शनिवार, 1 अक्टूबर 2022

समस्याओं का समाधान

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 समस्याओं का समाधान ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️ 1. आश्विन शुक्ल अष्टमी 03 अक्टूबर 2022   सोमवार  को 10 वें तीर्थंकर 1008 श्री शीतलनाथ भगवानजी का मोक्ष कल्याणक  महोत्सव हैं।*
*🕉️✍️यह कल्याणक की तिथि उत्तर पुराण के अनुसार प्रमाणित है। इस तिथि के अनुसार विश्व के सभी देशों में दिगंबर आम्नाय वाले 99.90% लोग उत्सव मनाकर जीवन सार्थक करते  है।🐒✍️*
*👨‍👩‍👧‍👦आपसभी सपरिवार , इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव कर जीवन सफल करें।*

एक दस वर्षीय लड़का रोज अपने पिता के साथ पास की पहाड़ पर सैर को जाता था।

एक दिन लड़के ने कहा, “पिताजी चलिए आज हम दौड़ लगाते हैं, जो पहले चोटी पे लगी उस झंडी को छू लेगा वो रेस जीत जाएगा!”

पिताजी तैयार हो गए।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
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दौड़ चालू की गई 

दूरी काफी थी, दोनों ने धीरे-धीरे दौड़ना शुरू किया।

कुछ देर दौड़ने के बाद पिताजी अचानक ही रुक गए।

“क्या हुआ पापा, आप अचानक रुक क्यों गए, आपने अभी से हार मान ली क्या?”, लड़का मुस्कुराते हुए बोला।

“नहीं-नहीं, मेरे जूते में कुछ कंकड़ आ गए हैं, बस उन्ही को निकालने के लिए रुका हूं।”, पिताजी बोले।

लड़का बोला, “अरे, कंकड़ तो मेरे भी जूतों में पड़े हैं, पर अगर मैं रुक गया तो रेस हार जाऊगा…”, और ये कहता हुआ वह तेजी से आगे भागा।

पिताजी भी कंकड़ निकाल कर आगे बढे, लड़का बहुत आगे निकल चुका था, पर अब उसे  पैर में दर्द का एहसास हो रहा था, और उसकी गति भी घटती जा रही थी। धीरे-धीरे पिताजी भी उसके करीब आने लगे थे।

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-भव्य महान आत्माओं आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढ़कर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के आत्मकल्याण के संस्कार तो पड़गये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।जी हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें। आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

लड़के के पैरों में तकलीफ देख पिताजी पीछे से चिल्ला कर बोलें,” क्यों नहीं तुम भी अपने कंकड़ निकाल लेते हो?”

“मेरे पास इसके लिए टाइम नहीं है !”, लड़का बोला और दौड़ता रहा।

कुछ ही देर में पिताजी उससे आगे निकल गए।

चुभते कंकड़ों की वजह से लड़के की तकलीफ बहुत बढ़ चुकी थी और अब उससे चला नहीं जा रहा था, वह रुकते-रुकते चीखा, “पापा, अब मैं और नहीं दौड़ सकता!”

पिताजी जल्दी से दौड़कर वापस आयें और अपने बेटे के जूते खोले, देखा तो पैर से खून निकल रहा था। वे  झटपट उसे घर ले गए और मरहम-पट्टी की।

जब दर्द कुछ कम हो गया तो उन्होंने ने समझाया,” बेटे, मैंने आपसे कहा था न कि पहले अपने कंकड़ों को निकाल लो फिर दौड़ो।”


“मैंने सोचा मैं रुका तो रेस हार जाऊगा !”,बेटा बोला।

“ ऐसा नही है बेटा, अगर हमारी जिंदगी में कोई प्रॉब्लम आती है तो हमे उसे ये कह कर टालना नहीं चाहिए कि अभी हमारे पास समय नहीं है। दरअसल होता क्या है, जब हम किसी समस्या की अनदेखी करते हैं तो वो धीरे-धीरे और बड़ी होती जाती है और अंततः हमें जितना नुकसान पहुंचा सकती थी उससे कहीं अधिक नुकसान पहुंचा देती है। तुम्हे कंकड़ों को निकालने में मुश्किल से 2 मिनट का समय लगता पर अब उस 2 मिनट के बदले तुम्हे 2 हफ्ते तक दर्द सहना होगा। “ पिताजी ने अपनी बात पूरी की।

*🌞करने योग्य🌞*
*👪🔔↔️🪜🙏भव्य आत्माओं, हमारी जिंदगी ऐसे तमाम कंकड़ों से भरी हुई है, कभी हम अपने आर्थिक स्थिति को लेकर परेशान होते हैं तो कभी हमारे रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है तो कभी हम साथ काम करने वाले साथी से समस्या होती है।*

*शुरू में ये समस्याएं छोटी जान पड़ती है और हम इन पर बात करने या इनका समाधान खोजने से बचते हैं, पर धीरे-धीरे इनका रूप बड़ा हो जाता है… कोई उधार जिसे हम हजार रूपये देकर चुका सकते थे उसके लिए अब 5000 रूपये चाहिए होते हैं… रिश्ते की जिस कड़वाहट को हम एक क्षमा याचना से दूर कर सकते थे वो अब टूटने की कगार पर आ जाता है और एक छोटी सी मीटिंग से हम अपने साथी से जो भ्रम समाप्त कर सकते थे वो कार्यस्थल की राजनीति बनकर हमें जीवन भर नकारात्मक उर्जा देती है। अतः हमें जीवन में आने वाली अनगिनत समस्याओं को अपने माता पिता, गुरुजनों या अनुभवी मित्रों को बताकर समस्याओं से मुक्त होना चाहिए। वर्तमान में अत्यधिक लोगों में स्वयं की नकारात्मकता ही सबसे बड़ी समस्या है।उस व्यक्ति विशेष के अंदर मैं यह कार्य पूर्ण नहीं कर सकता इस प्रकार के विचारों के कारण वह सफलता की अंतिम मंजिल तक पहुंच नहीं पाता।समस्याओं पर तभी हमारी पकड़ हो जब वो छोटी हैं वर्ना देरी करने पर वे हमारे अनमोल जीवन का सबसे मूल्यवान समय खराब कर हमें अपाहिज बना देती है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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