मंगलवार, 25 अक्टूबर 2022

हमारी भूल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 हमारी भूल ✍️🐒*

*🔔🙏⏰↔️विश्व के सभी धर्मानुरागियों को 1008 श्री शासन नायक सर्व सिद्धि प्रदायक महावीर स्वामी के 2549 वे निर्माण महामहोत्सव व गौतम गणधर स्वामी के केवलज्ञान की एवं सभी को नूतन 2549 वे नववर्ष की ढेर सारी शुभकामनाएं🔔🪜🙏✍️*

*⏰राजा ने मंत्री से कहा- मेरा मन प्रजाजनों में से जो वरिष्ठ हैं उन्हें कुछ बड़ा उपहार देने का हैं। बताओ ऐसे अधिकारी व्यक्ति कहां से और किस प्रकार ढूंढें जाय?*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
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*मंत्री ने कहा - सत्पात्रों की तो कोई कमी नहीं, पर उनमें एक ही कमी है कि परस्पर सहयोग करने की अपेक्षा वे एक दूसरे की टांग पकड़कर खींचते हैं। न खुद कुछ पाते हैं और न दूसरों को कुछ हाथ लगने देते हैं। ऐसी दशा में आपकी उदारता को फलित होने का अवसर ही न मिलेगा।*
*राजा के गले वह उत्तर उतरा नहीं। बोले! तुम्हारी मान्यता सच है यह कैसे माना जाय? यदि कुछ प्रमाण प्रस्तुत कर सकते हो तो करो।*
*मंत्री ने बात स्वीकार करली और प्रत्यक्ष कर दिखाने की एक योजना बना ली। उसे कार्यान्वित करने की स्वीकृति भी मिल गई।*
*एक छः फुट गहरा गड्ढा बनाया गया। उसमें बीस व्यक्तियों के खड़े होने की जगह थी। घोषणा की गई कि जो इस गड्ढे से ऊपर चढ़ जावेगा उसे आधा राज्य पुरस्कार में मिलेगा।*
*बीसों प्रथम चढ़ने का प्रयत्न करने लगे। जो थोड़ा सफल होता दीखता है उसकी टांगें पकड़कर शेष उन्नीस नीचे घसीट लेते। वह औंधे मुंह गिर पड़ता। इसी प्रकार सबेरे आरम्भ की गई प्रतियोगिता शाम को समाप्त हो गई। बीसों को असफल ही किया गया और रात्रि होते-होते उन्हें सीढ़ी लगाकर ऊपर खींच लिया गया। पुरस्कार किसी को भी नहीं मिला।*

*मंत्री ने अपने मत को प्रकट करते हुए कहा - यदि यह एकता कर लेते तो सहारा देकर किसी एक को ऊपर चढ़ा सकते थे। पर वे ईर्ष्या वश वैसा नहीं कर सकें। एक दूसरे की टांग खींचते रहे और सभी खाली हाथ रहे।*

*संसार में प्रतिभागियों  के बीच भी ऐसी ही प्रतिस्पर्धा चलती हैं और वे खींचतान में ही सारी शक्ति गंवा देते है। अस्तु उन्हें निराश हाथ मलते ही रहना पड़ता है।*

*क्या समझें*❓
*चिंतन करतें रहो जी।*
*⏰🔔🕉️🌞🙏विशेष :- आज विश्व के लगभग 97 प्रतिशत व्यक्ति विशेष आज दुसरो को उन्हें निचा दिखाने के लिए अपना समय व्यतीत कर रहे है।आज सभी दुसरो को सुधारने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है। किंतु वह व्यक्ति विशेष अपने कर्तव्य का पालन कर रत्नत्रय को धारण नहीं करना चाहता। यही वर्तमान में सबसे बड़ी हमारी भूल है। कृपया आप स्वयं को समझकर स्वयं के बारे में आत्मकल्याण के बारे में प्रयास कर अपना कर्तव्य करें।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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