जी से कहा, “पिताश्री  आपकी लीला अगाध है । युक्ति, शक्ति और सामर्थ्य का उपयोग स्वार्थ हेतु करने की अपेक्षा परमार्थ के लिए करने वाले का जीवन ही श्रेष्ठ होता है । दूसरों की भलाई में ही अपनी भलाई है यह आपने सप्रमाण दिखा दिया और मुझे अपने प्रश्नों का उत्तर मिल गया है ।  ब्रम्हा जी को सबने प्रणाम किया और वहाँ से विदा ली ।
*👨‍👩‍👧‍👦↔️आज वर्तमान में जहाँ हम निवास करते है उसी स्थान पर वर्तमान में मानव के अंदर ही तीनों(ब्रम्हा - देव - दानव)विद्यमान है।आप स्वयं ही अपने आचरण से इसका अवलोकन कर सकते है।*

*🔔ग्रहण करने योग्य🔔*
*👨‍👩‍👧‍👦↔️🤝भव्य आत्माओं, हमें यह जीवन सिर्फ अपने ही स्वार्थ के लिए नहीं मिला है, यदि हम इसका उपयोग परोपकार के कार्यों के लिए करते हैं तो निश्चित रूप से हमें इसी जीवन में स्वर्ग की प्राप्ति होगी ।  यदि हम दूसरों को प्यार और स्नेह देंगे तो बदले में हमे भी वही मिलेगा ।  यदि हम अपने सामर्थ्य के अनुसार हमारे परिवार,समाज ,देश व विश्व के लिए एक छोटा-सा योगदान भी दे सकें तो यह अपने आपमें एक बहुत बड़ी उपलब्धि के बराबर है !*

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शनिवार, 27 अगस्त 2022

मेरे कर्मो का फल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒मेरे कर्मों का फल🤝👨‍👩‍👧‍👦*                    

               *स्वयं की सोच को श्रेष्ठ बनाये*

   *एक दिन एक राजा ने अपने तीन मन्त्रियो को दरबार में  बुलाया, और  तीनो  को  आदेश  दिया  के  एक  एक  थैला  ले  कर  बगीचे  में  जाएं..,और वहां  से  अच्छे  अच्छे  फल   जमा  करें.*  

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-भव्य महान आत्माओं आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के आत्मकल्याण के संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

   *वो  तीनो  अलग  अलग  बाग़  में प्रविष्ट  हो  गए ,*

   *पहले मन्त्री ने  कोशिश  की  के  राजा  के  लिए  उसकी पसंद  के  अच्छे  अच्छे  और  मज़ेदार  फल  जमा  किए जाएँ , उस ने  काफी  मेहनत  के  बाद  बढ़िया और  ताज़ा  फलों  से  थैला  भर  लिया ,*

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्षमार्ग को सुरक्षित करें ।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

   *दूसरे मन्त्री ने  सोचा  राजा  हर  फल  का परीक्षण  तो करेगा नहीं , इस  लिए  उसने  जल्दी  जल्दी  थैला  भरने  में  ताज़ा , कच्चे , गले  सड़े फल  भी  थैले  में  भर  लिए ,*

   *तीसरे  मंत्री  ने  सोचा  राजा  की  नज़र  तो  सिर्फ  भरे  हुवे थैले  की  तरफ  होगी  वो  खोल  कर  देखेगा  भी  नहीं  कि  इसमें  क्या  है , उसने  समय बचाने  के  लिए  जल्दी  जल्दी  इसमें  घास , और  पत्ते  भर  लिए  और  वक़्त  बचाया.*

   *दूसरे  दिन  राजा  ने  तीनों मन्त्रियो  को  उनके  थैलों  समेत  दरबार  में  बुलाया  और  उनके  थैले  खोल  कर  भी  नही देखे  और  आदेश दिया  कि , तीनों  को  उनके  थैलों  समेत  दूर  स्थान के एक जेल  में  30 दिन  क़ैद  कर  दिया  जाए*

   *अब  जेल  में  उनके  पास  खाने  पीने  को  कुछ  भी  नहीं  था  सिवाए  उन  थैलों  के, तो  जिस मन्त्री ने  अच्छे  अच्छे  फल  जमा  किये  वो  तो  मज़े  से  खाता  रहा  और  1 महीने  गुज़र  भी  गया ,*

   *फिर  दूसरा  मन्त्री जिसने  ताज़ा , कच्चे  गले  सड़े  फल  जमा  किये  थे,  वह कुछ  दिन  तो  ताज़ा  फल  खाता  रहा  फिर  उसे  ख़राब  फल  खाने  पड़े , जिस  से  वो  बीमार  होगया  और  बहुत  तकलीफ  उठानी  पड़ी .*

   *और  तीसरा मन्त्री  जिसने  थैले  में  सिर्फ  घास  और  पत्ते  जमा  किये  थे  वो  कुछ  ही  दिनों  में  भूख  से  मरनासन्न अवस्था में पहुंच गया ।*

   *अब आप अपने आप से  पूछिये कि आप क्या जमा कर  रहे हो??*

   *आप  इस समय जीवन के  बाग़  में हैं ,  चाहो तो अच्छे कर्म जमा करो.*

*चाहें तो बुरे कर्म*

   *मगर याद रहे जो आप जमा करेंगे वही आपको आखरी समय काम आयेगा  क्योंकि दुनिया क़ा राजा आपको चारों ओर से देख रहा है।*

   *"जीवन का एक रहस्य...*

   *रास्ते पर गति की सीमा है। बैंक में पैसों की सीमा है। परीक्षा में समय की सीमा है। परंतु हमारी सोच की कोई सीमा नहीं है, इसलिए सदा श्रेष्ठ सोचें और श्रेष्ठ पाएं।"*

   *इसी भावना के साथ*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए पूर्वोपार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्षमार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 26 अगस्त 2022

हमारा सफल प्रयास

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒हमारा सफल प्रयास🤝🙏*

दो छोटे लड़के घर से कुछ दूर खेल रहे थे। खेलने में वे इतने मस्त थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कि वे भागते-भागते कब एक सुनसान जगह पहुँच गए। 

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उस जगह एक पुराना कुआं था , और उनमे से एक लड़का गलती से उस कुवें में जा गिरा।

“बचाओ-बचाओ”, वो चीखने लगा।

दूसरा लड़का एकदम से डर गया और मदद के लिए चिल्लाने लगा , पर उस सुनसान जगह कहाँ कोई मदद को आने वाला था। फिर लड़के ने देखा कि कुंएं के करीब ही एक बाल्टी और रस्सी पड़ी हुई है , उसने तेजी दिखाते हुए तुरंत रस्सी का एक सिरा वहां गड़े एक पत्थर से बाँधा और दूसरा सिरा नीचे कुएं में फेंक दिया। कुएं में गिरे लड़के ने रस्सी पकड़ ली, अब वह अपनी पूरी ताकत से उसे बाहर खींचे लगा, अथक प्रयास के बाद वे उसे ऊपर तक खींच लाया और उसकी जान बचा ली।

जब गांव में जाकर उन्होने यह बात बताई तो किसी ने भी उन पर यकीन नही किया। एक आदमी बोला-तुम एक बाल्टी पानी तो निकाल नही सकते, इस बच्चे को कैैसे बाहर खींच सकते हो; तुम झूठ बोल रहे हो। तभी एक बुजुर्ग बोला-यह सही कह रहा हैं क्योंकि वहां पर इसके पास कोई दूसरा रास्ता नही था , और वहां इसे कोई यह कहने वाला नही था कि ‘तुम ऐसा नही कर सकते हो’।

*🔔↔️ग्रहण करने योग्य↔️🔔*
*➡️👨‍👩‍👧‍👦👑भव्य आत्माओं , जिंदगी में अगर सफलता चाहते हो तो उन लोगो की बात मानना छोड दो जो यह कहते हैं कि तुम इसे नही कर सकते। दुनिया में अधिकतर लोग इसलिए सफल नही हो पाते क्योंकि वे ऐसे लोगो की बातों में आ जाते हैं जो ना तो खुद कामयाब होते हैं और ना इस बात में यकीन करते हैं कि दूसरे कामयाब हो सकते हैं । इसलिए अपने दिल की सुनें ,आप सब कुछ कर सकते हैं जो आप करना चाहते हैं, आपको आपके पूर्वकर्म + पुरषार्थ ने विशिष्ट शक्तियों के साथ पैदा किया हैं, अतः स्वयं पर संशय करना छोड़ें और सफलता की ओर स्वशक्ती को जागृत कर आगेबढ़ चलें ।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 25 अगस्त 2022

मेरी प्रतिकुलता या अनुकुलता

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒मेरी प्रतिकुलता या अनुकुलता👨‍👩‍👧‍👦🔔*

जयपुर शहर से कुछ दूर एक किसान अपने गाँव पदमपुरा में रहता था । वैसे तो वह संपन्न था पर फिर भी वो अपने जीवन से खुश नहीं था । एक दिन उसने निश्चय किया कि वो अपनी सारी ज़मीन -जायदाद बेच कर किसी अच्छी जगह बस जाएगा ।

अगले ही दिन उसने एक जान -पहचान के रियल एस्टेट एजेंट को बुलाया और बोला , ” भाई , मुझे तो बस किसी तरह ये जगह छोड़नी है, बस कोई सही प्रॉपर्टी दिल दो तो बात बन जाए !”

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“क्यों , क्या दिक्कत हो गयी यहाँ आपको ?”, एजेंट ने पुछा ।

“आओ मेरे साथ “, किसान बोला , ” देखो कितनी समस्याएं हैं यहाँ पर , ये उबड़-खाबड़ रास्ते देखो , और ये छोटी सी झील देखो , इसके चक्कर में पूरा घूम कर रास्ता पार करना पड़ता है। ।। इन छोटे -छोटे पहाड़ों को देखो , जानवरों को चराना कितना मुश्किल होता है … और ये देखो ये बागीचा , आधा समय तो इसकी सफाई और रख-रखाव में ही चला जाता है … क्या करूँगा मैं ऐसी बेकार प्रॉपर्टी का…”

एजेंट ने घूम -घूम कर इलाके का जायजा लिया और कुछ दिन बाद किसी ग्राहक के साथ आने का वादा किया ।

इस घटना के एक – दो दिन बाद किसान सुबह का अखबार पढ़ रहा था कि कहीं किसी अच्छी प्रॉपर्टी का पता चल जाए जहाँ वो सब बेच -बाच कर जा सके ।

तभी उसकी नज़र एक आकर्षक ऐड पर पड़ी , ” लें सपनो का घर , एक शांत सुन्दर जगह , प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर, सुन्दर झील और पहाड़ियों के बीच , शहर की भीड़ -भाड़ से उचित दूरी पर बसाएं एक स्वस्थ -सुन्दर आशियाना । संपर्क करें -9461956111”

किसान को ये ब्यौरा बहुत पसंद आया , वो बार-बार उस ऐड को पढ़ने लगा , पर थोड़ा ध्यान देने पर उसे लगा कि ये तो उसी की प्रॉपर्टी का ऐड है , इस बात की पुष्टि करने के लिए उसने दिए हुए नंबर पर फ़ोन लगाया और सचमुच ये उसी की प्रॉपर्टी का ऐड था ।

तब किसान को एहसास हुआ कि वो वाकई में अपनी मनचाही जगह पर रहता है और ये उसकी गलती थी कि उसने अपनी ही चीजों को हमेशा गलत ढंग से देखा । अब किसान वहीँ रहना चाहता था ; उसने तुरंत अपने एजेंट को कॉल किया और इस ऐड को हटाने को कहा ।

*👨‍👩‍👧‍👦↔️ग्रहण करने योग्य👑🔔*
*➡️भव्य आत्माओं, इस किसान की तरह ही कई बार हमें भी अपने जीवन से बहुत समस्याएं होती हैं , लगता है कि हमारा जीवन ही सबसे बेकार है , हमारी नौकरी में ही सबसे ज्यादा तनाव है , हमारी पर्सनालिटी ही सबसे बदसूरत है…इसलिए हमेशा उसी में खुश रहिए जो हमनें पूर्व में बीज बोयें थे।उसी फसल के फल हमें प्राप्त हो रहे है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 24 अगस्त 2022

शब्दों की शक्ति

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒शब्दों की शक्ति👨‍👩‍👧‍👦✅*

एक नौजवान चीता पहली बार शिकार करने निकला। अभी वो कुछ ही आगे बढ़ा था कि एक लकड़बग्घा उसे रोकते हुए बोला, ” अरे छोटू , कहाँ जा रहे हो तुम ?”

“मैं तो आज पहली बार खुद से शिकार करने निकला हूँ !”, चीता रोमांचित होते हुए बोला।

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“हा-हा-हा-“, लकड़बग्घा हंसा ,” अभी तो तुम्हारे खेलने-कूदने के दिन हैं , तुम इतने छोटे हो , तुम्हे शिकार करने का कोई अनुभव भी नहीं है , तुम क्या शिकार करोगे !!”

लकड़बग्घे की बात सुनकर चीता उदास हो गया , दिन भर शिकार के लिए वो बेमन इधर-उधर घूमता रहा , कुछ एक प्रयास भी किये पर सफलता नहीं मिली और उसे भूखे पेट ही घर लौटना पड़ा।

अगली सुबह वो एक बार फिर शिकार के लिए निकला। कुछ दूर जाने पर उसे एक बूढ़े बन्दर ने देखा और पुछा , ” कहाँ जा रहे हो बेटा ?”

“बंदर मामा, मैं शिकार पर जा रहा हूँ। ” चीता बोला।

“बहुत अच्छे ” बन्दर बोला , ” तुम्हारी ताकत और गति के कारण तुम एक बेहद कुशल शिकारी बन सकते हो , जाओ तुम्हे जल्द ही सफलता मिलेगी।”

यह सुन चीता उत्साह से भर गया और कुछ ही समय में उसने के छोटे हिरन का शिकार कर लिया।

 , हमारी ज़िन्दगी में “शब्द” बहुत मायने रखते हैं। दोनों ही दिन चीता तो वही था, उसमे वही फूर्ति और वही ताकत थी पर जिस दिन उसे हतोत्साहित किया गया वो असफल हो गया और जिस दिन प्रोत्साहित किया गया वो सफल हो गया।

*💐💐ग्रहण करने योग्य शिक्षा💐💐*
*👨‍👩‍👧‍👦↔️भव्य आत्माओं*
*🔔पहली , हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम अपने “शब्दों” से किसी को प्रोत्साहित करें , हतोत्साहित नहीं। निसंदेह:, इसका ये मतलब नहीं कि हम उसे उसकी कमियों से अवगत न करायें , या बस झूठ में ही प्रोत्साहित करें।*

*💪दूसरी, हम ऐसे लोगों से बचें जो हमेशा निगेटिव सोचते और बोलते हों, और उनका साथ करें जिनका दृष्टिकोण सकारात्मक हो।*

*👉🏿तीसरी और सबसे अहम बात , हम खुद से क्या बात करते हैं , self-talk में हम कौन से शब्दों का प्रयोग करते हैं इसका सबसे ज्यादा ध्यान रखें , क्योंकि ये “शब्द” बहुत ताकतवर होते हैं , क्योंकि ये “शब्द” ही हमारे विचार बन जाते हैं , और ये विचार ही हमारी ज़िन्दगी की हकीकत बन कर सामने आते हैं , इसलिए भव्य आत्माओं , शब्दों की शक्ति को पहचानिये, जहाँ तक हो सके सकारात्मक शब्दों का प्रयोग करिये , इस बात को समझिए कि ये आपकी ज़िन्दगी बदल सकते हैं।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
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मंगलवार, 23 अगस्त 2022

आशा का दीपक

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒आशा का दीपक🤝🕉️*

रात का समय था, चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था , नज़दीक ही एक कमरे में चार दीपक  जल रहे थे। एकांत पा कर आज वे एक दुसरे से दिल की बात कर रही थीं।

पहला दीपक  बोला, ” मैं शांति हूँ , पर मुझे लगता है अब इस दुनिया को मेरी ज़रुरत नहीं है , हर तरफ आपाधापी और लूट-मार मची हुई है, मैं यहाँ अब और नहीं रह सकता। …” और ऐसा कहते हुए , कुछ देर में वो दीपक  बुझ गया।

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दूसरा दीपक  बोला , ” मैं विश्वास हूँ , और मुझे लगता है झूठ और फरेब के बीच मेरी भी यहाँ कोई ज़रुरत नहीं है , मैं भी यहाँ से जा रहा हूँ …” , और दूसरी दीपक  भी बुझ गया।

तीसरे दीपक  ने भी दुखी होते हुए बोला , ” मैं प्रेम हूँ, मेरे पास जलते रहने की ताकत है, पर आज हर कोई इतना व्यस्त है कि मेरे लिए किसी के पास वक्त ही नहीं, दूसरों से तो दूर लोग अपनों से भी प्रेम करना भूलते जा रहे हैं ,मैं ये सब और नहीं सह सकता मैं भी इस दुनिया से जा रहा हूँ….” और ऐसा कहते हुए तीसरा दीपक  भी बुझ गया।

वो अभी बुझा ही थी कि एक मासूम बच्चा उस कमरे में दाखिल हुआ।

दीपक  को बुझे देख वह घबरा गया , उसकी आँखों से आंसू टपकने लगे और वह रुंआसा होते हुए बोला ,
“अरे , तुम दीपक  जलकर प्रकाश क्यों नहीं कर रहे , तुम्हे तो अंत तक जलना है ! तुम इस तरह बीच में हमें कैसे छोड़ के जा सकते हो ?”

तभी चौथा दीपक  बोला , ” प्यारे बच्चे घबराओ नहीं, मैं आशा हूँ और जब तक मैं जलता रहूँ हम बाकी दीपक  को फिर से जला सकते हैं। “

यह सुन बच्चे की आँखें चमक उठीं, और उसने आशा के बल पे शांति, विश्वास, और प्रेम को फिर से प्रकाशित कर दिया।

*➡️👏आज हमारी असफलता का मुख्य कारण यह है कि हम अपने लक्ष्य को लेकर स्वयं तैय्यार नहीं है।हम अपनी असफलता के लिए स्वयं की कमीयों को न दूर करके अपने घरवालों या मिलने वाले लोगों को दोषी ठहराया है।अतः हमें इस गलती को जल्द ही सुधार कर रुपरेखा बनाकर तैनात होना है।*

*👑↔️ग्रहण करने योग्य↔️👑*
*👨‍👩‍👧‍👦🤝➡️🔔भव्य आत्माओं , जब सबकुछ बुरा होते दिखे ,चारों तरफ अन्धकार ही अन्धकार नज़र आये , अपने भी पराये लगने लगें तो भी उम्मीद मत छोड़िये….आशा मत छोड़िये , क्योंकि इसमें इतनी शक्ति है कि ये हर खोई हुई शक्ति आपको वापस दिल सकती है। अपनी आशा के दीपक  को जलाये रखिये ,बस अगर ये जलता रहेगा तो आप किसी भी और दीपक  को प्रकाशित कर सकते हैं।आशा के दीपक को हमेशा तैयार रखने के लिए हमें उसे हवा से बचाकर उसकी बाती ओर घी का ख्याल रखना होगा। उसी प्रकार हमें अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उसके अनुसार स्वयं को  सकारात्मक सोच के साथ सभी तैयारियां करनी आवश्यक है।* 

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए पूर्वोपार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्षमार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 22 अगस्त 2022

मेहनत की कमाई का महत्व

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒मेहनत की कमाई का महत्व👨‍👩‍👧‍👦💪*

*प्रकृति के द्वारा दिए गए हर उपहार की कीमत क्या हम जानते है?*

*एक रूपये की कीमत!*

बहुत समय पहले की बात है, सुब्रोतो लगभग 20 साल का एक लड़का था और कलकत्ता की एक कॉलोनी में रहता था।

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उसके पिताजी एक भट्टी चलाते थे जिसमे वह दूध को पका-पका कर खोवा बनाने का काम करते थे।

सुब्रोतो वैसे तो एक अच्छा लड़का था लेकिन उसमे फिजूलखर्ची की एक बुरी आदत थी। वह अक्सर पिताजी से पैसा माँगा करता और उसे खाने-पीने या सिनेमा देखने में खर्च कर देता।

एक दिन पिताजी ने सुब्रोतो को बुलाया और कहा, "देखो बेटा, अब तुम बड़े हो गए हो और तुम्हे अपनी जिम्मेदारियाँ समझनी चाहिये। यह जो आये दिन तुम मुझसे पैसे मांगते रहते हो और उसे इधर-उधर उड़ाते हो यह अच्छी बात नहीं है।"

"क्या पिताजी! कौनसा मैं आपसे हज़ारों रुपये ले लेता हूँ... चंद रुपयों के लिए आप मुझे इतना बड़ा लेक्चर दे रहे हैं...इतने से रुपए तो मैं जब चाहूँ आपको लौटा सकता हूँ।" सुब्रोतो आवेश मे आकर बोला ।

सुब्रोतो की बात सुनकर पिताजी भीतर से विचलित हो गए, पर वे समझ चुके थे कि डांटने-फटकारने से कोई बात नहीं बनेगी। इसलिए उन्होंने कहा, "यह तो बहुत अच्छी बात है...ऐसा करो कि तुम मुझे ज्यादा नहीं बस एक रुपया रोज लाकर दे दिया करो।"

सुब्रोतो मुस्कुराया और खुद को जीता हुआ महसूस कर वहाँ से चला गया।

अगले दिन सुब्रोतो जब शाम को पिताजी के पास पहुँचा तो वह उसे देखते ही बोले, "बेटा, लाओ मेरा एक रुपया।"

उनकी बात सुनकर सुब्रोतो जरा घबराया और जल्दी से अपनी दादी माँ से एक रुपया लेकर लौटा।

"लीजिये पिताजी, ले आया मैं आपका एक रुपया!" और ऐसा कहते हुए उसने सिक्का पिताजी के हाथ में थमा दिया।

उसे लेते ही पिताजी ने सिक्का भट्टी में फेंक दिया। "यह क्या, आपने ऐसा क्यों किया?" सुब्रोतो ने हैरानी से पूछा।

पिताजी बोले, "तुम्हें इससे क्या, तुम्हें तो बस एक रुपया देने से मतलब होना चाहिए, फिर मैं चाहे उसका जो करूँ।"

सुब्रोतो ने भी ज्यादा बहस नहीं की और वहाँ से चुपचाप चला गया।

अगले दिन जब पिताजी ने उससे एक रुपया माँगा, तो उसने अपनी माँ से माँग कर दे दिया...कई दिनों तक यही सिलसिला चलता रहा। वह रोज किसी दोस्त-यार या सम्बन्धी से एक रुपया लेकर पिताजी को देता और पिताजी उसे भट्टी में फेंक देते।

फिर एक दिन ऐसा आया, जब हर कोई उसे पैसे देने से मना करने लगा। सुब्रोतो को चिंता होने लगी कि अब वह पिताजी को एक रुपया कहाँ से लाकर देगा।

शाम भी होने वाली थी, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह करे क्या! एक रुपया भी ना दे पाने की शर्मिंदगी वह उठाना नहीं चाहता था। तभी उसे रास्ते में एक अधेड़ उम्र का मजदूर दिखा, जो किसी मुसाफिर को हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शे से लेकर कहीं जा रहा था।

"सुनो भैया, क्या तुम थोड़ी देर मुझे यह रिक्शा खींचने दोगे? उसके बदले में मैं तुमसे बस एक रुपया लूँगा।" सुब्रोतो ने रिक्शे वाले से कहा।

रिक्शा वाला बहुत थक चुका था, वह फ़ौरन तैयार हो गया।

सुब्रोतो रिक्शा खींचने लगा! यह काम उसने जितना सोचा था, उससे कहीं अधिक कठिन था... थोड़ी दूर जाने में ही उसकी हथेलियों में छाले पड़ गए, पैर भी दुखने लगे! खैर किसी तरह से उसने अपना काम पूरा किया और बदले में ज़िन्दगी में पहली बार खुद से एक रुपया कमाया।

आज बड़े गर्व के साथ वह पिताजी के पास पहुँचा और उनकी हथेली में एक रुपया थमा दिया। रोज की तरह पिताजी ने रुपया लेते ही उसे भट्टी में फेंकने के लिए हाथ बढ़ाया।

"रुकिए पिताजी!" सुब्रोतो पिताजी का हाथ थामते हुए बोला, "आप इसे नहीं फेंक सकते! यह मेरे मेहनत की कमाई है।" और सुब्रोतो ने पूरा वाक्या कह सुनाया।

पिताजी आगे बढ़े और अपने बेटे को गले से लगा लिया। "देखो बेटा! इतने दिनों से मैं सिक्का आग की भट्टी में फेंक रहा था लेकिन तुमने मुझे एक बार भी नहीं रोका, पर आज जब तुमने अपनी मेहनत की कमाई को आग में जाते देखा तो एकदम से घबरा गए। ठीक इसी तरह जब तुम मेरी मेहनत की कमाई को बेकार की चीजों में उड़ाते हो तो मुझे भी इतना ही दर्द होता है, मैं भी घबरा जाता हूँ...इसलिए पैसे की कीमत को समझो, चाहे वह तुम्हारे हों या किसी और के...कभी भी उसे फिजूलखर्ची में बर्बाद मत करो!"

सुब्रोतो पिताजी की बात समझ चुका था, उसने फौरन उनके चरण स्पर्श किये और अपने व्यवहार के लिए क्षमा माँगी। आज वह एक रुपये की कीमत समझ चुका था और उसने मन ही मन संकल्प लिया कि अब वह कभी भी पैसों की बर्बादी नहीं करेगा।

*👑💪ग्रहण करने योग्य💪👑*
 *👨‍👩‍👧‍👦➡️🔔🤝भव्य आत्माओं👑यह तो हुई एक रुपये की कीमत, पर हर पल जो हमें मुफ्त में कुदरत दे रही है, जिसके बिना हम एक पल भी जीवित नहीं रह सकते, क्या हम उसकी कीमत चुका सकते है?*

*यदि नहीं तो क्या हर पल कृतज्ञ हो सकते हैं, जीवन देने वाले के प्रति!*
                      *हम अपने संसाधनों का उपयोग कैसे करते हैं, यह हमारे चरित्र को परिभाषित करता है। हमारे संसाधन हमारे आंतरिक संकाय हैं जैसे मन, बुद्धि, अहंकार... फिर समय और बाहरी संसाधन जैसे धन, शक्ति आदि। हमें उनका उपयोग सही उद्देश्य के लिए बेहतर तरीके से करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए पूर्वोपार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्षमार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 21 अगस्त 2022

गधे की सोच

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒गधे की सोच👨‍👩‍👧‍👦😛*

एक बार दो गधे अपनी पीठ पर बोझा उठाये चले जा रहे थे, उनको काफी लंबा सफर तय करना था.. एक गधे की पीठ पर नमक की भारी बोरियां लदी हुई थीं तो एक की पीठ पर रूई की बोरियां लदी हुई थीं।

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्षमार्ग को सुरक्षित करें ।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

जिस रास्ते से वो जा रहे थे उस बीच में एक नदी पड़ी, नदी के ऊपर रेत की बोरियों का कच्चा पुल बना हुआ था.. जिस गधे की पीठ पर नमक की बोरियां थीं, उसका पैर बुरी तरह से फिसल गया और वह नदी के अंदर गिर पड़ा.. नदी में गिरते ही नमक पानी में घुल गया और उसका वजन हल्का हो गया.. वह यह बात बड़ी प्रसन्नता से दुसरे को बताने लगा.. दुसरे गधे ने सोचा कि यह तो बढ़िया युक्ति है, ऐसे में तो मैं भी अपना भार काफी कम कर सकता हूँ और उसने बिना सोचे समझे पानी में छलांग लगा दी, किन्तु रूई के पानी सोख लेने के कारण उसका भार कम होने की जगह बहुत बढ़ गया, जिस कारण वह मुर्ख गधा पानी में डूब गया।

एक संत यह सारा किस्सा अपने शिष्यों के साथ देख रहे थे, उन्होंने अपने शिष्यों से कहा- “मनुष्य को सदा अपना विवेक जागृत रखना चाहिए, बिना अपनी बुद्धि लगाए दूसरों की नकल कर वैसा ही करने वाले सदा उपहास के पात्र बनते हैं। ”

*💐💐ग्रहण करने योग्य💐💐*
*👨‍👩‍👧‍👦🤝🔔➡️भव्य आत्माओं हमारी असल जिंदगी में भी यही बात लागू होती है, हम किसी को एक क्षेत्र में सफल होते देख उसे कॉपी करना शुरू कर देते हैं, हमे लगता है कि यदि कोई बंदा अपने क्षेत्र में सफल हो गया तो हमे भी उस क्षेत्र में सफलता मिल जायेगी लेकिन हम शायद यह ध्यान नहीं देते कि उसके पीठ पर नमक वाली बोरी है मतलब उसकी रूची अलग है और भूलवश हम रूई की बोरी को लादे छलांग लगा देते हैं मतलब दूसरा टैलेंट या रूची को लादे उस क्षेत्र में सफल होने का ख्वाब देखते है, और अंततः हमें पछताना पड़ता है। इसलिए , दूसरों को देखकर सीखना ठीक है पर उनका अँधा अनुसरण करना उस मूर्ख गधे के समान व्यवहार करना है।हमें अपनी योग्यता के अनुसार क्षेत्र का चुनाव कर उसकी रूपरेखा तैयार कर कार्य करना चाहिए*

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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 20 अगस्त 2022

सत्यव्यथा

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒सत्यव्यथा👨‍👩‍👧‍👦🔔*

एक पाँच छे. साल का मासूम सा बच्चा अपनी छोटी बहन को लेकर मंदिर के एक तरफ कोने में बैठा हाथ जोडकर भगवान से न जाने क्या मांग रहा था।

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-भव्य महान आत्माओं आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के आत्मकल्याण के संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

कपड़े में मेल लगा हुआ था मगर निहायत साफ, उसके नन्हे नन्हे से गाल आँसूओं से भीग चुके थे।

बहुत लोग उसकी तरफ आकर्षित थे और वह बिल्कुल अनजान अपने भगवान से बातों में लगा हुआ था।

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्षमार्ग को सुरक्षित करें ।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
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जैसे ही वह उठा एक अजनबी ने बढ़ के उसका नन्हा सा हाथ पकड़ा और पूछा-
"क्या मांगा भगवान से"
उसने कहा-
"मेरे पापा मर गए हैं उनके लिए स्वर्ग,
मेरी माँ रोती रहती है उनके लिए सब्र,
मेरी बहन माँ से कपडे सामान मांगती है उसके लिए पैसे"।

"तुम स्कूल जाते हो"
 अजनबी का सवाल स्वाभाविक सा सवाल था।

"हां जाता हूं" उसने कहा।
"किस क्लास में पढ़ते हो ?" अजनबी ने पूछा
"नहीं अंकल पढ़ने नहीं जाता, मां चने बना देती है वह स्कूल के बच्चों को बेचता हूँ, बहुत सारे बच्चे मुझसे चने खरीदते हैं, हमारा यही काम धंधा है"

 बच्चे का एक एक शब्द मेरी रूह में उतर रहा था ।
"तुम्हारा कोई रिश्तेदार"
न चाहते हुए भी अजनबी बच्चे से पूछ बैठा।
"पता नहीं, माँ कहती है गरीब का कोई रिश्तेदार नहीं होता,
माँ झूठ नहीं बोलती,
पर अंकल,
मुझे लगता है मेरी माँ कभी कभी झूठ बोलती है,
जब हम खाना खाते हैं हमें देखती रहती है,
जब कहता हूँ 
माँ तुम भी खाओ, तो कहती है मेंने खा लिया था, उस समय लगता है झूठ बोलती है "

"बेटा अगर तुम्हारे घर का खर्च मिल जाय तो पढाई करोगे ?"
"बिल्कुलु नहीं"
"क्यों"
"पढ़ाई करने वाले गरीबों से नफरत करते हैं अंकल,
हमें किसी पढ़े हुए ने कभी नहीं पूछा - पास से गुजर जाते हैं"
अजनबी हैरान भी था और शर्मिंदा भी।

फिर उसने कहा
" हर दिन इसी इस मंदिर में आता हूँ, कभी किसी ने नहीं पूछा - यहा सब आने वाले मेरे पिताजी को जानते थे - मगर हमें कोई नहीं जानता 
"बच्चा जोर-जोर से रोने लगा" अंकल जब बाप मर जाता है तो सब अजनबी क्यों हो जाते हैं ?"

मेरे पास इसका कोई जवाब नही था और ना ही मेरे पास बच्चे के सवाल का जवाब है।

ऐसे कितने मासूम होंगे जो हसरतों से घायल हैं
बस एक कोशिश कीजिये और अपने आसपास ऐसे ज़रूरतमंद यतिमो, बेसहाराओ को ढूंढिये और उनकी मदद किजिए।
*👨‍👩‍👧‍👦🔔➡️हमसभी को उनके लिए रोटी-कपड़ा - मकान के साथ उन्हें इस प्रकार संस्कार देना है कि उन्हें किसी के सामने किसी भी दैनंदिनी क्रियाओं के लिए हाथ ना फैलाना पढ़ें।अहिंसक रोजगार के साथ परिवार  समाज देश व विश्व के विकास में उनका योगदान हो।*......................... मंदिर मे सीमेंट या अन्न की बोरी देने से पहले अपने आस - पास किसी गरीब को देख लेना शायद उसको आटे की बोरी की ज्यादा जरुरत हो।

आपको पसंद आए तो सब काम छोड़के ये मैसेज कम से कम एक या दो ग्रुप मे जरुर डाले |
कहीं ग्रुप मे ऐसा देवता इंसान मिल जाए 
कहीं ऐसे बच्चो को अपना भगवान मिल जाए | 
कुछ समय के लिए एक गरीब बेसहारा कि आँख मे आँख डालकर देखे आपको क्या महशूस होता है 
 फोटो या वीडियो भेजने कि जगह ये मैसेज अधिक से अधिक ग्रुप मे जरुर डाले|

स्वयं में व समाज में बदलाव लाने के प्रयास जारी रखें।
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए पूर्वोपार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्षमार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 19 अगस्त 2022

संपत्ति का उत्तराधिकारी

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒संपत्ती का उत्तराधिकारी👨‍👩‍👧‍👦🔔*

एक समय की बात है जब राजस्थान के एक छोटे से गाँव नयासर में अमरसेन नामक व्यक्ति रहता था। अमरसेन बड़ा होशियार था, उसके चार पुत्र थे जिनके विवाह हो चुके थे और सब अपना जीवन जैसे-तैसे निर्वाह कर रहे थे परन्तु समय के साथ-साथ अब अमरसेन वृद्ध हो चला था ! पत्नी के स्वर्गवास के बाद उसने सोचा कि अब तक के संग्रहित धन और बची हुई संपत्ती का उत्तराधिकारी किसे बनाया जाये ? ये निर्णय लेने के लिए उसने चारो बेटों को उनकी पत्नियों के साथ बुलाया और एक-एक करके गेहूं के पाँच मुठ्ठी दानें दिए और कहा कि मै तीरथ पर जा रहा हूँ और चार साल बाद लौटूंगा और जो भी इन दानों की सही हिफाजत करके मुझे लौटाएगा तिजोरी की चाबियाँ और मेरी सारी संपत्ती उसे ही मिलेगी, इतना कहकर अमरसेन वहां से चला गया।

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्षमार्ग को सुरक्षित करें ।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

पहले बहु-बेटे ने सोचा बुड्ढा सठिया गया है चार साल तक कौन याद रखता है हम तो बड़े हैं तो धन पर पहला हक़ हमारा ही है। ऐसा सोचकर उन्होंने गेहूं के दानें फेक दिये।

दूसरे ने सोचा की संभालना तो मुश्किल है यदि हम इन्हे खा लें तो शायद उनको अच्छा लगे और लौटने के बाद हमें आशीर्वाद देदे और कहे की तुम्हारा मंगल इसी में छुपा था और सारी संपत्ती हमारी हो जाएगी यह सोचकर उन्होंने वो पाँचमुठ्ठी दानें खा लिये।

तीसरे ने सोचा हम रोज पूजा पाठ तो करते ही हैं और अपने मंदिर में जैसे ठाकुरजी को सँभालते हैं, वैसे ही ये गेहूं भी संभाल लेंगे और उनके आने के बाद लौटा देंगे।

चौथे बहु- बेटे ने समझदारी से सोचा और पाँचमुठ्ठी दानो को एक एक कर जमीन में बो दिया और देखते-देखते वे पौधे बड़े हो गये और कुछ गेहूं ऊग आये फिर उन्होंने उन्हें भी बो दिया इस तरह हर वर्ष गेहूं की बढ़ोतरी होती गई पाँचमुठ्ठी दानें  पच्चीस बोरी,और वर्तमान में हजारों बोरियों में बदल गए।

चार साल बाद जब अमरसेन वापस आया तो सबकी कहानी सुनी और जब वो चौथे बहु-बेटों के पास गया तो बेटा बोला , ” पिताजी , आपने जो पांचमुठ्ठी दाने दिए थे अब वे गेंहूँ की हजारों बोरियों में बदल चुके हैं, हमने उन्हें संभल कर गोदाम में रख दिया है, उनपर आप ही का हक़ है। ” यह देख अमरसेन ने फ़ौरन तिजोरी की चाबियाँ सबसे छोटे बहु-बेटे को सौंप दी और कहा, तुम ही लोग मेरी संपत्ति के असल हक़दार हो।

*💐💐ग्रहण करने योग्य💐💐*
*👨‍👩‍👧‍👦🔔↔️👑इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि मिली हुई जिम्मेदारी को अच्छी तरह से निभाना चाहिए और मौजूद संसाधनो, चाहे वो कितने कम ही क्यों न हों, का सही उपयोग करना चाहिए। गेंहूँ के पांचमुठ्ठी दाने एक प्रतीक हैं , जो समझाते हैं कि कैसे छोटी से छोटी शुरआत करके उसे एक बड़ा रूप दिया जा सकता है।आज वर्तमान में ऐसे हजारों उदाहरण देखने को मिल रहे है।जैसे:- राजस्थान के मार्बल वाले अशोकजी,रतन टाटा आदि।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए पूर्वोपार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्षमार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 18 अगस्त 2022

श्रद्धा के भगवान

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒श्रद्धा के भगवान🎪👏*

एक मेजर साहब के नेतृत्व में बीस जवानों की एक टुकड़ी हिमालय के अपने रास्ते पर थी ।

  बेतहाशा ठण्ड में मेजर ने सोचा की अगर उन्हें यहाँ एक कप चाय मिल जाती तो आगे बढ़ने की ताकत आ जाती ।

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्षमार्ग को सुरक्षित करें ।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
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 लेकिन रात का समय था आस पास कोई बस्ती भी नहीं थी।
 
लगभग एक घंटे की चढ़ाई के पश्चात् उन्हें एक जर्जर चाय की दुकान दिखाई दी ।

लेकिन अफ़सोस उस पर ताला लगा था ।

भूख और थकान की तीव्रता के चलते जवानों के आग्रह पर मेजर साहब दुकान का ताला तुड़वाने को राज़ी हो गये ।

 ताला तोडा गया, तो अंदर उन्हें चाय बनाने का सभी सामान मिल गया ।

  जवानों ने चाय बनाई साथ वहां रखे बिस्किट आदि खाकर खुद को राहत दी । थकान से उबरने के पश्चात् सभी आगे बढ़ने की तैयारी करने लगे , लेकिन मेजर साहब को यूँ चोरो की तरह दुकान का ताला तोड़ने के कारण आत्मग्लानि हो रही थी ।

उन्होंने अपने पर्स में से दो हज़ार का एक नोट निकाला और चीनी के डब्बे के नीचे दबाकर रख दिया तथा दुकान का शटर ठीक से बंद करवाकर आगे बढ़ गए ।

 चार महीने की समाप्ति पर इस टुकड़ी के सभी बीस जवान सकुशल अपने मेजर के नेतृत्व में उसी रास्ते से वापस आ रहे थे ।

रास्ते में उसी चाय की दुकान को खुला देखकर वहां सभी विश्राम करने के लिए रुक गए ।

उस दुकान का मालिक एक बूढ़ा चाय वाला था जो एक साथ इतने ग्राहक देखकर खुश हो गया और उनके लिए चाय बनाने लगा ।

चाय की चुस्कियों और बिस्कुटों के बीच मेजर साहब चाय वाले से उसके जीवन के अनुभव पूछने लगे ,खासतौर पर
 इतने बीहड़ में दूकान चलाने के बारे में ।

 बुजुर्ग व्यक्ति उन्हें कईं कहानियां सुनाता रहा और साथ ही भगवान का आभार प्रकट करता रहा ।

 तभी एक जवान बोला " बाबा आप भगवान को इतना मानते हो , अगर भगवान सच में होता तो फिर उसने तुम्हें इतने बुरे हाल में क्यों रखा हुआ है" ।

 बाबा बोला  "नहीं साहब ऐसा नहीं कहते भगवान के बारे में, भगवान् तो है और सच में है .... मैंने देखा है"

 आखरी वाक्य सुनकर सभी जवान कोतुहल से बुजुर्ग की ओर देखने लगे ।

बाबा बोला "साहब मै बहुत मुसीबत में था , एक दिन मेरे इकलौते बेटे को आतंकवादियों ने पकड़ लिया । उन्होंने उसे बहुत मारा पिटा, लेकिन उसके पास कोई जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने उसे मार पीट कर छोड़ दिया"।

"मैं दुकान बंद करके उसे हॉस्पिटल ले गया ।मै बहुत तंगी में था साहब और आतंकवादियों के डर से किसी ने उधार भी नहीं दिया" ।

"मेरे पास दवाइयों के पैसे भी नहीं थे और मुझे कोई उम्मीद भी नज़र नहीं आती थी । उस रात मै बहुत रोया और मैंने भगवान से प्रार्थना की और मदद मांगी "और साहब ...  उस रात भगवान मेरी दुकान में खुद आए"

"मै सुबह अपनी दुकान पर पहुंचा ताला टूटा देखकर मुझे लगा कि मेरे पास जो कुछ भी थोड़ा बहुत था वो भी सब लुट गया" ।

" मै दुकान में घुसा तो देखा दो हज़ार रूपए का एक नोट, चीनी के डब्बे के नीचे भगवान ने मेरे लिए रखा हुआ है" ।

"साहब ..... उस दिन दो हज़ार के नोट की कीमत मेरे लिए क्या थी, शायद मै बयान न कर पाऊं ...
 लेकिन भगवान् है साहब ... भगवान् तो है" ।

  बुजुर्ग फिर अपने आप में बड़बड़ाया ....

 भगवान् के होने का आत्मविश्वास उसकी आँखों में साफ़ चमक रहा था ।

 यह सुनकर वहां सन्नाटा छा गया

 बीस जोड़ी आँखे मेजर की तरफ एकटक देख रही थी जिसकी आंख में उन्हें अपने लिए स्पष्ट आदेश था  " खामोश रहो " ।

 मेजर साहब उठे, चाय का बिल जमा किया और बूढ़े चाय वाले को गले लगाते हुए बोले "हाँ बाबा मै जानता हूँ भगवान् है.... और तुम्हारी चाय भी शानदार थी" ।

 और उस दिन उन बीस जोड़ी आँखों ने पहली बार मेजर की आँखों में चमकते हुए पानी के दुर्लभ दृश्य को देखा ।

*💐💐ग्रहण करने योग्य💐💐*
*👨‍👩‍👧‍👦🔔↔️🫠इस कहानी से अनुभव किया कि भगवान तुम्हें कब किसकी मदद के लिए किसका भगवान बनाकर कहाँ भेज देंगे, ये खुद तुम भी नहीं जानते....,इसलिए भगवान में हमेशा विश्वास रखिये!!!*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए पूर्वोपार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्षमार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 17 अगस्त 2022

असली पुण्य

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒असली पुण्य🤝➡️* 

एक दिन राजा भोज गहरी निद्रा में सोये हुए थे। उन्हें उनके स्वप्न में एक अत्यंत तेजस्वी वृद्ध पुरुष के दर्शन हुए।

राजन ने उनसे पुछा- “महात्मन! आप कौन हैं?”

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्षमार्ग को सुरक्षित करें ।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

वृद्ध ने कहा- “राजन मैं सत्य हूँ और तुझे तेरे कार्यों का वास्तविक रूप दिखाने आया हूँ। मेरे पीछे-पीछे चल आ और अपने कार्यों की वास्तविकता को देख!”

राजा भोज उस वृद्ध के पीछे-पीछे चल दिए। राजा भोज बहुत दान, पुण्य, यज्ञ, व्रत, तीर्थ, कथा-कीर्तन करते थे, उन्होंने अनेक तालाब, मंदिर, कुँए, बगीचे आदि भी बनवाए थे। राजा के मन में इन कार्यों के कारण अभिमान आ गया था। वृद्ध पुरुष के रूप में आये सत्य ने राजा भोज को अपने साथ उनकी कृतियों के पास ले गए। वहाँ जैसे ही सत्य ने पेड़ों को छुआ, सब एक-एक करके सूख गए, बागीचे बंज़र भूमि में बदल गए । राजा इतना देखते ही आश्चर्यचकित रह गया।। फिर सत्य राजा को मंदिर ले गया। सत्य ने जैसे ही मंदिर को छुआ, वह खँडहर में बदल गया। वृद्ध पुरुष ने राजा के यज्ञ, तीर्थ, कथा, पूजन, दान आदि के लिए बने स्थानों, व्यक्तियों, आदि चीजों को ज्यों ही छुआ, वे सब राख हो गए।।राजा यह सब देखकर विक्षिप्त-सा हो गया।

सत्य ने कहा-“ राजन! यश की इच्छा के लिए जो कार्य किये जाते हैं, उनसे केवल अहंकार की पुष्टि होती है, धर्म का निर्वहन नहीं।। सच्ची सदभावना से निस्वार्थ होकर कर्तव्यभाव से जो कार्य किये जाते हैं, उन्हीं का फल पुण्य के रूप मिलता है और यह पुण्य फल का रहस्य है।”

इतना कहकर सत्य अंतर्धान हो गए। राजा ने निद्रा टूटने पर गहरा विचार किया और सच्ची भावना से कर्म करना प्रारंभ किया ,जिसके बल पर उन्हें ना सिर्फ यश-कीर्ति की प्राप्ति हुए बल्कि उन्होंने बहुत पुण्य भी कमाया।

*💐💐ग्रहण करने योग्य💐💐*
*👨‍👩‍👧‍👦🤝➡️🔔भव्य आत्माओं , सच ही तो है , सिर्फ प्रसिद्धि और आदर पाने के नज़रिये से किया गया काम पुण्य नहीं देता। हमने देखा है कई बार लोग सिर्फ अखबारों और न्यूज़ चैनल्स पर आने के लिए झाड़ू उठा लेते हैं या किसी गरीब बस्ती का दौरा कर लेते हैं , ऐसा करना पुण्य नहीं दे सकता, असली पुण्य तो हृदय से की गयी सेवा से ही उपजता है , फिर वो चाहे हज़ारों लोगों की की गयी हो या बस किसी एक व्यक्ति की।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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आत्मा ही परमात्मा है

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒आत्मा ही परमात्मा है👨‍👩‍👧‍👦👑*

एक बार संत नामदेव अपने शिष्यों को ज्ञान -भक्ति का प्रवचन दे रहे थे। तभी श्रोताओं में बैठे किसी शिष्य ने एक प्रश्न किया , ” गुरुवर , हमें बताया जाता है कि ईश्वर हर जगह मौजूद है , पर यदि ऐसा है तो वो हमें कभी दिखाई क्यों नहीं देता , हम कैसे मान लें कि वो सचमुच है , और यदि वो है तो हम उसे कैसे प्राप्त कर सकते हैं ?”

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 नामदेव मुस्कुराये और एक शिष्य को एक लोटा पानी और थोड़ा सा नमक लाने का आदेश दिया।

शिष्य तुरंत दोनों चीजें लेकर आ गया।

वहां बैठे शिष्य सोच रहे थे कि भला इन चीजों का प्रश्न से क्या सम्बन्ध , तभी संत नामदेव ने पुनः उस शिष्य से कहा , ” पुत्र , तुम नमक को लोटे में डाल कर मिला दो। “

शिष्य ने ठीक वैसा ही किया।

संत बोले , ” बताइये , क्या इस पानी में किसी को नमक दिखाई दे रहा है ?”

सबने  ‘नहीं ‘ में सिर हिला दिए।

“ठीक है !, अब कोई ज़रा इसे चख कर देखे , क्या चखने पर नमक का स्वाद आ रहा है ?”, संत ने पुछा।

“जी ” , एक शिष्य पानी चखते हुए बोला।

“अच्छा , अब जरा इस पानी को कुछ देर उबालो।”, संत ने निर्देश दिया।

कुछ देर तक पानी उबलता रहा और जब सारा पानी भाप बन कर उड़ गया , तो संत ने पुनः शिष्यों को लोटे में देखने को कहा और पुछा , ” क्या अब आपको इसमें कुछ दिखाई दे रहा है ?”

“जी , हमें नमक के कण दिख रहे हैं।”, एक शिष्य बोला।

संत मुस्कुराये और समझाते हुए बोले ,” जिस प्रकार तुम पानी में नमक का स्वाद तो अनुभव कर पाये पर उसे देख नहीं पाये उसी प्रकार इस तरह प्रत्येक प्राणियों  में तुम्हे ईश्वर हर जगह दिखाई नहीं देता पर तुम उसे अनुभव कर सकते हो।

*💐💐ग्रहण करने योग्य💐💐*

 *👨‍👩‍👧‍👦🤝🔔💪👑जिस तरह अग्नि के ताप से पानी भाप बन कर उड़ गया और नमक दिखाई देने लगा उसी प्रकार तुम भक्ति ,ध्यान और सत्कर्म द्वारा अपने विकारों का अंत कर अपनी आत्मा के भगवान को प्राप्त कर सकते हो।जबतक हम अपनी आत्मा से लिपटे हुये कर्मो को रत्नत्रय से विनाश नहीं करेंगे तब तक हमारी आत्मा का परमात्मा प्रकट नहीं हो सकता।*

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सोमवार, 15 अगस्त 2022

हमारी यात्रा

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒हमारी यात्रा👨‍👩‍👧‍👦👏*

एक महिला  बस में चढ़ी और एक आदमी के बगल में बैठने के क्रम में उसे अपने बैग से कई बार मार दिया।

पुरुष चुप रहा, तो महिला ने उससे पूछा कि जब उसने उसे अपने बैग से मारा तो उसने शिकायत क्यों नहीं की ?

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उस आदमी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया:
"इतनी महत्वहीन बात से परेशान होने की जरूरत नहीं है , क्योंकि हमारी एक साथ की यात्रा बहुत छोटी है , मैं अगले पड़ाव पर उतर रहा हूँ" ।

इस जवाब ने महिला को इतना परेशान किया कि उसने उस आदमी से उसे क्षमा करने के लिए प्रार्थना की और सोचा कि इन शब्दों को तो सोने के अक्षरों में लिखा जाना चाहिए ।

हम में से प्रत्येक को यह समझना चाहिए कि इस दुनिया में हमारा समय इतना कम है कि इसे बेकार तर्कों, ईर्ष्या, दूसरों को क्षमा न करने, असंतोष और बुरे व्यवहार के साथ व्यर्थ करना समय और ऊर्जा की एक हास्यास्पद बर्बादी है ।
क्या किसी ने आपका दिल तोड़ा ? शांत रहो । यात्रा बहुत छोटी है।
क्या किसी ने आपको धोखा दिया, धमकाया या अपमानित किया ? आराम करें, तनावग्रस्त न हों, यात्रा बहुत छोटी है ।

क्या किसी ने बिना वजह आपका अपमान किया ? शांत रहो, इसे नजरअंदाज करो, यात्रा बहुत छोटी है।

क्या किसी ने ऐसी टिप्पणी की जो आपको पसंद नहीं आई  ! शांत रहें , नज़र अंदाज़ करें, क्षमा करें, उन्हें अपनी प्रार्थनाओं में रखें और बिना किसी कारण के उन्हें अभी भी प्यार करें, यात्रा बहुत छोटी है ।

कुछ लोग जो भी समस्याएँ हमारे सामने लाते हैं, वह समस्या तभी होती है जब हम उस पर विचार करें, याद रखें कि हमारी एक साथ यात्रा बहुत छोटी है ।
हमारी यात्रा कितनी लंबी है यह कोई नहीं जानता । कल किसी ने नहीं देखा । कोई नहीं जानता कि हम अपने पड़ाव पर अचानक कब पहुँच जाएँ ।

हमारी एक साथ यात्रा बहुत छोटी है ।

*🫠आइए हम अपने परिवार ,समाज, देश के साथ सभी जीवों की सराहना करें । उन्हें हँसी-खुशी  रखें । उनका सम्मान करें । आइए हम उनको आदरणीय भाव दें, हम स्वयं दयालु, प्रेममय और क्षमाशील बनें ।*
*हम वास्तव में कृतज्ञता और आनंद से भर जाएंगे , आखिरकार हमारी एक साथ यात्रा बहुत छोटी है।*
*हर किसी के साथ अपनी मुस्कान साझा करें... अपना रास्ता चुनें कि आप जितना सुंदर बनना चाहते हैं, उतना ही सुंदर बनें ।*

*🌹👨‍👩‍👧‍👦🤝🔔➡️*मानसिक तनाव से मुक्त होकर जीने का अचूक मंत्र:- हमारी यात्रा बहुत छोटी है।हमारी यात्रा बहुत छोटी है।*👏👏👏👏👏👏

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
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रविवार, 14 अगस्त 2022

लक्ष्य प्राप्ति के लिए

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒लक्ष्य प्राप्ति के लिए👑🤝*

बहुत सी तीरंदाजी प्रतियोगिताएँ जीतने के बाद एक नौजवान तीरंदाज खुद को सबसे बड़ा धनुर्धर मानने लगा । वह जहाँ भी जाता लोगों को उससे मुकाबला करने की चुनौती देता, और उन्हें हरा कर उनका मज़ाक उड़ाता । एक बार उसने एक प्रसिद्द मास्टर को चुनौती देने का फैसला किया और सुबह -सुबह पहाड़ों के बीच स्थित उनके मठ जा पहुंचा ।

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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्षमार्ग को सुरक्षित करें ।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

“मास्टर मैं आपको तीरंदाजी मुकाबले के लिए चुनौती देता हूँ । “, नवयुवक बोला ।

मास्टर ने नवयुवक की चुनौती स्वीकार कर ली ।

मुक़ाबला शुरू हुआ ।

नवयुवक ने अपने पहले प्रयास में ही दूर रखे लक्ष्य के ठीक बीचो -बीच निशाना लगा दिया ।

और अगले निशाने में उसने लक्ष्य पर लगे पहले तीर को ही भेद डाला ।

अपनी योग्यता पर घमंड करते हुए नवयुवक बोला, ” कहिये मास्टर, क्या आप इससे बेहतर करके दिखा सकते हैं ? यदि ‘हाँ ‘ तो कर के दिखाइए, यदि ‘नहीं ‘ तो हार मान लीजिये ।

मास्टर बोले, ” पुत्र, मेरे पीछे आओ !”

मास्टर चलते-चलते एक खतरनाक खाई के पास पहुँच गए ।

नवयुवक यह सब देख कुछ घबड़ाया और बोला, “मास्टर, ये आप मुझे कहाँ लेकर जा रहे हैं ? “

मास्टर बोले, ” घबराओ मत पुत्र, हम लगभग पहुँच ही गए हैं, बस अब हमें इस ज़र्ज़र पुल के बीचो -बीच जाना है । “

नवयुवक ने देखा की दो पहाड़ियों को जोड़ने के लिए किसी ने लकड़ी के एक कामचलाऊ पुल का निर्माण किया था, और मास्टर उसी पर जाने के लिए कह रहे थे।

मास्टर पुल के बीचो – बीच पहुंचे, कमान से तीर निकाला और दूर एक पेड़ के तने पर सटीक निशाना लगाया ।निशाना लगाने के बाद मास्टर बोले, ” आओ पुत्र, अब तुम भी उसी पेड़ पर निशाना लगा कर अपनी दक्षता सिद्ध करो । “

नवयुवक डरते -डरते आगे बढ़ा और बेहद कठिनाई के साथ पुल के बीचों – बीच पहुंचा और किसी तरह कमान से तीर निकाल कर निशाना लगाया पर निशाना लक्ष्य के आस -पास भी नहीं लगा ।

नवयुवक निराश हो गया और अपनी हार स्वीकार कर ली ।


तब मास्टर बोले, ” पुत्र, तुमने तीर -धनुष पर तो नियंत्रण हांसिल कर लिया है पर तुम्हारा उस मन पर अभी भी नियंत्रण नहीं है जो किसी भी परिस्थिति में लक्ष्य को भेदने के लिए आवश्यक है। पुत्र, इस बात को हमेशा ध्यान में रखो कि जब तक मनुष्य के अंदर सीखने की जिज्ञासा है तब तक उसके ज्ञान में वृद्धि होती है लेकिन जब उसके अंदर सर्वश्रेष्ठ होने का अहंकार आ जाता है तभी से उसका पतन प्रारम्भ हो जाता है । “

नवयुवक मास्टर की बात समझ चुका था, उसे एहसास हो गया कि उसका धनुर्विद्या का ज्ञान बस अनुकूल परिस्थितियों में कारगर है और उसे अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है।

*💐💐ग्रहण करने योग्य💐💐*
*उसने तत्काल ही अपने अहंकार के लिए मास्टर से क्षमा मांगी और सदा एक शिष्य की तरह सीखने और अपने ज्ञान पर घमंड ना करने की सौगंध ली ।अत: हमें भी अपने निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विनय पूर्वक दृढ़ संकल्प के साथ कार्य को सम्पन्न करना चाहिए।*

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शनिवार, 13 अगस्त 2022

शिवाजी की सहनशीलता

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒शिवाजी की सहनशीलता💐💐*
👨‍👩‍👧‍👦↔️एक बार छत्रपति शिवाजी महाराज आम के बगीचे से जा रहे थे। अभी वे कुछ दूर ही आगे बढे थे कि एक पत्थर आकर उनके सर पे लगा। शिवाजी क्रोधित हो उठे , और इधर-उधर देखने लगे , पर उन्हें कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था , 
तभी पेड़ों के पीछे से एक बुढ़िया सामने आई और बोली , ” ये पत्थर मैंने फेंका था !”

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-भव्य महान आत्माओं आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के आत्मकल्याण के संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

“आपने ऐसा क्यों किया ?”, शिवाजी ने पूछा।

“क्षमा कीजियेगा महाराज , मैं तो आम के इस पेड़ से कुछ आम तोड़ना चाहती थी , पर बूढी होने के कारण मैं इस पर चढ़ नहीं सकती इसलिए पत्थर मारकर फल तोड़ रही थी , पर गलती से वो पत्थर आपको जा लगा। “, बुढ़िया बोली।

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निश्चित ही कोई साधारण व्यक्ति ऐसी गलती से क्रोधित हो उठता और गलती करने वाले को सजा देता , पर शिवाजी तो महानता के प्रतीक थे , भला वे ऐसा कैसे करते।

उन्होंने सोचा , ” यदि यह साधारण सा एक पेड़ इतना सहनशील और दयालु हो सकता है जो की मारने वाले को भी मीठे फल देता हो तो भला मैं एक राजा हो कर सहनशील और दयालु क्यों नहीं हो सकता ?”

और ऐसा सोचते हुए उन्होंने बुढ़िया को आमों के साथ कुछ स्वर्ण मुद्राएं भी भेंट कर दीं।

*💐💐ग्रहण करने योग्य💐💐*
*🔔👨‍👩‍👧‍👦भव्य आत्माओं➡️ सहनशीलता और दया कमजोरों का नहीं बल्कि वीरों के गुण हैं। आज जबकि छोटी-छोटी बातों पर लोगों का क्रोधित हो जाना और मार-पीट पर उतर आना आम होता जा रहा है ऐसे में शिवाजी के जीवन का यह प्रसंग हमें सिहष्णु और दयालु बनने की सीख देता है।*

शास्त्रों में कहा भी है :

तृणादपि सुनीचेन तरोरिव सहिष्णुना |
अमानिना मानदेन कीर्तनीयो सदा हरिः ||

*हमें भगवान का पवित्र नाम विनम्रता के साथ लेना चाहिए , ये सोचते हुए कि हम रास्ते में पड़े तिनके से भी निम्न हैं। हमें पेड़ से भी अधिक सहनशील होना चाहिए; झूठी प्रतिष्ठा की भावना से मुक्त और दूसरों को सम्मान देने के लिए तत्पर होना चाहिए। ऐसी मनोस्थिति में हमें भगवान के नाम का निरंतर जप करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए पूर्वोपार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्षमार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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