मंगलवार, 20 दिसंबर 2022

जिद व समर्पण की सच्चाई

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒जिद व समर्पण की सच्चाई ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर  प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. पौष कृष्ण चौदस दिनांक 22 दिसंबर  2022 गुरुवार  को दसवें तीर्थंकर सभी को शीतलता प्रदान करने वाले   1008 श्री शीतलनाथ भगवान जी का ज्ञान  कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

एक बार मूर्तिकार नवीन एक पत्थर को छेनी और हथौड़ी से काट कर  मूर्ति का रूप दे रहा था। जब पत्थर  काटा जा रहा था, तो उसको बहुत दर्द हो रहा था।

कुछ देर तो पत्थर ने बर्दाश्त किया पर जल्द ही उसका धैर्य जवाब दे गया।

वह नाराज़ होते हुए बोला, ” बस ! अब और नहीं सहा जाता।छोड़ दो मुझे मैं तुम्हारे वार को अब और नहीं सह सकता… चले जाओ यहाँ से!”

मूर्तिकार ने समझाया, “अधीर मत हो! मैं तुम्हे भगवान् की मूरत के रूप में तराश रहा हूं। अगर तुम कुछ दिनों का दर्द बर्दाश्त कर लोगे तो जीवन भर लोग तुम्हे पूजेंगे… दूर-दूर से लोग तुम्हारे दर्शन करने आयेंगे। दिन-रात श्रृद्धालु तुम्हारी देख-भाल में लगे रहेंगे।”

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और ऐसा कह कर उसने अपने औजार उठाये ही थे कि पत्थर क्रोधित होते हुए बोला, “मुझे मेरी ज़िन्दगी खुद जीने दो… मैं जानता हूँ मेरे लिए क्या अच्छा है क्या बुरा… मैं आराम से यहाँ पड़ा हूँ…चले जाओ मैं अब जरा सी भी तकलीफ नहीं सह सकता!”

मैं जानता हूं तुम्हे दर्द बहुत हो रहा है…पर अगर आज तुम अपना आराम देखोगे तो कल को पछताओगे… मैं तुम्हारे गुणों को देख सकता हूं तुम्हारे अन्दर आपार संभावनाएं हैं… यू यहा पड़े-पड़े अपना जीवन बर्बाद मत करो! मूर्तिकार ने समझाया।

पर पत्थर पर उसकी बात का कोई असर नहीं हुआ, वह अपनी बात पर ही अड़ा रहा।

मूर्तिकार पत्थर को वहीँ  छोड़ आगे बढ़ गया।

सामने ही उसे एक दूसरा अच्छा पत्थर दिख गया। उसने उसे उठाया और उसकी मूर्ति बना दी।

दूसरे पत्थर ने दर्द बर्दाश्त कर लिया और वो भगवान की वीतरागी मूर्ति बन गया, लोग रोज उसका अभिषेक पूजन कर भगवान के गुणों का अपनी शक्ति अनुसार करते थे। वहां के श्रेत्रपाल ने लोगों की भक्ति वश वहां पर अनेक चमत्कार किए। सभी लोगों से प्राप्त दान से वहां सर्व सुविधायुक्त धर्मशाला, भोजनशाला ओर संतो के निवास के लिए अन्य अनेक व्यवस्था के साथ वह क्षैत्र प्रसिद्ध हो गया। देन-विदेश से लोग उसके दर्शन करने आने लगे।

फिर एक दिन एक और पत्थर उस मंदिर में लाया गया और उस पर उस मंदिर का नाम लिखा गया।एक कोने में स्थापित कर दिया गया। वह कोई और नहीं बल्कि वही पत्थर था जिसने मूर्तिकार को उसे छूने से मना कर दिया था।

अब वह मन ही मन पछता रहा था कि काश उसने उसी वक्त दर्द सह लिया होता तो आज समाज में उसकी भी पूछ होती… सम्मान होता… कुछ दिनों की वह पीड़ा इस जीवन भर के कष्ट से बचा लेती!

 हमारे लिए निर्णय लेने का ये सही समय है कि हम आज दर्द बर्दाश्त करना है या अभी मौज-मस्ती करनी है और फिर जीवन भर का दर्द झेलना है।  आज आप जिस किसी लक्ष्य  की तैयारी कर रहे हों… जो भी अपनी योग्यता के अनुसार करने की कोशिश कर रहे हों…जिस किसी क्षेत्र में योग्यता प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हों…उसमे अपना 100% समर्पण व उपयोग लगाइए… होने दीजिये अपने ऊपर तकलीफों के वार…हार मत मानिए… उस दूसरे पत्थर की तरह अभी सह लीजिये और अपने लक्ष्य को प्राप्त करिए ताकि पहले पत्थर की तरह आपको जीवन भर कष्ट ना सहना पड़े।

*⏰🔔✍️🔑🧠विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, आज हमें अपनी योग्यता व रुचि के अनुसार अपनी मंजिल का चुनाव करना चाहिए।उस मंजिल की प्राप्ति के लिए स्वयं का श्रृद्धा विश्वास के साथ उपयोग भी होना चाहिए। चौबीस घंटे हमें अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभिन्न योजनाओं के द्वारा अपनी दृढ़ता को जागृत रखकर मंजिल पर पहुंचना चाहिए। मंजिल पर पहुंच कर वहां बनें रहने के लिए भी समय समय पर योजना बनाते रहना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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