बुधवार, 5 अक्टूबर 2022

सच्चे धर्म का महत्व

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सच्चेधर्म का महत्व ✍️🐒*

एक बार एक जिज्ञासु सेठ अपने महल में पधारे हुए संत के पास निवेदन लेकर पहुंचा और बोला:

सेठ: गुरुदेव जीवन में धन पैसे का उपयोग समझ में आता है, शरीर के स्वास्थ्य का महत्व भी समझ आता है और प्रतिष्ठा और प्रभाव का महत्व भी समझ आता है। लेकिन धर्म का कोई उपयोग दिखाई नही देता पर फिर भी आप लोग सबसे ज्यादा सच्चेधर्म की दुहाई क्यों देते है?? तो लोग धर्म करते क्यो है?

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संत(जिज्ञासा सुन मुस्कुराते हुए ): तुम्हें तुम्हारी कोठी दिखाई पड़ रही है?

सेठ: हाँ दिखाई पड़ रही है |

संत: पूरी कोठी दिखाई पड़ रही है?

सेठ: हाँ, पूरी दिखाई पड़ रही है।

संत: तो तुम्हारी जितनी कोठी है तुम्हे उतनी दिखाई दे रही??

सेठ: हां, जितनी है उतनी ही दिखाई दे रही है।

कुछ पल रुक कर….

संत: तो बताओ इसकी नींव कहाँ है???

सेठ: सोचते हुए बोला गुरुदेव नींव तो दिखाई नही दे रही !!

*संत(मुस्कुराते हुए)- अगर इस कोठी की नींव नही होगी तो क्या ये कोठी दिखेगी ?*

सेठ: नही गुरुदेव नींव के अभाव में कोठी दिखाई नही पड़ेगी।

संत( संबोधते करते हुए) – “जो स्थान इस कोठी में नींव का है । वही स्थान जीवन में सच्चेधर्म का है।” जैसे कोठी की स्थिरता के लिए नींव आवश्यक है वैसे ही जीवन की स्थिरता के लिए सच्चाधर्म आवश्यक है।”

*🔔करने योग्य🔔*
*⏰🕉️👪🔔↔️भव्य आत्माओं :- आज से अभी से ही आप सच्चे धर्म को यथार्थ रूप से जानकार अपने आचरण में इसे उतारें। जिससे आपका जीवन सफल हो सके। सच्चे धर्म की परिभाषा यही है जिस धर्म के द्वारा किसी जीव की किसी भी प्रकार की तकलीफ ना हो वही सच्चाधर्म है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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