*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 अनुभवी प्लंबर ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨👨👦👦🐎🔑 फाल्गुन कृष्ण 3, 4 फरवरी बुधवार 2025 कलि काल के 18 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री अरनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अरनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨👨👦👦🐎🔑 फाल्गुन कृष्ण 4, 5 फरवरी गुरुवार 2025 कलि काल के षष्ठम तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री पद्मप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से सूर्य की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री पद्मप्रभ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,05,07,08,13,14,16,17,22,23 व 24 फरवरी (10 व11 को नवमी तिथि और 23 को षष्ठी तिथि का क्षय सप्तमी तिथि मान्य होगी )तारीख को कल्याणक महोत्सव है। 💯✅विशेष :- 5,8, 14,17 व 22 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने पांच बार निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*👨👨👦👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 09 व 24 फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी को है।*
*🔔🐎 अष्टान्हिका महापर्व 24 फरवरी से प्रारंभ है।*
*👨👨👦👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त 4,5,10,19,20,21 फरवरी माह में मुहूर्त है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 1,6,18, 26,27 फरवरी को है।🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 1, 2, 12,13, 21,26,27 फरवरी को है।✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त 19,20, 21,26 को है।*
*🐎✍️ पंचक 23 से 26 जनवरी को है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*आओ कहानी सुने*
*अनुभवी प्लंबर*
ज़िंदगी में हम अक्सर चमक-दमक, डिग्रियों और बड़ी मशीनों को ही काबिलियत का पैमाना मान लेते हैं। पर असली हुनर वहाँ होता है, जहाँ हाथों में कला हो, मन में ईमानदारी हो और जीवन में सादगी हो। कभी-कभी एक साधारण-सा इंसान हमें वो सिखा जाता है, जो बड़ी-बड़ी किताबें नहीं सिखा पातीं।
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रसोई में नल से लगातार पानी टपक रहा था। आवाज़ मन को परेशान कर रही थी। मैंने एक साधारण से प्लंबर को बुला लिया।
वह आया — साधारण कपड़े, कंधे पर पुराना सा थैला, चेहरे पर शांत मुस्कान।
मैं उसे काम करते हुए देख रहा था।
उसने थैले से एक रिंच निकाली — उसकी डंडी टूटी हुई थी।
फिर एक पतली-सी आरी निकाली — वह भी आधी टूटी हुई।
मेरे मन में हल्की-सी शंका उठी —
"पता नहीं किसे बुला लिया… इसके औज़ार ही सही नहीं हैं, तो काम क्या करेगा?"
वह चुपचाप, बिना किसी हड़बड़ी के, अपने काम में लग गया।
सधे हुए हाथों से आरी को पाइप पर चलाया।
धीरे-धीरे… पूरे धैर्य और एकाग्रता से।
कुछ ही मिनटों में पाइप के दो टुकड़े हो गए।
गल चुका हिस्सा बाहर निकाला गया।
नया नल फिट किया गया।
और बस — नल से गिरता पानी थम गया।
पूरे काम में मुश्किल से दस मिनट लगे।
मैंने उसे मजदूरी के 100 रुपये दिए।
वह मुस्कराया और बोला —
“इतने पैसे नहीं बनते साहब… आप आधे दीजिए।”
मैं चौंक गया।
“क्यों भाई? पैसे भी कोई छोड़ता है क्या?”
उसने बहुत शांति से कहा —
“सर, हर काम के पैसे तय होते हैं।
आज आप ज़्यादा देंगे, अच्छा लगेगा…
लेकिन हर जगह उतने नहीं मिलेंगे, तो तकलीफ होगी।
ईमानदारी वही है — जो हर जगह एक जैसी रहे।”
मैने कहा:-“नई आरी ले लेना, नई रिंच ले लेना… काम आसान हो जाएगा।”
वह हँस पड़ा —
“सर, औज़ार तो टूटते रहते हैं,
पर काम नहीं रुकना चाहिए।”
फिर बोला —
“आप जिस ऑफिस में काम करते हैं, आप किस पेन से लिखते हैं — इससे क्या फर्क पड़ता है?
लिखना आता है तो किसी भी कलम से लिख लेंगे।
नहीं आता तो सोने की कलम भी बेकार है।”
“हुनर हाथ में होता है, मशीन में नहीं।”
“मेरे लिए ये टूल वही हैं, जो आपके लिए पेन है।
टूट गए हैं, पर काम कर रहे हैं।
नया लूँगा — फिर वही टूटेगा।
अभी तो काम आराम से चल रहा है।”
मैं चुप था।
उसके चेहरे पर जो संतोष था —
वह किसी अमीर आदमी के चेहरे पर दिखने वाले गर्व से कहीं बड़ा था।
मुझे लगा —
हम दिनभर पैसों के पीछे भागते हैं,
लेकिन जिनके पास मेहनत और ईमानदारी होती है,
उन्हें बहुत ज़्यादा पैसों की ज़रूरत नहीं पड़ती।
“जहाँ संतोष है, वहाँ कमी नहीं होती।”
मैंने उससे पूछा —
“चाय पियोगे?”
वह बोला —
“नहीं सर, बहुत काम है।
और भी घरों में पानी रिस रहा है, उन्हें ठीक करना है।
पानी बर्बाद न हो — इसका ध्यान तो हम सबको रखना चाहिए।”
वह चला गया…
और मैं देर तक वहीं खड़ा सोचता रहा।
काश…
हम सब ऐसे ही प्लंबर होते —
कम साधनों में बड़ा हुनर,
कम शब्दों में बड़ी सीख,
और छोटी ज़िंदगी में बड़ी ईमानदारी।
सीख (Life Lesson):
हुनर औज़ारों से नहीं, इंसान से बनता है।
ईमानदारी छोटी लगे, पर उसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है।
संतोष सबसे बड़ी संपत्ति है।
असली शिक्षा किताबों में नहीं, जीवन में मिलती है।
झुककर सीखने की आदत — इंसान को बड़ा बनाती है, अहंकार नहीं।
अंतिम सीख:
“डिग्री पहचान देती है, पर दृष्टि इंसान स्वयं बनाता है और अनुभव ही सफल बनाता है।”
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*