सोमवार, 31 अक्टूबर 2022

मेरा कर्तव्य

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🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरा कर्तव्य ✍️🐒*

कैसोवैरी चिड़िया को बचपन से ही बाकी चिड़ियों के बच्चे चिढाते थे।

कोई कहता, ” जब तू उड़ नहीं सकती तो चिड़िया किस काम की।”, तो कोई उसे ऊपर पेड़ की डाल पर बैठ कर चिढाता कि,” अरे कभी हमारे पास भी आ जाया करो…जब देखो जानवरों की तरह नीचे चरती रहती हो…”

और ऐसा बोलकर सब के सब खूब हँसते!

कैसोवैरी चिड़िया शुरू-शुरू में इन बातों का बुरा नहीं मानती थी लेकिन किसी भी चीज की एक सीमा होती है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

बार-बार चिढाये जाने से उसका दिल टूट गया! वह उदास बैठ गयी और आसमान की तरफ देखते हुए बोली,

“हे ईश्वर, तुमने मुझे चिड़िया क्यों बनाया…और बनया तो मुझे उड़ने की काबिलियत क्यों नहीं दी… देखो सब मुझे कितना चिढ़ाते हैं… अब मैं यहाँ एक पल भी नहीं रह सकती, मैं इस जंगल को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ कर जा रही हूँ!”

और ऐसा कहते हुए कैसोवैरी चिड़िया आगे बढ़ गयी।

अभी वो कुछ ही दूर गयी थी कि पीछे से एक भारी-भरकम आवाज़ आई-

रुको कैसोवैरी! तुम कहाँ जा रही हो!

कैसोवैरी ने आश्चर्य से पीछे मुड़ कर देखा, वहां खड़ा जामुन का पेड़ उससे कुछ कह रहा था।

“कृपया तुम यहाँ से मत जाओ! हमें तुम्हारी ज़रुरत है। पूरे जंगल में हम सबसे अधिक तुम्हारी वजह से ही फल-फूल पाते हैं…. वो तुम ही हो जो अपनी मजबूत चोंच से फलों को अन्दर तक खाती हो और हमारे बीजों को पूरे जंगल में बिखेरती हो…हो सकता है बाकी चिड़ियों के लिए तुम मायने ना रखती हो लेकिन हम पेड़ों के लिए तुमसे बढ़कर कोई दूसरी चिड़िया नहीं है…मत जाओ…तुम्हारी जगह कोई और नहीं ले सकता!”

पेड़ की बात सुन कर कैसोवैरी चिड़िया को जीवन में पहली बार एहसास हुआ कि वो इस धरती पर बेकार में मौजूद नहीं है, भगवान् ने उसे एक बेहद ज़रूरी काम के लिए भेजा है और सिर्फ बाकी चिड़ियों की तरह न उड़ पाना कहीं से उसे छोटा नहीं बनाता!

आज एक बार फिर कैसोवैरी चिड़िया बहुत खुश थी, वह ख़ुशी-ख़ुशी जंगल में वापस लौट गयी।

🌞🔔⏰🪜↔️भव्य आत्माओं:- कैसोवैरी चिड़िया की तरह ही कई बार हम इंसान भी औरों को देखकर कमजोर महसूस करने लगते हैं। हम सोचते हैं कि उसके पास ये है…उसके पास वो है….सब कितने भाग्यशाली हैं…ओर सबकुछ है उसके पास।

हमें कभी भी बेकार के तुलनात्मकता में नहीं पड़ना चाहिए! हर एक जीव अपने आप में महत्वपूर्ण है…अलग है। हर किसी के अन्दर कोई न कोई बात है जो उसे ख़ास बनाती है..हाँ हो सकता है कि वो पूरी दुनिया के लिए बस एक इंसान हो लेकिन किसी एक के लिए वो पूरी दुनिया हो सकता है!

*इसलिए जीवन के महत्व को समझिये और अपने इस अमूल्य जीवन को सकारात्मक विचारों का तोहफा दीजिये….यकीन जानिए सकारात्मक सोच का ये एक तोहफा आपकी पूरे जीवन को शानदार बना देगा!*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मेरा कर्तव्य

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरा कर्तव्य ✍️🐒*

कैसोवैरी चिड़िया को बचपन से ही बाकी चिड़ियों के बच्चे चिढाते थे।

कोई कहता, ” जब तू उड़ नहीं सकती तो चिड़िया किस काम की।”, तो कोई उसे ऊपर पेड़ की डाल पर बैठ कर चिढाता कि,” अरे कभी हमारे पास भी आ जाया करो…जब देखो जानवरों की तरह नीचे चरती रहती हो…”

और ऐसा बोलकर सब के सब खूब हँसते!

कैसोवैरी चिड़िया शुरू-शुरू में इन बातों का बुरा नहीं मानती थी लेकिन किसी भी चीज की एक सीमा होती है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
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बार-बार चिढाये जाने से उसका दिल टूट गया! वह उदास बैठ गयी और आसमान की तरफ देखते हुए बोली,

“हे ईश्वर, तुमने मुझे चिड़िया क्यों बनाया…और बनया तो मुझे उड़ने की काबिलियत क्यों नहीं दी… देखो सब मुझे कितना चिढ़ाते हैं… अब मैं यहाँ एक पल भी नहीं रह सकती, मैं इस जंगल को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ कर जा रही हूँ!”

और ऐसा कहते हुए कैसोवैरी चिड़िया आगे बढ़ गयी।

अभी वो कुछ ही दूर गयी थी कि पीछे से एक भारी-भरकम आवाज़ आई-

रुको कैसोवैरी! तुम कहाँ जा रही हो!

कैसोवैरी ने आश्चर्य से पीछे मुड़ कर देखा, वहां खड़ा जामुन का पेड़ उससे कुछ कह रहा था।

“कृपया तुम यहाँ से मत जाओ! हमें तुम्हारी ज़रुरत है। पूरे जंगल में हम सबसे अधिक तुम्हारी वजह से ही फल-फूल पाते हैं…. वो तुम ही हो जो अपनी मजबूत चोंच से फलों को अन्दर तक खाती हो और हमारे बीजों को पूरे जंगल में बिखेरती हो…हो सकता है बाकी चिड़ियों के लिए तुम मायने ना रखती हो लेकिन हम पेड़ों के लिए तुमसे बढ़कर कोई दूसरी चिड़िया नहीं है…मत जाओ…तुम्हारी जगह कोई और नहीं ले सकता!”

पेड़ की बात सुन कर कैसोवैरी चिड़िया को जीवन में पहली बार एहसास हुआ कि वो इस धरती पर बेकार में मौजूद नहीं है, भगवान् ने उसे एक बेहद ज़रूरी काम के लिए भेजा है और सिर्फ बाकी चिड़ियों की तरह न उड़ पाना कहीं से उसे छोटा नहीं बनाता!

आज एक बार फिर कैसोवैरी चिड़िया बहुत खुश थी, वह ख़ुशी-ख़ुशी जंगल में वापस लौट गयी।

🌞🔔⏰🪜↔️भव्य आत्माओं:- कैसोवैरी चिड़िया की तरह ही कई बार हम इंसान भी औरों को देखकर कमजोर महसूस करने लगते हैं। हम सोचते हैं कि उसके पास ये है…उसके पास वो है….सब कितने भाग्यशाली हैं…ओर सबकुछ है उसके पास।

हमें कभी भी बेकार के तुलनात्मकता में नहीं पड़ना चाहिए! हर एक जीव अपने आप में महत्वपूर्ण है…अलग है। हर किसी के अन्दर कोई न कोई बात है जो उसे ख़ास बनाती है..हाँ हो सकता है कि वो पूरी दुनिया के लिए बस एक इंसान हो लेकिन किसी एक के लिए वो पूरी दुनिया हो सकता है!

*इसलिए जीवन के महत्व को समझिये और अपने इस अमूल्य जीवन को सकारात्मक विचारों का तोहफा दीजिये….यकीन जानिए सकारात्मक सोच का ये एक तोहफा आपकी पूरे जीवन को शानदार बना देगा!*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 30 अक्टूबर 2022

गृहस्थ साधु व बिच्छू

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 गृहस्थ साधु व बिच्छू ✍️🐒*

एक गांव में एक संत निवास करते थे। संत का व्यवहार बहुत ही सरल ज्ञानी कर्तव्यनिष्ठ शांत रहता था। संत के इस व्यवहार से बच्चे बहुत ज्यादा खिल्ली उड़ाते रहते थे, लेकिन कभी संत बुरा नही माने।

अपने इस व्यवहार के कारण संत का स्वभाव आसपास में मशहूर था। गांव के लोग अपनी समस्या भी संत के पास लेकर आते और उचित मार्गदर्शन से संतुष्ट भी होते थे।इन सभी व्यवहार के कारण बच्चे बूढे, सभी के लिए चहेते भी थे। 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

एक बार बच्चों को कुछ शैतानी सूझी बच्चों ने संत के साध्वी को जाकर भड़काया की संत बाबा को आज बहुत सारा गन्ना मिला है,पर पता नही आपके पास आते आते आपके लिए बचा पाएंगे कि नही ,सभी को रास्ते मे बांटते आ रहे है।
संत की साध्वी थोड़ा झगड़ालू  व चिड़चिड़ा प्रवृत्ति की थी, तब तक संत अपने कुटिया की ओर पहुँच गए। बच्चे शीघ्रता से छिप गए।

परंतु साध्वी संत के हाथों में मात्र एक ही गन्ना देखकर गुस्सा से आगबबूला हो गये और गुस्से से बोली कि मात्र एक ही गन्ना लेकर आये हो,(गन्ना छीनकर) जाओ इसे भी किसी को बांट दो कहकर फेक देती जिससे गन्ना दो टुकड़ा हो जाता है। संत जी ये देखकर शांति से बोलते है कि तुम्हारा भी कोई जवाब नही कितना सुंदर बराबर दो भाग में  टुकड़ा किये हो। चलो मैं स्नान कर के आता हूं फिर गन्ना खाएंगे। 

इस प्रकार संत के स्वभाव से साध्वी का गुस्सा शांत हो जाता है।और बच्चे अपने शरारती स्वभाव पर लज्जित हो भाग जाते है।
          उधर संत जी नदी में स्नान कर रहे होते है तो क्या देखते है कि एक बिच्छू का बच्चा पानी मे बह रहा है,संत जी बिच्छु के बच्चे को बाहर निकलने की कोशिश करते है परंतु बिच्छू के बच्चा स्वभाव वश संत को डंक मरता है और जल में पुनः हाथ से गिर जाता है यह प्रक्रिया तीन चार बार होते देख पास में स्नान कर रहे ग्रामीण, संत से बोलते है कि बाबा आप को बिच्छू का बच्चा डंक पे डंक मार रहा है और आप उसे बचाने पर तुले है।

 संत बड़ी ही सरलता से बोलते है कि यह बिच्छू का बच्चा होते हुए भी अपना स्वभाव नही छोड़ रहा है तो हम मनुष्यों का स्वभाव क्यो छोड़े।

हमें तो किसी असहाय प्राणियों की रक्षा करनी ही चाहिए और फिर कमंडल में पकड़ कर बिच्छू के बच्चे को बाहर निकल ही लेते है।

*⏰🔔👪✍️विशेष:- इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि विषम परिस्थितियों में भी हमें अपना धैर्य नही खोकर कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। अनावश्यक कर्तव्य नहीं करना चाहिए जितनी शक्ति है उतना करना अनिवार्य है। जबतक हम सुरक्षित नहीं रहेंगे तब तक हम किसी को भी सुरक्षित नहीं कर सकते।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 29 अक्टूबर 2022

लालच का फल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 लालच का फल ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.कल प्रातः  कार्तिक शुक्ल षष्ठी 30 अक्टूबर 2022    रविवार  को बाईसवें  तीर्थंकर 1008 श्री नेमिनाथ भगवान जी का  गर्भ कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

🔔↔️हस्तिनापुर नरेश धृतराष्ट्र जन्म से अंध थे। इस कारण वह ज्येष्ठ पुत्र होते हुए भी राजा बनने योग्य नहीं थे।

 परंतु राजा पांडु एक गंभीर बीमारी का शिकार हो जाने की वजह से वन प्रस्थान कर गए थे और एक राज्य का सिंहासन रिक्त नहीं रखा जा सकता था, इसलिए धृतराष्ट्र को पांडु का प्रतिनिधि राजा बनाया गया था।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

एक बार राजसुख का स्वाद चख लेने वाले धृतराष्ट्र चाहते थे की उनके बाद हस्तिनापुर का राजा उनका पुत्र दुर्योधन बनें। 

इसी लालसा में उन्होने न्याय और अन्याया में तर्क करना छोड़ दिया, और अपने पुत्र की हर एक ज्यादती को वह अनदेखा कर के पांडु पुत्रों से पग-पग पर अन्याय करते गए।

दुर्योधन ने भी पांडवों के लिए अपनें ह्रदय मे घृणा ही पाल रखी थी। 
भीम को जहर दे कर नदी में डुबोना, लाक्षाग्रह में आग लगा कर पांडु पुत्रों और कुंती को जिंदा जला देने का षड्यंत्र, द्रौपदी चीर हरण, द्यूत क्रीडा में कपट कर के पांडवों को वनवास भेजना और ना जाने ऐसे कई षड्यंत्र से उसने पांडवों का अनिष्ट करने की चेष्टा की थी।

अंत में जब उन के पाप का घड़ा भर गया, तब धर्म युद्ध हुआ। और उस महायुद्ध में लालची धृतराष्ट्र के 100 पुत्र मृत्यु को प्राप्त हुए। अपनी लालसा की वेदी पर अपने समस्त पुत्रों की बलि चढ़ा देने वाले धृतराष्ट्र ने युद्ध समाप्ति के बाद भी भीमसेन को अपनी भुजाओं में जकड़ कर मार डालने का प्रयास किया था। लेकिन अंत में शर्मिंदा हो और हार स्वीकार कर धृतराष्ट्र पत्नी सहित वन चले जाते हैं।

*🔔⏰🪜✍️↔️विशेष:- लालच बुरी बला है। इसे करने वाले का अंत भी धृतराष्ट्र जैसा ही होता है “परास्त” और “अपमानित”। अतः हमें भी सत्कर्म करते हुए यह जीवन सफल करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजिए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2022

स्वयं की सुरक्षा

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🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
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*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.  कार्तिक शुक्ल षष्ठी 30 अक्टूबर 2022    रविवार  को बाईसवें  तीर्थंकर 1008 श्री नेमिनाथ भगवान जी का  गर्भ कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

प्रोफेसर साहब कुछ दिनों बाद अपने नगर को घर लौटे व  अपने दोस्त नवीन से मिलने उसकी दुकान पर गए।

इतने दिनों बाद मिल रहे दोस्तों का उत्साह देखने लायक था…दोनों ने एक दुसरे को गले लगाया और बैठ कर गप्पें मारने लगे।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

जलपान ग्रहण करके कुछ देर बाद प्रोफ़ेसर बोले, “यार एक बात बता, पहले मैं जब भी आता था तो आपकी दुकान में ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी और हम बड़ी मुश्किल से बात कर पाते थे। लेकिन आज बस इक्का-दुक्का ग्राहक ही दिख रहे हैं और आपका स्टाफ भी पहले से कम हो गया है…”

दोस्त मजाकिया लहजे में बोला, “अरे कुछ नहीं, हम इस मार्केट के पुराने खिलाड़ी हैं…आज धंधा ढीला है…कल फिर जोर पकड़ लेगा!”

इस पर प्रोफ़ेसर साहब कुछ गंभीर होते हुए बोले, “देख भाई, चीजों को इतना सहज में मत लो…मैं देख रहा हूँ कि इसी रोड पर कपड़े की तीन-चार और दुकानें भी खुल गयी हैं, प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गया है…और ऊपर से…”

प्रोफ़ेसर साहब अपनी बात पूरी करते उससे पहले ही, दोस्त उनकी बात काटते हुए बोला, “अरे ये दुकाने आती-जाती रहती हैं, इनसे कुछ फरक नहीं पड़ता।”

प्रोफ़ेसर साहब कॉलेज टाइम से ही अपने दोस्त को जानते थे और वो समझ गए कि ऐसे समझाने पर वो उनकी बात नहीं समझेगा।

इसके बाद उन्होंने अगले रविवार, बाजार बंद के दिन; दोस्त को अपने घर पर बुलाया।

दोस्त, तय समय पर उनके घर पहुँच गया।

कुछ गपशप के बाद प्रोफ़ेसर साहब उसे अपने घर में बनी एक प्राइवेट लैब में ले गए और बोले, “देख यार! आज मैं तुझे एक बड़ा ही अनुभवी प्रयोग दिखाता हूँ..”

प्रोफेसर साहब ने एक जार में गरम पानी लिया और उसमे एक मेंढक डाल दिया। पानी से सम्पर्क में आते ही मेंढक खतरा भांप गया और कूद कर बाहर भाग गया।

इसके बाद प्रोफ़ेसर साहब ने जार से गरम पानी फेंक कर उसमे ठंडा पानी भर दिया, और एक बार फिर मेंढक को उसमे डाल दिया। इस बार मेंढक आराम से उसमे तैरने लगा।

तभी प्रोफेसर साहब ने एक अजीब सा काम किया, उन्होंने जार उठा कर एक गैस बर्नर पर रख दिया और बड़ी ही धीमी आंच पर पानी गरम करने लगे।

कुछ ही देर में पानी गरम होने लगा। मेंढक को ये बात कुछ अजीब लगी पर उसने खुद को इस तापमान के हिसाब से सहनशीलता पूर्वक ग्रहण कर लिया…इस बीच बर्नर जलता रहा और पानी और भी गरम होता गया….पर हर बार मेढक पानी के टेम्परेचर के हिसाब से खुद को एडजस्ट कर लेता और आराम से पड़ा रहता….लेकिन उसकी भी सहने की एक क्षमता थी! जब पानी काफी गरम हो गया और खौलने को आया तब मेंढक को अपनी जान पर मंडराते खतरे का आभास हुआ…और उसने पूरी ताकत से बाहर छलांग लगाने की कोशिश की….पर बार-बार खुद को बदलते तापमान में ढालने में उसकी काफी उर्जा लग चुकी थी और अब खुद को बचाने के लिए न ही उसके पास शक्ति थी और न ही समय…देखते-देखते पानी उबलने लगा और मेंढक अधमरा हो गया। प्रोफेसर साहब ने उसे एक विशिष्ट केमिकल युक्त पात्र में डाल दिया ताकि वह जीवित रह सकें।

एक्सपेरिमेंट देखने के बाद दोस्त बोला-

यार तूने तो मेंढक की जान ही ले ली…खैर, ये सब तू मुझे क्यों दिखा रहा है?

प्रोफ़ेसर बोले, “ मेंढक की जान मैंने नहीं ली…उसने खुद अपनी जान ली है। अगर वो बिगड़ते हुए माहौल में बार-बार खुद को एडजस्ट नहीं करता बल्कि उससे बचने का कुछ उपाय सोचता तो वो आसानी से अपनी विषम परिस्थितियों से बच सकता था। और ये सब मैं तुझे इसलिए दिखा रहा हूँ क्योंकि कहीं न कहीं तू भी इस मेढक की तरह व्यवहार कर रहा है।

तेरा अच्छा-ख़ासा व्यापार  है पर तू चेंज हो रही मार्केट आधुनिकता की तरफ ध्यान नहीं दे रहा, और बस ये सोच कर एडजस्ट करता जा रहा है कि आगे सब अपने आप ठीक हो जाएगा…पर याद रख अगर तू आज ही हो रहे बदलाव के अनुसार खुद को नहीं बदल सकते  तो हो सकता है इस मेंढक की तरह कल को संभलने के लिए आपके पास ना एनर्जी हो और ना ही समय!”

प्रोफ़ेसर की सीख ने दोस्त की आँखें खोल दीं, उसने प्रोफ़ेसर साहब को गले लगा लिया और वादा किया कि एक बार फिर वो मार्केट का लीडर बन कर दिखायेगा।



विशेष:-भव्य आत्माओं, प्रोफ़ेसर साहब के उस दोस्त की तरह बहुत से लोग अपने आस-पास हो रहे बदलाव की तरफ ध्यान नहीं देते। लोग जिन योग्यता के कारणों से नौकरी के लिए चुने जाते हैं बस उसी पर अटके रहते हैं खुद को update नहीं करते…और जब company में layoffs होते हैं तो उन्हें ही सबसे पहले निकाला जाता है…लोग जिस ढर्रे पर 10 साल पहले व्यवसाय कर रहे होते हैं बस उसी को पकड़कर बैठे रहते हैं और देखते-देखते नए खिलाड़ी सारा बाजार कवर कर लेते हैं!

यदि आप भी खुद को ऐसे लोगों से सम्बंधित कर पा रहे हैं तो संभल जाइए और इस कहानी से सीख लेते हुए मजबूत बनिए और आस-पास हो रहे बदलावों के प्रति सतर्क रहिये, ताकि बदलाव की बड़ी से बड़ी आंधी भी आपकी जड़ों की हिला न पाएं!
 
बिलकुल सही समय के साथ बदलाव बहुत जरूरी है, समय के साथ न बदलने का क्या नुकसान हो सकता है इसका सबसे बड़ा Exaple आपके सामने Yahoo ही है, ये एक समय Google से भी आगे था लेकिन समय के साथ न बदलने के कारण आज उसकी दशा आप सब के सामने है।

*🔔🙏⏰👪↔️आज वर्तमान में आधुनिक युग में बहुत कुछ बदलाव आ रहा है। अतः हमें अपने मूलभूत संस्कारों को सुरक्षित रखते हुए वर्तमान समय के अनुसार आचरण करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 27 अक्टूबर 2022

सबसे बड़ा हमारा धन

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒सबसे बड़ा हमारा धन ✍️🐒*

एक बार एक शक्तिशाली राजा घने वन में शिकार खेल रहा था। अचानक आकाश में बादल छा गए और मूसलाधार वर्षा होने लगी। सूर्य अस्त हो गया और धीरे-धीरे अँधेरा छाने लगा। अँधेरे में राजा अपने महल का रास्ता भूल गया और सिपाहियों से अलग हो गया। भूख प्यास और थकावट से व्याकुल राजा जंगल के किनारे एक टीले पर बैठ गया। थोड़ी देर बाद उसने वहाँ तीन बालकों को देखा।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

तीनों बालक अच्छे मित्र थे। वे गाँव की ओर जा रहे थे। सुनो बच्चों! ‘जरा यहाँ आओ।’ राजा ने उन्हें बुलाया। बालक जब वहाँ पहुंचे तो राजा ने उनसे पूछा – ‘क्या कहीं से थोड़ा भोजन और जल मिलेगा?’ मैं बहुत प्यासा हूँ और भूख भी बहुत लगी है।

बालकों ने उत्तर दिया – ‘अवश्य ‘। हम घर जा कर अभी कुछ ले आते है। वे गाँव की ओर भागे और तुरंत जल और भोजन ले आये। राजा बच्चों के उत्साह और प्रेम को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ।

राजा बोला – “प्यारे बच्चों! तुम लोग जीवन में क्या करना चाहते हो? मैं तुम सब की सहायता करना चाहता हूँ।”

कुछ देर सोचने के बाद एक बालक बोला – ‘ मुझे धन चाहिए। मैंने कभी दो समय की रोटी नहीं खायी है। कभी सुन्दर वस्त्र नहीं पहने है इसलिए मुझे केवल धन चाहिए। राजा मुस्कुरा कर बोले – ठीक है। मैं तुम्हें इतना धन दूँगा कि जीवन भर सुखी रहोगे। यह शब्द सुनते ही बालकों की ख़ुशी का ठिकाना न रहा।

दूसरे बालक ने बड़े उत्साह से पूछा – “क्या आप मुझे एक बड़ा-सा बँगला और घोड़ागाड़ी देंगे?’ राजा ने कहा – अगर तुम्हे यही चाहिए तो तुम्हारी इच्छा भी पूरी हो जाएगी।

तीसरे बालक ने कहा – “मुझे न धन चाहिए न ही बंगला-गाड़ी। मुझे तो आप ऐसा आशीर्वाद दीजिए जिससे मैं पढ़-लिखकर विद्वान बन सकूँ और शिक्षा समाप्त होने पर मैं अपने देश की सेवा कर सकूँ। तीसरे बालक की इच्छा सुनकर राजा बहुत प्रभावित हुआ। उसने उसके लिए उत्तम शिक्षा का प्रबंध किया। वह परिश्रमी बालक था इसलिए दिन-रात एक करके उसने पढाई की और बहुत बड़ा विद्वान बन गया और समय आने पर राजा ने उसे अपने राज्य में मंत्री पद पर नियुक्त कर लिया।

एक दिन अचानक राजा को वर्षों पहले घटी उस घटना की याद आई। उन्होंने मंत्री से कहा, ” वर्षों पहले तुम्हारे साथ जो दो और बालक थे, अब उनका क्या हाल-चाल है… मैं चाहता हूँ की एक बार फिर मैं एक साथ तुम तीनो से मिलूं, अतः कल अपने उन दोनों मित्रों को भोजन पर आमंत्रित कर लो।”

मंत्री ने दोनों को संदेशा भिजवा दिया और अगले दिन सभी एक साथ राजा के सामने उपस्थित हो गए।

‘आज तुम तीनो को एक बार फिर साथ देखकर मैं बहुत प्रसन्न हूँ। इनके बारे में तो मैं जानता हूँ…पर तुम दोनों अपने बारे में बताओ। “, राजा ने मंत्री के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

जिस बालक ने धन माँगा था वह दुखी होते हुए बोला, “राजा साहब, मैंने उस दिन आपसे धन मांग कर बड़ी गलती की। इतना सारा धन पाकर मैं आलसी बन गया और बहुत सारा धन बेकार की चीजों में खर्च कर दिया, मेरा बहुत सा धन चोरी भी हो गया ….और कुछ एक वर्षों में ही मैं वापस उसी स्थिति में पहुँच गया जिसमे आपने मुझे देखा था।”

बंगला-गाडी मांगने वाले बालक भी अपना रोना रोने लगा, ” महाराज, मैं बड़े ठाट से अपने बंगले में रह रहा था, पर वर्षों पहले आई बाढ़ में मेरा सबकुछ बर्वाद हो गया और मैं भी अपने पहले जैसी स्थिति में पहुँच गया।

उनकी बातें सुनने के बाद राजा बोले, ” इस बात को अच्छी तरह गाँठ बाँध लो धन-संपदा सदा हमारे पास नहीं रहते पर ज्ञान जीवन-भर मनुष्य के काम आता है और उसे कोई चुरा भी नहीं सकता। शिक्षा ही मानव को विद्वान और बड़ा आदमी बनाती है, इसलिए सबसे बड़ा धन “विद्या” ही है।”

*विशेष:-आज वर्तमान में सभी स्कूलों में ज्ञान की शिक्षा दी जा रही है। इसके साथ में उन्हें धार्मिक संस्कार भी दिए जाने चाहिए।आज भारतीयों के पतन का मुख्य कारण यह है कि सभी अपने बच्चों को ज्ञानवान बना रहे है, जिसके कारण से वह अपने पैरों पर खड़े होकर पैसों को महत्व दे रहा है। इसी कारण से वह परिवार,समाज व राष्ट्र के बारे में कुछ भी करने से असमर्थ है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 26 अक्टूबर 2022

ज्ञानवान साधु

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒ज्ञानवान साधु✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.कल प्रातः  कार्तिक शुक्ल भाई दूज 27 अक्टूबर 2022   गुरुवार  को 9 वें  तीर्थंकर 1008 श्री पुष्पदंत भगवान जी का  ज्ञान कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*

▶️✍️🐒किसी राजमहल के द्वारा पर एक साधु आया और द्वारपाल से बोला कि भीतर जाकर राजा से कहे कि उनका भाई आया है।

द्वारपाल ने समझा कि शायद ये कोई दूर के रिश्ते में राजा का भाई हो जो संन्यास लेकर साधुओं की तरह रह रहा हो!

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सूचना मिलने पर राजा मुस्कुराया और साधु को भीतर बुलाकर अपने पास बैठा लिया।

साधु ने पूछा – कहो अनुज*, क्या हाल-चाल हैं तुम्हारे?

“मैं ठीक हूं आप कैसे हैं भैया?”, राजा बोला।

साधु ने कहा- जिस महल में मैं रहता था, वह पुराना और जर्जर हो गया है। कभी भी टूटकर गिर सकता है। मेरे 32 नौकर थे वे भी एक-एक करके चले गए। पाँचों रानियाँ भी वृद्ध हो गयीं और अब उनसे को काम नहीं होता…

यह सुनकर राजा ने साधु को 10 सोने के सिक्के देने का आदेश दिया।

साधु ने 10 सोने के सिक्के कम बताए।

तब राजा ने कहा, इस बार राज्य में सूखा पड़ा है, आप इतने से ही संतोष कर लें।

साधु बोला- मेरे साथ सात समुन्दर पार चलो वहां सोने की खदाने हैं। मेरे पैर पड़ते ही समुद्र सूख जाएगा… मेरे पैरों की शक्ति तो आप देख ही चुके हैं।

अब राजा ने साधु को 100 सोने के सिक्के देने का आदेश दिया।

साधु के जाने के बाद मंत्रियों ने आश्चर्य से पूछा, “ क्षमा करियेगा राजन, लेकिन जहां तक हम जानते हैं आपका कोई बड़ा भाई नहीं है, फिर आपने इस ठग को इतना इनाम क्यों दिया?”

राजन ने समझाया, “ देखो,  भाग्य के दो पहलु होते हैं। राजा और रंक। इस नाते उसने मुझे भाई कहा।

जर्जर महल से उसका आशय उसके बूढ़े शरीर से था… 32 नौकर उसके दांत थे और 5 वृद्ध रानियाँ, उसकी 5 इन्द्रियां हैं।

समुद्र के बहाने उसने मुझे उलाहना दिया कि राजमहल में उसके पैर रखते ही मेरा राजकोष सूख गया…क्योंकि मैं उसे मात्र दस  सिक्के दे रहा था जबकि मेरी हैसियत उसे सोने से तौल देने की है। इसी लिए उसकी बुद्धिमानी से प्रसन्न होकर मैंने उसे सौ सिक्के उपहार में दिए और कल से मैं उसे अपना सलाहकार नियुक्त करूंगा।

*🕉️💡🔔☑️विशेष:- भव्य आत्माओं इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि किसी व्यक्ति के बाहरी रंग रूप से उसकी बुद्धिमत्ता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता इसलिए हमें सिर्फ इसलिए कि किसी ने खराब कपडे पहने हैं या वो देखने में अच्छा नहीं है; उसके बारे में गलत विचार नहीं बनाने चाहिए। सबसे बड़ा ज्ञान होता है अनुभव।यह अनुभव हमें जीवन के संघर्षों से प्राप्त होता है। इसलिए हमें लक्ष्य प्राप्ति के लिए संघर्षों से नहीं घबराना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 25 अक्टूबर 2022

हमारी भूल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 हमारी भूल ✍️🐒*

*🔔🙏⏰↔️विश्व के सभी धर्मानुरागियों को 1008 श्री शासन नायक सर्व सिद्धि प्रदायक महावीर स्वामी के 2549 वे निर्माण महामहोत्सव व गौतम गणधर स्वामी के केवलज्ञान की एवं सभी को नूतन 2549 वे नववर्ष की ढेर सारी शुभकामनाएं🔔🪜🙏✍️*

*⏰राजा ने मंत्री से कहा- मेरा मन प्रजाजनों में से जो वरिष्ठ हैं उन्हें कुछ बड़ा उपहार देने का हैं। बताओ ऐसे अधिकारी व्यक्ति कहां से और किस प्रकार ढूंढें जाय?*

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*मंत्री ने कहा - सत्पात्रों की तो कोई कमी नहीं, पर उनमें एक ही कमी है कि परस्पर सहयोग करने की अपेक्षा वे एक दूसरे की टांग पकड़कर खींचते हैं। न खुद कुछ पाते हैं और न दूसरों को कुछ हाथ लगने देते हैं। ऐसी दशा में आपकी उदारता को फलित होने का अवसर ही न मिलेगा।*
*राजा के गले वह उत्तर उतरा नहीं। बोले! तुम्हारी मान्यता सच है यह कैसे माना जाय? यदि कुछ प्रमाण प्रस्तुत कर सकते हो तो करो।*
*मंत्री ने बात स्वीकार करली और प्रत्यक्ष कर दिखाने की एक योजना बना ली। उसे कार्यान्वित करने की स्वीकृति भी मिल गई।*
*एक छः फुट गहरा गड्ढा बनाया गया। उसमें बीस व्यक्तियों के खड़े होने की जगह थी। घोषणा की गई कि जो इस गड्ढे से ऊपर चढ़ जावेगा उसे आधा राज्य पुरस्कार में मिलेगा।*
*बीसों प्रथम चढ़ने का प्रयत्न करने लगे। जो थोड़ा सफल होता दीखता है उसकी टांगें पकड़कर शेष उन्नीस नीचे घसीट लेते। वह औंधे मुंह गिर पड़ता। इसी प्रकार सबेरे आरम्भ की गई प्रतियोगिता शाम को समाप्त हो गई। बीसों को असफल ही किया गया और रात्रि होते-होते उन्हें सीढ़ी लगाकर ऊपर खींच लिया गया। पुरस्कार किसी को भी नहीं मिला।*

*मंत्री ने अपने मत को प्रकट करते हुए कहा - यदि यह एकता कर लेते तो सहारा देकर किसी एक को ऊपर चढ़ा सकते थे। पर वे ईर्ष्या वश वैसा नहीं कर सकें। एक दूसरे की टांग खींचते रहे और सभी खाली हाथ रहे।*

*संसार में प्रतिभागियों  के बीच भी ऐसी ही प्रतिस्पर्धा चलती हैं और वे खींचतान में ही सारी शक्ति गंवा देते है। अस्तु उन्हें निराश हाथ मलते ही रहना पड़ता है।*

*क्या समझें*❓
*चिंतन करतें रहो जी।*
*⏰🔔🕉️🌞🙏विशेष :- आज विश्व के लगभग 97 प्रतिशत व्यक्ति विशेष आज दुसरो को उन्हें निचा दिखाने के लिए अपना समय व्यतीत कर रहे है।आज सभी दुसरो को सुधारने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है। किंतु वह व्यक्ति विशेष अपने कर्तव्य का पालन कर रत्नत्रय को धारण नहीं करना चाहता। यही वर्तमान में सबसे बड़ी हमारी भूल है। कृपया आप स्वयं को समझकर स्वयं के बारे में आत्मकल्याण के बारे में प्रयास कर अपना कर्तव्य करें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 24 अक्टूबर 2022

पतन की सलाह

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 पतन की सलाह ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*✍️ कल  कार्तिक अमावस्या   25 अक्टूबर 2022   मंगलवार प्रातः काल सूर्योदय से पहले  चौबीसवें  तीर्थंकर वर्तमान के शासन नायक  1008 श्री वर्धमान महावीर स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।🔔3.आज के ही दिन संध्या काल में श्री 1008 गौतम गणधर   स्वामी को केवलज्ञान होने से सभी मंदिरों में , घरों में व अपने प्रतिष्ठानों में दीपोत्सव मनाया जाता है।*
*🕉️✍️यह कल्याणक की तिथि उत्तर पुराण के अनुसार प्रमाणित है।इस तिथि के अनुसार विश्व के सभी देशों में दिगंबर आम्नाय वाले उत्सव मनाते है।🐒✍️*
*👨‍👩‍👧‍👦आपसभी सपरिवार , इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव कर जीवन सफल करें।*

▶️एक व्यक्ति ने अगरबत्ती की दुकान खोली, नाना प्रकार की अगरबत्तियां थीं। उसने दुकान के बाहर एक साइन बोर्ड लगाया " *यहां सुगन्धित अगरबत्तियां मिलती हैं।"* 

दुकान चल निकली! एक दिन एक ग्राहक उसके दुकान पर आया और कहा  आपने जो बोर्ड लगा रखा है, उसमें एक विरोधाभास है! भला अगरबत्ती सुगंधित नहीं होंगी तो क्या दुर्गन्धित होंगी ?

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उसकी बात को उचित मानते हुए विक्रेता ने बोर्ड से सुगंधित शब्द मिटा दिया! अब बोर्ड इस प्रकार था  " *यहां अगरबत्तियां मिलती हैं!"* 

इसके कुछ दिनों के पश्चात किसी दूसरे सज्जन ने उससे कहा  आपके बोर्ड पर "यहां" क्यों लिखा है ? दुकान जब यहीं है तब यहां लिखना निरर्थक है!

इस बात को भी अंगीकार कर विक्रेता ने बोर्ड पर यहां शब्द मिटा दिया! अब बोर्ड था " *अगरबत्तियां मिलती हैं !"* 

पुनः उस व्यक्ति को एक रोचक परामर्श मिला  अगरबत्तियां मिलती हैं का क्या प्रयोजन? अगरबत्ती लिखना ही पर्याप्त है! दूकान है तो मिलती ही हैं। अतः वह बोर्ड केवल एक शब्द के साथ रह गया 
" *अगरबत्ती।* 

विडम्बना देखिए! एक शिक्षक ग्राहक बन कर आएं और अपना ज्ञान वमन किया  दुकान जब मात्र अगरबत्तियों की है तो इसका बोर्ड लगाने का क्या लाभ ? लोग तो देखकर ही समझ जायेंगे कि मात्र अगरबत्तियों की दुकान है! इस प्रकार वह बोर्ड ही वहां से हट गया!

कालांतर में दुकान की बिक्री मंद पड़ने लगी और विक्रेता चिंतित रहने लगा!
एक दिन में उसका पुराना मित्र उसके पास आया। अनेक वर्षों के उपरांत वे मिल रहे थे!
मित्र से उसकी चिंता ना छिप सकी और उसने इसका कारण पूछा तो व्यवसाय के गिरावट का पता चला!

मित्र ने सबकुछ ध्यान से देखा और कहा  *तुम बिल्कुल ही मूर्ख हो! इतनी आवश्यक दुकान खोल ली और बाहर एक बोर्ड नहीं लगा सकते थे  यहां सुगंधित अगरबत्तियां मिलती हैं !!!* 

आपको जीवन में प्रत्येक पग पर सुझाव देने वाले मिलेंगे, जो उस विषय के विशेषज्ञ नहीं हैं परंतु लगेगा कि सारा विज्ञान, दर्शन शास्त्र, समाजशास्त्र इत्यादि उनमें ही अंतर्निहित है !

आप ऐसे व्यक्तियों की सुनेंगे या अनुपालन करेंगे तो आप के जीवन का बोर्ड भी गायब हो जाएगा। आपकी स्थिति भी उस विक्रेता की भांति हो जायेंगी!

 *आप किसी भी समस्या या विषय के निराकरण के लिये उससे सम्बन्धित विशेषज्ञों की सुनेंगे या अपने अंतः चेतन की! क्योंकि आपको आपसे अधिक कोई नहीं जानता !!!*

*🕉️⏰🌞🔔↔️विशेष :-इस कहानी के माध्यम से आप सभी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि आज मुख्य धर्म की अनेक शाखाएं बन चुकी है।आज हमारी असफलता और पतन का कारण यह है कि हमने सत्य धर्म को छोड़कर लोगों के द्वारा बनाए गए मान्यता प्राप्त धर्म का अनुशरण कर रहे है।आज विश्व के सभी धर्म ग्रंथों का कहना है कि आप मेरी पूजा व मेरे नाम का गुणगान करते रहो तब आप सुखी रहोगे।आज विश्व का एकमात्र दिगंबर जैन धर्म है जो यह कहता व करता है कि आप तीर्थंकर के बताए हुए मार्ग पर चलिए एक दिन आप भी भगवान बन जाएंगे। अतः सभी से विनम्र निवेदन है कि आप सत्य धर्म को जानकर अपनी शक्तिनुसार अपने आचरण में रत्नत्रय का पालन कर जीवन सफल करें।* 

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 23 अक्टूबर 2022

हमारी समस्याओं का रहस्य

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒हमारी समस्याओं का रहस्य ✍️🐒*
*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*✍️कार्तिक अमावस्या   25 अक्टूबर 2022   मंगलवार को चौबीसवें  तीर्थंकर , वर्तमान के शासन नायक  1008 श्री वर्धमान महावीर स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।➡️🔔3.इसी दिन संध्या काल में श्री 1008 गौतम गणधर   स्वामी को केवलज्ञान होने से सभी मंदिरों में व घरों में  दीपोत्सव मनाया जाता है।*
*🕉️✍️यह कल्याणक की तिथि उत्तर पुराण के अनुसार प्रमाणित है।इस तिथि के अनुसार विश्व के सभी देशों में दिगंबर आम्नाय वाले उत्सव मनाते है।🐒✍️*
*👨‍👩‍👧‍👦आपसभी सपरिवार , इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव कर जीवन सफल करें।*

😇↔️रोहित और मोहित बड़े शरारती बच्चे थे, दोनों पांचवीं कक्षा के छात्र थे और एक साथ ही स्कूल आया-जाया करते थे।

एक दिन जब स्कूल की छुट्टी हो गई तब मोहित ने रोहित से कहा, “ दोस्त, मेरे दिमाग में एक आईडिया है?”

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

“बताओ-बताओ…क्या आईडिया है?”, रोहित ने गंभीरता से  पूछा।

मोहित- “वो देखो, सामने तीन बकरियां चर रही हैं।”

रोहित- “ तो! इनसे हमे क्या लेना-देना है?”

मोहित-” हम आज सबसे अंत में स्कूल से निकलेंगे और जाने से पहले इन बकरियों को पकड़ कर स्कूल में छोड़ देंगे, कल जब स्कूल खुलेगा तब सभी इन्हें खोजने में अपना समय व्यय करेगे और हमें पढाई नहीं करनी पड़ेगी…”

रोहित- “पर इतनी बड़ी बकरियां खोजना कोई कठिन काम थोड़े ही है, कुछ ही समय में ये मिल जायेंगी और फिर सबकुछ नार्मल हो जाएगा….”

मोहित- “हांहाहां…यही तो बात है, वे बकरियां आसानी से नहीं ढूंढ पायेंगे, बस तुम देखते जाओ मैं क्या करता हूं!”

इसके बाद दोनों दोस्त छुट्टी के बाद भी पढ़ाई के बहाने अपने क्लास में बैठे रहे और जब सभी लोग चले गए तो ये तीनो बकरियों को पकड़ कर क्लास के अन्दर ले आए।

अन्दर लाकर दोनों दोस्तों ने बकरियों के गले में एक   गोल गत्ता बांध दिया। इसके बाद मोहित बोला, “अब मैं इन बकरियों पे नंबर डाल देता हूं।, और उसने काले रंग से नंबर लिखने शुरू किये-

पहली बकरी पे नंबर 1
दूसरी पे नंबर 2
और तीसरी पे नंबर 4

“ये क्या? तुमने तीसरी बकरी पे नंबर 4 क्यों डाल दिया?”, रोहित ने आश्चर्य से पूछा।

मोहित हंसते हुए बोला, “ दोस्त यही तो मेरा आईडिया है, अब कल देखना सभी तीसरे नंबर की बकरी ढूंढने में पूरा दिन निकाल देंगे…और वो कभी मिलेगी ही नहीं…”

अगले दिन दोनों दोस्त समय से कुछ पहले ही स्कूल पहुंच गए।

थोड़ी ही देर में स्कूल के अन्दर बकरियों के होने का शोर मच गया।


कोई चिल्ला रहा था, “ चार बकरियां हैं, पहले, दुसरे और चौथे नंबर की बकरियां तो आसानी से मिल गई…बस तीसरे नंबर वाली को ढूढना बाकी है।”

स्कूल का सारा स्टाफ तीसरे नंबर की बकरी ढूढने में लगा गया…एक-एक क्लास में टीचर गए अच्छे से तालाशी ली। कुछ खोजू वीर स्कूल की

छतों पर भी बकरी ढूंढते देखे गए… कई सीनियर बच्चों को भी इस काम में लगा दिया गया।

तीसरी बकरी ढूढने का बहुत प्रयास किया गया….पर बकरी तब तो मिलती जब वो होती…बकरी तो थी ही नहीं!

आज सभी परेशान थे पर रोहित और मोहित इतने खुश पहले कभी नहीं हुए थे। आज उन्होंने अपनी चालाकी से एक बकरी अदृश्य कर दी थी।

भव्य आत्माओं, इस कहानी को पढ़ कर चेहरे पे हलकी सी मुस्कान आना स्वाभाविक है। पर इस मुस्कान के साथ-साथ हमें इसमें छिपे सन्देश को भी जरूर समझना चाहिए। तीसरी बकरी, दरअसल वो चीजें हैं जिन्हें खोजने के लिए हम बेचैन हैं पर वो हमें कभी मिलती ही नहीं….क्योंकि वो हकीकत में होती ही नहीं!

हम ऐसी लाइफ चाहते हैं जो पूर्ण हो, जिसमे कोई समस्या ही ना हो….क्योंकि ऐसा हकीकत में होता ही नहीं! 
हम ऐसा हम सफर चाहते हैं जो हमें पूरी तरह समझे जिसके साथ कभी हमारी अनबन ना हो….क्योंकि ऐसा हकीकत में होता ही नहीं!
हम ऐसी नौकरी या बिजनेस चाहते हैं, जिसमे हमेशा सबकुछ एकदम आराम से चलता रहे…क्योंकि ऐसा हकीकत में होता ही नहीं!

क्या जरूरी है कि हर वक्त किसी चीज के लिए परेशान रहा जाए? ये भी तो हो सकता है कि हमारे जीवन  में जो कुछ भी है वही हमारे जीवन की पहेली को हल करने के लिए पर्याप्त हो….ये भी तो हो सकता है कि जिस तीसरी चीज की हम तलाश कर रहे हैं वो हकीकत में ना हो….और हम पहले से ही परिपूर्ण हों! किंतु हमने अपने नकारात्मक विचारों से अपने मन मंदिर में अनेक प्रकार के पहाड़ खड़े कर लिए है।

*🔔⏰🎪😇↔️विशेष :- हम वहीं सोचें जो हमारे प्रयासों के द्वारा किया जा सकता है। अन्य को देखकर उसे प्राप्त करने की इच्छा ना करें। हां हमें हमेशा सकारात्मक सोच के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए  कर्तव्य करते रहना है। यही हमारी सफलता का रहस्य है।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजीए।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 22 अक्टूबर 2022

हमारे कर्मों का फल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 हमारे कर्मों का फल ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.कल प्रातः  कार्तिक कृष्ण धन्य तेरस 23 अक्टूबर 2022   रविवार  को छठे  तीर्थंकर 1008 श्री पद्मप्रभ भगवान का जन्म व तप कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*✍️2.कार्तिक अमावस्या   25 अक्टूबर 2022   मंगलवार को चौबीसवें  तीर्थंकर वर्तमान के शासन नायक  1008 श्री वर्धमान महावीर स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।🔔3.इसी दिन संध्या काल में श्री 1008 गौतम गणधर   स्वामी को केवलज्ञान होने से सभी मंदिरों में व घरों में  दीपोत्सव मनाया जाता है।*

*🕉️✍️ यह कल्याणक की तिथि उत्तर पुराण के अनुसार प्रमाणित है।इस तिथि के अनुसार विश्व के सभी देशों में दिगंबर आम्नाय वाले उत्सव मनाते है।🐒✍️*
*👨‍👩‍👧‍👦आपसभी सपरिवार , इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव कर जीवन सफल करें।*

एक बार शंकर जी पार्वती जी भ्रमण पर निकले। रास्ते में उन्होंने देखा कि एक तालाब में कई बच्चे तैर रहे थे, लेकिन एक बच्चा उदास मुद्रा में बैठा था।
पार्वती जी ने शंकर जी से पूछा, यह बच्चा उदास क्यों है? शंकर जी ने कहा, बच्चे को ध्यान से देखो।
पार्वती जी ने देखा, बच्चे के दोनों हाथ नही थे, जिस कारण वो तैर नही पा रहा था।
पार्वती जी ने शंकर जी से कहा कि आप शक्ति से इस बच्चे को हाथ दे दो ताकि वो भी तैर सके।
शंकर जी ने कहा, हम किसी के कर्म में हस्तक्षेप नही कर सकते हैं क्योंकि हर आत्मा अपने कर्मो के फल द्वारा ही अपना काम अदा करती है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
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पार्वती जी ने बार-बार विनती की। आखिकार शंकर जी ने उसे हाथ दे दिए। वह बच्चा भी पानी में तैरने लगा।

एक सप्ताह बाद शंकर जी पार्वती जी फिर वहां से गुजरे। इस बार मामला उल्टा था, सिर्फ वही बच्चा तैर रहा था और बाकी सब बच्चे बाहर थे।

पार्वती जी ने पूछा यह क्या है ? शंकर जी ने कहा, ध्यान से देखो।
देखा तो वह बच्चा दूसरे बच्चों को पानी में डुबो रहा था इसलिए सब बच्चे भाग रहे थे।

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-भव्य महान आत्माओं आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के आत्मकल्याण के संस्कार तो पड़ गये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।जी हां जितना हमारा समीचीन पूरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने कीमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें। आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

शंकर जी ने जवाब दिया- हर व्यक्ति अपने कर्मो के अनुसार फल भोगता है। भगवान किसी के कर्मो के फेर में नही पड़ते हैं।

उसने पिछले जन्मो में हाथों द्वारा यही कार्य किया था इसलिए उसके हाथ नहीं थे।

हाथ देने से पुनः वह दूसरों की हानि करने लगा है। शंकरजी ने उसे अपनी शक्ति से पहले जैसा ही कर दिया। 

इस कहानी में आपको उदाहरण के द्वारा समझाया जा रहा है। क्योंकि आज हर व्यक्ति किसी भी मूर्ती को भगवान मानकर उनसे अनेक प्रकार की उपलब्धियों की इच्छा रखता है।जब तक हमारे पुण्यकर्म का उदय नहीं होगा तब तक विश्व की कोई भी शक्ति हमारे लिए कुछ भी नहीं कर सकती। अतः हमें वह कर्म करना चाहिए जिससे किसी भी जीव को किसी प्रकार की तकलीफ ना हो। भगवान महावीर स्वामी के जियो और जीने दो को जिसने भी अपने आचरण में उतार लिया वह कभी भी दुखी नहीं हो सकता।

*प्रकृति नियम के अनुसार चलती है, किसी के साथ कोई पक्षपात नहीं।आत्माएं जब नित्य निगोद से  आती हैं तब सब अपने  ही  कर्मों से चौरासी लाख योनियों में जन्म मरण होता हैं। कर्मों के अनुसार कोई रत्नत्रय को धारण कर कर्मों पर विजय प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त कर लेता है। कर्मो के कारण कोई अपाहिज है तो कोई भिखारी, तो कोई गरीब तो कोई अमीर लेकिन सब परिवर्तनशील हैं। अगर महलों में रहकर या पैसे के नशे में आज कोई बुरा काम करता है तो कल उसका भुगतान तो उसको करना ही पड़ेगा।   ➡️हमारे द्वारा एक बार किया गया कर्म कितने बार फल देगा।इसे समझने के लिए आप एक आम के वृक्ष से समझ सकते है।आम का बीज एक बार बोया जाता है।वह लगभग पांच वर्षों में फल देना चालू कर देता है। कितने फल फूल बन कर झड़ जाते है, कुछ छोटे छोटे आम बनकर, कुछ बड़े होकर ओर कुछ पकने के बाद पेड़ से अलग हो जाते है।✍️एक व्यक्ति ने जहर खाया वह कुछ समय में ही मृत्यु को प्राप्त कर लेता है।इन दोनों उदाहरणों से यह समझ में आ गया कि कर्म तुरंत व अनेक बार फल दे सकते है। यदि कर्म का फल तुरंत भी मिलता है व नहीं भी मिलता तो इससे यह नहीं समझ लेना चाहिए कि उसके भले-बुरे परिणाम से हम सदा के लिए बच गए। कर्मफल एक ऐसा अमिट तथ्य है कि जो आज नहीं तो कल भोगना पड़ेगा। यदि हमें अपने कर्मो का फल इस जीवन में नहीं मिलता अथवा बुरे कर्मो का फल हमें नहीं भुगतना पड़ता तो इसका मतलब यह नहीं है कि हमारे कर्मों ने हमें क्षमा कर दिया। कार्य और कारण के नियम से न केवल प्रकृति बल्कि जड़ और चेतन जगत जिसमें मानव भी शामिल है, बंधा हुआ है। इससे कोई बच नहीं सकता । जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही फल प्राप्त हो यह अनिवार्य नहीं है हमारे वर्तमान के आचरण पर यह निर्भर करता है।हम अपने आचरण में रत्नत्रय को धारण किए हुए है तो वह कर्म  हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ेगा हां शरीर को कुछ तकलीफ हो सकती है।वह कर्म हमारे आचरण में रत्नत्रय होने से उस कर्म को समाप्त करने की शक्ति से समाप्त हो जायेगा।*
 _*कर्म तेरे अच्छे तो किस्मत तेरी दासी.....*_ 
 _*नियत तेरी अच्छी तो घर मे  सभी सुख और मन में शांति....*_   

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2022

सर्वनिंदक महाराज

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सर्वनिंदक महाराज ✍️🐒*

एक थे सर्वनिंदक महाराज। काम-धाम कुछ आता नहीं था पर निंदा गजब की किया करते थे। हमेशा औरों के काम में टाँग फँसाते थे।
   
अगर कोई व्यक्ति मेहनत करके सुस्ताने भी बैठता तो कहते, 'मूर्ख एक नम्बर का कामचोर है। अगर कोई काम करते हुए मिलता तो कहते, 'मूर्ख जिंदगी भर काम करते हुए मर जायेगा।'

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कोई पूजा-पाठ में रुचि दिखाता तो कहते, 'पूजा के नाम पर देह चुरा रहा है। ये पूजा के नाम पर मस्ती करने के अलावा कुछ नहीं कर सकता।' अगर कोई व्यक्ति पूजा-पाठ नहीं करता तो कहते, 'मूर्ख नास्तिक है! भगवान से कोई मतलब ही नहीं है। मरने के बाद पक्का नर्क में जायेगा।'
    
माने निंदा के इतने पक्के खिलाड़ी बन गये कि आखिरकार नारदजी ने अपने स्वभाव अनुसार.. विष्णु जी के पास इसकी खबर पहुँचा ही दिया। विष्णु जी ने कहा 'उन्हें विष्णु लोक में भोजन पर आमंत्रित कीजिए।'
    
नारद तुरंत भगवान का न्योता लेकर सर्वनिंदक महाराज के पास पहुँचे और बिना कोई जोखिम लिए हुए उन्हें अपने साथ ही विष्णु लोक लेकर पहुँच गये कि पता नहीं कब महाराज पलटी मार दे।
    
उधर, लक्ष्मी जी ने नाना प्रकार के व्यंजन अपने हाथों से तैयार कर सर्वनिंदक महाराज को परोसा। सर्वनिंदक जी ने जमकर हाथ साफ किया। वे बड़े प्रसन्न दिख रहे थे। विष्णु जी को पूरा विश्वास हो गया कि सर्वनिंदक जी लक्ष्मी जी के बनाये भोजन की निंदा कर ही नहीं सकते। फिर भी नारद जी को संतुष्ट करने के लिए पूछ लिया, और महाराज भोजन कैसा लगा?
    
सर्वनिंदक जी बोले, महाराज भोजन का तो पूछिए मत, आत्मा तृप्त हो गयी। लेकिन... भोजन इतना भी अच्छा नहीं बनना चाहिए कि आदमी खाते-खाते प्राण ही त्याग दे।
    
विष्णु जी ने माथा पीट लिया और बोले, 'हे वत्स, निंदा के प्रति आपका समर्पण देखकर मैं प्रसन्न हुआ। आपने तो लक्ष्मी जी को भी नहीं छोडा़, वर माँगो।
    
सर्वनिंदक जी ने शर्माते हुए कहा -- हे प्रभु मेरे वंश में वृद्धि होनी चाहिए।

तभी से ऐसे निरर्थक सर्वनिंदक हमारे आसपास ही नहीं वरन सभी जगहों में पाए जाने लगे..।

*विशेष : हम चाहे कुछ भी कर लें.. इन सर्वनिंदकों की प्रजाति को संतुष्ट नहीं कर सकते! आज वर्तमान में यह प्रवृत्ति विश्व के 90 प्रतिशत मनुष्यों में दिखाई दे रही है । इससे स्वयं को हानी होने से हम अपने कर्तव्य का पालन नहीं कर पा रहे है।अतः ऐसे लोगों की परवाह किये बिना अपने कर्तव्य पथ पर हमें अग्रसर रहना चाहिए। हमें अपनी दृढ़ संकल्प शक्ति के द्वारा इस आदत पर विजय प्राप्त करनी चाहिए।*

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गुरुवार, 20 अक्टूबर 2022

गांव के अनमोल संस्कार

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒गांव के अनमोल संस्कार ✍️🐒*

गांव के स्कूल में पढ़ने वाली छुटकी आज बहुत खुश थी, उसका दाखिला शहर के एक आधुनिक सुविधाओं से युक्त  स्कूल में क्लास छठवीं में हो गया था।

आज स्कूल का पहला दिन था और वो समय से पहले ही तैयार हो कर स्कूल बस का इंतज़ार कर रही थी। स्कूल बस आई और छुटकी बड़े उत्साह के साथ उसमे सवार हो गयी।

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करीब एक घंटे बाद जब बस स्कूल पहुंची तो सारे बच्चे उतर कर अपनी-अपनी क्लास में जाने लगे…छुटकी भी बच्चों से पूछते हुए अपनी क्लास में पहुंची।

क्लास के बच्चे गांव से आई इस लडकी को देखकर उसका मजाक उड़ाने आगे।

“साइलेंस!”, टीचर बोली, “ चुप हो जाइए आप सब…”

“ये छुटकी है, और आज से ये आपके साथ ही पढ़ेगी।”

उसके बाद टीचर ने बच्चों को सरप्राइज टेस्ट के लिए तैयार होने को कह दिया।

“चलिए, अपनी-अपनी कॉपी निकालिए और जल्दी से “दुनिया के सात आश्चर्य लिख डालिए।”, टीचर ने निर्देश दिया।

सभी बच्चे जल्दी जल्दी उत्तर लिखने लगे, छुटकी भी धीरे-धीरे अपना उत्तर लिखने लगी।

जब सबने अपनी कॉपी जमा कर दी तब टीचर ने छुटकी से पूछा, “क्या हुआ बेटा, आपको जितना पता है उतना ही लिखिए, इन बच्चों को तो मैंने कुछ दिन पहले ही दुनिया के सात आश्चर्य बताये थे।”

“जी, मैं तो सोच रही थी कि इतनी सारी चीजें हैं…इनमे से कौन सी सात चीजें लिखूं….”, छुटकी टीचर को अपनी कॉपी थमाते हुए बोली।

टीचर ने सबकी कापियां जोर-जोर से पढनी शुरू कीं..ज्यादातर बच्चों ने अपने उत्तर सही दिए थे…

ताजमहल
चीचेन इट्ज़ा
क्राइस्ट द रिडीमर की प्रतिमा
कोलोसियम
चीन की विशाल दीवार
माचू पिच्चू
पेत्रा
टीचर खुश थीं कि बच्चों को उनका पढ़ाया याद था। बच्चे भी काफी उत्साहित थे और एक दुसरे को बधाई दे रहे थे…

अंत में टीचर ने छुटकी की कॉपी उठाई, और उसका उत्तर भी सबके सामने पढ़ना शुरू किया….

दुनिया के 7 आश्चर्य हैं:

1देख पाना
2सुन पाना
3किसी चीज को महसूस कर पाना
4हँस पाना
5प्रेम कर पाना
6सोच पाना
7दया कर पाना

छुटकी के उत्तर सुन पूरी क्लास में सन्नाटा छा गया। टीचर भी अवाक खड़ी थी….आज गांव से आई एक बच्ची ने उन सभी को प्रकृति के दिए उन अनमोल तोहफों को याद करा दिया था। जिनके तरफ उन्होंने कभी ध्यान ही नहीं दिया था!

सचमुच , गहराई से सोचा जाए तो हमारी ये देखने…सुनने…सोचने…समझने… जैसी शक्तियां किसी आश्चर्य से कम नहीं हैं, ऐसे में ये सोच कर दुखी होने ने कि बजाएं कि हमारे पास क्या नहीं है हमें प्रकृति के दिए इन अनमोल तोहफों के लिए शुक्रगुजार होना चाहिए और जीवन की छोटी-छोटी बातों में छिपी खुशियों को मिस नहीं करना चाहिए।

*विशेष:-आज भी गांव में अनपढ़ माता पिताओं से उनके बच्चों को ये नैतिक संस्कार जो वर्तमान समय में आधुनिक स्कूलों में नहीं पढ़ाए जाते।आज वर्तमान में  संस्कृति व संस्कारों को शिक्षा में महत्व नहीं दिया जा रहा है।बीस साल पहले ये सम्पूर्ण भारत में प्रत्येक घरों में उनके माता पिता व अन्य सदस्यों के द्वारा जब शिशु गर्भ में आता था तभी से संस्कार दिए जाते थे।आज के विज्ञान ने हमें उपकरणों  को उपलब्ध करवा कर आलसी व महा रोगी बना दिया है।इस कारण से सबेरे उठने के बाद रात्रि विश्राम तक हमें अनेक प्रकार की दवाओं का सहारा लेना पड़ता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 19 अक्टूबर 2022

चौरासी का चिंतन

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🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 चौरासी का चिंतन ✍️🐒*

एक समय की बात है कि एक आदमी के पास बहुत कीमती घोड़ा था। उसको प्रति समय यह चिन्ता लगी रहती थी कि कहीं कोई उस घोड़े को चुरा न ले जाए। एक दिन वह ऐसे नौकर की खोज में निकला जो कि रात भर जाग कर घोड़े का पहरा दे सके। 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

रास्ते में उसे एक व्यक्ति मिला जिसने उस आदमी से कहा कि आपके घोड़े की रक्षा के लिए मुझ जैसा उपयुक्त नौकर आपको और कोई नहीं मिल सकता। क्योंकि मैं रात भर सोता नहीं हूं। मुझे सोचने की आदत है। मैं हर समय कुछ न कुछ सोचता ही रहता हूं। घोड़े का मालिक प्रसन्न हुआ और उस व्यक्ति को अपने घर ले आया। उसने घोड़े को कमरे में बंद कर बाहर से ताला लगा दिया और चाबी नौकर को दे दी।

 रात्रि के 12 बजे मालिक ने सोचा कि कहीं नौकर सो तो नहीं गया। इस बात की पुष्टि कर लेने के लिए वह नौकर के पास पहुंचा और पूछा- "क्या कर रहे हो भाई, सो तो नहीं रहे हो।" नौकर ने कहा कि नहीं, मैं सोया नहीं, मैं तो सोच रहा हूं। मालिक आश्वस्त हुआ और बोला- "क्या सोच रहे हो?" नौकर ने कहा कि मैं यह सोच रहा हूं कि जब दीवार में कील ठोकी जाती हैं तो जिस स्थान पर कील लगती है वहां की मिट्टी कहां चली जाती हैं? मालिक उसकी मूर्खता पर मुस्कुराया और साथ ही साथ आश्वस्त भी हुआ कि चलो नौकर तो ठीक मिल गया जो सोचता ही रहेगा, सोएगा नहीं।

 मालिक ने कहा- ठीक है सोचते रहो। और वह वापस अपने घर में आ गया। रात्रि के दूसरे पहर मालिक पुनः उस नौकर के पास यह देखने के लिए पहुंचा कि कहीं वह अब तो नहीं सो गया। परन्तु मालिक ने पाया कि नौकर अभी भी किसी गहन चिंतन में डूबा हुआ है। मालिक ने पूछा- "अरे भाई, अब क्या सोच रहे हो?" नौकर बोला- "मैं यह सोच रहा हूं कि जब टूथपेस्ट को दबाया जाता है तब पेस्ट बाहर क्यों आ जाता है, भीतर की ओर क्यों नहीं जाता? मालिक ने कहा- हां, ठीक है। इसी तरह सोचते रहो। सुबह चार बजे मालिक फिर आया और व्यक्ति से उसके चिन्तन का विषय पूछा। 
तो व्यक्ति ने कहा कि अब मैं एक अत्यंत गंभीर विषय पर विचार कर रहा हूं। 

मालिक बोला- "वह कौन सा गंभीर विषय हैं?" 
नौकर ने कहा- "मैं यहां सारी रात बैठा रहा, सोया भी नहीं, कमरे को ताला भी लगा हुआ था, फिर घोड़ा गायब हुआ तो हुआ कैसे ?😀😀😀"_


*🎪🕉️👪⏰↔️विशेष:- भव्य आत्माओं कहानी में थोडा सा हास्य है, मजाक ही ... लेकिन कहानी का मर्म यही है कि कहीं हम भी उस व्यक्ति की तरह सोचते ही न रह जाए और बिना रत्नत्रय ( ब्रह्मज्ञान ईश्वर दर्शन) के हमारी जिंदगी का अमूल्य समय गायब हो जाये या पूर्ण हो जाएं, और फिर से चौरासी के चक्कर में पड़ना पड़े!*
*चौरासी लाख योनियों में भी यह मनुष्य भव प्राप्त कैसे होगा क्योंकि मैंने यह जीवन दूसरों की गलतियां ढूंढने में ओर पांच इंद्रियों के पूर्ति में ही समय समाप्त कर दिया। धर्म की कुछ क्रिया भी की किंतु वह केवल अपनी प्रसिद्धि व नाम के लिए।यह बात आजतक मेरे चिंतन में नहीं आई इसलिए मैं अनादि काल से चौरासी लाख योनियों में भ्रमण कर रहा हूं।यह कहानी पढ़कर मैं वर्तमान से ही अपना चिंतन बदल कर रत्नत्रय को शास्त्रों से जानकर अपनी शक्तिनुसार अनुसार क्रमशः अपने आचरण में उतारकर यह मनुष्य भव का जो समय बाकी है उसका सदुपयोग करूंगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 18 अक्टूबर 2022

एक चुटकी ईमानदारी

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒एक चुटकी ईमानदारी  ✍️🐒*

रामू काका अपनी ईमानदारी और नेक स्वाभाव के लिए पूरे गाँव में प्रसिद्द थे। एक बार उन्होंने अपने कुछ मित्रों को भोजन पर आमंत्रित किया। वे अक्सर इस तरह इकठ्ठा हुआ करते और साथ मिलकर अपनी पसंद का भोजन बनाते।

आज भी सभी मित्र बड़े उत्साह से एक दुसरे से मिले और बातों का दौर चलने लगा।

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जब बात भोजन को लेकर शुरू हुई तभी काका को एहसास हुआ कि नमक तो सुबह ही समाप्त हो गया था।

काका नमक लाने के लिए उठे फिर कुछ सोच कर अपने बेटे को बुलाया और हाथ में कुछ पैसे रखते हुए बोले, “ बेटा, जा जरा बाज़ार से एक पैकेट नमक लेता आ..”

“जी पिताजी।”, बेटा बोला और आगे बढ़ने लगा।

“सुन”, काका बोले, “ ये ध्यान रखना कि नमक सही दाम पे खरीदना, ना अधिक पैसे देना और ना कम।”

बेटे को आश्चर्य हुआ, उसने पूछा, “पिताजी, अधिक दाम में ना लाना तो समझ में आता है, लेकिन अगर कुछ मोल भाव करके मैं कम पैसे में नमक लाता हूँ और चार पैसे बचाता हूँ तो इसमें हर्ज़ ही क्या है?”

“नहीं बेटा,” काका बोले, “ ऐसा करना हमारे गाँव के लिए अच्छा नहीं होगा  ! जा उचित दाम पे नमक लेकर आ।”

काका के मित्र भी ये सारी बात सुन रहे थे, किसी ने बोला, “ भाई, तेरी ये बात समझ ना आई, कम दाम पे नमक लेने से अपने गांव कैसे हानि हो जाएगी?”,

काका बोले, “ सोचो कोई नमक कम दाम पे क्यों बेचेगा, तभी न जब उसे पैसों की सख्त ज़रूरत हो। और जो कोई भी उसकी इस स्थिति का फायदा उठाता है वो उस मजदूर का अपमान करता है जिसने पसीना बहा कर..कड़ी मेहनत से नमक बनाया होगा”

“लेकिन इतनी सी बात से अपना गाँव कैसे बर्वाद हो जाएगा?”, मित्रों ने हँसते हुए कहा।

“भव्य आत्माओं, शुरू में समाज के अन्दर कोई बेईमानी नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे हम लोग इसमें एक-एक चुटकी बेईमानी डालते गए और सोचा कि इतने से क्या होगा, पर खुद ही देख लो हम कहाँ पहुँच गए हैं… आज हम एक चुटकी ईमानदारी के लिए तरस रहे हैं!”

*🔔👪✍️🪜⏰विशेष:- अपनी जिंदगी में हम बहुत बार ऐसा व्यवहार करते हैं जो हम भी अन्दर से जानते हैं कि वो गलत है। पर फिर हम ये सोच कर कि “इससे क्या होगा!”, अपने आप को समझा लेते हैं और गलत काम कर बैठते हैं और इस तरह समाज में अपने हिस्से की बेईमानी डाल देते हैं। चलिए, हम सब प्रयास करें कि ईमानदारी की बड़ी - बड़ी मिसाल कायम करने से पहले अपनी रोज-मर्रा की जीवन में ईमानदारी घोलें और एक चुटकी बेईमानी को एक चुटकी ईमानदारी से समाप्त करें! अतः हमसभी को स्वयं का आकलन करते हुए सबसे पहले स्वयं सुधरो यह निती हमें अपने उपर लागू करनी होगी।हम सुधरेंगे पूरा विश्व सुधरेंगा। किसी अन्य का सुधार ना हो भी हो तो हमारा स्वयं का वर्तमान सुधारने से भविष्य में हमें ईमानदारों का साथ प्राप्त होगा।जो सुख की अनुभूति हमें होगी उसे शब्दों में कहां नहीं जा सकता ।*

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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 17 अक्टूबर 2022

संघर्ष से सुरक्षा

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 संघर्ष से सुरक्षा ✍️🐒*

            एक पांच साल का लड़की सपना गर्मी की छुट्टियों में अपने दादा जी के पास  गाँव घूमने आई। एक दिन वो बड़ी खुश थी, उछलते-कूदते वो दादाजी के पास पहुंची और बड़े गर्व से बोला, ” जब मैं बड़ी हो जाऊंगी तब मैं बहुत सफल नागरिक बनुंगी। क्या आप मुझे सफल होने के कुछ टिप्स दे सकते हैं?”

दादा जी ने ‘हां’ में सिर हिला दिया, और बिना कुछ कहे लड़की का हाथ पकड़ा और उसे करीब की पौधशाला में ले गए।
वहां जाकर दादा जी ने दो छोटे-छोटे नीम के पौधे खरीदे और घर वापस आ गए।

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वापस लौट कर उन्होंने एक पौधा घर के बाहर लगा दिया और एक पौधा गमले में लगा कर घर के अन्दर रख दिया।

“क्या लगता है तुम्हे, इन दोनों पौधों में से भविष्य में कौन सा पौधा अधिक सफल होगा?”, दादा जी ने लड़की से पूछा।

लड़की कुछ क्षणों तक सोचती रही और फिर बोली, ” घर के अन्दर वाला पौधा ज्यादा सफल होगा क्योंकि वो हर एक खतरे से सुरक्षित है जबकि बाहर वाले पौधे को तेज धूप, आंधी-पानी, और जानवरों से भी खतरा है…”

दादाजी बोले, ” चलो देखते हैं आगे क्या होता है !”, और वह अखबार उठा कर पढने लगे।

कुछ दिन बाद छूट्टियाँ समाप्त हो गई और वो लड़की वापस शहर चली गई।

इस बीच दादाजी दोनों पौधों पर बराबर ध्यान देते रहे और समय बीतता गया। 4 साल बाद एक बार फिर वो अपने माता-पिता के साथ गांव घूमने आया और अपने दादा जी को देखते ही बोला, “दादा जी, पिछली बार मैं आपसे सफल नागरिक होने के कुछ सुझाव मांगे थे पर आपने तो कुछ बताया ही नहीं…पर इस बार आपको ज़रूर कुछ बताना होगा।”

दादा जी मुस्कुराये और लड़की को उस जगह ले गए जहाँ उन्होंने गमले में पौधा लगाया था।

*बच्ची ने दादाजी से पूछा आपने नीम के ही पौधे क्यों लगायें । दादाजी ने कहा कि नीम के पेड़ से मिलकर आने वाली हवा हमें अनेक रोगों से बचाती है। नीम के पेड़ की छांव , पत्ती, फूल, फल,छाल व लकड़ी सभी में अनेक औषधीय गुणों के कारण यह पौधे लगाए है।*
अब वह पौधा एक खूबसूरत पेड़ में बदल चुका था।

लड़की बोली, ” देखा दादाजी मैंने कहा था न कि ये वाला पौधा ज्यादा सफल होगा…”

“अरे, पहले बाहर वाले पौधे का हाल भी तो देख लो…”, और ये कहते हुए दादाजी लड़की को बाहर ले गए।

बाहर एक विशाल वृक्ष गर्व से खड़ा था! उसकी शाखाएं दूर तक फैलीं थीं और उसकी छाँव में खड़े राहगीर आराम से बातें कर रहे थे।

“अब बताओ कौन सा पौधा ज्यादा सफल हुआ?”, दादा जी ने पूछा।

“…ब..ब…बाहर वाला!….लेकिन ये कैसे संभव है, बाहर तो उसे न जाने कितने खतरों का सामना करना पड़ा होगा….फिर भी…”, लड़की आश्चर्य से बोली।

*🔔⏰🪜😇↔️विशेष:-दादा जी मुस्कुराए और बोले, “हाँ, लेकिन संघर्ष स्वीकार करने के अपने उपहार भी तो हैं, बाहर वाले पेड़ के पास आज़ादी थी कि वो अपनी जड़े जितनी चाहे उतनी फैला ले, आपनी शाखाओं से आसमान को छू ले…बेटे, इस बात को याद रखो और तुम जो भी करोगे उसमे सफल होगे- अगर तुम जीवन भर सुरक्षित जीवन पसन्द करते हो तो तुम कभी भी उतना नहीं बढ़ पाओगे जितनी तुम्हारी क्षमता है, लेकिन अगर तुम तमाम संघर्षों के बावजूद इस दुनिया का सामना करने के लिए तैयार रहते हो तो तुम्हारे लिए कोई भी लक्ष्य हासिल करना असम्भव नहीं है!   लड़की ने लम्बी सांस ली और उस विशाल वृक्ष की तरफ देखने लगी…वो दादाजी की बात समझ चुकी थी, आज उसे सफलता का एक बहुत बड़ा सबक मिल चुका था! बिना संघर्ष व मेहनत के हम कुछ भी नहीं कर सकते ‌। अतः हमें योग्य गुरु के मार्गदर्शन में स्वशक्ती को जागृत कर अपनें लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए।*

 *🕉️🐒✍️भव्य आत्माओं हमारे पूर्वो पार्जित कर्मों ने हमें एक अर्थ पूर्ण जिंदगी जीने के लिए बनाया है। लेकिन दुर्भाग्य से अधिकतर लोग डर-डर के जीते हैं और कभी भी अपने कर्तव्य को महसूस नही कर पाते। इस बेकार के डर को पीछे छोड़िए…जिन्दगी जीने का असली जीवन तभी है जब आप वो सब कुछ कर पाएं जो सब कुछ आप कर सकते हैं…वरना दो वक्त की रोटी की व्यवस्था तो पशु पक्षी भी कर लेते है…इसलिए हर समय सुरक्षित रहने केलिए हमें अपनी मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए। अन्य शार्टकट व लुभावने चक्कर में मत जाओ …जोखिम से बचिए।  उस विशाल वृक्ष की तरह संघर्ष करते हुए अपनी जड़ों को मजबूत कर जिंदगी को सुंदर बनाइये!*

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*जैनम जयतु शासनम*
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रविवार, 16 अक्टूबर 2022

सफलता का रहस्य

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सफलता का रहस्य ✍️🐒*

        एक व्यापारी जिसका व्यापार डूब गया था, वह अपनी जिंदगी से बुरी तरह थक -हार चुका था।
        परेशान होकर जंगल में गया और बहुत देर तक अकेले बैठा रहा । कुछ सोचकर,वह भगवान  को संबोधित करते हुए बोला -'भगवान मैं हार चुका हूं,मुझे कोई एक वजह बताइए, कि मैं जीवित रहूं। मेरा सब खत्म हो गया है। मेरी मदद करिए।।'

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        उस स्थान के वनदेवता ने जवाब दिया।
        तुम जंगल में इस घास और बांस के पेड़ को देखो। जब प्रकृति ने घास और बांस के बीज लगाए, तो दोनों की अच्छे से देखभाल की,एक सा पानी और रोशनी दी...।
       पर घास जल्दी बड़ी होने लगी और धरती को हरा भरा कर दिया, लेकिन बांस का बीज बड़ा नहीं हुआ। पर प्रकृति ने बांस के लिए हिम्मत नहीं हारी...।
        दूसरे साल घास और घनी हो गई,लेकिन बांस का बीज नहीं ऊगा ।प्रकृति ने  फिर भी हिम्मत नहीं हारी...।
         तीसरे साल भी बांस के बीज में कोई अंकुर नहीं निकला।सुनो भव्यात्मा ! प्रकृति ने फिर भी हिम्मत नहीं हारी...।
        चौथे साल बांस के बीच में अंकुर नहीं आए। प्रकृति  नाराज नहीं हुई ।
       5 साल बाद उस बांस के बीज से एक छोटा सा पौधा अंकुरित हुआ, जो घास की तुलना में बहुत छोटा था, और कमजोर था ।लेकिन केवल 6 महीने बाद यह छोटा सा पौधा 100 फीट लंबा हो गया...।
        प्रकृति ने इस बांस की जड़ को विकसित करने के लिए 5 साल का समय लगाया। इन 5 सालों में इसकी जड़ इतनी मजबूत हो गई कि 100 फीट ऊंचे बांस को संभाल सकें...।
        'जब भी आपको जीवन में संघर्ष करना पड़े तो समझिये कि, आप की जड़ मजबूत हो रही है ।आप का संघर्ष आप को मजबूत बना रहा है, जिससे कि आप आने वाले कल को सबसे बेहतरीन बना सको...।'इसके लिए आपको अपने लक्ष्य को ध्यान रखते हुए उसे प्राप्त करने के लिए समिचीन प्रयास करते रहना चाहिए।
         बांस के बीज ने  हार नहीं मानी...। उसने सबसे पहले प्रकृति से समझौता कर आवश्यक तत्व को ग्रहण कर अपनी जड़ों को मजबूत किया।
अतः आप भी हार न  मानें अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से स्वयं को तैयार करें...।
किसी दूसरे से अपनी तुलना मत करो।
घास और बांस दोनों के बड़े होने का समय अलग अलग है,दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है ...।
तुम्हारा भी समय आएगा, तुम भी एक दिन बांस के पेड़ की तरह आसमान छुओगे ।बांस के बीज ने हिम्मत नहीं हारी। तुम भी मत हारो...। 
       अपनी जिंदगी में संघर्ष से मत घबराओ,यही  संघर्ष हमारी सफलता की जड़ों को मजबूत करेगा।
        हमेशा अपने छोटे-छोटे प्रयासों को जारी, रखें सफलता एक ना एक दिन अवश्य मिलेगी...।
       " जहां चाह वहां राह"

*👪⏰🙏🪜↔️विशेष:- इस कहानी को पढ़ने के बाद आप अपनी सकारात्मक शक्ति को जागृत कर अपनें लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यथायोग्य योजना बनाएं। आपकी नकारात्मकता आपको समय समय पर हताश करेंगी किंतु स्वयं की संकल्प शक्ति के आगे वह कुछ भी नहीं कर सकेंगी।यही आपकी सफलता का रहस्य होगा।✍️🔔*

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शनिवार, 15 अक्टूबर 2022

लालची मामा

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒लालची मामा ✍️🐒*

एक बार की बात है दो व्यक्ति थे, जिनका नाम था मामा और फूफा। मामा और फूफा दोनों व्यापार करते थे और दोनों व्यापार में सहभागी थे। मामा ने फूफा से कहा,” फूफा क्यों ना हम कोई ऐसी वस्तु खरीद लें जो जल्दी खराब ना हो और उसकी कीमत भी बढती रहे; फिर हम उसे कुछ वर्षो बाद बेचें जिससे उसके मूलधन से ज्यादा दाम मिले।”
*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-भव्य महान आत्माओं आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के आत्मकल्याण के संस्कार तो पड़ गये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।जी हां जितना हमारा समीचीन पूरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने कीमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें। आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

फूफा ने कहा,”ठीक है मामा, तुम्हारी बात तो सही है, पर हम खरीदें क्या?”

उन्होंने आपस में राय-मशवरा किया और लोहा खरीदने का निर्णय लिया। दोनों ने बराबर रूपये मिला कर लोहा खरीदा। फूफा ने मामा से कहा कि लोहा वह कहीं सूरक्षित स्थान पर रख दे।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
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मामा ने लोहा अपने पास एक पुरानी कोठरी में रख लिया।

कुछ दिन तो लोहा जस का तस रखा रहा पर धीरे-धीरे मामा के मन में लालच आ गया और मामा फूफा को बिना बताये लोहा बेचने लगा।

काफी दिनों बाद  फूफा मामा के पास गया और बोला,”मामा आज लोहे का भाव काफी बढ़ गया है, जल्दी से वह लोहा निकालो, हम इसे बेच-कर आते हैं।”

इस पर मामा बोला, “फूफा लोहा तो अब कबाड़ घर में नहीं है, क्योंकि लोहे को तो घुन खा गये हैं।”

फूफा समझ गया की मामा ने उसके साथ धोखा किया है। और उसे बिना बताये सारा का सारा लोहा बेच दिया है। फूफा को क्रोध तो बहुत आया पर वह बिना कुछ कहे-सुने वहां से चला गया।

इस घटना के कुछ दिनों बाद फूफा मामा के पास आया और बोला,”मामा मैं एक बारात में जा रहा हूँ, बड़ा अच्छा इंतजाम है,  अकेला हूँ चाहो तो अपने लड़के को साथ भेज दो, उसकी भी मौज हो जायेगी और कल सुबह तक हम वापस भी आ जायेंगे।”

मामा बोला,”क्यों नहीं, बेशक तुम मेरे लड़के को अपने साथ लेकर जाओ। और हां इसे बारात में अच्छी तरह खाना-वाना खिला देना।”

फूफा बोला, “यह भी भला कोई कहने की बात है मामा, तुम निश्चिंत रहो।” इस तरह दो दिन बीत गए। मामा का लड़का अभी तक घर वापस नहीं आया। मामा को बहुत चिंता हो गयी की अभी तक उसका लड़का घर वापस क्यों नहीं आया है?

वह अपने लड़के के बारे में जानने के लिए फूफा के पास गया और बोला, “फूफा मेरा लड़का कहाँ है? वह अभी तक घर वापस क्यों नहीं आया है?”

फूफा ने कहा, “क्या बताऊँ मामा, रास्ते में एक चील तुम्हारे लड़के को उठा कर ले गयी।”

मामा बोला, “ये कैसे हो सकता है, भला कोई चील 12 साल के लड़के को उठा कर ले जा सकती है? सीधी तरह मेरा लड़का मुझे वापस करों, नहीं तो मैं राजा भीम के पास जाऊंगा।”

फूफा बोला,”ठीक है मामा, चलो राजा जी के पास चले, अब वही न्याय करेंगे।”

मामला वहां के राजा भीम के सामने पेश हुआ।

राजा भीम ने सारी बात सुनी और आश्चर्यचकित होते हुए फूफा से कहा, “देखो फूफा तुम झूठ बोल रहे हो, भला कोई चील 12 वर्ष के लड़के को उठा कर अपने पंजो से आसमान में ले जा सकती है?”

इस पर फूफा ने उत्तर दिया,

 “कथा कहूँ कथावली, सुनो राजा भीम।
लोहा को घुनन खाय, तो लड़का ले गया चील।”

इस पर राजा भीम सब समझ गये और उन्होंने मामा को आज्ञा दी की वह फूफा का लोहा वापस कर दे। और फूफा को कहा कि वह लड़के को मामा के पास वापस पहुंचा दे।

*⏰🔔👪↔️✍️विशेष:-लालच के कारण अच्छे अच्छे रिश्ते भी टूट जाते है,क्योकि लालच मनुष्य को बुरा बना देता है,इसलिए कभी भी किसी के साथ लालच में आकर धोखा नही देना चाहिए।यह लालच ही हमसभी के पतन का मुख्य कारण है। अतः हमें पतन से बचकर ऊपर उठना है तो लालच का त्याग करना आवश्यक है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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