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*अहंकारी*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 अहंकारी ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.चैत्र पूर्णिमा , गुरुवार दिनांक 06 अप्रैल 2023 को छठवें तीर्थंकर सभी के सूर्य जैसा प्रताप प्रदाता पद्मप्रभ भगवानजी का केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव है। हम सभी शक्ति अनुसार दर्शन पूजन अभिषेक शांतिधारा करके अपने पुण्य को गाढ़ा करें।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव अप्रैल माह में आने वाली 08, 14, 15,19,21,26,28,29 तारीख को है। अप्रैल माह में चार तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
✍️बूढी मां और लाचार बाप को बिलखता छोड़ कर एक ऋषि तपस्या करने के लिए वन में चले गए।तप करने के बाद जब ऋषि उठे तो देखा कि एक कौवा अपनी चोंच में एक चिड़िया का बच्चा दबाकर उड़ रहा है।
ऋषि ने क्रोध से कौवे की ओर देखा।ऋषि की आंखों से अग्नि की ज्वाला टूट पड़ी और कौवा जलकर वही खत्म हो गया।
अपनी इस सिद्धि को देकर ऋषि फूले नहीं समा रहे थे।अहंकार से भरे हुए ऋषि मठ की ओर चल पड़े और रास्ते में ऋषि एक दरवाजे पर जाकर भिक्षा के लिए खड़े हो गए।उनके बार-बार पुकारने पर कोई बाहर नहीं आया तो ऋषि क्रोधित हो गए।
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उन्होंने फिर पुकारा, पर इस बार आवाज आई, स्वामी जी ठहरिए, मैं अभी साधना कर रही हूं। जब साधना पूरी हो जाएगी तब मैं आपको भिक्षा दूंगी। अब ऋषि की क्रोध की सीमा पार हो गई थी।
ऋषि क्रोध में आकर बोले, दुष्टा! तुम साधना कर रही हो या एक ऋषि का अपमान कर रही हो। जानते नहीं कि इस अवहेलना का परिणाम क्या हो सकता है। भीतर से उत्तर आया, मैं जानती हूं आप शाप देना चाहेंगे किंतु मैं कोई कौवा नहीं जो आप के प्रकोप से जलकर नष्ट हो जाऊंगी।
जिसने जीवन भर पाला है मैं उस मां को छोड़ कर तुम्हें भिक्षा कैसे दे सकती हूं। ऋषि का सिद्धि का अहंकार चूर चूर हो गया| कुछ देर बाद वह महिला बाहर आई तो ऋषि ने आश्चर्य पूर्वक महिला से पूछा। अब कौन सी साधना करती है जिससे तुम मेरे बारे में सब कुछ जानती हो।
उस महिला ने कहा, महात्मन, मैं अपने पति, बच्चे, परिवार और समाज के प्रति कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करती हूं। यही मेरी सिद्धि है..!!
*🔔✅🪔🙏🎪विशेष -भव्य आत्माओं, आज वर्तमान में हमें कुछ सिध्दियां प्राप्त नहीं हो रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि आज हम अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन नहीं कर रहे है। अतः हम सभी को स्व निरीक्षण करते हुए सबसे पहले स्वयं का सुधार करना आवश्यक है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ हमेशा प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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