मंगलवार, 29 जुलाई 2025

सच्चा उपहार

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सच्चा उपहार ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔   श्रावण शुक्ल  06 , बुधवार 30 जुलाई  2025 कलि काल के 22वें तीर्थंकर  अरिष्टनेमि भगवान जी जिनकी आराधना से राहू की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करवाने वाले  श्री नेमिनाथ  भगवान जी का  जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*⏰श्रावण शुक्ल  मोक्ष सप्तमी , गुरुवार 31 जुलाई  2025 कलि काल के 23 वें तीर्थंकर उपसर्ग विजेता पार्श्वनाथ  भगवान जी जिनकी आराधना से केतु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करवाने वाले  श्री  पार्श्वनाथ भगवान जी का  मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।🔔*

*✅🔔⏰🐎 नोट जुलाई माह से अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह + वाहन व प्रापर्टी खरीदने का शुभ मुहूर्त नहीं है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*"सच्चा उपहार"* 
भव्य आत्माओं आज इस कहानी के माध्यम से हम समझ सकते है कि हम मोक्ष मार्ग पर चलने लायक है या नहीं।

मनुष्य का स्वभाव है कि वह भौतिक वस्तुओं को ही उपहार मानता है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो किसी को कुछ देने के पीछे भावना, श्रद्धा और निष्ठा की सबसे अधिक महत्ता होती है। विशेष रूप से जब हम भगवान को कुछ अर्पित करने की बात करते हैं, तो यह विचार करना आवश्यक है कि वास्तव में हमारा अपना क्या है? इस प्रसंग के माध्यम से यही समझाने का प्रयास किया गया है कि *सच्चा उपहार* क्या होता है। 

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 *"सच्चा उपहार"* 

एक बार एक व्यक्ति के घर उसका दूर का एक परिचित मिलने आया। वह घर के भीतर गया और मेहमान कक्ष में बैठ गया। संयोग से वह खाली हाथ आया था। कुछ देर बैठने के बाद उसके मन में ख्याल आया—“काश! कोई उपहार लेकर आया होता, यूँ ही खाली हाथ चले आना अच्छा नहीं लगा।”

तभी उसकी नजर दीवार पर टंगी एक सुंदर पेंटिंग पर पड़ी। उसने तुरंत वह पेंटिंग उतारी और अपने पास रख ली।

कुछ समय बाद जब घर का मालिक आया, तो उस मेहमान ने वही पेंटिंग उसे भेंट करते हुए कहा—“यह छोटा-सा उपहार मैं आपके लिए लाया हूं।”

मालिक स्तब्ध रह गया। यह देखकर कि मेहमान ने उसी के घर से एक वस्तु लेकर उसे ही भेंट कर दी। उसे यह बड़ा अजीब लगा—“मेरे ही घर की चीज मुझे ही उपहार में दे रहा है! इसमें भला मुझे क्या आनंद मिलेगा? देना ही था, तो अपने घर से कुछ लाता!”

यही स्थिति अक्सर हमारी भी होती है—जब हम भगवान को कुछ चढ़ाते हैं। हम रूपया, फूल, मिठाई या अन्य वस्तुएं अर्पित करते हैं, यह सोचकर कि हम भगवान को प्रसन्न कर रहे हैं। पर वास्तव में जो कुछ भी हम उन्हें देते हैं, वह सब तो हमें उन्हीं से मिला होता है।

सोचिए—जो दाता है, सर्वस्व का स्वामी है, उसे हम क्या दे सकते हैं? वह तो निराकार, निर्लिप्त और अभोक्ता है। 
भला उसे भौतिक वस्तुओं की क्या आवश्यकता?
 भगवान कहते हैं— “इस संसार की हर वस्तु मैंने ही तुम्हें दी है। यदि तुम वास्तव में मुझे कुछ देना चाहते हो, तो कुछ ऐसा दो जो वास्तव में तुम्हारा अपना हो।*मुझे अपना  
*प्रेम दो,* 
*अपनी श्रद्धा दो,* *सच्चा विश्वास दो।*  हर श्वास में मेरी याद रखो, मैं सदा तुम्हारे साथ रहूंगा और तुम्हारे जीवन को सफल बना दूंगा।” यह सबकुछ संभव है बस आप श्रावक हो अपने कर्तव्यों के अनुसार षट्कर्म प्रतिदिन करते रहोगे तब सफल सक्रिय श्रावक बने रहोगे तब ही मोक्ष मार्ग के राही बन सकते हो।
 *👨‍👨‍👦‍👦🔔⏰🐎विशेष:-भव्य आत्माओं,  भगवान को प्रसन्न करने के लिए धन, वस्त्र या सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। उन्हें चाहिए केवल हमारी सच्ची श्रद्धा, निष्कलंक विश्वास और समर्पण भरा हृदय। यही सच्ची भक्ति का सच्चा उपहार है।*

चिंतन कीजिये! आप क्या सोचते है?

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 25 जुलाई 2025

विपरित बुद्धि

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 विपरित बुद्धि ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔   श्रावण शुक्ल  02 , रविवार 26 जुलाई  2025 कलि काल के चतुर्थ तीर्थंकर  सुमतिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करवाने वाले  श्री सुमतिनाथ  भगवान जी का  गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*

*🎪 जुलाई  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 30 व 31 तारीख को है।*
*✅🔔⏰🐎 नोट जुलाई माह से अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह + वाहन व प्रापर्टी खरीदने का शुभ मुहूर्त नहीं है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
आप सभी ने " आ बैल मुझे मार" वाली कहावत तो सुनी होगी उस कहावत को विस्तार से समझने के लिए यह विपरीत बुद्धि नामक कहानी प्रस्तुत है।
*मूर्ख बगुला और नेवला *

बहुत समय पहले की बात है। एक घना जंगल था। उस जंगल के एक विशाल वटवृक्ष की खोल (तने के अंदर) में बहुत से बगुले रहते थे। यह वृक्ष नदी के किनारे स्थित था, इसलिए बगुलों को भोजन और पानी की कोई कमी नहीं थी। वे सुख-शांति से अपने परिवार के साथ रहते थे।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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लेकिन उसी वटवृक्ष की जड़ों में एक काला, क्रूर साँप भी अपना बिल बनाकर रहता था। वह अत्यंत चालाक और हिंसक था। जब भी बगुलों के अंडों से बच्चे निकलते, वह साँप चुपचाप बिल से निकलता और बगुले के नन्हें बच्चों को खा जाता। यह दृश्य बार-बार दोहराया जाता रहा, जिससे बगुले अत्यंत दुःखी और परेशान हो गए।

इनमें से एक बूढ़ा बगुला तो इस दुख से इतना व्यथित हो गया कि उसने भोजन करना छोड़ दिया और एक दिन उदास होकर नदी किनारे बैठ गया। उसकी आँखों में आँसू थे और चेहरा चिंता से मलिन था।

उसी समय वहीं पास में एक केकड़ा पानी से बाहर निकला। उसने बगुले की यह हालत देखी और पूछा, “मामा! क्या बात है? आज इतने दुःखी क्यों हो? आँखों में आँसू क्यों हैं?”

बगुला बोला, “भैया! दुःख की बात यह है कि हर बार जब मेरे बच्चे पैदा होते हैं, तभी यह दुष्ट साँप उन्हें खा जाता है। मैं बहुत परेशान हूँ। कोई उपाय नहीं सूझता। कृपया कोई रास्ता बताओ जिससे उस साँप का नाश हो सके।”

केकड़ा बचपन से बगुले से चिढ़ता था। बगुला जब छोटा था, तब वह केकड़े का शिकार करने की कोशिश करता था। आज उसे बदला लेने का अवसर मिला था। उसने मन में सोचा — “इस बगुले को ऐसा उपाय बताऊँगा जिससे साँप का तो नाश होगा ही, साथ ही इस बगुले और इसके साथियों का भी अंत हो जाएगा।”

केकड़ा बोला, “मामा! यदि साँप से छुटकारा पाना चाहते हो तो एक सरल उपाय है। नेवला साँप का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। तुम मांस के कुछ टुकड़े नेवले के बिल के पास डाल दो और फिर मांस की एक पंक्ति साँप के बिल तक बना दो। नेवला उन टुकड़ों को खाते-खाते साँप के बिल तक पहुँचेगा और वहाँ साँप को देखकर अवश्य ही उसे मार डालेगा।”

बगुले को यह बात बहुत अच्छी लगी। उसने उसी दिन योजना के अनुसार मांस के टुकड़े पहले नेवले के बिल के पास और फिर साँप के बिल तक डाल दिए। योजना पूरी तरह सफल रही। नेवले ने मांस के टुकड़ों को खाते-खाते साँप के बिल तक पहुँचा और जैसे ही साँप को देखा, उससे युद्ध कर उसे मार डाला।

बगुला अत्यंत प्रसन्न हुआ कि अब उसके बच्चों को कोई खतरा नहीं रहेगा। लेकिन यह खुशी अधिक देर तक नहीं टिकी। साँप के मरने के बाद नेवले को वहाँ बार-बार मांस की आशा होने लगी। उसने उसी वटवृक्ष की ओर ध्यान दिया और वहाँ रहने वाले बगुलों को भी अपना शिकार बना लिया।

कुछ ही दिनों में नेवले ने उस वृक्ष पर रहने वाले लगभग सभी बगुलों को मार डाला। बगुला जिसे पहले जीत समझ बैठा था, अब अपने सारे साथियों की मृत्यु देखकर पछताने लगा।

*👨‍👨‍👦‍👦🔔सावधान आज उपरोक्त कहानी के केकड़ा जैसे लोगों की कमी नहीं है अतः आप अपनी समस्याओं को किसी योग्य मार्गदर्शक के मार्गदर्शन में ही शुरू करें वरना आपका समय व पैसा दोनों ही व्यर्थ जाएगा।*

*👨‍👨‍👦‍👦🔔✅🌞🐎विशेष :- भव्य आत्माओं,किसी समस्या को हल करने से पहले उसके परिणामों और दुष्परिणामों पर विचार अवश्य करना चाहिए। केवल वर्तमान लाभ को देखकर जल्दबाजी में किया गया निर्णय भविष्य में भारी हानि का कारण बन सकता है।💯 "बिना सोचे-विचारे किया गया उपाय, कभी-कभी विनाश का कारण बन जाता है।"*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शनिवार, 19 जुलाई 2025

स्वयं का विकास

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 स्वयं का विकास ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔   श्रावण कृष्ण  10 , रविवार 20 जुलाई  2025 कलि काल के 17 वें तीर्थंकर  कुंथुनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करवाने वाले  श्री कुंथुनाथ भगवान जी का  गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 जुलाई  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 26 ,30 व 31 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  जुलाई माह में 👉चतुर्दशी तिथि  23 जुलाई को है।*
*✅🔔⏰🐎 नोट जुलाई माह से अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह + वाहन व प्रापर्टी खरीदने का शुभ मुहूर्त नहीं है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*👨‍👨‍👦‍👦स्वयं का विकास⏰*

*✅स्वयं के विकास के लिए आवश्यक कार्य करने वाली कहानी*
 *⛳मुस्कुराहट के पीछे की खामोशी और सच्ची खुशी की तलाश* 

किसी संत ने कहा है—
 *"तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो,* 
*क्या ग़म है जिसको छुपा रहे हो..."* 

कई बार चेहरे पर हँसी होती है, लेकिन दिल में गहरा दर्द छुपा होता है। आंखों में नमी होती है, पर लब मुस्कुरा रहे होते हैं। दुनिया को लगता है — 
 *"वो तो खुश है",* 
लेकिन कोई नहीं पूछता — 
 *"तू सच में ठीक है ना?"* 
ज़िंदगी में अगर कोई अपना हो, जो दुख में कंधा दे सके, तो सबसे बड़ा ग़म भी हल्का लगता है। और कोई खुशी में साथ हँसे, तो छोटी सी खुशी भी उम्र भर की याद बन जाती है।

इसलिए — रिश्ते सिर्फ बनाइए नहीं, निभाइए। कभी समय निकालकर अपनों से बस पूछ लीजिए —
 *"तुम ठीक हो ना?"* 
क्योंकि जो सबसे ज्यादा हँसते हैं, कई बार वही सबसे ज्यादा टूटे होते हैं।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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एक व्यक्ति जिसका नाम विकास है वह अपनी ज़िंदगी से बेहद निराश था। सब कुछ होते हुए भी — ज्ञान, परिवार, सुविधा — वह भीतर से खाली महसूस करता था। उसके चेहरे पर हँसी थी, लेकिन आत्मा भीतर से बौखलाहट  थी।
वह कई साधु संत, तांत्रिक - मांत्रिक , ज्योतिषाचार्य से मिला, लेकिन कोई उपाय काम नहीं आया। धीरे-धीरे उसकी निराशा आत्महत्या के विचारों में बदलने लगी। एक दिन उसने तय किया कि वह इस सबका अंत कर देगा।

वह शहर से दूर एक पहाड़ी की ओर गाड़ी लेकर निकल पड़ी। लेकिन रास्ते में एक गाँव के पास, उसने एक अधेड़ उम्र के आदमी को देखा — जो आवारा कुत्तों को रोटियाँ खिला रहा था। उसके चेहरे पर गज़ब की संतोषजनक मुस्कान थी।
विकास ने उससे बिना रुके पूछ बैठा —
"आप इतने खुश कैसे हैं? मुझे खुशी कब मिलेगी?"
वो आदमी मुस्कुराया और बोला —
"अगर तुम मुझसे छह महीने पहले मिले होते, तो तुम मुझसे ज़्यादा दुखी इंसान नहीं देखती। एक कार एक्सीडेंट में मेरा जवान बेटा मारा गया। और उसके ग़म में मेरी पत्नी भी कुछ ही महीनों में चल बसी। मैं एक ज़िंदा लाश बन गया था..."
उसने बताया कि कैसे एक सर्द रात में एक बेसहारा पिल्ला उसका पीछा करता हुआ उसके घर तक आ गया। पहले तो उसने उसे नजरअंदाज किया, लेकिन फिर उसकी ठिठुरती हालत देख कर उसका दिल पसीज गया। वह पिल्ला उसकी जिंदगी में रोशनी बनकर आया। उसने उसे दूध पिलाया, उसे कम्बल में लपेटा... और उस दिन महीनों बाद पहली बार मुस्कुराया।
"उस दिन मुझे समझ आया — सच्ची खुशी तब मिलती है, जब हम बिना स्वार्थ के किसी और के लिए कुछ करते हैं। किसी को ठंड में कम्बल देना, किसी भूखे को रोटी देना, किसी अकेले को अपनापन देना — यही असली संतोष है।"
विकास की आंखों से आंसू बह निकले। उसे अपना जवाब मिल चुका था।
वह गाड़ी घुमा कर वापस चला गई। अब उसे पता चल चुका था कि उसे क्या करना है।
 *अंत की सीख:* 
 *• हर मुस्कुराता चेहरा खुश नहीं होता।* 
 *• हर संपन्न इंसान संतुष्ट नहीं होता।* 
 *• सच्ची खुशी तभी मिलती है जब हम बिना किसी अपेक्षा के किसी और के जीवन में रोशनी भरते हैं।* 
और यदि कभी कोई हँसता-खेलता व्यक्ति मिले, तो एक बार ज़रूर पूछिए — 
" *तुम ठीक हो ना?"* 
क्योंकि कई बार सबसे मजबूत दिखने वाले, सबसे ज्यादा टूटे होते हैं।
*👨‍👨‍👦‍👦⏰🔔✅विशेष:-भव्य आत्माओं, हमें आज अपने कर्तव्यों को समझकर जीवन को संतुलित करना आवश्यक है। बिना संतुलन के सच्चा मार्ग प्राप्त नहीं होगा।🌞*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 11 जुलाई 2025

स्वयं के कर्मों का फल

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 स्वयं के कर्मों का फल ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*🔔🪔   श्रावण कृष्ण  2 , शनिवार 12 जुलाई  2025 कलि काल के 20 वें तीर्थंकर  मुनिसुव्रतनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से शनि की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करवाने वाले  श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान जी का  गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 जुलाई  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 01,02 12,20,26 ,30 व 31 तारीख को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎  जुलाई माह में अष्टमी तिथि 3 व 18 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 09 व 23 जुलाई को है।*
*🐎✍️ पंचक 11 से 17 जुलाई तक है।*
*✅🔔⏰🐎 नोट जुलाई माह से अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह + वाहन व प्रापर्टी खरीदने का शुभ मुहूर्त नहीं है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*स्वयं के कर्मों का फल* 

माण्डव्य ऋषि गहन तपस्या में लीन थे। एक दिन, कुछ चोर राजकोष लूटकर भागते हुए उनकी कुटिया के पास से गुज़रे। पीछा कर रहे सिपाहियों से बचने के लिए चोरों ने सारा लूटा हुआ धन ऋषि की कुटिया में छिपा दिया और स्वयं जंगल में भाग निकले।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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थोड़ी ही देर में सिपाही वहाँ पहुँचे। कुटिया की तलाशी ली गई। चोर तो मिले नहीं, पर लूट का धन वहीं पड़ा मिला। सिपाहियों ने सोचा—सामने जो साधु बैठा है, वही चोर है। शायद पकड़े न जाने के लिए इसने तपस्वी का वेश धर रखा है।
बिना कोई सोच-विचार किए सिपाही ऋषि को पकड़ कर राजा के सामने ले गए। राजा ने भी बिना कोई जाँच किए, न कोई प्रश्न, न कोई सुनवाई—माण्डव्य ऋषि को सूली पर चढ़ा देने का आदेश सुना दिया।
सूली पर लटकते हुए भी ऋषि शांत थे। उनके मन में एक ही प्रश्न था—"आखिर मैंने ऐसा कौन-सा पाप किया है जिसका यह दंड मिल रहा है?" ऋषि तो आत्म ज्ञानी थे। उन्होंने अपने इस जीवन की गहराई से समीक्षा की, फिर पिछले जन्मों की ओर ध्यान केंद्रित किया। सौ जन्म तक का अवलोकन करने पर भी कुछ भी ऐसा दिखाई नहीं दिया कि कोई पाप किया है ।
आखिरकार उन्होंने भगवान की शरण ली।
तब एक दिव्य वाणी हुई— "ऋषिवर, अपना एक सौ एक (101)वां जन्म देखो।"
ध्यान गहराया। एक दृश्य उभरा— एक आठ-दस वर्ष का बालक है। उसके एक हाथ में एक कीट (कीड़ा) है, दूसरे हाथ में नुकीला काँटा। बालक खेल-खेल में उस कीट को बार-बार चुभाता है। कीट तड़प रहा है, और बालक इस पीड़ा को देखकर आनंदित हो रहा है।

माण्डव्य ऋषि का हृदय काँप उठा। उन्होंने समझ लिया—वह निर्दोष नहीं हैं। उस बालक की क्रूरता आज उन्हें तपस्वी होकर भी सूली तक ले आई है।

विचार उठे—"क्या मेरी वर्षों की तपस्या भी उस एक क्षण की क्रूरता को मिटा नहीं सकी?" परंतु वे मौन थे, शांत थे।
उधर, कुछ सज्जन जिन्होंने ऋषि को वर्षों से तपस्या में देखा था, राजा के पास पहुँचे। उन्होंने राजा को सारी सच्चाई बताई। राजा को जब अपनी भूल का अहसास हुआ तो वह काँप उठा। उसने स्वयं ऋषि से क्षमा माँगी और उन्हें सम्मानपूर्वक मुक्त कर दिया।

मगर तब तक माण्डव्य ऋषि के भीतर बहुत कुछ बदल चुका था। उन्होंने सूक्ष्मतम न्याय की गहराई को अनुभव कर लिया था। उन्होंने आँखें मूँद लीं, भीतर से उस कीट से क्षमा माँगी, और ईश्वर से प्रार्थना की भगवान अब वर्तमान से मैं किसी भी जीव को किसी भी प्रकार से तकलीफ नहीं दुंगा पुनः अपने आत्म ध्यान में लीन हो गए।
  
*👨‍👨‍👦‍👦🎪⏰🔔विशेष:-भव्य आत्माओं,गुरुवर कहते है कि शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि कर्म चाहे छोटे हों या बड़े,उनका फल निश्चित है। स्वयं के कर्मों का न्याय बहुत सूक्ष्म होता है—वह न समय देखता है, न उम्र, न रूप, न परिस्थिति।  सभी कर्मों का फल तुरंत नहीं मिलता। कुछ चीजें समय लेती हैं, लेकिन यह तय है कि हर कर्म का फल कभी न कभी अवश्य मिलता है।*
 *🔔जो जैसा बोता है, अंततः उसे वैसा ही फल मिलता है। अतः हम सभी आज और अभी से ही सावधानी पूर्वक अपने मन वचन और शरीर का नियंत्रण चौबीस घंटे करना है। अन्यथा आज हम जितने भी दुखी है उससे करोड़ों गुना दुःख भोगना पड़ेगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 9 जुलाई 2025

सहज वर्षायोग महोत्सव

*🕉️ सिध्दम नम:*
*🕉️सहज वर्षायोग महोत्सव
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.       🙏 *श्री पार्श्वनाथ जिनेद्राय नमः*🙏
 .     *🕉️🌞श्री वसुनन्दी गुरुवे नमः 🌞🕉️*  
  *🌲23 वे मंगल वर्षायोग  कलश की स्थापना*
   *गुरुवार   दिनांक 10/07/2025*

👨‍👩‍👧‍👦धर्मानुरागियों
               🕉️जय जिनेंद्र, 
        ➡️✍️⌚👨‍👩‍👧‍👦*परम पूज्य 108 श्री श्वेतपिच्छाचार्य विद्यानंदजी मुनिराज से आचार्य पद से  अलंकृत श्री वसुनन्दी जी महामुनि राज के आत्मसाधक शिष्य क्षुल्लक 105 नित्यानंद सागर  महाराज का  जयपुर महानगरी मे   उनका 23 वाँ मंगल  वर्षायोग *श्री शांतिसागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर कार्यालय* पर हो रहा है । 
 वर्षायोग हेतु मंगल कलश स्थापना दिनांक *10/ 07/ 2025 को दिन गुरुवार दोपहर 3.00 बजे* सम्पन्न होगी । आप सभी से अनुरोध है कि वर्षायोग  की अनुमोदन करते हुए  धर्मलाभ  ले। 

      गुरुदेव का कहना है कि इस वर्ष  *देश विदेश के पुण्यार्जक श्रावक के  घरों में यह वर्षायोग का मंगल कलश पहुंचे ताकि आप सभी की चंचला लक्ष्मी से, सभी का आयु ,आरोग्य, धन  सम्पदा बनी रहे ओर साथ ही एक अति आवश्यक *श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र के अंतर्गत त्यागी व्रतियों के समाधि में सहयोगी बनकर स्वयं के आत्मविकास  में आपका सराहनीय योगदान हो इस बात को ध्यान में रखते हुए* 

*🕉️1.गणधर कलश की राशि मात्र 1,31,311/- रुपए रखी है* 
*🌞2.रत्नत्रय कलशकी राशि मात्र 51,211/- रुपए रखी है* 

*🔔3.शक्तिकलश की राशि मात्र 25,111/- रुपए रखी है* 

*🎪4 अखंड ज्योति शुद्ध घी की(सम्पूर्ण वर्षायोग)   राशि मात्र 25,111/- रुपए रखी है*

इस सर्वश्रेष्ठ कार्य हेतु मंगल कलश  हमसे निम्न नम्बर पर आप सम्पर्क कर जल्द से जल्द अपने नाम दे। 
*🔔नोट:-कलशों की संख्या सिमीत होने से पहले जिसकी राशि जमा होगी उसे ही मंगल कलश दिया जायेगा।*

     आपके मंगल कलश की स्थापना क्षुल्लकजी के द्वारा शास्त्रोक्त विधि से स्थापित किये जाएंगे।...
*🔔 कार्यालय➡️*
 *🕉️श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र जयपुर* पर सम्पन्न होगी । वर्षायोग के दरम्यान गुरुदेव कलश पर रोज़ाना जाप व विशिष्ट अनुष्ठान होगे एवं वर्षायोग के बाद आपको यह   सहज मंगल कलश आपके पते पर कोरीयर द्वारा भिजवाएगे।

*⏰✍पुण्यार्जक श्रावक अपनी राशि बैंक में  जमा करवाकर निम्न नंबरो पर सम्पर्क करें🌞* 
*Sevavrti* 
*Punjab National Bank*
*A/C No.5871000100010922*
*IFC Code PUNB 0587100* 
*Durgapura JAIPUR*
 (Rajasthan)
*पेटीएम UPI ID 9982411713@paytm*

सम्पर्क सूत्र:-
*🌞7891913125*
धन्यवाद....
     अधिक जानकारी हेतु सम्पर्क करे।
सम्पर्क सूत्र:-

*🌞📲.7891913125*

    
       🙏निवेदक🙏
*🌞श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र जयपुर*

 *🌞ट्रस्ट मंडल एवं प्रबंध कार्यकारिणी*
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*🕉️श्री शांतिसागर समाधि साधना  सेवा केंद्र  जयपुर*

 *व्हाट्सएप नंबर 7891913125*
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