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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦 सत्य घटना सभी के काम की*
*💪👩🚒 दृढ़ता पूर्वक कर्तव्य पालन से ✍️🐒*
एक बार कैंसर के एक बहुत मशहूर डॉक्टर डॉ. तेजल को नयी दिल्ली एक अवार्ड सेरेमनी में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड देने के लिए बुलाया जाता है।
इस आवर्ड को लेकर डॉ. तेजल ही नहीं पूरा झुंझुनूं शहर बहुत उत्साहित था क्योंकि डॉ. साहब न सिर्फ एक काबिल डॉक्टर थे बल्कि एक बहुत नेक दिल इंसान भी थे।
अवार्ड सेरेमनी वाले दिन वो सुबह फ्लाइट पकड़ने के लिए एअरपोर्ट पहुँचते हैं,पर कुछ टेक्निकल खराबी आ जाने के कारण वो फ्लाइट कैंसिल हो जाती है.. और दुर्भाग्य वश अन्य कोई फ्लाइट भी मौजूद नहीं थी।
डॉ. तेजल सोचते हैं चलो कोई बात नहीं सेरेमनी तो शाम को है… और झुंझुनूं से दिल्ली 6-7 घंटे का ही रास्ता है तो चलो टैक्सी से निकल लेते हैं।
वे जल्द ही एक टैक्सी हायर करके दिल्ली की तरफ बढ़ने लगते हैं…आधे रास्ते तक तो सब ठीक रहता है लेकिन अचानक ही ड्राईवर कहता — “साहब! सामने देखिये… बहुत बड़ा जाम लगा हुआ है… अगर हम इस रास्ते से जाते हैं तो पहुँचने में रात हो जायेगी! अगर आप कहें तो कोई दूसरा रास्ता ट्राई करूँ…”
डॉ तेजल पहले तो ड्राईवर को मना कर देते हैं पर जब 10-15 मिनट बाद भी गाड़ियाँ टस से मस नहीं होती हैं तो वे ड्राईवर से दूसरा रास्ता ट्राई करने को कहते हैं।
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ड्राईवर अपने अंदाजे पर गाड़ी सर्विस लेन पर ले लेता है और जो पहले कट मिलता है उससे बायीं तरफ मुड़ जाता है। उबड़-खाबड़ रास्तों पर घंटे भर चलने के बाद भी कोई पक्की सड़क या रास्ता नहीं दिखाई देता।
डॉ. तेजल बिलकुल मायूस हो जाते हैं तभी उनको दूर एक झोपड़ी दिखाई देती है।
वो देखिये ड्राईवर साहब उधर एक झोपड़ी है, चलिए वहीं चल कर पता पूछते हैं।
ड्राईवर तुरंत गाड़ी रोकता है और वे दोनों उतर कर उस झोपड़ी के पास पहुँचते है।
“अरे कोई है!”, ड्राईवर जोर से पुकारता है।
झोपड़ी से एक बूढी सी औरत बाहर निकलती है।
“क्या बात है बेटा, क्यों पुकार रहे हो?”
“माता जी हम लोगों को दिल्ली जाना है पर हम रास्ता भटक कर इधर आ गए हैं क्या आप हमारी मदद कर सकती हैं?”, ड्राईवर वृद्धा से निवेदन करता है.
बिलकुल मदद करुँगी बेटा पहले आप लोग अन्दर आकर पानी तो पी लो।हम जैन होने से अतिथि का सत्कार करना अपना कर्तव्य समझते है। आप हमारे लिए उपकारी हो,आपकी सेवा से ही हमारे पापों का क्षय होगा। अतः आप अंदर पधारे।
वह उन दोनों के लिए पानी और कुछ गुड़ लेकर आती है।
डॉ. तेजल उस गरीब की आवभगत से खुश हो जाते हैं और पूछते हैं – “आप यहाँ अकेली रहती हैं क्या?”
नहीं-नहीं, मेरा पोता भी मेरे साथ रहता है. बिचारे के माता-पिता बचपन में ही मर गए थे तबसे मैं ही इसका ख़याल रखती हूँ… देखिये न बेचारा बिस्तर में बीमार पड़ा है…शायद ये भी अब कुछ दिनों बाद मुझे छोड़ कर चला जाएगा…।
और इतना कहते-कहते उनकी आँखों से आंसूं निकलने लगे।
डॉ. तेजल आगे बढ़ते हैं और वृद्धा को ढांढस बंधाते हुए कहते हैं, कुछ नहीं होगा इसे बताइये क्या हुआ है इस नन्हे बालक को।
इस अभागे को कैंसर है साहब…लोग कहते हैं इसका इलाज सिर्फ झुंझुनूं के डॉ. तेजल के पास है… बहुत कोशिश की, कई बार चक्कर लगाए पर डॉ. साहब से मुलाक़ात नहीं हो पायी…अब तो सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दिया है…अगर मैंने सच्चे मन से उसे माना होगा तो एक दिन वो मेरी मदद ज़रूर करेगा।
इतना सुनते ही डॉ. तेजल का गला रुंध गया…आँखों में नमी आ गयी…वे पूरे दिन के घटनाक्रम को सोचने लगे कि कैसे बुढ़िया का यकीन हकीकत बन गया…कैसे उस ऊपर वाले ने अपने बंदे के उन्हें यहाँ भेजा!
गहरी सांस लेते हुए वे बोले, “मैं ही हूँ डॉ. तेजल आपके ईश्वर ने ही मुझे यहाँ भेजा है।चलिए मेरे साथ हम आज से ही इस बालक का इलाज शुरू करेंगे!”
फिर वे ड्राईवर से बोले, “ड्राईवर गाडी वापस ले लो!”
“ल..ल..लेकिन वो आपका लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड!”, ड्राईवर अचरज से बोला।
लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड कभी भी किसी की लाइफ से ज़रूरी नहीं हो सकता है…
जैसा मैं कहता हूँ वैसा करो” और सभी गाड़ी में बैठ कर झुंझुनूं वापस लौट गए।और बच्चे का इलाज करके उसे एक दम सही कर दिया।
आज लोगों की नज़र में भले डॉ. तेजल ने एक जीवन बचाने के लिए जीवन भर की मेहनत का अवार्ड छोड़ दिया था..पर ऐसा करके उन्हें अन्दर से जो ख़ुशी और संतोष मिला था वो ऐसे हज़ारों अवार्ड से भी बड़ा था।
कहते हैं ऊपर वाले के घर देर है अंधेर नहीं। यदि आप सच्चे दिल से किसी चीज में यकीन करते हैं और उसके लिए हर संभव प्रयास करते हैं तो एक न एक दिन वो आपको मिल ही जाती है।
इसलिए उस बूढी औरत की तरह दृढ़ विश्वास के साथ जो कुछ भी आप पाना चाहते हैं उसके लिए कर्म करिए…लेकिन फल कब कैसे कहाँ मिलेगा वो भगवान् पर छोड़ दीजिये।
*🕉️👪⏰➡️🎪विशेष:-भव्य आत्माओं, आज हम सभी को अपने कर्तव्य का पालन करते हुए श्री जी पर विश्वास रखना चाहिए। जैसे जैसे श्रद्धा पूर्वक हम अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे वैसे ही हमारी मंजिल हमें सरलता पूर्वक प्राप्त होगी।अब आप स्वयं ही अपना आकलन कर सकते है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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