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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒हमारी भूल ✍️🐒*
एक संत के आश्रम में एक शिष्य कहीं से एक तोता ले आया।
और उसे पिंजरे में रख दिया।संत ने कई बार शिष्य से कहा कि इसे कैद ना करो।
परतंत्रता संसार का सबसे बड़ा अभिशाप है।
पर शिष्य अपने बाल सुलभ कोतुहल को रोक ना सका।
उसने तोते को पिंजरे में ही बंद रहने दिया।
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तब संत ने सोचा कि तोते को ही स्वतंत्र होने का पाठ पढ़ाना चाहिए। वह हर दिन तोते के पास जाने लगे। और उसे नित्य ही सिखाने लगे “पिंजरा छोड़ दो उड़ जाओ”। कुछ दिन में तोते को वाक्य भली भांति रट गया।
तब एक दिन सफाई करते समय
शिष्य से भूल से पिंजरा खुला रह गया।
संत कुटी में आए तो देखा
तोता पिंजरे से बाहर निकल आया है।
और बड़े आराम से इधर-उधर घूम रहा है।
साथ ही ऊंचे स्वर में कह भी रहा है।
“पिंजरा छोड़ दो उड़ जाओ”।
संत को आता देख
वह अपने पिंजरे में अंदर चला गया।
और अपना पाठ जोर जोर से दोहराने लगा।
संत को यह देखकर आश्चर्य हुआ। साथ ही वह दुखी भी हुआ। वह यही सोचते रहे कि इसने केवल शब्द को ही याद किया। यदि इसका अर्थ भी जानता तो यह इस समय पिंजरे से स्वतंत्र हो गया होता।
*🤝करने योग्य🤝*
*⏰😇👪✍️↔️हम सब ज्ञान की बड़ी-बड़ी बातें घर के सदस्यों से, लौकिक शिक्षा से, धर्म गुरुओं से सीखते और करते हैं। पर उसका मर्म समझ नहीं पाते उचित समय और अवसर मिलने पर भी उसका लाभ नहीं उठा पाते और जहां के तहां रह जाते हैं।हम सभी बातों को समझने के बावजूद अपने आचरण में नहीं उतारते। इसका मुख्य कारण यह है कि हम सुखी नहीं होना चाहते। हम रोज कितने ही मंसूबे गड़ते रहते हैं। सोचते बहुत हैं बस सोचे हुए को किर्यांनवय नहीं हैं। फिर झुँझलाते हैं और खुद पर लापरवाह आलसी और नाकाबिल होने के ठप्पे भी लगाते हैं। दरअसल सोचना ही काफी नहीं होता खुद को बेहतर भी बनाने के लिए उस रास्ते पर हमें चलना भी होगा । जबतक हम समिचीन पुरुषार्थ नहीं करेंगे तबतक हमें यथार्थ मंजिल प्राप्त नहीं होंगी।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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