बुधवार, 19 अक्टूबर 2022

चौरासी का चिंतन

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 चौरासी का चिंतन ✍️🐒*

एक समय की बात है कि एक आदमी के पास बहुत कीमती घोड़ा था। उसको प्रति समय यह चिन्ता लगी रहती थी कि कहीं कोई उस घोड़े को चुरा न ले जाए। एक दिन वह ऐसे नौकर की खोज में निकला जो कि रात भर जाग कर घोड़े का पहरा दे सके। 

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रास्ते में उसे एक व्यक्ति मिला जिसने उस आदमी से कहा कि आपके घोड़े की रक्षा के लिए मुझ जैसा उपयुक्त नौकर आपको और कोई नहीं मिल सकता। क्योंकि मैं रात भर सोता नहीं हूं। मुझे सोचने की आदत है। मैं हर समय कुछ न कुछ सोचता ही रहता हूं। घोड़े का मालिक प्रसन्न हुआ और उस व्यक्ति को अपने घर ले आया। उसने घोड़े को कमरे में बंद कर बाहर से ताला लगा दिया और चाबी नौकर को दे दी।

 रात्रि के 12 बजे मालिक ने सोचा कि कहीं नौकर सो तो नहीं गया। इस बात की पुष्टि कर लेने के लिए वह नौकर के पास पहुंचा और पूछा- "क्या कर रहे हो भाई, सो तो नहीं रहे हो।" नौकर ने कहा कि नहीं, मैं सोया नहीं, मैं तो सोच रहा हूं। मालिक आश्वस्त हुआ और बोला- "क्या सोच रहे हो?" नौकर ने कहा कि मैं यह सोच रहा हूं कि जब दीवार में कील ठोकी जाती हैं तो जिस स्थान पर कील लगती है वहां की मिट्टी कहां चली जाती हैं? मालिक उसकी मूर्खता पर मुस्कुराया और साथ ही साथ आश्वस्त भी हुआ कि चलो नौकर तो ठीक मिल गया जो सोचता ही रहेगा, सोएगा नहीं।

 मालिक ने कहा- ठीक है सोचते रहो। और वह वापस अपने घर में आ गया। रात्रि के दूसरे पहर मालिक पुनः उस नौकर के पास यह देखने के लिए पहुंचा कि कहीं वह अब तो नहीं सो गया। परन्तु मालिक ने पाया कि नौकर अभी भी किसी गहन चिंतन में डूबा हुआ है। मालिक ने पूछा- "अरे भाई, अब क्या सोच रहे हो?" नौकर बोला- "मैं यह सोच रहा हूं कि जब टूथपेस्ट को दबाया जाता है तब पेस्ट बाहर क्यों आ जाता है, भीतर की ओर क्यों नहीं जाता? मालिक ने कहा- हां, ठीक है। इसी तरह सोचते रहो। सुबह चार बजे मालिक फिर आया और व्यक्ति से उसके चिन्तन का विषय पूछा। 
तो व्यक्ति ने कहा कि अब मैं एक अत्यंत गंभीर विषय पर विचार कर रहा हूं। 

मालिक बोला- "वह कौन सा गंभीर विषय हैं?" 
नौकर ने कहा- "मैं यहां सारी रात बैठा रहा, सोया भी नहीं, कमरे को ताला भी लगा हुआ था, फिर घोड़ा गायब हुआ तो हुआ कैसे ?😀😀😀"_


*🎪🕉️👪⏰↔️विशेष:- भव्य आत्माओं कहानी में थोडा सा हास्य है, मजाक ही ... लेकिन कहानी का मर्म यही है कि कहीं हम भी उस व्यक्ति की तरह सोचते ही न रह जाए और बिना रत्नत्रय ( ब्रह्मज्ञान ईश्वर दर्शन) के हमारी जिंदगी का अमूल्य समय गायब हो जाये या पूर्ण हो जाएं, और फिर से चौरासी के चक्कर में पड़ना पड़े!*
*चौरासी लाख योनियों में भी यह मनुष्य भव प्राप्त कैसे होगा क्योंकि मैंने यह जीवन दूसरों की गलतियां ढूंढने में ओर पांच इंद्रियों के पूर्ति में ही समय समाप्त कर दिया। धर्म की कुछ क्रिया भी की किंतु वह केवल अपनी प्रसिद्धि व नाम के लिए।यह बात आजतक मेरे चिंतन में नहीं आई इसलिए मैं अनादि काल से चौरासी लाख योनियों में भ्रमण कर रहा हूं।यह कहानी पढ़कर मैं वर्तमान से ही अपना चिंतन बदल कर रत्नत्रय को शास्त्रों से जानकर अपनी शक्तिनुसार अनुसार क्रमशः अपने आचरण में उतारकर यह मनुष्य भव का जो समय बाकी है उसका सदुपयोग करूंगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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