शुक्रवार, 21 अप्रैल 2023

दान दिवस का महत्व

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*🌲सुनहरा मौका🌲*.... 
*दान दिवस का महत्व ✍️🐒*
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⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞श्री चारित्र चक्रवर्ती शान्तीसागराय नम:⏰*
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒दान दिवस का महत्व ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*कल 22अप्रैल शनिवार जयपुर पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया दान दिवस है।*
*🪔🔔 वैशाख शुक्ल तृतीया 22 अप्रैल शनिवार जयपुर पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया दान दिवस है।* *आप सभी इष्टमित्रों के साथ सपरिवार शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली दिनांक  26, 28, 29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

*🌲दान दिवस अक्षय तृतीया पर सुनहरा मौका🌲*

*ओम ह्रीं नम:*
       *महानुभावों,*
      *🌲भारत सरकार के द्वारा देवस्थान विभाग जयपुर(राजस्थान) से रजिस्टर्ड संस्था सन् 2013 से सतत् सभी साधु(त्यागीव्रृतियो) व धर्म प्रेमियों के लिए "श्री शांतिसागर समाधि साधना सेवा केंद्र ट्रस्ट "  की संस्था की स्थापना की गई है । इस संस्था का मुख्य उद्देश्य धर्म की नींव मजबूत करना है। यह संस्था सत्य धर्म के पालन करने वाले जीव को, जीव की आत्मा को परमात्मा बनाने में सहयोगी है ।जो भी जीव किसी जीव के समाधि मरण में सहयोगी बनता है , उस जीव का नियम से समाधि मरण होता है । जिस जीव का समाधिमरण होता है वह जीव 1⃣2⃣ भव के अंदर 8⃣4⃣ लाख योनियो से छुटकारा पाकर सिद्यालय में अपना स्थान निर्धारित कर लेता है ।*जो इस संस्था से जुड़े हुए है, तथा जो व्यक्ति जुड़ना चाहते है।उनके लिए यह विशेष अवसर प्राप्त हो रहा है।अतः आप शक्ति के अनुसार सहयोग करते हुए अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग करें।*  

#https://youtu.be/jM9Qq3mEcMk
 
*➡️जानिए दान दिवस पर आपको क्या करना है । यह जानने के लिए उपरोक्त लिंक को क्लिक कीजिए और जानिए आचार्य 108 श्री विद्यासागरजी मुनिराज के धर्मप्रभावक शिष्य निर्यापक मुनिश्री सुधासागरजी के मुख से दान दिवस का महत्व*
  
       *🌞आप सभी के लिए यह एक सुनहरा अवसर प्राप्त हो रहा है आप यथाशक्ति इस अवसर पर जहां आपकी इच्छा हो या संस्था में दान कर पुण्यके सहभागी बने ।आप सभी से निवेदन है आप अपनी चंचला लक्ष्मी का स्वंय की आत्मा को परमात्मा बनाना चाहते हैं, तो आप इस संस्था में आज ही दान देकर अपना मोक्ष  की ट्रेन में अपना स्थान सुरक्षित करें ।*

*🕉व्यवहार में दान ही त्याग है। दान त्याग धर्म का व्यवहारिक रूप है। धानत राय ने पूजा में कहा भी है 'उत्तम त्याग कहो जग सारा, 'औषधि शास्त्र अभय आहारा,। निश्चय राग-द्वेष निरवारे, ज्ञाता दोनों दान संभारे'। निश्चय से राग-द्वेष निवारण ही त्याग है। व्यवहार में दान ही त्याग है।*

*👨‍👩‍👧‍👦प्रत्येक प्राणी को अपनी शक्ति के अनुसार दान अवश्य करना चाहिये। दान चार प्रकार के हैं- औषधि, ज्ञान, अभय व आहार। वृक्षादि एकेन्द्रिय प्राणी, गाय, भैंस आदि तिर्यंच प्राणी भी फल-फूल, दूध प्रदान करते हैं। हम तो पंचेन्द्रिय प्राणी हैं, मनुष्य भव में हैं। दान गृहस्थों का पुनीत कर्तव्य है। वर्तमान वातावरण में बढती हुई असमानता को सद् गृहस्थ दान के माध्यम से दूर कर सकते हैं।*

*🔯कभी हमारे देश में घी और दूध की नदियां बहती थी, परंतु आज कुछ भी नहीं है। क्या कारण है? अवश्य ही कोई मूल में गलती है। हमने त्याग, दान भूला दिया है। भारत कभी अतिथि सत्कार के लिए प्रसिद्ध था, आज हम इन बातों को भूलते जा रहे हैं।*
*🌲सम्यक्त्व चिंतामणि नामक ग्रंथ में लिखा है कि त्याग के बिना मुक्ति नहीं होती, त्याग के बिना हित का मार्ग नहीं है और त्याग ही लोकोत्तर अत्यंत श्रेष्ठ धर्म है। कर्म भूमि के मनुष्य का जीवन पारस्परिक सहयोग से ही चलता है। भूखे को भोजन देना, रोगी को औषध देना, अज्ञानी को ज्ञान देना और प्राण नाश की आशंका से भयभीत मनुष्य को अभय देना मनुष्य मात्र का कर्तव्य है। त्याग के द्वारा ही संसार के बङे-बङे काम चलते हैं।*

*➡"उत्तम त्याग करे जो कोई, भोग भूमि सुर शिवसुख होई"- उत्तम त्याग करने वाले व्यक्ति को मुक्ति सुंदरी स्वयंमेव वरण करती है तथा देवता भी उसे नमस्कार करते हैं।*

🤝 *किस्मत आपके हाथ में नहीं होती*
                 *परन्तु*
*निर्णय आपके हाथ में होता है*
*किस्मत आपका निर्णय नहीं बदल सकती*
                *परन्तु*
*आपका निर्णय आपकी किस्मत बदल सकता है*🤝
      🙏 🙏   🙏 🙏
*🙏बहुत से काम मनुष्य अकेला नही कर सकता। समाज की सेवा किसी स्वार्थ से नही की जाती । समाज की सेवा मनुष्य के जीवन का विनियोग हैं। समाज के लिए दान या सेवा मनुष्य का कर्तव्य है और कर्तव्य के लिए कोई मूल्य नही होता है।   इस पृथ्वी पर आपने मनुष्य भव प्राप्त किया है तो थोड़ा सा अपने आमदनी में से साधु (त्यागीव्रृतियो) सेवा में अवश्य खर्च करें ताकि आप भी  दिगंबर मुनि बन कर अपनी आत्मा का कल्याण कर सके।* 
*धन्यवाद ....धन्यवाद.... धन्यवाद*....
              .... *आप सभी का शुभचिंतक*....
                     *सेवाव्रतीस्वामीजी*
01.💐 Sevavrti Punjab National Bank*
*A/C No.5871000100010922*
*IFC Code PUNB 0587100* 
Durgapura JAIPUR (Rajasthan)
*सम्पर्क सूत्र:-*
*💐 1. 9461956111*  
*🕉 2. 09982411713*
          
*☸उपरोक्त नंबर पर आप पैसे भेजकर वाट्सएप द्वारा सूचना दे ताकि आपको रसीद भेज दी जाएगी।*
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*🙆‍♀अनंत काल से इस शरीर संरचना मे सहयोगी सभी जीवो का है हम सब पर कर्ज है।* 
*🌲इसीलिए तो प्रतिपल जयणा पूर्वक अहिंसामय जीवन जीना है हम सभीका फर्ज।*

*☸(प्रत्येक जीव के शरीर का एक एक कण किसी न किसी के सहयोग से पोषण प्राप्त करके बना है। हर एक जीव दुसरे जीव का सहयोगी है इस जगत मे। माता के गर्भ मे रहकर अपने शरीर को हम सभी ने पाया ये हमारी जननी का सहयोग है जिसने अपने शरीर से हमे सींचा है।*

*👨‍👩‍👧‍👦इस सम्पूर्ण जीवन मे कोई स्वेच्छा से सहयोग देते है तो कोई बिना स्वेच्छा के। कोई खुशी से तो कोई दुखी होकर। और इसी प्रकार कर्मबंधन करते है। पर सहयोग तो प्रतिपल प्राप्त होते ही आ रहा है। निगोद मे हो जीव या त्रसकाय, तिर्यच या मनुष्यकाय, स्वर्ग हो या नरक सभी ही जीव एकदूसरे का सहयोग पाते है। और साथ ही साथ इस प्रकृति के प्रत्येक कण और सम्पूर्ण आकाश और तारामंडल भी हमारे सहयोगी है अप्रत्यक्ष रूपमे।*

*🕉अब जब सहयोग प्राप्त किया है तो सहयोगी बनना भी तो हमारा फर्ज है। बस इसी लिए प्रत्येक क्षण प्रत्येक जीवो की जयणा रखना हमारा फर्ज बनता है। हमारे कारण कोई भी जीव की किसी भी प्रकार हिंसा न हो यह जानते और पालते हुए जीना ही धर्म है। जैन शास्त्र कहते है धर्म का अर्थ कोई प्रथा या पौराणिक आस्था के अनुसार चलना नही पर अपने आत्मा के स्वभाव मे रहना धर्म है। और हम सभी का स्वभाव एक दूसरे का सहयोगी बनना है और इस कारण किसीको भी हमारे कारण कोई पीड़ा न पहुचे यह ध्यान रखना धर्म है।*

*🤝इसीलिए कहा गया है परस्पराग्रहो जीवनाम जिसका अर्थ है हर एक जीव दूसरे जीवका उपकारी है। यानी हर एक जीव एकदूसरे का सहयोगी बनकर अपना जीवन व्यतीत करता है।इस प्रकार से समझे तो निश्चित रूप से जान लेंगे की किस प्रकार हम हिंसा करते जा रहे है प्रत्येक पल। अपने घर परिवार मे, अपने आसपास मे रहते लोगोके सहयोगी न बनना संघी पंचेन्द्रीय जीव की हिंसा, पशुपक्षी और अन्य तिर्यच जीवो की जयणा न पालकर अपने कार्य करना उन सभी जीवोकी हिंसा, देवी देवता या नारकी के जीवो प्रति दुर्भावना रखना उनके प्रति हिंसा, और जो मिला है उसमे संतुष्ट होकर इस प्रकृति के आभारी न होकर इस प्रकृति मे प्रतिपल अपने मन के कषायो को और दुर्भावो को प्रसारित करना समस्त लोक की हिंसा।*

*👨‍👩‍👧‍👦आओ आप और हम सभी मिलकर प्रतिदिन इस समस्त जगत के और सभी जीवोके उपकार के लिए प्रतिपल सदभावना भावे और प्रतिपल प्रत्येक जीवोकी जयणा करते हुए अपना कार्य करे।)*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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