मंगलवार, 25 अप्रैल 2023

लालच वश

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*लालच वश*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒लालच वश ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल 6 ,दिनांक 26 अप्रैल दिन बुधवार चतुर्थ तीर्थंकर अभिनंदन नाथ भगवानजी का गर्भ व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है । गर्भ कल्याणक महोत्सव शाश्वत भूमि अयोध्या नगरी में हुआ था। मोक्ष कल्याणक महोत्सव शाश्वत भूमि शिखरजी के आनन्द कूट पर हुआ था | आज के ही दिन प्रातःकाल पुनर्वसु नक्षत्र में मोक्ष पद की प्राप्ति हुई थी | इस कूट से 72 कोड़ा कोड़ी 70 करोड़ 70 लाख 42 हजार 700 मुनि सिद्ध भये | आप सभी इष्टमित्रों सहित सपरिवार शक्ति अनुसार उत्सव कर जीवन सार्थक करें।*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल अष्टमी दिनांक 28 अप्रैल शुक्रवार पंद्रहवें तीर्थंकर  धर्मनाथ भगवानजी का गर्भ  कल्याणक महोत्सव है 🛕*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली दिनांक  26, 28, 29  तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*

एक सेठ था। वह बर्तनों को किराये पर देता था और उनसे कमाई करता था। एक बार एक व्यक्ति को किराये पर बर्तन दिये। वह इन्सान उससे बर्तन ले गया और किराया दे गया। लेकिन जब उसने बर्तन वापस लौटाये तो दो-तीन बर्तन उसे फालतू दे दिये। वह सेठ पूछने लगा कि क्या बात है? तुमने ज्यादा बर्तन क्यों दिये हैं? वह आदमी कहने लगा कि आपने जो बर्तन दिये थे, ये बर्तन उसकी सन्तानें है इसलिए इन्हें भी आप सम्भाल लीजिए।

 वह सेठ बड़ा खुश हुआ कि यह अच्छा ग्राहक है। यह तो मुझे बहुत फायदा देगा। किराया तो मुझे मिलेगा ही, साथ में फालतू बर्तन भी मिलेंगे।

 इस तरह चन्द दिन बीते, वही आदमी फिर आ गया। लौटते समय फिर थोड़े बर्तन ज्यादा कर दिये और वही बात कही कि बर्तनों की सन्तान हुई है। सेठ बड़ा खुश हुआ, चुपचाप सब बर्तन रख लिए। 

           एक महीने का समय बाद  वह पुनः  सेठ के पास आया और कहने लगा कि मेरे यहां कुछ खास मेहमान आने वाले हैं, अतः कृपा करके आपके पास जो चांदी के बर्तन हैं, वे मुझे दे दीजिए।

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 पहले तो सेठ कुछ सोच में पड़ा, फिर सोचा कि मैंने पहले जितने बर्तन दिए, उनसे ज्यादा मुझे हासिल हुए। इस बार कुछ चांदी के बर्तन ज्यादा मिलेंगे। इसी तरह सोचकर उसने बर्तन दे दिये। समय बीतता गया, पर वह आदमी बर्तन लौटाने नहीं आया। अब सेठ बड़ा परेशान हुआ।

 वह उसके घर जा पहुंचा और उससे पूछा कि भले मानस! तूने वे बर्तन वापस नहीं किए। वह आदमी बहुत ही मायूस सा होकर कहने लगा कि सेठ जी, क्या करें, आपने जो चांदी के बर्तन दिए थे, उनकी तो मौत हो गई।

        सेठ बड़ा गुस्से में आया, कहने लगा कि क्या बात है, मैं तुझे अन्दर करवा दूंगा, कभी बर्तनों की भी मौत होती है। वह आदमी कहने लगा "सेठ जी! जब मैंने कहा था कि बर्तनों की संतानें हो रही हैं, उस वक्त आप सब ठीक मान रहे थे। यदि बर्तनों की सन्तान हो सकती है तो वे मर क्यों नहीं सकते?"

          इसी तरह संसार की हालत है। माया के पीछे इन्सान इतना अन्धा हो जाता है कि उसे कुछ समझ नहीं आता। भक्तजन हर कदम पर इन्सान को चेतावनी देते हैं कि हे इन्सान! तू जिन महात्माओं के, जिन सन्तजनों के वचनों को सुनता है, पढ़ता है, तू इनके ऊपर सत्य को जानकर दृढ़ भी हो जा । लालच में पड़कर सत्य का साथ न छोड़, नहीं तो बाद में पछताना पड़ेगा।

*⏰🔔✅🎪👣विशेष : - भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम सभी को कोई भी कुछ भी दे रहा है तो हम लालच वश उसे ग्रहण कर रहे है। हमें अपनी आवश्यकता व हैसियत के अनुसार कोई भी वस्तु या धन का संचय करना चाहिए। अन्यथा हमारा आचरण व्यवहार खराब होने से नियम से पतन को प्राप्त होते है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रतिसमय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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