सोमवार, 28 अक्टूबर 2024

धन्य तेरस

*धन्य तेरस*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 धन्य तेरस ✍️🐒*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦⛳🎪जैन तीर्थंकर भगवान के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🙏*

*🔔🪔 कार्तिक कृष्ण तेरस बुधवार 30 अक्टूबर 2024  कलिकाल के  छठवें तीर्थंकर  पद्मप्रभ भगवान सूर्य की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के मिथ्यात्व व मोहांधकार को समाप्त कर सर्व सुखकारी मार्ग  प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री    पद्मप्रभ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 कार्तिक  अमावस्या,  शुक्रवार , 1 नवंबर 2024 कलिकाल के अंतिम तीर्थंकर वर्तमान के शासन नायक उपसर्ग विजेता वर्धमान स्वामी  बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त कर सर्व सुखकारी ज्ञान  प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री    वर्धमान स्वामी जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*▶️आज ही के दिन सूर्योस्त से पहले  वर्धमान स्वामी के प्रमुख गणधर इंद्रभूति गौतम को केवल ज्ञान की प्राप्ति होने पर अपने घर व मंदिर जी में दिपावली महोत्सव मनाया जाता है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦 चतुर्दशी तिथि 31 अक्टूबर गुरुवार को है।✅*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

कार्तिक कृष्ण तेरस के दिन भगवान महावीर ने बिहार के पावापुरी के पदम् सरोवर में योग निरोध धारण किया था जिस कारण यह कार्तिक कृष्ण माह की ' तेरस' धन्य हो गई थी !हमारे इस हुन्डावसर्पिणी काल के 24 वे, अंतिम तीर्थंकर चौदहवाँ गुणस्थान के अंतिम दो समयों में अपनी शेष 85 कर्म प्रकृतियों का क्षय कर 18000 शीलों का पालन कर मोक्ष प्राप्ति के लिए ध्यानस्थ हुए थे! इसीलिए हम श्रमण संस्कृति के अनुयायी, वर्तमान में जैन धर्मावलम्बी धन्य तेरस मनाते है !

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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जैन मान्यता मे इस पर्व का धन से कोई सम्बंध नहीं है, धन्य तेरस पर अन्य धर्मों में कोई स्वर्ण की वस्तु या कीमती वस्तुओं को खरीदने से जोर दिया है ।जो की जैन मान्यताओं के सर्वथा विपरीत है !लक्ष्मी पूजन भी भौतिक सुखों के लिए नहीं है, हम यदि पूजते है तो मोक्ष रुपी लक्ष्मी के रूप में पूजते है। मोक्ष को सर्वोत्तम और सर्वोत्कृष्ट सुख माना गया है।सामान्य से इस तिथि को धन्यतेरस कहते है। दीपावली के पूर्व कार्तिक त्रयोदशी के दिन भगवान महावीर ने बाह्य समवसरण लक्ष्मी का त्याग कर मन-वचन और काय को स्थिर कर परम ध्यान में लीन होकर निरोध धारण किया। वीर प्रभु के योगों के निरोध की भव्य घटना से तेरस धन्य हो उठी इसीलिए यह तिथि धन्य-तेरस के नाम से विख्यात हुई। अगले दिन चतुर्दशी को भगवान महावीर ने मोक्ष पाया और तभी सूर्यास्त के पहले गणधर गौतम स्वामी जी को केवल ज्ञान प्राप्त हुआ।

धन्य तेरस को ध्यान तेरस भी कहा जाता है। हमे 'धन्य तेरस' को भगवान महावीर स्वामी के द्वारा योग निरोध को धारण कर संसार सागर से तिरने की यात्रा का मनन करते हुए मनाना चाहिए जिससे निकट भविष्य में स्वात्म कल्याण की प्रेरणा प्राप्त कर,इस दिशा में पुरुषार्थ कर समुचित निमित्त एवं काललब्धि प्राप्त होने पर, हमे भी निकट भविष्य के किसी भव में मोक्ष लक्ष्मी प्राप्त हो सके तभी हमारा जन्म सफल होगा क्योंकि मनुष्य पर्याय में ही संयम,तप और ध्यान आदि किया जा सकता है।

*🎪👨‍👨‍👦‍👦↔️⛳🔑भव्य आत्माओं:-आप सभी धन्य तेरस के दिन जिस प्रकार भगवान महावीर स्वामी ने  सभी जीवों से सभी भी प्रकार का राग-द्वेष को समाप्त किया। उन्होंने अपने शरीर से भी किसी प्रकार का संबंध ना रखते हुए मात्र अपनी आत्मा की शक्ति को चिंतन किया।उसी प्रकार उनके गुणों की प्राप्ति के लिए हम सभी को अपनी योग्यता अनुसार(अष्ट मूलगुण,सप्त व्यसन, षट् आवश्यक, प्रतिमा ग्रहण आदि कर्तव्यों का पालन करते हुए) भगवान महावीर स्वामीजी के गुणों का ध्यान,जप, पूजन आदि करके अपना जीवन सार्थक करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 19 अक्टूबर 2024

कर्मों का संदेश

*कर्मों का संदेश*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 कर्मों का संदेश ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔🪔  कार्तिक कृष्ण 4,  रविवार , 20 अक्टूबर 2024 कलिकाल के तृतीय तीर्थंकर  संभवनाथ भगवान गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के असंभव को समाप्त कर सर्व सुखकारी मोक्ष में सहायक संभव सुख प्राप्ति के लिए उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री    संभवनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 अक्टूबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  11, 18, 20, 30 को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 अक्टूबर माह में  अष्टमी तिथि  11 व 24 अक्टूबर को है। चतुर्दशी तिथि 16 व 31 अक्टूबर को है।*
*🙆इस अक्टूबर माह  विवाह मुहूर्त नहीं  है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*कर्मों का संदेश*
 
रात दस बजे लगभग अचानक मुझे एलर्जी हो गई।घर पर दवाई नहीं, न ही इस समय मेरे अलावा घर में कोई और, श्रीमती जी बच्चों के पास गोवा और हम रह गए अकेले। ड्राईवर भी अपने घर जा चुका था बाहर हल्की बारिश की बूंदे सावन महीने के कारण बरस रही थी।

दवा की दुकान ज्यादा दूर नहीं थी पैदल भी जा सकता था लेकिन बारिश की वज़ह से मैंने रिक्शा लेना उचित समझा।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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मेरे घर से पचास कदम पर ही  राम मन्दिर बना  था। 
एक रिक्शा वाला भगवान की प्रार्थना कर रहा था।  मैंने उससे पूछा चलोगे, तो उसने सहमति में सर हिलाया और बैठ गए हम रिक्शा में!  रिक्शा वाला काफी़ बीमार लग रहा था और उसकी आँखों में आँसू भी थे।

मैंने पूछा,*रो क्यूँ रहे हो और तुम्हारी तबियत भी ठीक नहीं लग रही।*"
उसने बताया:- *बारिश की वजह से तीन दिन से सवारी नहीं मिली और वह भूखा है बदन दर्द भी कर रहा है,अभी भगवान से प्रार्थना कर रहा था क़ि आज मुझे भोजन दे दो, मेरे रिक्शे के लिए सवारी भेज दो।*

मैं बिना कुछ बोले रिक्शा रुकवाकर दवा की दुकान पर चला गया।वहां खड़े खड़े सोच रहा था 
*कहीं भगवान ने तो मुझे इसकी मदद के लिए नहीं भेजा क्योंकि यदि एलर्जी आधे घण्टे पहले उठती तो मैं ड्राइवर से दवा मंगाता,रात को निकलने की ज़रूरत भी नहीं थी,और पानी न बरसता तो रिक्शे में भी न बैठता*।

मन ही मन भगवान को याद किया और पूछ ही लिया भगवान से,!
*मुझे बताइये क्या आपने रिक्शे वाले की मदद के लिए भेजा है मन में जवाब मिला... "हाँ"*।

* मैंने अपनी दवाई के साथ रिक्शेवाले के लिए भी दवा ली।बगल के रेस्तरां से छोले भटूरे पैक करवाए और रिक्शे पर आकर बैठ गया।*
जिस मन्दिर के पास से रिक्शा लिया था मैंने अपने घर पर रिक्शा रोकने को कहा।उसके हाथ में रिक्शे के 30 रुपये दिए,गर्म छोले भटूरे का पैकेट और दवा देकर बोला:-
"खाना खा कर यह दवा खा लेना, एक एक गोली ये दोनों अभी और एक एक कल सुबह नाश्ते के बाद,उसके बाद मुझे आकर फिर दिखा जाना।

रोते हुए वह बोला:-
*"मैंने तो भगवान से दो रोटी मांगी थी मग़र भगवान ने तो मुझे छोले भटूरे दे दिए*।कई महीनों से इसे खाने की इच्छा थी। आज भगवान ने मेरी प्रार्थना सुन ली।और जो मन्दिर के पास उसका बन्दा रहता था उसको मेरी मदद के लिए भेज दिया।"

कई बातें वह बोलता रहा और मैं स्तब्ध हो सुनता रहा। *घर आकर सोचा क़ि उस रेस्तरां में बहुत सारी चीज़े थीं, मैं कुछ और भी ले सकता था,समोसा या खाने की थाली ..पर मैंने छोले भटूरे ही क्यों लिए।*
क्या सच् में भगवान ने मुझे रात को अपने भक्त की मदद के लिए ही भेजा था..?

*हम जब किसी की मदद करने सही वक्त पर पहुँचते हैं तो इसका मतलब उस व्यक्ति की प्रार्थना भगवान ने सुन ली और हमें अपना प्रतिनिधि बना, देवदूत बना उसकी मदद के लिए भेज दिया।*      
     
*इसलिए कहते हैं, अचानक आए परोपकार,  दान और मदद के मौके को ना गवाएं ....क्या पता....  ईश्वर ने आपको मौका दिया है उनके प्रतिनिधि के रूप में।*

*🔔👨‍👨‍👦‍👦⏰🙏▶️विशेष:- भव्य आत्माओं, हमें अपने जीवन में आसपास रहने वाले लोगों की आवश्यकता अनुसार मदत अवश्य ही करना चाहिए।हम उस व्यक्ति विशेष की मदत से अपने भविष्य के लिए एक सुंदर बीजारोपण करते है। हमनें जिस प्रकार की व्यक्ति विशेष की सहायता की थी हमारे पूर्व कर्मों से हमें वैसी ही परेशानी से छुटकारा मिल जाता है। क्योंकि हमनें उस कर्म को समाप्त करने का बीज उस कर्म के उदय आने के पहले ही बो दिया था। अतः हम दूसरों की सहायता से अपने भविष्य को सुरक्षित रखते है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 17 अक्टूबर 2024

शिक्षा और.......

*शिक्षा और सशक्तिकरण*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 शिक्षा और सशक्तिकरण ✍️🐒*

*🔔🪔  कार्तिक कृष्ण एकम,  शुक्रवार , 18 अक्टूबर 2024 कलिकाल के 14 वें तीर्थंकर  अनंतनाथ भगवान बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त कर सर्व सुखकारी अनंत सुख प्राप्ति के उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री अनंतनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*

*💐शिक्षा और सशक्तिकरण💐*

एक दिन, एक कंपनी में साक्षात्कार के दौरान, बॉस, जिसका नाम अनिल था, ने सामने बैठी महिला, सीमा से पूछा, "आप इस नौकरी के लिए कितनी तनख्वाह की उम्मीद करती हैं?"

सीमा ने बिना किसी झिझक के आत्मविश्वास से कहा, "कम से कम 30,000 रुपये। इतने पैसे में मैं अपने परिवार का पालन पोषण व धार्मिक क्षेत्र  में विकास करने में समर्थ हूं।"

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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अनिल ने उसकी ओर देखा और आगे पूछा, "आपको किसी खेल में दिलचस्पी है?"

सीमा ने जवाब दिया, "जी, मुझे शतरंज खेलना पसंद है।"

अनिल ने मुस्कुराते हुए कहा, "शतरंज बहुत ही दिलचस्प खेल है। चलिए, इस बारे में बात करते हैं। आपको शतरंज का कौन सा मोहरा सबसे ज्यादा पसंद है? या आप किस मोहरे से सबसे अधिक प्रभावित हैं?"

सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, "वज़ीर।"

अनिल ने उत्सुकता से पूछा, "क्यों? जबकि मुझे लगता है कि घोड़े की चाल सबसे अनोखी होती है।"

सीमा ने गंभीरता से जवाब दिया, "वास्तव में घोड़े की चाल दिलचस्प होती है, लेकिन वज़ीर में वो सभी गुण होते हैं जो बाकी मोहरों में अलग-अलग रूप से पाए जाते हैं। वह कभी मोहरे की तरह एक कदम बढ़ाकर राजा को बचाता है, तो कभी तिरछा चलकर हैरान करता है, और कभी ढाल बनकर राजा की रक्षा करता है।"

अनिल ने उसकी समझ से प्रभावित होते हुए पूछा, "बहुत दिलचस्प! लेकिन राजा के बारे में आपकी क्या राय है?"

सीमा ने तुरंत जवाब दिया, "सर, मैं राजा को शतरंज के खेल में सबसे कमजोर मानती हूँ। वह खुद को बचाने के लिए केवल एक ही कदम उठा सकता है, जबकि वज़ीर उसकी हर दिशा से रक्षा कर सकता है।"

अनिल सीमा के जवाब से प्रभावित हुआ और बोला, "बहुत शानदार! बेहतरीन जवाब। अब ये बताइए कि आप खुद को इनमें से किस मोहरे की तरह मानती हैं?"

सीमा ने बिना किसी देर के जवाब दिया, "राजा।"

अनिल थोड़ी हैरानी में पड़ गया और बोला, "लेकिन आपने तो राजा को कमजोर और सीमित बताया है, जो हमेशा वज़ीर की मदद का इंतजार करता है। फिर आप क्यों खुद को राजा मानती हैं?"

सीमा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "जी हाँ, मैं राजा हूँ और मेरा वज़ीर मेरा पति था। वह हमेशा मेरी रक्षा मुझसे बढ़कर करता था, हर मुश्किल में मेरा साथ देता था, लेकिन अब वह इस दुनिया में नहीं है।"

अनिल को यह सुनकर थोड़ा धक्का लगा, और उसने गंभीरता से पूछा, "तो आप यह नौकरी क्यों करना चाहती हैं?"

सीमा की आवाज भर्राई, उसकी आँखें नम हो गईं। उसने गहरी सांस लेते हुए कहा, "क्योंकि मेरा वज़ीर अब इस दुनिया में नहीं रहा। अब मुझे खुद वज़ीर बनकर अपने बच्चों और अपने जीवन की जिम्मेदारी उठानी है ताकि हम सभी जैन-धर्म के अनुसार जीवन सार्थक करें।"

यह सुनकर कमरे में एक गहरी खामोशी छा गई। अनिल ने तालियाँ बजाते हुए कहा, "बहुत बढ़िया, सीमा। आप एक सशक्त महिला हैं।"

शिक्षा और सशक्तिकरण का महत्व:

यह कहानी उन सभी बेटियों के लिए एक प्रेरणा है जो जिंदगी में किसी भी तरह की मुश्किलों का सामना कर सकती हैं। *बेटियों को अच्छी शिक्षा और परवरिश देना बेहद जरूरी है, ताकि अगर कभी उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़े, तो वे खुद वज़ीर बनकर अपने और अपने परिवार के लिए एक मजबूत ढाल बन सकें।*

किसी विद्वान ने कहा है, *"एक बेहतरीन पत्नी वह होती है जो अपने पति की मौजूदगी में एक आदर्श औरत हो, और पति की गैरमौजूदगी में वह मर्द की तरह परिवार का बोझ उठा सके।"*

*⏰🎪👨‍👨‍👦‍👦✍️विशेष:-भव्य आत्माओं,यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अगर आत्मविश्वास और समझदारी हो, तो कोई भी मुश्किल हालात को पार किया जा सकता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 10 अक्टूबर 2024

बुध्दिमान कौन

*बुध्दिमान कौन*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  बुध्दिमान कौन✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 आश्विन शुक्ल अष्टमी,  शुक्रवार , 11 अक्टूबर 2024 कलिकाल के 10 वें तीर्थंकर  शीतलनाथ भगवान गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त कर सर्व सुखकारी शीतलता  प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री    शीतलनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*

*🔔 अक्टूबर माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव  11, 18, 20, 30 को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 अक्टूबर माह में  अष्टमी तिथि  11 व 24 अक्टूबर को है। चतुर्दशी तिथि 16 व 31 अक्टूबर को है।*
*🙆इस अक्टूबर माह  विवाह मुहूर्त नहीं  है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*🌳 बुद्धिमान  की परीक्षा 🌳*

      बहुत पुरानी बात है, उन दिनों आज की तरह स्कूल नही होते थें. गुरुकुल शिक्षा प्रणाली थी और छात्र गुरुकुल में ही रहकर पढ़ते थे. उन्हीं दिनों की बात है. एक विद्वान पंडित थे, उनका नाम था- राधे गुप्त. उनका गुरुकुल बड़ा ही प्रसिद्ध था, जहाँ दूर दूर से बालक शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते थे।

           राधे गुप्त की पत्नी का देहांत हो चूका था, उनकी उम्रः भी ढलने लगी थी, घर में विवाह योग्य एक कन्या थी, जिनकीं चिंता उन्हें हर समय सताती थी. पंडित राधे गुप्त उसका विवाह ऐसे योग्य व्यक्ति से करना चाहते थे, जिसके पास सम्पति भले न हो पर बुद्धिमान हो।
  
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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            एक दिन उनकें मन में विचार आया, उनहोंने सोचा कि क्यों न वे अपने शिष्यों में ही योग्य वर की तलाश करें. ऐसा विचार कर उन्होंने बुद्धिमान शिष्य की परीक्षा लेने का निर्णय लिया, उन्होंने सभी शिष्यों को एकत्र किया और उनसें कहा-”मैं एक परीक्षा आयोजित करना चाहता हूँ, इसका उद्देश्य यह जानना है कि कौन सबसें बुद्धिमान है।

         मेरी पुत्री विवाह योग्य हो गईं है और मुझें उसके विवाह की चिंता है, लेकिन मेरे पास पर्याप्त धन नही है. इसलिए मैं चाहता हूँ कि सभी शिष्य विवाह में लगने वाली सामग्री एकत्र करे. भले ही इसके लिए चोरी का रास्ता क्यों न चुनना पड़े. लेकिन सभी को एक शर्त का पालन करना होगा, शर्त यह है कि किसी भी शिष्य को चोरी करते हुए कोई देख न सके।

        अगले दिन से सभी शिष्य अपने अपने काम में जुट गये. हर दिन कोई न कोई  शिष्य अलग अलग तरह की वस्तुएं चुरा कर ला रहा था और गुरूजी को दे रहा था. राधे गुप्त उन वस्तुओं को सुरक्षित स्थान पर रखते जा रहे थे. क्योंकि परीक्षा के बाद उन्हें सभी वस्तुएं उनकें मालिक को वापिस करनी थी।

           परीक्षा से वे यही जानना चाहते थे कि कौन सा शिष्य उनकी बेटी से विवाह करने योग्य है. सभी शिष्य अपने अपने दिमाग से कार्य कर रहे थे. लेकिन उनमें से एक छात्र रामास्वामी, जो गुरुकुल का सबसे होनहार छात्र था, चुपचाप एक वृक्ष के नीचे बैठा कुछ सोच रहा था।

           उसे सोच में बैठा देख राधे गुप्त ने कारण पूछा. रामास्वामी ने बताया, “आपने परीक्षा की शर्त के रूप में कहा था कि चोरी करते समय कोई देख न सके. लेकिन जब हम चोरी करते है, तब हमारी अंतरात्मा व परमात्मा तो सब देखते है, हम खुद से उसे छिपा नही सकते. इसका अर्थ यही हुआ न कि चोरी करना व्यर्थ है।”

         उसकी बात सुनकर राधे गुप्त का चेहरा प्रसन्नता से खिल उठा. उन्होंने उसी समय सभी शिष्यों को एकत्र किया और उनसें पूछा-”आप सबने चोरी की.. क्या किसी ने देखा? सभी ने इनकार में सिर हिलाया. तब राधे गुप्त बोले ”बच्चों ! क्या आप अपने अंतर्मन व परमात्मा से भी इस चोरी को छुपा सके?”

          इतना सुनते ही सभी बच्चों ने सिर झुका लिया. इस तरह गुरूजी ने अपनी पुत्री के लिए योग्य और बुद्धिमान वर मिल गया. उन्होंने रामास्वामी के साथ अपनी पुत्री का विवाह कर दिया. साथ ही शिष्यों द्वारा चुराई गई वस्तुएं उनके मालिकों को वापिस कर बड़ी विनम्रता से क्षमा मांगी।

*👨‍👨‍👦‍👦🔔⛳↔️ विशेष भव्य आत्माओं, :-इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि कोई भी कार्य अंतर्मन से छिपा नहीं रहता और अंतर्मन ही व्यक्ति को सही रास्ता दिखाता है. इसलिए मनुष्य को कोई भी कार्य करते समय अपने मन को जरुर टटोलना चाहिए, क्योंकि मन सत्य का ही साथ देता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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