रविवार, 30 अप्रैल 2023

शक्तिनुसार सहयोग

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*शक्तिनुसार दान*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 शक्तिनुसार दान (सहयोग)✍️🐒*


*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मई माह में आने वाली दिनांक 11, 14, 16, 18, 19,  23,  तारीख को है। मई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

किसी नगर में एक कुशल अनुभवी वैद्य रहते थे। उनका व्यवहार बेहद कुशल और विनम्र था, इसीलिए वे उस पूरे इलाके में बहुत नाम भी पाते थे। वे अपने चिकित्सा आश्रम में ही रोगियों का इलाज़ करते थे।

एक बार एक सेठ अपने बच्चे को दिखाने उस वैद्य के पास पहुंचा। बच्चे को देखने के बाद वैद्य ने एक पुड़िया दवा दी और पर्ची पर आगे चलनेवाली दवा लिख दी।

सेठ ने वैद्य से पूछा, क्या फीस देनी होगी? वैद्य ने कहा, आप मुझे 100 सोने की अशर्फी दे दिजिये। यह बात पास बैठा दूसरा मरीज सुन रहा था, जो बेहद गरीब था। उसने सोचा कि इतनी फीस मैं  कैसे दे पाऊंगा? यह सोच कर वह चुपचाप उठ कर जाने लगा। वैद्य ने उससे पूछा तो उसने सारी बात बता दी। वैद्य ने कहा, तुम यही बैठो, तुम्हारा इलाज़ मुफ्त में होगा, जब तुम ठीक हो जाओ तब आश्रम आकार दूसरों की सेवा कर देना।
यह बात सुन कर सेठ मन ही मन क्रोधित हो गया और वैद्य को बोला, वैद्य जी, आप तो बहुत घटिया इंसान हैं, मेरा पैसा देख कर आपको लालच आ गया और मुझसे इतनी बड़ी रकम मांग बैठे, जबकि इसका इलाज़ आपने मुफ्त में ही कर दिया, मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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वैद्य मुस्कुराते हुए बोले, नहीं सेठ जी, ऐसी बात नहीं है, दरअसल, मेरे आश्रम को चलाने के लिए मुझे दो चीजों की आवश्यकता होती है – धन और सेवा, जिस व्यक्ति के पास जो चीज़ होती है, मैं वही मांगता हूं।

आपके पास धन है तो मैं आपसे धन लूगा और इस व्यक्ति के पास धन नहीं है, इसीलिए ठीक होकर यह मेरे आश्रम में अपनी सेवा प्रदान करेगा, सेठ जी वैद्य जी की बात सुन कर सन्न रह गए।

उन्होने वैद्य से कहा, मुझे माफ कर दिजिये वैद्य जी, मैं बगैर आपका भावार्थ समझे हुए ही किसी गलत निष्कर्ष पर पहुंच गया था। मैं यह भूल गया था कि आप जैसा व्यक्ति यदि कुछ कर रह है, तो निश्चित ही उसका कोई विशेष कारण होगा।

यह कहते हुए सेठ ने वैद्य जी की हथेली पर 100 स्वर्ण अशर्फी रखी और मुस्कुराते हुए अपने घर की ओर चल पड़े।

*✅🌞🔔⏰⛳विशेष :-भव्य‌‌‌ आत्माओं ,हम सभी को अपने पुण्य को गाढ़ा करने के लिए अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा समाज के सभी वर्गों के सहयोग में दान करना चाहिए।हम जिस प्रकार का जिस कार्य में सहयोग प्रदान करेंगे हमें उसी प्रकार की भविष्य में सुख सुविधा प्राप्त होगी। यही प्रकृति का नियम है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 29 अप्रैल 2023

कर्म फल

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*कर्म फल*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 कर्म फल ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल बारस दिनांक 2 मई  मंगलवार कलिकाल के अंतिम तीर्थंकर  वर्धमान स्वामीजी का केवलज्ञान  कल्याणक महोत्सव है 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव मई माह में आने वाली दिनांक 02,11,14,16,18,19, 23,  तारीख को है। मई माह में दो तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक महिला बहुत ही धार्मिक थी और उसने नाम दान भी लिया हुआ था और बहुत ज्यादा भजन सिमरन और सेवा भी करती थी। किसी को कभी गलत न बोलना, सब से प्रेम से मिलकर रहना उसकी आदत बन चुकी थी। वो सिर्फ एक चीज़ से दुःखी थी कि उसका आदमी उसको रोज़ किसी न किसी बात पर लड़ाई झगड़ा करता। उस आदमी ने उसे कई बार इतना मारा की उसकी हड्डी भी टूट गई थी। लेकिन उस आदमी का रोज़ का काम था- झगड़ा करना। उस महिला ने अपने गुरु महाराज जी से अरज की- हे  पातशाह मेरे से कौन भूल हो गई है। मै सत्संग भी जाती हूं, सेवा भी करती हूं। भजन सिमरन भी आप के हुक्म के अनुसार करती हूं। लेकिन मेरा आदमी मुझे रोज़ मारता है। मैं क्या करुं। 

गुरु महाराज जी ने कहा क्या वो तुझे रोटी देता है। बीबी ने कहा हां जी देता है। गुरु महाराज जी ने कहा फिर ठीक है। कोई बात नहीं। उस बीबी ने सोचा अब शायद गुरु की कोई दया मेहर हो जाए और वो उसको मारना पीटना छोड़ दे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उसकी तो आदत बन गई थी रोज़ अपनी घरवाली की पिटाई करना।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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कुछ साल और निकल गए उसने फिर महाराज जी से कहा की मेरा आदमी मुझे रोज़ पीटता है। मेरा कसूर क्या है। गुरु महाराज जी ने फिर कहा क्या वो तुम्हें रोटी देता है। उस बीबी ने कहा हां जी देता है। तो महाराज जी ने कहा फिर ठीक है। तुम अपने घर जाओ। बीबी बहुत निराश हुई कि महाराज जी ने कहा ठीक है। वो घर आ गई लेकिन उसके पति के स्वभाव वैसे का वैसा रहा। वह रोज़ लड़ाई झगड़ा करते रहा। वो महिला बहुत तंग आ गई।

कुछ एक साल गुज़रे फिर गुरु महाराज जी के पास गई कि वो मुझे अभी भी मारता है। मेरी हाथ की हड्डी भी टूट गई है। मेरा कसूर क्या है। मैं सेवा भी करती हूँ। सिमरन भी करती हूँ। फिर भी मुझे जिंदगी में सुख क्यों नहीं मिल रहा। गुरु महाराज जी ने फिर कहा वो तुझे रोटी देता है। उसने कहा हां जी देता है। महाराज जी ने कहा फिर ठीक है। फिर इस बार वो महिला जोर जोर से रोने लगी और बोली की महाराज जी मुझे मेरा कसूर तो बता दो। मैंने कभी किसी के साथ बुरा नहीं किया फिर मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है। महाराज कुछ देर शांत हुए और फिर बोले बीबी तेरा पति पिछले जन्म में तेरा बेटा था। तू उसकी सौतेली मां थी। तू रोज़ उसको सुबह शाम मारती रहती थी। और उसको कई कई दिन तक भूखा रखती थी। शुक्र मना के इस जन्म में वो तुझे रोटी तो दे रहा है। ये बात सुन कर बीबी एक दम चुप हो गई। गुरु महाराज जी ने कहा बेटा जो कर्म तुमने किए हैं, उस का भुगतान तो तुम्हें अवश्य करना ही पड़ेगा। फिर उस महिला ने कभी महाराज से शिकायत नहीं की, क्योंकि वो सच को जान गई थी। 

हमें भी कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए। सब से प्रेम प्यार के साथ रहना चाहिए। हमारी जिन्दगी में जो कुछ भी हो रहा है, सब हमारे कर्मों का लेखा जोखा है। जिसका हिसाब किताब तो हमें देना ही पड़ेगा।

*🎪🔔✍️🔑👪विशेष : - भव्य‌‌‌ आत्माओं,जिस प्रकार के कर्म हम चौबीस घंटों में मन-वचन व शरीर के द्वारा करते है।उसी कर्मो के अनुसार हमारा भविष्य निर्धारित होता है। अतः हम जिस प्रकार का सुख चाहते है उसी प्रकार का हमें कर्म वर्तमान में करना आवश्यक है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 28 अप्रैल 2023

इच्छाओं का पात्र

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*इच्छाओं का पात्र*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 इच्छाओं का पात्र ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल अष्टमी दिनांक 28 अप्रैल शुक्रवार पंद्रहवें तीर्थंकर  धर्मनाथ भगवानजी का गर्भ  कल्याणक महोत्सव है 🛕*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल नवमी दिनांक 29 अप्रैल शनिवार पांचवें तीर्थंकर  सुमतिनाथ  भगवानजी का तप  कल्याणक महोत्सव है  तप कल्याणक महोत्सव शाश्वत नगरी अयोध्याजी में हुआ था | आज के ही दिन पूर्वभव के स्मरण से वैराग्य हुआ , दोपहर के समय मघा नक्षत्र में 1000 राजाओं के साथ जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की | 🛕*
*🔔⏰🎪 यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक साधु ने एक सम्राट के द्वार पर दस्तक दी सुबह का समय था। और सम्राट बगीचे में घूमने निकला था। संयोग की बात है साधु को सामने ही सम्राट मिल गया।

साधु ने अपना पात्र उस के सामने कर दिया। सम्राट ने कहा क्या चाहते हो? साधु ने कहा कुछ भी दे दो “शर्त यही है,” कि मेरा पात्र पूरा भर जाए। मैं थक गया हूं, यह पात्र कभी भरता ही नहीं। 

सम्राट हंसने लगा, और कहा तुम पागल मालुम होते हो। साधु ने कहा पागल न होते तो, साधु ही क्यों होते सम्राट । यह छोटा सा पात्र भरता ही नहीं? फिर सम्राट ने अपने वजीर से कहा लाओ इसे सोने की मोहरों से भर दो। और इस साधु का मुंह सदा के लिए बंद कर दो। साधु ने कहा मैं फिर याद दिला दूं कि भरने की कोशिश अगर आप करते हैं। तो शर्त यह है कि जब तक पात्र भरेगा नहीं मैं पीछे नहीं हटाऊंगा। 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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सम्राट ने घमण्ड से कहा- तू घबरा मत ! इसे हम सोने से भर देंगे, हीरे जवाहरातों से भर देंगे। लेकिन जल्द ही सम्राट को अपनी भूल समझ में आ गई जब सोने की मोहरें डाली गईं और वह गुम हो गईं, हीरे डाले गये और वह भी खो गये। लेकिन सम्राट भी जिद्दी था, और फिर वह साधु से हार माने। यह भी तो उसे जचता नही था, इसलिए अपनी राजधानी में सूचना पहुंचाई। सूचना सुन कर हजारों लोग इकट्ठे हो गए, सम्राट अपना ख़जाना खाली करता चला गया। उस ने कहा आज दांव पर लग जाना हैं, सब डूबा दूंगा, मगर उस का पात्र भर कर ही रहूंगा। शाम हो गई सूरज ढलने लगा, सम्राट के कभी ना खाली  होने वाले खजाने खाली हो गए, लेकिन पात्र नहीं भरा सो नहीं भरा, वह गिर पड़ा साधु के चरणों में और कहा मुझे क्षमा कर दो। मेरी अकड़ निकल दी आप ने, अच्छा किया। मैं तो सोचता था कि मेरे पास अक्षय खजाना है, लेकिन यह आप के छोटे से पात्र को भी न भर पाया। बस अब एक ही प्रार्थना है, मैं तो हार गया मुझे क्षमा कर दें।

 मैंने व्यर्थ ही आप को वचन दिया था आप का पात्र भरने का। मग़र जाने से पहले एक छोटी सी बात मुझे बताते जाओ। मेरे मन में बार बार यही प्रश्न उठेगा, कि यह पात्र क्या है। किस जादू से बना है, साधु हंसने लगा। उस ने कहा किसी जादू से नहीं ‘इसे आदमी के ह्रदय से बनाया गया है। ना आदमी का ह्रदय भरता है, और ना ही यह पात्र भरता है। इस जिंदगी में कोई और चीज तुम्हे छका नहीं सकेगी। तुम्हारा पात्र खाली का खाली रहेगा, कितना ही धन डालो इस में सब इस में खो जाएगा। यह पात्र खाली का खाली ही रहेगा, भरे नहीं भरता, ना कभी भरेगा, यह तो केवल परमात्मा की भक्ति व स्वयं के समर्पण से ही भरेगा। क्योंकि अनंत है हमारी इच्छाओं की प्यास, अनन्त है हमारा परमात्मा और अनंत को सिर्फ अनंत ही भर सकता है, और कोई नहीं। 

 इसलिए हमें किसी भी प्रकार का घमंड नहीं करना चाहिए। बस मालिक के आगे यही विनती करनी चाहिए कि मालिक जो तूने दिया है, उस के लिए तेरा शुक्रिया है। और उस का उपयोग मालिक के उन दुखी दीन बंधुओं के लिए करना चाहिए। अपना दिल बड़ा रखते हुए सब की मदद करें। तभी हम उस परमात्मा की खुशी हासिल कर पाएंगे। हर एक की सुनो, और हर एक से सीखो क्योंकि हर कोई, सब कुछ नही जानता। लेकिन हर एक कुछ ना कुछ जरुर जानता हैं! स्वभाव रखना है तो उस दीपक की तरह रखिये। जो सम्राट के महल में भी उतनी ही रोशनी देता है। जितनी की किसी गरीब की झोपड़ी में….

*⏰⛳✅✍️🔔विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हमें जिस वस्तु की आवश्यकता नहीं है,वह भी हमारी इच्छा शक्ति उसे प्राप्त करने के लिए अपनी इनर्जी को समाप्त करती है।इस कार्य से जीव का पुण्य समाप्त हो जाता है जिससे वह स्वयं को दुःखी महसूस करता है।*

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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 27 अप्रैल 2023

स्थायी सफलता

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*स्थायी सफलता*
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*🔔🪔 वैशाख शुक्ल अष्टमी दिनांक 28 अप्रैल शुक्रवार पंद्रहवें तीर्थंकर  धर्मनाथ भगवानजी का गर्भ  कल्याणक महोत्सव है l 🛕*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल नवमी दिनांक 29 अप्रैल शनिवार पांचवें तीर्थंकर  सुमतिनाथ  भगवानजी का तप  कल्याणक महोत्सव है 🛕*
*🔔⏰🎪 यह सभी तिथियां उत्तर पुराण व जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक बार बुरी आत्माओं ने भगवान से शिकायत की कि उनके साथ इतना बुरा व्यवहार क्यों किया जाता है, अच्छी आत्माएं इतने शानदार महल में रहती हैं और हम सब खंडहरों में, आखिर ये भेदभाव क्यों है, जबकि हम सब आप ही की संतान हैं।

भगवान ने उन्हें समझाया, ” मैंने तो सभी को एक जैसा ही बनाया पर तुम ही अपने कर्मो से बुरी आत्माएं बन गयीं।

पर भगवान के समझाने पर भी बुरी आत्माएं भेदभाव किये जाने की शिकायत करतीं रहीं।

इसपर भगवान ने कुछ देर सोचा और सभी अच्छी-बुरी आत्माओं को बुलाया और बोले, “ बुरी आत्माओं के अनुरोध पर मैंने एक निर्णय लिया है, आज से तुम लोगों को रहने के लिए मैंने जो भी महल या खँडहर दिए थे वो सब नष्ट हो जायेंगे, और अच्छी और बुरी आत्माएं अपने अपने लिए दो अलग-अलग शहरों का निर्माण करेंगी। ”

तभी एक आत्मा बोली, “ लेकिन इस निर्माण के लिए हमें ईंटें कहाँ से मिलेंगी ?”

“जब पृथ्वी पर कोई इंसान सच या झूठ बोलेगा तो यहाँ पर उसके बदले में ईंटें तैयार हो जाएंगी।  सभी ईंटें मजबूती में एक सामान होंगी, अब ये तुम लोगों को तय करना है कि तुम सच बोलने पर बनने वाली ईंटें लोगे या झूठ बोलने पर!”, भगवान ने उत्तर दिया ।

बुरी आत्माओं ने सोचा, पृथ्वी पर झूठ बोलने वाले अधिक लोग हैं इसलिए अगर उन्होंने झूठ बोलने पर बनने वाली ईंटें ले लीं तो एक विशाल शहर का निर्माण हो सकता है, और उन्होंने भगवान से झूठ बोलने पर बनने वाली ईंटें मांग ली।

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दोनों शहरों का निर्माण एक साथ शुरू हुआ, पर कुछ ही दिनों में बुरी आत्माओं का शहर विशाल रूप लेने लगा, उन्हें लगातार ईंटों के ढेर मिलते जा रहे थे और उससे उन्होंने एक शानदार महल बना लिया।  वहीँ अच्छी आत्माओं का निर्माण धीरे -धीरे चल रहा था, काफी दिन बीत जाने पर भी उनके शहर का एक ही हिस्सा बन पाया था।

कुछ दिन और ऐसे ही बीते, फिर एक दिन अचानक एक अजीब सी घटना घटी।  बुरी आत्माओं के शहर से ईंटें गायब होने लगीं … दीवारों से, छतों से, इमारतों की नीवों से,… हर जगह से ईंटें गायब होने लगीं और देखते -देखते उनका शहर खंडहर का रूप लेने लगा। परेशान आत्माएं तुरंत भगवान के पास भागीं और पुछा, “ हे प्रभु, हमारे महल से अचानक ये ईंटें गायब क्यों होने लगीं …हमारा महल शहर तो फिर से खंडहर बन गया ?”

भगवान मुस्कुराये और बोले, “ ईंटें गायब होने लगीं!! अच्छा -अच्छा, लगता है जिन लोगों ने झूठ बोला था उनका झूठ पकड़ा गया, और इसीलिए उनके झूठ बोलने से बनी ईंटें भी गायब हो गयीं।

*✅🕉️🪜👪🌲विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं,इस कहानी से हमें कई ज़रूरी बातें सीखने को मिलती है, जो हम बचपन से सुनते भी आ रहे हैं पर शायद उसे इतनी गंभीरता से नहीं लेते ।* *झूठ की उम्र छोटी होती है, आज नहीं तो कल झूठ पकड़ा ही जाता है।*
*झूठ और बेईमानी के रास्ते पर चल कर सफलता पाना आसान लगता है पर अंत में वो हमें असफल ही बनाता है।*
*वहीँ सच्चाई से चलने वाले धीरे -धीरे आगे बढ़ते हैं पर उनकी सफलता स्थायी होती है. अतः हमें हमेशा सच्चाई की बुनियाद पर अपने सफलता की इमारत खड़ी करनी चाहिए, झूठ और बेईमानी की बुनियाद पर तो बस खंडहर ही बनाये जा सकते हैं।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 26 अप्रैल 2023

नियम पालने का फल

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*नियम पालने का फल*
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*🔔🪔 वैशाख शुक्ल अष्टमी दिनांक 28 अप्रैल शुक्रवार पंद्रहवें तीर्थंकर  धर्मनाथ भगवानजी का गर्भ  कल्याणक महोत्सव है 🛕*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल नवमी दिनांक 29 अप्रैल शनिवार पांचवें तीर्थंकर  सुमतिनाथ  भगवानजी का तप  कल्याणक महोत्सव है 🛕*
*🔔⏰🎪 यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक दिगबंर संत थे। वे एक दिन एक गांव में विहार कर पहुंचे। वह संघ सहित  जाट के घर पर कुछ समय के लिए रुके थे । जाट ने उनकी बड़ी सेवा की। सन्त ने उसे कहा कि रोजाना रामनाम -जप करने का कुछ नियम ले लो।

जाट ने कहा बाबा, हमारे को वक्त नहीं मिलता। सन्त ने कहा कि अच्छा, रोजाना मंदिर जी के  दर्शन कर आया करो।

जाट ने कहा मैं तो खेत में रहता हूं और मंदिर जी तो गांव  में है, कैसे करूँ? संत ने उसे कई साधन बताये, कि वह कुछ -न-कुछ नियम ले लें।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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पर वह यही कहता रहा कि मेरे से यह बनेगा नहीं, मैं खेत में काम करूँ या माला लेकर जप करूँ। इतना समय मेरे पास कहाँ है?

बाल -बच्चों का पालन पोषण करना है। आपके आशीर्वाद से सबकुछ प्राप्त हो यही प्रार्थना आप सभी से करता हूं।

संत ने कहा कि अच्छा तू क्या कर सकता है? जाट बोला कि पडोस में एक कुम्हार रहता है। उसके साथ मेरी मित्रता है। उसके और मेरे खेत भी आस -पास है।

और घर भी पास -पास है। रोजाना एक बार उसको देख लिया करूंगा। सन्त ने कहा कि ठीक है। उसको देखे बिना भोजन मत करना।

जाट ने स्वीकार कर लिया। जब उसकी पत्नी कहती कि भोजन कर लो तो वह चट बाड पर चढ़कर कुम्हार को देख लेता और भोजन कर लेता।

इस नियम में वह पक्का रहा। एक दिन जाट को खेत में जल्दी जाना था। इसलिए भोजन जल्दी तैयार कर लिया।

उसने बाड़ पर चढ़कर देखा तो कुम्हार दिखा नहीं। पूछने पर पता लगा कि वह तो मिट्टी खोदने बाहर गया है। जाट बोला कि कहां मर गया, कम से कम देख तो लेता।

अब जाट उसको देखने के लिए तेजी से भागा। उधर कुम्हार को मिट्टी खोदते -खोदते एक हांडी मिल गई। जिसमें तरह -तरह के रत्न, अशर्फियाँ भरी हुई थी।

उसके मन में आया कि कोई देख लेगा तो मुश्किल हो जायेगी। अतः वह देखने के लिए ऊपर चढा तो सामने वह जाट आ गया।

कुम्हार को देखते ही जाट वापस भागा तो कुम्हार ने समझा कि उसने वह हांडी देख ली और अब वह आफत पैदा करेगा।

कुम्हार ने उसे रूकने के लिए आवाज लगाई। जाट बोला कि बस देख लिया, देख लिया।

कुम्हार बोला कि अच्छा, देख लिया तो आधा तेरा आधा मेरा, पर किसी से कहना मत। जाट वापस आया तो उसको धन मिल गया।

उसके मन में विचार आया कि दिगंबर संत से अपना मनचाहा नियम लेने में इतनी बात है। अगर सदा उनकी आज्ञा का पालन करू तो कितना लाभ होगा।

ऐसा विचार करके वह जाट और उसका मित्र कुम्हार दोनों ही भगवान् के भक्त बन गए।

तात्पर्य यह है कि हम दृढता से अपना एक उद्देश्य बना लें, नियम ले लें कि चाहे जो हो जाये, हमें तो भगवान् की तरफ चलना है।

भगवान् का भजन करना है। नियम बनाने की अपेक्षा नियम को पहचाने। नियम क्यों लिया गया है। 

अगर हमें हमेशा यह स्मरण रहे कि हमने जो नियम लिया है वह क्यों लिया है तो शायद नियम कभी न छूटे..!!

*🔔✍️⏰⛳▶️विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं , आज हमने कोई भी नियम दृढ़ता पूर्वक पालन नहीं किया।जब हमारी इच्छा होती है धर्म कार्य कर लेते है। हमें अपने प्राचीन शास्त्रों के अनुसार अपना आचरण करना चाहिए। अन्यथा हम सभी अनादि काल तक चौरासी लाख योनियों के सुख भोगते रहेंगे। हमारी आत्मा का परमात्मा से मिलन नहीं होगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 25 अप्रैल 2023

लालच वश

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*लालच वश*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒लालच वश ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल 6 ,दिनांक 26 अप्रैल दिन बुधवार चतुर्थ तीर्थंकर अभिनंदन नाथ भगवानजी का गर्भ व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है । गर्भ कल्याणक महोत्सव शाश्वत भूमि अयोध्या नगरी में हुआ था। मोक्ष कल्याणक महोत्सव शाश्वत भूमि शिखरजी के आनन्द कूट पर हुआ था | आज के ही दिन प्रातःकाल पुनर्वसु नक्षत्र में मोक्ष पद की प्राप्ति हुई थी | इस कूट से 72 कोड़ा कोड़ी 70 करोड़ 70 लाख 42 हजार 700 मुनि सिद्ध भये | आप सभी इष्टमित्रों सहित सपरिवार शक्ति अनुसार उत्सव कर जीवन सार्थक करें।*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल अष्टमी दिनांक 28 अप्रैल शुक्रवार पंद्रहवें तीर्थंकर  धर्मनाथ भगवानजी का गर्भ  कल्याणक महोत्सव है 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली दिनांक  26, 28, 29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक सेठ था। वह बर्तनों को किराये पर देता था और उनसे कमाई करता था। एक बार एक व्यक्ति को किराये पर बर्तन दिये। वह इन्सान उससे बर्तन ले गया और किराया दे गया। लेकिन जब उसने बर्तन वापस लौटाये तो दो-तीन बर्तन उसे फालतू दे दिये। वह सेठ पूछने लगा कि क्या बात है? तुमने ज्यादा बर्तन क्यों दिये हैं? वह आदमी कहने लगा कि आपने जो बर्तन दिये थे, ये बर्तन उसकी सन्तानें है इसलिए इन्हें भी आप सम्भाल लीजिए।

 वह सेठ बड़ा खुश हुआ कि यह अच्छा ग्राहक है। यह तो मुझे बहुत फायदा देगा। किराया तो मुझे मिलेगा ही, साथ में फालतू बर्तन भी मिलेंगे।

 इस तरह चन्द दिन बीते, वही आदमी फिर आ गया। लौटते समय फिर थोड़े बर्तन ज्यादा कर दिये और वही बात कही कि बर्तनों की सन्तान हुई है। सेठ बड़ा खुश हुआ, चुपचाप सब बर्तन रख लिए। 

           एक महीने का समय बाद  वह पुनः  सेठ के पास आया और कहने लगा कि मेरे यहां कुछ खास मेहमान आने वाले हैं, अतः कृपा करके आपके पास जो चांदी के बर्तन हैं, वे मुझे दे दीजिए।

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 पहले तो सेठ कुछ सोच में पड़ा, फिर सोचा कि मैंने पहले जितने बर्तन दिए, उनसे ज्यादा मुझे हासिल हुए। इस बार कुछ चांदी के बर्तन ज्यादा मिलेंगे। इसी तरह सोचकर उसने बर्तन दे दिये। समय बीतता गया, पर वह आदमी बर्तन लौटाने नहीं आया। अब सेठ बड़ा परेशान हुआ।

 वह उसके घर जा पहुंचा और उससे पूछा कि भले मानस! तूने वे बर्तन वापस नहीं किए। वह आदमी बहुत ही मायूस सा होकर कहने लगा कि सेठ जी, क्या करें, आपने जो चांदी के बर्तन दिए थे, उनकी तो मौत हो गई।

        सेठ बड़ा गुस्से में आया, कहने लगा कि क्या बात है, मैं तुझे अन्दर करवा दूंगा, कभी बर्तनों की भी मौत होती है। वह आदमी कहने लगा "सेठ जी! जब मैंने कहा था कि बर्तनों की संतानें हो रही हैं, उस वक्त आप सब ठीक मान रहे थे। यदि बर्तनों की सन्तान हो सकती है तो वे मर क्यों नहीं सकते?"

          इसी तरह संसार की हालत है। माया के पीछे इन्सान इतना अन्धा हो जाता है कि उसे कुछ समझ नहीं आता। भक्तजन हर कदम पर इन्सान को चेतावनी देते हैं कि हे इन्सान! तू जिन महात्माओं के, जिन सन्तजनों के वचनों को सुनता है, पढ़ता है, तू इनके ऊपर सत्य को जानकर दृढ़ भी हो जा । लालच में पड़कर सत्य का साथ न छोड़, नहीं तो बाद में पछताना पड़ेगा।

*⏰🔔✅🎪👣विशेष : - भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम सभी को कोई भी कुछ भी दे रहा है तो हम लालच वश उसे ग्रहण कर रहे है। हमें अपनी आवश्यकता व हैसियत के अनुसार कोई भी वस्तु या धन का संचय करना चाहिए। अन्यथा हमारा आचरण व्यवहार खराब होने से नियम से पतन को प्राप्त होते है।*

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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 24 अप्रैल 2023

मेरा बेटा

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*मेरा बेटा*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
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एक वृद्ध व्यक्ति अपने बहु-बेटे के यहाँ शहर रहने गए। उम्र के इस पड़ाव पर वह अत्यंत कमजोर हो चुके थे, उनके हाथ कांपते थे और दिखाई भी कम देता था। वो एक छोटे से घर में रहते थे, पूरा परिवार और उसका चार वर्षीया पोता एक साथ डिनर टेबल पर खाना खाते थे।

लेकिन वृद्ध होने के कारण उस व्यक्ति को खाने में बड़ी दिक्कत होती थी। कभी मटर के दाने उसकी चम्मच से निकल कर फर्श पे बिखर जाते तो कभी हाँथ से दूध छलक कर मेजपोश पर गिर जाता।

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बहु-बेटे एक-दो दिन ये सब सहन करते रहे पर अब उन्हें अपने पिता की इस कमजोरी से चिढ होने लगी। “हमें इनका कुछ करना पड़ेगा”, लड़के ने कहा।

बहु ने भी हाँ में हाँ मिलाई और बोली, “आखिर कब तक हम इनकी वजह से अपने खाने का मजा किरकिरा करते रहेंगे, और हम इस तरह चीजों का नुकसान होते हुए भी नहीं देख सकते।”

अगले दिन जब खाने का वक़्त हुआ तो बेटे ने एक पुरानी मेज को कमरे के कोने में लगा दिया, अब बूढ़े पिता को वहीं अकेले बैठ कर अपना भोजन करना था। यहाँ तक कि उनके खाने के बर्तनों की जगह एक लकड़ी का कटोरा दे दिया गया था, ताकि अब और बर्तन ना टूट-फूट सकें।

बाकी लोग पहले की तरह ही आराम से बैठ कर खाते और जब कभी-कभार उस बुजुर्ग की तरफ देखते तो उनकी आँखों में आंसू दिखाई देते। यह देखकर भी बहु-बेटे का मन नहीं पिघलता, वो उनकी छोटी से छोटी गलती पर ढेरों बातें सुना देते। वहां बैठा बालक भी यह सब बड़े ध्यान से देखता रहता, और अपने में मस्त रहता।

एक रात खाने से पहले, उस छोटे बालक को उसके माता -पिता ने ज़मीन पर बैठ कर कुछ करते हुए देखा, “तुम क्या बना रहे हो ?” पिता ने पूछा, बच्चे ने मासूमियत के साथ उत्तर दिया- अरे मैं तो आप लोगों के लिए एक लकड़ी का कटोरा बना रहा हूँ, ताकि जब मैं बड़ा हो जाऊं तो आप लोग इसमें खा सकें।

और वह पुनः अपने काम में लग गया। पर इस बात का उसके माता -पिता पर बहुत गहरा असर हुआ, उनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकला और आँखों से आंसू बहने लगे। वो दोनों बिना बोले ही समझ चुके थे कि अब उन्हें क्या करना है। उस रात वो अपने बूढ़े पिता को वापस डिनर टेबल पर ले आये, और फिर कभी उनके साथ अभद्र व्यवहार नहीं किया।

*✅🔔⛳⏰✍️विशेष :- भव्य आत्माओं,असल शिक्षा शब्दों में नहीं हमारे कर्म में, हमारे विचारों में छुपी होती है। अगर हम बच्चों को बस ये उपदेश देते रहे कि बड़ों का आदर करो… सबका सम्मान करो… और खुद इसके उलट व्यवहार करें तो बच्चा भी ऐसा ही करना सीखता है। इसलिए कभी भी अपने परिवार के सदस्यों के साथ ऐसा व्यवहार ना करें कि कल को आपकी संतान भी आपके लिए लकड़ी का कटोरा तैयार करने लगे!*

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रविवार, 23 अप्रैल 2023

मेरे संबंध

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*मेरे संबंध*
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एक बार मैं अपने एक मित्र का तत्काल केटेगरी में पासपोर्ट बनवाने पासपोर्ट ऑफिस गया था। 

लाइन में लग कर हमने पासपोर्ट का तत्काल फार्म लिया, फार्म भरे हुए हमें काफी समय हो चुका था, अब हमें पासपोर्ट की फीस जमा करनी थी।

लेकिन जैसे ही हमारा नंबर आया क्लर्क ने खिड़की बंद कर दी और कहा कि," समय खत्म हो चुका है, अब कल आइएगा।" 
  
मैंने उससे मिन्नतें की, उससे कहा कि, "आज पूरा दिन हमने खर्च किया है और बस अब केवल फीस जमा कराने की बात रह गई है, कृपया फीस ले लीजिए।" 

क्लर्क बिगड़ गया। कहने लगा, "आपने पूरा दिन खर्च कर दिया तो उसके लिए वह जिम्मेदार है क्या? अरे सरकार ज्यादा लोगों को लगाए! मैं तो सुबह से अपना काम ही कर रहा हूँ।" 

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खैर, मेरा मित्र बहुत मायूस हुआ और उसने कहा कि चलो अब कल आएँगे। मैंने उसे रोका, कहा कि," रुको मैं एक और कोशिश करता हूँ।" 

क्लर्क अपना थैला लेकर उठ चुका था। मैंने कुछ कहा नहीं, चुपचाप उसके पीछे हो लिया। वह एक कैंटीन में गया, वहाँ उसने अपने थैले से लंच बॉक्स निकाला और धीरे-धीरे अकेला खाने लगा। 
  
मैं उसके सामने की बेंच पर जाकर बैठ गया। मैंने कहा कि," तुम्हारे पास तो बहुत काम है, रोज बहुत से नए-नए लोगों से मिलते होगे?"
वह कहने लगा कि," हाँ मैं तो एक से एक बड़े अधिकारियों से मिलता हूँ।
कई आई.ए.एस., आई.पी.एस., विधायक रोज यहाँ आते हैं।
मेरी कुर्सी के सामने बड़े-बड़े लोग इंतजार करते हैं।"
  
फिर मैंने उससे पूछा कि," एक रोटी तुम्हारी प्लेट से मैं भी खा लूँ?" उसने "हाँ" कहा। मैंने एक रोटी उसकी प्लेट से उठा ली, और सब्जी के साथ खाने लगा।

मैंने उसके खाने की तारीफ की, और कहा कि," तुम्हारी पत्नी बहुत ही स्वादिष्ट खाना पकाती है।" 
  
मैंने उसे कहा," तुम बहुत महत्वपूर्ण सीट पर बैठे हो। बड़े-बड़े लोग तुम्हारे पास आते हैं। तो क्या तुम अपनी कुर्सी की इज्जत करते हो? तुम बहुत भाग्यशाली हो, तुम्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है, लेकिन तुम अपने पद की इज्जत नहीं करते।" 

उसने मुझसे पूछा, "ऐसा कैसे कहा आपने?"
  
मैंने कहा कि," जो काम दिया गया है उसकी इज्जत करते तो तुम इस तरह रुखे व्यवहार वाले नहीं होते। 

देखो तुम्हारा कोई दोस्त भी नहीं है। तुम दफ्तर की कैंटीन में अकेले खाना खाते हो, अपनी कुर्सी पर भी मायूस होकर बैठे रहते हो। लोगों का होता हुआ काम पूरा करने की जगह अटकाने की कोशिश करते हो।
 
बाहर गाँव से आ कर सुबह से परेशान हो रहे लोगों के अनुरोध करने पर तुम उनसे कहते हो, "सरकार से कहो कि ज्यादा लोगों को लगाए।"

अरे ज्यादा लोगों के लगाने से तो तुम्हारी अहमियत नहीं घट जाएगी? हो सकता है तुमसे यह काम ही ले लिया जाए।
 
भगवान ने तुम्हें मौका दिया है रिश्ते बनाने के लिए। लेकिन अपना दुर्भाग्य देखो, तुम इसका लाभ उठाने की जगह रिश्ते बिगाड़ रहे हो। मेरा क्या है, कल आ जाउँगा या परसों आ जाउँगा, पर तुम्हारे पास तो मौका था किसी को अपना अहसानमंद बनाने का। तुम उससे चूक गए!" 

मैंने कहा कि," पैसे तो बहुत कमा लोगे, लेकिन रिश्ते नहीं कमाए तो सब बेकार है।

क्या करोगे पैसों का? अपना व्यवहार ठीक नहीं रखोगे तो तुम्हारे घर वाले भी तुमसे दुखी रहेंगे, यार दोस्त तो तुम्हारे पहले से ही नहीं हैं।"
 
मेरी बात सुन कर वह रुंआसा हो गया। उसने कहा कि," आपने बात सही कही है साहब। मैं अकेला हूँ।
पत्नी झगड़ा कर मायके चली गई है। बच्चे भी मुझे पसंद नहीं करते। माँ है, वे भी कुछ ज्यादा बात नहीं करती।
सुबह चार-पाँच रोटी बना कर दे देती है, और मैं तन्हा खाना खाता हूँ। रात में घर जाने का भी मन नहीं करता।
समझ में नहीं आता कि गड़बड़ी कहाँ है?" 
 
मैंने हौले से उससे कहा, "खुद को लोगों से जोड़ो। किसी की मदद कर सकते हो तो करो। देखो मैं यहाँ अपने दोस्त के पासपोर्ट के लिए आया हूँ। मेरे पास तो पासपोर्ट है। मैंने दोस्त की खातिर तुम्हारी मिन्नतें की। निस्वार्थ भाव से। इसलिए मेरे पास दोस्त हैं, तुम्हारे पास नहीं हैं।" 
 
वह उठा और उसने मुझसे कहा कि, "आप मेरी खिड़की पर पहुँचो। मैं आज ही फार्म जमा करुँगा।" और उसने काम कर दिया। फिर उसने मेरा फोन नंबर मांगा, मैंने दे दिया।

 छह माह बीत गए।

इस रक्षा बंधन पर एक फोन आया...
"रविंद्र कुमार चौधरी बोल रहा हूँ साहब, छह माह पहले आप हमारे पास अपने किसी दोस्त के पासपोर्ट के लिए आए थे, और आपने मेरे साथ रोटी भी खाई थी। आपने कहा था कि पैसे की जगह रिश्ते बनाओ।" 

मुझे एकदम याद आ गया। मैंने कहा, "हाँ जी चौधरी साहब कैसे हैं?"

उसने खुश होकर कहा, "साहब आप उस दिन चले गए, फिर मैं बहुत सोचता रहा। मुझे लगा कि पैसे तो सचमुच बहुत लोग दे जाते हैं, लेकिन साथ खाना खाने वाला कोई नहीं मिलता। साहब मैं अगले ही दिन पत्नी के मायके गया, बहुत मिन्नतें कर उसे घर लाया। वह मान ही नहीं रही थी। वह खाना खाने बैठी तो मैंने उसकी प्लेट से एक रोटी उठा ली, कहा कि साथ खिलाओगी?

वह हैरान थी। रोने लगी। मेरे साथ चली आई। बच्चे भी साथ चले आए।
 साहब, अब मैं पैसे नहीं कमाता। रिश्ते कमाता हूँ। जो आता है उसका काम कर देता हूँ। 
  
साहब आज आपको रक्षा बंधन की शुभकामनाएँ देने के लिए फोन किया है क्योकि आपने मुझे लोगों से जुड़ना सिखाया है।

अगले महीने बिटिया की शादी है। आपको आना है। बिटिया को आशीर्वाद देने। रिश्ता जोड़ा है आपने।"
  
वह बोलता जा रहा था, मैं सुनता जा रहा था। सोचा नहीं था कि सचमुच उसकी ज़िंदगी में भी पैसों पर, रिश्ता इतना भारी पड़ेगा। 
 
दोस्तों आदमी भावनाओं से चलता है नियमों से नहीं। नियमों से तो मशीनें चला करती हैं।

*✅🔔👪🌲⛳विशेष :- भव्य आत्माओं ,"जब मैं, 'मुझे और मेरा' को प्रमुखता देते है, तब एकता खो जाती है और रिश्ते भुला दिए जाते हैं। रिश्ते एकतरफ़ा नहीं हो सकते। दोनों ओर से त्याग की आवश्यकता होती है और होनी ही चाहिए।*                    
*"जो व्यक्ति सभी के साथ एक हो जाता है, जो सभी को एक मानकर देखता है, वह हमेशा ईश्वर के साथ होता है।"*

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शनिवार, 22 अप्रैल 2023

अपनत्व का विश्वास

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*अपनत्व का विश्वास*
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*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली दिनांक  26, 28, 29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
           
एक बार एक ग्वालन दूध बेच रही थी और सबको दूध नाप नाप कर दे रही थी। उसी समय एक नौजवान दूध लेने आया तो ग्वालन ने बिना नापे ही उस नौजवान का बर्तन दूध से भर दिया।
           
वहीं थोड़ी दूर पर एक साधु हाथ में माला लेकर मनको को गिन गिन कर माला फेर रहा था। तभी उसकी नजर ग्वालन पर पड़ी और उसने ये सब देखा और पास ही बैठे व्यक्ति से सारी बात बताकर इसका कारण पूछा।
 
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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उस व्यक्ति ने बताया कि जिस नौजवान को उस ग्वालन ने बिना नाप के दूध दिया है वह उस नौजवान को अपना सहयोगी मानती हैं। इसलिए उसने उसे बिना नाप के दूध दे दिया। यह बात साधु के दिल को छू गयी और उसने सोचा कि एक दूध बेचने वाली ग्वालन जिसे अपना सहयोगी मानती है  तो उसका हिसाब नहीं रखती और मैं अपने जिस ईश्वर को अपना मानता  हूं, उसके लिए सुबह से शाम तक माला के मोती  गिनगिन कर माला फेरता हूं। मुझसे तो अच्छी यह ग्वालन ही है और उसने माला का त्याग कर दिया।अब वह आंखें बंद कर प्रभु के गुणों को स्मरण कर भक्ति करने लगा।
           
जीवन भी ऐसा ही है। जहां अपनत्व का विश्वास होता है वहां हिसाब किताब नहीं होता है,और जहां हिसाब किताब होता है वहां अपनत्व का विश्वास नहीं होता है, सिर्फ व्यापार होता है..!!
*👨‍👩‍👦‍👦✍️💯🐒▶️विशेष -भव्य‌‌‌ आत्माओं,जब तक हमारा कोई भी कार्य के प्रति अपनत्व की भावना जागृत नहीं होगी तब तक हमें सफलता प्राप्त नहीं होगी। अतः स्वयं का विकास चाहते हो तो स्वयं को दृढ़ बनाएं।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 21 अप्रैल 2023

दान दिवस का महत्व

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*🌲सुनहरा मौका🌲*.... 
*दान दिवस का महत्व ✍️🐒*
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*🌞श्री चारित्र चक्रवर्ती शान्तीसागराय नम:⏰*
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒दान दिवस का महत्व ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*कल 22अप्रैल शनिवार जयपुर पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया दान दिवस है।*
*🪔🔔 वैशाख शुक्ल तृतीया 22 अप्रैल शनिवार जयपुर पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया दान दिवस है।* *आप सभी इष्टमित्रों के साथ सपरिवार शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली दिनांक  26, 28, 29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

*🌲दान दिवस अक्षय तृतीया पर सुनहरा मौका🌲*

*ओम ह्रीं नम:*
       *महानुभावों,*
      *🌲भारत सरकार के द्वारा देवस्थान विभाग जयपुर(राजस्थान) से रजिस्टर्ड संस्था सन् 2013 से सतत् सभी साधु(त्यागीव्रृतियो) व धर्म प्रेमियों के लिए "श्री शांतिसागर समाधि साधना सेवा केंद्र ट्रस्ट "  की संस्था की स्थापना की गई है । इस संस्था का मुख्य उद्देश्य धर्म की नींव मजबूत करना है। यह संस्था सत्य धर्म के पालन करने वाले जीव को, जीव की आत्मा को परमात्मा बनाने में सहयोगी है ।जो भी जीव किसी जीव के समाधि मरण में सहयोगी बनता है , उस जीव का नियम से समाधि मरण होता है । जिस जीव का समाधिमरण होता है वह जीव 1⃣2⃣ भव के अंदर 8⃣4⃣ लाख योनियो से छुटकारा पाकर सिद्यालय में अपना स्थान निर्धारित कर लेता है ।*जो इस संस्था से जुड़े हुए है, तथा जो व्यक्ति जुड़ना चाहते है।उनके लिए यह विशेष अवसर प्राप्त हो रहा है।अतः आप शक्ति के अनुसार सहयोग करते हुए अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग करें।*  

#https://youtu.be/jM9Qq3mEcMk
 
*➡️जानिए दान दिवस पर आपको क्या करना है । यह जानने के लिए उपरोक्त लिंक को क्लिक कीजिए और जानिए आचार्य 108 श्री विद्यासागरजी मुनिराज के धर्मप्रभावक शिष्य निर्यापक मुनिश्री सुधासागरजी के मुख से दान दिवस का महत्व*
  
       *🌞आप सभी के लिए यह एक सुनहरा अवसर प्राप्त हो रहा है आप यथाशक्ति इस अवसर पर जहां आपकी इच्छा हो या संस्था में दान कर पुण्यके सहभागी बने ।आप सभी से निवेदन है आप अपनी चंचला लक्ष्मी का स्वंय की आत्मा को परमात्मा बनाना चाहते हैं, तो आप इस संस्था में आज ही दान देकर अपना मोक्ष  की ट्रेन में अपना स्थान सुरक्षित करें ।*

*🕉व्यवहार में दान ही त्याग है। दान त्याग धर्म का व्यवहारिक रूप है। धानत राय ने पूजा में कहा भी है 'उत्तम त्याग कहो जग सारा, 'औषधि शास्त्र अभय आहारा,। निश्चय राग-द्वेष निरवारे, ज्ञाता दोनों दान संभारे'। निश्चय से राग-द्वेष निवारण ही त्याग है। व्यवहार में दान ही त्याग है।*

*👨‍👩‍👧‍👦प्रत्येक प्राणी को अपनी शक्ति के अनुसार दान अवश्य करना चाहिये। दान चार प्रकार के हैं- औषधि, ज्ञान, अभय व आहार। वृक्षादि एकेन्द्रिय प्राणी, गाय, भैंस आदि तिर्यंच प्राणी भी फल-फूल, दूध प्रदान करते हैं। हम तो पंचेन्द्रिय प्राणी हैं, मनुष्य भव में हैं। दान गृहस्थों का पुनीत कर्तव्य है। वर्तमान वातावरण में बढती हुई असमानता को सद् गृहस्थ दान के माध्यम से दूर कर सकते हैं।*

*🔯कभी हमारे देश में घी और दूध की नदियां बहती थी, परंतु आज कुछ भी नहीं है। क्या कारण है? अवश्य ही कोई मूल में गलती है। हमने त्याग, दान भूला दिया है। भारत कभी अतिथि सत्कार के लिए प्रसिद्ध था, आज हम इन बातों को भूलते जा रहे हैं।*
*🌲सम्यक्त्व चिंतामणि नामक ग्रंथ में लिखा है कि त्याग के बिना मुक्ति नहीं होती, त्याग के बिना हित का मार्ग नहीं है और त्याग ही लोकोत्तर अत्यंत श्रेष्ठ धर्म है। कर्म भूमि के मनुष्य का जीवन पारस्परिक सहयोग से ही चलता है। भूखे को भोजन देना, रोगी को औषध देना, अज्ञानी को ज्ञान देना और प्राण नाश की आशंका से भयभीत मनुष्य को अभय देना मनुष्य मात्र का कर्तव्य है। त्याग के द्वारा ही संसार के बङे-बङे काम चलते हैं।*

*➡"उत्तम त्याग करे जो कोई, भोग भूमि सुर शिवसुख होई"- उत्तम त्याग करने वाले व्यक्ति को मुक्ति सुंदरी स्वयंमेव वरण करती है तथा देवता भी उसे नमस्कार करते हैं।*

🤝 *किस्मत आपके हाथ में नहीं होती*
                 *परन्तु*
*निर्णय आपके हाथ में होता है*
*किस्मत आपका निर्णय नहीं बदल सकती*
                *परन्तु*
*आपका निर्णय आपकी किस्मत बदल सकता है*🤝
      🙏 🙏   🙏 🙏
*🙏बहुत से काम मनुष्य अकेला नही कर सकता। समाज की सेवा किसी स्वार्थ से नही की जाती । समाज की सेवा मनुष्य के जीवन का विनियोग हैं। समाज के लिए दान या सेवा मनुष्य का कर्तव्य है और कर्तव्य के लिए कोई मूल्य नही होता है।   इस पृथ्वी पर आपने मनुष्य भव प्राप्त किया है तो थोड़ा सा अपने आमदनी में से साधु (त्यागीव्रृतियो) सेवा में अवश्य खर्च करें ताकि आप भी  दिगंबर मुनि बन कर अपनी आत्मा का कल्याण कर सके।* 
*धन्यवाद ....धन्यवाद.... धन्यवाद*....
              .... *आप सभी का शुभचिंतक*....
                     *सेवाव्रतीस्वामीजी*
01.💐 Sevavrti Punjab National Bank*
*A/C No.5871000100010922*
*IFC Code PUNB 0587100* 
Durgapura JAIPUR (Rajasthan)
*सम्पर्क सूत्र:-*
*💐 1. 9461956111*  
*🕉 2. 09982411713*
          
*☸उपरोक्त नंबर पर आप पैसे भेजकर वाट्सएप द्वारा सूचना दे ताकि आपको रसीद भेज दी जाएगी।*
🕉↔↔💐💐💐💐↔🔔🕘

*🙆‍♀अनंत काल से इस शरीर संरचना मे सहयोगी सभी जीवो का है हम सब पर कर्ज है।* 
*🌲इसीलिए तो प्रतिपल जयणा पूर्वक अहिंसामय जीवन जीना है हम सभीका फर्ज।*

*☸(प्रत्येक जीव के शरीर का एक एक कण किसी न किसी के सहयोग से पोषण प्राप्त करके बना है। हर एक जीव दुसरे जीव का सहयोगी है इस जगत मे। माता के गर्भ मे रहकर अपने शरीर को हम सभी ने पाया ये हमारी जननी का सहयोग है जिसने अपने शरीर से हमे सींचा है।*

*👨‍👩‍👧‍👦इस सम्पूर्ण जीवन मे कोई स्वेच्छा से सहयोग देते है तो कोई बिना स्वेच्छा के। कोई खुशी से तो कोई दुखी होकर। और इसी प्रकार कर्मबंधन करते है। पर सहयोग तो प्रतिपल प्राप्त होते ही आ रहा है। निगोद मे हो जीव या त्रसकाय, तिर्यच या मनुष्यकाय, स्वर्ग हो या नरक सभी ही जीव एकदूसरे का सहयोग पाते है। और साथ ही साथ इस प्रकृति के प्रत्येक कण और सम्पूर्ण आकाश और तारामंडल भी हमारे सहयोगी है अप्रत्यक्ष रूपमे।*

*🕉अब जब सहयोग प्राप्त किया है तो सहयोगी बनना भी तो हमारा फर्ज है। बस इसी लिए प्रत्येक क्षण प्रत्येक जीवो की जयणा रखना हमारा फर्ज बनता है। हमारे कारण कोई भी जीव की किसी भी प्रकार हिंसा न हो यह जानते और पालते हुए जीना ही धर्म है। जैन शास्त्र कहते है धर्म का अर्थ कोई प्रथा या पौराणिक आस्था के अनुसार चलना नही पर अपने आत्मा के स्वभाव मे रहना धर्म है। और हम सभी का स्वभाव एक दूसरे का सहयोगी बनना है और इस कारण किसीको भी हमारे कारण कोई पीड़ा न पहुचे यह ध्यान रखना धर्म है।*

*🤝इसीलिए कहा गया है परस्पराग्रहो जीवनाम जिसका अर्थ है हर एक जीव दूसरे जीवका उपकारी है। यानी हर एक जीव एकदूसरे का सहयोगी बनकर अपना जीवन व्यतीत करता है।इस प्रकार से समझे तो निश्चित रूप से जान लेंगे की किस प्रकार हम हिंसा करते जा रहे है प्रत्येक पल। अपने घर परिवार मे, अपने आसपास मे रहते लोगोके सहयोगी न बनना संघी पंचेन्द्रीय जीव की हिंसा, पशुपक्षी और अन्य तिर्यच जीवो की जयणा न पालकर अपने कार्य करना उन सभी जीवोकी हिंसा, देवी देवता या नारकी के जीवो प्रति दुर्भावना रखना उनके प्रति हिंसा, और जो मिला है उसमे संतुष्ट होकर इस प्रकृति के आभारी न होकर इस प्रकृति मे प्रतिपल अपने मन के कषायो को और दुर्भावो को प्रसारित करना समस्त लोक की हिंसा।*

*👨‍👩‍👧‍👦आओ आप और हम सभी मिलकर प्रतिदिन इस समस्त जगत के और सभी जीवोके उपकार के लिए प्रतिपल सदभावना भावे और प्रतिपल प्रत्येक जीवोकी जयणा करते हुए अपना कार्य करे।)*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 20 अप्रैल 2023

देना सीखों

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*देना सीखों*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒देना सीखों ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🪔🔔 वैशाख शुक्ल एकम दिनांक 21 अप्रैल शुक्रवार 17 वें तीर्थंकर कुन्थुनाथजी सभी को सभी सुख प्रदान करने वाले कुन्थुनाथजी का जन्म तप व मोक्ष  कल्याणक महोत्सव है।✍️तीर्थंकर कुन्थुनाथ जी का है जन्म कल्याणक , हस्तिनापुर में हुआ था | आज के ही दिन कृतिका नक्षत्र में मातारानी श्रीकांता ने तीर्थंकर को जन्म दिया था |💡तप कल्याणक , हस्तिनापुर में हुआ था | आज के ही दिन पूर्वभव के स्मरण से वैराग्य हुआ कृतिका नक्षत्र में 1000 राजाओं के साथ जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की  थी |💯मोक्ष कल्याणक , शिखरजी में ज्ञानधर कूट पर हुआ था | आज के ही दिन रात्रि के पूर्व भाग में व कृतिका नक्षत्र में 1000 मुनिराजों के साथ मोक्ष पद को प्राप्त किया था | इस कूट से 96 कोड़ा कोड़ी 96 करोड़ 32 लाख 96 हजार 742 मुनि सिद्ध भये थे|आप सभी इष्टमित्रों के साथ सपरिवार शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली दिनांक  26, 28, 29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*


एक नगर का राजा, जिसे ईश्वर ने सब कुछ दिया, एक समृद्ध राज्य, सुशील और गुणवती पत्नी, संस्कारी सन्तान सब कुछ था उसके पास, पर फिर भी दुःखी का दुःखी रहता।

एक बार वो घुमते घुमते एक छोटे से गाँव में पहुँचा जहाँ एक कुम्हार भगवान भोले बाबा के मन्दिर के बाहर मटकीया बेच रहा था और कुछ मटकीयों में पानी भर रखा था और वही पर लेटे लेटे हरिभजन गा रहा था।

राजा वहाँ आया और भगवान भोले बाबा के दर्शन किये और कुम्हार के पास जाकर बैठा तो कुम्हार बैठा हुआ और उसने बड़े आदर से राजा को पानी पिलाया। राजा कुम्हार से कुछ प्रभावित हुआ और राजा ने सोचा कि ये इतनी सी मटकीयों को बेच कर क्या कमाता होगा?

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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तो राजा ने पूछा क्यों भाई प्रजापति जी मेरे साथ नगर चलोगे।

प्रजापति ने कहा- नगर चलकर क्या करूँगा राजा जी?

राजा- वहाँ चलना और वहाँ खुब मटकीया बनाना।

प्रजापति- फिर उन मटकीयों का क्या करूँगा?

राजा- अरे क्या करेगा? उन्हें बेचना खुब पैसा आयेगा तुम्हारे पास।

प्रजापति- फिर क्या करूंगा उस पैसे का?

राजा- अरे पैसे का क्या करेगा? अरे पैसा ही सब कुछ है।

प्रजापति- अच्छा राजन, अब आप मुझे ये बताईये कि उस पैसे से क्या करूंगा?

राजा- अरे फिर आराम से भगवान का भजन करना और फिर तुम आनन्द में रहना।

प्रजापति- "क्षमा करना हे राजन! पर आप मुझे ये बताईये कि अभी मैं क्या कर रहा हूं और हाँ पुरी ईमानदारी से बताना।

काफी सोच विचार किया राजा ने और मानो इस सवाल ने राजा को झकझोर दिया।

राजा- हाँ प्रजापति जी आप इस समय आराम से भगवान का भजन कर रहे हो और जहाँ तक मुझे दिख रहा है आप पुरे आनन्द में हो!

प्रजापति- हाँ राजन यही तो मैं आपसे कह रहा हूं कि आनन्द पैसे से प्राप्त नहीं किया जा सकता है!

राजा- हे प्रजापति जी कृपया कर के आप मुझे ये बताने कि कृपा करें की आनन्द की प्राप्ति कैसे होगी?

प्रजापति- बिल्कुल सावधान होकर सुनना और उस पर बहुत गहरा मंथन करना राजन! हाथों को उल्टा कर लिजिये!

राजा- वो कैसे?

प्रजापति- हे राजन! मांगो मत, देना सीखो और यदि आपने देना सीख लिया तो समझ लेना आपने आनन्द की राह पर कदम रख लिया! स्वार्थ को त्यागो परमार्थ को चुनो! हे राजन अधिकांशतः लोगों के दुःख का सबसे बड़ा कारण यही है कि जो कुछ भी उसके पास है वो उसमें सुखी नहीं है और बस जो नहीं है उसे पाने के चक्कर में दुःखी है! अरे भाई जो है उसमें खुश रहना सीख लो दुःख अपने आप चले जायेंगे और जो नहीं है क्यों उसके चक्कर में दुःखी रहते हो!

आत्मसंतोष से बड़ा कोई सुख नहीं और जिसके पास सन्तोष रूपी धन है वही सबसे बड़ा सुखी है और वही आनन्द में है और सही मायने में वही राजा है!

*⏰🔔⛳✅🎪विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम सभी प्राणियों को बहुत कुछ दे सकते है किंतु अधिक व्यक्तियों की लेने कि प्रवृत्ति है। आज हम सभी मनसे, विचारों से,धन से, वचनों से, शरीर से, फोन से, अन्य किसी प्रकार से बहुत कुछ दुसरो को दे सकते है।जब एक वृक्ष अपनी छाया,फल, फूल अपना सबकुछ सभी को प्रदान करता है तो क्या हम उस वृक्ष से गये बीते है। हां इतना ध्यान रखें कि जो भी हम वर्तमान में देंगे वह हमें ब्याज सहित भविष्य में प्राप्त होगा यह प्रकृति का अटूट नियम है।यह हम सभी के लिए चिन्तन करना आवश्यक है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 19 अप्रैल 2023

सकारात्मक शक्ति

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*सकारात्मक शक्ति*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सकारात्मक शक्ति ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🪔🔔 वैशाख शुक्ल एकम दिनांक 21 अप्रैल शुक्रवार 17 वें तीर्थंकर कुन्थुनाथजी सभी को सभी सुख प्रदान करने वाले कुन्थुनाथजी का जन्म तप व मोक्ष  कल्याणक महोत्सव है।✍️तीर्थंकर कुन्थुनाथ जी का है जन्म कल्याणक , हस्तिनापुर में हुआ था | आज के ही दिन कृतिका नक्षत्र में मातारानी श्रीकांता ने तीर्थंकर को जन्म दिया था |💡तप कल्याणक , हस्तिनापुर में हुआ था | आज के ही दिन पूर्वभव के स्मरण से वैराग्य हुआ कृतिका नक्षत्र में 1000 राजाओं के साथ जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की  थी |💯मोक्ष कल्याणक , शिखरजी में ज्ञानधर कूट पर हुआ था | आज के ही दिन रात्रि के पूर्व भाग में व कृतिका नक्षत्र में 1000 मुनिराजों के साथ मोक्ष पद को प्राप्त किया था | इस कूट से 96 कोड़ा कोड़ी 96 करोड़ 32 लाख 96 हजार 742 मुनि सिद्ध भये थे|आप सभी इष्टमित्रों के साथ सपरिवार शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली दिनांक  26, 28, 29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

👨‍👩‍👦‍👦अपने खेत  में एक जवान लड़का और उसका दादा मिट्टी खोद रहे थे।  वे मिट्टी को पलट रहे थे, उसकी गांठों को तोड़ रहे थे ताकि मिट्टी उस वर्ष की बुवाई के लिए अच्छे से तैयार हो सके। 

 उस काम में काफी कड़ी मेहनत थी लेकिन उनके सभी प्रयास एक अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए आवश्यक थे।
 बूढ़ा आदमी अपने 70 की उम्र  में भी अच्छी तरह से कड़ी मेहनत कर रहा थे। हा थकान से वो काफी हद तक हांफ भी रहे थे। हर प्रहार के जोर से उनके माथे से पसीना टपकता था लेकिन फिर भी वह शिकायत नहीं कर रहे थे ।

 उनका पोता जो महज 17 साल का था, तंदुरुस्त और ताकतवर।  वह मिट्टी को पलटने और गांठों को तोड़ने में लगती मेहनत और ताकत के लिए कोसता, फिर वहां खड़े होकर वह हांफता और थोड़ी देर के रुक जाता! थोड़ा आराम करने के बाद एक बार फिर से काम शुरू करने से पहले शिकायत करता।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 थोड़ी देर बाद, युवा पोता देखता है कि उसके दादाजी ने जितना काम कर जमीन को तैयार किया वो खुद ने कि तैयार की जमीन से बहोत ज्यादा हैं।

 "दादाजी, जब आप इतने बूढ़े हो फिर भी आपने मुझसे इतना अधिक काम कैसे किया?"  पोता अपने दादा से पूछता है।

 दादाजी ने उसे जो जवाब दिया उसकी उसे उम्मीद नहीं थी।

 "जब हम किसी काम को मुश्किल मानते है और उसके बारे में ज्यादा सोचते है तो सच में मुश्किल हो जाता है, और हम  अपना लक्ष्य समझकर जब उसे करते है और करते ही रहते है तो वह आसान हो जाता है। विघ्नों को भी झुकना पड़ता है।"

 पोता थोड़ा अचंभित हो जाता है इसलिए दादाजी अपनी बात जारी रखते हैं।

 "जब हम अपना समय यह सोचने में बिताते हैं कि कोई काम कितना कठिन है, और अभी कितना सारा बाकी है,तब हमारा मन बहाने बनाने लगता हैं। ओर हम सपनों की दुनिया में अपना बहुमूल्य समय खराब कर देते है।

  इन सभी चीजों के बारे में सोचना, अपने स्वयं के विचारों के बवंडर में फंसना ही उस काम को हमारे लिए बहोत ज्यादा कठिन बना देता है। इसलिए समझदारी इसी में है की वास्तविक रूप से पहली बार में मानसिक व शारीरिक कार्य किया जाए”

 "जब आप तय किए काम  के बारे में ज्यादा सोचते हैं और अपने दिमाग को नकारात्मक विचारों पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देते हैं, तो आपकी गति उस काम को करने के लिए अपने आप धीमी होते जाती है।  अगर आपको किसी भी काम के दौरान सकारात्मकता बनाए रखना चाहते है तो आपको तुरंत उस काम को शुरू करना चाहिए और अगर देखना और सोचना है तो जीतना आप आगे बढ़े यानी की जितना काम आपने अच्छे से खत्म कर लिया उसे देखे न की जो बाकी है उसे!उसके बारे में विचार करे ऐसा करने से एक सुखद और सकारात्मक एहसास आपको उस काम को लगातार करते रहने की ऊर्जा देता रहेगा। 

*🔔🎪⏰👪🪔विशेष -भव्य‌‌‌ आत्माओं, हम सभी को लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सुनियोजित रूप से मानसिक व शारीरिक मेहनत करना अनिवार्य है। अन्यथा चौरासी लाख योनियों में अनादि काल तक सुख भोगना पड़ेगा। वास्तव में चौरासी लाख योनियों में सुखाभास हो सकता है किंतु वास्तविक सुख नहीं है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 18 अप्रैल 2023

जैसे को तैसा

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*जैसे को तैसा*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 जैसे को तैसा ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🪔🔔 वैशाख कृष्ण चतुर्दशी दिनांक 19 अप्रैल बुधवार इक्कीसवें तीर्थंकर नमिनाथजी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह कल्याणक सम्मेदशिखरजी शाश्वत भूमि से हुआ था।आप सभी इष्टमित्रों के साथ सपरिवार शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🪔🔔 वैशाख शुक्ल एकम दिनांक 21 अप्रैल शुक्रवार 17 वें तीर्थंकर कुन्थुनाथजी सभी को सभी सुख प्रदान करने वाले कुन्थुनाथजी का जन्म तप व मोक्ष  कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली दिनांक  26, 28, 29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

✍️अरविंद नाम का किसान था, वह अपने खेतों में काम कर घर लौट रहा था। रास्ते में ही एक हलवाई की दुकान थी। उस दिन किसान ने कुछ ज्‍यादा काम कर लिया था और उसे भूख भी बहुत लग रही थी। ऐसे में जब वह हलवाई की दुकान के पास से गुजरा तो उसे मिठाइयों की खुशबू आने लगी। वह वहां खुद को रोके बिना नहीं रह पाया। लेकिन उस दिन उसके पास ज्यादा पैसे नहीं थे, ऐसे में वह मिठाई खरीद नहीं सकता था, तब वह कुछ देर वहीं खड़े होकर मिठाइयों की सुगंध का आनंद लेने लगा। 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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जब मिठाईवाले ने किसान को मजे से उसकी दुकान की मिठाइयों की खूशबू का आनंद लेते देखा, तब उससे किसान की खुशी देखी नहीं गई, वह किसान के पास गया और बोला, पैसे निकालो। किसान हैरान हुआ और बोला कि मैंने तो मिठाई नहीं खरीदी और न ही चखी है फिर पैसे किस बात के? हलवाई बोला, भले ही तुमने मिठाई नहीं ली हो, लेकिन मेरी बनाई मिठाई की खुशबू का आनंद तो लिया है। 
 
हलवाई बोला, मिठाई की खुशबू लेना मिठाई खाने के बराबर ही है तो तुम्हें अब इसके पैसे देने होंगे। 
 
किसान पहले थोड़ा घबराया, लेकिन फिर थोड़ी सूझबूझ दिखाते हुए उसने अपनी जेब से कुछ सिक्के निकाले और उन्‍हें दोनों हाथों के बीच में डालकर खनकाया। अब खनकाने के बाद किसान अपने रास्ते जाने लगा। 

हलवाई बोला, मेरे पैसे तो दो! किसान ने कहा, जैसे मिठाई की खुशबू का आनंद लेने मिठाई खाने के बराबर ही है, वैसे ही सिक्कों की खनक सुनना भी पैसे लेने के बराबर ही है। 

*🔔⛳✍️⏰✅विशेष :- भव्य आत्माओं, कई बार आपको जीवन में इस हलवाई के जैसे लोग भी मिल जाएंगे, ऐसे में आप घबराएं नहीं। सूझबूझ से बुद्धि विवेक पूर्वक जवाब दें और समस्या से इस किसान की तरह ही सीख दी जाएं।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 17 अप्रैल 2023

अनुभव से

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*अनुभव से*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒अनुभव से✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🪔🔔 वैशाख कृष्ण चतुर्दशी दिनांक 19 अप्रैल बुधवार बीसवें तीर्थंकर नमिनाथजी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली दिनांक 21, 26, 28, 29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

✍️रामधन नाम का एक पुराना व्यपारी था जो अपनी व्यापारी समझ के कारण दोनों हाथो से कमा रहा था | उसको कोई भी टक्कर नहीं दे सकता था | वो दूर-दूर से अनाज लाकर उसे शहर में बेचता था उसे बहुत सा लाभ होता था | वो अपनी इस कामयाबी से बहुत खुश था | इसलिये उसने सोचा व्यापार बढ़ाना चाहिये और उसने पड़ौसी राज्य में जाकर व्यापार करने की सोची |

दुसरे राज्य जाने के रास्ते का मानचित्र देखा गया जिसमे साफ-साफ था कि रास्ते में एक बहुत बड़ा मरुस्थल हैं | खबरों के अनुसार उस स्थान पर कई लुटेरे भी हैं | लेकिन बूढा व्यापारी कई सपने देख चूका था | उस पर दुसरे राज्य में जाकर धन कमाने की इच्छा प्रबल थी | उसने अपने कई किसान साथियों को लेकर प्रस्थान करने की ठान ली | बैलगाड़ियाँ तैयार की और उस पर अनाज लादा |इतना सारा माल था जैसे कोई राजा की शाही सवारी हो |
बूढ़े राम धन की टोली में कई लोग थे जिसमे जवान युवक भी थे और वृद्ध अनुभवी लोग,जो बरसो से राम धन के साथ काम कर रहे थे | जवानो के अनुसार अगर इस टोली का नेत्रृत्व कोई नव युवक करता तो अच्छा होता क्योकि यह वृद्ध रामधन तो धीरे-धीरे जायेगा और पता नही उस मरुस्थल में क्या-क्या देखना पड़ेगा |

तब कुछ नौ जवानो ने मिलकर अपनी अलग टोली बना ली और स्वयं का माल ले जाकर दुसरे राज्य में जाकर व्यापार करने की ठानी | रामधन को उसके चहेते लोगो ने इस बात की सुचना दी | तब राम धन ने कोई गंभीर प्रतिक्रिया नहीं दिखाई उसने कहा भाई सबको अपना फैसला लेने का हक़ हैं | अगर वो मेरे इस काम को छोड़ अपना शुरू करना चाहते हैं तो मुझे कोई आपत्ति नहीं हैं | और भी जो उनके साथ जाना चाहता हो जा सकता हैं |

अब दो अलग व्यापारियों की टोली बन चुकी थी जिसमे एक का नेत्रत्व वृद्ध रामधन कर रहे थे और दुसरे का नेत्रृत्व नव युवक गणपत कर रहे थे | दोनों की टोली में वृद्ध एवम नौ जवान दोनों सवार थे |

सफ़र शुरू हुआ | रामधन और गणपत अपनी अपनी टोली लेकर चल पड़े | थोड़ी दूर सब साथ –साथ ही चल रहे थे कि जवानो की टोली तेजी से आगे निकल पड़ी और रामधन और उनके साथी पीछे रह गये | रामधन की टोली के नौजवान इस धीमी गति से बिलकुल खुश नहीं थे और बार-बार रामधन को कोस रहे थे,कहते कि वो नौ जवानो की टोली तो कब की नगर की सीमा लांघ चुकी होगी और कुछ ही दिनों में मरुस्थल भी पार कर लेगी | और हम सभी इस बुढ़े के कारण भूखे मर जायेंगे |

धीरे-धीरे रामधन की टोली नगर की सीमा पार करके मरुस्थल के समीप पहुंच जाती हैं |तब रामधन सभी से कहते हैं यह मरुस्थल बहुत लंबा हैं और इसमें दूर दूर तक पानी की एक बूंद भी नहीं मिलेगी, इसलिये जितना हो सके पानी भर लो | और सबसे अहम् यह मरुस्थल लुटेरे और डाकुओं से भरा हुआ हैं इसलिये हमें यहां का सफ़र बिना रुके करना होगा | साथ ही हर समय चौकन्ना रहना होगा |

उन्हें मरुस्थल के पहले तक बहुत से पानी के गड्ढे मिल जाते हैं जिससे वे बहुत सारा पानी संग्रह कर लेते हैं | तब उन में से एक पूछता हैं कि इस रास्ते में पहले से ही इतने पानी के गड्ढे हैं,हमें एक भी गड्ढा तैयार नहीं करना पड़ा | तब रामधन मुंछो पर ताव देकर बोलते हैं इसलिए तो मैंने नव जवानों की उस टोली को आगे जाने दिया | यह सभी उन लोगो ने खुद के लिए तैयार किया होगा जिसका लाभ हम सभी को मिल रहा हैं | यह सुनकर कर टोली के विरोधी साथी खिजवा जाते हैं | और अन्य, रामधन के अनुभव की प्रशंसा करने लगते हैं | सभी रामधन के कहे अनुसार बंदोबस्त करके और आराम करके आगे बढ़ते हैं |

आगे बढ़ते हुए राम धन सभी को आगाह कर देता हैं कि अब हम सभी मरुस्थल में प्रवेश करने वाले हैं | जहाँ ना तो पानी मिलेगा, ना खाने को फल और ना ही ठहरने का स्थान और यह बहुत लम्बा भी हैं | हमें कई दिन भी लग सकते हैं | सभी रामधन की बात में हामी मिलाते हुए उसके पीछे हो लेते हैं |

अब वे सभी मरुस्थल में प्रवेश कर चुके थे | जहाँ बहुत ज्यादा गर्मी थी जैसे अलाव लिये चल रहे हो |आगे चलते-चलते उन्हें सामने से कुछ लोग आते दिखाई देते हैं | वे सभी रामधन को प्रणाम करते हैं और हाल चाल पूछते हैं | उन में से एक कहता हैं आप सभी व्यापारी लगते हो, काफी दूर से चले आ रहे हो, अगर कोई सेवा का अवसर देंगे तो हम सभी तत्पर हैं | उसकी बाते सुन रामधन हाथ जोड़कर कह देता हैं कि भाई हम सभी भले चंगे हैं, तुम्हारा धन्यवाद जो तुम सभी ने इतना सोचा | और वे अपने साथियों को लेकर आगे बढ़ जाते हैं | आगे बढ़ते ही टोली के कुछ नव युवक फिर से रामधन को कोसने लगते हैं कि जब वे लोग हमारी सहायता कर रहे हैं तो इस वृद्ध रामधन को क्या परेशानी हैं ?

कुछ दूर चलने के बाद फिर से कुछ लोग सामने से आते दिखाई देते हैं जिनके वस्त्र गिले थे और वे रामधन और उसके साथियों को कहते हैं कि आप सभी राहगीर लगते हो और इस मरुस्थल के सफर से थके लग रहे हो | अगर आप चाहो तो हम आपको पास के एक जंगल में ले चलते हैं | जहां बहुत पानी और खाने को फल हैं | साथ ही अभी वहां पर तेज बारिश भी हो रही हैं | उसी में हम सभी भीग गये थे | अगर आप सभी चाहे तो अपना सारा पानी फेक कर जंगल से नया पानी भर ले और पेट भर खाकर आराम कर ले | लेकिन रामधन साफ़ ना बोल कर अपने साथियों से जल्दी चलने को कह देते हैं |

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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अब टोली के कई नौ जवानो को रामधन पर बहुत गुस्सा आता हैं और वे उसके समीप आकर अपना सारा गुस्सा निकाल देते हैं और पूछते हैं कि क्यूँ वे उन भले लोगो की बात नहीं सुन रहे और क्यूँ हम सभी पर जुल्म कर रहे हैं | तब रामधन मुस्कुराते हुए कहते हैं कि वे सभी लुटेरे हैं और हमसे अपना पानी फिकवा कर हमें निसहाय करके लुट लेना चाहते हैं और हमें यही मरने छोड़ देना चाहते हैं | तब वे नव युवक गुस्से में दांत पिसते हुये कहते हैं कि सेठ जी तुम्हे ऐसा क्यूं लगता हैं ? तब रामधन कहते हैं कि तुम खुद देखो, इस मरुस्थल में कितनी गर्मी हैं, क्या यहां आसपास कोई जंगल हो भी सकता हैं , यहां की भूमि इतनी सुखी हैं कि दूर दूर तक बारिश ना होने का संकेत देती हैं | यहां एक परिंदे का घौसला तक नहीं तो फल फुल कैसे हो सकते हैं | और जरा निगाह उठाकर ऊपर देखो दूर-दूर तक कोई बारिश के बादल नहीं हैं, ना ही हवा में बारिश की ठंडक हैं, ना ही गीली मिटटी की खुशबु,तो कैसे उन लोगो की बातों पर यकीन किया जा सकता हैं ? मेरी बात मानो कुछ भी हो जाये अपना पानी मत फेंकना और ना ही कहीं भी रुकना |

कुछ देर आगे चलने के बाद उन्हें रास्ते में कई नरकंकाल और टूटी फूटी बैलगाड़ी मिलती हैं | वे सभी कंकाल गणपत की टोली के लोगो के थे | उन में से एक भी नहीं बचा था | उनकी ऐसी दशा देख सभी रोने लगते हैं क्यूंकि वे सभी उन्ही के साथी थे | तब रामधन कहते हैं कि जरुर इन लोगो ने तुम्हारे जैसे ही इन लुटेरो को अपना साथी समझा होगा और इसका परिणाम यह हुआ, आज उन्हें अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा | रामधन सभी को ढाढस बंधाते हुये कहते हैं हम सभी को भी यहां से जल्दी निकलना होगा क्यूंकि वे सभी लुटेरे अभी भी हमारे पीछे हैं | प्रार्थना करो कि हम सभी सही सलामत यहां से निकल जाये |

कहते अनुभव का व्यक्ति  जब काम आता हैं जब सर पर कोई बाल नहीं बचता अर्थात अनुभव उम्र बीतने और जीवन जीने के बाद ही मिलता हैं | अनुभव कभी भी पूर्वजो की जागीर में नहीं मिलता | जैसे इस कहानी में नव जवानो में जोश तो बहुत था लेकिन अनुभवी व्यक्ति  नहीं था जो कि रामधन स्वयं  था जिसका उसने सही समय पर इस्तेमाल किया और विपत्ति से सभी को निकाल कर ले गया |शिक्षा यही हैं कि किसी काम को करने के लिये जोश के साथ अनुभव होना भी अत्यंत आवश्यक हैं |

*विशेष : - भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम सभी कोई भी कार्य जोश के साथ प्रारंभ करते हैं।उस कार्य का अनुभव नहीं होने से हमें सफलता प्राप्त नहीं होती। अतः कार्य प्रारंभ करने से पहले उस कार्य के सभी पहलुओं पर विचार करके नियोजित तरीके से कार्य करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 16 अप्रैल 2023

सूझबूझ व परिश्रम

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*सूझबूझ व परिश्रम*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सूझबूझ व परिश्रम ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली दिनांक 19 को नमिनाथजी का मोक्ष, 21, 26, 28, 29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

👨‍👩‍👦‍👦एक गांव में एक धनी मनुष्य रहता था | उसका नाम भैरोमल था | भैरोमल के पास बहुत खेत थे| उसने बहुत से नौकर और मजदूर रख छोड़े थे | भैरोमल बहुत सुस्त और आलसी था | वह कभी अपने खेतों को देखने नहीं जाता था | अपने मजदूर और नौकरों को भेजकर ही वह काम कराता था |

मजदूर और नौकर मनमाना काम करते थे | वे लोग खेत पर तो थोड़ी देर काम करते थे , बाकी घर बैठे रहते थे | इधर-उधर घूमते या गप्पे उड़ाया करते थे ,खेत न तो ठिकाने से जोते जाते थे | न सिंचे जाते थे और न उनमें ठीक से खाद पडती थी | खेतों में बीज भी ठिकाने से नहीं पडते थे और उनकी घास(खरपतवार) तो कोई निकालता ही नहीं था | इसका नतीजा यह हुआ कि उपज धीरे-धीरे घटने लगी | थोड़े दिनों में भैरोमल गरीब होने लगा|

उसी गांव में रामप्रसाद नामक एक दूसरा किसान था | उसके पास खेत नहीं थे | वह भैरोमल के ही कुछ खेत लेकर खेती करता था | किंतु; था ! परिश्रमी | अपने मजदूरों के साथ वह खेत पर जाता था | डटकर परिश्रम करता था उसके खेत भली प्रकार जोते और सींचे जाते थे | अच्छी खाद पडती थी, घास निकाली जाती थी और बीज भी समय पर बोए जाते थे | उसके घर के लोग भी खेत पर काम करते थे | खेत में उपज अच्छी होती थी, लगान देखकर और खर्च करके भी वह बहुत अन्न बचा लेता था | थोड़े दिनों में रामप्रसाद धनी हो गया |

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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जब भैरोमल बहुत गरीब हो गया | उसके ऊपर महाजनों का ऋण हो गया तो उसे अपने खेत बेचने की आवश्यकता जान पड़ी | यह समाचार पाकर रामप्रसाद उसके पास और बोला – ” मैंने सुना है! कि आप अपने खेत बेचना चाहते हैं | कृपया करके आप मेरे हाथ अपने खेत बेचे मैं दूसरों से कम मुल्य नहीं दूंगा |”

भैरोमल ने आश्चर्य से पूछा – ” भाई रामप्रसाद मेरे पास इतने खेत भी मैं ऋणी हो गया किंतु: तुम्हारे पास धन कहां से आ गया है | तुम तो मेरे  थोड़े से खेत लेकर खेती करते हो उन खेतों की लगान भी तुम्हें देनी पड़ती है  और घर का भी काम चलाना पड़ता है | मेरे खेत खरीदने के लिए तुम्हें  किसने रुपये दिए?

रामप्रसाद ने कहा – ” मुझे रुपए किसी ने नहीं दिए! रुपए तो मैंने खेतों की उपज से ही बचा कर ही इकट्ठे किए हैं | आप की खेती और मेरी खेती में एक अंतर है | आप नौकरों मजदूरों आदि सब से काम करने के लिए जाओ-जाओ कहते हैं | आपकी संपत्ति भी चली गई | मैं मजदूरों और नौकरों से पहले काम करने को तैयार होकर उन्हें अपने साथ काम करने के लिए सदा “आओ” कह कर बुलाता हूं | इससे मेरे यहां संपत्ति आती है |”

अब भैरोमल बात समझ गया | उसने थोड़े से खेत रामप्रसाद के हाथ बेच कर अपना ऋण चुका दिया | और बाकी खेतों में परिश्रमपूर्वक खेती करने लगा | थोड़े ही दिनों में उसकी दशा सुधर गई | वह फिर सुखी और संपन्न हो गया |

*👪⏰🔔✍️✅विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम सभी परिश्रम कर रहे है किंतु सूझबूझ पूर्वक नहीं होने से हमें सफलता प्राप्त नहीं हो रही है।छोटा बड़ा कोई भी कार्य हो हमें सूझबूझ पूर्वक योजना बनाकर कार्य करना चाहिए।*

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शनिवार, 15 अप्रैल 2023

सहयोग से

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*सहयोग से*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
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*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सहयोग से ✍️🐒*

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*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली दिनांक 19 को नमिनाथजी का मोक्ष, 21, 26, 28, 29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

✍️💡👨‍👩‍👦‍👦एक बुज़ुर्ग शिक्षिका भीषण गर्मियों के दिन में बस में सवार हुई, पैरों के दर्द से बेहाल, लेकिन बस में सीट न देख कर जैसे – तैसे खड़ी हो गई। 

कुछ दूरी ही तय की थी  कि एक उम्रदराज औरत ने बड़े सम्मानपूर्वक आवाज़ दी, "आ जाइए मैडम, आप यहाँ बैठ जाएं” कहते हुए उसे अपनी सीट पर बैठा दिया। खुद वो गरीब सी औरत बस में खड़ी हो गई। मैडम ने दुआ दी, "बहुत-बहुत धन्यवाद, मेरी बुरी हालत थी सच में।"

  उस गरीब महिला के चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान फैल गई।
   कुछ देर बाद शिक्षिका के पास वाली सीट खाली हो गई।  लेकिन महिला ने एक और महिला को, जो एक छोटे बच्चे के साथ यात्रा कर रही थी और मुश्किल से बच्चे को ले जाने में सक्षम थी, को सीट पर बिठा दिया।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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     अगले पड़ाव पर बच्चे के साथ महिला भी उतर गई, सीट खाली हो गई, लेकिन नेकदिल महिला ने बैठने का लालच नहीं किया ।
बस में चढ़े एक कमजोर बूढ़े आदमी को बैठा दिया जो अभी - अभी बस में चढ़ा था।

सीट फिर से खाली हो गई। बस में अब गिनी – चुनी सवारियां ही रह गईं थीं। अब उस अध्यापिका ने महिला को अपने पास बिठाया और पूछा, "सीट कितनी बार खाली हुई है लेकिन आप लोगों को ही बैठाते रहे, खुद नहीं बैठे, क्या बात है?"
     महिला ने कहा, "मैडम, मैं एक मजदूर हूं, मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि मैं कुछ दान कर सकूं।"  तो मैं क्या करती हूं कि कहीं रास्ते से पत्थर उठाकर एक तरफ कर देती हूं,  कभी किसी जरूरतमंद को पानी पिला देती हूं, कभी बस में किसी के लिए सीट छोड़ देती हूं, फिर जब सामने वाला मुझे दुआएं देता है तो मैं अपनी गरीबी भूल जाती हूं ।

 दिन भर की थकान दूर हो जाती है ।  और तो और, जब मैं दोपहर में रोटी खाने के लिए बैठती हूं ना बाहर बेंच पर, तो ये पशु-पंछी - चिड़ियां पास आ के बैठ जाते हैं, रोटी के छोटे-छोटे टुकड़े करके डाल देती हूं । जब वे खुशी से चहकते हुए फुदकते हैं, तो उन  जीवों को देखकर मेरा पेट भर जाता है। पैसा रुपया न सही, सोचती हूं दुआएं तो मिल ही जाती है ना मुफ्त में। फायदा ही है ना और हमने लेकर भी क्या जाना है यहां से।

    शिक्षिका अवाक रह गई, एक अनपढ़ सी दिखने वाली महिला इतना बड़ा पाठ जो पढ़ा गई थी उसे ।
अगर दुनिया के आधे लोग ऐसी सोच को अपना लें तो धरती स्वर्ग बन जाएगी।

*👪✅🔔⛳⏰विशेष :- भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम सभी अपनी शक्ति अनुसार अन्य जीवों की मदत कर वह पुण्य संचय कर सकते है जिसकी वर्तमान समय में हमें आवश्यकता है।हम इस कलयुग में भी पुण्य अर्जित कर अपनी आत्मा को पवित्र कर सकते है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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