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*आध्यात्मिक भावना*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 आध्यात्मिक भावना✍️🐒*
*🐒कल शाश्वत पर्व अष्टमी तिथि है*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 आषाढ़ कृष्ण दसमी, दिनांक 13 जून मंगलवार कलिकाल के 21 वें तीर्थंकर नमिनाथ स्वामीजी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जून माह में आने वाली दिनांक 05 , 09 , 13 , 24, 25, तारीख को है। जून माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
एक दिन राजा जनक ने अपने शिष्य सुखदेव को दो प्याले के आकार के दीपकों मे तेल भरकर दिया और कहा कि पूरे महल की सभी चीजों को विस्तार से देखना और आकार का वर्णन करना लेकिन दीपकों से तेल की एक बूंद भी छलकनी नही चाहिए। यदि एक बूंद भी छलक गया तो तुम्हें विद्या नहीं दूंगा।
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राजा ने दो दूतों को सुखदेव के साथ भेजा और दीपों को बार-बार भरते रहने का आदेश दिया। यह एक चुनौती भरा कार्य था। दो घण्टें बाद सुखदेव जी, जीत की खुशी में बिना एक बूंद तेल छलकाए राजा के पास पहुँचे। राजा जनक ने पूछा-सुखदेव! बताओ तुमने मेरे महल के अन्दर क्या-क्या देखा ? सुखदेव ने कहा, हे गुरूदेव, मेरी एक ही उपलब्धि रही कि बिना एक बूंद तेल गिराए मैं वापस पहुँच गया। मेरा मन इसी लक्ष्य पर एकाग्र था कि एक बूंद भी तेल न छलके। बाकी महल मे क्या-क्या है इस बात पर मैने ध्यान नही दिया। राजा जनक मुझे तुमसे बहुत निराशा हुई। तुमने पूरी परीक्षा पास नहीं की। पुनः दीप लेकर जाओ। ध्यान रहे बिना तेल छलकाए सभी चीजों को ध्यान पूर्वक देखना।
दस घण्टें बाद सुखदेव शान्तचित्त स्थिति से वापस आये। उन्होंने एक बूंद भी तेल गिरने न दिया और न ही वे पहले की तरह उत्तेजित थे। राजा के सभी प्रश्नों का सही-सही जवाब भी दिया। उन बकरियों का भी व्याख्यान किया जो राजमहल में थी। तब राजा जनक ने यह रहस्य बतलाया कि ठीक इसी प्रकार मैं भी रहता हूँ। मैं महल में अवश्य रहता हूँ परन्तु इससे मोहित नहीं हूँ। मैं सदा आत्मा-ज्योति को ही देखता हूं।
*👨👩👦👦🔔✅✍️विशेष :- भव्य आत्माओं,आत्मिक स्थिति के निरन्तर प्रयास से हम अलग हो जायेंगे। साथ ही साथ न अपने कर्तव्य को भी सजग रहकर पूरी जिम्मेवारी के साथ निभा सकेंगे ।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है। जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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