शनिवार, 31 दिसंबर 2022

राजा का भरोसेमंद नौकर

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 राजा का भरोसेमंद नौकर ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. पौष शुक्ल  दसमी दिनांक एक जनवरी  2023 रविवार  को सोलवें तीर्थंकर सभी को आंतरिक शांति प्रदान करने वाले   1008 श्री शांतिनाथ भगवान जी का ज्ञान  कल्याणक  महोत्सव हैं। तीर्थंकर शांतिनाथ जी का  ज्ञान कल्याणक , हस्तिनापुर में हुआ था | आज के ही दिन नंद्दावर्त वृक्ष के नीचे केवलज्ञान की प्राप्ति हुई थी |*
*🕉️2. पौष शुक्ल  ग्यारस दिनांक दो जनवरी 2023 सोमवार  को दूसरे तीर्थंकर सभी को सहनशीलता प्रदान करने वाले   1008 श्री  अजित नाथ भगवान जी का ज्ञान  कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

एक राजा था और उसका एक  बड़ा प्यारा  नौकर था।  नौकर से उसे बहुत प्रेम था और उस नौकर के भक्ति-भाव से, उसके अनन्य समर्पण से कि राजा उसे अपने ही कमरे में सुलाता था। उस पर ही एक भरोसा था उसको।

दोनों एक दिन शिकार करके लौटते थे, राह भटक गये, भूख लगी। एक वृक्ष के नीचे दोनों खड़े थे। एक फल लगा था–अपरिचित, अनजान। राजा ने तोड़ा। जैसी उसकी आदत थी, चाकू निकालकर उसने एक टुकड़ा काटकर अपने नौकर को दिया, जो वह हमेशा देता था, पहले उसे देता था फिर खुद खाता था। नौकर ने खाया। बड़े अहोभाव से कहा कि “एक कली और…! एक कली और दे दी, उसने फिर कहा, “एक कली और…!’ तो तीन हिस्से वह ले चुका, एक हिस्सा ही बचा। राजा ने कहा, “अब एक मेरे लिए छोड़।’ पर उसने कहा कि नहीं मालिक, यह फल तो पूरा ही मैं खाऊंगा। राजा को भी जिज्ञासा बढ़ी कि इतना मधुर फल है, ऐसा इसने कभी आग्रह नहीं किया! तो छीना-झपटी होने लगी। लेकिन नौकर ने छीन ही लिया उसके हाथ से।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

उसने कहा, “रुक! अब यह जरूरत से ज्यादा हो गयी बात। तीन हिस्से तू खा चुका। एक ही फल है वृक्ष पर। मैं भी भूखा हूं। और मेरे मन में भी जिज्ञासा उठती है कि इतनी तो तूने कभी किसी चीज के लिए मांग नहीं की। यह मुझे दे दे वापस।

नौकर ने कहा “मालिक, मत लें, मुझे खा लेने दें।’

पर राजा न माना तो उसे देना पड़ा। उसने चखा तो वह तो जहर था। ऐसी कड़वी चीज उसने अपने जीवन में कभी चखी ही न थी। उसने कहा, “पागल! यह तो जहर है, तूने कहा क्यों नहीं।’

तो उसने कहा कि जिन हाथों से इतने स्वादिष्ट फल मिले, उन हाथों से एक कड़वे फल की क्या शिकायत!

शिकायत दूर ले जाएगी, धन्यवाद पास लाएगा।

थोड़ा सोचो: उस दिन वह नौकर राजा के हृदय के जितने करीब आ गया…। राजा रोने लगा। वह तो बिलकुल जहर था फल। वह तो मुंह में ले जाने योग्य न था। और उसने इतने अहोभाव से, इतनी प्रसन्नता से उसे स्वीकार किया, छीना-झपटी की! वह नहीं चाहता था कि राजा चखे। क्योंकि चखेगा तो राजा को पता चल जाएगा कि फल कड़वा था। यह तो कहने का ही एक ढंग हो जाएगा कि फल कड़वा है–न कहा लेकिन कह दिया। यह तो शिकायत हो जाएगी। इसलिए छीन-झपटी की। जिन हाथों से इतने मधुर फल मिले, उस हाथ से एक कड़वे फल की क्या चर्चा करनी! यह बात ही उठाने की नहीं है।

आपने ने इतना दिया है कि जो शिकायत करता है वह अंधा है।

थोड़ी लहरें आती हैं, उन लहरों में डूबो! और लहरें आएगी।

धन्यवाद, अनुग्रह का भाव: बड़ी लहरें आएगी। एक दिन सागर का सागर तुम में उतर आएगा। एक दिन तुम्हें बहाकर ले जाएगा। सब कुछ-किनारे लग जाएंगे।

*विशेष : -भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हमें कुछ निमित्तो के माध्यम से बहुत कुछ प्राप्त हो रहा है।वह प्राप्त फल हमारे कर्म व पुरुषार्थ पर आधारित है। हमें अपनी आवश्यकता अनुसार फल प्राप्त नहीं होने पर हमें अपने पुरुषार्थ की कमी को दूर करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 30 दिसंबर 2022

राजा के गुण

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 राजा के गुण ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. पौष शुक्ल  दसमी दिनांक एक जनवरी  2023 रविवार  को सोलवें तीर्थंकर सभी को आंतरिक शांति प्रदान करने वाले   1008 श्री शांतिनाथ भगवान जी का ज्ञान  कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*🕉️2. पौष शुक्ल  ग्यारस दिनांक दो जनवरी 2023 सोमवार  को दूसरे तीर्थंकर सभी को सहनशीलता प्रदान करने वाले   1008 श्री  अजितनाथ भगवान जी का ज्ञान  कल्याणक  महोत्सव हैं।*
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बहुत समय पहले की बात है, एक राजा ने अपने बेटे को अच्छा शासक बनाने के मकसद से  गुरुदेव के पास भेजा।

 गुरुदेव ने कुछ दिन अपने साथ रखकर कुछ आवश्यक शिक्षा प्रदान करने  के बाद युवराज गुर्वित को कुछ समय के लिए जंगल में अकेले रहने के लिए भेज दिया।

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जब युवराज गुर्वित लौटे तो गुरुदेव  ने पूछा, “बताओ तुमने जंगल में क्या सुना?”

“मैंने कोयल की कूक सुनी, नदियों की कल-कल सुनी, पत्तियों की सरसराहट सुनी, मधुमक्खियों की गुंजन सुनी, मैंने झींगुरों का शोर सुना, हवा की धुन सुनी…” युवराज अपना अनुभव सुनाता चला गया।

जब युवराज गुर्वित ने अपनी बात पूरी कर ली तब गुरुदेव  बोले, “अच्छा है, अब तुम एक बार फिर जंगल जाओ और जब तक तुम्हे कुछ नयी आवाजें ना सुनाई दे दें तब तक मत लौटना।

कुछ समय जंगल में बिताने के बाद युवराज अपने राज्य को लौटना चाहता था, पर गुरुदेव की बात को टाल भी नहीं सकता था, इसलिए वह बेमन ही जंगल की ओर बढ़ चला।

कुछ दिन गुजर गए पर युवराज को कोई नयी आवाज़ नहीं सुनाई दी। वह परेशान हो उठा। उसने निश्चय किया कि अब वह हर आवाज़ को बड़े ध्यान से सुनेगा!

फिर एक सुबह उसे कुछ अनजानी सी आवाजें हल्की-हल्की सुनाई देने लगीं। इस घटना के कुछ दिनों बाद वह गुरुदेव  के पास वापस लौटा और बोला, “पहले ती मुझे वही ध्वनियाँ सुनाई दीं जो पहले देती थीं, लेकिन एक दिन जब मैंने बहुत ध्यान से सुनना शुरू किया तो मुझे वो सुनाई देने लगा जो पहले कभी नहीं सुनाई दिया था…. मुझे कलियों के खिलने की आवाज सुनाई देने लगी, मुझे धरती पर पड़ती सूर्य की किरणों, तितलियों के गीत, और घांस द्वारा सुबह की ओस पीने की ध्वनियाँ सुनाएं देने लगीं….”

यह सुनकर गुरुदेव  खुश हो गए और मुस्कुराकर बोले, “अनसुने को सुनने की क्षमता होना एक अच्छे राजा की निशानी है। क्योंकि जब कोई शासक अपने लोगों के दिल की बात सुनना सीख लेता है, बिना उनके बोले, उनकी भावनाओं को समझ लेता है, जो दर्द बयाँ न किया गया हो उसे समझ लेता है, अपने लोगों की अनकही शिकायतों को सुन लेता है, केवल वही अपनी प्रजा का विश्वास जीत सकता है, कुछ गलत होने पर उसे समझ सकता है और अपने नागरिकों की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरी कर सकता है।”

*विशेष :-भव्य‌‌‌ आत्माओं,अगर हमें अपनी फील्ड का लीडर बनना है तो हमें भी वो सुनना सीखना चाहिए जो नहीं कहा गया है। यानी हमें उस युवराज की तरह बिलकुल अलर्ट हो कर अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए कार्य करना चाहिए और अपने साथ काम करने वालों की ज़रूरतों और भावनाओं का ख्याल रखते हुए उनमें संस्कारों को मजबूत करना चाहिए तभी हम खुद को एक ट्रू लीडर की तरह स्थापित कर सकेंगे।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 29 दिसंबर 2022

सोशल मीडिया

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
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*💪👩‍🚒सोशल मीडिया ✍️🐒*

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*🕉️1. पौष शुक्ल  दसमी दिनांक एक जनवरी  2023 रविवार  को सोलवें तीर्थंकर सभी को आंतरिक शांति प्रदान करने वाले   1008 श्री शांतिनाथ भगवान जी का ज्ञान  कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*🕉️2. पौष शुक्ल  ग्यारस दिनांक दो जनवरी 2023 सोमवार  को दूसरे तीर्थंकर सभी को सहनशीलता प्रदान करने वाले   1008 श्री  अजितनाथ भगवान जी का ज्ञान  कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

अभय एक सीधा-साधा लड़का था। ग्रेजुएशन की पढाई करने के लिए अब उसे अपना गाँव छोड़कर शहर में दाखिला लेना था। किसान पिता ने एक-एक पैसा जोड़कर अभय के लिए शहर में सारी व्यवस्था कर दी और ये सोचकर एक स्मार्ट फोन भी दिला दिया कि ऑनलाइन पढाई करने में इसका उपयोग होगा।

स्वभाव से अंतर्मुखी अभय को अब अपने सपनों को पूरा करने के लिए बहुत मेहनत करनी थी। अपने संकोची स्वभाव के कारण  वह शहर के बच्चों के साथ उतना घुल-मिल नहीं पाया और दोस्त बनाने के लिए उसने सोशल मीडिया का सहारा लिया। ऐसे ही फेसबुक पर उसी शहर के मयंक नाम के एक लड़के से उसकी दोस्ती हो गई। मयंक का प्रोफाइल अभय को बहुत पसंद आया था। दोनों के बीच मैसेजेस का आदान-प्रदान होना शुरू हो गया।

पढाई के लिए लिए गए फोन का प्रयोग अब दोस्ती और मनोरंजक वीडियोस देखने में होने लगा। यहाँ तक की क्लास करते हुए भी अभय का ध्यान मोबाइल स्क्रीन पर ही लगा रहता।

मयंक और अभय की दोस्ती भी गहरी होती गयी, यहाँ तक कि मयंक कई बार उसका फ़ोन भी रिचार्ज करा देता।

देखते-देखते उनकी फ्रेंडशिप को दो-तीन महीने बीत गए, पर अभी भी उनकी एक बार भी मुलाक़ात नहीं हुई थी।

फिर एक दिन मयंक ने अभय को एक जगह बुलाने के लिए कॉल की, ” यार एक बहुत अच्छी फायदेमंद आफर है, तू सुबह दस बजे Whatsapp किये पते पर आ जा, अब पढाई के साथ -साथ तू हर महीने 5000 रु भी कमा सकता है, और इसी बहाने हम दोनों पहली बार हम मिल भी लेंगे।”

अभय की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था, दोस्त से मिलने की ख़ुशी और पैसा कमाने का अवसर मिलने की बात से वो फूला नहीं समा रहा था। अगले दिन वह सुबह जल्दी उठा और तैयार होकर मयंक के दिए पते की ओर बढ़ गया। वो जगह शहर से कुछ दूर थी, इसलिए अभय उधर जा रही एक बस पर सवार हो गया। एक घंटे के सफ़र के बाद आखिरकार वो पूछते-पाछते दिए हुए पते पर पहुंचा।

अभी वह दरवाजा खटखटाता की इससे पहले एक कार उसके पास आकर रुकी। उसमे से पैंताली-पचास साल का एक अधेड़ व्यक्ति बाहर निकला और बोला, “सुनो बेटा क्या तुम्हारा नाम अभय है?

“जी अंकल”, अभय बोला।

“मुझे मयंक ने भेजा है, दरअसल, अचानक मीटिंग का स्थान बदल गया है, आओ कार में बैठो मैं तुम्हे सही जगह ले चलता हूँ।”, व्यक्ति बोला।

अभय फौरन कार में बैठ गया और वे आगे बढ़ गए।

व्यक्ति ने अभय की केयर करते हुए उसे पीने के लिए फ्रूटी दी!

फ्रूटी पीने के करीब तीन घंटे बाद जब अभय की आँखें खुलीं तो उसने खुद को एक पार्क में लेटा हुआ पाया, उसे पेट के एक तरफ काफी दर्द महसूस हो रहा था, मोबाइल और पैसे भी गायब थे।

कुछ देर तक तो उसे समझ ही नहीं आया कि वो आखिर कार से यहाँ कैसे पहुँच गया। फिर उसने शर्ट उठा कर दर्द वाली जगह देखी तो वहां एक चीरा लगा हुआ था.

अभय का दिल तेजी से धड़कने लगा। वह समझ चुका था कि उसके साथ कुछ बहुत गलत हो चुका है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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वह फ़ौरन भाग कर डॉक्टर के पास गया।

पर डॉक्टर ने जो बात उसे बताई, उसे सुनकर उसके पैरों तले जमीन ही खिसक गई। उसके शरीर से एक किडनी गायब थी। अब उसकी “काटो तो खून नहीं” वाली हालत हो गई।

सोचने लगा, “क्या सपने लेकर गांव से शहर आया था। अब अपने पिताजी को क्या जवाब देगा।”

वह भागा-भागा पुलिस के थाने पहुंचा। वहां जाकर तो उसके सामने डिजिटल दुनिया की सारी सच्चाई सामने आ गई। यह जो फेसबुक पर मयंक का प्रोफाइल था वह कोई युवा नहीं बल्कि वही अधेड़ व्यक्ति था जिसने उसे कार में बैठाया था।

वह आकर्षक अकाउंट बनाकर अभय जैसे लोगों को, जो सफलता शॉर्टकट में चाहते थे और ऐसे छलावे पे विश्वाश करते थे, फांसता था। फिर धीरे-धीरे पर्सनल लाइफ में घुसकर उन्हें नौकरी का झांसा देकर बुलाता। उसके बाद शरीर के अंगों की चोरी करता था। ऐसे कितने सारे केस उसके नाम थे।

सोशल मीडिया पर सोशल ना होकर अगर अभय वास्तविक  दुनिया में सोशल होता तो शायद ऐसी नौबत ही नहीं आती। स्क्रीन के पीछे का सच अब आईने की तरह साफ हो चुका था। इतनी बड़ी ठोकर लगने के बाद अब उसने मोबाइल स्क्रीन पर अपना समय गवाना बंद कर दिया। वास्तविक और आभासी दुनिया के बीच का फर्क अब उसकी समझ में आ चुका था ,पर बहुत कुछ खोने के बाद।

 *👨‍👩‍👦‍👦🐒🔔👩‍🦰👦विशेष : -भव्य‌‌‌ आत्माओं,ऑनलाइन वर्ल्ड में किसी पर आँख मूँद कर विश्वास करना आपको मुसीबत में डाल सकता है। इसलिए सोशल मीडिया और इन्टरनेट को प्रयोग पूरी सावधानी के साथ आवश्यक उपयोग करें ताकि आपको कभी अभय की तरह पछताना ना पड़े।*

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बुधवार, 28 दिसंबर 2022

अनौखी मांग

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एक धनवान पिता ने अदालत में दाखिल किया अपने बेटे पर महत्वपूर्ण केस ।ताकि अपने बेटे की शिकायत कोर्ट में कर सके।

 जज साहब ने पूछा,आपको अपने बेटे से क्या शिकायत है।बूढ़े बाप ने कहा, की मैं अपने बेटे से उसकी हैसियत के हिसाब से हर महीने का खर्चा मांगना चाहता हूं। 

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जज साहब ने कहा, वो तो आपका हक है। 
इसमें सुनवाई की क्या जरूरत है।आपके बेटे को हर महीने, खर्च देना चाहिए।

बाप ने कहा की मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है। लेकिन फिर भी मुझे हर महीने, अपने बेटे से बहुत कुछ लेना चाहता हूं। 
वो चाहे कुछ भी हो, कुछ समय ही क्यों न हो।

जज साहब आश्चर्यचकित होकर,
 बाप से कहने लगा, 
आप इतने मालदार हो, 
तो आपको बेटे से  क्या आवश्यकता है। 

बाप ने अपने बेटे का नाम और पता देते हुए, जज साहब से कहा,  
की आप मेरे बेटे को अदालत में बुलाएंगे।तो आपको बहुत कुछ पता चल जाएगा।

जब बेटा अदालत में आया,तो जज साहब ने बेटे से कहा की आपके पिता जी, आपसे हर महीना खर्चा लेना चाहते हैं, चाहे वह कम क्यों न हो। 

बेटा भी जज साहब की बात सुनकर,आश्चर्यचकित हो गया कहने लगा कि मेरे पिता जी बहुत अमीर हैं, उनके पास पैसे की भला क्या जरूरत है। 

जज साहब ने कहा,यह आपके पिता की मांग है और वह अपने में स्वतंत्र है।पिता ने जज साहब से कहा की आप मेरे बेटे से कहिए की वह मेरे साथ हर महीने एक समय घर पर भोजन करें व तीन महिने में एक बार एक दिन हमारे साथ सपरिवार धार्मिक स्थल पर बिताए। इन दोनों कार्यों में बिल्कुल भी देरी न करेगा व किस दिन क्या कार्य होगा इसके लिए वह स्वतंत्र रहेगा। 

फिर जज साहब ने  बूढ़े आदमी के बेटे से कहा की तुम हर महीने एक समय साथ में भोजन करोगे और तीन महिने में एक दिन दिगंबर मंदिर या जैन क्षेत्र पर सपरिवार भगवान के भजन कीर्तन में सहयोगी बनोगे।

ये आपको अदालत हुक्म देती है। 

मुकदमा खत्म होने के बाद,
 जज साहब बूढ़े आदमी को अपने पास बुलाते हैं।

उन्होंने बूढ़े आदमी से पूछा की, अगर आप बुरा न मानें, तो मैं आप से एक बात पूछूंगा।
आपने बेटे के खिलाफ यह मुकदमा क्यों किया, आप तो बहुत अमीर आदमी हो और ये इतनी छोटी सी आवश्यकता। 
बूढ़े आदमी ने रोते हुए कहा:जज साहब मैं अपने बेटे का चेहरा देखने के लिए तरस गया था। वह अपने कामों में इतना व्यस्त रहता है कि एक जमाना गुजर गया, उससे मिला नहीं और ना ही बात हुई, ना आमने सामने और न फोन पर।
मुझे अपने बेटे से बहुत चाहत है, इसलिए मैंने उस पर ये मुकदमा किया था, ताकि हर महीने मैं उसके साथ भोजन कर  सकूं और मैं उसको देख कर खुश हो लिया करूंगा।ये बात सुनकर जज की भी आंखों में आंसू आ गए। 

जज साहब ने बूढ़े आदमी से कहा की अगर आप पहले बताते, तो मैं उसको नज़रअंदाज और ख्याल न रखने के जुल्म में सजा करा देता। 

*बूढ़े बाप ने जज साहब की तरफ मुस्कराते हुए देखा, और कहा अगर आप सजा कराते, तो मेरे लिए ये दुख की बात होती, क्योंकि सच में उससे मैं बहुत प्यार करता हूं और मैं हरगिज नहीं चाहूंगा कि मेरी वजह से मेरे बेटे को कोई सजा मिले या उसे कोई तकलीफ हो। मैंने यह दोनों शर्त इसलिए रखीं की उसके भी चार पुत्र है मैंने जो अनुभव किया उसपर वह समय ना आवे।*

*⏰👪🎪🔔🔑विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं,इस कहानी से ये प्रेरणा मिलती है, मां बाप को आपके पैसे की जरूरत नहीं है, उनको आपके समय की जरूरत है। वक्त के रहते उनसे रोज बातें कर लिया करो। आपका कुछ नहीं जाएगा, परंतु आपको अपने माँ बाप का आशीर्वाद जरूर प्राप्त होगा। वरना एक दिन याद करके पछताने के अतिरिक्त कुछ शेष नहीं होगा। अतः आप अपने माता पिता का ध्यान अवश्य ही रखें। अन्यथा वहीं कर्म आपके आयु के अंतिम समय में आपसे बहुत कुछ कहेगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
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मंगलवार, 27 दिसंबर 2022

लालच का फल

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*💪👩‍🚒लालच का फल ✍️🐒*

किसी गांव में एक गड़रिया रहता था। वह लालची स्वभाव का था, हमेशा यही सोचा करता था कि किस प्रकार वह गांव में सबसे अमीर हो जाये। उसके पास कुछ बकरियां और उनके बच्चे थे। जो उसकी जीविका के साधन थे।

एक बार वह गांव से दूर जंगल के पास पहाड़ी पर अपनी बकरियों को चराने ले गया। अच्छी घास ढूँढने के चक्कर में आज वो एक नए रास्ते पर निकल पड़ा। अभी वह कुछ ही दूर आगे बढ़ा था कि तभी अचानक तेज बारिश होने लगी और तूफानी हवाएं चलने लगीं। तूफान से बचने के लिए गड़रिया कोई सुरक्षित स्थान ढूँढने लगा। उसे कुछ ऊँचाई पर एक गुफा दिखाई दी। गड़रिया बकरियों को वहीँ बाँध उस जगह का जायजा लेने पहुंचा तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गयीं। वहां बहुत सारी जंगली भेड़ें मौजूद थीं।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

मोटी- तगड़ी भेड़ों को देखकर गड़रिये को लालच आ गया। उसने सोचा कि अगर ये भेड़ें मेरी हो जाएं तो मैं गांव में सबसे अमीर हो जाऊंगा। इतनी अच्छी और इतनी ज्यादा भेड़ें तो आस-पास के कई गाँवों में किसी के पास नहीं हैं।

उसने मन ही मन सोचा कि मौका अच्छा है मैं कुछ ही देर में इन्हें बहला-फुसलाकर अपना बना लूंगा। फिर इन्हें साथ लेकर गांव चला जाऊंगा।

यही सोचते हुए वह वापस नीचे उतरा। बारिश में भीगती अपनी दुबली-पतली कमजोर बकरियों को देखकर उसने सोचा कि अब जब मेरे पास इतनी सारी हट्टी-कट्टी भेडें हैं तो मुझे इन बकरियों की क्या ज़रुरत उसने फ़ौरन बकरियों को खोल दिया और बारिश में भीगने की परवाह किये बगैर कुछ रस्सियों की मदद से घास का एक बड़ा गट्ठर तैयार कर लिया।

गट्ठर लेकर वह एक बार फिर गुफा में पहुंचा और काफी देर तक उन भेड़ों को अपने हाथ से हरी-हरी घास खिलाता रहा। जब तूफान थम गया, तो वह बाहर निकला। उसने देखा कि उसकी सारी बकरियां उस स्थान से कहीं और जा चुकी थीं।

गड़ेरिये को इन बकरियों के जाने का कोई अफ़सोस नहीं था, बल्कि वह खुश था कि आज उसे मुफ्त में एक साथ इतनी अच्छी भेडें मिल गयी हैं।  यही सोचते-सोचते वह वापस गुफा की ओर मुड़ा लेकिन ये क्या… बारिश थमते ही भेडें वहां से निकल कर दूसरी तरफ जान लगीं।  वह तेजी से दौड़कर उनके पास पहुंचा और उन्हें अपने साथ ले जाने की कोशिश करने लगा। पर भेडें बहुत थीं, वह अकेला उन्हें नियंत्रित नहीं कर सकता था… कुछ ही देर में सारी भेडें उसकी आँखों से ओझल हो गयीं।

यह सब देख गड़रिये को गुस्सा आ गया। उसने चिल्लाकर बोला 

तुम्हारे लिए मैंने अपनी बकरियों को बारिश में बाहर छोड़ दिया। इतनी मेहनत से घास काट कर खिलाई… और तुम सब मुझे  छोड़ कर चली गयी… सचमुच कितनी स्वार्थी हो तुम सब।

गड़रिया बदहवास होकर वहीं बैठ गया। गुस्सा शांत होने पर उसे समझ आ गया कि दरअसल स्वार्थी वो भेडें नहीं बल्कि वो खुद है, जिसने भेड़ों की लालच में आकर अपनी बकरियां भी खो दीं।

*👪🎪🔔⏰🔑विशेष : -भव्य‌‌‌ आत्माओं, लोभ का फल नामक यह कहानी हमें सिखाती है कि जो व्यक्ति स्वार्थ और लोभ में फंसकर अपनों का साथ छोड़ता है, उसका कोई अपना नहीं बनता और अंत में उसे पछताना ही पड़ता है। अतः समय रहते हुए अपनी स्वयं की सुरक्षा आवश्यक है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 26 दिसंबर 2022

ईमानदारी से या....

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 ईमानदारी से या.... ✍️🐒*


नीलेश और कमल दोनों एक ही कक्षा में पढ़ते थे। पर दोनों के स्वभाव में बहुत अंतर था। जहां कमल शांत स्वभाव का था, वहीं नीलेश को हर समय कोई ना कोई शरारत सूझते रहती थी। पढ़ाई में उसका मन ही नहीं लगता था। वही कमल पढ़ाई में अव्वल था। शिक्षक के हर सवालों का जवाब वह आसानी से दे देता था। नीलेश को इसी चीज की तकलीफ थी। खुद पढ़ाई में ध्यान ना लगा कर कमल के हर क्रियाकलापों की कापी करना ही उसका काम था। कैसे उसे पीछे धकेले और नीचा दिखाए, बस इसी चक्कर में वह हमेशा लगा रहता था। इन सबके बीच में इसका सबसे बुरा असर उसकी खुद की पढ़ाई पर पड़ रहा था।

इसी तरह एक बार लंच टाइम में जब कमल थोड़ी देर के लिए कक्षा से बाहर गया तो नीलेश ने उसके स्कूल बैग से विज्ञान की कापी चुरा ली। ताकि जब शिक्षक उससे कुछ पूछे तो वह जवाब देने की स्थिति में ना हो। हुआ भी वही शिक्षक की खूब डांट पड़ी कमल को। निलेश तो मंद-मंद मुस्कुरा रहा था।

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हर समय नीलेश मौके की ताक में रहता कि कैसे कमल को परेशान करें। एक तरह से वह कमल की वजह से हीन भावना का शिकार भी होते जा रहा था। उसे लगता था कि वह कभी पढ़ाई नहीं कर पाएगा। कभी कमल का पेन गायब कर देता तो कभी लंच बॉक्स में खाना ही नहीं रहता। कमल को परेशान देखकर उसे बड़ी खुशी होती थी। धीरे-धीरे उसकी शरारत और हीन भावना दोनों ही बढ़ने लगे। क्लास के दूसरे बदमाश लड़कों से भी उसकी दोस्ती हो गई थी जो उसे हर समय उकसाते रहते थे ।

नीलेश की एक दोस्त थी रितिका जिसकी हर बात वह मानता था। नीलेश की हरकतों को देखकर रितिका को बड़ी तकलीफ हो रही थी, उसने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, पर वह हीन भावना का ऐसा शिकार हुआ था कि निकल ही नहीं पा रहा था।

देखते-देखते परीक्षाएं नजदीक आ गयीं। निलेश की पूरी कोशिश थी कि इस बार कमल को पहले रैंक पर नहीं आने देगा। अचानक कुछ उड़ती हुई खबर मिली उसे। उसके कुछ उद्दंड दोस्तों ने एग्जाम के पेपर चुरा लिए और नीलेश को दे दिया। नीलेश की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। अब तो इस बार वह अव्वल आकर ही रहेगा। परीक्षाएं खत्म हो गई और कुछ दिन के बाद रिजल्ट भी आ गया। अपनी कक्षा में वह सबसे अव्वल था। उसने कमल की तरफ विजयी मुस्कान से देखा। आज उसने कमल को पीछे छोड़ दिया था। कमल को अपने कम नंबरों से थोड़ी निराशा जरूर थी पर वह हारा नहीं था। उसने नीलेश को उसके सफलता पर बहुत बधाई दी और उसे गले लगा लिया।

नीलेश असमंजस में पड़ गया, क्या करे क्या ना करे, अपने स्वभाव पर रोए या कमल की अच्छाई पर खुश हो। जिस लड़के को उसने परेशानी के सिवा कुछ ना दिया था, आज वही उसे उसकी सफलता पर बधाई दे रहा था। पल भर में ही उसकी जीत की खुशी काफूर हो गई और आईने की तरह उसके कारनामे सामने दिखने लगे।

बेईमानी से लायी गयी रैंक पर उसे अब बड़ी शर्मिंदा हो रही थी, सामने रखे अच्छे अंक भी उसे बार-बार उसकी गलतियों का एहसास करा रहे थे। उसकी आंखों के कोरों से शर्मिंदगी के आंसू बहने लगे और अपनी गलतियों को सुधारने का मौका सूझने लगा। उसने मन में ठान लिया कि वह कमल से अपनी पिछली गलतियों के लिए माफी मांगेगा और शिक्षक के सामने अपनी चोरी भी कुबूल करेगा, चाहे उसे स्कूल से निकलना ही क्यों ना पड़े।

तभी सर ने आवाज दी, “नीलेश यहाँ आओ, तुम्हारी क्लास में फर्स्ट रैंक आई है, मैं तुमसे बहुत खुश हूँ, बताओ तुमने ये सफलता कैसे हासिल की?”

नीलेश बड़ा असमंजस में था, समझ में ही नहीं आ रहा था कि हंसे या रोए। सामने मार्कशीट पड़ी हुई थी, जिसमें हर विषयों में उसे सबसे अधिक नंबर मिले थे पर उसे वह खुशी नहीं मिल पा रही थी जो अच्छे अंक मिलने पर होती है।

नीलेश दबे क़दमों से ब्लैक बोर्ड के सामने पहुंचा-

“सर, फर्स्ट रैंक मेरी नहीं कमल की आई है, मैं आप सभी से माफ़ी मांगता हूँ… मैंने चीटिंग की है, कमल को नीचा दिखाने के लिए मैंने पेपर आउट करा दिया था।

सर, आप इसकी जो चाहे वो सजा मुझे दे सकते हैं। कमल, I am really sorry! मैंने हमेशा तुम्हे परेशान करता रहा पर आज तुमने ही मुझे गले लगा कर बधायी दी।”

और ये कहते-कहते नीलेश की आँखों में आँसू आ गए।

क्लास के सबसे शरारती बच्चे को इस तरह टूटता देख सभी भावुक हो गए, रितिका और कमल फ़ौरन उसके पास पहुंचे और उसका हाथ थाम लिया।

स्कूल मैनेजमेंट ने भी नीलेश का पश्चाताप बेकार नहीं जाने दिया और पुनः परीक्षा ले उसे पास कर दिया।

अब नीलेश समझ चुका था कि बेईमानी से पायी गयी सफलता कभी ख़ुशी नहीं दे सकती, असली ख़ुशी ईमानदारी और सच्चाई के रास्ते पर चल कर ही पायी जा सकती है।

*⏰👪🎪🙏🔔विशेष :- भव्य आत्माओं,जो हम सभी को ईमानदारी व सच्चाई के द्वारा ज्ञान,धन आदि जो भी प्राप्त होता है, उससे प्रसन्नता होती है।वह हमें जो भी प्राप्त हुआ है उसे भगवान भी नहीं छुड़ा सकते। अगर हमने बेईमानी से कुछ प्राप्त कर लिया है तो उसे हम स्वयं भी बचा नहीं सकते। अतः हमारे मन में लोभ,लालच, अनैतिक क्रिया जैसे अनेक विचार प्रति क्षण आते हैं, हमें उन विचारों के अनुसार ना बहते हुए अपने श्रृद्धा विश्वास को जागृत कर सन्मार्ग पर चलना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

रविवार, 25 दिसंबर 2022

आशीर्वचन

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🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 आशीर्वचन ✍️🐒*

एक समय आदरणीय गुरु नानक देव यात्रा करते हुए नास्तिक विचारधारा रखने वाले लोगों के गांव पहुंचे। वहां बसे लोगों नें गुरु नानाक देव और उनके शिष्यों का आदर
सत्कार नहीं किया, उन्हें कटु वचन बोले और तिरस्कार किया. इतना सब होने के बाद भी, जाते समय ठिठोली लेते हुए, उन्होंने गुरु नानक देव से आशीर्वचन देने को कहा।

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जिस पर नानक देव नें मुस्कुराते हुए कहा “आबाद रहो”

भ्रमण करते हुए, कुछ समय बाद गुरु नानक और उनके शिष्य एक दूसरे गांव जा पहुंचे। इस गांव के लोग नेक, दयालु और प्रभु में आस्था रखने वाले थे।

उन्होंने बड़े भाव से सभी का स्वागत सत्कार किया और जाते समय गुरु नानक देव से आशीर्वचन देने की प्रार्थना की। तब गुरु नानक देव नें कहा “उजड़ जाओ\” इतना बोल कर वह आगे बढ़ गए. तब उनके शिष्य भी गुरु के पीछे पीछे चलने लगे।

आगे चल कर उनमें से एक शिष्य खुद को रोक नहीं सका और बोला। हे ‘गुरुदेव’ आपनें तिरस्कार करने वाले उद्दंड मनुष्यों को आबाद रहने का आशीर्वचन दिया और सदाचारी
शालीन लोगों को उजड़ जाने का कठोर आशीर्वचन क्यों दिया?

तब गुरु नानक देव हँसते हुए बोले-

सज्जन लोग उजड़ने पर जहाँ भी जायेंगे वहां अपनी सज्जनता से उत्तम वातावरण का निर्माण करेंगे। परंतु दुष्ट और दुर्जन व्यक्ति जहाँ विचरण करेगा वहां, अपने आचार-विचार से वातावरण दूषित करेगा। इस प्रयोजन से मैंने उन्हें वही आबाद रहने का आशीर्वचन दिया।

अपने गुरु की ऐसी तर्कपूर्ण बात से वह शिष्य संतुष्ट हुआ और वह सब अपने मार्ग पर आगे बढ़ गए।

*👪⏰👣🪜✍️विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं,, आज भी हम लोगों के साथ साधु संतो या घर के बड़े बुजुर्गो के द्वारा आशीर्वचन में कुछ उल्टे शब्दों का दिशानिर्देश मिल जाता है। इससे आप बिल्कुल भी विचलित ना हो, उनसे उनके द्वारा कहे गये शब्दों का अभिप्राय समझने का प्रयास करें ताकि आपका सर्वांगीण विकास हो।*

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शनिवार, 24 दिसंबर 2022

त्याग से प्राप्ति

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
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बहुत पुरानी बात है। किसी नगर में हरीश नाम का एक नवयुवक रहता था। बेचारे के मां-बाप स्वर्ग सिधार चुके थे। गरीब होने के कारण उसके पास अपने खेत भी नहीं थे, औरों के खेतों में वह दिन भर छोटे-मोटे काम करता और बदले में खाने के लिए आटा-चावल व अन्य सामग्री लेकर आता।

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-भव्य महान आत्माओं आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानी पढ़ने से कुछ धर्म के आत्मकल्याण के संस्कार तो पड़ गए जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।जी हां जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने कीमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें। आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

घर आकर वह अपना भोजन तैयार करता और खा-पीकर सो जाता। जीवन ऐसे ही संघर्षपूर्ण था ऊपर से एक और मुसीबत उसके पीछे पड़ गयी।

एक दिन उसने अपने लिए चार रोटियां बनाई। हाथ-मुंह धो कर वापस आया तब तक 3 ही बचीं। दूसरे दिन भी यही हुआ। तीसरे दिन उसने रोटियां बनाने के बाद उस स्थान पर नज़र रखी। उसने देखा कि कुछ देर बाद वहां एक मोटा सा चूहा आता है और एक रोटी उठा कर वहां से जाने लगता है।

हरीश तैयार रहता है, वह फ़ौरन चूहे को पकड़ लेता है।

चूहा बोला, “भैया, मेरी किस्मत का क्यों खा रहे हो। मेरी चपाती मुझे ले जाने दो।”

“तुम्हे ले जाने दी तो मेरा पेट कैसे भरेगा? मैंने पहले से ही अपने जीवन से परेशान हूँ ऊपर से अब पेट भर खाना भी ना मिले तो मैं क्या करूँगा….ना जाने मेरे जीवन में खुशहाली कब आएगी?”, हरीश बोला।

इस पर चूहे ने कहा, “ तुम्हारे सारे सवालों का जवाब तुम्हें मतंग ऋषि दे सकते हैं।

हरीश ने पूछा कौन हैं वह?

चूहे ने उत्तर दिया- वह एक पहुंचे हुए संत हैं, उत्तर दिशा में कई पर्वतों और नदियों को पार करके ही उनके आश्रम तक पहुंचा जा सकता है. तुम उन्ही के पास जाओ, वही तुम्हारा उद्धार करेंगे।

हरीश चूहे की बात मान गया, और अगली सुबह ही खाने-पीने की गठरी बाँध कर आश्रम की ओर बढ़ चला।

काफी दूर चलने के बाद उसे एक हवेली दिखाई दी। हरीश वहां गया  और रात भर के लिए शरण मांगी।

हवेली की मालकिन ने पूछा – बेटा कहां जा रहे हो?

हरीश –  मैं मतंग ऋषि के आश्रम जा रहा हूं।

मालकिन – बहुत अच्छा, उनसे मेरे एक प्रश्न का उत्तर मांग कर लाना कि  मेरी बेटी 20 साल की हो गयी है, वह देखने में अत्यंत सुन्दर है, उसके अन्दर हर प्रकार के गुण भी विद्यमान हैं बेचारी ने कुछ वर्षो पहले किसी दिगंबर मुनिराज को अपशब्द कहे थे तभी से  एक शब्द नहीं बोल पा रही है, पूछना वह कब बोलना शुरू करेगी?

और ऐसा कहते-कहते मालकिन रो पड़ी।
हरीश- जी आप परेशान ना हों, मैं आपका उत्तर जरूर लेकर आऊंगा।

हरीश अगले दिन आगे चल पड़ा।

रास्ता बहुत ज्यादा लंबा था। रास्ते में उसे बड़े-बड़े बर्फीले पहाड़ मिले। उसे समझ नहीं आ रहा था कि कैसे पार करूं। समय बीत रहा था। तभी उसे एक तांत्रिक बाबा दिखाई दिये जो वहां बैठ कर तपस्या कर रहा था।

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हरीश तांत्रिक के पास गया और उससे बोला कि मुझे मतंग ऋषि के दर्शन को जाना है कैसे जाऊं? रास्ता तो बहुत ही परेशानी वाला लग रहा है?

तांत्रिक – मैं तुम्हारा सफर आसान बना दूंगा पर तुम्हे मेरे एक प्रश्न का उत्तर लाना होगा।

हरीश- किन्तु जब आप मुझे वहां पहुंचा सकते हैं तो स्वयं क्यों नहीं चले जाते?

तांत्रिक- क्योंकि मैंने इस स्थान को छोड़ा तो मेरी तपस्या भंग हो जायेगी।

हरीश- ठीक है आप अपना प्रश्न बताएँ।

तांत्रिक- पूछना मेरी तपस्या कब सफल होगी?  मुझे सच्चा ज्ञान कब मिलेगा?

हरीश- ठीक है मैं इस प्रश्न का उत्तर जरूर  लाऊंगा।

इसके बाद तांत्रिक ने अपनी तांत्रिक विद्या से लड़के को पहाड़ पार करा दिया।

अब आश्रम तक पहुँचने के लिए सिर्फ एक नदी ही पार करनी थी।

हरीश इतनी विशाल नदी देखकर घबडा गया, तभी उसे नदी के किनारे एक बड़ा सा कछुआ दिखाई दिया। लड़के ने कछुए से मदद मांगी। आप मुझे अपनी पीठ पर बैठाकर नदी पार करा दीजिए।

कछुए ने कहा ठीक है।

जब दोनो नदी पार कर रहे थे तो कछुए ने पूछा- कहां जा रहे हो।

हरीश ने उत्तर दिया- मैं मतंग ऋषि से मिलने जा रहा हूं।

कछुए ने कहा- “ये तो बहुत अच्छी बात है। क्या तुम मेरा एक प्रश्न उनसे पूछ सकते हो?

हरीश- जी अपना प्रश्न बताइए।

कछुआ – मैं एक असाधारण कछुआ हूं जो समय आने पर ड्रैगन बन सकता है। 500 सालों से मै इसी नदी में हूं और ड्रैगन बनने की कोशिश कर रहा हूं। मैं ड्रैगन कब बनूंगा? बस यह पूछ कर के आ जाना।

नदी पार करके कुछ दूर जाने पर मतंग ऋषि का आश्रम दिखाई देने लगा।

आश्रम में प्रवेश करने पर शिष्यों ने हरीश का स्वागत किया।

संध्या समय मतंग ऋषि ने हरीश को दर्शन दिए और बोले – पुत्र, मैं तुम्हारे किन्ही भी तीन प्रश्नों का उत्तर दे सकता हूं। पूछो अपने प्रश्न। हरीश ने उन्हें यथायोग्य नमस्कार किया और अपनी तरफ से जो घर से सामग्री लाया था उसे मतंग ऋषि को भेंट किया।

हरीश असमंजस में फंस गया कि वह अपना प्रश्न पूछे या उसकी मदद करने वाली मालकिन, तांत्रिक और कछुए का!

वह अपना प्रश्न पूछना चाहता था पर उसने सोचा कि उसे मुसीबत में मदद करने वाले लोगों का उपकार नहीं भूलना चाहिये, उसे ये नहीं भूलना चाहिए कि उसने उन लोगों से उनके प्रश्नों के उत्तर लाने का वादा किया है।

उसी पल उसने निश्चय किया कि वह खूब मेहनत करेगा और अपनी जिन्दगी बदल देगा… लेकिन इस समय उन 3 लोगों की जिंदगी में बदलाव लाना जरूरी है।

और यही सोचते-सोचते उसने ऋषि से पूछा – हवेली के मालिक की बेटी कब बोलेगी?

ऋषि – जैसे ही उसका विवाह किसी भी धार्मिक संस्कारवान व्यक्ति से होगा, वह  बोलना शुरू कर देगी।

हरीश – तांत्रिक को सच्चा ज्ञान कब प्राप्त होगा?

ऋषि – जब वह अपनी तांत्रिक विद्या का मोह छोड़ उसे किसी और को दे देगा तब उसे सच्चे ज्ञान की प्राप्ति हो जाएगी।

हरीश – वह कछुआ ड्रैगन कब बनेगा?

ऋषि – जिस दिन उसने अपना कवच उतार दिया वह ड्रैगन बन जाएगा।

हरीश ऋषि से उत्तर जानकर बहुत प्रसन्न हुआ। अगली सुबह वह ऋषि का चरण स्पर्श कर वहां से प्रस्थान कर गया।

वापस रास्ते में कछुआ मिला। उसने हरीश को नदी पार करा दी और अपने प्रश्न के बारे में पूछा।

तब हरीश ने कछुए से कहा कि भैया अगर आप अपना कवच उतार दो तो तुम ड्रैगन बन जाओगे।

कछुए ने जैसे ही कवच उतारा, उसमे से ढेरों मोती झड़ने लगे, कछुए ने वे सारे मोती हरीश को दे दिए और कुछ ही पलों में ड्रैगन में बदल गया।

उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने  हरीश को अपने ऊपर बिठाया और बर्फीली पहाड़ियां पार करा दीं।

थोड़ा आगे जाने पर उसे तांत्रिक मिला।

हरीश ने उसे ऋषि की बात बता दी कि जब आप अपनी तांत्रिक विद्या किसी और को दे देंगे तो आपको सच्चे ज्ञान की प्राप्ति हो जाएगी।

तांत्रिक बोला, अब मैं कहाँ किसे ढूँढने जाऊँगा, ऐसा करो तुम ही मेरी विद्या ले लो, और ऐसा कहते हुए तांत्रिक ने अपनी सारी विद्या हरीश को दे दी और अगले ही क्षण उसे सच्चेज्ञान  प्राप्ति की अनुभूति हो गयी। सबकुछ छोड़कर ही सबकुछ प्राप्त हो सकता है। जबतक पांच इंद्रियों के विषयों को नहीं छोड़ सकते तबतक कुछ भी संभव नहीं है।

हरीश वहां से आगे बढ़ा और तांत्रिक से मिली विद्या के दम पर जल्द ही हवेली पहुंच गया।

मालकिन ने उसे देखते ही पूछा क्या कहा ऋषि मतंग ने मेरी बिटिया के बारे में?

“जिस दिन उसकी शादी किसी भी धार्मिक संस्कारवान व्यक्ति से हो जायेगी, वह बोलने लगेगी।”, हरीश ने उत्तर दिया।

मालकिन बोलीं तो देर किस बात की है तुम इतनी बड़ी खुशखबरी लाये हो भला तुम से अच्छा  धार्मिक संस्कारवान लड़का उसके लिए कौन हो सकता है।

दोनों की शादी करा दी गयी। और सचमुच लड़की बोलने लगी।

हरीश अपनी पत्नी को लेकर गांव पहुंचा। उसने सबसे पहले उस चूहे को धन्यवाद दिया और उसे तांत्रिक द्वारा प्राप्त विद्या थी । उसने वह विद्या उस चूहे को दे दी।उस तांत्रिक विद्या के बल से वह किसी के द्वारा दिए श्रांप से मुक्त हो गया। ओर विद्या बल से एक सर्व सुविधायुक्त घर हरीश के लिए बना कर अपने यथास्थान के लिए प्रस्थान किया।

कभी जीवन से हार चुके हरीश के पास आज धन-दौलत, परिवार, ताकत सब कुछ था, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसने अपनी इच्छाओं का त्याग किया था, उसने स्वयं से पहले दूसरों के बारे में अच्छा सोचा था।

और यही जीवन में कामयाब होने का फार्मूला है, ये मत पूछिए कि औरों ने आपके लिए क्या किया ये सोचिये कि आपने औरों के लिए क्या किया?

जब आप इस सेवा भाव के साथ दुनिया की सेवा करेंगे और दूसरों के लिए अपनी इच्छा का त्याग करेंगे तो ईश्वर आपके जीवन में भी चमत्कार करेगा और त्याग की ताकत से  आपको जीवन की हर खुशियाँ  सहज ही प्राप्त हो जायेंगी।

*⏰👪🔔🪔🎪विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं,आप को कहानी के माध्यम से समझ में आ गया होगा कि आपको क्या करना है।आप विश्व के जिस स्थान पर स्थित है वहां पर आवश्यक लोगों की आवश्यकता के अनुसार अपनी शक्ति व श्रद्धा होने पर अवश्य ही सहयोग करें।जो भी व्यक्ति विशेष श्री शान्तिसागर समाधि साधना सेवा केन्द्र जयपुर रजिस्टर्ड संस्था में दान देने के इच्छुक हो वे इस वर्ष की समाप्ति व 2023 की शुरुआत में भी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग करना चाहते है वे संस्था के व्हाट्सएप 9461956111 नंबर पर मैसेज कर सकते है।* 

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 23 दिसंबर 2022

धर्म ध्यान कैसे करें

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️ जैन प्रवचन सभी के काम के*
*💪👩‍🚒 धर्म ध्यान कैसे करें ✍️🐒*

आइए आज हम सभी यह समझें कि हम बिना धन व समय के भी अपनी दैनंदिनी में धर्म ध्यान कैसे कर सकते है।

*दुध कड़वा क्यों?मेथी मीठी क्यों?*

👉आचार्यश्री ने एक दिन बताया कि कुछ लोग हमसे पूछते है कि हमको धर्मध्यान करना नहीं आता।तो आज मैं बताता हूँ। धर्मध्यान कैसे किया जाता है। दुसरे का भला एवं अच्छा सोचो यह भी धर्मध्यान है।

धर्मध्यान बहुत सस्ता है।आप आत्मा का ध्यान न कर पाते,लेकिन दूसरों के दुःख दूर हों,सभी सुखी रहें इस प्रकार का तो सोच सकते हैं।यही तो अपाय विचय धर्मध्यान है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

👉धर्म का अर्थ स्वभाव होता है।शरीर और जगत के स्वभाव का चिंतन करो जिससे संवेग और वैराग्य की प्राप्ति होगी एवं धर्मध्यान भी होगा।

तब किसी ने शंका व्यक्त करते हुए कहा कि- आचार्यश्री जी दूसरों के दुःख देखने में नहीं आते बल्कि दोष देखने में आते हैं।तब आचार्यश्री जी ने कहा कि- अपध्यानी की दृष्टि में मात्र दोष ही देखने में आते हैं, गुण नहीं आते।क्योंकि कषाय के कारण मुनिराज में भी रत्नत्रय नहीं दिखता,दोष ही दिखते हैं। जैसे बुखार के आ जाने पर दूध आदि मीठी वस्तु भी कड़वी लगती है और स्वस्थ्य हो तो मेथी भी मीठी लगती है।

इसलिए अपध्यान एवं कषाय का त्याग करते हुए दूसरों के दोषों को न देखकर सभी का भला हो ऐसा विचार करना चाहिए।सभी का भला सोचने से अपना भला हो ही जाएगा।

जैसे अपने अड़ोस- पड़ोस में यदि भजन चल रहे हो तो हमें भी सुनाई दे सकते हैं।धूपबत्ती की सुगंध आ सकती है एवं धर्मध्यान के योग्य वातावरण मिल सकता है।
*👪🔔⏰🌞🎪विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज भारत के सत्तर प्रतिशत भारतीय अपने अपने धर्म के अनुसार धार्मिक क्रिया कांड में उलझे हुए है।इस कारण से जो इनमें उलझा है ना ही उसका ओर ना ही उसके निमित्त से अन्य किसी का आत्मकल्याण हो रहा है। हमें उन धार्मिक क्रियाकलापों के साथ स्वयं के अंतरंग का बहिरंग आचरण में भी उनका समावेश होना आवश्यक है। अतः हम सभी को किसी भी जीव को किसी भी प्रकार का दुःख नहीं पहुंचाना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
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गुरुवार, 22 दिसंबर 2022

विषम परिस्थितियों में

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 विषम परिस्थितियों में ✍️🐒*


      🐒💡एक सिपाही गुर्वित अपने घोड़े पर सवार हो कर राज्य की सीमाओं का निरीक्षण करने निकला।घंटों चलने के कारण सिपाही और घोड़ा दोनों ही थक गए थे।

सिपाही ने तो अपने पास रखे पानी से प्यास बुझा ली पर बेचारे घोड़े के लिए कहीं पानी नहीं दिख रहा था।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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पानी की तलाश में दोनों आगे बढ़ गए। थोड़ी देर चलने के बाद कुछ दूर पर एक बूढ़ा किसान अपने बैल के साथ दिखा।

वह खेतों की सींचाई करने के लिए रहट चला रहा था।

सिपाही उसके समीप पहुँच कर बोला, “काका, मेरा घोड़ा बड़ा प्यासा है इसे जरा पानी पिलाना था।”

“पिला दो बेटा!”, किसान बोला।

सिपाही घोड़े को रहट के पास ले गया ताकि वो उससे गिरता हुआ पानी पी सके। 

पर ये क्या घोड़ा चौंक कर पीछे हट गया।

“अरे! ये पानी क्यों नहीं पी रहा?”, किसान ने आश्चर्य से पूछा।

सिपाही कुछ देर सोचने के बाद बोला, “काका! रहट चलने से ठक-ठक की जो आवाज़ आ रही है उससे यह चौंक कर पीछे हट गया।”

“आप थोड़ी देर अपने बैल को रोक देते तो घोड़ा आराम से पानी पी लेता।”

किसान मुस्कुराया,

बेटा ये ठक-ठक तो चलती रहेगी… अगर मैंने बैल को रोक दिया तो कुएं से पानी कैसे आयेगा…यदि घोड़े को पानी पीना है तो उसे इस ठक-ठक के बीच ही अपनी प्यास बुझानी होगी…।

 सिपाही को बात समझ आ गयी, उसने फिर से घोड़े को पानी पिलाने का प्रयास किया, घोड़ा फिर पीछे हट गया…पर दो-चार बार ऐसा करने के बाद घोड़ा भी समझ गया कि उसे इस ठक-ठक के बीच ही पानी पीना होगा और उसने इस विघ्न के बावजूद अपनी प्यास बुझा ली।

*🔐🧑‍🦰⭐🤲✍️विशेष  :-भव्य आत्माओं , इस घोड़े की तरह ही यदि हमें अपने इच्छित लक्ष्य को प्राप्त करना  है तो जीवन में चल रही ठक-ठक पर से ध्यान हटाना होगा। हमें सही समय के इंतज़ार में अपने वर्तमान समय को टालना छोड़ना होगा… बहानो के पीछे छुप कर ज़रूरी कम से कम मुंह मोड़ना छोड़ना होगा…हमें ये कंडिशन लगाना छोड़ना होगा कि हम आइडियल कंडिशन में ही काम करेंगे…क्योंकि ज़िन्दगी में ठक-ठक तो हमेशा ही चलती रहेगी, हमें तो विषम परिस्थितियों  में अपने स्व पुरुषार्थ से लक्ष्य को प्राप्त करना है।यही हमारा कर्तव्य है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 21 दिसंबर 2022

स्वामी विवेकानंद

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 स्वामी विवेकानंद ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. पौष कृष्ण चौदस दिनांक 22 दिसंबर  2022 गुरुवार  को दसवें तीर्थंकर सभी को शीतलता प्रदान करने वाले   1008 श्री शीतलनाथ भगवान जी का ज्ञान  कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

*👨‍👩‍👦‍👦▶️💡एक शिष्य एक आदर्श गुरु की तलाश में भटकता-भटकता रात के दो बजे एक गुरु के द्वार पर पहुंचा।*

*उसने द्वार पर दस्तक दी, दरवाजा खटखटाया। अन्दर से आवाज आई, "कोऽसि अर्थात कौन हो ?"*

*शिष्य बोला, "न जानामि"। मैं नहीं जानता कि मैं कौन हूं ?*

*अन्दर लेटे गुरु ने समझ लिया कि यही सच्चा शिष्य है। मेरे लायक यही है। मुझे इसे बुला लेना चाहिए !*
*रात को दो बजे गुरु ने दरवाजा खोला और शिष्य को अन्दर बुला लिया ! शिष्य के सिर पर एक काफी बड़ी पुस्तकों की गठरी थी। गुरु ने कहा, "यह क्या है ?"*

*शिष्य बोला, "गुरुजी यह कुछ पुस्तके हैं जो मैंने अब तक पढ़ी हैं ।"* 

*तो गुरु ने कहा, "जब आपने इतनी पुस्तकें पढ़ ली हैं तो मेरे पास क्यों आए हो ?"  शिष्य बोला !*

*"गुरुजी इन शास्त्रों को पढ़कर मैं भ्रमित हो गया हूं कि आखिर मैं सत्य क्या है। जबतक सच समझ में नहीं आयेगा तब तक मन को शान्ति नहीं मिली ! इसलिए आपसे और अध्ययन करने आया हूं ।" तो गुरुजी ने कहा"*

*"यदि मुझ से पढ़ना चाहते हो तो इन सारी पुस्तकों को पहले यमुना में बहा आओ।"* 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

*वह तत्काल वहां से चला गया।  वह यमुना के तट पर गया और उसने अपनी पुस्तकों से भरी पूरी गठरी यमुना में फेंक दी और वह वहां से लौट कर गुरु के पास वापस आकर गुरु के चरणों में बैठ गया।* 

*गुरु ने उसको अपने गले से लगा लिया गुरु बोले, "प्रभु तेरा कोटि-कोटि धन्यवाद। जो शिष्य मुझे चाहिए था वह मुझे मिल गया ।"* 

*गुरु ने तीन वर्ष तक शिष्य को संस्कृत व्याकरण की सारी की सारी पुस्तकें पढ़ाईं। अपना पूरा का पूरा ज्ञान शिष्य के मस्तिष्क में उडेल दिया। तीन वर्ष बाद जब शिष्य की शिक्षा पूरी हो गई तब उसने सोचा कि अब मैं यहां से जाऊं ! किन्तु जाने से पहले गुरु को गुरु दक्षिणा तो देनी होती है !  उसने सोचा कि मैं गुरु को क्या गुरु दक्षिणा दूँ ?* 

*शिष्य ने काफी परिश्रम करके एक सेर लौंग एकत्रित की। उस एक सेर लौंग को लेकर वह गुरु के पास पहुंचा !*

*उसने कहा - "गुरु जी यह आपकी गुरु दक्षिणा है।" गुरु की आंखों में आंसू आ गए। "गुरु ने कहा" --*

*"ऐ शिष्य मेरी इतने मेहनत की इतनी सी गुरु दक्षिणा ?*

*यह तो मुझे स्वीकार नहीं है !*

 *शिष्य रुआंसा हो गया बोला !  "गुरुजी ! मेरे पास तो और कुछ नहीं है ! जो कुछ मैं एकत्र कर सकता था यही एकत्र कर पाया !मेरे पास इसके अलावा मेरे पास सिर्फ मेरा यह शरीर है। इसे ले लीजिए !"* 

*यह कहकर शिष्य की आंखों से आंसू टपकने लगे !*

*गुरु ने कहा - "ऐ शिष्य मुझे यही चाहिए ! मुझे तुम्हारा पूरा का पूरा जीवन चाहिए !*

*देखो ! आज भारत विदेशी दासता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है ! अंग्रेजों के द्वारा यहां की जनता बुरी तरह पददलित है ! भारतवर्ष को अंग्रेजी दासता से मुक्ति दिलाओ। यहां की जनता में अज्ञान का अंधकार फैला हुआ है। भांति-भांति के अंधविश्वासों ने प्रगति के रास्ते को रोका हुआ है। जाओ और अपने तर्कों से, अपने ज्ञान से भारत देश की जनता के अज्ञान के अन्धकार को मिटाओ।*

*शिष्य ने कहा -"गुरु जी ऐसा ही होगा। मैं अपना पूरा जीवन इस देश की जनता की सेवा में लगाऊँगा। अज्ञानता के अंधकार को उखाड़ फेंकूँगा। और इस देश को ऐसा सत्य ज्ञान दूंगा जिसे प्राप्त कर ऐसे शूरवीर पैदा होंगे जो इस देश से अंग्रेजों को बाहर निकाल सकेंगे।*

*गुरु जी आप के आदेश का मैं पूरा पालन करूंगा ! पूरे जीवन भर पालन करूंगा ! यह कहकर शिष्य ने गुरु से भरी आँखों से विदा ली और अपना पूरा जीवन अपनी प्रतिज्ञा के पालन में लगाया !*

*आप पूछेंगे कि यह शिष्य और यह गुरु कौन थे ?* 

*मित्रो! यह शिष्य थे स्वामी दयानन्द सरस्वती और यह गुरु थे प्रज्ञा चक्षु स्वामी विरजानन्द सरस्वती ! स्वामी विरजानन्द ने स्वामी दयानन्द को वह ज्ञान दिया जिससे उनके ज्ञान चक्षु खुल गए ! उन्हें सत्य और असत्य का बोध हो गया ! अच्छे और बुरे का ज्ञान हो गया ! अपने और पराए का ज्ञान हो गया ! विदेशी और स्वदेशी के महत्व का ज्ञान हो गया !*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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*इसके आधार पर उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई लड़ी !*

*प्रत्यक्ष रूप में उन्होंने यह लड़ाई नहीं लड़ी क्योंकि वह जानते थे कि यदि प्रत्यक्ष रूप में लड़ाई लड़ेंगे तो उनको पकड़ लिया जाएगा और उनका समाज सुधार का कार्य अधूरा रह जाएगा ! उन्होंने समस्त विश्व का पथ-प्रदर्शन करने वाली सत्यार्थ प्रकाश नामक एक अत्यन्त महत्वपूर्ण पुस्तक लिखी ! सत्यार्थ प्रकाश में उन्होंने लिखा कि विदेशी राजा चाहे कितना ही न्यायप्रिय, कितना ही सत्यनिष्ठ क्यों न हो किन्तु ! स्वदेशी राजा सदा विदेशी राजा से अच्छा होता है।* 

*सत्यार्थ प्रकाश से प्रेरणा लेकर असंख्य नौजवानों ने देश के लिए मर मिटने की कसम खाई ! इनमें थे पंजाब केसरी लाला लाजपतराय, शहीदे आजम सरदार भगत सिंह, अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, चन्द्रशेखर आजाद और ऐसे ही असंख्य नौजवान ! इन सब ने स्वतंत्रता की बलिवेदी पर हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी !*

*मैं आपको बता दूं कि लगभग सात लाख (7,00,000) देशभक्त शूरवीरों ने अपने प्राणों की आहुति अपने देश को आजाद कराने के लिए दी ! उन में से 85 प्रतिशत से अधिक स्वामी दयानन्द सरस्वती के विचारों से प्रभावित थे  या कहें कि स्वामी दयानन्द के शिष्य थे, धन्यवाद !*

*🕉️🐒💡👨‍👩‍👦‍👦🔔विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हम सभी के अंदर मिथ्या मान्यताओं ने अपनी जड़ें मजबूत कर रखी है। जबतक हम स्वयं के विचारों की विपरीत मान्यताओं के टुकड़े नहीं करेंगें तब तक हमें सच क्या है इसका ज्ञान नहीं होगा। अतः सबसे पहले हमें हमारी विपरीत मान्यताओं को विभागों में बांटकर समाप्त करना होगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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मंगलवार, 20 दिसंबर 2022

जिद व समर्पण की सच्चाई

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒जिद व समर्पण की सच्चाई ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर  प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. पौष कृष्ण चौदस दिनांक 22 दिसंबर  2022 गुरुवार  को दसवें तीर्थंकर सभी को शीतलता प्रदान करने वाले   1008 श्री शीतलनाथ भगवान जी का ज्ञान  कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

एक बार मूर्तिकार नवीन एक पत्थर को छेनी और हथौड़ी से काट कर  मूर्ति का रूप दे रहा था। जब पत्थर  काटा जा रहा था, तो उसको बहुत दर्द हो रहा था।

कुछ देर तो पत्थर ने बर्दाश्त किया पर जल्द ही उसका धैर्य जवाब दे गया।

वह नाराज़ होते हुए बोला, ” बस ! अब और नहीं सहा जाता।छोड़ दो मुझे मैं तुम्हारे वार को अब और नहीं सह सकता… चले जाओ यहाँ से!”

मूर्तिकार ने समझाया, “अधीर मत हो! मैं तुम्हे भगवान् की मूरत के रूप में तराश रहा हूं। अगर तुम कुछ दिनों का दर्द बर्दाश्त कर लोगे तो जीवन भर लोग तुम्हे पूजेंगे… दूर-दूर से लोग तुम्हारे दर्शन करने आयेंगे। दिन-रात श्रृद्धालु तुम्हारी देख-भाल में लगे रहेंगे।”

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

और ऐसा कह कर उसने अपने औजार उठाये ही थे कि पत्थर क्रोधित होते हुए बोला, “मुझे मेरी ज़िन्दगी खुद जीने दो… मैं जानता हूँ मेरे लिए क्या अच्छा है क्या बुरा… मैं आराम से यहाँ पड़ा हूँ…चले जाओ मैं अब जरा सी भी तकलीफ नहीं सह सकता!”

मैं जानता हूं तुम्हे दर्द बहुत हो रहा है…पर अगर आज तुम अपना आराम देखोगे तो कल को पछताओगे… मैं तुम्हारे गुणों को देख सकता हूं तुम्हारे अन्दर आपार संभावनाएं हैं… यू यहा पड़े-पड़े अपना जीवन बर्बाद मत करो! मूर्तिकार ने समझाया।

पर पत्थर पर उसकी बात का कोई असर नहीं हुआ, वह अपनी बात पर ही अड़ा रहा।

मूर्तिकार पत्थर को वहीँ  छोड़ आगे बढ़ गया।

सामने ही उसे एक दूसरा अच्छा पत्थर दिख गया। उसने उसे उठाया और उसकी मूर्ति बना दी।

दूसरे पत्थर ने दर्द बर्दाश्त कर लिया और वो भगवान की वीतरागी मूर्ति बन गया, लोग रोज उसका अभिषेक पूजन कर भगवान के गुणों का अपनी शक्ति अनुसार करते थे। वहां के श्रेत्रपाल ने लोगों की भक्ति वश वहां पर अनेक चमत्कार किए। सभी लोगों से प्राप्त दान से वहां सर्व सुविधायुक्त धर्मशाला, भोजनशाला ओर संतो के निवास के लिए अन्य अनेक व्यवस्था के साथ वह क्षैत्र प्रसिद्ध हो गया। देन-विदेश से लोग उसके दर्शन करने आने लगे।

फिर एक दिन एक और पत्थर उस मंदिर में लाया गया और उस पर उस मंदिर का नाम लिखा गया।एक कोने में स्थापित कर दिया गया। वह कोई और नहीं बल्कि वही पत्थर था जिसने मूर्तिकार को उसे छूने से मना कर दिया था।

अब वह मन ही मन पछता रहा था कि काश उसने उसी वक्त दर्द सह लिया होता तो आज समाज में उसकी भी पूछ होती… सम्मान होता… कुछ दिनों की वह पीड़ा इस जीवन भर के कष्ट से बचा लेती!

 हमारे लिए निर्णय लेने का ये सही समय है कि हम आज दर्द बर्दाश्त करना है या अभी मौज-मस्ती करनी है और फिर जीवन भर का दर्द झेलना है।  आज आप जिस किसी लक्ष्य  की तैयारी कर रहे हों… जो भी अपनी योग्यता के अनुसार करने की कोशिश कर रहे हों…जिस किसी क्षेत्र में योग्यता प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हों…उसमे अपना 100% समर्पण व उपयोग लगाइए… होने दीजिये अपने ऊपर तकलीफों के वार…हार मत मानिए… उस दूसरे पत्थर की तरह अभी सह लीजिये और अपने लक्ष्य को प्राप्त करिए ताकि पहले पत्थर की तरह आपको जीवन भर कष्ट ना सहना पड़े।

*⏰🔔✍️🔑🧠विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हमें अपनी योग्यता व रुचि के अनुसार अपनी मंजिल का चुनाव करना चाहिए।उस मंजिल की प्राप्ति के लिए स्वयं का श्रृद्धा विश्वास के साथ उपयोग भी होना चाहिए। चौबीस घंटे हमें अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभिन्न योजनाओं के द्वारा अपनी दृढ़ता को जागृत रखकर मंजिल पर पहुंचना चाहिए। मंजिल पर पहुंच कर वहां बनें रहने के लिए भी समय समय पर योजना बनाते रहना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 19 दिसंबर 2022

मेरी सफलता का रहस्य

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरी सफलता का रहस्य ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. पौष कृष्ण चौदस दिनांक 22 दिसंबर  2022 गुरुवार  को दसवें तीर्थंकर सभी को शीतलता प्रदान करने वाले   1008 श्री शीतलनाथ भगवान जी का ज्ञान  कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

अरविन्द के अन्दर धैर्य बिलकुल भी नहीं था। वह एक काम शुरू करता…कुछ दिन उसे करता और फिर उसे बंद कर दूसरा काम शुरू कर देता।इसी तरह पांच साल बीत चुके थे और वह अभी तक किसी बिजनेस में सफल नहीं हो पाया था।

अरविन्द की इस आदत से उसके माता-पिता बहुत परेशान थे. वे जब भी उससे कोई काम छोड़ने की वजह पूछते तो वह कोई न कोई कारण बता खुद को सही साबित करने की कोशिश करता।

अब अरविन्द के सुधरने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी कि तभी पता चला कि शहर से कुछ दूर एक आश्रम में  बहुत पहुंचे हुए गुरु जी का आगमन हुआ। दूर-दूर से लोग उनका प्रवचन सुनने आने लगे। 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

एक दिन अरविन्द के माता-पिता भी उसे लेकर महात्मा जी के पास पहुंचे।

उनकी समस्या सुनने के बाद उन्होंने अगले दिन सुबह-सुबह अरविन्द को अपने पास बुलाया।

अरविन्द को ना चाहते हुए भी भोर में ही गुरु जी के पास जाना पड़ा।

गुरु जी उसे एक  बागीचे में ले गए और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए बोले।

बेटा तुम्हारा पसंदीदा फल कौन सा है

“आम” अरविन्द बोला।

ठीक है बेटा !  जरा वहां रखे बोरे में से कुछ आम की गुठलियाँ निकालना और उन्हें यहाँ जमीन में गाड़ देना।

अरविन्द को ये सब बहुत अजीब लग रहा था लेकिन गुरु जी बात मानने के अलावा उसके पास कोई चारा भी नहीं था।

उसने जल्दी से कुछ गुठलियाँ उठायीं और फावड़े से जमीन खोद उसमे गाड़ दीं।

फिर वे अरविन्द को लेकर वापस आश्रम में चले गए।

करीब आधे घंटे बाद वे अरविन्द से बोले, “जरा बाहर जा कर देखना उन  गुठलियों में से फल निकला की नहीं!”

“अरे! इतनी जल्दी फल कहाँ से निकल आएगा… अभी कुछ ही देर पहले तो हमने गुठलियाँ जमीन में गाड़ी थीं.”

“अच्छा, तो रुक जाओ थोड़ी देर बाद जा कर देख लेना!”

कुछ देर बाद उन्होंने अरविन्द से फिर बाहर जा कर देखने को कहा।

अरविन्द जानता था कि अभी कुछ भी नहीं हुआ होगा, पर फिर भी गुरु जी के कहने पर वह बागीचे में गया।

लौट कर बोला, “कुछ भी तो नहीं हुआ है गुरूजी…आप फल की बात कर रहे हैं अभी तो बीज से पौधा भी नहीं निकला है।”

“लगता है कुछ गड़बड़ है!”, गुरु जी ने आश्चर्य से कहा।

“अच्छा, बेटा ऐसा करो, उन गुठलियों को वहां से निकाल के कहीं और गाड़ दो…।”

अरविन्द को गुस्सा तो बहुत आया लेकिन वह दांत पीस कर रह गया।

कुछ देर बाद गुरु जी फिर बोले, “अरविन्द बेटा, जरा बाहर जाकर देखो…इस बार ज़रूर फल निकल गए होंगे.” 

अरविन्द इस बार भी वही जवाब लेकर लौटा और बोला, “मुझे पता था इस बार भी कुछ नहीं होगा…. कुछ फल-वाल नहीं निकला…।”

“….क्या अब मैं अपने घर जा सकता हूँ?”

“नहीं, नहीं रुको…चलो हम इस बार गुठलियों को ही बदल कर देखते हैं…क्या पता फल निकल आएं।”

इस बार अरविन्द ने अपना धैर्य खो दिया और बोला, “मुझे यकीन नहीं होता कि आपके जैसे नामी गुरु को इतनी छोटी सी बात पता नहीं कि कोई भी बीज लगाने के बाद उससे फल निकलने में समय लगता है….आपको  बीज को खाद-पानी देना पड़ता है ….लम्बा इन्तजार करना पड़ता है…तब कहीं जाकर फल प्राप्त होता है।”

गुरु जी मुस्कुराए और बोले-

बेटा, यही तो मैं तुम्हे समझाना चाहता था…तुम कोई काम शुरू करते हो…कुछ दिन मेहनत करते हो …फिर सोचते हो प्रॉफिट क्यों नहीं आ रहा!  इसके बाद तुम किसी और जगह वही या कोई नया काम शुरू करते हो…इस बार भी तुम्हे रिजल्ट नहीं मिलता…फिर तुम सोचते हो कि “यार! ये धंधा ही बेकार है!

एक बात समझ लो जैसे आम की गुठलियाँ तुरंत फल नहीं दे सकतीं, वैसे ही कोई भी कार्य तब तक अपेक्षित फल नहीं दे सकता जब तक तुम उसे पर्याप्त प्रयत्न और समय नहीं देते।

इसलिए इस बार अधीर हो आकर कोई काम बंद करने से पहले आम की इन गुठलियों के बारे में सोच लेना …. कहीं ऐसा तो नहीं कि तुमने उसे पर्याप्त समय ही नहीं दिया!

अरविन्द अब अपनी गलती समझ चुका था. उसने मेहनत और धैर्य के बल पर जल्द ही एक नया व्यवसाय खड़ा किया और एक कामयाब व्यक्ति बना।

*👪⏰🪜🔔✍️विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हमारी असफलता का कारण यह है कि हम दूसरों की देखा देखी में अपना समय पैसा और बहुत कुछ समाप्त कर देते है। हमें अपनी योग्यता के अनुसार किसी भी कार्य की योजना बनाकर सतर्कता पूर्वक उस कार्य में लग जाना चाहिए। यही हम सभी की सफलता का रहस्य है।*

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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 18 दिसंबर 2022

जैन दर्शन की प्रामाणिकता

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️ जैन धर्म के इतिहास की बूंदें*
*💪👩‍🚒 जैनदर्शन की प्रमाणिकता ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.कल पौष कृष्ण ग्यारस दिनांक 19 दिसंबर  2022 सोमवार  को अष्टम निधि प्रदाता चन्द्रप्रभ तीर्थंकर व  सभी विघ्नों के हर्ता पार्श्वनाथ तीर्थंकर सभी की मलिनता के विनाशक  1008 श्री चन्द्रप्रभ व पार्श्वनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

यह पहली बार था जब ड्यूसेन  को किसी हिन्दू योगी की एकाग्रता, बोध क्षमता और संयम की शक्ति का परिचय हुआ था। बात उस वक़्त की है जब स्वामी विवेकानंद जर्मनी गए थे। अपने प्रवास के दौरान वे पॉल ड्यूसेन नाम के अत्यंत प्रभावशाली दार्शनिक और विद्वान के घर मेहमान थे।

स्वामी विवेकानंद पॉल ड्यूसेन के अध्ययन कक्ष में बैठे हुए थे और दोनों में कुछ बातचीत हो रही थी। वहीं टेबल पर जर्मन भाषा में लिखी हुई एक किताब पड़ी हुई थी जो संगीत के बारे में थी। इस किताब के बारे में ड्यूसेन ने विवेकानंद से काफी तारीफ़ें की थीं।

स्वामीजी ने ड्यूसेन से वह किताब केवल एक घंटे के लिए देने के लिए कहा ताकि वे इसे पढ़ सकें। लेकिन विवेकनद की इस बात पर उस दार्शनिक को बहुत आश्चर्य हुआ। उनके आश्चर्य का कारण यह था कि एक तो वह किताब जर्मन भाषा में थी जो स्वामी विवेकानंद जानते नहीं थे। दूसरे वह किताब इतनी मोटी थी कि उसे पढ़ने में कई हफ्तों का समय चाहिए था।

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पॉल ड्यूसेन को विवेकानंद की इस बात का बुरा लगा क्योंकि वो खुद इस किताब को कई दिनों से पढ़ रहे थे और अभी आधा भी नहीं पढ़ पाये थे। उन्होने विवेकानंद से कहा-

“क्या केवल एक घंटे में आप इस किताब को पूरा पढ़ लेंगे?” “मैं इस को अभी तक सही से समझ नहीं पा रहा हूँ जबकि मुझे इसे पढ़ते हुए कई हफ्ते बीत चुके हैं। यह बहुत ही उच्च स्तर की किताब है और इसे समझना बहुत कठिन है।”

ड्यूसेन की इन बातों पर स्वामीजी ने उनसे कहा कि “ मैं विवेकानंद हूँ पॉल ड्यूसेन नहीं।“ इसके बाद पॉल ने वह पुस्तक देना स्वीकार कर लिया।

“स्वामी विवेकानंद ने बिना खोले ही किताब को पूरा याद कर लिया”
उस पुस्तक को स्वामी विवेकानंद ने कुछ देर तक अपनी दोनों हथेलियों के बीच दबा कर रखा और फिर पॉल ड्यूसेन के पास लौट आए। विवेकानन्द ने जर्मन दार्शनिक से कहा कि “इस किताब में कुछ खास नहीं है।”

फिर क्या था! उस महाशय के आश्चर्य का ठीकाना न रहा। उन्हे लगा कि विवेकानंद या तो झूठ बोल रहे हैं या उन्हे अपने ज्ञान का घमंड हो गया है। उन्हे यकीन नहीं हुआ कि एक घंटे में ही विवेकानंद उस पुस्तक के बारे में अपनी राय कैसे दे सकते हैं। और वो भी तब जब उन्हे जर्मन भाषा आती भी नहीं है।

अब जर्मन दार्शनिक ने विवेकानंद कि परीक्षा लेने के लिए एक एक कर के स्वामी विवेकानंद से उस किताब के अलग-अलग पन्नों में से पुछना शुरू किया। किन्तु पॉल ड्यूसेन के जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य हुआ जब विवेकानंद ने न केवल उन सभी पन्नों की जानकारियों के बारे में सही-सही बता दिया बल्कि उससे संबन्धित अलग-अलग विचारों को भी उनके सामने रख दिया। विवेकानंद की मानसिक शक्ति ने उस जर्मन दार्शनिक को अंदर से झकझोर दिया।

डरो मत ! स्वामी विवेकानंद प्रेरक प्रसंग
वे पूछ उठे “ यह कैसे संभव है?” इस पर विवेकानंद ने उत्तर दिया-

इसीलिए लोग मुझे स्वामी विवेकानंद कहते हैं।

उन्होने उस पॉल ड्यूसेन को ब्रह्मचर्य, त्याग और संयम व शुद्ध सात्विक भोजन के पालन से मिलने वाली शक्ति के बारे में बताया और कहा कि यदि मनुष्य एक संयमित जीवन जिये तो उसके मन की मेधा, स्मरण और अन्य शक्तियाँ जागृत हो सकती हैं। बाद में पॉल ड्यूसेन ने सनातन संस्कृति अपना कर अपना नाम देव-सेन रख लिया था।

आजकल दिन-प्रतिदिन नई पीढ़ी और युवावर्ग जाने-अनजाने में विदेशी रहन सहन और पाश्चात विचारों को अंधाधुंध अपनाती जा रही है। इतना ही नहीं उन्हे ऐसा करने में प्रतिष्ठा नजर आती है। भले ही वो रहन-सहन हमारे शरीर और मानसिक स्वस्थ्य के लिए हानिकारक ही क्यों न हो।

हमारी युवा पीढ़ी इस बात को भूल सी गयी है कि भारत की संस्कृति, परंपरा और अध्यात्म में जीवन के ऐसे बहुमूल्य अनुभव छुपे हैं जो किसी अन्य देश अथवा संस्कृति के पास नहीं हैं। मन की एकाग्रता, संयम, और त्याग से प्राप्त होने वाली उपलब्धियों के विषय में उनकी कोई इच्छा नहीं है।

किन्तु बार-बार हमारे देश के महान दार्शनिकों और योगियों के ज्ञान और श्रेष्ठता से पश्चिमी देशों के लोग अत्यंत प्रभावित हुए हैं और उन्हे भी यह मानना पड़ा है कि भारतीय जीवन शैली और वैदिक ज्ञान श्रेष्ठ है।

स्वामी विवेकानंद का जीवन हमें निर्भीक, साहसी, संयमी और परिश्रमी बनने की शिक्षा देता है। एक ओर दिगंबर जैनदर्शन के प्राचीन ग्रंथ ज्ञान-विज्ञान के उच्चतम अनुभवों की शिक्षा देते हैं तो दूसरी ओर हमारे अन्य ग्रंथ दैनिक जीवन को मर्यादित और अनुशासित जीने की सलाह देते हैं।

*विशेष :-भव्य आत्माओं आज भी संपूर्ण विश्व में जैन दिंगबर प्राचीन ग्रंथों पर विश्व के वैज्ञानिक शोध कर रहे है। अमेरिका के सबसे बड़ी शोधशाला में आज भी जैन शास्त्रों का भंडार भरा हुआ है। उनकी शोधशाला में भगवान महावीर स्वामी की फोटो लगी हुई है।वे उन्हें सबसे बड़ा वैज्ञानिक मानते है,उनका कहना है कि इस वैज्ञानिक ने 2500 वर्ष पहले जो बात कहीं है उन्हें हम प्रयोग व अध्ययन के द्वारा प्रमाणित कर चुके है। आज भी बहुत सी बातें पर शोध कार्य जारी है। अतः हम सभी भव्य आत्माओं को जैनदर्शन की सच्चाई जानकर अपनी शक्ति अनुसार आचरण में उतारकर जीवन सार्थक करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 17 दिसंबर 2022

मेरी योग्यता

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरी योग्यता ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. पौष कृष्ण ग्यारस दिनांक 19 दिसंबर  2022 सोमवार  को अष्टम निधि प्रदाता चन्द्रप्रभ तीर्थंकर व  सभी विघ्नों के हर्ता पार्श्वनाथ तीर्थंकर सभी की मलिनता के विनाशक  1008 श्री चन्द्रप्रभ व पार्श्वनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक  महोत्सव हैं।*
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हमारे गांव के पास एक बड़ी सी नदी के किनारे कुछ पेड़ थे जिसकी टहनियां नदी के धारा के ऊपर तक भी फैली हुई थीं।

एक दिन एक चिड़ियों का परिवार अपने लिए घोसले की तलाश में भटकते हुए उस नदी के किनारे पहुंच गया।

चिड़ियों ने एक अच्छा सा पेड़ देखा और उससे पूछा, “हम सब काफी समय से अपने लिए एक नया मजबूत घर बनाने के लिए वृक्ष तलाश रहे हैं, आपको देखकर हमें बड़ी प्रसन्नता हुई, आपकी मजबूत शाखाओं पर हम एक अच्छा सा घोंसला बनाना चाहते हैं ताकि बरसात शुरू होने से पहले हम खुद को सुरक्षित रख सकें। क्या आप हमें इसकी अनुमति देंगे?”

पेड़ ने उनकी बातों को सुनकर साफ इनकार कर दिया और बोला-

मैं तुम्हे इसकी अनुमति नहीं दे सकता…जाओ कहीं और अपनी तलाश पूरी करो।

चिड़ियों को पेड़ का इनकार बहुत बुरा लगा, वे उसे भला-बुरा कह कर सामने ही एक दूसरे पेड़ के पास चली गयीं।

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दूसरे पेड़ से भी उन्होंने घोंसला बनाने की अनुमति मांगी।

यह पेड़ आसानी से तैयार हो गया और उन्हें ख़ुशी-ख़ुशी वहां रहने की अनुमति दे दी।

चिड़ियों ने उस पेड़ की खूब प्रशंसा की और अपना घोंसला बना कर वहां रहने लगीं।

समय बीता… बरसात का मौसम शुरू हो गया। इस बार की बारिश भयानक थी…नदियों में बाढ़ आ गयी…नदी अपने तेज प्रवाह से मिटटी काटते-काटते और चौड़ी हो गयी…और एक दिन तो इतनी बारिश हुई कि नदी में बाढ़ सा आ गयी तमाम पेड़-पौधे अपनी जड़ों से उखड़ कर नदी में बहने लगे।

और इन पेड़ों में वह पहला वाला पेड़ भी शामिल था जिसने उस चिड़ियों को अपनी शाखा पर घोंसला बनाने की अनुमति नही दी थी।

उसे जड़ों सहित उखड़कर नदी में बहता देख चिड़ियों कर परिवार खुश हो गया, मानो कुदरत ने पेड़ से उनका बदला ले लिया हो।

चिड़ियों ने पेड़ की तरफ उपेक्षा भरी नज़रों से देखा और कहा, “एक समय जब हम तुम्हारे पास अपने लिए मदद मांगने आये थे तो तुमने  साफ इनकार कर दिया था, अब देखो तुम्हारे इसी स्वभाव के कारण तुम्हारी यह दशा हो गई है।”

इसपर इस पेड़ ने मुस्कुराते हुए उन चिड़िया से कहा-

मैं जानता था कि मेरी उम्र हो चली है और इस बरसात के मौसम में मेरी कमजोर पड़ चुकी जडें टिक नहीं पाएंगी… और मात्र यही कारण था कि मैंने तुम्हें इनकार कर दिया था क्योंकि मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से तुम्हारे ऊपर विपत्ति आये।

फिर भी तुम्हारा दिल दुखाने के लिए मुझे क्षमा करना… और ऐसा कहते-कहते पेड़ पानी में बह गया।  

चिड़ियाँ अब अपने व्यवहार पर पछताने के अलावा कुछ नही कर सकती थीं।

 अक्सर हम दूसरों के रूखे व्यवहार या ‘ना’ का बुरा मान जाते हैं, लेकिन कई बार इसी तरह के व्यवहार में हमारा हित छुपा होता है। खासतौर पे जब बड़े-बुजुर्ग या माता-पिता बच्चों की कोई बात नहीं मानते तो बच्चे उन्हें अपना दुश्मन समझ बैठते हैं जबकि सच्चाई ये होती है कि वे हमेशा अपने बच्चों की भलाई के बारे में ही सोचते हैं।

इसलिए, यदि आपको भी कहीं से कोई ‘इनकार’ मिले तो उसका बुरा ना माने क्या पता उन चिड़ियों की तरह एक ‘ना’ आपके जीवन से भी विपत्तियों को दूर कर दे!

*⏰👪🕉️🔔🌞विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हर कोई अपने अनुभव के आधार पर लोगों की मदत के लिए हां या ना कर देता है। हमें अपनी योग्यता के अनुसार मार्गदर्शक मिल जाते है। जबतक जीव का विशेष पुण्य का उदय नहीं होगा तब तक विश्व की कोई भी शक्ति हमारे लिए सहायक नहीं हो सकती। अतः हम सभी को अपनी शक्ति अनुसार बुद्धि विवेक का इस्तेमाल करते हुए जीवन में पुण्य संचय कर रखना चाहिए ताकि विषम परिस्थितियों में हमारे द्वारा किया गया पुण्य  विपत्तियों से उभरने में साथ हो।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 16 दिसंबर 2022

राजा की धर्म परिक्षा

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 राजा की धर्म परिक्षा ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. पौष कृष्ण ग्यारस दिनांक 19 दिसंबर  2022 सोमवार  को अष्टम निधि प्रदाता चन्द्रप्रभ तीर्थंकर व  सभी विघ्नों के हर्ता पार्श्वनाथ तीर्थंकर सभी की मलिनता के विनाशक  1008 श्री चन्द्रप्रभ व पार्श्वनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

शीनर पुत्र महाराजा शिवि बड़े ही दयालु और शरणागत वात्सल्य के धनी थे। एक बार राजा एक महान यज्ञ कर रहे थे। इतने में एक कबूतर आता है और राजा की गोद में छिप जाता है। पीछे से एक विशाल बाज वहाँ आता है और राजा से कहता है –

राजन् मैने तो सुना था आप बड़े ही धर्मनिष्ठ राजा हैं फिर आज धर्म विरुद्ध आचरण क्य़ो कर रहे हैं। यह कबूतर मेरा आहार है और आप मुझसे मेरा आहार छीन रहे हैं।

इतने में कबूतर राजा से कहता है 

महाराज मैं इस बाज से डरकर आप की शरण में आया हूँ। मेरे प्राणो की रक्षा कीजिए महाराज।

राजा धर्म संकट में पड़ जाते हैं। पर राजा अपनी बुद्धि और विवेक का प्रयोग करके कहते हैं।

राजा तुमसे डर कर यह कबूतर प्राण रक्षा के लिए मेरी शरण में आया हैं। इसलिए शरण में आये हुए इस कबूतर का मैं त्याग नहीं कर सकता। क्य़ोकि जो लोग शरणागत की रक्षा नहीं करते उनका कहीं भी कल्य़ाण नहीं होता।

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बाज  राजन् प्रत्येक प्राणी भूख से व्याकुल होते हैं। मैं भी इस समय भूख से व्याकुल हूँ। यदि मुझे इस समय य़ह कबूतर नहीं मिला तो मेरे प्राण चले जायेंगे। मेरे प्राण जाने पर मेरे बाल-बच्चो के भी प्राण चले जाय़ेंगे। हे राजन्! इस तरह एक जीव के प्राण बचाने की जगह कई जीव के प्राण चले जाय़ेंगे।

राजा शरण में आये इस कबूतर को तो मैं तुम्हें नहीं दे सकता। किसी और तरह तुम्हारी भूख शान्त हो सकती हो तो बताओ। मैं अपना पूरा राज्य़ तुम्हें दे सकता हूँ, पूरे राज्य़ का आहार तुम्हें दे सकता हूँ, अपना सब कुछ तुम्हें दे सकता हूँ पर य़ह कबूतर तुम्हें नही दे सकता।

बाज  हे राजन्  यदि आपका इस कबूतर पर इतना ही प्रेम है, तो इस कबूतर के ठीक बराबर का तौलकर आप अपना मांस मुझे दे दीजिए मैं अधिक नही चाहता।

राजा तुमने बड़ी कृपा की तुम जितना चाहो उतना मांस मैं देने को तैयार हूँ। यदि यह शरीर प्राणियों के उपकार के काम न आये तो प्रतिदिन इसका पालन पोषण करना बेकार है। हे बाज मैं तुम्हारे कथनानुसार ही करता हूँ।

यह कहकर राजा ने एक तराजू मंगवाया और उसके एक पलडे में उस कबूतर को बैठाकर दूसरे में अपना मांस काट-काट कर रखने लगे और उस कबूतर के साथ तौलने लगे। कबूतर की रक्षा हो और बाज के भी प्राण बचें, दोनो का ही दुख निवारण हो इसलिए महाराज शिवि अपने हाथ से अपना मांस काट-काट के तराजू में रखने लगे।

तराजू में कबूतर का वजन मांस से बढता ही गया, राजा ने शरीर भर का मांस काट के रख दिया परन्तु कबूतर का पलडा नीचे ही रहा। तब राजा स्वयं तराजू पर चढ गये।

जैसे ही राजा तराजू पर चढे वैसे ही कबूतर और बाज दोनो ही अन्तर्धान हो गये और उनकी जगह इन्द्र और अग्नि देवता प्रगट हुए।

इन्द्र ने कहा राजन् तुम्हारा कल्याण हो। और यह जो कबूतर बना था यह अग्नि है। हम लोग आपकी परीक्षा लेने आये थे। आपने जैसा दुस्कर कार्य किया है, वैसा आज तक किसी ने नहीं किया। जो मनुष्य अपने प्राणो को त्याग कर भी दूसरे के प्राणो की रक्षा करता है, वह परम धाम को प्राप्त करता है।

अपना पेट भरने के लिए तो पशु भी जीते हैं, पर प्रशंसा के योग्य जीवन तो उन लोगो का है जो दूसरों के लिए जीते हैं।

इन्द्र ने राजा को वरदान देते हुए कहा तुम चिर काल तक दिव्य रूप धारण करके पृथ्वी पर भगवान महावीर स्वामी के संदेश *जियो और जीने दो* पालन कर आयु के अन्त में समाधि मरण कर स्वर्ग में जाओगे। वहां से सीमंधर आदि तीर्थंकर भगवानो की देशना सुनकर भविष्य में दिगंबर मुनि बनकर जैन धर्म की प्रभावना करते हुए मोक्ष को प्राप्त होंगे ।इतना कहकर वे दोनो अन्तर्धान हो गये।

भारत वह भूमि है जहाँ राजा शिवि और दधीचि जैसे लोग अवतरित हुए हैं, जिन्होंने परोपकार के लिए अपना जिन्दा शरीर दान दे दिया। और एक हम लोग हैं जिन्दा की तो बात छोड़िए मरने के बाद भी अंग दान नहीं करते।

मरने के बाद यह शरीर कूड़ा हो जाता है, उसमें से बदबू उठने लगती है, घर और परिवारी जन जल्द से जल्द उसे घर से बाहर ले जाते हैं। अगर वह शरीर काम का होता तो वह उसको जलाते या गाडते क्यों?

पर आपके लिए जो काम का नहीं है, वह किसी को जीवन दे सकता है। किसी को रोशनी दे सकता हैं। और मेडिकल साइंस को एक नई दिशा दे सकता है। और ऐसा तब हो सकता है जब आप इस मृत शरीर को दान करें। इसलिए दोस्तो अब समय आ गया है अंतेष्टि क्रिया को बदलने का और अंगदान कर परोपकार के भागीदार बनने का। कृपया इस बात पर विचार करें और अपना निर्णय लें।

*⏰👪🕉️➡️🌞विशेष : -भव्य‌‌‌ आत्माओं, आप सभी आज ही सच्चे जैनदर्शन को समझकर शक्ती अनुसार आचरण करते हुए वर्तमान के साथ भविष्य भी सुरक्षित कर सकते है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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