शुक्रवार, 30 जून 2023

सबसे बड़ी भूल

**
*सबसे बड़ी भूल*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सबसे बड़ी भूल ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक   05, 12  तारीख को है। यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

उमा के घर से लगा हुआ  एक  बबूल का पेड़ था। उमा अपने कमरे की खिड़की से उसे देखती रहती थी। एक दिन उसने देखा कि एक चिड़िया बार-बार आ-जा रही है। वह अपनी चोंच में छोटे बड़े तिनके लाती है, उन्हें वह पेड़ की डाल पर रखती जाती है। उमा ने देखा कि एक बड़ा सुंदर घोंसला बनाना शुरू  हो गया है। उसने अपनी माँ से पूछ–माँ! यह चिड़िया कैसा सुंदर घोंसला बना रही है, पर हमारे घर में जो चिड़िया घोंसला बनाती है, वह इतना अच्छा नहीं होता। ऐसा क्यों है? 

माँ ने कहा :– बेटी! पेड़ पर तुम जो घोंसले देख रही हो, वह बया नाम की चिड़िया का है। बया घोंसला बनाने के लिए बड़ी प्रसिद्ध है। इस के घोंसले बड़े ही सुंदर होते हैं। इसका कारण यह है कि यह जी जान से अपने काम में जुटी रहती है। यह अपने काम को पूरी मेहनत और लगन के साथ करती है, इससे इसका काम अच्छा होता है। 

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

यह कहकर माँ तो रसोई में खाना बनाने चली गई। अब उमा को शरारत सूझी। उसने खिड़की में से एक डंडा डाला। डंडे से धीरे-धीरे  हिला कर घोंसला गिरा दिया। इतने में दाना चुग कर चिड़िया वापस आई, उसने देखा कि घोंसला टूटा पड़ा है। कुछ तिनके बिखर गए हैं, कुछ हवा में उड़ गए हैं। अपनी मेहनत यो ही बेकार होती देख बया को बड़ा दुख हुआ। वह थोड़ी देर तक चिं-चिं करके रोती रही। फिर सोचा कि रोने से क्या होता है। रोते रहने से तो कोई काम पूरा हो नहीं सकता। इससे अच्छा तो यह है कि मैं दोबारा से ही घोंसला बनाना शुरू करूं। 

अतः वह फिर अपने काम में जुट गई। 

दूसरे दिन बया जब दाना चुगने गई तो उमा ने फिर उसका घोंसला गिरा दिया। उसने यह न सोचा कि इसमें उसके कितनी परेशानी और दु:ख होगा। दो दिन तक यही होता रहा। बया घोंसला बनाती और उसके जरा हटने पर उमा उसे तोड़ डालती। एक दिन जब उमा घोंसला गिरा रही थी, तो उसकी माँ ने उसे देख लिया।

 उन्होंने कहा:- "उमा तुम यह क्या कर रही हो? किसी को सताते नहीं है, किसी के काम को बिगाड़ते नहीं हैं ? बया चिड़िया है तो क्या तुम्हारे इस काम से उसे बड़ी कठिनाई होती है। तुम्हें उसकी सहायता करनी चाहिए, उसे तंग नहीं करना चाहिए। मनुष्य हो या पशु पक्षी, किसी को परेशान नहीं करते। 

पर माँ की बात का उमा पर कोई असर नहीं हुआ। जैसे ही वह कमरे के बाहर जाती तो वह डंडा उठाकर घोंसला गिराने लगती। पर बया थी कि बार-बार घोंसला बनाते जाती थी। वह सोचती थी, कभी तो उसकी मेहनत सफल होगी। 

माँ ने देखा उमा गलत काम कर रही है। वह उसकी बात नहीं मानती। उन्होंने एक उपाय सोचा। माँ ने उमा के सामने उसकी गुड़िया तोड़ डाली। उस गुड़िया को उमा बहुत प्यार करती थी। प्यारी गुड़िया के दो टुकड़े देखकर वह बहुत दु:खी हुई। वह फूट-फूट कर रोने लगी। 

माँ ने कहा:- मैं तुम्हारी गुड़िया जोड़ दूंगी पर तब जबकि तुम भी बया का घोंसला बनाकर आओगी। अब तक तो उसका पूरा घोंसला बन जाता। तुमने उसकी मेहनत बेकार कर दी। 

माँ की बात सुनकर उमा दौड़कर कमरे से निकली। उसने अपने घर के बगीचे से तिनके और सूखी घास बीनी। वह पिछवाड़े से निकल कर जल्दी से पेड़ के पास पहुंची। वह सोच रही थी कि मैं अभी मिनटों में घोंसला बनाकर तैयार किये देती हूँ। वह डाल पर तिनके रखती, घास से उन्हें लपेटती  जाति, पर तिनके थे कि डाल पर टिकते ही नहीं थे। वह बार-बार कोशिश करती, पर सब कोशिश बेकार हो जाती। अंत में वह खीजकर पेड़  के नीचे बैठ कर रोने लगी।जिसे वह अपना छोटा सा काम समझ रही थी, वह तो बड़ा कठिन काम निकला। थोड़ी देर बाद उसे लगा कि कोई उसके सिर पर हाथ फिरा रहा है। उमा ने पीछे मुड़कर देखा तो माँ सामने खड़ी थी। 

मां कह रही थी –"कोई भी काम बिगाड़ना तो सरल है पर बनाना कठिन होता है। यदि तुम कुछ कर सकती हो तो दूसरों की सहायता करो। किसी को न सताओ और  न ही उसका काम बिगाड़ो"। उमा को लगा कि माँ की बात न मानकर उसने कितनी बड़ी भूल की है।उमा ने अपनी गलती का प्रायश्चित किया कि अब वह सदैव मां की हर आज्ञा मानेगी ओर किसी भी पशु पक्षी को परेशान नहीं करेंगी।

*🎪🔔👪↔️⏰विशेष :- भव्य आत्माओं, आप अपने मनुष्य भव को सुखमय देखना चाहते है तो आज से ही किसी भी जीव को किसी भी प्रकार से परेशान ना करें। यही प्रकृति का नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

गुरुवार, 29 जून 2023

स्व शक्ति कैसे प्राप्त करें

**
*स्व शक्ति कैसे प्राप्त करें*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 स्व शक्ति कैसे प्राप्त करें ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक   05, 12  तारीख को है। यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

ऐसा अधिकतर होता है की जीवन की यात्रा के दौरान हम अपने आप को कई बार दुःख ,तनाव,चिंता,डर,हताशा,निराशा,भय,रोग इत्यादि के मकडजाल में फंसा हुआ पाते हैं  हम तत्कालिक परिस्थितियों के इतने वशीभूत हो जाते हैं  कि दूर-दूर तक देखने पर भी हमें कोई प्रकाश की किरण मात्र भी दिखाई नहीं देती , दूर से चींटी की तरह महसूस होने वाली परेशानी हमारे नजदीक आते-आते हाथी के जैसा रूप धारण कर लेती है  और हम उसकी विशालता और भयावहता के आगे समर्पण कर परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी हो जाने देते हैं,वो परिस्थिति हमारे पूरे वजूद को हिला डालती है ,हमें हताशा,निराशा के भंवर में उलझा जाती है…एक-एक क्षण पहाड़ सा प्रतीत होता है और हममे से ज्यादातर लोग आशा की कोई  किरण ना देख पाने के कारण  हताश होकर परिस्थिति के आगे हथियार डाल देते हैं!

अगर आप किसी अनजान,निर्जन रेगिस्तान मे फँस जाएँ तो उससे निकलने का एक ही उपाए है ,बस -चलते रहें!   अगर आप नदी के बीच जाकर हाथ पैर नहीं चलाएँगे तो निश्चित ही डूब जाएंगे !  जीवन मे कभी ऐसा क्षण भी आता है, जब लगता है की बस अब कुछ भी बाकी नहीं है ,ऐसी परिस्थिति मे अपने  आत्मविश्वास और साहस के साथ सिर्फ डटे रहें क्योंकि-

“हर चीज का हल होता है,आज नहीं तो कल होता है|”

एक बार एक राजा की सेवा से प्रसन्न होकर एक साधू नें उसे एक ताबीज दिया और कहा की राजन  इसे अपने गले मे डाल लो और जिंदगी में कभी ऐसी परिस्थिति आये की जब तुम्हे लगे की बस अब तो सब ख़तम होने वाला है ,परेशानी के भंवर मे अपने को फंसा पाओ ,कोई प्रकाश की किरण नजर ना आ रही हो ,हर तरफ निराशा और हताशा हो तब तुम इस ताबीज को खोल कर इसमें रखे कागज़ को पढ़ना ,उससे पहले नहीं!

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

राजा ने वह ताबीज अपने गले मे पहन लिया !एक बार राजा अपने सैनिकों के साथ शिकार करने घने जंगल मे गया!  एक शेर का पीछा करते करते राजा अपने सैनिकों से अलग हो गया और दुश्मन राजा की सीमा मे प्रवेश कर गया,घना जंगल और सांझ का समय ,  तभी कुछ दुश्मन सैनिकों के घोड़ों की टापों की आवाज राजा को आई और उसने भी अपने घोड़े को एड लगाई,  राजा आगे आगे दुश्मन सैनिक पीछे पीछे!   बहुत दूर तक भागने पर भी राजा उन सैनिकों से पीछा नहीं छुडा पाया !  भूख  प्यास से बेहाल राजा को तभी घने पेड़ों के बीच मे एक गुफा सी दिखी ,उसने तुरंत स्वयं और घोड़े को उस गुफा की आड़ मे छुपा लिया !  और सांस रोक कर बैठ गया , दुश्मन के घोड़ों के पैरों की आवाज धीरे धीरे पास आने लगी !  दुश्मनों से घिरे हुए अकेले राजा को अपना अंत नजर आने लगा ,उसे लगा की बस कुछ ही क्षणों में दुश्मन उसे पकड़ कर मौत के घाट उतार देंगे !  वो जिंदगी से निराश हो ही गया था , की उसका हाथ अपने ताबीज पर गया और उसे साधू की बात याद आ गई !उसने तुरंत ताबीज को खोल कर कागज को बाहर निकाला और पढ़ा !   उस पर्ची पर लिखा था —“यह भी कट जाएगा “

राजा को अचानक  ही जैसे घोर अन्धकार मे एक  ज्योति की किरण दिखी , डूबते को जैसे कोई सहारा मिला !  उसे अचानक अपनी आत्मा मे एक अकथनीय शान्ति का अनुभव हुआ !  उसे लगा की सचमुच यह भयावह समय भी कट ही जाएगा ,फिर मे क्यों चिंतित होऊं !  अपने प्रभु और अपने पर विश्वासरख उसने स्वयं से कहा की हाँ ,यह भी कट जाएगा !

और हुआ भी यही ,दुश्मन के घोड़ों के पैरों की आवाज पास आते आते दूर जाने लगी ,कुछ समय बाद वहां शांति छा गई !  राजा रात मे गुफा से निकला और किसी तरह अपने राज्य मे वापस आ गया !

यह सिर्फ किसी राजा की कहानी नहीं है यह हम सब की कहानी है !हम सभी परिस्थिति,काम ,तनाव के दबाव में इतने जकड जाते हैं की हमे कुछ सूझता नहीं है ,हमारा डर हम पर हावी होने लगता है ,कोई रास्ता ,समाधान दूर दूर तक नजर नहीं आता ,लगने लगता है की बस, अब सब ख़तम ,है ना?

*👨‍👩‍👦‍👦🐒✅💡💯विशेष:-भव्य आत्माओं, हमारे अशुभ कर्म के उदय में  दो मिनट शांति से बैठिये ,थोड़ी गहरी गहरी साँसे लीजिये !  अपने आराध्य को याद कीजिये और यह अनुभव कीजिए कि आराध्य से वह उर्जा शक्ति श्वांस के माध्यम से सम्पूर्ण शरीर में समा रही है।श्वांस छोड़ते समय ऐसा संकल्प करें कि मेरे अंदर के सभी विकार बाहर निकल रहें है। इस प्रकार आप कम से कम पांच मिनट से आधा घंटे तक यह क्रिया कर सकते है।आप देखिएगा एकदम से जादू सा महसूस होगा , और आप उस परिस्थिति से उबरने की शक्ति अपने अन्दर महसूस करेंगे !  विश्व के अनेकों लोगों ने इसे आजमाया  है ! बहुत ही कारगर है ! सफलता का सबसे अच्छा व सस्ता उपाय इससे उत्तम कोई नहीं हो सकता।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

बुधवार, 28 जून 2023

संस्कारों का महत्व

**
*संस्कारो का महत्व*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 संस्कारो का महत्व ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक   05, 12  तारीख को है। यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

👪✍️शाम का धुंधलका बढ़ रहा था तकरीबन सात बज चुके थे बिरजू पैदल अपने कंधे पर अपना मिस्त्री का समान उठा अपने घर की और बढ़ रहा था पेशे से एक मकान बनाने वाला मिस्त्री है बिरजू जोकि रोज चौंक पर जाकर सुबह खड़ा होकर काम करवाने वाले मालिकों की राह तकता था यही उसकी पारिवारिक रोजी रोटी कमाने का एकमात्र साधन है ।

बीते दो दिनों से वह एक बंगले की रिपेयरिंग का काम कर रहा था वही अपना काम निपटाकर वह वापस पैदल घर की और बढ़ रहा था कि अचानक हलवाई की दुकान पर नजरें पड़ते ही उसे अपनी पत्नी सुधा की बात याद आई सुधा ने दो दिनों पहले ही उसे कहा था परसों अपनी दोनों बेटियों का जन्मदिन है भूल मत जाना उनके लिए कुछ मीठा लेते हुए आना ...आज के काम की दिहाड़ी पूरे साढ़े चार सौ रूपए मिली थी उसे साथ में उसके काम से खुश होकर बंगले की मालकिन ने एक चाकलेट का पैकेट भी पकड़ा दिया था क्योंकि सुबह ही काम करते हुए उन्होंने उससे पूछा था घर में कौन कौन है आपके भैया ...तब बिरजू ने मालकिन को बताया था कि उसके अलावा उसकी पत्नी सुधा और दो बेटियां हैं आस्था और आराध्या और आज बडी बेटी का जन्मदिन भी है ...तो आते वक्त उन्होंने बिरजू को चाकलेट का पैकेट दिया था दोनों बच्चियों के लिए...
सेठजी... ढाई सौ ग्राम रसगुल्ले तोल देना... कंधे से समान उतारते हुए बिरजू बोला और पेंट के अंदर की चोर जेब से रूपये निकालकर उसने हलवाई की ओर बढ़ा दिए ।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

हाथ में मिठाई आते ही उसे ऐसा लगा कि जैसे उसने आस्था और आराध्या की लाखों रुपए वाली खुशी खरीद ली हो दोनों को रसगुल्ले बहुत पसंद है मन ही मन मुस्कुराते हुए बिरजू तेजी से कदम बढ़ाने लगा उसे घर जाने की जल्दी जो थी क्योंकि उसकी बेटी का जन्मदिन जो था की अचानक एक गारमेंट की दुकान देखकर उसके कदम रुक से गए फिर सहसा ही उसे याद आया जिस घर में वो मिस्त्री का काम करके लौटा है।

 वहां बंगले मालिक के बच्चे भी तकरीबन उसकी बेटियों की उम्र के ही थे बंगले मालिक के बच्चों ने कितने मंहगे कपड़े पहने हुए थे और हां दोनों बच्चों के पास मोबाइल भी था वो भी अलग-अलग बड़े वाला ...और वो दोनों बात बात पर माम डांड जाने क्या क्या कहकर साहब मैडम को बुला रहे थे कितनी अच्छी किस्मत है उनकी अच्छा बड़ा घर ...नये नये बढ़िया कपड़े बड़ा टीवी मोबाइल और भी जाने क्या क्या था और एक में ... क्या दे पाया अबतक अपने बच्चों को यही सोचते हुए उसकी आंखें भीग गई और मन कुंठित हो गया वह उदास सा हो गया था।

आस्था के पास ले देकर एक ही अच्छा सूट सलवार है जिसे वो हर त्यौहार पर पहन लेती है और फिर बक्से में रख देती है अगली बार के लिए ... 
तो वहीं आराध्या कभी कभी जिद कर जाती है नए कपङो की ....छोटी है ना अभी उसे अभी समझ नहीं है ।

उसने मन ही मन पक्का किया कि कैसे भी जोङ तोङ और मेहनत से रूपए बचाकर वो अपनी दोनों बेटियों को नए कपड़े तो दिलाने ही है अभी मेरी और सुधा की तो चल ही रही है उसने तो शुरू से ही मेरे साथ निभाया है। कभी कोई शिकवा शिकायत नहीं की। उन्हीं दो पुरानी साड़ियों में ही खुश रहती है मेरी तरह ...ले देकर उसके पास भी वही पुरानी पेंट कमीज है जो एकबार एक फ्लैट में काम करते हुए खुशी से फ्लैट मालिक ने उसे दी थी मगर मेरी बेटियां ... आखिर उन्हें दे क्या पाता हूं कभी दिन त्योहार पर नये कपड़े नहीं लेकर दे पाया अबतक ...आज मेरी बेटी का जन्मदिन है आज भी ...
उसकी मिठाई खरीदने की खुशी दूर उङ चुकी थी।

सोचते सोचते बिरजू घर आ पहुंचा दरवाजे पर कदमों की आहट से रोज की भांति सुधा तुरंत बाहर निकल आई थी और रोज की ही भांति एक आत्मीय मुस्कान के साथ उसने बिरजू का मुस्कुराते हुए स्वागत किया।
बिरजू ने पूछा ही था की आस्था और आराध्या के बारे में कि भीतर से दोनो पापाजी पापाजी कहते हुए सामने आ खङी हो गई और उसे स्नेह पूर्वक पकड़ कर अंदर ले आई आस्था जहां दौड़कर पानी लाई थी प्लेट में सजाकर तो वहीं आराध्या तो लिपट ही गई थी उससे... अचानक बिरजू की आंखों मे आज दोपहर का दृश्य तैर गया।

जब वह उस बंगले की मालकिन के यहां दीवार रिपेयरिंग कर रहा था तो मैडम ने अपनी बेटी को एक कप चाय बनाने के लिए कहा था क्योंकि उनका सिर दर्द कर रहा था लेकिन उनकी बेटी भिनभिनाती पैर पटकती सोफे पे पसर गई थी टीवी के सामने ये कहके कि उसका पसंदीदा सीरियल आ रहा है तुम खुद बना लो।

ये सब स्मरण होते ही बिरजू के मन से सारी कुंठा हवा हो गई उसने मिठाई का पैकेट आस्था को थमाया और आराध्या को चाकलेट का और आस्था आराध्या को चूमते हुए कहा जन्मदिन की शुभकामनाएं बेटा ईश्वर तुम्हें हमेशा खुश रखे।

अपनी पसंदीदा मिठाई चाकलेट पाकर दोनों बेटियों खुशी से चहकने लगी ये देखकर बिरजू और उसकी पत्नी सुधा भी मुस्कराने लगे बिरजू के मन में आ रही कुंठा ने अब अपनी जगह संतुष्टि को दे दी थी वो समझ गया था कि
संस्कार और अपनापन ही असली धन है जो उसके पास एक परिवार के रूप में भरपूर मौजूद है।

*हर माता पिता को ये समझना होगा,आपका बच्चा क्या कर रहा है क्या नही।* 

*🕉️🔔🎪👪↔️विशेष :- भव्य आत्माओं, परिवार में हम माता पिता का प्रथम कर्तव्य है कि अपनी संतान को अपने धर्म के अनुसार संस्कारवान बनाएं और भारत के विभिन्न धर्मो के लोगों के बीच किस प्रकार संतुलन बनाना है इसका भी ज्ञान देना आवश्यक है। अगर हमनें अपने जीवन में अपनी संतान को संस्कारित नहीं किया तो यह मनुष्य भव में हमने सबसे बड़ा अपराध किया। अतः स्व संस्कारों का पालन करते हुए परिवार के सदस्यों के संस्कारों के पालन में सहयोगी बनकर जीवन सार्थक करें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

सोमवार, 26 जून 2023

पिता व पुत्र

**
*पिता और पुत्र*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒पिता और पुत्र  ✍️🐒*

एक बार पिता और पुत्र जलमार्ग से यात्रा कर रहे थे, और दोनों रास्ता भटक गये। फिर उनकी नौका भी उन्हें ऐसी जगह ले गई, जहाँ दो टापू आस-पास थे और फिर वहाँ पहुंच कर उनकी नौका टूट गई। पिता ने पुत्र से कहा, अब लगता है हम दोनों का अंतिम समय आ गया है। दूर-दूर तक कोई सहारा नहीं दिख रहा है।

अचानक उन्हें एक उपाय सूझा, अपने पुत्र से कहा कि वैसे भी हमारा अंतिम समय नज़दीक है तो क्यों न हम ईश्वर की प्रार्थना करें। उन्होने दोनों टापू आपस में बाँट लिए। एक पर पिता और एक पर पुत्र, और दोनों अलग-अलग ईश्वर की प्रार्थना करने लगे।

पुत्र ने ईश्वर से कहा: हे भगवन, इस टापू पर पेड़-पौधे उग जाए जिसके फल-फूल से हम अपनी भूख मिटा सकें। प्रार्थना सुनी गयी, तत्काल पेड़-पौधे उग गये और उसमें फल-फूल भी आ गये।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

उसने कहा ये तो चमत्कार हो गया। फिर उसने प्रार्थना की, एक सुंदर स्त्री आ जाए जिससे हम यहाँ उसके साथ रहकर अपना परिवार बसाएँ। तत्काल एक सुंदर स्त्री प्रकट हो गयी।

अब उसने सोचा कि मेरी हर प्रार्थना सुनी जा रही है, तो क्यों न हम ईश्वर से यहाँ से बाहर निकलने का रास्ता माँगे? उसने ऐसा ही किया। उसने प्रार्थना की, एक नई नाव आ जाए जिसमें सवार होकर हम यहाँ से बाहर निकल सकें। तत्काल नाव प्रकट हुई, और पुत्र स्त्री के साथ उसमें सवार होकर बाहर निकलने लगा।

तभी एक आकाशवाणी हुई, बेटा तुम अपने पिता को छोड़कर जा रहे हो? अपने पिता को साथ नहीं लोगे?

तो पुत्र ने कहा, उनको छोड़ो, प्रार्थना तो उन्होंने भी की, लेकिन आपने उनकी एक भी नहीं सुनी। शायद उनका मन पवित्र नहीं है, तो उन्हें इसका फल भोगने दो ना?

आकाशवाणी कहती है: बेटा, क्या तुम्हें पता है, कि तुम्हारे पिता ने क्या प्रार्थना की?

पुत्र बोला: नहीं।

 _*तो सुनो: तुम्हारे पिता ने एक ही प्रार्थना की, हे भगवन! मेरा बेटा आपसे जो माँगे, उसे दे देना।*_

*विशेष :- भव्य आत्माओं , मां के चरणों में स्वर्ग होता है, मां बिना जीवन अधूरा है, लेकिन अगर मां जीवन की सच्चाई है तो पिता जीवन का आधार, मां बिना जीवन अधूरा है तो पिता बिना अस्तित्व अधूरा। जीवन तो मां से मिल जाता है लेकिन जीवन के थपेड़ो से निपटना तो पिताजी से ही आता है, जिंदगी की सच्चाई के धरातल पर जब बच्चा चलना शुरू करता है तो उसके कदम कहां पड़े और कहां नहीं.. ये समझाने का काम पिता ही करते हैं।*
*पिता अगर पास है तो किसी बच्चे को असुरक्षा नहीं होती है। पिता एक वट वृक्ष है जिसके पास खड़े होकर बड़ी से बड़ी परेशानी छोटी हो जाती है।* 
*पिता भी मां की तरह ही बच्चों से प्यार करते हैं, लेकिन उनका स्वभाव और जिम्मेदारी मां से अलग होती हैं, जहां मां से बच्चे मे प्रेम, करुणा, अपनापन आदि गुण विकसित होते हैं, पिता से बच्चा सख्त होना सीखता है, अनुशासन सीखता है, इसका ये अभिप्राय नहीं है कि मां कमजोर है या कुछ और...पिता को बच्चों के प्रति प्यार जताना नही आता या शायद वो जताता नहीं ......बच्चों का मन अबोध होता है उनके लिए मां बाप मे कोई भेद नहीं पर मां ज्यादा समय साथ होती है, बिलकुल परछाई की तरह और प्राकृतिक रूप से भी मां से जुड़ाव स्वभाविक होता है, और जब तक बच्चे पिता की भावनाओ को समझने के काबिल होते हैं वो दुनियादारी और जिम्मेदारी के बोझ तले आ जाते हैं, बस सोचते रह जाते हैं पिता के प्यार और त्याग को, सोचते रह जाते हैं उन्हें धन्यवाद देने को और पिता छोड़ जाते हैं हमेशा के लिए, और उस वक्त इस घनी परछाई की छाया की महत्ता पता चलती है, पर तब तक समय बीत चुका होता है, बस हम अश्रुपूर्ण आंखों से यही कह सकते हैं *पिताजी में भी आप जैसा संस्कारवान बनूंगा।* 

"किसी ने क्या खूब चन्द पंक्तिया लिखी हैं"
जो पिता के पैरों को छूता है *वो कभी गरीब नहीं होता।* 

जो मां के पैरों को छूता है  वो कभी बदनसीब नही होता।

जो भाई के पैराें को छुता हें वो कभी गमगीन नही होता।

जो बहन के पैरों को छूता है वो कभी चरित्रहीन नहीं होता।

जो गुरू के पैरों को छूता है उस जैसा कोई खुशनसीब नहीं होता.......

 *अच्छा दिखने के लिये मत जिओ बल्कि अच्छा बनने के लिए जिओ।।* 

 
_*कर सके तो लोगों पर तीन एहसान अवश्य कीजिए:*_ 
 _*1.फायदा नही पहुंचा सकते तो नुकसान भी ना पहुंचाए, 2.खुशी नही दे सकते तो दुख भी ना पहुंचाए और  3.तारीफ नही कर सकते तो बुराई भी ना करें।*_ 

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

रविवार, 25 जून 2023

हमारे सुख व दुःख का कारण

**
*हमारे सुख व दुःख का कारण*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 हमारे सुख व दुःख का कारण ✍️🐒*


_💡एक राजा बड़ा धर्मात्मा, न्यायकारी और परमेश्वर का भक्त था। उसने ठाकुरजी का मंदिर बनवाया और एक ब्राह्मण को उसका पुजारी नियुक्त किया । वह ब्राह्मण बड़ा सदाचारी, धर्मात्मा और संतोषी था। वह राजा से कभी कोई याचना नहीं करता था, राजा भी उसके स्वभाव पर बहुत प्रसन्न था। उसे राजा के मंदिर में पूजा करते हुए बीस वर्ष गुजर गये। उसने कभी भी राजा से किसी प्रकार का कोई प्रश्न नहीं किया ।_

_🔅राजा के यहाँ एक लड़का पैदा हुआ। राजा ने उसे पढ़ा लिखाकर विद्वान बनाया और बड़ा होने पर उसकी शादी एक सुंदर राजकन्या के साथ करा दी। शादी करके जिस दिन राजकन्या को अपने राजमहल में लाये उस रात्रि में राजकुमारी को नींद न आयी । वह इधर-उधर घूमने लगी जब अपने पति के पलंग के पास आयी तो क्या देखती है कि हीरे जवाहरात जड़ित मूठेवाली एक तलवार पड़ी है ।  जब उस राजकन्या ने देखने के लिए वह तलवार म्यान में से बाहर निकाली, तब तीक्ष्ण धारवाली और बिजली के समान प्रकाशवाली तलवार देखकर वह डर गयी व डर के मारे उसके हाथ से तलवार गिर पड़ी और राजकुमार की गर्दन पर जा लगी । राजकुमार का सिर कट गया और वह मर गया ।_

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

_🔅राजकन्या पति के मरने का बहुत शोक करने लगी । उसने परमेश्वर से प्रार्थना की कि 'हे प्रभु ! मुझसे अचानक यह पाप कैसे हो गया ? पति की मृत्यु मेरे ही हाथों हो गयी । आप तो जानते ही हैं, परंतु सभा में मैं सत्य न कहूँगी क्योंकि इससे मेरे माता-पिता और सास-ससुर को कलंक लगेगा तथा इस बात पर कोई विश्वास भी न करेगा ।'  प्रातःकाल में जब पुजारी कुएँ पर स्नान करने आया तो राजकन्या ने उसको देखकर विलाप करना शुरु किया और इस प्रकार कहने लगीः "मेरे पति को कोई मार गया ।" लोग इकट्ठे हो गये और राजा साहब आकर पूछने लगेः "किसने मारा है ?"_

_🔅वह कहने लगीः "मैं जानती तो नहीं कि कौन था । परंतु उसे ठाकुरजी के मंदिर में जाते देखा था" राजा समेत सब लोग  ठाकुरजी के मंदिर में आये तो ब्राह्मण को पूजा करते हुए देखा ।  उन्होंने उसको पकड़ लिया और पूछाः "तूने राजकुमार को क्यों मारा ?"  ब्राह्मण ने कहाः "मैंने राजकुमार को नहीं मारा । मैंने तो उनका राजमहल भी नहीं देखा है । इसमें ईश्वर साक्षी हैं।  बिना देखे किसी पर अपराध का दोष लगाना ठीक नहीं ।"_

_🔅ब्राह्मण की तो कोई बात ही नहीं सुनता था। कोई कुछ कहता था तो कोई कुछ.... राजा के दिल में बार-बार विचार आता था कि यह ब्राह्मण निर्दोष है परंतु बहुतों के कहने पर राजा ने ब्राह्मण से कहाः,  "मैं तुम्हें प्राणदण्ड तो नहीं देता लेकिन जिस हाथ से तुमने मेरे पुत्र को तलवार से मारा है, तेरा वह हाथ काटने का आदेश देता हूँ ।"_

_🔅ऐसा कहकर राजा ने उसका हाथ कटवा दिया । इस पर ब्राह्मण बड़ा दुःखी हुआ और राजा को अधर्मी जान उस देश को छोड़कर विदेश में चला गया । वहाँ वह खोज करने लगा कि कोई विद्वान ज्योतिषी मिले तो बिना किसी अपराध हाथ कटने का कारण उससे पूछूँ ।_

_🔅किसी ने उसे बताया कि काशी में एक विद्वान ज्योतिषी रहते हैं। तब वह उनके घर पर पहुँचा । ज्योतिषी कहीं बाहर गये थे, उसने उनकी धर्मपत्नी से पूछाः "माताजी ! आपके पति ज्योतिषीजी महाराज कहाँ गये हैं ?"  तब उस स्त्री ने अपने मुख से अयोग्य, असह्य दुर्वचन कहे, जिनको सुनकर वह ब्राह्मण हैरान हुआ और मन ही मन कहने लगा कि "मैं तो अपना हाथ कटने का कारण पूछने आया था, परंतु अब इनका ही हाल पहले पूछूँगा ।"_

_🔅इतने में ज्योतिषी आ गये। घर में प्रवेश करते ही ब्राह्मणी ने अनेक दुर्वचन कहकर उनका तिरस्कार किया । परंतु ज्योतिषीजी चुप रहे और अपनी स्त्री को कुछ भी नहीं कहा। तदनंतर वे अपनी गद्दी पर आ बैठे । ब्राह्मण को देखकर ज्योतिषी ने उनसे कहाः "कहिये, ब्राह्मण देवता ! कैसे आना हुआ ?"  "आया तो था अपने बारे में पूछने के लिए परंतु पहले आप अपना हाल बताइये कि आपकी पत्नी अपनी जुबान से आपका इतना तिरस्कार क्यों करती है ? जो किसी से भी नहीं सहा जाता और आप सहन कर लेते हैं, इसका कारण है ?"_

_🔅"यह मेरी स्त्री नहीं, मेरा कर्म है । दुनिया में जिसको भी देखते हो अर्थात् भाई, पुत्र, शिष्य, पिता, गुरु, सम्बंधी - जो कुछ भी है, सब अपना कर्म ही है । यह स्त्री नहीं, मेरा किया हुआ कर्म ही है, और यह भोगे बिना कटेगा नहीं ।  *अवश्यमेव भोक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभम्। नाभुक्तं क्षीयते कर्म  कल्पकोटिशतेरपि॥* 'अपना किया हुआ जो भी कुछ शुभ-अशुभ कर्म है, वह अवश्य ही भोगना पड़ता है । बिना भोगे तो सैंकड़ों-करोड़ों कल्पों के गुजरने पर भी कर्म नहीं टल सकता ।' इसलिए मैं अपने कर्म खुशी से भोग रहा हूँ और अपनी स्त्री की ताड़ना भी नहीं करता, ताकि आगे इस कर्म का फल न भोगना पड़े ।"_

_🔅"महाराज ! आपने क्या कर्म किया था ?"   "सुनिये, पूर्वजन्म में मैं कौआ था और मेरी स्त्री गधी थी। इसकी पीठ पर फोड़ा था, फोड़े की पीड़ा से यह बड़ी दुःखी थी और कमजोर भी हो गयी थी, फोड़े में  कीड़े पड़ गये जिन्हें खाने के लिये  मैं इसके फोड़े में चोंच मारकर खा लेता । इससे जब दर्द के कारण यह कूदती थी आखिर त्रस्त होकर यह गाँव से दस-बारह मील दूर जंगल में चली गयी । वहाँ भी इसे देखते ही मैं इसकी पीठ पर जोर-से चोंच मारी तो मेरी चोंच इसकी हड्डी में चुभ गयी । इस पर इसने अनेक प्रयास किये, फिर भी चोंच न छूटी । मैंने भी चोंच निकालने का बड़ा प्रयत्न किया मगर न निकली । 'पानी के भय से ही यह दुष्ट मुझे छोड़ेगा ।' ऐसा सोचकर यह गंगाजी में प्रवेश कर गयी परंतु वहाँ भी मैं अपनी चोंच निकाल न पाया। आखिर में यह बड़े प्रवाह में प्रवेश कर गयी । गंगा का प्रवाह तेज होने के कारण हम दोनों बह गये और बीच में ही मर गये। तब गंगा जी के प्रभाव से यह तो ब्राह्मणी बनी और मैं बड़ा भारी ज्योतिषी बना । अब वही मेरी स्त्री हुई । जो कुछ दिनों और अपने मुख से गाली निकालकर मुझे दुःख देगी, लेकिन मैंने चोंच इसको दर्द पहुंचाने के लिये नहीं मारी थी, अतः इसकी समझ भी ठीक होगी और मैं भी अपने पूर्वकर्मों का फल समझकर सहन करता रहूँगा, इसका दोष नहीं मानता क्योंकि यह किये हुए कर्मों का ही फल है । इसलिए मैं शांत रहता हूँ और प्रतिक्षा में हूँ कि कभी तो इसका स्वभाव अच्छा होगा !! अब अपना प्रश्न पूछो ? "_

_🔅ब्राह्मण ने अपना सब समाचार सुनाया और पूछाः "अधर्मी पापी राजा ने मुझ निरपराध का हाथ क्यों कटवाया ?"  ज्योतिषीः "राजा ने आपका हाथ नहीं कटवाया, आपके कर्म ने ही आपका हाथ कटवाया है ।"_

_🔅"किस प्रकार ?"   "पूर्वजन्म में आप एक तपस्वी थे और राजकन्या गौ थी तथा राजकुमार कसाई था । वह कसाई जब गौ को मारने लगा, तब गौ बेचारी जान बचाकर आपके सामने से जंगल में भाग गयी । पीछे से कसाई आया और आप से पूछा कि "इधर कोई गाय तो नहीं गई है ?"_

_🔅आपने जिस तरफ गौ गयी थी, उस तरफ आपने हाथ से इशारा किया तो उस कसाई ने जाकर गौ को मार डाला । इतने में  जंगल से शेर आया और गौ एवं कसाई दोनों को खा गया ।  कसाई को राजकुमार और गौ को राजकन्या का जन्म मिला एवं पूर्वजन्म के किये हुए उस कर्म ने एक रात्रि के लिए उन दोनों को इकट्ठा किया । क्योंकि कसाई ने गौ को हंसिये से मारा था, इसी कारण राजकन्या के हाथों अनायास ही तलवार गिरने से राजकुमार का सिर कट गया और वह मर गया। इस तरह अपना फल देकर कर्म निवृत्त हो गया । तुमने जो हाथ का इशारा रूप कर्म किया था, उस पापकर्म ने तुम्हारा हाथ कटवा दिया है । इसमें तुम्हारा ही दोष है किसी अन्य का नहीं, ऐसा निश्चय कर सुखपूर्वक रहो ।"_

*🕉️👪🔑🔔✍️विशेष :- भव्य आत्माओं,🔅कितना सहज है ज्ञान संयुक्त जीवन ! यदि हम इस कर्म सिद्धान्त को मान लें और जान लें तो पूर्वकृत घोर से घोर कर्म का फल भोगते हुए भी हम दुःखी नहीं होंगे, बल्कि अपने चित्त की समता बनाये रखने में सफल होंगे ! हमें हमेशा यह ध्यान में रखना चाहिए कि वर्तमान में हम मनसे वचनों से व शरीर से जैसा कर्म करेंगे वैसा ही भविष्य में फल प्राप्त होगा।*    
    
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

शनिवार, 24 जून 2023

जियो और जीने दो

**
*जियो और जीने दो*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒जियो और जीने दो  ✍️🐒*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह का अंतिम कल्याणक*
*🔔🪔 आषाढ़ शुक्ल सप्तमी, दिनांक 25 जून  रविवार कलि काल के 22 वें तीर्थंकर अरिष्ट नेमीनाथ  भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।  तीर्थंकर नेमिनाथ जी का  मोक्ष कल्याणक  महोत्सव गिरनार पर्वत पर हुआ था | आज के ही दिन रात्रि के प्रारंभ काल व चित्रा नक्षत्र में 535 मुनिराजों के साथ मोक्ष पद को प्राप्त किया था | यहाँ से 72 करोड़ 700 मुनि सिद्ध भये | साक्षात दर्शन कर अपने पुण्य को गाढ़ा करें इस पवित्र पर्वत की वंदना कर---🛕*
*✍️यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

 “सभी प्राणियों का जीवन अनमोल हैं |सभी को जीने का अधिकार है।” यह एक ज्ञानवर्धक व शिक्षाप्रद कहानी हैं जो हमें एक अनमोल ज्ञान देती हैं साथ सभी प्राणियों का जीवन महत्वपूर्ण हैं इसका पाठ सिखाती हैं |

सभी प्राणियों का जीवन अनमोल हैं
अवंतिका नगर के नागरिक बहुत परेशान थे क्यूंकि उनकी फसल जब पनपने को होती | पक्षी उसे खा जाया करते थे | फसल बचाने के लिए उन्होंने सोचा कि कोई ऐसी युक्ति निकाली जानी चाहिये जिससे यह व्यर्थ का कार्य भार कम हो | 

इस हेतु नगर की प्रजा राजा के पास गयी | यह सुन राजा को बहुत क्रोध आया | समस्या की गंभीरता को समझते हुए राजा ने सैनिको को आदेश दिया कि नगर के सारे पक्षियों को मार दिया जायें | सैनिकों ने आदेश माना और नगर के सभी पक्षियों को मार दिया |

सभी नागरिक खुश हो गये और खेती की नयी तैयारी में जुट गये | बहुत अरमानों के साथ बीज बोये गये और पक्षियों का डर ना होने के कारण किसी को पहरेदारी नहीं करनी पड़ी लेकिन जब फसल काटने का वक्त आया तो अगले वर्ष अनाज बोने तक के लिए भी अनाज नहीं मिला | यह देख सभी अचरज में पड़ गए | फिर से राजा के पास पहुँचे | तब राजा ने समस्या का पता लगवाया | जिसके बाद सभी को ज्ञात हुआ कि मिट्टी में जो कीड़े थे | उसने सभी बीजों को खा लिया | पहले पक्षी उन कीड़ों को खा लेते थे जिससे फसल की रक्षा होती थी | पक्षी ना होने के कारण नागरिकों के भूखे मरने की नौबत आ गई थी | यह जानकर सभी नगर वासियों एवम राजा को अपनी भूल का अहसास हुआ |

 समस्या के समाधान के लिये सभी नगर वासियों ने पक्षी पाले | साथ ही पास के नगर से पक्षी लाये गये | तब कही जाकर कुछ वर्षों के बाद नगर की व्यवस्था में सुधार आया |

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

इससे सभी को ज्ञान मिला कि पृथ्वी में सभी प्राणी का विशेष महत्त्व हैं | सभी जीवन के लिए एक दुसरे पर निर्भर करते हैं | पृथ्वी में कोई भी प्राणी का जन्म व्यर्थ नहीं हैं इसलिए सभी का यथायोग्य सम्मान करना चाहिये | संतुलन बनाये रखने के लिए सभी को एक दुसरे का सहयोग कर जीवन व्यापन करना चाहिये | यह सृष्टि का चक्र हैं जिसे किसी को भी तोड़ना नहीं चाहिये | अगर ऐसा करते हैं तो सभी को बहुत बड़ी विपदा का सामना करना पड़ता हैं | जिस प्रकार नगरवासियों को करनी पड़ी  | प्रकृति के नियमों के विरुद्ध चलना विनाश का रास्ता हैं |

यह एक शिक्षाप्रद हिंदी कहानी हैं जिससे सभी को ज्ञान मिलता है | हम सभी को हर प्राणी का आदर करना चाहिये | और सभी का यथायोग्य सहयोग कर जीवन व्यतीत करना चाहिये |सभी को जियो और जीने दो का अधिकार का पालन करना चाहिए। अपने विषय भोगों के लिए इन्हें नहीं मारना चाहिए। ऐसा करने से प्रकृति कूपित होती है जिस कारण से बाढ़, अकाल, अतिवृष्टि जैसी अनेक विपत्तियों का सामना करना पड़ता है। अतः ऐसी विषम परिस्थितियों से बचने के लिए हमें प्रकृति विरोधी कार्य नहीं करना चाहिए।

*👪⏰↔️🔔🙏विशेष :- भव्य आत्माओं, आज प्रकृति में जैसा वातावरण रहता है उसी के अनुसार उस स्थान पर जीव उत्पन्न होते है। आज सम्पूर्ण भारत में विभिन्न उद्योगों के कारण प्रकृति का विनाश हो रहा है। आज हमारा प्रयास यह होना चाहिए कि हमारे उपयोग में आने वाली वस्तुओं के द्वारा प्रकृति का विनाश ना हो।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

शुक्रवार, 23 जून 2023

आशीर्वाद या दुर्भाग्य

**
*आशीर्वाद या दुर्भाग्य*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 आशीर्वाद या दुर्भाग्य ✍️🐒*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में *🔔🪔 आषाढ़ शुक्ल षष्ठी, दिनांक 24 जून  शनिवार कलिकाल के 24 वें तीर्थंकर  शासन नायक वर्धमान स्वामीजी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है। गर्भ कल्याणक  महोत्सव कुण्डलपुर में हुआ था | आज के ही दिन रात्रि के पिछले प्रहर व उत्तराषाढ नक्षत्र में मातारानी त्रिशला के गर्भ में अवतीर्ण हुए थे |  --- 🛕* 
*🔔🪔 आषाढ़ शुक्ल सप्तमी, दिनांक 25 जून  रविवार कलिकाल के 22 वें तीर्थंकर अरिष्ट नेमीनाथ  भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।  तीर्थंकर नेमिनाथजी का  मोक्ष कल्याणक  महोत्सव गिरिनार पर्वत पर हुआ था | आज के ही दिन रात्रि के प्रारंभ काल व चित्रा नक्षत्र में 535 मुनिराजों के साथ मोक्ष पद को प्राप्त किया था | यहाँ से 72 करोड़ 700 मुनि सिद्ध भये | साक्षात दर्शन कर अपने पुण्य को गाढ़ा करें इस पवित्र पर्वत की वंदना कर---🛕*
*✍️यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

*✍️आइये आज हम इस कहानी के माध्यम से स्वयं का आकलन करें हमें कितना आशीर्वाद व दुर्भाग्य प्राप्त हो रहा है।✍️*
एक गांव में एक गरीब बूढ़ा रहता था। वह बहुत गरीब था, फिर भी उनके पास एक सुंदर सफेद घोड़ा था। इसके कारण, राजा के लोग भी उनसे ईर्ष्या करते थे।

उसे उस सफेद घोड़े को बेचने के लिए, राजा के तरफ से अच्छी कीमत दी गई थी। लेकिन बूढ़ा आदमी यह कहते हुए मना कर देता था, “यह मेरे लिए सिर्फ घोड़ा नहीं है। वह एक व्यक्ति और मेरा अच्छा दोस्त है। क्या आप किसी व्यक्ति या दोस्त को बेच सकते हैं। नहीं यह हमारे लिए संभव नहीं है।”

एक दिन सुबह जब वह खलिहान घर मैं गया।तो उसने देखा कि घोड़ा वहां नहीं है।यह खबर गांव में जल्दी फैल गई और पूरा गांव उनके घर पर जमा हो गया।

गांव वालों ने कहा,“तुम मूर्ख बूढ़े हो।हर कोई उस घोड़े को पाना चाहता था।सभी जानते थे कि, किसी दिन यह घोड़ा चोरी हो जाएगा।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

आप उस घोड़े को अच्छी कीमत पर बेच सकते थे।फिर भी आपने उसे रखा।अब घोड़ा चला गया है,यह आपका दुर्भाग्य है।”

बूढ़े आदमी ने जवाब दिया,“सच तो यह है कि घोड़ा स्थिर नहीं है। बाकी सब कुछ जो तुम कहते हो वह एक फैसला है।आप कैसे जानते हैं यह दुर्भाग्य है या नहीं?”

लोगों ने जवाब दिया,“हमें मूर्ख मत बनाओ।आपका सफेद घोड़ा चला गया है,यह आपका दुर्भाग्य है।”

गांव के लोग उस पर हंसे और चले गए।उन्होंने कहा कि वह पागल है।वह उस घोड़े को बेच सकता था।और गरीबी में जीने की वजह एक बेहतर जीवन जी सकता था।

कुछ दिनों के बाद,सफेद घोड़ा जंगल से वापस आया।उसके साथ कुछ और जंगली घोडे भी आए।

गांव के लोग फिर उनके घर पर इकट्ठा हो गए और बोले,“आप सही थे,यह दुर्भाग्य नहीं बल्कि आशीर्वाद है।अब आपके पास और भी सुंदर घोड़े हैं।आप उन्हें प्रशिक्षित कर सकते हैं और बेच सकते हैं।”

बुढे ने उत्तर दिया, “फिर से आप बहुत दूर जा रहे हो।बस आप यह कहे की घोड़ा वापस आ गया है और अधिक घोड़ों का होना एक आशीर्वाद है।यह केवल एक टुकड़ा है,एक दिन यह भी गुजर जाएगा।”

इस बार गांव के लोग चुप रहे। बूढ़े आदमी के इकलौते बेटे ने घोड़ों को प्रशिक्षित करना शुरू कर दिया।कुछ दिनों के बाद उन जंगली घोड़ों को प्रशिक्षण देने के दौरान,बूढ़े का बेटा घोड़े से गिर गया और उसके पैर टूट गया।

इस बात को सुनकर गांव के लोग इकट्ठे हो गए और बोले,“आप ठीक कह रहे थे,अधिक घोडे होना कोई आशीर्वाद नहीं है।अब तुम्हारा बेटा इससे घायल हुआ है।इस बुढ़ापे में,अपने अपाहिज बेटे का क्या करोगे?”

बूढ़े ने उत्तर दिया,“इतनी दूर मत जाओ।इतना ही कहो,कि मेरे बेटे की टांग टूट गई है।कौन जानता है,कि यह दुर्भाग्य है या आशीर्वाद?किसी को नहीं मालूम।”

एक महीने बाद,युद्ध के कारण,गांव के सभी युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए मजबूर होना पड़ा।इसीलिए युवाओं के माता-पिता और गांव के सभी लोग रो रहे थे।

गांव के लोग बूढ़े आदमी के पास आए और कहां,“हमारे बेटे हमेशा के लिए चले गए।आपके बेटे की चोट लगना वरदान साबित हुई है।कम से कम वह जिंदा है और आपके साथ रह रहा है।”

बूढ़े ने उत्तर दिया, “कोई नहीं जानता। इतना ही कहो,हमारे बेटे को सेना में भर्ती होने के लिए मजबूर किया गया और आपके बेटे को मजबूर नहीं किया गया। लेकिन कोई नहीं जानता यह आशीर्वाद है या दुर्भाग्य है।केवल भगवान जानता है।”

 हमें किसी भी स्थिति का न्याय केवल उसी से नहीं करना चाहिए,जो हम देखते हैं।हम कभी यह नहीं जानते कि आगे क्या होने वाला है..!!

   *🔔✍️👪⏰👣विशेष:-भव्य आत्माओं,इस कहानी में बताए गये आशीर्वाद को प्राप्त करना है तो आपको अभी से ही अपने सच्चे धर्म के अनुसार आचरण करना होगा। वरना काल चक्र में हम कितना भी चाहें कि आशीर्वाद प्राप्त हो किंतु हमें दुर्भाग्य ही मिलेगा। यही प्रकृति का अटूट नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

गुरुवार, 22 जून 2023

दयावान बनें

*🔔*
*दयावान बनें*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒दयावान बनें  ✍️🐒* 

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में *🔔🪔 आषाढ़ शुक्ल षष्ठी, दिनांक 24 जून  शनिवार कलिकाल के 24 वें तीर्थंकर  शासन नायक वर्धमान स्वामीजी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है। 🛕* 
*🔔🪔 आषाढ़ शुक्ल सप्तमी, दिनांक 25 जून  रविवार कलिकाल के 22 वें तीर्थंकर अरिष्ट नेमीनाथ  भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*✍️यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

*जब मैं छोटा था, तो मेरी मां एक प्रौढ़ सब्ज़ीवाली से हमेशा घर के लिए सब्जियां लिया करती थीं।*

*जो लगभग रोज ही हमारे घर एक बड़े टोकरे में ढेर सारी सब्जियां लेकर आया करती थी,इस रविवार को वह पालक के बंडल भी लेकर आयी, और दरवाज़े पर बैठ गई।*
 
*मां ने पालक के दो चार बंडल हाथ में लेकर सब्ज़ीवाली से पूछा:-पालक कैसे दी?"*
 
⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

 *"सस्ता है दीदी, एक रुपया बंडल।" सब्ज़ीवाली ने कहा:*
 
  *माँ ने कहा "ठीक है, दो रुपये में चार बंडल दे दे।"*

*इसके बाद कुछ देर तक दोनों अपने-अपने ऑफर पर झिकझिक खिटपिट करते रहे।*
 
*सब्ज़ीवाली कुछ नाराज़गी जताते हुए बोली-इतनी तो मेरी खरीदी भी नहीं है, दीदी, फिर उसने एक झटके के साथ  अपना टोकरा उठाया और उठ कर जाने लगी।*

*लेकिन चार कदम आगे बढ़ने के साथ ही पीछे मुड़ी और चिल्लायी*

*चलो चार बंडल के 3 रु दे देना दीदी, आप से ज़्यादा क्या कमाऊंगी ,मेरी माँ ने अपना सिर "नहीं" में हिलाया।*

*2 रु में 4 बंडल मैं बिल्कुल ठीक बोल रही हूं, क्योंकि तू हमेशा की पुरानी सब्जीवाली है। चल अब दे भी दे,परंतु सब्जीवाली रुकी नहीं आगे बढ़ गई।*

 *शायद वे दोनों एक-दूसरे की रणनीतियों को भली-भांति जानते थे। और यह खरीदने और बेचने वालों के बीच रोज ही होता होगा ।*
 
 *8-10 कदम जाकर सब्ज़ीवाली मुड़ी और हमारे दरवाजे पर वापस आ गई,माँ दरवाजे पर ही इंतज़ार कर रही थी ।*

*सब्ज़ीवाली अपना टोकरा सामने रख कर कुछ ऐसे बैठ गयी, जैसे कि वह किसी सम्मोहन की समाधि में हो।*

 *मेरी माँ ने अपने दाहिने हाथ से प्रत्येक बंडल को टोकरे से निकाल-निकाल कर कर दूसरे हाथ की खुली हथेली पर हल्के से मारा।*
 
 *और इस तरह पीढ़ी दर पीढ़ी के सीखे हुए मात्रात्मक, गुणात्मक और आलोचनात्मक मानदंडों से प्रत्येक बंडल की जाँच करके अपनी संतुष्टि से चार बंडलों का चयन किया।*

*सब्जी वाली ने पालक के बाकी बंडलों को फिर से अपने टोकरे में सजाया और भुगतान लेकर अपने बटुए में डाल लिए ।*

*सब्जीवाली ने बैठे ही बैठे टोकरा अपने सर पर रखा और उठने लगी, लेकिन टोकरा सिर पर रखकर जैसे ही वह उठने लगी, वह उठ न सकी और धप से नीचे बैठ गई।*

 *मेरी माँ ने उसका हाथ थाम लिया और पूछा -क्या हुआ? चक्कर आ गया क्या? क्या सुबह कुछ नहीं खाया था?"*
 
*सब्जी-वाली ने कहा, "नहीं दीदी। चावल कल खत्म हो गया था। आज की कमाई से ही मुझे कुछ चावल खरीदना है, घर जाकर पकाना है। उसके बाद ही हम सब खाना खाएंगे।*

*मेरी माँ ने उसे बैठने के लिए कहा। फिर फुर्ती से अंदर चली गई,चपाती व सब्ज़ी के साथ तेजी से वापस आई,और सब्ज़ीवाली को दी।*
 
*एक गिलास में पानी उसके सामने रखा। और सब्जीवाली से कहा "धीरे-धीरे खाना, मैं तेरे लिए चाय बना रही हूं।*

 
 *सब्जी वाली भूखी थी। उसने कृतज्ञतापूर्वक रोटी खायी, पानी पिया और चाय समाप्त की।* 
*मेरी माँ को बार-बार दुआएं देने लगी।  मां ने टोकरा उनके सिर पर रखने में उसकी सहायता की। फिर वह सब्ज़ीवाली चली गई।*
 *मैं हैरान था,मैंने माँ से कहा:*

 *मां, आप ने दो रुपये की पालक की भाजी के लिए मोलभाव करने में इतनी कठोरता दिखाई, लेकिन उस सब्जीवाली को इतने अधिक मूल्य का भोजन देने में कई गुना अधिक उदार बन गयीं। यह मेरे समझ में नहीं आया!*

 *मेरी माँ मुस्कुराई और बोली:*

     *बेटा ध्यान रखना व्यापार में कोई दया नहीं होती और दया में कोई व्यापार नही होता।"*

*👪🎪✍️⏰🔑विशेष :- भव्य आत्माओं, आज हम सभी को कर्मो की खेती करने का सुअवसर मिला है।हम घर, परिवार, समाज व राष्ट्र के लोगों की जिस प्रकार मनसे वचनों से शरीर से व धन दौलत से  सेवा  करेंगे उसी प्रकार का भविष्य में हमें भी फल की प्राप्ति होगी। अतः हम सभी अपनी योग्यता अनुसार स्व के साथ पर के ऊपर भी परोपकार करते रहना चाहिए।इस पुण्य की हमें कब आवश्यकता पड़ जाएं यह कोई भी नहीं जान सकता। आपने सुना होगा कि बस का एक्सीडेंट हो गया उसमें एक बच्ची को छोड़कर सभी मृत्यु को प्राप्त हुए।उस बच्ची के पिछले पुण्य ने ही बचाया।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मंगलवार, 20 जून 2023

चरित्रवान

**
*चरित्रवान*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  चरित्रवान✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक   24 को अंतिम तीर्थंकर वर्धमान स्वामी जी का गर्भ कल्याणक व 25 तारीख को 22 वें तीर्थंकर नेमीनाथ स्वामीजी का मोक्ष कल्याणक  महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक राजा को अपने लिए सेवक की आवश्यकता थी। उसके मंत्री ने दो दिनों के बाद एक योग्य व्यक्ति को राजा के सामने पेश किया। राजा ने उसे अपना सेवक बना तो लिया पर बाद में मंत्री से कहा, ‘‘वैसे तो यह आदमी ठीक है पर इसका रंग-रूप अच्छा नहीं है।’’ मंत्री को यह बात अजीब लगी पर वह चुप रहा।

एक बार गर्मी के मौसम में राजा ने उस सेवक को पानी लाने के लिए कहा। सेवक सोने के पात्र में पानी लेकर आया। राजा ने जब पानी पिया तो पानी पीने में थोड़ा गर्म लगा। राजा ने कुल्ला करके फेंक दिया। वह बोला, ‘‘इतना गर्म पानी, वह भी गर्मी के इस मौसम में, तुम्हें इतनी भी समझ नहीं।’’ मंत्री यह सब देख रहा था। मंत्री ने उस सेवक को मिट्टी के पात्र में पानी लाने को कहा। राजा ने यह पानी पीकर तृप्ति का अनुभव किया।

इस पर मंत्री ने कहा, ‘‘महाराज, बाहर को नहीं, भीतर को देखें। सोने का पात्र सुंदर, मूल्यवान और अच्छा है, लेकिन शीतलता प्रदान करने का गुण इसमें नहीं है। मिट्टी का पात्र अत्यंत साधारण है लेकिन इसमें ठंडा बना देने की क्षमता है। कोरे रंग-रूप को न देखकर गुण को देखें।’’ उस दिन से राजा का नजरिया बदल गया।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

सम्मान, प्रतिष्ठा, यश, श्रद्धा पाने का अधिकार चरित्रवान को मिलता है, चेहरे को नहीं।

 चाणक्य ने कहा है कि मनुष्य गुणों से उत्तम बनता है न कि ऊंचे आसन पर बैठने से या पदवी से। जैसे ऊंचे महल के शिखर पर बैठ कर भी कौवा, कौवा ही रहता है; गरुड़ नहीं बन जाता। उसी तरह अमिट सौंदर्य निखरता है मन की पवित्रता से, क्योंकि सौंदर्य रंग-रूप, नाक-नक्श, चाल-ढाल, रहन-सहन, सोच-शैली की प्रस्तुति मात्र नहीं होता। यह व्यक्ति के मन, विचार, चिंतन और कर्म का आइना है। कई लोग बाहर से सुंदर दिखते हैं मगर भीतर से बहुत कुरूप होते हैं। जबकि ऐसे भी लोग हैं जो बाहर से सुंदर नहीं होते मगर उनके भीतर भावों की पवित्रता इतनी ज्यादा होती है कि उनका व्यक्तित्व चुंबकीय बन जाता है। सुंदर होने और दिखने में बहुत बड़ा अंतर है।

*👪↔️⏰🔑🔔विशेष :- भव्य आत्माओं, आज वर्तमान में बहुत से लोग अपने शरीर को विभिन्न प्रकार से बाहरी दिखावे के लिए समय व पैसा बर्बाद कर रहे है। अगर वे सभी अपने अंदर के गुणों को विकसित करें तो स्वयं का ओर परिवार समाज देश का सर्वांगीण विकास किया जा सकता है। चरित्र  ही व्यक्ति का सबसे बड़ा गुण है। अतः आप इसपर ध्यान दें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

सोमवार, 19 जून 2023

सफलता का रहस्य

**
*सफलता का रहस्य*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सफलता का रहस्य ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक   24 को अंतिम तीर्थंकर वर्धमान स्वामी जी का गर्भ कल्याणक व 25 तारीख को 22 वें तीर्थंकर नेमीनाथ स्वामीजी का मोक्ष कल्याणक  महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

सुमित और रोहित हिमालय के  एक छोटे से गाँव में रहते थे। एक बार दोनों ने फैसला किया कि वे गाँव छोड़कर शहर जायेंगे और वहीँ कुछ काम-धंधा खोजेंगे। अगली सुबह वे अपना-अपना सामान बांधकर निकल पड़े। चलते-चलते उनके रास्ते में एक नदी पड़ी, ठण्ड अधिक होने के कारण नदी का पानी जम चुका था। जमी हुई नदी पे चलना आसान नहीं था, पाँव फिसलने पर गहरी चोट लग सकती थी।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

इसलिए दोनों इधर-उधर देखने लगे कि शायद नदी पार करने के लिए कहीं कोई पुल हो! पर बहुत खोजने पर भी उन्हें कोई पुल नज़र नहीं आया।

रोहित बोला, “हमारी तो किस्मत ही खराब है, चलो वापस चलते हैं, अब गर्मियों में शहर के लिए निकलेंगे!

“नहीं”, सुमित बोला, “नदी पार करने के बाद शहर थोड़ी दूर पर ही है और हम अभी शहर जायेंगे…”

और ऐसा कह कर वो धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा।

“अरे ये क्या कर रहे हो….पागल हो गए हो…तुम गिर जाओगे…” रोहित चिल्लाते हुए बोल ही रहा था कि सुमित पैर फिसलने के कारण गिर पड़ा।

“कहा था ना मत जाओ..”, रोहित झल्लाते हुए बोला।

सुमित ने कोई जवाब नही दिया और उठ कर फिर आगे बढ़ने लगा…एक-दो-तीन-चार….और पांचवे कदम पे वो फिर से गिर पड़ा..

रोहित लगातार उसे मना करता रहा…मत जाओ…आगे मत बढ़ो…गिर जाओगे…चोट लग जायेगी… लेकिन सुमित आगे बढ़ता रहा।

वो शुरू में दो-तीन बार गिरा ज़रूर लेकिन जल्द ही उसने बर्फ पर सावधानी से चलना सीख लिया और देखते-देखते नदी पार कर गया।

दूसरी तरफ पहुँच कर सुमित बोला, ” देखा मैंने नदी पार कर ली…और अब तुम्हारी बारी है!”

“नहीं, मैं यही पर सुरक्षित हूँ…”

“लेकिन तुमने तो शहर जाने का निश्चय किया था।”

“मैं ये नहीं कर सकता!”

नहीं कर सकते या करना नहीं चाहते!

सुमित की दृढ़ मनोबल शक्ति से शहर की तरफ आगे बढ़ गया।और कुछ ही सालों में अथक मेहनत व ईमानदारी ए से एक बड़ा आदमी बन गया।वह अपनी आमदनी में से पच्चीस प्रतिशत मुनाफा अन्य भव्य आत्माओं की सेवा परोपकार में खर्च करता था। इसके कारण उसके जीवन आने वाली सभी प्रकार की बाधाएं समाप्त हो जाती थी।

 दूसरी तरफ रोहित हर कार्य को कठिन समझ कर छोड़ता गया,और गांव में सबसे ग़रीब आलसी व निकम्मा  हो गया।

 हम सबकी ज़िन्दगी में कभी न कभी ऐसे मोड़ आ ही जाते हैं जब जमी हुई नदी के रूप में कोई बड़ी बाधा या संघर्ष  हमारे सामने आ जाते है। और ऐसे में हमें कोई निश्चय करना होता है। तब क्या हम खतरा उठाने का निश्चय लेते हैं और तमाम मुश्किलों, डर, और असफलता के भय के बावजूद नदी पार करते हैं? या हम सुरक्षित रहने के लिए वहीँ खड़े रह जाते हैं जहाँ हम असंख्यात भवों से खड़े है ? इस मनुष्य भव की आयु समाप्त होने से नया शरीर धारण करके अच्छे दिनों का इंतजार हमारा आज भी जारी है। यही हमारी सबसे बड़ी भूल है।

जहाँ तक दुनिया के सफल लोगों का सवाल है वे रिस्क लेते हैं…अगर आप नहीं लेते तो हो सकता है आज आप बिलकुल सुरक्षित हों आपके शरीर पर एक भी घाव ना हों…लेकिन जब आप अपने भीतर झाकेंगे तो आपको अपने अन्दर ज़रूर कुछ ऐसे ज़ख्म दिख जायेंगे जो आपके द्वारा अपने सपनो को के लिए कोई प्रयास ना करने के कारण आज भी हरे होंगे।
हे ज्ञानवान,पंछी सबसे ज्यादा सुरक्षित एक पिंजड़े में होता है…लेकिन क्या वो इसलिए बना है? या फिर वो आकश की ऊँचाइयों को चूमने और आज़ाद घूमने के लिए दुनिया में आया है? फैसला आपका है…आप पिंजड़े का पंछी बनना चाहते हैं या खुले आकाश का..?हम सभी के अंदर अनेक प्रकार की शक्तियां है।उन शक्तियों को विकसित करना यह हमारा सौभाग्य है। जबतक हम उन शक्तियों का सही इस्तेमाल नहीं करेंगे तब तक हमारा जीवन सार्थक नहीं होगा।

*👪🔔🌞🎪⛳विशेष :- भव्य आत्माओं, इस मनुष्य भव में सच्चे सुख को प्राप्त करना है तो संघर्षों पार करके स्वयं के आचार विचार को उत्कृष्ट बनाकर जीवन व्यतीत करना आवश्यक है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

रविवार, 18 जून 2023

संस्कारवान बहू

**
*संस्कारवान बहू*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 संस्कारवान बहू ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक   24 को अंतिम तीर्थंकर वर्धमान स्वामी जी का गर्भ कल्याणक व 25 तारीख को 22 वें तीर्थंकर नेमीनाथ स्वामीजी का मोक्ष कल्याणक  महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

*हमारा एकलौता बेटा अब खुद कमाने वाला हो गया था ...*
*इसलिए बात-बात पर अपनी माँ से झगड़ पड़ता था ये वही मां थी जो बेटे के लिए पति से भी लड़ जाती थी। मगर अब* *कमाऊ पूत बेटा पिता के कई बार समझाने पर भी इग्नोर कर देता और कहता, "यही तो उम्र है शौक की,खाने पहनने की, जब आपकी तरह मुँह में दाँत और पेट में आंत ही नहीं रहेगी तो क्या करूँगा।"*

*बहू खुशबू भी भरे पूरे परिवार से आई थी, इसलिए बेटे की गृहस्थी की खुशबू में रम गई थी। बेटे की नौकरी अच्छी थी तो मित्र मंडली उसी हिसाब से मॉडर्न थी। बहू को अक्सर वह पुराने स्टाइल के कपड़े छोड़ कर मॉडर्न बनने को कहता, मगर बहू मना कर देती .....*

*वो कहता "कमाल करती हो तुम, आजकल सारा ज़माना ऐसा करता है,मैं क्या कुछ नया कर रहा हूं क्या। तुम्हारे सुख के लिए सब कर रहा हूं और तुम हो कि उन्हीं पुराने विचारों में अटकी हो। जीवन का स्थर क्या होता है तुम्हें मालूम ही नहीं।"*

*और बहू कहती "जीवन का स्थर क्या होता है, ये मुझे जानना भी नहीं है, क्योकि जीवन की क्वालिटी क्या हो, मैं इस बात में विश्वास रखती हूँ।"*

*कुछ समय पश्चात अचानक पापा आई. सी. यू. में एडमिट हुए थे। हार्ट अटेक आया था। डॉक्टर ने पर्चा पकड़ाया, पंद्रह लाख और जमा करने थे। पांच लाख का बिल तो पहले ही भर दिया था मगर अब ये दस लाख भारी लग रहे थे। वह बाहर बैठा हुआ सोच रहा था कि अब क्या करे।*

*उसने कई दोस्तों को फ़ोन लगाया कि उसे मदद की जरुरत है, मगर किसी ने कुछ तो किसी ने कुछ बहाना कर दिया। आँखों में आँसू थे और वह उदास था तभी खुशबू  खाने का टिफिन लेकर आई और बोली,"अपना ख्याल रखना भी जरुरी है। ऐसे उदास होने से क्या होगा? हिम्मत से काम लो, बाबू जी को कुछ नहीं होगा आप चिन्ता मत करो। कुछ खा लो फिर पैसों का इंतजाम भी तो करना है आपको मैं यहाँ बाबूजी के पास रूकती हूँ आप खाना खाकर पैसों का इंतजाम कीजिये। "पति की आँखों से टप-टप आँसू झरने लगे।*

*"कहा न आप चिन्ता मत कीजिये। जिन दोस्तों के साथ आप मॉडर्न पार्टियां करते हैं आप उनको फ़ोन कीजिये, देखिए तो सही, कौन कौन मदद को आता हैं। "पति खामोश और सूनी निगाहों से जमीन की तरफ़ देख रहा था। कि खुशबू का हाथ उसकी पीठ पर आ गया। और वह पीठ  को सहलाने लगी।*

*"सबने मना कर दिया। सबने कोई न कोई बहाना बना दिया खुशबू।आज पता चला कि ऐसी दोस्ती तब तक की है जब तक जेब में पैसा है। किसी ने भी हाँ नहीं कहा जबकि उनकी पार्टियों पर मैंने लाखों उड़ा दिये।"*

*"इसी दिन के लिए बचाने को तो माँ-बाबा कहते थे। खैर, कोई बात नहीं, आप चिंता न करो, हो जाएगा सब ठीक। कितना जमा कराना है?"*

*"अभी तो तनख्वाह मिलने में भी समय है, आखिर चिन्ता कैसे न करूँ खुशबू ?"*

*"तुम्हारी ख्वाहिशों को मैंने सम्हाल रखा है।"*

*"क्या मतलब....?"*

*"तुम जो नई नई तरह के कपड़ो और दूसरी चीजों के लिए मुझे पैसे देते थे वो सब मैंने सम्हाल रखे हैं। माँ जी ने फ़ोन पर बताया था, दस लाख जमा करने हैं। मेरे पास पांच लाख थे। बाकी मैंने अपने भैया से मंगवा लिए हैं। टिफिन में सिर्फ़ एक ही डिब्बे में खाना है बाकी में पैसे हैं।" खुशबू ने थैला टिफिन सहित उसके हाथों में थमा दिया।*
*"खुशबू ! तुम सचमुच अर्धांगिनी हो, मैं तुम्हें मॉडर्न बनाना चाहता था, हवा में उड़ रहा था। मगर तुमने अपने संस्कार नहीं छोड़े. आज वही काम आए हैं। "*

*सामने बैठी मां के आंखो में आंसू थे उसे आज खुद के नहीं बल्कि पराई मां के संस्कारो पर नाज था और वो बहु के सर पर हाथ फेरती हुई ऊपरवाले को स्मरण कर रही थी भगवान आपकी कृपा से सबकुछ अच्छा हो रहा है।*

*🔔🎪🙏👪✍️विशेष :- भव्य आत्माओं,आज हरेक व्यक्ति अपने बेटे  की शादी में  दहेज लेना पसंद करते है किंतु वह लड़की संस्कारवान है या नहीं इसकी आवश्यकता नहीं समझते।इस कारण से आज एकल परिवार होने से सम्पूर्ण भारत में विसंगतियां फैल रही है। आपके घर में बेटा हो बेटी उसे अपने धर्म के अनुसार भोजन, वेशभूषा व बातचीत इतने संस्कार आपने दे दिये तो आपको विश्व में जितने तीर्थ है उन सभी का घर बैठे आशीर्वाद प्राप्त होगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

शनिवार, 17 जून 2023

पुण्य की महिमा

**
*पुण्य की महिमा*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 पुण्य की महिमा ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक   24 को अंतिम तीर्थंकर वर्धमान स्वामी जी का गर्भ कल्याणक व 25 तारीख को 22 वें तीर्थंकर नेमीनाथ स्वामीजी का मोक्ष कल्याणक  महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

*एक बड़ा व्यापारी नदी में स्नान करने गया। उस दिन वहां काफी भीड़ थी। व्यापारी की नजर नदी में डूबते हुए एक व्यक्ति पर पड़ी। वह तुरंत नदी में कूद गया। व्यक्ति को बाहर निकालने पर देखा कि वह उनका अकाउंटेंट मुनीम था।*

*कुछ देर बाद अकाउंटेंट को होश आया। व्यापारी ने उससे इस हालत में पहुंचने का कारण पूछा। अकाउंटेंट ने बात बनाते हुए कहा, ‘मैंने अपना सारा पैसा शेअर बाजार में खो दिया है। लोगों का काफी उधार है मुझ पर। उन्हीं लोगों के डर से मैंने यह कदम उठाया है।*

*व्यापारी ने अकाउंटेंट को सांत्वना दी व कहा, ‘अब चिंता छोड़ो, भविष्य में कभी ऐसा काम मत करना। ईमानदारी से सेवाकार्य करते रहो। व्यापारी ने सभी का कर्ज चुका दिया।अकाउंटेंट को सेवा करते हुए तीन साल बीत गये।*

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

*इस बीच व्यापारी को काफी लाभ हुआ। अकाउंटेंट की नियत फिर खराब हो गयी। एक दिन उसके बेटे का जन्मदिन था। उसने सबको खीर खिलाई। व्यापारी के लिए भी एक कटोरा खीर लेकर वह उनके घर पहुंचा।*

*व्यापारी व्यस्त था तो उसे कटोरा मेज पर रखने को कह दिया। काम करते हुए देर हो गयी। थोड़ी देर बाद देखा तो खीर का कटोरा बिल्ली खा रही थी, जिसे खाते ही उसकी सेहत बिगड़ गयी।*

*व्यापारी को समझ आ गया, पर उसने किसी के सामने जिक्र नहीं किया। सोचा कि जब तक मेरा पुण्य मेरे साथ है, मेरा कुछ नहीं हो सकता।*

*अगले दिन अकाउंटेंट ने जब व्यापारी को देखा तो सकपका गया। व्यापारी ने फिर भी कुछ उजागर नहीं किया। अकाउंटेंट को लगा कि व्यापारी को कुछ पता नहीं चला।*

*वह फिर व्यापारी का धन हड़पने के बारे में सोचने लगा। एक दिन व्यापारी को कहीं जाना था। उसने अकाउंटेंट को भी मोटे रूपये साथ लेकर चलने को कहा।*

*अकाउन्टेन्ट  ने व्यापारी को नुकसान पहुँचाने के लिए कुछ गुंडों को साथ रख लिया। एक मंदिर आया। व्यापारी उस ओर जाने लगा। वह जैसे ही झुका, गुंडों ने हमला कर दिया। व्यापारी वहीं बेहोश होकर गिर गया। अकाउंटेंट जैसे ही धन लेकर भागने लगा तो गुंडों की नीयत बिगड़ गयी। उन्होंने धन छीनकर उसे नदी में धकेल दिया।*

*व्यापारी को होश आया तो सामने  अकाउंटेंट को डूबते हुए देखा। अपने दयालु स्वभाव के अनुसार सेठ ने फिर अकाउंटेंट को बचा लिया। होश में आने के बाद अकाउंटेंट ने व्यापारी के पैर पकड़े और क्षमा मांगने लगा।*

*व्यापारी ने उसे मन ही मन क्षमा कर दिया। केवल इतना ही कहा- जब तक किसी के पुण्य की जड़ें हरी हैं, तब तक कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।*

*सार :- परोपकार एवं नेक कर्म करके पुण्य कमाते रहिये। पुण्य इसलोक एवं परलोक दोनों जगह काम आता है जबकि   धन दौलत केवल इस लोक में हमारी भौतिक आवश्यकताओं को ही पूरा करने में सक्षम है।* 

*इस धन से कुछ परोपकार पुण्य अर्जित करिये, जरूरमन्दों की दुखियों की बीमारों की जो निर्धन है उनकी सहायता कीजिये,  धर्म-कर्म दान करते रहिए*

*धर्म के चार चरण (सत्य, दया, तप और दान) प्रसिद्ध हैं*
_*कर सके तो लोगों पर तीन एहसान अवश्य कीजिए:*_ 
 _*1.फायदा नही पहुंचा सकते तो नुकसान भी ना पहुंचाए,* 
*2.खुशी नही दे सकते तो दुख भी ना पहुंचाए और*
*3.तारीफ नही कर सकते तो बुराई भी ना करें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

गुरुवार, 15 जून 2023

स्वयं की मदत

**
*स्वयं की मदत*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 स्वयं की मदत ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक   24 को अंतिम तीर्थंकर वर्धमान स्वामी जी का गर्भ कल्याणक व 25 तारीख को 22 वें तीर्थंकर नेमीनाथ स्वामीजी का मोक्ष कल्याणक  महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

जब भगवान ही संसार है , तो भगवान  के दिल में रहना अर्थात भगवान  में संसार समाया हुआ है l वही भगवान हमारी आत्मा में बसा हुआ है।

 इसलिए एक मत , एक बल, एक भरोसा। जहां एक हैं वहां ही हर कार्य में सफलता है कोई भी  परिस्थिति को पार करना सहज लगता है या मुश्किल ? अगर दूसरे को देखा, दूसरे को याद किया ओर दुसरों में उलझ गए तो कुछ भी नहीं मिलेगा । इसलिए मुश्किल हो जाएगा।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

 भगवान  की आज्ञा है " मुझे एक को याद करो "।अगर आज्ञा पालन करते हैं तो आज्ञाकारी बच्चे को भगवान  की दुआएं मिलती है और सब सहज हो जाता है । अगर भगवान  की आज्ञा का पालन नहीं किया तो भगवान की भक्ति से स्वयं की मदद व दुआएं नहीं मिलती, इसलिए मुश्किल हो जाता है। तो सदा आज्ञाकारी हो ना? यह एक जन्म की दुआएं अनेक जन्मों तक साथ रहेगी ।

*👪🔔⏰✅⛳विशेष:-भव्य आत्माओं,  आपने जिस जाति में जन्म लिया है आप उसी जाति के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपना जीवन सार्थक करें। अन्यथा आपको आपके आचरण के अनुसार अन्य जातियों में जन्म लेकर भव भ्रमण करना होगा।इस मनुष्य भव में हमें सबसे पहले अपने आत्मा में स्थित भगवान की मदत करना है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

बुधवार, 14 जून 2023

वसीयत के अनुसार बंटवारा

**
*वसीयत के अनुसार बंटवारा*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 वसीयत के अनुसार बंटवारा ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक   24 को अंतिम तीर्थंकर वर्धमान स्वामी जी का गर्भ कल्याणक व 25 तारीख को 22 वें तीर्थंकर नेमीनाथ स्वामीजी का मोक्ष कल्याणक  महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक गांव में एक व्यक्ति के पास 19 घोड़े थे। एक दिन उस व्यक्ति की मृत्यु हो गयी। मृत्यु के पश्चात वसीयत पढ़ी गयी। जिसमें लिखा था कि:
                  मेरे 19 घोडों में से आधे मेरे बेटे को,19 घोड़ों में से एक चौथाई मेरी बेटी को, और 19 घोड़ों में से पांचवा हिस्सा मेरे नौकर को दे दिए जाएं।
                  सब लोग चक्कर में पड़ गए कि ये बंटवारा कैसे हो ?
                  19 घोडों का आधा अर्थात एक घोड़ा काटना पड़ेगा, फिर तो घोड़ा ही मर जायेगा। चलो एक को काट दिया तो बचे 18 उनका एक चौथाई साढ़े चार- साढ़े चार. फिर?
                  सब बड़ी उलझन में थे।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

फिर पड़ोस के गांव से एक बुद्धिमान व्यक्ति को बुलाया गया।
                  वह बुद्धिमान व्यक्ति अपने घोड़े पर चढ़ कर आया, समस्या सुनी, थोडा दिमाग लगाया, फिर बोला इन 19 घोड़ों में मेरा भी घोड़ा मिलाकर बाँट दो।
                  सबने सोचा कि एक तो मरने वाला पागल था, जो ऐसी वसीयत कर के चला गया, और अब ये दूसरा पागल आ गया जो बोलता है कि उनमें मेरा भी घोड़ा मिलाकर बाँट दो। फिर भी सब ने सोचा बात मान लेने में क्या हर्ज है।
19+1=20 हुए।
20 का आधा 10, बेटे को दे दिए।
20 का चौथाई 5, बेटी को दे दिए।
20 का पांचवाँ हिस्सा 4, नौकर को दे दिए।
10+5+4=19
                  बच गया एक घोड़ा, जो बुद्धिमान व्यक्ति का था...वो उसे लेकर अपने गॉंव लौट गया।
                  इस प्रकार 1 घोड़ा मिलाने से, बाकी 19 घोड़ों का बंटवारा सुख, शांति, संतोष व आनंद से हो गया।
                  हम सब के जीवन में भी 19 *घोड़ें* होते हैं।
*5 ज्ञानेंद्रियाँ*(आँख, नाक, जीभ, कान, त्वचा)
*5 कर्मेन्द्रियाँ*(हाथ, पैर, जीभ, मूत्र द्वार, मलद्वार)
*5 प्राण*(प्राण, अपान, समान, व्यान, उदान)
और
*4 अंतःकरण*(मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार) कुल 19 घोड़े होते हैं।
                  *सारा जीवन मनुष्य इन्हीं 19 घोड़ों के बँटवारे में उलझा रहता है।* और जब तक उसमें  आत्मज्ञान रूपी घोड़ा नहीं मिलाया जाता तब तक जीवन की गुत्थी सुलझ नहीं सकती आज सबके पास सब कुछ है पर आत्म ज्ञान नहीं है इसी कारण सब गडबड है कुछ सुलझ नहीं पा रहा
                  इंसान क्यों जी रहा है
जीवन का क्या उद्देश्य है कहां जाना है मरणोपरांत कुछ पता नहीं।

*विशेष :- भव्य आत्माओं,हम अनादि काल से वसीयत के उत्तराधिकारी बनें हुए है। जबतक हम इस वसीयत को सच्चे धर्म के अनुसार विभाजित नहीं करेंगे तब तक हमारा जन्म चौरासी लाख योनियों में होगा। चौरासी के चक्कर से बचने के लिए हमें सत्य धर्म का सहारा लेना होगा। यही प्रकृति का पहला व अंतिम सत्य है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मंगलवार, 13 जून 2023

बुद्धिमान कौन

**
*बुध्दिमान कौन*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 बुध्दिमान कौन ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक   24 को अंतिम तीर्थंकर वर्धमान स्वामी जी का गर्भ कल्याणक व 25 तारीख को 22 वें तीर्थंकर नेमीनाथ स्वामीजी का मोक्ष कल्याणक  महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*🔔विशेष यह कहानी सत्य घटनाओं पर आधारित है।ऐसी अनेकों घटनाएं हम सभी के जीवन में भी होती है।उन घटनाओं से हम जीवन में वह सच्चाई जानकर स्वयं का जीवन सुखी कर सकते है। अगर आपके जीवन में इस प्रकार की घटना हो तो अवश्य ही व्हाट्सएप पर भेजें उपयुक्त होने पर वह सच्चाई ग्यारह लाख लोगों तक शोशल मिडिया के द्वारा पहुंचाई जाएगी।*

✍️टी एन शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त थे तब एक बार वे उत्तर प्रदेश की यात्रा पर गए। उनके साथ उनकी पत्नी भी थीं। रास्ते में एक बाग के पास वे लोग रुके। बाग के पेड़ पर बया पक्षियों के घोसले थे।  उनकी पत्नी ने कहा दो घोसले मंगवा दीजिए मैं इन्हें घर की सज्जा के लिए ले चलूंगी। उन्होंने साथ चल रहे पुलिस वालों से घोसला लाने के लिए कहा। 

पुलिस वाले वहीं पास में गाय चरा रहे एक बालक से पेड़ पर चढ़कर घोसला लाने के बदले सौ रुपये देने की बात कही, लेकिन वह लड़का घोसला तोड़ कर लाने के लिए तैयार नहीं हुआ। टी एन शेषन उसे सौ की जगह दो हजार रुपए देने की बात कही फिर भी वह लड़का तैयार नहीं हुआ। 

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

*उसने शेषन से कहा साहब जी! घोसले में चिड़िया के बच्चे हैं शाम को जब वह भोजन लेकर आएगी तब अपने बच्चों को न देख कर बहुत दुखी होगी, इसलिए आप चाहे जितना पैसा दें मैं घोसला नहीं तोड़ सकता।*

इस घटना के बाद टी.एन. शेषन को आजीवन यह ग्लानि रही कि जो एक चरवाहा बालक जो सोच सका और उसके अन्दर जैसी संवेदनशीलता थी, इतने पढ़े-लिखे और आईएएस होने के बाद भी वे वह बात क्यों नहीं सोच सके, उनके अन्दर वह संवेदना क्यों नहीं उत्पन्न हुई? शिक्षित कौन हुआ ? मैं या वह बुद्धिमान बालक ?

उन्होंने कहा उस छोटे बालक के सामने मेरा पद और मेरा आईएएस होना गायब हो गया। मैं उसके सामने एक सरसों के बीज के समान हो गया। शिक्षा, पद और सामाजिक स्थिति मानवता के मापदण्ड नहीं हैं।

प्रकृति को जानना ही ज्ञान है। बहुत सी सूचनाओं के संग्रह को ज्ञान नहीं कहा जा सकता है। जीवन तभी आनंददायक होता है जब आपकी शिक्षा से ज्ञान, संवेदना और बुद्धिमत्ता प्रकट हो।

*🔔आज हम एक जीवन का अनुभव सभी को बता रहे है जो भी व्यक्ति विशेष वर्तमान में दूध का सेवन कर रहे है उन सभी के शरीर में दर्द बना रहता है।इसका लाजिक यह है कि पहले गौमाता 6 से 8 किलोमीटर विचरण करने से उनका दूध सुपाच्य था। वर्तमान में भारतीय कानून व्यवस्था के कारण वह कैद हो गई है। उसे भरपूर चारा तो मिल रहा है किंतु उसकी आजादी समाप्त कर दी गई है। यही कारण होने से दूध पीने से हानी हो रही है। हां वह व्यक्ति यह दूध सेवन कर सकता है जो मेहनत मजदूरी कर रहा है।*

*👪⏰✅✍️🔔 विशेष :- भव्य आत्माओं, हमें अपने जीवन के अनुभव से बहुत कुछ ग्रहण कर अपने स्वयं के आचरण को तराशना चाहिए। जबतक वह अनुभव हमारे आचरण में नहीं आएगा तब तक जीवन सार्थक नहीं होगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

रविवार, 11 जून 2023

सुखी जीवन के लिए

**
*सुखी जीवन के लिए*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सुखी जीवन के लिए ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 आषाढ़ कृष्ण दसमी, दिनांक 13 जून   मंगलवार कलिकाल के 21 वें तीर्थंकर   नमिनाथ स्वामीजी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक   24, 25,   तारीख को है। जून माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक व्यक्ति अपने गुरु के पास गया और बोला, गुरुदेव, दुख से छूटने का कोई उपाय बताइए। शिष्य ने थोड़े शब्दों में बहुत बड़ा प्रश्न किया था। दुखों की दुनिया में जीना लेकिन उसी से मुक्ति का उपाय भी ढूंढना! बहुत मुश्किल प्रश्न था।

गुरु ने कहा, एक काम करो, जो आदमी सबसे सुखी है, उसके पहने हुए जूते लेकर आओ। फिर मैं तुझे दुख से छूटने का उपाय बता दूंगा।

शिष्य चला गया। एक घर में जाकर पूछा, भाई, तुम तो बहुत सुखी लगते हो। अपने जूते सिर्फ आज के लिए मुझे दे दो।

⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

उसने कहा, कमाल करते हो भाई! मेरा पड़ोसी इतना बदमाश है कि क्या कहूं? ऐसी स्थिति में मैं सुखी कैसे रह सकता हूं? मैं तो बहुत दुखी इंसान हूं।

वह दूसरे घर गया। दूसरा बोला, अब क्या कहूं भाई? सुख की तो बात ही मत करो। मैं तो पत्नी की वजह से बहुत परेशान हूं। ऐसी जिंदगी बिताने से तो अच्छा है कि कहीं जाकर साधु बन जाऊं। सुखी आदमी देखना चाहते हो तो किसी और घर जाओ।

वह तीसरे घर गया, चौथे घर गया। किसी की पत्नी के पास गया तो वह पति को क्रूर बताती, पति के पास गया तो वह पत्नी को दोषी कहता। पिता के पास गया तो वह पुत्र को बदमाश बताता। पुत्र के पास गया तो पिता की वजह से खुद को दुखी बताता। सैकड़ों-हजारों घरों के चक्कर लगा आया। सुखी आदमी के जूते मिलना तो दूर खुद के ही जूते घिस गए।

शाम को वह गुरु के पास आया और बोला, मैं तो घूमते-घूमते परेशान हो गया। न तो कोई सुखी मिला और न सुखी आदमी के जूते।

गुरु ने पूछा, लोग क्यों दुखी हैं? उन्हें किस बात का दुख है?

उसने कहा, किसी का पड़ोसी खराब है। कोई पत्नी से परेशान, कोई पति से दुखी तो कोई पुत्र से परेशान है। आज हर आदमी दूसरे आदमी के कारण दुख भोग रहा है।

गुरु ने बताया, सुख का सूत्र है - दूसरे की ओर नहीं, बल्कि अपनी ओर देखो। खुद में झांको। खुद की काबिलियत पर गौर करो। प्रतिस्पर्द्धा करनी है तो खुद से करो, दूसरों से नहीं। जीवन तुम्हारी यात्रा है। दूसरों को देखकर अपने रास्ते मत बदलो। खुद को सुनो, खुद को देखो। यही सुख का सूत्र है।

शिष्य बोला, महाराज, बात तो आपकी सत्य है लेकिन यही आप मुझे सुबह भी बता सकते थे। फिर इतनी परिक्रमा क्यों करवाई?

गुरु ने कहा, वत्स, सत्य दुष्पाच्य होता है। वह सीधा नहीं पचता। अगर यह बात मैं सुबह बता देता तो तू हर्गिज नहीं मानता। जब स्वयं अनुभव कर लिया, सत्य की परिक्रमा कर ली, सबके चक्कर लगा लिए, तो बात समझ में आ गई। अब ये बात तुम पूरे जीवन में नहीं भूलोगे।

जीवन तुम्हारी यात्रा है। दूसरों को देखकर अपने रास्ते मत बदलो।

*👪🔔⏰✅✍️विशेष :- भव्य आत्माओं, हमनें दुसरों के साथ व्यतीत करते  हुए असंख्यात भव समाप्त कर लिए किंतु हम सुखी नहीं हो पाए। अतः हमें आज वर्तमान समय से ही अपने अंदर वह छिपी हुई शक्तियों को जाग्रत कर स्वयं सुखी होते हुए सभी के सुख में सहायक बनना है। हमें घर, परिवार, समाज में रहते हुए उनके प्रति अपने कर्तव्यों को निभाते हुए जीवन में सुखी होना है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏