सोमवार, 28 अक्टूबर 2024

धन्य तेरस

*धन्य तेरस*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 धन्य तेरस ✍️🐒*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦⛳🎪जैन तीर्थंकर भगवान के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🙏*

*🔔🪔 कार्तिक कृष्ण तेरस बुधवार 30 अक्टूबर 2024  कलिकाल के  छठवें तीर्थंकर  पद्मप्रभ भगवान सूर्य की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के मिथ्यात्व व मोहांधकार को समाप्त कर सर्व सुखकारी मार्ग  प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री    पद्मप्रभ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 कार्तिक  अमावस्या,  शुक्रवार , 1 नवंबर 2024 कलिकाल के अंतिम तीर्थंकर वर्तमान के शासन नायक उपसर्ग विजेता वर्धमान स्वामी  बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त कर सर्व सुखकारी ज्ञान  प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री    वर्धमान स्वामी जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*▶️आज ही के दिन सूर्योस्त से पहले  वर्धमान स्वामी के प्रमुख गणधर इंद्रभूति गौतम को केवल ज्ञान की प्राप्ति होने पर अपने घर व मंदिर जी में दिपावली महोत्सव मनाया जाता है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦 चतुर्दशी तिथि 31 अक्टूबर गुरुवार को है।✅*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

कार्तिक कृष्ण तेरस के दिन भगवान महावीर ने बिहार के पावापुरी के पदम् सरोवर में योग निरोध धारण किया था जिस कारण यह कार्तिक कृष्ण माह की ' तेरस' धन्य हो गई थी !हमारे इस हुन्डावसर्पिणी काल के 24 वे, अंतिम तीर्थंकर चौदहवाँ गुणस्थान के अंतिम दो समयों में अपनी शेष 85 कर्म प्रकृतियों का क्षय कर 18000 शीलों का पालन कर मोक्ष प्राप्ति के लिए ध्यानस्थ हुए थे! इसीलिए हम श्रमण संस्कृति के अनुयायी, वर्तमान में जैन धर्मावलम्बी धन्य तेरस मनाते है !

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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जैन मान्यता मे इस पर्व का धन से कोई सम्बंध नहीं है, धन्य तेरस पर अन्य धर्मों में कोई स्वर्ण की वस्तु या कीमती वस्तुओं को खरीदने से जोर दिया है ।जो की जैन मान्यताओं के सर्वथा विपरीत है !लक्ष्मी पूजन भी भौतिक सुखों के लिए नहीं है, हम यदि पूजते है तो मोक्ष रुपी लक्ष्मी के रूप में पूजते है। मोक्ष को सर्वोत्तम और सर्वोत्कृष्ट सुख माना गया है।सामान्य से इस तिथि को धन्यतेरस कहते है। दीपावली के पूर्व कार्तिक त्रयोदशी के दिन भगवान महावीर ने बाह्य समवसरण लक्ष्मी का त्याग कर मन-वचन और काय को स्थिर कर परम ध्यान में लीन होकर निरोध धारण किया। वीर प्रभु के योगों के निरोध की भव्य घटना से तेरस धन्य हो उठी इसीलिए यह तिथि धन्य-तेरस के नाम से विख्यात हुई। अगले दिन चतुर्दशी को भगवान महावीर ने मोक्ष पाया और तभी सूर्यास्त के पहले गणधर गौतम स्वामी जी को केवल ज्ञान प्राप्त हुआ।

धन्य तेरस को ध्यान तेरस भी कहा जाता है। हमे 'धन्य तेरस' को भगवान महावीर स्वामी के द्वारा योग निरोध को धारण कर संसार सागर से तिरने की यात्रा का मनन करते हुए मनाना चाहिए जिससे निकट भविष्य में स्वात्म कल्याण की प्रेरणा प्राप्त कर,इस दिशा में पुरुषार्थ कर समुचित निमित्त एवं काललब्धि प्राप्त होने पर, हमे भी निकट भविष्य के किसी भव में मोक्ष लक्ष्मी प्राप्त हो सके तभी हमारा जन्म सफल होगा क्योंकि मनुष्य पर्याय में ही संयम,तप और ध्यान आदि किया जा सकता है।

*🎪👨‍👨‍👦‍👦↔️⛳🔑भव्य आत्माओं:-आप सभी धन्य तेरस के दिन जिस प्रकार भगवान महावीर स्वामी ने  सभी जीवों से सभी भी प्रकार का राग-द्वेष को समाप्त किया। उन्होंने अपने शरीर से भी किसी प्रकार का संबंध ना रखते हुए मात्र अपनी आत्मा की शक्ति को चिंतन किया।उसी प्रकार उनके गुणों की प्राप्ति के लिए हम सभी को अपनी योग्यता अनुसार(अष्ट मूलगुण,सप्त व्यसन, षट् आवश्यक, प्रतिमा ग्रहण आदि कर्तव्यों का पालन करते हुए) भगवान महावीर स्वामीजी के गुणों का ध्यान,जप, पूजन आदि करके अपना जीवन सार्थक करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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