मंगलवार, 6 दिसंबर 2022

धार्मिक आस्था का चमत्कार

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 धार्मिक आस्था का चमत्कार ✍️🐒*

*🔔🎪🔊 तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना*
*🔔1. मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा, दिनांक 7 दिसंबर  2022 बुधवार को तीसरे तीर्थंकर संभवनाथ सभी के असंभव को संभव करने वाले 1008 श्री संभवनाथ भगवान जी का तप कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सार्थक करें।*

▶️मासूम छह वर्षीय गुड़िया बिस्तर से उठी और अपना गुल्लक ढूँढने लगी।

अपनी तोतली आवाज़ में उसने माँ से पूछा, “माँ, मेला गुल्लक कहाँ गया?”

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

माँ ने आलमारी से गुल्लक उतार कर दे दिया और अपने काम में व्यस्त हो गयी।

मौका देखकर गुड़िया चुपके से बाहर निकली और पड़ोस के मंदिर जा पहुंची।

सुबह-सुबह मंदिर में भीड़ अधिक थी…. हाथ में गुल्लक थामे वह किसी तरह से बाल-गोपाल के सामने पहुंची और  पंडित जी से कहा, “बाबा, जला कान्हा को बाहल बुलाना!”

“अरे बेटा कान्हा अभी सो रहे हैं… बाद में आना..”,पंडित जी ने मजाक में कहा.

“कान्हा उठो.. जल्दी कलो … बाहल आओ…”, गुड़िया चिल्ला कर बोली।

हर कोई गुड़िया को देखने लगा।

“पंडित जी, प्लीज… प्लीज कान्हा को  उठा दीजिये…”

“क्या चाहिए तुमको कान्हा से?”

“मुझे चमत्काल चाहिए… और इसके बदले में मैं कान्हा को अपना ये गुल्लक भी दूँगी… इसमें 100 लूपये हैं …कान्हा इससे अपने लिए माखन खरीद सकता है. प्लीज उठाइए न उसे…इतने देल तक कोई छोता है क्या???”

“ चमत्कार!, किसने कहा कि कान्हा तुम्हे चमत्कार दे सकता है?”

“मम्मा-पापा बात कल लहे थे कि भैया के ऑपरेछन के लिए 10 लाख लूपये चाहिए… पल  हम पहले ही अपना गहना… जमीन सब बेच चुके हैं…और नाते-रिश्तेदारों ने भी फ़ोन उठाना छोड़ दिया है…अब कान्हा का कोई चमत्काल ही भैया को बचा सकता है…”

पास ही खड़ा एक व्यक्ति गुड़िया की बातें बड़े ध्यान से सुन रहा था, उसने पूछा, “बेटा क्या हुआ है तुम्हारे भैया को?”

“ भैया को ब्लेन ट्यूमल है…”

“ब्रेन ट्यूमर???”

“जी अंकल,  बहुत खतल्नाक बिमाली होती है…”

व्यक्ति मुस्कुराते हुए बाल-गोपाल की मूर्ती निहारने लगा…उसकी आँखों में श्रद्धा के आंसूं बह निकले…रुंधे गले से वह बोला, “अच्छा-अच्छा तो तुम वही लड़की हो… कान्हा ने बताया था कि तुम आज सुबह यहाँ मिलोगी… मेरा नाम ही चम्त्कार है… लाओ ये गुल्लक मुझे दे दो और मुझे अपने घर ले चलो…”

वह व्यक्ति लन्दन का एक प्रसिद्द न्यूरो सर्जन था और अपने माँ-बाप से मिलने भारत आया हुआ था. उसने गुल्लक में पड़े मात्र सौ रुपयों में ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन कर दिया और गुड़िया के भैया को ठीक कर दिया।
सचमुच, अगर आपमें अटूट श्रद्धा हो और आप कोई नेक काम करना चाहते हैं तो कृष्णा किसी न किसी रूप में आपकी मदद ज़रूर करते हैं!
यही है आस्था का चमत्कार!

 *भले ये एक काल्पनिक कहानी हो लेकिन कई बार सत्य कल्पना से भी परे होता है और दुनिया में ऐसी हजारों-लाखों घटनाएं हैं जहाँ असंभव सी लगने वाले चीजें भी विश्वास के दम पर संभव बन जाती हैं. इसलिए, ईश्वर में यकीन रखते हुए अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत करिए… क्या पता एक दिन आपके लिए कोई चमत्कार हो जाए या आप किसी और के लिए चमत्कार कर दें।*

*विशेष : - भव्य आत्माओं, आज हम सभी का परिवार धार्मिक और व्यवहारिक संस्कारों को भूलते जा रहे है। इसके कारण हमारा खानपान व रहन सहन बदल रहा है। इसके कारण से आनेवाली पीढ़ी में संस्कार विहीनता के कारण अनेक प्रकार की बिमारीयां हो रही है। फिर भी अगर दवा के साथ दुआ मिल जाए तो असाध्य रोगों से छुटकारा संभव होता है। अतः आप सभी चौबीस घंटों में कम से कम चौबीस मिनट के लिए स्वयं के धर्म के बारे में चिंतन कर अपने परिवार को धार्मिक संस्कार अवश्य ही दे।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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