गुरुवार, 29 फ़रवरी 2024

बेटी ने मांगा पिता से अनोखा दहेज

*बेटी ने मांगा पिता से अनोखा दहेज*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  बेटी ने मांगा पिता से अनोखा दहेज✍️🐒*
*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण 6, शुक्रवार ,01  2024 कलिकाल के 7 वें  तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय को ओज तेज की शक्ति प्रदान करवाने वाले 1008 श्री सुपार्श्वनाथ भगवान का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण 7, शनिवार , 02 मार्च  2024 कलिकाल के 7 वें  तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय को ओज तेज की शक्ति प्रदान करवाने वाले 1008 श्री सुपार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण 7, शनिवार , 02 मार्च  2024 आज ही के दीन कलिकाल के अष्टम तीर्थंकर चंद्र की महादशा को अनुकूल बनाने वाले  मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में  सर्व सुखकारक रत्नत्रय को ओज तेज की शक्ति प्रदान करवाने वाले 1008 श्री चन्द्रप्रभ भगवान का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
 *🔔🪔 मार्च माह के धार्मिक पुण्य गाढ़ा करने  के लिए महत्वपूर्ण तिथियां 🔔*
*🎪17 से 25 तक आष्टान्हिका शाश्वत पर्व*
*🕉️22 मार्च आचार्य श्री चैत्यसागर मुनिराज का दीक्षा दिवस*
*⛳षोडषकारण व्रत 26 मार्च से प्रारंभ* 
 *🌞मार्च माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 4, 6, 7, 9, ,12, 14, 16, 17 ,29, 30 दिनांकों में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव है। यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

बेटी ने मांगा पिता से अनोखा दहेज ,बेटी कहूं या भाग्यवान आप समझें पूर्ण कहानी पढ़कर 

..पति ने घर में पैर रखा....‘अरी सुनती हो !'

आवाज सुनते ही पत्नी हाथ में पानी का गिलास लेकर बाहर आयी।

"अपनी बेटी का रिश्ता आया है, अच्छा भला इज्जतदार सुखी परिवार है, लडके का नाम युवराज है । बैंक मे काम करता है। बस बेटी हाँ कह दे तो सगाई कर देते है."

नेहा बेटी उनकी एकमात्र लडकी थी..

घर मेँ हमेशा आनंद का वातावरण रहता था ।

कभी कभार सिगरेट व पान मसाले के कारण उनकी पिताजी और नेहा के साथ कहा सुनी हो जाती लेकिन
वो मजाक में निकाल देते ।

वह बचपन से ही पाठशाला जाने से जैन-धर्म के मूलभूत सिद्धांत को अपने आचरण में उतारती थी। इस कारण नेहा खूब समझदार और संस्कारी थी ।S.S.C पास करके टयूशन, सिलाई का काम करके पिता की मदद करने की कोशिश करती ।

अब तो नेहा  ग्रेज्यूऐट हो गई थी और नौकरी भी करती थी लेकिन बाप उसकी पगार में से एक रुपया भी नही लेते थे...

और रोज कहते ‘ नेहा बेटी यह पगार तेरे पास रख तेरे भविष्य में तेरे काम आयेगी ।'

दोनो घरो के सभी सदस्यों की सहमति से नेहा और
युवराज की सगाई कर दी गई और शादी का मुहूर्त भी निकलवा दिया।

अब शादी के 15 दिन और बाकी थे।

बाप ने बेटी को पास में बिठाया और कहा-

" बेटी आपके ससुराल वाले तो बहुत ही अच्छे लोग है । आपके ससुरजी ने कहा है कि दहेज में कुछ नही लेंगे, ना रुपये, ना गहने और ना ही कोई अन्य मोटर कार आदि चीज ।

तो बेटी आपकी शादी के लिए मेंने कुछ रुपये जमा किए है।

यह दो लाख रुपये मैं तुझे देता हूं।.. आपके भविष्य में काम आयेगे, आप इसे अपने खाते मे जमा करवा देना।'

"जी पिताश्री- नेहा छोटा सा जवाब देकर अपने कमरे में चली गई।

समय को जाते कहां देर लगती है ?

शुभ दिन बारात आंगन में आयी,

पंडितजी ने चंवरी में विवाह विधि शुरु की। फेरे फिरने का समय आया....

कोयल जैसे कुहुकी हो ऐसे नेहा दो शब्दो में बोली

"रुको पंडितजी ।
मुझे आप सब की उपस्थिति में मेरे पापा के साथ बात करनी है,"

सभी एकदम स्तब्ध रह गए । पापा आये तो नेहा बोली:

“पापा आप ने मुझे लाड प्यार से बडा किया, पढाया, लिखाया खूब प्रेम दिया इसका कर्ज तो चुका सकती नही...

लेकिन युवराज और मेरे ससुर जी की सहमति से जो आपने दिया दो लाख रुपये का चेक मैऔ आपको वापस देती हूं।

इन रुपयों से मेरी शादी के लिए लिये हुए उधार वापस दे देना और दूसरा चेक तीन लाख रूपए का जो मैंने अपनी पगार में से बचत की है...

जब आप रिटायर होगें तब आपके काम आयेंगे, मैं नही चाहती कि आप को बुढापे मेँ आपको किसी के आगे हाथ फैलाना पड़े !आप इन पैसों से सम्मेद शिखर जी, अयोध्या आदि तीर्थ क्षेत्रों की वन्दना करते हुए दिगंबर मुनिराजो को आहार दान देते हुए अपने कर्तव्यों को करके अपने पुण्य को गाढ़ा करें।जब आयु का अंतिम समय हो तो हम सभी आपकी समाधि में सहयोगी बनकर आपका समाधि महोत्सव मनाए।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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अगर मैं आपका लडका होता तब भी इतना तो मेरा कर्तव्य होता ना ? !!! "

वहां पर सभी की नजर नेहा  पर थी...

“पापा ... रुको...
अब मैं आपसे जो दहेज में मांगू वो दोगे ना ?"

पिता श्री- भारी आवाज में -"हां नेहा बेटा", सिसकियों के बीच इतना ही बोल सके ।

"तो पापा मुझे वचन दो"
आज के बाद आप सिगरेट को कभी हाथ नही लगाओगे....

तबांकू, पान-मसाले का व्यसन आज से छोड दोगे।

सब की मौजूदगी में दहेज में बस इतना ही मांगती हूं ।."

लडकी का बाप मना कैसे करता ?

शादी मे लडकी की विदाई के समय कन्या पक्ष को रोते हुए देखा होगा लेकिन 
आज तो बारातियों की आँखों मेँ आँसुओं कि धारा निकल चुकी थी।

मैं दूर से उस बेटी को लक्ष्मी रुप मे देख रहा था। विचार कर रहा था कि अगर इस प्रकार सभी घरों में संस्कार वान बेटीयां पहुंच जाएं तो इस धरती पर ही स्वर्ग से भी सुंदर विश्व बन जाएं....

रुपये का लिफाफा मैं अपनी जेब से नही निकाल पा रहा था....

साक्षात संस्कारवान लक्ष्मी को मैं कैसे लक्ष्मी दूं ??

लेकिन एक सवाल मेरे मन में जरुर उठा,

“ लडका चाहने वाले या भ्रूण हत्या करने वाले लोगो को इस जैसी संस्कारवान लक्ष्मी मिलेगी क्या" ???

कृपया रोइए नही, आंसू पोछिए और प्रेरणा लीजिये कि हम भी अपने घर में ऐसी ही संस्कारवान बेटी ही लाएंगे।

*विशेष,भव्य आत्माओं:- एक बेटी ही सम्पूर्ण घर को संस्कारित कर जीवन सुखमय बना सकतीं है। अतः आपने मनुष्य भव सार्थक करना है तो अपने बच्चों को गर्भ में आने पहले ही स्वयं ही संस्कारवान बनते हुए अपने कर्तव्यों को दृढ़ता पूर्वक पालन करें।*

*बेटी बचाओ बेटी पढाओ...*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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