*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 सच्चा उपहार ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 श्रावण शुक्ल 06 , बुधवार 30 जुलाई 2025 कलि काल के 22वें तीर्थंकर अरिष्टनेमि भगवान जी जिनकी आराधना से राहू की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करवाने वाले श्री नेमिनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*⏰श्रावण शुक्ल मोक्ष सप्तमी , गुरुवार 31 जुलाई 2025 कलि काल के 23 वें तीर्थंकर उपसर्ग विजेता पार्श्वनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करवाने वाले श्री पार्श्वनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।🔔*
*✅🔔⏰🐎 नोट जुलाई माह से अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह + वाहन व प्रापर्टी खरीदने का शुभ मुहूर्त नहीं है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*"सच्चा उपहार"*
भव्य आत्माओं आज इस कहानी के माध्यम से हम समझ सकते है कि हम मोक्ष मार्ग पर चलने लायक है या नहीं।
मनुष्य का स्वभाव है कि वह भौतिक वस्तुओं को ही उपहार मानता है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो किसी को कुछ देने के पीछे भावना, श्रद्धा और निष्ठा की सबसे अधिक महत्ता होती है। विशेष रूप से जब हम भगवान को कुछ अर्पित करने की बात करते हैं, तो यह विचार करना आवश्यक है कि वास्तव में हमारा अपना क्या है? इस प्रसंग के माध्यम से यही समझाने का प्रयास किया गया है कि *सच्चा उपहार* क्या होता है।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
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*"सच्चा उपहार"*
एक बार एक व्यक्ति के घर उसका दूर का एक परिचित मिलने आया। वह घर के भीतर गया और मेहमान कक्ष में बैठ गया। संयोग से वह खाली हाथ आया था। कुछ देर बैठने के बाद उसके मन में ख्याल आया—“काश! कोई उपहार लेकर आया होता, यूँ ही खाली हाथ चले आना अच्छा नहीं लगा।”
तभी उसकी नजर दीवार पर टंगी एक सुंदर पेंटिंग पर पड़ी। उसने तुरंत वह पेंटिंग उतारी और अपने पास रख ली।
कुछ समय बाद जब घर का मालिक आया, तो उस मेहमान ने वही पेंटिंग उसे भेंट करते हुए कहा—“यह छोटा-सा उपहार मैं आपके लिए लाया हूं।”
मालिक स्तब्ध रह गया। यह देखकर कि मेहमान ने उसी के घर से एक वस्तु लेकर उसे ही भेंट कर दी। उसे यह बड़ा अजीब लगा—“मेरे ही घर की चीज मुझे ही उपहार में दे रहा है! इसमें भला मुझे क्या आनंद मिलेगा? देना ही था, तो अपने घर से कुछ लाता!”
यही स्थिति अक्सर हमारी भी होती है—जब हम भगवान को कुछ चढ़ाते हैं। हम रूपया, फूल, मिठाई या अन्य वस्तुएं अर्पित करते हैं, यह सोचकर कि हम भगवान को प्रसन्न कर रहे हैं। पर वास्तव में जो कुछ भी हम उन्हें देते हैं, वह सब तो हमें उन्हीं से मिला होता है।
सोचिए—जो दाता है, सर्वस्व का स्वामी है, उसे हम क्या दे सकते हैं? वह तो निराकार, निर्लिप्त और अभोक्ता है।
भला उसे भौतिक वस्तुओं की क्या आवश्यकता?
भगवान कहते हैं— “इस संसार की हर वस्तु मैंने ही तुम्हें दी है। यदि तुम वास्तव में मुझे कुछ देना चाहते हो, तो कुछ ऐसा दो जो वास्तव में तुम्हारा अपना हो।*मुझे अपना
*प्रेम दो,*
*अपनी श्रद्धा दो,* *सच्चा विश्वास दो।* हर श्वास में मेरी याद रखो, मैं सदा तुम्हारे साथ रहूंगा और तुम्हारे जीवन को सफल बना दूंगा।” यह सबकुछ संभव है बस आप श्रावक हो अपने कर्तव्यों के अनुसार षट्कर्म प्रतिदिन करते रहोगे तब सफल सक्रिय श्रावक बने रहोगे तब ही मोक्ष मार्ग के राही बन सकते हो।
*👨👨👦👦🔔⏰🐎विशेष:-भव्य आत्माओं, भगवान को प्रसन्न करने के लिए धन, वस्त्र या सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। उन्हें चाहिए केवल हमारी सच्ची श्रद्धा, निष्कलंक विश्वास और समर्पण भरा हृदय। यही सच्ची भक्ति का सच्चा उपहार है।*
चिंतन कीजिये! आप क्या सोचते है?
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*