गुरुवार, 29 फ़रवरी 2024

बेटी ने मांगा पिता से अनोखा दहेज

*बेटी ने मांगा पिता से अनोखा दहेज*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  बेटी ने मांगा पिता से अनोखा दहेज✍️🐒*
*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण 6, शुक्रवार ,01  2024 कलिकाल के 7 वें  तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय को ओज तेज की शक्ति प्रदान करवाने वाले 1008 श्री सुपार्श्वनाथ भगवान का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण 7, शनिवार , 02 मार्च  2024 कलिकाल के 7 वें  तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय को ओज तेज की शक्ति प्रदान करवाने वाले 1008 श्री सुपार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण 7, शनिवार , 02 मार्च  2024 आज ही के दीन कलिकाल के अष्टम तीर्थंकर चंद्र की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय को ओज तेज की शक्ति प्रदान करवाने वाले 1008 श्री चन्द्रप्रभ भगवान का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
 *🔔🪔 मार्च माह के धार्मिक पुण्य गाढ़ा करने  के लिए महत्वपूर्ण तिथियां 🔔*
*🎪17 से 25 तक आष्टान्हिका शाश्वत पर्व*
*🕉️22 मार्च आचार्य श्री चैत्यसागर मुनिराज का दीक्षा दिवस*
*⛳षोडषकारण व्रत 26 मार्च से प्रारंभ* 
 *🌞मार्च माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 4, 6, 7, 9, ,12, 14, 16, 17 ,29, 30 दिनांकों में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव है। यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

बेटी ने मांगा पिता से अनोखा दहेज ,बेटी कहूं या भाग्यवान आप समझें पूर्ण कहानी पढ़कर 

..पति ने घर में पैर रखा....‘अरी सुनती हो !'

आवाज सुनते ही पत्नी हाथ में पानी का गिलास लेकर बाहर आयी।

"अपनी बेटी का रिश्ता आया है, अच्छा भला इज्जतदार सुखी परिवार है, लडके का नाम युवराज है । बैंक मे काम करता है। बस बेटी हाँ कह दे तो सगाई कर देते है."

नेहा बेटी उनकी एकमात्र लडकी थी..

घर मेँ हमेशा आनंद का वातावरण रहता था ।

कभी कभार सिगरेट व पान मसाले के कारण उनकी पिताजी और नेहा के साथ कहा सुनी हो जाती लेकिन
वो मजाक में निकाल देते ।

वह बचपन से ही पाठशाला जाने से जैन-धर्म के मूलभूत सिद्धांत को अपने आचरण में उतारती थी। इस कारण नेहा खूब समझदार और संस्कारी थी ।S.S.C पास करके टयूशन, सिलाई का काम करके पिता की मदद करने की कोशिश करती ।

अब तो नेहा  ग्रेज्यूऐट हो गई थी और नौकरी भी करती थी लेकिन बाप उसकी पगार में से एक रुपया भी नही लेते थे...

और रोज कहते ‘ नेहा बेटी यह पगार तेरे पास रख तेरे भविष्य में तेरे काम आयेगी ।'

दोनो घरो के सभी सदस्यों की सहमति से नेहा और
युवराज की सगाई कर दी गई और शादी का मुहूर्त भी निकलवा दिया।

अब शादी के 15 दिन और बाकी थे।

बाप ने बेटी को पास में बिठाया और कहा-

" बेटी आपके ससुराल वाले तो बहुत ही अच्छे लोग है । आपके ससुरजी ने कहा है कि दहेज में कुछ नही लेंगे, ना रुपये, ना गहने और ना ही कोई अन्य मोटर कार आदि चीज ।

तो बेटी आपकी शादी के लिए मेंने कुछ रुपये जमा किए है।

यह दो लाख रुपये मैं तुझे देता हूं।.. आपके भविष्य में काम आयेगे, आप इसे अपने खाते मे जमा करवा देना।'

"जी पिताश्री- नेहा छोटा सा जवाब देकर अपने कमरे में चली गई।

समय को जाते कहां देर लगती है ?

शुभ दिन बारात आंगन में आयी,

पंडितजी ने चंवरी में विवाह विधि शुरु की। फेरे फिरने का समय आया....

कोयल जैसे कुहुकी हो ऐसे नेहा दो शब्दो में बोली

"रुको पंडितजी ।
मुझे आप सब की उपस्थिति में मेरे पापा के साथ बात करनी है,"

सभी एकदम स्तब्ध रह गए । पापा आये तो नेहा बोली:

“पापा आप ने मुझे लाड प्यार से बडा किया, पढाया, लिखाया खूब प्रेम दिया इसका कर्ज तो चुका सकती नही...

लेकिन युवराज और मेरे ससुर जी की सहमति से जो आपने दिया दो लाख रुपये का चेक मैऔ आपको वापस देती हूं।

इन रुपयों से मेरी शादी के लिए लिये हुए उधार वापस दे देना और दूसरा चेक तीन लाख रूपए का जो मैंने अपनी पगार में से बचत की है...

जब आप रिटायर होगें तब आपके काम आयेंगे, मैं नही चाहती कि आप को बुढापे मेँ आपको किसी के आगे हाथ फैलाना पड़े !आप इन पैसों से सम्मेद शिखर जी, अयोध्या आदि तीर्थ क्षेत्रों की वन्दना करते हुए दिगंबर मुनिराजो को आहार दान देते हुए अपने कर्तव्यों को करके अपने पुण्य को गाढ़ा करें।जब आयु का अंतिम समय हो तो हम सभी आपकी समाधि में सहयोगी बनकर आपका समाधि महोत्सव मनाए।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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अगर मैं आपका लडका होता तब भी इतना तो मेरा कर्तव्य होता ना ? !!! "

वहां पर सभी की नजर नेहा  पर थी...

“पापा ... रुको...
अब मैं आपसे जो दहेज में मांगू वो दोगे ना ?"

पिता श्री- भारी आवाज में -"हां नेहा बेटा", सिसकियों के बीच इतना ही बोल सके ।

"तो पापा मुझे वचन दो"
आज के बाद आप सिगरेट को कभी हाथ नही लगाओगे....

तबांकू, पान-मसाले का व्यसन आज से छोड दोगे।

सब की मौजूदगी में दहेज में बस इतना ही मांगती हूं ।."

लडकी का बाप मना कैसे करता ?

शादी मे लडकी की विदाई के समय कन्या पक्ष को रोते हुए देखा होगा लेकिन 
आज तो बारातियों की आँखों मेँ आँसुओं कि धारा निकल चुकी थी।

मैं दूर से उस बेटी को लक्ष्मी रुप मे देख रहा था। विचार कर रहा था कि अगर इस प्रकार सभी घरों में संस्कार वान बेटीयां पहुंच जाएं तो इस धरती पर ही स्वर्ग से भी सुंदर विश्व बन जाएं....

रुपये का लिफाफा मैं अपनी जेब से नही निकाल पा रहा था....

साक्षात संस्कारवान लक्ष्मी को मैं कैसे लक्ष्मी दूं ??

लेकिन एक सवाल मेरे मन में जरुर उठा,

“ लडका चाहने वाले या भ्रूण हत्या करने वाले लोगो को इस जैसी संस्कारवान लक्ष्मी मिलेगी क्या" ???

कृपया रोइए नही, आंसू पोछिए और प्रेरणा लीजिये कि हम भी अपने घर में ऐसी ही संस्कारवान बेटी ही लाएंगे।

*विशेष,भव्य आत्माओं:- एक बेटी ही सम्पूर्ण घर को संस्कारित कर जीवन सुखमय बना सकतीं है। अतः आपने मनुष्य भव सार्थक करना है तो अपने बच्चों को गर्भ में आने पहले ही स्वयं ही संस्कारवान बनते हुए अपने कर्तव्यों को दृढ़ता पूर्वक पालन करें।*

*बेटी बचाओ बेटी पढाओ...*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 27 फ़रवरी 2024

मेरे कुसंस्कार

*मेरे कुसंस्कार*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒मेरे कुसंस्कार✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण 4, बुधवार ,28 फरवरी 2024 कलिकाल के 6 वें  तीर्थंकर सूर्य की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय को ओज तेज की शक्ति प्रदान करवाने वाले 1008 श्री पद्मप्रभ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
 *🔔🪔 मार्च माह की धार्मिक तिथियां 🔔*
*🎪17 से 25 तक आष्टान्हिका शाश्वत पर्व*
*🕉️22 मार्च आचार्य श्री चैत्यसागर महा मुनिराज का दीक्षा दिवस*
*⛳षोडषकारण व्रत 26 मार्च से प्रारंभ* 
 *🌞मार्च माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 1,2,4,6,7,9, ,12,14,16,17 ,29,30 दिनांकों में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव है। यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*आज हम समझते है कि हम सहजता पूर्वक अपने आत्मा पर, अपने परिवार व अन्य परिचित-अपरिचित   मिलने वालो पर  कुसंस्कार के बीजों की खेती कर देते है।*

 🔔गाँव में एक वृद्ध व्यक्ति अपने बेटे और बहु के साथ रहता था । परिवार सुखी संपन्न था किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी ।
  वृद्ध बाप जो किसी समय अच्छा खासा नौजवान था आज बुढ़ापे से हार गया था, चलते समय लड़खड़ाता था लाठी की जरुरत पड़ने लगी, चेहरा झुर्रियों से भर चूका था बस अपना जीवन किसी तरह व्यतीत कर रहा था।
घर में एक चीज़ अच्छी थी कि शाम को भोजन करते समय पूरा परिवार एक साथ टेबल पर बैठ कर भोजन करते  थे ।
एक दिन ऐसे ही शाम को जब सारे लोग भोजन करने बैठें थे। बेटा ऑफिस से आया था भूख ज्यादा थी सो जल्दी से हाथ मुंह धोकर भोजन करने  बैठ गया और साथ में बहु और एक बेटा भी भोजन करने लगे ।
 वृद्ध बाप के हाथ जैसे ही थाली उठाने को हुए थाली हाथ से छिटक गयी थोड़ी दाल टेबल पर गिर गयी । 
बहु बेटे ने घृणा की दृष्टि से पिता की ओर देखा और फिर से अपने भोजन में लग गए। वृद्ध पिता ने जैसे ही अपने हिलते हाथों से भोजन करना शुरू किया तो खाद्य पदार्थ कभी कपड़ों पे गिरता कभी जमीन पर । 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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बहु चिढ़ते हुए कहा – हे राम कितनी गन्दी तरह से भोजन करते हैं मन करता है इनकी थाली किसी अलग कोने में लगवा देते हैं , बेटे ने भी ऐसे सिर हिलाया जैसे पत्नी की बात से सहमत हो । 
बेटा यह सब मासूमियत से देख रहा था ।अगले दिन पिता की थाली उस टेबल से हटाकर एक कोने में लगवा दी गयी । 
पिता की डबडबाती आँखे सब कुछ देखते हुए भी कुछ बोल नहीं पा रहीं थी। वृद्ध पिता रोज की तरह भोजन करने लगा , खाद्य पदार्थ कभी इधर गिरता कभी उधर ।
 छोटा बच्चा अपना भोजन छोड़कर लगातार अपने दादा की तरफ देख रहा था । 
माँ ने पूछा क्या हुआ बेटे तुम दादा जी की तरफ क्या देख रहे हो और भोजन क्यों नहीं कर रहे । 
बच्चा बड़ी मासूमियत से बोला – माँ मैं सीख रहा हूं कि वृद्धों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, जब मैं बड़ा हो जाऊँगा और आप लोग वृद्ध हो जाओगे तो मैं भी आपको इसी तरह कोने में भोजन करवाउंगा।

बच्चे के मुँह से ऐसा सुनते ही बेटे और बहु दोनों काँप उठे शायद बच्चे की बात उनके मन में बैठ गयी थी क्योंकि बच्चा ने मासूमियत के साथ एक बहुत आवश्यक सबक दोनों लोगो को दिया था ।

बेटे ने जल्दी से आगे बढ़कर पिता को उठाया और वापस टेबल पे भोजन के लिए बिठाया और बहु भी भाग कर पानी का गिलास लेकर आई कि पिताजी को कोई तकलीफ ना हो ।

*👨‍👨‍👦‍👦⛳🌞💯🔔विशेष:-भव्य आत्माओं,माँ बाप इस दुनियाँ की सबसे बड़ी पूँजी हैं आप समाज में कितनी भी इज्जत कमा लें या कितना भी धन इकट्ठा कर लें लेकिन माँ बाप से बढ़कर धन इस दुनिया में कोई नहीं है । इसका मुख्य कारण यह है कि उन्होंने हमें अच्छे संस्कार देकर हमें इस योग्यता तक पहुंचाया है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 20 फ़रवरी 2024

स्वस्थ रहने का रहस्य

*स्वस्थ रहने का रहस्य*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 स्वस्थ रहने का रहस्य ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ शुक्ल 12 ,बुधवार ,21 फरवरी 2024 कलिकाल के 4 थे  तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय को निर्मलकारी करवाने वाले 1008 श्री  अभिनंदन भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 माघ शुक्ल तेरस , गुरुवार ,22 फरवरी 2024 कलिकाल के 15 वें  तीर्थंकर बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय को निर्मलकारी करवाने वाले 1008 श्री धर्मनाथ भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*फरवरी माह में दिनांक 28 को भी तीर्थंकर भगवान के पंच कल्याणक महोत्सव है*
 *🔔🪔  यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*💐💐 स्वस्थ रहने का रहस्य💐💐* 

बहुत समय पहले की बात है , किसी गाँव में शंकर नाम का एक वृद्ध व्यक्ति रहता था। उसकी उम्र अस्सी साल से भी ऊपर थी पर वो चालीस साल के व्यक्ति से भी स्वस्थ लगता था। लोग बार बार उससे उसकी सेहत का रहस्य जानना चाहते पर वो कभी कुछ नहीं बोलता था । एक दिन राजा को भी उसके बारे में पता चला और वो भी उसकी सेहत का रहस्य जाने के लिए उत्सुक हो गए। राजा ने अपने गुप्तचरों से शंकर पर नज़र रखने को कहा। गुप्तचर भेष बदल कर उस पर नज़र रखने लगे।

अगले दिन उन्होंने देखा की शंकर भोर में उठ कर कहीं जा रहा है , वे भी उसके पीछे लग गए। शंकर तेजी से चलता चला जा रहा था , मीलों चलने के बाद वो एक पहाड़ी पर चढ़ने लगा और अचानक ही गुप्तचरों की नज़रों से गायब हो गया। गुप्तचर वहीँ रुक उसका इंतज़ार करने लगे। कुछ देर बाद वो लौटा , उसने मुट्ठी में कुछ  पकड़ रखा था और उन्हें खाता हुआ चला जा रहा था। गुप्तचरों ने अंदाज़ा लगाया कि हो न हो , शंकर इन्ही रहस्यमयी वस्तुओं को खाकर इतना स्वस्थ है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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अगले दिन दरबार में उन्होंने राजा को सारा किस्सा कह सुनाया। राजा ने उस पहाड़ी पर जाकर उन वस्तुओं का पता लगाने का आदेश दिया , पर बहुत खोज-बीन करने के बाद भी कोई ऐसा असाधारण खाद्य पदार्थ वहां नहीं दिखा। अंततः थक-हार कर राजा शंकर को दरबार में हाज़िर करने का हुक्म दिया। 

राजा – शंकर , इस उम्र में भी तुम्हारी इतनी अच्छी सेहत देख कर हम प्रसन्न हैं , बताओ , तुम्हारी सेहत का रहस्य क्या है ?

शंकर कुछ देर सोचता रहा और फिर बोला , ” महाराज , मैं रोज पहाड़ी पर जाकर एक रहस्यमयी वस्तु का सेवन करता  हूं, वही मेरी सेहत का रहस्य है। “ठीक है चलो हमें भी वहां ले चलो और दिखाओ वो कौन सी वस्तु है है। सभी लोग पहाड़ी की और चल दिए , वहां पहुँच कर शंकर ने अपनी थैली में से उबली हुई मूंगफली निकाल कर  बोला, हुजूर , यही वो चमत्कारी खाद्य पदार्थ है जिसे मैं रोज खाता हूं।

राजा क्रोधित होते हुए बोले , ” तुम हमें मूर्ख समझते हो , नवनीत यह मूंगफली हर रोज हज़ारों लोग खाते हैं , पर सभी तुम्हारी तरह सेहतमंद क्यों नहीं हैं  ?

” शंकर विनम्रता से बोला , ” महाराज , हर रोज़ हजारों लोग जो मूंगफली खाते हैं वो मूंगफली ही होती है , पर मैं जो मूंगफली में खाता हूँ वो सिर्फ उबली हुई मूंगफली ही  नहीं होती …वो मेरी मेहनत का फल होता है। इसे खाने के लिए मैं रोज सुबह चार मील पैदल चलता हूं जिससे मेरे शरीर की अच्छी वर्जिश हो जाती है और सुबह की स्वच्छ हवा मेरे लिए जड़ी-बूटियों का काम करती है। बस यही मेरी सेहत का रहस्य है।

राजा शंकर की बात समझ चुके थे , उन्होंने शंकर को स्वर्ण मुद्राएं देते हुए सम्मानित किया। और अपनी प्रजा को भी शारीरिक श्रम करने की नसीहत दी।

*👪🔔⛳🌞✍️विशेष :-भव्य आत्माओं, आज टेक्नोलॉजी ने हमारी ज़िन्दगी बिलकुल आसान बना दी है , पहले हमें छोटे -बड़े सभी कामों के लिए घर से निकलना ही पड़ता था , पर आज हम Internet के माध्यम से घर बैठे-बैठे ही सारे काम कर लेते हैं। ऐसे में जो थोड़ा बहुत शारीरिक श्रम के मौके होते थे वो भी खत्म होते जा रहे हैं , और इसका असर हमारी सेहत पर भी साफ़ देखा जा सकता है। WHO के मुताबिक , आज दुनिया में 20 साल से ऊपर के 35% लोग आवश्यकता से अधिक मोटे हैं और 11 % मोटापा ,हाइ ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी बिमारियों से ग्रसित हैं। ऐसे में ज़रूरी हो जाता है कि हम अपनी सेहत का ध्यान रखें और रोज़-मर्रा के जीवन में शारीरक श्रम शुद्ध सात्विक भोजन के साथ जिस प्रकार पक्षी सूर्यास्त के बाद आहार पानी ग्रहण नहीं करते उन सभी बातों को अपने आचरण में उतारकर इस मनुष्य भव का महत्त्व समझें।।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2024

वास्तविक मूल्य

वास्तविक मूल्य*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
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*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ शुक्ल 10 ,रविवार ,18 फरवरी 2024 कलिकाल के द्वितीय  तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय को निर्मलकारी करवाने वाले 1008 श्री अजितनाथ भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔षोडष कारण व्रत 26 जनवरी से 25 फरवरी तक*
*🌞दश लक्षण पर्व 13फरवरी से 23फरवरी तक*
*फरवरी माह में दिनांक  21, 22, 28 को भी तीर्थंकर भगवान के पंच कल्याणक महोत्सव है*
*🔔🪔  यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*वास्तविक मूल्य*

*आज की वर्तमान समय में चली आ रही भारत की राजनीति इस कहानी के माध्यम से समझ सकते है। इसलिए आप सभी जब भी अपने वोट का उपयोग करें बहुत सोच समझकर करें। वरना आज जो भारतवासियों को सिलेंडर पर 200 रुपए की छूट दी गई है।वह लोकसभा चुनाव बाद सिलेंडर के भाव दो हजार होने में देरी नहीं लगेगी। इसलिए सभी से अनुरोध है कि आप अपने श्रेत्र से एक जैन उम्मीदवार को टिकट अवश्य ही दिलवाएं। ओर स्वयं के साथ अपने परिवार व सभी का वोट उन्हें दिलवा कर भ्रष्टाचार युक्त राजनीति की समाप्ति में अपना बहुमूल्य योगदान कर यह जैन धर्म की ध्वजा को लहराते रहें।ताकि सम्पूर्ण भारत में अहिंसा धर्म से प्रजा सुखी रहें।*

👨‍👨‍👦‍👦▶️एक बनिया था 5 रुपए की एक रोटी बेचता था। उसे रोटी की कीमत बढ़ानी थी लेकिन बिना राजा की अनुमति कोई भी अपने दाम नहीं बढ़ा सकता था। लिहाजा राजा के पास बनिया पहुंचा, बोला राजाजी मुझे रोटी का दाम 10 करना है। राजा बोला तुम 10 नहीं 30 रुपए करो, बनिया बोला महाराज इससे तो हाहाकार मच जाएगा, राजा बोला इसकी चिंता तुम मत करो, तुम 10 रुपए दाम कर दोगे तो मेरे राजा होने का क्या फायदा, तुम अपना फायदा देखो और 30 रुपए दाम कर दो, अगले दिन बनिये ने रोटी का दाम बढ़ाकर 30 रुपए कर दिया।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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शहर में हाहाकार मच गया कि बनिया 5 रुपये की रोटी के 30 रुपये ले रहा है । तभी सभी जनता राजा के पास पहुंचे, बोले महाराज यह बनिया अत्याचार कर रहा है, 5 की रोटी 30 में बेच रहा है, राजा ने अपने सिपाहियों को बोला उस गुस्ताख बनिए को मेरे दरबार में पेश करो, बनिया जैसे ही दरबार में पहुंचा, राजा ने गुस्से में कहा गुस्ताख तेरी यह मजाल तूने बिना मुझसे पूछे कैसे दाम बढ़ा दिया, यह जनता मेरी है तू इन्हें भूखा मारना चाहता है, राजा ने बनिए को आदेश दिया तुम रोटी कल से आधे दाम में बेचोगे, नहीं तो तुम्हारा सर कलम कर दिया जाएगा, राजा का आदेश सुनते ही पूरी जनता ने जोर से बोला....
महाराज की जय हो ,
महाराज की जय हो,
महाराज की जय हो।
नतीजा सुनिए..
अगले दिन से 5 की रोटी 15 में बिकने लगी।🤭

अब जनता भी खुश...
बनिया भी खुश...
और राजा भी खुश।

जनता को मूर्ख बनाने में माहिर को ही जनता  कुशल शासक मान लेती है । इसको कहते हैं विवेक शून्यता।
दोस्तो हम MRP देखकर विश्वास कर चीजे खरीद लेते है दवाइयों पर कई बार 200-300% तक कीमते ज्यादा होती है जिसका जनता को पता ही नही होता । इलेक्ट्रोनिक आइटम्स पर कई गुना MRP बताई जाती है फिर discount कर दी जाती है।

_*बदलते परिवेश में जनता को भी जागरूक होना चाहिये।*_

*👨‍👨‍👦‍👦🕉️🌞🔔विशेष:-भव्य आत्माओं,आज भारत में जितना टैक्स भारत सरकार को प्राप्त हो रहा है उसमें जैनियों की पच्चीस प्रतिशत की भागीदारी है। इसलिए अब समय आ गया है कि सम्पूर्ण राजनिती में भी जैनियों की कम से कम तीस प्रतिशत भागीदारी होनी चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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मंगलवार, 13 फ़रवरी 2024

जीवन की वास्तविक खोज

*👨‍👨‍👦‍👦जीवन की खोज-वास्तविक या परछाई⏰*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒जीवन की खोज-वास्तविक या परछाई✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ शुक्ल 6 मंगलवार 15 फरवरी 2024 कलिकाल के 13 वें  तीर्थंकर बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय को निर्मलकारी करवाने वाले 1008 श्री विमलनाथ भगवान का केवलज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🕉️14 फरवरी को बसंत पंचमी*
*🔔षोडष कारण व्रत 26 जनवरी से 25 फरवरी तक*
*🌞दश लक्षण पर्व 13फरवरी से 23फरवरी तक*
*फरवरी माह में दिनांक 18, 21, 22, 28 को भी तीर्थंकर भगवान के पंच कल्याणक महोत्सव है*
 *🔔🪔  यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*जीवन की खोज-वास्तविक या परछाई*

*एक रानी नहाकर अपने महल की छत परबाल सुखाने के लिए गई। उसके गले में एक हीरों का हार था,जिसे उतार कर वहीं आले पर रख दिया और बाल संवारने लगी।* 

*इतने में एक कौवा आया।* 
*उसने देखा कि कोई चमकीली चीज है, तो उसे लेकर उड़ गया।* 
*एक पेड़ पर बैठ कर उसे खाने की कोशिश की, पर खा न सका।कठोर हीरों पर मारते-मारते चोंच दुखने लगी। अंतत: हार को उसी पेड़ पर लटकता छोड़ कर वह उड़ गया।*

*जब रानी के बाल सूख गए तो उसका ध्यान अपने हार पर गया, पर वह तो वहां था ही नही इधर-उधर ढूंढा, परन्तु हार गायब।रोती-धोती वह राजा के पास पहुंची, बोली कि हार चोरी हो गई है, उसका पता लगाइए।*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*✍️राजा ने कहा, चिंता क्यों करती हो,* 
*दूसरा बनवा देंगे।* 
*लेकिन रानी मानी नहीं, उसे उसी हार की रट थी। कहने लगी,नहीं मुझे तो वही हार चाहिए। अब सब ढूंढने लगे, पर किसी को हार मिले ही नहीं।*

*राजा ने कोतवाल को कहा,* 
*मुझ को वह गायब हुआ हार लाकर दो।* *कोतवाल बड़ा परेशान*,
 *कहां मिलेगा?* *सिपाही*, 
*प्रजा, कोतवाल-* *सब खोजने में लग गए।*

*राजा ने ऐलान किया,* 
*जो कोई हार लाकर मुझे देगा,* 
*उसको मैं आधा राज्य पुरस्कार में दे दूंगा।*

*अब तो होड़ लग गई प्रजा में।* 
*सभी लोग हार ढूंढने लगे आधा राज्य पाने के लालच में।* 

*ढूंढते-* 
*ढूंढते अचानक वह हार किसी को एक गंदे नाले में दिखा।*

 *हार तो दिखाई दे रहा था,* *पर उसमें से बदबू आ रही थी।* 
*पानी काला था। परन्तु एक सिपाही कूदा इधर उधर बहुत हाथ मारा पर कुछ नहीं मिला। पता नहीं कहां गायब हो गया।* 
*फिर कोतवाल ने देखा,* 
*तो वह भी कूद गया।* 
 *दो को कूदते देखा तो कुछ उत्साही प्रजाजन भी कूद गए।* 
*फिर मंत्री कूदा।* *तो इस तरह उस नाले में भीड़ लग गई।*

*लोग आते रहे और अपने कपडे़ निकाल-निकाल कर कूदते रहे।*
 *लेकिन हार मिला किसी को नहीं- कोई भी कूदता,* 
*तो वह गायब हो जाता।* 
*जब कुछ नहीं मिलता,* 
*तो वह निकल कर दूसरी तरफ खड़ा हो जाता*। 
*सारे*
*शरीर पर बदबूदार गंदगी,* 
*भीगे हुए खडे़ हैं।*

*दूसरी ओर दूसरा तमाशा, बडे़-बडे़ जाने-माने ज्ञानी, मंत्री सब में होड़ लगी है, मैं जाऊंगा पहले, नहीं मैं तेरा सुपीरियर हूं, मैं जाऊंगा पहले हार लाने के लिए।*

*इतने में राजा को खबर लगी। उसने सोचा, क्यों न मैं ही कूद जाऊं उसमें?* *आधे राज्य से हाथ तो नहीं धोना पडे़गा। तो राजा भी कूद गया।*

*इतने में एक संत गुजरे उधर से। उन्होंने देखा तो हंसनेलगे, यह क्या तमाशा है?* 
*राजा, प्रजा,मंत्री, सिपाही - *सब कीचड़ मे लथपथ,*
*क्यों कूद रहे हो इसमें?*

*लोगों ने कहा, महाराज! बात यह है कि रानी का हार चोरी हो गई है। वहां नाले में दिखाई दे रहा है। लेकिन जैसे ही लोग कूदते हैं तो वह गायब हो जाता है। किसी के हाथ नहीं आता।*

*संत हंसने लगे, भाई! *किसी ने ऊपर भी देखा?*
 *ऊपर देखो, वह टहनी पर लटका हुआ है। नीचे जो तुम देख रहे हो, वह तो उसकी परछाई है।*

*इस कहानी का क्या मतलब हुआ?* 

*जिस चीज की हम को जरूरत है,* *जिस परमात्मा को हम पाना चाहते हैं, जिसके लिए हमारा हृदय व्याकुल होता है -वह सुख शांति और आनन्द रूपी हार क्षणिक सुखों के रूप में परछाई की तरह दिखाई देता है और*
*यह महसूस होता है कि इस को हम पूरा कर लेंगे। अगर हमारी यह इच्छा पूरी हो जाएगी तो हमें शांति मिल जाएगी, हम सुखी हो जाएंगे। परन्तु जब हम उसमें कूदते हैं, तो वह सुख और शांति प्राप्त नहीं हो पाती*

*इसलिए सभी संत-महात्मा हमें यही संदेश देते हैं कि वह शांति, सुख और आनन्द रूपी हीरों का हार, जिसे हम संसार में परछाई की तरह पाने की कोशिश कर रहे हैं, वह हमारे अंदर ही मिलेगा, बाहर नहीं*

*सदैव प्रसन्न रहिये ! जो प्राप्त है  वही पर्याप्त है ! !!*
*जिसका मन मस्त है , उसके पास समस्त है ! !!*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 10 फ़रवरी 2024

मेरे कर्मों का हिस्सा


*👨‍👨‍👦‍👦मेरे कर्मों का हिस्सा ▶️*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 मेरे कर्मों का हिस्सा ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ शुक्ल दूज रविवार 11 फरवरी 2024 कलिकाल के 12 वें  तीर्थंकर मंगल की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय को मंगलकारी करवाने वाले 1008 श्री वासूपूज्य भगवान का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*
*🔔🪔 माघ शुक्ल दूज मंगलवार 13 फरवरी 2024 कलिकाल के 13 वें  तीर्थंकर बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय को निर्मलकारी करवाने वाले 1008 श्री विमलनाथ भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*
*फरवरी माह में दिनांक 15, 18, 21, 22, 28 को भी तीर्थंकर भगवान के पंच कल्याणक महोत्सव है*
*🔔🪔  यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

🐒✍️एक व्यक्ति एक दिन बिना बताए काम पर नहीं गया....

👦मालिक ने,सोचा इस कि तन्खाह बढ़ा दी जाये तो यह
और दिल्चसपी से काम करेगा.....

और उसकी तन्खाह बढ़ा दी....

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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अगली बार जब उसको तन्खाह से ज़्यादा पैसे दिये
तो वह कुछ नही बोला चुपचाप पैसे रख लिये.....
कुछ महीनों बाद वह फिर ग़ैर हाज़िर हो गया......
मालिक को बहुत ग़ुस्सा आया.....
सोचा इसकी तन्खाह बढ़ाने का क्या फायदा हुआ
यह नहीं सुधरेगा और उस ने बढ़ी हुई
तन्खाह कम कर दी और इस बार उसको पहले वाली ही
तन्खाह दी......
वह इस बार भी चुपचाप ही रहा और
ज़बान से कुछ ना बोला....
तब मालिक को बड़ा ताज्जुब हुआ....
उसने उससे पूछा कि जब मैने तुम्हारे ग़ैरहाज़िर होने के बाद तुम्हारी तन्खाह बढा कर दी तुम कुछ नही बोले और आज तुम्हारी ग़ैर हाज़री पर तन्खाह
कम कर के दी फिर भी खामोश ही रहे.....!!
इस की क्या वजह है..? उसने जवाब दिया....जब मै पहले
ग़ैर हाज़िर हुआ था तो मेरे घर एक बच्चा पैदा हुआ था....!!
आपने मेरी तन्खाह बढ़ा कर दी तो मै समझ गया.....
परमात्मा ने उस बच्चे के पोषण का हिस्सा भेज दिया है......

और जब दोबारा मै ग़ैर हाजिर हुआ तो मेरी माता जी
का निधन हो गया था...जब आप ने मेरी तन्खाह कम
दी तो मैने यह मान लिया की मेरी माँ अपने हिस्से का
अपने साथ ले गयीं.....
फिर मै इस तनख्वाह की ख़ातिर क्यों परेशान होऊँ
जिस का ज़िम्मा ख़ुद परमात्मा ने ले रखा है......!!
: एक खूबसूरत सोच :
अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया,
तो बेशक कहना, जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी और जो भी पाया वो प्रभू की मेहेरबानी थी, खुबसूरत रिश्ता है मेरा और भगवान के बीच में, ज्यादा मैं मांगता. नहीं और कम वो देता नहीं.. I
*💯👨‍👩‍👦‍👦✅✍️🔔विशेष:- भव्य आत्माओं, आज हमारे साथ भी प्रति समय लाभ हानियां देखने को मिल रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि हमारे जिस कर्म का उदय होगा ओर हम उस कर्म को जिस प्रकार मन वचन शरीर के द्वारा स्वीकृत करेंगे उसी प्रकार हमें फल की प्राप्ति होती है। अतः हम सभी को मैत्री भाव के साथ समता पूर्वक प्रति समय सजग रहकर अपने कर्तव्यों को करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 7 फ़रवरी 2024

सच्ची भक्ति का फल

*👨‍👨‍👦‍👦सच्ची भक्ति का फल💯*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सच्ची भक्ति का फल ✍️🐒*


*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ कृष्ण 13/14  एक ही दिन समाहित है, गुरुवार 08 फरवरी 2024 कलिकाल के प्रथम  तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय के संस्कार प्राप्ति करवाने वाले 1008 श्री आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 माघ  अमावस्या  शुक्रवार 09 फरवरी  ग्यारवें तीर्थंकर गुरुकी महादशा को अनुकूल बनाने वाले  श्रेयांसनाथ भगवान का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*फरवरी माह में दिनांक   11, 13, 15, 18, 21, 22, 28 को भी तीर्थंकर भगवान के पंच कल्याणक महोत्सव है*
 *🔔🪔  यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

वृंदावन की एक गोपी रोज दूध दही बेचने मथुरा जाती थी,

एक दिन व्रज में एक संत आये, गोपी भी कथा सुनने गई,

संत कथा में कह रहे थे, भगवान के नाम की बड़ी महिमा है, नाम से बड़े बड़े संकट भी टल जाते है।

नाम तो भव सागर से तारने वाला है,

यदि भव सागर से पार होना है तो भगवान का नाम कभी मत छोडना।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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कथा समाप्त हुई गोपी अगले दिन फिर दूध दही बेचने चली, 

बीच में यमुना जी थी. गोपी को संत की बात याद आई, संत ने कहा था भगवान का नाम तो भवसागर से पार लगाने वाला है,

जिस भगवान का नाम भवसागर से पार लगा सकता है तो क्या उन्ही भगवान का नाम मुझे इस साधारण सी नदी से पार नहीं लगा सकता ? 

ऐसा सोचकर गोपी ने मन में भगवान के नाम का आश्रय लिया भोली भाली गोपी यमुना जी की ओर आगे बढ़ गई।

अब जैसे ही यमुना जी में पैर रखा तो लगा मानो जमीन पर चल रही है और ऐसे ही सारी नदी पार कर गई,

पार पहुँचकर बड़ी प्रसन्न हुई, और मन में सोचने लगी कि संत ने तो ये तो बड़ा अच्छा तरीका बताया पार जाने का, 

रोज-रोज नाविक को भी पैसे नहीं देने पड़ेगे।

एक दिन गोपी ने सोचा कि संत ने मेरा इतना भला किया मुझे उन्हें खाने पर बुलाना चाहिये,

अगले दिन गोपी जब दही बेचने गई, तब संत से घर में भोजन करने को कहा संत तैयार हो गए,

अब बीच में फिर यमुना नदी आई।

संत नाविक को बुलाने लगा तो गोपी बोली बाबा नाविक को क्यों बुला रहे है. हम ऐसे ही यमुना जी में चलेगे।

संत बोले - गोपी ! कैसी बात करती हो, यमुना जी को ऐसे ही कैसे पार करेगे ?

गोपी बोली - बाबा ! आप ने ही तो रास्ता बताया था, आपने कथा में कहा था कि भगवान के नाम का आश्रय लेकर भवसागर से पार हो सकते है. 

तो मैंने सोचा जब भव सागर से पार हो सकते है तो यमुना जी से पार क्यों नहीं हो सकते ? 

और मै ऐसा ही करने लगी, इसलिए मुझे अब नाव की जरुरत नहीं पड़ती.

संत को विश्वास नहीं हुआ बोले - गोपी तू ही पहले चल ! मै तुम्हारे पीछे पीछे आता हूँ, 

गोपी ने भगवान के नाम का आश्रय लिया और जिस प्रकार रोज जाती थी वैसे ही यमुना जी को पार कर गई.

अब जैसे ही संत ने यमुना जी में पैर रखा तो झपाक से पानी में गिर गए, संत को बड़ा आश्चर्य, 

अब गोपी ने जब देखा तो कि संत तो पानी में गिर गए है तब गोपी वापस आई है और संत का हाथ पकड़कर जब चली तो संत भी गोपी की भांति ही ऐसे चले जैसे जमीन पर चल रहे हो.

संत तो गोपी के चरणों में गिर पड़े, और बोले - कि गोपी तू धन्य है ! 

वास्तव में तो सही अर्थो में नाम का आश्रय तो तुमने लिया है और मै जिसने नाम की महिमा बताई तो सही पर स्वयं नाम का आश्रय नहीं लिया।

*👨‍👨‍👦‍👦⏰🙏🎪⛳विशेष:- भव्य आत्माओं, आज वर्तमान समय में लगभग विश्व के अधिकाधिक लोग देव शास्त्र गुरु को तो मानते हैं, किंतु देव-शास्त्र-गुरु के अनुसार आचरण नहीं करते।इस कारण से यह संसार  दु:खो का पहाड़ दिखाई दे रहा है। इसलिए सभी भव्य आत्माओं को अपनी शक्ति अनुसार आचरण सुधार कर जीवन सार्थक करना चाहिए।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मंगलवार, 6 फ़रवरी 2024

आज के बंदर की आशक्ती

*आज के बंदर की आशक्ती*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 आज के बंदर की आशक्ती ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ कृष्ण 12 , बुधवार 07 फरवरी 2024 कलिकाल के 10 वें तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय की प्राप्ति करवाने वाले 1008 श्री शीतलनाथ भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*फरवरी माह में दिनांक  ▶️9 को चतुर्दशी व अमावस्या, 11, 13, 15, 18, 21, 22, 28 को भी तीर्थंकर भगवान के पंचकल्याणक महोत्सव है*
 *🔔🪔  यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
एक जंगल में बंदरों का बड़ा झुंड था ।उस जंगल में खाने पीने की कोई कमी नहीं थी इसलिए सारे बंदर बहुत आराम और संतुष्ट होकर रहते थे।

एक दिन एक वैज्ञानिक अपनी बेटी के साथ उसी जंगल में शोध करने के लिए आया। अपना तम्बू लगाने के बाद वैज्ञानिक पौधों के नमूने इकट्ठा करने के लिए बाहर निकला ।

लेकिन लड़की तम्बू की सुंदरता को देखकर रुक गयी। उसने पहले ज़मीन पर एक पुराना कालीन रखा और उस पर एक बिस्तर बिछाया। तम्बू के बीच लालटेन लटकाई और उसके नीचे एक छोटी मेज़ और सफेद सेब से भरा कटोरा  रख दिया। 

वह सेब देखने में बहुत ताज़ा, खुबसूरत और बड़े  लग रहे थे। 

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सारे बन्दर लालच से उस कृत्रिम सेब को पेड़ों पर बैठे देख रहे थे। 

तम्बू के सामने जगह साफ करने के लिए लड़की बाहर निकली,तब एक बंदर ने तेज़ी से झपटा मारा और एक कृत्रिम सेब उठा लिया ।तभी उसी समय लड़की की नज़र भी उस पर पड़ गयी, लड़की ने तुरंत बंदूक उठाकर निशाना लगाया और गोली दाग दिया, लेकिन सभी बंदर इतनी देर में वहां से भाग गए।

काफी देर के बाद सारे बन्दर रुक गए जब उन्होंने देखा कि अब उनका कोई पीछा नहीं कर रहा है। 

चोर बंदर ने हाथ उठाकर सबको सेब दिखाया। सभी बंदर हैरत से और ललचाई नज़र से उस बंदर को देखने लगे कि उसे कितना अच्छा सेब मिला है ।सभी इस कृत्रिम सेब को हाथ लगाने की कोशिश करने लगे।

चोर बंदर ने सबको फटकार कर ये कृत्रिम सेब लिया और एक पेड़ की सबसे ऊंची शाख पर जाकर सेब खाने के लिए मुंह में दबा दिया।

 कृत्रिम सेब बेहद कड़े प्लास्टिक से बना था । बंदर के दांतों में चबाने से दर्द शुरू हो गया। बंदर ने दो तीन बार और कोशिश की लेकिन हर बार दर्द होने लगा।

उस दिन चोर बंदर ने पेड़ की उसी शाखा पर भूखा रहकर गुज़ारा । अगले दिन वह पेड़ से नीचे आया ।

सभी बंदरों ने उसे सम्मान से देखा, क्योंकि उसके हाथ में वो कृत्रिम सेब मौजूद था। दूसरे बंदरों से मिलने वाला सम्मान को देखकर चोर बंदर ने सेब पर पकड़ मज़बूत बना ली। 

अब दूसरे बंदर फलों की तलाश में निकले और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक कूद कर फल तोड़ तोड़कर खाने लगे।

चोर बंदर के एक हाथ में  कृत्रिम सेब था,इसलिए वो पेड़ पर नहीं चढ़ सका। वो सेब को हाथ से नहीं छोड़ना चाहता था इसलिए वह दिन भर भूखा प्यासा रहा और यही सिलसिला आगे कुछ दिन तक चलता रहा। 

हालांकि दूसरे बंदर उसके हाथ में कृत्रिम सेब देखकर उसका सम्मान करते लेकिन उसे खाने के लिए कुछ भी नहीं देते।

चोर बंदर भूख से इतना निढाल हो गया था कि अब उसे अपना आखिरी वक़्त नज़र आने लगा। उसने एक बार फिर उस सेब को खाने की कोशिश की लेकिन इस बार नतीजा अलग नहीं था। उसके दांत इस बार भी दर्द कर रहे थे ।

चोर बंदर को आँखों के सामने पेड़ों से लटका हुआ फल दिखाई दे रहा था। लेकिन इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह इन पेड़ों पर चढ़ सके। धीरे धीरे उसकी आँखें हमेशा के लिए बंद हो गई। जैसे ही उसकी जान निकली कृत्रिम सेब पर पकड़ ढीली होने से वो उसके हाथ से बाहर लुढ़क गया।

शाम को बाकी बंदर, मरे बंदर के पास आए, कुछ आंसू बहाये और उसके शरीर को पत्तों से ढक दिया। जब वो ये कर रहे थे तब एक और बंदर को एक कृत्रिम सेब मिला और उसने अपना हाथ  ऊँचा कर के सभी बंदरो को सेब दिखाना शुरू कर दिया।
.........

दुनिया की मिसाल इस प्लास्टिक के सेब की तरह है, इससे कुछ नहीं मिलता। जबकी इसे देखने वाले प्रेरित होते रहते हैं और दुनिया को हाथ में रखने का दावेदार आख़िर में ख़ाली हाथ इस दुनिया से चला जाता है। कोई और आकर उसकी दुनिया पर क़ब्ज़ा कर लेता है।

"झूठा दिखावा इंसान को पहले थका देता है और फिर मार डालता है।"

*विशेष:-भव्य आत्माओं, आज विश्व का प्रत्येक मानव इस धरती मां के सानिध्य में अपने कर्तव्यों को करते हुए अपने कर्मो को समाप्त करने आया है। किंतु वर्तमान समय में आज मानव अपने कर्तव्यों को भूलकर संसार की विभिन्न मानव व वस्तुओं में आशक्त होकर अपने कर्तव्यों को भूल गया है। इस कारण वह जीवन में अनेक प्रकार की कठनाइयों का सामना कर रहा है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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