रविवार, 30 जुलाई 2023

चारित्र का महत्व

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*चारित्र का महत्व*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 चारित्र का महत्व ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक  18 , 22 , 23, 30,   तारीख को है। जुलाई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक राजपुरोहित थे वे अनेक विधाओं के ज्ञाता होने के कारण राज्य में अत्यधिक प्रतिष्ठित थे बड़े-बड़े विद्वान उनके प्रति आदरभाव रखते थे पर उन्हें अपने ज्ञान का लेशमात्र भी अहंकार नहीं था उनका विश्वास था कि ज्ञान और चरित्र का योग ही लौकिक एवं परमार्थिक उन्नति का सच्चा पथ है.
प्रजा की तो बात ही क्या स्वयं राजा भी उनका सम्मान करते थे और उनके आने पर उठकर आसन प्रदान करते थे ।

एक बार राजपुरोहित के मन में जिज्ञासा हुई कि राजदरबार में उन्हें आदर और सम्मान उनके ज्ञान के कारण मिलता है अथवा चरित्र के कारण?

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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इसी जिज्ञासा के समाधान हेतु उन्होंने एक योजना बनाई योजना को क्रियान्वित करने के लिए राजपुरोहित राजा का खजाना देखने गए
खजाना देखकर लौटते समय उन्होंने खजाने में से पाँच बहुमूल्य मोती उठाए और उन्हें अपने पास रख लिया खजांची देखता ही रह गया राजपुरोहित के मन में धन का लोभ हो सकता है खजांची ने स्वप्न में भी नहीं सोचा था.

उसका वह दिन उसी उधेड़बुन में बीत गया।
दूसरे दिन राजदरबार से लौटते समय राजपुरोहित पुन: खजाने की ओर मुड़े तथा उन्होंने फिर पाँच मोती उठाकर अपने पास रख लिए.
अब तो खजांची के मन में राजपुरोहित के प्रति पूर्व में जो श्रद्धा थी वह क्षीण होने लगी तीसरे दिन जब पुन: वही घटना घटी तो उसके धैर्य का बाँध टूट गया उसका संदेह इस विश्वास में बदल गया कि राजपुरोहित की ‍नीयत निश्चित ही खराब हो गई है.

उसने राजा को इस घटना की विस्तृत जानकारी दी.
राजा को इस सूचना से बड़ा आघात पहुँचा उनके मन में राजपुरोहित के प्रति आदरभाव की जो प्रतिमा पहले से प्रतिष्ठित थी वह चूर-चूर होकर बिखर गई चौथे दिन जब राजपुरोहित सभा में आए तो राजा पहले की तरह न सिंहासन से उठे और न उन्होंने राजपुरोहित का अभिवादन किया, यहाँ तक कि राजा ने उनकी ओर देखा तक नहीं राजपुरोहित तत्काल समझ गए कि अब योजना रंग ला रही है.
उन्होंने जिस उद्देश्य से मोती उठाए थे, वह उद्देश्य अब पूरा होता नजर आने लगा था यही सोचकर राजपुरोहित चुपचाप अपने आसन पर बैठ गए राजसभा की कार्यवाही पूरी होने के बाद जब अन्य दरबारियों की भाँति राजपुरोहित भी उठकर अपने घर जाने लगे तो राजा ने उन्हें कुछ देर रुकने का आदेश दिया सभी सभासदों के चले जाने के बाद राजा ने उनसे पूछा - 'सुना है आपने खजाने में कुछ गड़बड़ी की है।'

इस प्रश्न पर जब राजपुरोहित चुप रहे तो राजा का आक्रोश और बढ़ा इस बार वे कुछ ऊँची आवाज में बोले -'क्या आपने खजाने से कुछ मोती उठाए हैं?' राजपुरोहित ने मोती उठाने की बात को स्वीकार किया राजा का अगला प्रश्न था - 'आपने कितेने मोती उठाए और कितनी बार?' राजा ने पुन: पूछा - 'वे मोती कहाँ हैं?'
राजपुरोहित ने एक पुड़िया जेब से निकाली और राजा के सामने रख दी जिसमें कुल पंद्रह मोती थे राजा के मन में आक्रोश, दुख और आश्चर्य के भाव एक साथ उभर आए.

राजा बोले - 'राजपुरोहित जी आपने ऐसा गलत काम क्यों किया? क्या आपको अपने पद की गरिमा का लेशमात्र भी ध्यान नहीं रहा ऐसा करते समय क्या आपको लज्जा नहीं आई? आपने ऐसा करके अपने जीवनभर की प्रतिष्ठा खो दी आप कुछ तो बोलिए,
आपने ऐसा क्यों किया?

राजा की अकुलाहट और उत्सुकता देखकर राजपुरोहित ने राजा को पूरी बात विस्तार से बताई तथा प्रसन्नता प्रकट करते हुए राजा से कहा - 'राजन् केवल इस बात की परीक्षा लेने हेतु कि ज्ञान और चरित्र में कौन बड़ा है, मैंने आपके खजाने से मोती उठाए थे अब मैं निर्विकल्प हो गया हूँ यही नहीं आज चरित्र के प्रति मेरी आस्था पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ गई है.
आपसे और आपकी प्रजा से अभी तक मुझे जो प्यार और सम्मान मिला है वह सब ज्ञान के कारण नहीं ‍अपितु चरित्र के ही कारण था आपके खजाने में सबसे अधिक बहुमू्ल्य वस्तु सोना-चाँदी या हीरा-मोती नहीं बल्कि चरित्र है.

अत: मैं चाहता हूँ कि आप अपने राज्य में चरित्र संपन्न लोगों को अधिकाधिक प्रोत्साहन दें ताकि चरित्र का मूल्य उत्तरोत्तर बढ़ता रहे कहा जाता है..
*धन गया,कुछ नहीं गया,*
*स्वास्थ्‍य गया,कुछ गया!*
*चरित्र गया तो सब कुछ गया..!*

*👪🔔⏰✅💯विशेष :- भव्य आत्माओं, आज वर्तमान में सभी लोग धन दौलत की या धनी लोगों को महत्व देते है। उनका चारित्र कैसा है इस पर कोई भी विशेष ध्यान नहीं दे ता। अगर किसी को ऊपर उचाईयों पर स्थान प्राप्त करना है तो अपनी स्वयं की नजरों में चारित्रवान बनना आवश्यक है।जब हमारी आत्मा हमें संकेत करें कि हम शास्त्रोंक्त विधि पूर्वक चारित्रवान है तो हम नियम से ऊंचाईयों तक का सफर तय करेंगे।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 27 जुलाई 2023

संघर्षों पर विजय

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*संघर्षों पर विजय*
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*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक  18 , 22 , 23, 30,   तारीख को है। जुलाई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक शिल्पकार लंबी यात्रा के बाद किसी छायादार वृक्ष के नीचे विश्राम के लिये बैठ गया। अचानक उसे सामने एक पत्थर का टुकड़ा पड़ा दिखाई दिया। उसने उस सुंदर पत्थर के टुकड़े को उठा लिया, सामने रखा और औजारों के थैले से छेनी-हथौड़ी निकालकर उसे तराशने के लिए जैसे ही पहली चोट की, पत्थर जोर से चिल्ला पड़ा, "उफ मुझे मत मारो।" दूसरी बार वह रोने लगा, "मत मारो मुझे, मत मारो... मत मारो।

शिल्पकार ने उस पत्थर को छोड़ दिया, अपनी पसंद का एक अन्य टुकड़ा उठाया और उसे हथौड़ी से तराशने लगा। वह टुकड़ा चुपचाप वार सहता गया और देखते ही देखते उसमें से एक देवी की मूर्ति उभर आई। मूर्ति वहीं पेड़ के नीचे रख वह अपनी राह पकड़ आगे चला गया। 

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कुछ वर्षों बाद उस शिल्पकार को फिर से उसी पुराने रास्ते से गुजरना पड़ा, जहाँ पिछली बार विश्राम किया था। उस स्थान पर पहुँचा तो देखा कि वहाँ उस मूर्ति की पूजा अर्चना हो रही है, जो उसने बनाई थी। भीड़ है, भजन आरती हो रही है, भक्तों की पंक्तियाँ लगीं हैं, जब उसके दर्शन का समय आया, तो पास आकर देखा कि उसकी बनाई मूर्ति का कितना सत्कार हो रहा है! जो पत्थर का पहला टुकड़ा उसने, उसके रोने चिल्लाने पर फेंक दिया था वह भी एक ओर में पड़ा है और लोग उसके सिर पर नारियल फोड़ फोड़ कर मूर्ति पर चढ़ा रहे हैं।

शिल्पकार ने मन ही मन सोचा कि जीवन में कुछ बन पाने के लिए शुरू में अपने शिल्पकार को पहचानकर, उनका सत्कार कर कुछ कष्ट झेल लेने से जीवन बन जाता हैं। बाद में सारा विश्व उनका सत्कार करता है। जो डर जाते हैं और बचकर भागना चाहते हैं वे बाद में जीवन भर कष्ट झेलते हैं, उनका सत्कार कोई नहीं करता।

*👪✅🕉️💯⏰विशेष:-भव्य आत्माओं, आज वर्तमान में हर कोई व्यक्ति संघर्षों से घबराकर सरल व शार्टकट रास्ता अपनाकर अपना जीवन बर्बाद कर रहे है। अतः हमें किसी भी कार्य में प्रवीण होना है तो दृढ़ संकल्प के साथ संघर्षों पर विजय प्राप्त कर अपनी मंजिल को प्राप्त करना चाहिए।*

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*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 25 जुलाई 2023

वर्तमान के मित्र

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*वर्तमान के मित्र*
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*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक  18 , 22 , 23, 30,   तारीख को है। जुलाई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*


▶️बन्नी नाम का एक खरगोश उपवन में रहता था। उसके कई दोस्त थे। उसे अपने दोस्तों पर गर्व था। एक दिन बन्नी खरगोश ने जंगली कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनी। वह बहुत डरा हुआ था। उसने मदद मांगने का फैसला किया। वह जल्दी से अपने मित्र हिरण के पास गया।

 उसने कहा, "प्रिय मित्र, कुछ जंगली कुत्ते मेरा पीछा कर रहे हैं। क्या तुम अपने नुकीले सींगों से उनका पीछा कर सकते हो?"

हिरण ने कहा, "यह सही है, मैं कर सकता हूं। लेकिन अब मैं व्यस्त हूं दस। आप भालू से मदद क्यों नहीं मांगते?"

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बन्नी खरगोश भालू के पास दौड़ा। "मेरे प्यारे दोस्त, आप बहुत मजबूत हैं। कृपया मेरी मदद करें। कुछ जंगली कुत्ते मेरे पीछे हैं। कृपया उन्हें दूर भगाएं", उसने भालू से अनुरोध किया।

भालू ने उत्तर दिया, "मुझे क्षमा करें। मैं भूखा और थका हुआ हूं। मुझे कुछ भोजन खोजने की जरूरत है। कृपया बंदर से मदद मांगें।"

बेचारा बन्नी बंदर, हाथी, सुकर और उसके सभी दोस्तों के पास गया। बन्नी को इस बात का दुख हुआ कि कोई उसकी मदद के लिए तैयार नहीं था।

वह समझ गया था कि उसे खुद ही कोई रास्ता निकालना होगा। वह एक झाड़ी के नीचे छिप गया। वह बहुत शांत पड़ा रहा। जंगली कुत्तों को बन्नी नहीं मिली। वे अन्य जानवरों का पीछा करते हुए चले गए।

बन्नी खरगोश ने सीखा कि उसे अपने अनुपयोगी मित्रों पर निर्भर न रहकर अकेले ही जीवित रहना सीखना होगा।

*🕉️🎪👪✍️✅विशेष:- भव्य आत्माओं, आज हमसे जुड़ने वाली मित्र मंडली में नब्बे प्रतिशत लोग केवल अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए ही मित्रता निभाते है। हमें अपने किसी भी मित्र से किसी प्रकार की उम्मीद नहीं करना चाहिए। हमें अपनी शक्ति अनुसार योग्यता अनुसार दूसरों का सहायक बनकर जीवन सार्थक करना चाहिए।दूसरों पर निर्भर रहने से बेहतर है कि हमें स्वयं के आत्मविश्वास को दृढ़ता पूर्वक करते हुए अपने लक्ष्य की ओर खुद पुरुषार्थ करके कार्य करना चाहिए। ऐसा करने से हमें सफलता प्राप्त होती ही है यही हमारा अनुभव है।*


*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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रविवार, 23 जुलाई 2023

मेरा कर्तव्य

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*मेरा कर्तव्य*
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 ✍️पिताश्री आप अभी तक तैयार नहीं हुए। बैग कहां है? आपका। चलिए मैं पैक करती हूं।पिताश्री  ने एक उदास नजर निली पर डाली निली बेटा मैं कहीं नहीं जाऊंगा। ये घर तेरी मां की यादों से भरा हुआ है।निली की ‌आंखे भर आई पिताश्री मां को गये छह महीने हो गए हैं आपकी तबियत भी ठीक नहीं है ऐसे में मैं आपको अकेले नहीं छोड़ सकती।आप मेरे घर चल रहे हैं मेरे साथ। बेटा मैं तेरे घर कैसे रह सकता हूं? 

बेटी के घर का तो लोग पानी तक नहीं पीते हैं। फिर वहां तेरे सास ससुर भी हैं ।उन्हें मेरा वहां रहना कैसे अच्छा लग सकता है।आखिर हूं तो मैं एक बाहरी आदमी। पिताश्री वो लोग ऐसे नहीं हैं वो मेरे साथ कितने अच्छे हैं।निली पापा का हाथ अपने हाथ में लेकर बैठ गई। पिछली बार आपको शुगर का अटैक आया था । कितनी मुश्किल से ठीक... कहते हुए , उसकी आंखों में आंसू आ गए। पापाजी मैं आपकी इकलौती बेटी हूं।आपकी सारी जिम्मेदारी अब मेरी है। बस मैं और कुछ नहीं सुनुंगी। 

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पापाजी सोच में डूब गए अनिल (दामाद) जी ने तो एक बार भी नहीं कहा। हां ये जरूर कहा था कि पापाजी हम आते रहेंगे आपसे मिलने।निली तूने दामाद जी को पूछा। अरे पापाजी उनकी और मेरी राय अलग थोडे़ ही है।निली पापाजी को लेकर अपने घर आ गई। उसके सास-ससुर समधी को देख कर चौंक गए अनिल ने भी पैर छुए और कहा अच्छा किया पापाजी जो आप कुछ दिन के लिए यहां आ ग‌ए। पापाजी रहने तो लगे पर उन्हें लग‌ रहा‌ था कि शायद दामाद और उनके माता-पिता उनके यहां आने से खुश नहीं हैं। एक दिन पापाजी लॉन में घूम रहे थे कि अचानक उन्हें अनिल की आवाज सुनाई दी।

निली पापाजी यहां पर कब तक रहेंगे। ऐसा क्यों पूछ रहे हैं आप। वहां पर उनका है ही कौन‌ और उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है। अरे तुम समझ नहीं रही हो हमें तो अपने घर में ही अजीब सा महसूस होने लगा है। हमें किसे? अच्छा मम्मी-पापा जी ने कहा आपसे।अब तुम जो भी समझो। अरे वहां पर उनकी अच्छी व्यवस्था कर सकती हो। पापाजी और नहीं सुन सके कांपते हुए कदमों से वापस आ ग‌ए। अगले दिन जाने की तैयारी करने लगे।

निली बोली पिताश्री ऐसे कैसे जायेंगे आप। पापाजी उसे ‌डांटने लगे निली मेरी फिजूल में चिंता मत करो अपने पति और सास ससुर का ध्यान रखो बेटा मैं अपना ख्याल खुद रख सकता हूं।निली बेटा बहुत दिन हो गए अब जाना चाहिेए मैं अनिल से बात करती हूं। अभी आपकी तबियत ठीक नहीं है। जब आप ठीक हो जाएंगे तो मैं आपको खुद छोड़ आऊंगी। नहीं निली देखो मैं तुमसे नाराज हो जाऊंगा।निली नाश्ता बनाने लगी। 

सोच रही थी कि पापाजी को किसी ने कुछ तो कहा है। नाश्ता करने के बाद उसने कहा आज पापाजी जा रहे हैं।वह अपने सास, ससुर और अनिल का चेहरा देख रही थी कि उनके चेहरे पर चमक आ गई थी। तभी उसने कहा कि मैंने एक फैसला किया है कि पापाजी इतनी बड़ी कोठी में अकेले कैसे रहेंगे। सोच रही हूं कि गरीब बच्चों के लिए उसमें एक छोटा-सा स्कूल खोल दिया जाय। 

पापाजी और मैं मिल कर एक ट्रस्ट बनाएंगे ताकि पापाजी के बाद भी स्कूल चलता रहे। और पापाजी आपकी वो जमीन पडी़ है उसे बेच देते हैं दो करोड़ की वैल्यू है उसकी उसे ट्रस्ट के फंड में जमा कर देंगे उसके इंट्रेस्ट से उन गरीब बच्चों की फीस में मदद करेंगे जो कुछ करना चाहते हैं उसमें योगदान देंगे। बाकी आपकी पेंशन और फंड आपके लिए बहुत है। पापाजी मैं आज से ही इस पर काम शुरू करती हूं। पापाजी हतप्रभ हो कर उसे देख रहे थे।

अनिल की आंखों के सामने तो अंधेरा छा गया उसके मम्मी पापा का मुंह खुला रह गया। मन ही मन हिसाब करने लगा पांच करोड़ की कोठी दो करोड़ की जमीन और फंड इतना बड़ा नुकसान। जब‌ निली पापाजी को छोड़कर लौटी तो अनिल उसका इंतजार कर रहा था। ये सब क्या बकवास कर रही थी तुम।निली मुस्कराई और बोली ये बकवास नहीं सच है। ऐसा मैं इसलिए करूंगी कि किसी को भी मेरे पिताश्री की मौत का इंतजार न रहे। 

पापाजी ने मेरी शादी पर ऐसी कौन सी चीज है जो नहीं दी ।अनिल गुस्से से बोला ये तो उनका फर्ज था।फर्ज सिर्फ लड़की के बाप का होता है। क्योंकि उसने लड़की पैदा करने की गलती की है। मैं अपने पापा की इकलौती बेटी हूं। तो क्या मेरा फर्ज नहीं था उनकी देखभाल करने का वो भी ऐसे वक्त में जब उनकी तबीयत ठीक नहीं है। और उन्हें सहारे की जरूरत है। 

माफी चाहती हूं कि उनके कुछ दिन यहां रहने से सबको तकलीफ हुई। मैंने कभी तुम्हें तुम्हारे फर्ज निभाने से नहीं रोका। अपने सास ससुर की सेवा में भी कोई कमी नहीं रखी। तुम मुझे मेरे पिताश्री के प्रति मेरा फर्ज निभाने से नहीं रोक सकते। उसकी आवाज में दृढ़ता थी,अनिल खामोश हो कर उसे देख रहा था। 

*✅🔔🕉️👪💯विशेष:- भव्य आत्माओं,हर संतान का यह फर्ज रहता है कि वो अपने माता-पिता  के साथ साथ अपने सास ससुर की भी जिम्मेदारिया निभाये।जिससे दो परिवारों का रिश्ता हमेशा अटूट बना रहे।आज वर्तमान में पैसे के लोभी लालची लोगों की भरमार है। बिना स्वार्थ के कोई भी व्यक्ति अपने जन्म दाता माता पिता को भी बुढ़ापे में बोझ समझते है।इसी लोभ लालच के कारण वह व्यक्ति विशेष चौरासी लाख योनियों में सुख की तलाश कर रहा किंतु उसे आजतक वह सुख न प्राप्त हुआ ना होगा। जो निःस्वार्थ भाव से अपने बुजुर्ग माता-पिता व अन्य लोगों की सेवा करता है उसे वह सुख प्राप्त होता है जिसके बारे में यहां लिखने में असमर्थ हूं।* 

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 21 जुलाई 2023

हमारी मलिनता का कारण

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*हमारी मलिनता का कारण*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒हमारी मलिनता का कारण ✍️🐒*

एक राजा को अपने लिए नित्य दिनचर्या के लिए एक सेवक की आवश्यकता थी। उसके मंत्री ने दो दिनों के बाद एक योग्य व्यक्ति को राजा के सामने पेश किया।

राजा ने उसे अपना सेवक बना तो लिया पर बाद में मंत्री से कहा, ‘‘वैसे तो यह आदमी ठीक है पर इसका रंग-रूप अच्छा नहीं है।’’

मंत्री को यह बात अजीब लगी पर वह चुप रहा। एक बार गर्मी के मौसम में राजा ने उस सेवक को पानी लाने के लिए कहा। सेवक सोने के पात्र में पानी लेकर आया। राजा ने जब पानी पिया तो पानी पीने में थोड़ा गर्म लगा। राजा ने कुल्ला करके फेंक दिया।

वह बोला, ‘‘इतना गर्म पानी, वह भी गर्मी के इस मौसम में, तुम्हें इतनी भी समझ नहीं।’’
 
मंत्री यह सब देख रहा था। मंत्री ने उस सेवक को मिट्टी के पात्र में पानी लाने को कहा। राजा ने यह पानी पीकर तृप्ति का अनुभव किया। इस पर मंत्री ने कहा, ‘‘महाराज, बाहर को नहीं, भीतर को देखें। सोने का पात्र सुंदर, मूल्यवान और अच्छा है, लेकिन शीतलता प्रदान करने का गुण इसमें नहीं है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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मिट्टी का पात्र अत्यंत साधारण है लेकिन इसमें ठंडा बना देने की क्षमता है। कोरे रंग-रूप को न देखकर गुण को देखें।’’

 उस दिन से राजा का नजरिया बदल गया। सम्मान, प्रतिष्ठा, यश, श्रद्धा पाने का अधिकार चरित्रवान को मिलता है, चेहरे को नहीं।

प्रकृति ने कहा है कि मनुष्य गुणों से उत्तम बनता है न कि ऊंचे आसन पर बैठने से या पदवी से।

 जैसे ऊंचे महल के शिखर पर बैठ कर भी कौवा, कौवा ही रहता है; गरुड़ नहीं बन जाता।
 उसी तरह अमिट सौंदर्य निखरता है मन की पवित्रता से,क्योंकि सौंदर्य रंग-रूप, नाक- नक्श,चाल-ढाल, रहन-सहन, सोच- शैली की प्रस्तुति मात्र नहीं होता।
यह व्यक्ति के मन,विचार,चिंतन और कर्म का आइना है। कई लोग बाहर से सुंदर दिखते हैं मगर भीतर से बहुत कुरूप होते हैं..!!

*🕉️🪔🙏💯⏰विशेष:- भव्य आत्माओं , आज सबसे पहले हमें स्वयं का आकलन करना आवश्यक है। आज हम सभी गुणों की तरफ ना देखते हुए व्यक्ति के रंग-रूप में उलझे हुए हैं।इस कारण से हमारे अंदर मलिनता बढ़ने से हम अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हैं।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 19 जुलाई 2023

मेरा पढ़ा-लिखा बेटा

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*मेरा पढ़ा-लिखा बेटा*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒मेरा पढ़ा-लिखा बेटा ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक  18 , 22 , 23, 30,   तारीख को है। जुलाई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

🙏यह घटनाक्रम कुछ समय पहले की है इससे आप भी कुछ सीख ग्रहण कर सकते है।👉 पत्नी के अंतिम संस्कार व तेरहवीं के बाद रिटायर्ड पोस्टमैन सेवकराम गाँव छोड़कर मुम्बई में अपने इकलौते पुत्र सुनील के बड़े से मकान में आये हुए हैं। सुनील बहुत मनुहार के बाद यहाँ ला पाया है। यद्यपि वह पहले भी कई बार प्रयास कर चुका था किंतु अम्मा ही बाबूजी को यह कह कर रोक देती थी कि 'कहाँ वहाँ बेटे बहू की ज़िंदगी में दखल देने चलेंगे। यहीं ठीक है। सारी जिंदगी यहीं गुजरी है और जो थोड़ी सी बची है उसे भी यहीं रह कर काट लेंगे। ठीक है न!' 

बस बाबूजी की इच्छा मर जाती। पर इस बार कोई साक्षात अवरोध नहीं था और पत्नी की स्मृतियों में बेटे के स्नेह से अधिक ताकत नहीं थी , इसलिए मनोहर बम्बई आ ही गए थे।

सुनील एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कम्पनी में इंजीनियर है। उसने आलीशान घर व आधुनिक गाड़ीया ले रखी थी।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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घर में घुसते ही सेवकराम ठिठक कर रुक गए। गुदगुदी मैट पर पैर रखे ही नहीं जा रहे हैं उनके। दरवाजे पर उन्हें रुका देख कर सुनील बोला - "आइये बाबूजी, अंदर आइये।"

- "बेटा, मेरे गन्दे पैरों से यह कालीन गन्दी तो नहीं हो जाएगी।"

- "बाबूजी, आप उसकी चिंता न करें। आइये यहाँ सोफे पर बैठ जाइए।"

सहमें हुए कदमों में चलते हुए सेवकराम जैसे ही सोफे पर बैठे तो उनकी चीख निकल गयी - अरे रे! मर गया रे!

उनके बैठते ही नरम औऱ गुदगुदा सोफा की गद्दी अन्दर तक धँस गयी थी। इससे सेवकराम चिहुँक कर चीख पड़े थे।

चाय पीने के बाद सुनील ने मनोहर से कहा - "बाबूजी, आइये आपको घर दिखा दूँ अपना।"

- "जरूर बेटा, चलो।"

- "बाबू जी, यह है लॉबी जहाँ हम लोग चाय पी रहे थे। यहाँ पर कोई भी अतिथि आता है तो चाय नाश्ता और गपशप होती है। यह डाइनिंग हाल है। यहाँ पर हम लोग खाना खाते हैं। बाबूजी, यह रसोई है और इसी से जुड़ा हुआ यह भण्डार घर है। यहाँ रसोई से सम्बंधित सामग्री रखी जाती हैं। यह बच्चों का कमरा है।"

- "तो बच्चे क्या अपने माँ बाप के साथ नहीं रहते?"

- बाबूजी, यह शहर है और शहरों में मुंबई है। यहाँ बच्चे को जन्म से ही अकेले सोने की आदत डालनी पड़ती है। माँ तो बस समय समय पर उसे दूध पिला देती है और उसके शेष कार्य आया आकर कर जाती है।"

थोड़ा ठहर कर सुनील ने आगे कहा,"बाबूजी यह आपकी बहू और मेरे सोने का कमरा है और इस कोने में यह गेस्ट रूम है। कोई अतिथि आ जाए तो यहीं ठहरता है। यह छोटा सा कमरा पालतू जानवरों के लिए है। कभी कोई कुत्ता आदि पाला गया तो उसके लिए व्यवस्था कर रखी है।"

सीढियां चढ़ कर ऊपर पहुँचे सुनील ने लम्बी चौड़ी छत के एक कोने में बने एक टीन की छत वाले कमरे को खोल कर दिखाते हुए कहा - "बाबूजी यह है घर का कबाड़खाना। घर की सब टूटी फूटी और बेकार वस्तुएं यहीं पर एकत्र कर दी जाती हैं। और दीवाली- होली पर इसकी सफाई कर दी जाती है। ऊपर ही एक बाथरूम और टॉइलट भी बना हुआ है।"

सेवकराम ने देखा कि इसी कबाड़ख़ाने के अंदर एक फोल्डिंग चारपाई पर बिस्तर लगा हुआ है और उसी पर उनका झोला रखा हुआ है। मनोहर ने पलट कर सुनील की तरफ देखा किन्तु वह उन्हें वहां अकेला छोड़ सरपट नीचे जा चुका था। 

सेवकराम उस चारपाई पर बैठकर सोचने लगे कि 'कैसा यह घर है जहाँ पाले जाने वाले जानवरों के लिए अलग कमरे का विधान कर लिया जाता है किंतु बूढ़े माँ बाप के लिए नहीं। इनके लिए तो कबाड़ का कमरा ही उचित आवास मान लिया गया है। नहीं.. अभी मैं कबाड़ नहीं हुआ हूँ। सुनील की माँ की सोच अत्यंत लाभकारी सही थी। मुझे यहाँ नहीं आना चाहिए था।'

अगली सुबह जब सुनील बाबूजी के लिए चाय लेकर ऊपर गया तो कक्ष को खाली पाया। बाबूजी का झोला भी नहीं था वहाँ। उसने टॉयलेट व बाथरूम भी देख लिये किन्तु बाबूजी वहाँ भी नहीं थे। वह झट से उतर कर नीचे आया तो पाया कि मेन गेट खुला हुआ है। उधर सेवकराम टिकट लेकर गाँव वापसी के लिए सबेरे वाली गाड़ी में बैठ चुके थे। उन्होंने कुर्ते की जेब में हाथ डाल कर देखा कि उनके 'अपने घर' की चाभी मौजूद थी। उन्होंने उसे हिफाजत से अपने सामान में सुरक्षित कर लिया। चलती हुई गाड़ी में उनके चेहरे को छू रही हवा उनके इस निर्णय को और मजबूत बना रही थी। उन्होंने सोचा कि मैं रिटायर हुआ तो क्या हुआ आज भी भारत सरकार मुझे इतनी पेंशन दे रही है कि मैं अपने अलावा चार लोगों का पेट भर सकता हूं  । इस अनेकों विचारों के साथ घर पहुँच कर चैन की सांस ली।

*👪⏰🔔💯↔️विशेष :- भव्य आत्माओं,जीवन मे अपने बुजुर्ग माता पिता का उसी प्रकार ध्यान रखे जिस प्रकार माता पिता बचपन मे आपका ध्यान रखते थे,क्योकि एक उम्र के बाद बचपन फिर से लौट आता है।इसलिए उस पड़ाव पर व्यस्त जिंदगी में से समय निकाल कर उन्हें भी थोड़ा समय दीजिये जिससे आपको उनका वह आशीर्वाद जो उनके ना रहने पर भी प्राप्त होता रहेगा, इससे अच्छा लगेगा ओर उनके अहसास के द्वारा पाज़िटिव इनर्जी बनी रहेगी जो हमारी विषम परिस्थितियों में हमें संभाल लेगी।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

सोमवार, 17 जुलाई 2023

भारतीय मां

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*भारतीय मां*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 भारतीय मां ✍️🐒*


एक गरीब परिवार में एक गुणवान सी बेटी ने जन्म लिया..

बाप दुखी हो गया बेटा पैदा होता तो कम से कम काम में तो हाथ बटाता,,
उसने बेटी को पाला जरूर,
मगर दिल से नही.... 

वो पढने जाती थी तो ना ही स्कूल की फीस टाइम से जमा करता,
और ना ही कापी किताबों पर ध्यान देता था...
अक्सर दारू पी कर घर में कोहराम मचाता था........

उस लडकी की माँ बहुत अच्छी व बहुत भोली भाली थी। वो अपनी बेटी को बडे लाड प्यार से रखती थी.. 
वो पति से छुपा-छुपा कर घर खर्च के पैसे से बेटी की फीस जमा करती।
और कापी किताबों का खर्चा भी देती थी..
अपना पेट काटकर फटे पुराने कपडे पहन कर गुजारा कर लेती थी।
मगर बेटी का पूरा खयाल रखती थी...

पति अक्सर घर से कई कई दिनों के लिये गायब हो जाता था।

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जितना कमाता था दारू मे ही फूक देता था... 
वक्त का पहिया घूमता गया

बेटी धीरे-धीरे समझदार हो गयी..
दसवीं क्लास में उसका प्रवेश होना था।
मॉ के पास इतने पैसै ना थे जो बेटी का स्कूल में दाखिला करा पाती..
बेटी डरडराते हुये पापा से बोली:
पापा मैं पढना चाहती हूं मेरा हाईस्कूल में प्रवेश करा दीजिए मम्मी के पास पैसै नही है... 
बेटी की बात सुनते ही बाप आग वबूला हो गया और चिल्लाने लगा बोला,तू कितनी भी पढ़ लिख जाये तुझे तो चौका चूल्हा ही सम्भालना है, क्या करेगी तू ज्यादा पढ़ लिख कर..

उस दिन उसने घर में आतंक मचाया व सबको मारा पीटा।

बाप का व्यहार देखकर बेटी ने मन ही मन में सोच लिया कि अब वो आगे की पढाई नही करेगी.... 
एक दिन उसकी माँ बाजार गयी। 

बेटी ने पूछा:माँ कहाँ गयी थी 
माँ ने उसकी बात को अनसुना करते हुये कहा :
बेटी कल मै तेरा स्कूल में दाखिला कराउंगी।
बेटी ने कहा: नही़ं माँ मै अब नही पढूंगी। मेरी वजह से तुम्हे कितनी परेशानी उठानी पड़ती है। पापा भी तुमको मारते पीटते हैं, कहते कहते रोने लगी..

माँ ने उसे सीने से लगाते हुये कहा: बेटी मै बाजार से कुछ रुपये लेकर आयी हूं मै कराऊँगी तेरा दखिला..
बेटी ने माँ की ओर देखते हुये पूछा: माँ तुम इतने पैसै कहांसे लायी हो??
माँ ने उसकी बात को फिर अनसुना कर दिया...

वक्त बीतता गया 
"
"
"
"माँ ने जी तोड़ मेहनत करके बेटी को पढाया लिखाया।
बेटी ने भी माँ की मेहनत को देखते हुये मन लगा कर दिन रात पढाई की
और आगे बढ़ती चली गयी.......

इधर बाप दारू पी पी कर बीमार पड गया
डाक्टर के पास ले गये।
डाक्टर ने कहा इनको टी.बी. है।
एक दिन तबियत ज्यादा गम्भीर होने पर बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया..

दो दिन बाद उस जबे होश आया तो डाक्टरनी का चेहरा देखकर उसके होश उड गये।

वो डाक्टरनी कोई और नही बल्कि उसकी
अपनी बेटी थी.. 
शर्म से पानी पानी होगया बाप।
कपडे से अपना चेहरा छुपाने लगा
और रोने लगा हाथ जोडकर बोला: बेटी मुझे माफ करना मैं तुझे समझ ना सका...
दोस्तों बेटी आखिर बेटी होती है।
बाप को रोते देखकर बेटी ने बाप को गले लगा लिया..

दोस्तों गरीबी और अमीरी से कोई फर्क नहीं पडता,,
अगर इन्सान का इरादा हो तो आसमान में भी छेद हो सकता है।

एक दिन बेटी माँ से बोली: माँ तुमने मुझे आजतक नहीं बताया कि मेरे हाईस्कूल के  लिये व मेरे डाक्टरी कोर्स के पैसै कहाँ से लायी थी??

बेटी के बार बार पूछने पर
माँ ने जो बात बतायी
उसे सुनकर
बेटी की रूह काँप गयी.... 

माँ ने अपने शरीर से बड़े लोगों के घर चौंका बर्तन का कार्य  कर बेटी कि शिक्षा पूर्ण  कराई थी ....

*🔔🕉️⏰👪✍️विशेष:- भव्य आत्माओं,तभी तो माँ को भगवान का दर्जा दिया गया हैं।माँ जितना औलाद के लिये त्याग कर सकती है,उतना दुनियाँ में कोई और नही।उस मां ने हमारे जन्म से हमारे सभी कार्य किए। विषम परिस्थितियों में उसने हमारे दुःखों को अपने ऊपर ले लिया और हमें अपनी ममता की छांव का सुख प्रदान किया।उस मां का हम किसी भी प्रकार कर्ज नहीं उतार सकते हां इतना अवश्य ही करें कि उन्हें बुढ़ापे में हमारे द्वारा किसी प्रकार का मन से- वचनों से - शरीर से किसी प्रकार का कष्ट ना हो।ऐसा व्यवहार रखें कि उनके अंतरंग से हमें सदा आशीर्वाद ही प्राप्त होता रहें।* .....

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 15 जुलाई 2023

दयावान कौन

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*दयावान कौन*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 दयावान कौन ✍️🐒*


उस बस स्टैण्ड में तीन दयालु व्यक्ति, और एक कहीं से भी दयालु नहीं लगने वाला व्यक्ति बैठा था । वो सभी बातें कर ही रहे थे कि इतने में एक बुढ़िया अपने दोनों बेटों के विक्षिप्त होने के कारण दाने-दाने को मोहताज़ होने की जानकारी देते हुए रोने लगी । 

इस पर पहले दयालु ने कहा-‘‘तुम लोग भूखे मर रहे हो इसका यह अर्थ हेै कि, राज्य नीति-निर्देशक तत्वों का पालन नहीं कर रहा है, मैं इस बात को विधानसभा और लोकसभा तक ले जाऊँगा ।’’

दूसरे दयालु ने कहा-‘‘ये तुम्हारे गाॅंव वालों के लिये शर्म की बात है कि उनके होते हुए एक परिवार भूख से मर रहा है ।’’ 

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तीसरे दयालु ने कहा-‘‘माई अब रोना-धोना बंद करो । मैं बड़ा ही भावुक क़िस्म का आदमी हूॅं । तुम्हें रोता देखकर मुझे भी रोना आ रहा है ।’’

चौथा व्यक्ति निस्पृह भाव से उनकी बातें सुनता रहा, और फिर उठकर वहाँ से चला गया । 

इस पर एक दयालु ने कहा-देखो तो लोग दो शब्द सांत्वना के भी नहीं बोल सकते। कुछ देर बाद वह चौथा व्यक्ति एक थैले में दस क़िलो चावल लेकर आया, और बड़ी ही ख़ामोशी से उसने उस बुढिया को थैला सौंप दिया। 

अचानक तीनों दयालुओं का हाथ अपने-अपने गालों तक पहुँच गया । उन्हेंं ऐसा लगा, जैसे उन्होंने झन्नाटेदार थप्पड़ स्वयं को रसीद कर दिया हो ।

*भव्य आत्माओं:- इस कथानक से आप स्वयं का आकलन कर स्वयं का सुधार करें। वर्तमान समय में हमारी जितनी आयु हो गई उसमें हमनें दुसरों के सुधार के लिए प्रयास किया किंतु स्वयं के सुधार के बारे में नहीं सोचा। अतः इस कहानी से प्रेरणा लेकर संकल्पित हो ओर अपने स्वयं के कल्याण के प्रति समर्पित हो।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 10 जुलाई 2023

पिता का वसीयतनामा

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*पिता की वसीयतनामा*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 पिता की वसीयतनामा ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 श्रावण कृष्ण दसमी , दिनांक 12 जुलाई  बुधवार कलिकाल के 17 वें तीर्थंकर कुंथुनाथ   भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक   12  तारीख को है। यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

मृत्यु के समय टॉम स्मिथ ने अपने बच्चों को बुलाया और अपने पदचिह्नों पर चलने की सलाह दी ताकि उनको अपने हर कार्य में मानसिक शांति मिले।

उसकी बेटी सारा ने कहा- "डैडी !! यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप अपने बैंक में एक पैसा भी छोड़े बिना मर रहे हैं। दूसरे पिता, जिनको आप भ्रष्ट और सार्वजनिक धन के चोर बताते हैं, अपने बच्चों के लिए घर और सम्पत्ति छोड़कर गए हैं ; यह घर भी जिसमें हम रहते हैं किराये का है।

 सॉरी !! मैं आपका अनुसरण नहीं कर सकती। आप जाइए, हमें अपना मार्ग स्वयं बनाने दीजिए।"

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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कुछ क्षण बाद उनके पिता ने अपने प्राण त्याग दिये। 

तीन साल बाद, सारा एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में इंटरव्यू देने गई तो चेयरमैन ने पूछा- "तुम कौन सी स्मिथ हो ?"
"मैं सारा स्मिथ हूँ, मेरे पिता टॉम स्मिथ अब नहीं रहे।"
चेयरमैन ने उसकी बात काट दी, हे भगवान !! तुम टॉम स्मिथ की पुत्री हो !! वे कमेटी के अन्य सदस्यों की ओर घूमकर बोले - "यह  स्मिथ वही थे जिन्होंने प्रशासकों के संस्थान में मेरे सदस्यता फ़ार्म पर हस्ताक्षर किये थे और मैं वह स्थान पा सका जहाँ मैं आज हूँ। उन्होंने यह सब, कुछ भी बदले में बिना कुछ लिये बिना ही मेरी योग्यता देखते हुए मुझे प्रोत्साहित किया था। हम एक-दूसरे को नही जानते थे, पर उन्होंने मेरे लिए यह सब किया था।"
फिर वे सारा की ओर मुड़े- "मुझे तुमसे कोई सवाल नहीं पूछना है। कल आना, तुम्हारा नियुक्ति पत्र तैयार मिलेगा।

सारा स्मिथ उस कम्पनी में कॉरपोरेट मामलों की प्रबंधक बन गई। उसे ड्राइवर सहित दो कारें, ऑफिस से जुड़ा हुआ डुप्लेक्स मकान और एक लाख पाउंड प्रतिमाह का वेतन अन्य भत्तों और ख़र्चों के साथ मिला। उस कम्पनी में दो साल कार्य करने के बाद, एक दिन कम्पनी का प्रबंध निदेशक अमेरिका से आया। उसकी इच्छा त्यागपत्र देने और अपने बदले किसी अन्य को पद देने की थी। उसे एक ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता थी जो बहुत ईमानदार हो ; कम्पनी के सलाहकार ने उस पद के लिए सारा स्मिथ को नामित किया।

इंटरव्यू में सारा से उसकी सफलता का राज पूछा गया तो आंखों में आंसू भरकर उसने उत्तर दिया- "मेरे पिता ने मेरे लिए वह मार्ग खोला जिसे में कभी भी प्राप्त नहीं कर सकती थी। उनकी मृत्यु के बाद ही मुझे पता चला कि वे वित्तीय (धन) दृष्टि से निर्धन थे, लेकिन प्रामाणिकता, अनुशासन और सत्यनिष्ठा के वे बहुत धनी थे।"फिर उससे पूछा गया कि वह रो क्यों रही है, उसने कहा- "मृत्यु के समय, मैंने ईमानदार और प्रामाणिक होने के कारण अपने पिता का अपमान किया था ; मुझे आशा है कि अब वे जहाँ भी है ,मुझे क्षमा कर देंगे। मैंने यह सब प्राप्त करने के लिए कुछ नहीं किया, उन्होंने ही मेरे लिए यह सब किया था।"
"क्या तुम अपने पिता के पदचिह्नों पर चलोगी जैसा कि उन्होंने कहा था ?" उसका सीधा उत्तर था- "मैं अब अपने पिता की पूजा करती हूँ।आज वर्तमान में उनके द्वारा ईमानदारी व अनुशासन को अपने ह्रदय में विराजमान कर यह जीवन व्यतीत कर रही हूं।उनका बड़ा सा चित्र मेरे रहने के कमरे लगा है।वह चित्र से मुझे प्रति समय आशीर्वाद व दृढ़ संकल्प के साथ दृढ़ता प्राप्त होती है।"

*🔔✅💯👪✍️विशेष  :- भव्य आत्माओं :- सच ही है नाम कमाना सरल नहीं होता क्योंकि इसका पुरस्कार जल्दी नहीं मिलता, पर देर सवेर मिलता ही है‌। ईमानदारी, अनुशासन, आत्मनियंत्रण और ईश्वर से डरना ही किसी व्यक्ति को धनी बनाता है, मोटा बैंक खाता नहीं। अतः अपने बच्चों के लिए एक अच्छी विरासत छोड़कर जाइए।अपना सुधार के साथ अपनी संतानों को संस्कारित करना ही संसार की सबसे बड़ी सेवा है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 8 जुलाई 2023

सहज वर्षायोग सूचना

*🕉️ सिध्दम नम:*
🕉️सहज वर्षायोग सूचना🌞
.       🙏 *श्री आदिनाथ जिनेद्राय नमः*🙏
 .     *🕉️🌞श्री वसुनन्दी गुरुवे नमः 🌞🕉️*  
  *🌲21 वे मंगल वर्षायोग  कलश की स्थापना*
   *रविवार   दिनांक 09/07/2023*

👨‍👩‍👧‍👦धर्मानुरागियों
               🕉️जय जिनेंद्र, 
        ➡️✍️⌚👨‍👩‍👧‍👦*परम पूज्य 108 श्री श्वेतपिच्छाचार्य विध्यानंदजी मुनिराज से आचार्य पद से  अलंकृत श्री वसुनन्दीजी मुनि महाराज के आत्मसाधक शिष्य क्षुल्लक 105 नित्यानंद सागर  महाराज का  जयपुर महानगरी मे   उनका 21 वाँ मंगल  वर्षायोग *श्री शांतिसागर समाधि साधना केवा सेवा केंद्र जयपुर कार्यालय* पर हो रहा है । 
 वर्षायोग हेतु मंगल कलश स्थापना दिनांक *09/ 07/ 2022 को दिन रविवार दोपहर 3.00 बजे* होने जा रही है । आप सभी से अनुरोध है कि वर्षायोग  की अनुमोदन करते हुए  धर्मलाभ  ले *वर्षायोग के स्थापना के कार्यक्रम*
     
दोपहर  3:00 -  झंडारोहण
   ➡️  - मंगलाचरण, अखंडदीप प्रज्वलन, पादप्रक्षालन, गुरुपूजन, शास्त्र भेंट
 वर्षायोग कलश स्थापना विधि
               *क्षुल्लक महाराज का उद्बोधन* 
      गुरुदेव का कहना है कि इसवर्ष  *देश विदेश के पुण्यार्जक श्रावक के  घरों में यह वर्षायोग का मंगल कलश पहुँचे ताकि आपसभी की चंचला लक्ष्मी से, सभी का आयु ,आरोग्य, धन  सम्पदा बनी रहे ओर साथ ही एक अति आवश्यक *श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र के विकास  में आपका सराहनीय सहयोग हो इस बात को ध्यान में रखते हुए 
*🕉️1.गणधर कलश की राशि मात्र 1,11,000/- रुपए रखी है* 
*🌞2.रत्नत्रय कलशकी राशि मात्र 51,000/- रुपए रखी है* 
*🔔3.शक्तिकलश की राशि मात्र 21,000/- रुपए रखी है* 
*🎪4 अखंड ज्योति शुद्ध घी की(सम्पूर्ण वर्षायोग)   राशि मात्र 25,000/- रुपए रखी है*
इस सर्वश्रेष्ठ कार्य हेतु मंगल कलश  हमसे निम्न नम्बर पर आप सम्पर्क कर जल्द से जल्द अपने नाम दे। 
*🔔नोट:-कलशों की संख्या सिमीत होने से पहले जिसकी राशि जमा होगी उसे ही मंगल कलश दिया जायेगा।*
     आपके मंगल कलश की स्थापना क्षुल्लकजी के द्वारा शास्त्रोक्त विधि से ...
*🔔 कार्यालय➡️*
 *🕉️श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र जयपुर* पर होगी । वर्षायोग के दरम्यान गुरुदेव कलश पर रोज़ाना जाप व विशिष्ट अनुष्ठान होगे एवं वर्षायोग के बाद आपको यह   सहज मंगल कलश आपके पते पर कोरीयर द्वारा भिजवाएगे।
*⏰✍पुण्यार्जक श्रावक अपनी राशि बैंक में  जमा करवाकर निम्न नंबरो पर सम्पर्क करें🌞* 
*Sevavrti* 
*Punjab National Bank*
*A/C No.5871000100010922*
*IFC Code PUNB 0587100* 
*Durgapura JAIPUR* (Rajasthan)
सम्पर्क सूत्र:-
*🌞1. 9461956111*
*2.9982411713*
धन्यवाद....
     अधिक जानकारी हेतु सम्पर्क करे।
सम्पर्क सूत्र:-

*🌞1.9982411713*
*🌞2.9461956111*
    
       🙏निवेदक🙏
*🌞श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र जयपुर*

 *🌞ट्रस्ट मंडल एवं प्रबंध कार्यकारिणी*
*🕉️कार्यालय का पता ⬇️*
*🕉️श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र 184 गुलाब विहार जयपुर*

 *व्हाट्सएप नंबर 9982411713*
       🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

गुरुवार, 6 जुलाई 2023

शुद्धिकरण कैसे करें

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*शुद्धिकरण कैसे करें*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 शुद्धिकरण कैसे करें ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 श्रावण कृष्ण दसमी , दिनांक 12 जुलाई  बुधवार कलिकाल के 17 वें तीर्थंकर कुंथुनाथ   भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक   12  तारीख को है। यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक बार एक गाँव में पंचायत लगी थी। वहीं थोड़ी दूरी पर एक सन्त ने अपना बसेरा किया हुआ था। जब पंचायत किसी निर्णय पर नहीं पहुच सकी तो किसी ने कहा कि क्यों न हम महात्मा जी के पास अपनी समस्या को लेकर चलें, अतः सभी सन्त के पास पहुँचे।
          जब सन्त ने गांव के लोगों को देखा तो पुछा कि कैसे आना हुआ ? तो लोगों ने कहा, “महात्मा जी गाँव भर में एक ही कुआँ हैं और कुँए का पानी हम नहीं पी सकते, बदबू आ रही है।”
          सन्त ने पुछा- हुआ क्या ? पानी क्यों नहीं पी सकते हो ?
          लोग बोले- तीन कुत्ते लड़ते लड़ते उसमें गिर गये थे। बाहर नहीं निकले, मर गये उसी में। अब जिसमें कुत्ते मर गए हों, उसका पानी कैसे पिये महात्मा जी ?
 सन्त ने कहा - 'एक काम करो, उसमें गंगाजल डलवाओ।
          कुएं में गंगाजल भी आठ दस बाल्टी छोड़ दिया गया। फिर भी समस्या जस की तस रही। लोग फिर से सन्त के पास पहुँचे। अब सन्त ने कहा, "भगवान की कथा कराओ।”
          लोगों ने कहा, “ठीक है।” कथा हुई, फिर भी समस्या जस की तस। लोग फिर सन्त के पास पहुँचे। अब सन्त ने कहा, उसमें सुगंधित द्रव्य डलवाओ। सुगंधित द्रव्य डाला गया, नतीजा फिर वही। ढाक के तीन पात। लोग फिर सन्त के पास, अब सन्त खुद चलकर आये।
          लोगों ने कहा- महाराज ! वही हालत है, हमने सब करके देख लिया। गंगाजल भी डलवाया, कथा भी करवायी, प्रसाद भी बाँटा और उसमें सुगन्धित पुष्प और बहुत चीजें डालीं। 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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          अब सन्त आश्चर्यचकित हुए और पूछा- कि तुमने और सब तो किया, वे तीन कुत्ते जो मरे पड़े थे, उन्हें निकाला कि नहीं ?
          लोग बोले - उसके लिए न आपने कहा था न हमने निकाला, बाकी सब किया। वे तो वहीं के वहीं पड़े हैं।
          सन्त बोले - "जब तक उन्हें नहीं निकालोगे, इन उपायों का कोई प्रभाव नहीं होगा।"
ऐसी ही कथा हमारे जीवन की भी है। इस शरीर नामक गाँव के अंतःकरण के कुएँ में ये *काम, क्रोध और लोभ* के तीन कुत्ते लड़ते झगड़ते गिर गये हैं।
हम उपाय पूछते हैं तो लोग बताते हैं, तीर्थयात्रा कर लो, गंगा स्नान कर लो, थोड़ा पूजा करो, थोड़ा पाठ। 

सब करते हैं, पर बदबू उन्हीं दुर्गुणों की आती रहती है। तो पहले इन्हें निकाल कर बाहर करें तभी जीवन उपयोगी होगा।

*🔔🎪🌞🕉️✅विशेष:-भव्य आत्माओं,इस कहानी में बताया है कि कुआं के पानी को शुद्धिकरण के लिए ना गंगाजल,ना कथा , ओर ना ही प्रसाद की आवश्यकता थी। ✍️💯उस कुआं के जल की शुद्धिकरण के लिए उसमें गिरे हुए कुत्तों को बाहर निकालने के बाद  मोटरपंप के द्वारा कम से कम उपरी सतह का तीन फीट पानी खाली करना था उसके पश्चात उस कुआं में मात्र चालीस रुपए किलो की एक किलो लाल फिटकरी पानी में घोलकर वह घुला हुआ पानी डालना था।इस क्रिया के बारह घंटे बाद वह पानी पीने योग्य हो जाता।🐒 वर्तमान में हम मोबाइल व अन्य माध्यमों के द्वारा इसी प्रकार अनेकों उपाय कर रहे है किंतु समस्या हल होने की जगह समस्याएं बढ़ती जा रही है। इसलिए हमें योग्य शिक्षक से शिक्षा ग्रहण करना चाहिए।वह शिक्षक हमारे घर के दादाजी व दादी भी हो सकते है। हमारे घर के दरवाजे पर आया हुआ भिखारी भी हमें शिक्षा प्रदान करता है कि जब मेरे पास सबकुछ था तब मैंने किसी अन्य की किसी प्रकार भी मदद नहीं की ओर उसी कर्म के कारण मैं आज मनुष्य बनकर भी भिखारी बना हुआ हूं।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 4 जुलाई 2023

मेरे कर्म पिछा नहीं छोड़ते

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*मेरे कर्म पिछा नहीं छोड़ते*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरे कर्म पिछा नहीं छोड़ते ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 श्रावण कृष्ण दूज , दिनांक 5 जुलाई  बुधवार कलिकाल के 20 वें तीर्थंकर अरिष्ट निवारक सभी प्रकार के शनि दशा को शांत करने वाले मुनिसुव्रतनाथ  भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है। 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक   05, 12  तारीख को है। यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

✍️👦एक सेठ जी ने अपने मैनेजर को जरा सी बात पर इतना डांटा --- कि मैनेजर को बहुत गुस्सा आया, पर सेठ जी को कुछ बोल ना सका। वह अपना गुस्सा किस पर निकाले- वो गया सीधा अपने कंपनी स्टाफ के पास और सारा गुस्सा कर्मचारियों पर निकाल दिया।

अब कर्मचारी किस पर अपना गुस्सा निकाले,

तो जाते-जाते अपने गेट के वॉचमैन पर उतारते गए।

अब वॉचमैन किस पर निकाले अपना गुस्सा-? - तो वह घर गया और अपनी बीवी को डांटने लगा बिना किसी बात पर।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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बीवी भी उठी और अपने बच्चे की पीठ पर  धमाक धमाक लगा दिया - सारा दिन टीवी देखता रहता है काम कुछ करता नहीं है। अब बच्चा घर से गुस्से से निकला और सड़क पर सो रहे कुत्ते को पत्थर दे मारा।

कुत्ता हड़बड़ा कर भागा और सोचने लगा कि इसका मैंने क्या बिगाड़ा-?

और गुस्से में उस कुत्ते ने एक आदमी को काट खाया। - और कुत्ते ने जिसे काटा वह आदमी कौन था !

वही सेठ जी थे, जिन्होंने अपने मैनेजर को डांटा था।

सेठ जी जब तक जिए तब तक यही सोचते रहे कि उस कुत्ते ने आखिर मुझे क्यों काटा-? जब की वो रोज मेरे पास दुम हिला कर आता था।

लेकिन बीज किसने बोया ?

आया कुछ समझ में कर्म के फल पीछा नहीं छोड़ते-जाने अनजाने में कितने लोग हमारे व्यवहार से त्रस्त होते हैं, परेशान होते हैं और कितनों का तो बहुत नुकसान भी हो जाता है।

पर हमें तो उसका अंदाजा भी नहीं होता, क्योंकि हम तो अपनी मस्ती में ही मस्त है।

पर हमारे कर्मों की गठरी में शुभ व अशुभ सब कुछ जमा होते जाता है और उसका फल फिर किसी ओर के निमित्त से हमें मिलता है, और हमें लगता है कि लोग हमें बेवजह ही परेशान कर रहे
है।

*👪✅🌞✍️🔔विशेष :- भव्य आत्माओं, वर्तमान समय में हम दैनिक क्रियाओं में ऐसी अनेकों गलतियां प्रतिदिन करते हैं जो जानते हुए भी हम नजर अंदाज कर देते है।उस समय बांधा हुआ कर्म ही हमें वर्तमान समय में प्रतिकूलता प्रदान करता है। अगर हम प्रतिकूलताओं से बचना चाहते है तो हमारे द्वारा किए गए कर्म के द्वारा किसी को भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 3 जुलाई 2023

गुरु की कृपा से

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*गुरु की कृपा से*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 गुरु की कृपा से ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक   05, 12  तारीख को है। यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

मूल शंकर बेहद ही गरीब परिवार में पले – बढ़े उनका पालन – पोषण अभावग्रस्त रहा । गुरुकुल में किसी प्रकार दाखिला मिला मूल शंकर पढ़ने में बड़े ही मेधावी छात्र थे। वह अन्य छात्रों से अलग विचार रखते थे और पढ़ने तथा समाज के बारे में वह विशेष अध्ययन किया करते थे।

शिक्षा गुरुकुल स्तर से जब पूर्ण हुई सभी शिष्य अपने गुरु को गुरु दक्षिणा के रूप में अपने सामर्थ्य के अनुसार कुछ ना कुछ अपने गुरु को अर्पण कर रहे थे। कोई गाय दान कर रहा था , कोई अनाज दान कर रहा था , कोई मुद्राएं दान कर रहा था। किंतु मूल शंकर के सामर्थ्य में इस प्रकार के दान करने की नहीं थी।  मूलशंकर अपने माता के पास पहुंचे और गुरु दक्षिणा का विषय अपनी माता को समझाया। माता को भी समझ में नहीं आ रहा था कि वह मूल शंकर को गुरु दक्षिणा के लिए क्या भेंट दे ? काफी देर सोच विचार के उपरांत माता ने एक लौंग और सुपारी पीले कपड़े में बांधकर गुरु दक्षिणा के लिए मूल शंकर को दिया।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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मूल शंकर यह भेंट लेकर अपने गुरु के समक्ष प्रस्तुत हुए और गुरु दक्षिणा के रूप में वह पोटली भेंट की। ऐसा देखकर अन्य सहपाठी छात्र मूल शंकर का उपहास करने लगे। मूल शंकर भी लज्जा और गिलानी के भाव के बोझ से दबा हुआ था। पोटली गुरु को अर्पण करते ही वह गुरु के चरणों में जोर – जोर से रोने लगा और गुरु से क्षमा याचना करने लगा यही मेरे सामर्थ्य मे था जो मैंने आपको अर्पण किया।

गुरु ने मूल शंकर के समर्पण भाव को देखकर भरपूर आशीर्वाद दिया और उसे हिम्मत दी और कहा -‘  कौन कहता है तुम्हारे पास देने को कुछ नहीं है । तुम मेरे अनुशासन प्रिय शिष्य हो।जिसकी जितनी शक्ति हो उस व्यक्ति को अपनी शक्ति के अनुसार गुरु दक्षिणा देना चाहिए।तुम मुझे अन्य शिष्यों से इसलिए प्रिय हो क्योंकि तुमने अपनी शिक्षा काल में नियमित अध्ययन किया है। इस कारण तुम पढ़ने में सबसे होनहार हो , क्या यह मेरे लिए कम है। मुझे देना ही चाहते हो तो एक वचन दो कि तुम मेरे ज्ञान को समाज के लिए प्रयोग में लाओगे , समाज का कल्याण हो ऐसा प्रयास करोगे , मेरी शिक्षा तभी सफल होगी जब समाज मैं इस शिक्षा का प्रयोग हो सके।’

मूल शंकर उठे और अपने गुरु से आजीवन ब्रह्मचर्य का नियम ग्रहण किया और समाज की सेवा करने का वचन दिया। इतना ही नहीं उन्होंने समाज के उत्थान के लिए अनेक प्रकार के कार्यक्रम चलाए। उन्होंने सभी वर्गों के लिए उच्चतम शिक्षा के गुरुकुल में व्यवस्था की।वेदों की शिक्षा देकर  समाज को एक नई दिशा प्रदान की।

 यही व्यक्ति आगे चलकर दयानंद सरस्वती के नाम से प्रसिद्ध हुए। इनकी ख्याति देश ही नहीं अपितु विदेश में भी है। इनकी प्रमुख काव्य कृति सत्यार्थ प्रकाश है।

*🕉️⏰👪↔️✍️विशेष  :- भव्य आत्माओं, वर्तमान में जिन व्यक्तियों को गुरु की शरण प्राप्त हो गई उनका जीवन सफल हो गया।जिन व्यक्तियों को गुरु की शरण प्राप्त हो गई किंतु वे गुरु के मार्गदर्शन के अनुसार आचरण  नहीं कर रहें है उनका संसार का सफर अभी अत्यधिक लंबा व उलझनों वाला है। अतः सभी भव्यात्माओं से नम्र निवेदन है कि स्वयं के आचरण को सुधारते हुए अन्य जीवों के सहयोगी बनकर जीवन सार्थक करें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

शनिवार, 1 जुलाई 2023

परमात्मा तक जाने का मार्ग

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*_परमात्मा तक जाने का मार्ग_*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 _परमात्मा तक जाने का मार्ग_ ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*💡कल आषाढ़ शुक्ल दो जुलाई को शाश्वत पर्व चतुर्दशी तिथि है* 
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव जुलाई माह में आने वाली दिनांक   05, 12  तारीख को है। यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

मैंने सुना है, एक सम्राट अपने वजीर से नाराज हो गया। और उसने वजीर को एक बहुत ऊंचे मीनार पर कैद करवा दिया। उस मीनार से कूदने के सिवाय और कोई बचने का उपाय न था। लेकिन कूदना याने मरना था। मीनार बड़ी ऊंची थी। उससे कूदे तो मरे। कोई हथकड़ियां नहीं डाली थीं।

वजीर को हथकड़ियां डालने की जरूरत न थी। वह मीनार के ऊपर कैद था। सीढ़ियों पर सख्त पहरा था। सीढ़ियों से आ नहीं सकता था। हर सीढ़ी पर सैनिक था। द्वारों पर कई द्वार थे, द्वारों पर ताले पड़े थे। मगर उसे खुला छोड़ दिया था मीनार पर। जब सब रो रहे थे, प्रियजन उसे विदा दे रहे थे, उसकी पत्नी ने कहा, हम इतने रो रहे हैं और तुम इतने शांत हो।

बात क्या है? उसने कहा, फिक्र न कर। अगर तू एक रेशम का पतला धागा भी मुझ तक पहुंचा देगी तो बस, मैं निकल आऊंगा। 
वह तो चला गया, कैद हो गया। लेकिन पत्नी तो मुश्किल में पड़ गई कि रेशम का धागा! पहले तो पहुंचाना कैसे? सैकड़ों फीट ऊंची मीनार थी, उस पर रेशम का धागा पहुंचाना कैसे? और फिर यह भी सोच—सोच परेशान थी कि रेशम का धागा पहुंच भी जाये समझो किसी तरह, तो रेशम के धागे से कोई कभी भागा है क्या? 
बहुत सोच—विचार में पड़ गई, कुछ उपाय न सूझा तो वह गांव में के बुद्धिमानों की खोज करने लगी। एक संत ने कहा कि इसमें कुछ खास मामला नहीं है।

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भृंग नाम का एक कीड़ा होता है, उसको तू पकड़ ला। उसकी मूंछ पर शहद लगा दे। और भृंग की पूंछ में पतला धागा बांध दे रेशम का। उसने कहा, फिर क्या होगा? उसने कहा, भृंग को मीनार पर छोड़ दे। अपनी मूंछ पर शहद की गंध पाकर वह आगे बढ़ता जायेगा। वह मिलनेवाली तो है नहीं गंध, वह मिलती रहेगी। शहद मिलेगा तो नहीं, उसकी मूंछ पर है।

तो वह हटता जायेगा.. हटता जायेगा। और भृंग सीधा जाता है। वह रुकता नहीं जब तक वह खोज न ले, जहां से सुगंध आ रही है। जब तक वह खोज न ले, रुकता नहीं। तू फिक्र मत कर। वह ऊपर पहुंच जायेगा। और तेरे पति को पता है। जब एक दफा रेशम का पतला धागा पहुंच जाये 
तो फिर पतले धागे में थोड़ा मोटा धागा बांधना, 
फिर उसमें और थोड़ा मोटा बांधना। फिर पति तेरा खींचने लगेगा। 
फिर रस्सी बांध देना, 
फिर मोटे रस्से बांध देना, 
फिर रास्ता खुल गया।

पत्नी को बात समझ में आ गई। यह गणित बहुत सीधा है। भृंग कीड़े को पकड़ लिया, उसकी मूंछ पर मधु लगा दिया, पूंछ में पतले से पतला धागा बांध दिया। क्योंकि इतने दूर तक भृंग को जाना है, इतना लंबा धागा खींचना है तो पतले से पतला धागा था। और भृंग चल पड़ा एकदम। उसको तो गंध मिलने लगी मधु की तो वह तो पागल होकर भागने लगा।

वह रुका ही नहीं। वह ऊपर पहुंच गया। और जब पति ने देखा कि भृंग कीड़ा चढ़कर आ गया है ऊपर और उसकी मूंछों पर लगे हैं मधु के बिंदु, खुश हो गया। धागे को पकड़ लिया, बस। थोड़ी ही देर में धागे से पतली रस्सी फिर थोडी मोटी रस्सी, थोडी मोटी से और मोटी रस्सी, और मोटी रस्सी, रस्सा. और फिर वह रस्से के सहारे से नीचे आ गया। 

यही सूत्र है परमात्मा तक जाने का। तुम्हारे भीतर जो अभी छोटा—सा रेशम का धागा जैसा है, बड़ा महीन है, पकड़ में भी नहीं आता, वह जो तुम्हारे भीतर होश है, बस उस होश को पकड़ लो। वह जो तुम्हारे भीतर चैतन्य है उसको पकड़ लो। ध्यान कुछ और नहीं, इस होश के धागे को पकड़ लेने का नाम है। फिर इसको पकड़कर तुम चल पड़ो। जिस दशा से यह आ रहा है उसी दिशा में मुक्ति है। उसी दिशा में परमात्मा है।

*👪🐎🔔↔️⏰विशेष:-भव्य आत्माओं, आज हम सभी की कमजोरी यह है कि हमारे-आपके विचारों में नकारात्मक शक्तियों को हम सभी ने स्थान दिया है। जिसके कारण हम कोई भी कार्य करते है तो हमें उतनी सफलता प्राप्त नहीं होती।अब हमें अपने विचारों को दृढ़ संकल्प के साथ यह प्रातः उठते ही कहना है कि मैं आज जो भी कार्य करूंगा उसमें मुझे पूर्ण सफलता प्राप्त होगी।बस फिर आप देखिए कि आपको जो आवश्यक था वह प्राप्त होगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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