शनिवार, 31 जनवरी 2026

अनुभवी प्लंबर

*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 अनुभवी प्लंबर ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 फाल्गुन कृष्ण 3, 4 फरवरी बुधवार 2025 कलि काल के  18 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री अरनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अरनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 फाल्गुन कृष्ण 4, 5 फरवरी गुरुवार 2025 कलि काल के  षष्ठम तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री पद्मप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से सूर्य की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री पद्मप्रभ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,05,07,08,13,14,16,17,22,23 व 24 फरवरी (10 व11 को नवमी तिथि और 23 को षष्ठी तिथि का क्षय सप्तमी तिथि मान्य होगी )तारीख को  कल्याणक महोत्सव है। 💯✅विशेष :- 5,8, 14,17 व 22 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने पांच बार निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 09 व 24  फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी  को है।*
*🔔🐎 अष्टान्हिका महापर्व 24  फरवरी से प्रारंभ है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त 4,5,10,19,20,21  फरवरी माह में  मुहूर्त है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त   1,6,18, 26,27 फरवरी को है।🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 1, 2, 12,13, 21,26,27 फरवरी को है।✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त 19,20, 21,26 को है।*
*🐎✍️ पंचक  23 से 26 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*आओ कहानी सुने* 

 *अनुभवी प्लंबर* 

ज़िंदगी में हम अक्सर चमक-दमक, डिग्रियों और बड़ी मशीनों को ही काबिलियत का पैमाना मान लेते हैं। पर असली हुनर वहाँ होता है, जहाँ हाथों में कला हो, मन में ईमानदारी हो और जीवन में सादगी हो। कभी-कभी एक साधारण-सा इंसान हमें वो सिखा जाता है, जो बड़ी-बड़ी किताबें नहीं सिखा पातीं।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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रसोई में नल से लगातार पानी टपक रहा था। आवाज़ मन को परेशान कर रही थी। मैंने एक साधारण से प्लंबर को बुला लिया।
वह आया — साधारण कपड़े, कंधे पर पुराना सा थैला, चेहरे पर शांत मुस्कान।
मैं उसे काम करते हुए देख रहा था।
उसने थैले से एक रिंच निकाली — उसकी डंडी टूटी हुई थी।
फिर एक पतली-सी आरी निकाली — वह भी आधी टूटी हुई।
मेरे मन में हल्की-सी शंका उठी —
"पता नहीं किसे बुला लिया… इसके औज़ार ही सही नहीं हैं, तो काम क्या करेगा?"
वह चुपचाप, बिना किसी हड़बड़ी के, अपने काम में लग गया।
सधे हुए हाथों से आरी को पाइप पर चलाया।
धीरे-धीरे… पूरे धैर्य और एकाग्रता से।
कुछ ही मिनटों में पाइप के दो टुकड़े हो गए।
गल चुका हिस्सा बाहर निकाला गया।
नया नल फिट किया गया।
और बस — नल से गिरता पानी थम गया।
पूरे काम में मुश्किल से दस मिनट लगे।
मैंने उसे मजदूरी के 100 रुपये दिए।
वह मुस्कराया और बोला —
“इतने पैसे नहीं बनते साहब… आप आधे दीजिए।”
मैं चौंक गया।
“क्यों भाई? पैसे भी कोई छोड़ता है क्या?”
उसने बहुत शांति से कहा —
“सर, हर काम के पैसे तय होते हैं।
आज आप ज़्यादा देंगे, अच्छा लगेगा…
लेकिन हर जगह उतने नहीं मिलेंगे, तो तकलीफ होगी।
ईमानदारी वही है — जो हर जगह एक जैसी रहे।”
मैने कहा:-“नई आरी ले लेना, नई रिंच ले लेना… काम आसान हो जाएगा।”
वह हँस पड़ा —
“सर, औज़ार तो टूटते रहते हैं,
पर काम नहीं रुकना चाहिए।”
फिर बोला —
“आप जिस ऑफिस में काम करते हैं, आप किस पेन से लिखते हैं — इससे क्या फर्क पड़ता है?
लिखना आता है तो किसी भी कलम से लिख लेंगे।
नहीं आता तो सोने की कलम भी बेकार है।”
“हुनर हाथ में होता है, मशीन में नहीं।”
“मेरे लिए ये टूल वही हैं, जो आपके लिए पेन है।
टूट गए हैं, पर काम कर रहे हैं।
नया लूँगा — फिर वही टूटेगा।
अभी तो काम आराम से चल रहा है।”
मैं चुप था।
उसके चेहरे पर जो संतोष था —
वह किसी अमीर आदमी के चेहरे पर दिखने वाले गर्व से कहीं बड़ा था।
मुझे लगा —
हम दिनभर पैसों के पीछे भागते हैं,
लेकिन जिनके पास मेहनत और ईमानदारी होती है,
उन्हें बहुत ज़्यादा पैसों की ज़रूरत नहीं पड़ती।
“जहाँ संतोष है, वहाँ कमी नहीं होती।”
मैंने उससे पूछा —
“चाय पियोगे?”
वह बोला —
“नहीं सर, बहुत काम है।
और भी घरों में पानी रिस रहा है, उन्हें ठीक करना है।
पानी बर्बाद न हो — इसका ध्यान तो हम सबको रखना चाहिए।”
वह चला गया…
और मैं देर तक वहीं खड़ा सोचता रहा।
काश…
हम सब ऐसे ही प्लंबर होते —
कम साधनों में बड़ा हुनर,
कम शब्दों में बड़ी सीख,
और छोटी ज़िंदगी में बड़ी ईमानदारी।
सीख (Life Lesson):
हुनर औज़ारों से नहीं, इंसान से बनता है।
ईमानदारी छोटी लगे, पर उसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है।
संतोष सबसे बड़ी संपत्ति है।
असली शिक्षा किताबों में नहीं, जीवन में मिलती है।
झुककर सीखने की आदत — इंसान को बड़ा बनाती है, अहंकार नहीं।

अंतिम सीख:
“डिग्री पहचान देती है, पर दृष्टि इंसान स्वयं बनाता है और अनुभव ही सफल बनाता है।”
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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गुरुवार, 29 जनवरी 2026

अड़ियल स्वभाव

*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  अड़ियल स्वभाव ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔विशेष आज 12/13 दोनों ही तिथियां 30 जनवरी को समाहित है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 माघ शुक्ल  12 , 30 जनवरी    शुक्रवार 2025 कलि काल के  चौथे तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री अभिनंदन भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अभिनंदन भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 माघ शुक्ल  13 , 30 जनवरी    शुक्रवार 2025 कलि काल के  पंद्रहवे तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री धर्मनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और धर्म में दिन दुगनी रात चौगुनी वृद्धि से मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री धर्मनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 08,15,17,18,20,22,24,28 व 30( 30 को बारस+तेरस समाहित तिथि )तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
 *चतुर्दशी तिथि  31 जनवरी  को है।*

*🔔🐎षोडष कारण महापर्व 04 जनवरी से 02 फरवरी को है।* 
*🎪🪔दशलक्षण महापर्व 22 से 31 जनवरी 👉30 जनवरी से 01 फरवरी रत्नत्रय व्रत* 
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

 *अड़ियल स्वभाव* 

जीवन में अनेक बार हम चेतावनियों को अहंकार, हठ या स्वार्थवश अनदेखा कर देते हैं। हमें लगता है कि “मुझे सब पता है”, “मुझ पर कोई असर नहीं पड़ेगा।” लेकिन जब विवेक पर अहंकार भारी पड़ जाता है, तब परिणाम केवल नुकसान नहीं, बल्कि पश्चाताप बनकर सामने आता है। 
यह कहानी उसी मानवीय कमजोरी, सत्य की शक्ति और झूठ की पराजय का जीवंत उदाहरण है।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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✅एक दिन एक घुड़सवार अपने गुस्सैल घोड़े को बेचने के लिए बाज़ार की ओर जा रहा था। रास्ते में उसे भूख लगी, तो वह एक बाग़ में रुक गया। उसने घोड़े को एक पेड़ से बाँध दिया। घोड़ा नीचे उगी हरी घास चरने लगा और घुड़सवार स्वयं भोजन करने बैठ गया।
कुछ ही देर में एक व्यक्ति अपने गधे के साथ वहाँ पहुँचा और उसी पेड़ पर गधे को बाँधने लगा। यह देखकर घोड़े का मालिक बोला—
“भाई, अपने गधे को इस पेड़ पर मत बाँधो। मेरा घोड़ा बहुत गुस्सैल है, यह तुम्हारे गधे को मार सकता है।”
गधे का मालिक अकड़ कर बोला—
“यह पेड़ केवल तुम्हारा नहीं है। मैं तो अपना गधा यहीं बाँधूँगा।”

घोड़े का मालिक शांत स्वर में बोला—“ अच्छी बात है भाई, पर मैंने तुम्हें पहले ही चेतावनी दे दी है। अगर कुछ हुआ, तो जिम्मेदारी तुम्हारी ही होगी।”
लेकिन गधे का मालिक नहीं माना। उसने गधे को उसी पेड़ से बाँध दिया और चला गया।
कुछ ही देर में घोड़े ने गधे पर लात मार दी। गधा नीचे गिर पड़ा। इससे पहले कि घोड़े का मालिक कुछ कर पाता, घोड़े ने लगातार लात मार-मारकर गधे को मार डाला।
थोड़ी देर बाद गधे का मालिक आया। मरे हुए गधे को देखकर वह चिल्लाने लगा—
“तुम्हारे घोड़े ने मेरे गधे को मार डाला! अब मुझे मेरा गधा दो, नहीं तो मैं तुम्हें यहाँ से जाने नहीं दूँगा!”
घोड़े का मालिक बोला—
“मैंने तुम्हें पहले ही चेतावनी दी थी कि मेरा घोड़ा गुस्सैल है। तुमने मेरी बात नहीं मानी। अब इसकी जिम्मेदारी मेरी नहीं, तुम्हारी है।”
दोनों में बहस होने लगी। तभी एक राहगीर आया और बोला—
“तुम दोनों राजा के दरबार चलो, वहीं न्याय होगा।”
दोनों राजा के दरबार पहुँचे।
राजा ने गधे के मालिक से पूछा—
“बताओ, तुम्हारा गधा कैसे मरा?”
उसने कहा—
“महाराज, मैने तो मेरा गधा पेड़ से बांधा था, अचानक इसका घोड़ा पागल हो गया और मेरे गधे को मार डाला।”
फिर राजा ने घोड़े के मालिक से पूछा—
“क्या तुम्हारे घोड़े ने गधे को मारा है? बोलो।”
घोड़े का मालिक चुप रहा।
राजा क्रोधित होकर बोले—
“क्या तुम बहरे हो? गूंगे हो? बोलते क्यों नहीं?”
फिर भी वह चुप रहा ।
तभी गधे का मालिक बोला—
“महाराज, यह गूंगा नहीं है। पहले तो मुझ पर चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा था कि अपने गधे को यहाँ मत बाँधो, मेरा घोड़ा इसे मार देगा। अब यहाँ चुप्पी साधे बैठा है।”
यह सुनते ही घोड़े का मालिक बोला—
“महाराज, मैंने जानबूझकर चुप्पी साधी थी, ताकि यह ही अपने मुँह से सच बोल दे—और इसने वही किया।”
राजा मुस्कुराए और बोले—
“तो सत्य स्पष्ट है। इस व्यक्ति ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि घोड़ा गुस्सैल है और गधे को यहाँ मत बाँधो। लेकिन तुमने अहंकार में उसकी बात नहीं मानी। इसलिए इस घटना के लिए अब तुम स्वयं ही जिम्मेदार हो।”
राजा ने निर्णय सुनाया—
“यह हानि तुम्हारी हठ और मूर्खता का परिणाम है। यदि तुम चाहते हो तो तुम्हारे गधे को दूसरे पेड़ से भी बांध सकते थे। इसलिए न्याय तुम्हारे पक्ष में नहीं हो सकता।”

दरबार में सन्नाटा छा गया… और सत्य मौन होकर भी सबसे ऊँचा बोल रहा था।
 कहानी का संदेश यही है कि झूठ कितना भी सजाया जाए, कितनी भी चालाकी से छुपाया जाए—सच अंततः स्वयं सामने आ जाता है। जो चेतावनी को अहंकार समझकर ठुकरा देता है, वह अक्सर अपने ही नुकसान का कारण बनता है। विवेक, विनम्रता और सत्य—यही जीवन के सच्चे रक्षक हैं।
*⏰🐎👨‍👨‍👦‍👦⛳🔔विशेष :-भव्य आत्माओं, इस कहानी के माध्यम से हम सभी को यह समझना आवश्यक है कि हमारा स्वभाव में कुछ निर्णय स्वयं के अड़ियल पने के शिकार हो सकते है। जैसे मैं यही व्यवसाय करुंगा, मैं घर से बाहर काम नहीं करुंगा, मैं इसी लड़के या लड़की से शादी करुंगा इस प्रकार के हजारों उदाहरण हो सकते है।इन उदाहरणों के कारण हम कई बार अपने हाथों से अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार लेते है। कुछ लोगों को जीवन भर पश्चाताप के अलावा कुछ भी प्राप्त नहीं होता। अतः सभी को समय के अनुसार अपनी योग्यता को देखकर ही निर्णय लेना चाहिए। प्रकृति का नियम है सही कार्य में साथ कोई बिरला व्यक्ति ही साथ देता और गलत कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वालों की गिनती करना मुश्किल है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

सोमवार, 26 जनवरी 2026

कल कभी नहीं आता

*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 कल कभी नहीं आता ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 माघ शुक्ल  दसमी , 28 जनवरी  बुधवार 2025 कलि काल के  2 रें तीर्थंकर  श्री अजितनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अजितनाथ  भगवान जी का  जन्म व तप  कल्याणक महोत्सव है।*
*✅नोट :-उत्तर पुराण के अनुसार 9को तप कल्याणक और दसमी को जन्म कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 08,15,17,18,20,22,24,28 व 30( 30 को बारस+तेरस समाहित तिथि )तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 11 व 26  जनवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 जनवरी  को है।*
*🔔🐎षोडष कारण महापर्व 04 जनवरी से 02 फरवरी को है।* 
*🎪🪔दशलक्षण महापर्व 22 से 31 जनवरी 👉30 जनवरी से 01 फरवरी रत्नत्रय व्रत* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  जनवरी माह में  नहीं है बसंत पंचमी का 23 जनवरी को स्वयं सिद्ध मुहूर्त है 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,12,14,19,21,28 व 29 जनवरी 🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 03040708,13,14,23,24 व 29 जनवरी ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

🙏 *“कल” कभी नहीं आता* 🙏
हम जीवन को अक्सर ऐसे जीते हैं, जैसे हमारे पास समय अनंत हो। जैसे हर सुबह फिर आएगी, हर रिश्ता फिर मिल जाएगा, हर अवसर दोबारा दस्तक देगा।
और हम आदतन कह देते हैं—
कल बात कर लेंगे,
कल माफ कर देंगे,
कल माँ-बाप के पास बैठ लेंगे,
कलं एक्सरसाइज शुरू कर लेंगे,
कल अपने मन की सुन लेंगे,
कल अपने सपनों के लिए समय निकाल लेंगे।
पर जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि —
“कल” कभी नहीं आता।
जो आता है, वह सिर्फ आज होता है…
और जो चला जाता है, वह लौटकर कभी नहीं आता।
मृत्युशय्या पर पड़ा मनुष्य अक्सर यही कहता है—
“मैंने बहुत कुछ पाया…
पर काश, मैंने सच में ज़्यादा जिया होता।”
काश,
मैंने रिश्तों को समय दिया होता,
मैंने क्षमा को अहंकार से पहले चुना होता,
मैंने “मैं” को थोड़ा कम और “हम” को थोड़ा ज़्यादा जिया होता,
मैंने प्रेम को टालने की जगह बाँटा होता।
जीवन की अंतिम दहलीज़ पर खड़ा इंसान अचानक बहुत स्पष्ट देख पाता है—
कि असली पूँजी पद, पैसा, पहचान या प्रशंसा नहीं होती,
बल्कि होती है —
रिश्ते, प्रेम, क्षमा, सत्य, कृतज्ञता, संवेदना,
और वर्तमान में पूरे मन से जीना।
“जो आज को जी लेता है, उसे कल की चिंता नहीं करनी पड़ती।”
“समय का सबसे बड़ा अपमान है — उसे टालते रहना।”
“जीवन लंबा नहीं, गहरा होना चाहिए।”
इसलिए आज ही—
बात कर लो,
माफ कर दो,
गले लगा लो,
धन्यवाद कह दो,
प्रेम जता दो,
और अपने मन की आवाज़ सुन लो…
क्योंकि जीवन टलने के लिए नहीं, जीने के लिए है। 🌱

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*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 *“आज की सत्यता ”* 

छोटे से शहर का शुभम,  था तो बहुत मेहनती पर हर चीज़ को टालने की आदत उसकी पहचान बन चुकी थी।
माँ कहती— “बेटा, थोड़ा मेरे पास बैठ लिया कर।”
वह कहता— “माँ, कल से बैठूँगा।”
पत्नी कहती— “थोड़ा समय बच्चों को दे दो।”
वह कहता— “कल दूँगा।”
मन कहता— “थोड़ा अपने लिए भी जी ले।”
वह कहता— “कल जी लूँगा।”
एक दिन गाँव में एक दिगंबर साधु आए। उन्होंने शुभम से पूछा “तुम जीवन में सबसे ज़्यादा कौन सा शब्द बोलते हो?”
करण मुस्कुराया— “कल।”
साधु ने ज़मीन पर एक रेखा खींची और बोले—
“ये है आज, और ये है कल।”
फिर पूछा— “तुम किस पर खड़े हो?”
मोहन बोला— “आज पर।”
साधु मुस्कुराए—
“तो फिर कल पर क्यों जीते हो?”
उसी रात शुभम के पिता की अचानक तबीयत बिगड़ी और वे चल बसे।  शुभम टूट गया। उसकी आँखों में एक ही वाक्य गूँज रहा था— “मैं कल बैठूँगा…”
अगले दिन उसने घर में एक दीपक जलाया और उस पर लिखा—
“आज”
अब जब भी कोई काम टालने का मन करता,
वह उस दीपक को देखता और खुद से कहता—
“अगर आज नहीं, तो कभी नहीं।”
उस दिन से उसने जीवन जीना शुरू किया—
माँ के पास बैठना,
बच्चों के साथ खेलना,
पत्नी से बात करना,
लोगों को माफ करना,
और हर दिन को अंतिम दिन समझकर जीना।
*सफलता प्राप्त करने के लिए एक शास्त्रों में कहावत है कि काल करे सो आज कर आज करे सो अब,अब करें सो विचार ना कर कार्य कर* 
 *✅👨‍👨‍👦‍👦🐎⛳विशेष :- जीवन का सबसे बड़ा धोखा है —“कल और जीवन का सबसे बड़ा सत्य है — “आज जो आज को जीना सीख गया वही जीवन को सच में समझ गया।क्योंकि कल एक भ्रम है और आज ही जीवन है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

सत्य घटना

*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सत्य घटना ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑  माघ शुक्ल तिथि 6, शनिवार 24 जनवरी 2026 कलि काल के   13 वें तीर्थंकर श्री विमलनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  विमलनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 08,15,17,18,20,22,24,28 व 30( 30 को बारस+तेरस समाहित तिथि )तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 11 व 26  जनवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 जनवरी  को है।*

*🔔🐎षोडष कारण महापर्व 04 जनवरी से 02 फरवरी को है।* 
*✅🔔 बसंत पंचमी 23 जनवरी*
*🎪🪔दशलक्षण महापर्व 22 से 31 जनवरी 👉30 जनवरी से 01 फरवरी रत्नत्रय व्रत* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  जनवरी माह में  नहीं है बसंत पंचमी का 23 जनवरी को स्वयं सिद्ध मुहूर्त है 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,12,14,19,21,28 व 29 जनवरी 🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 03040708,13,14,23,24 व 29 जनवरी ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  20 से 25 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*👨‍👨‍👦‍👦🔑सत्य कहानी🔑👨‍👨‍👦‍👦*

 *सच्चा प्रेम याने जहां वासना नहीं होती उसे ही सच्चा प्रेम कहते है। जहां वासना है वहां प्रेम नहीं वह व्यक्ति विशेष का पतन का द्वार है। सच्चा प्रेम किसी भी व्यक्ति में हो सकता है जैसे:- गुरु शिष्य,भाई बहन, पति-पत्नी, रिश्ता कोई भी हो सकता है।इस रिश्ते में एक दूसरे के आत्मकल्याण का लक्ष्य आवश्यक है।*

*प्रेम जो मृत्यु से भी हार नहीं मानता*
 यह कहानी नही, एक सत्य घटना है 2013 की । शायद आप में से कई ने इस घटना को पढ़ा सुना भी होगा ।

पति–पत्नी के रिश्ते में प्रेम क्या होता है, यदि उसे समझना हो तो अजमेर निवासी विजेंद्र सिंह राठौड़ के जीवन को पढ़ना चाहिए। यह कथा केवल एक बिछड़न की दास्तान नहीं है, बल्कि उस प्रेम की गाथा है जो समय, परिस्थिति और प्रकृति—तीनों से लड़ गया।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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वर्ष 2013 की बात है।
विजेंद्र की धर्मपत्नी लीला ने एक सरल-सी इच्छा व्यक्त की—
“मैं चारधाम यात्रा करना चाहती हूँ।”

न कोई योजना, न कोई संकोच।

दोनों ने श्रद्धा और विश्वास के साथ अपना बोरिया-बिस्तर बाँधा और निकल पड़े केदारनाथ की ओर।

जहाँ आस्था थी, वहाँ प्रेम भी था।
केदारनाथ पहुँचकर वे एक लॉज में ठहरे। किसी काम से विजेंद्र लीला को वहीं छोड़कर थोड़ी ही दूरी पर गए थे कि अचानक सब कुछ बदल गया।
चारों ओर हाहाकार मच गया।
उत्तराखंड में आई भीषण बाढ़ का उफनता जल, केदारनाथ पर मृत्यु बनकर टूट पड़ा।

विजेंद्र किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल हो गए।

जब पानी का वेग थमा और मौत का तांडव शांत हुआ, तो वे बदहवास होकर उसी लॉज की ओर दौड़े—

जहाँ उन्होंने लीला को छोड़ा था।
पर वहाँ पहुँचकर जो दृश्य दिखाई दिया, उसने आत्मा तक को हिला दिया।

सब कुछ बह चुका था…
लॉज, सामान, लोग…
तो क्या लीला भी…?

“नहीं… नहीं… ऐसा नहीं हो सकता।”
विजेंद्र ने खुद को संभालते हुए कहा।
अंतरात्मा बार-बार यही कह रही थी—
“वह जीवित है।”
बरसों का साथ यूँ एक पल में समाप्त नहीं हो सकता।

चारों ओर केवल लाशें थीं, टूटी हुई ज़िंदगियाँ थीं, पर लीला कहीं नहीं थी।
विजेंद्र के पास उसकी एक तस्वीर थी—जो हमेशा उनके पर्स में रहती थी।

वही तस्वीर हाथ में लेकर वे दिन-रात घटनास्थल पर भटकते रहे।
हर व्यक्ति से एक ही प्रश्न—
“भाई, इसे कहीं देखा है?”
और हर बार एक ही उत्तर—
“नहीं…”
दो सप्ताह बीत गए। राहत कार्य चल रहे थे। फौज के अफसरों से बातचीत हुई।
लगभग सभी का निष्कर्ष यही था—
लीला बाढ़ में बह चुकी है।
पर विजेंद्र ने मानने से इनकार कर दिया।
घर फोन किया। बच्चों को हादसे की सूचना दी।
रोती-बिलखती बिटिया ने डरते हुए पूछा—
“पापा… क्या अब माँ नहीं रही?”
विजेंद्र ने कठोर स्वर में कहा—
“ऐसा दोबारा मत कहना… वह ज़िंदा है।”
एक महीना बीत गया।
पर तलाश रुकी नहीं।
हाथ में तस्वीर, दिल में अडिग विश्वास।
इसी बीच सरकारी विभाग से फोन आया—
लीला को मृत घोषित कर दिया गया था।
मुआवज़ा लेने के लिए बुलाया गया।
विजेंद्र ने साफ इंकार कर दिया।
परिजन समझाने लगे—
“अब तो सरकार भी मान चुकी है…”
विजेंद्र का उत्तर फिर वही था—
“वह जीवित है।”
और वे फिर निकल पड़े—
उत्तराखंड के शहर-शहर, गाँव-गाँव।
करीब 1000 से अधिक गाँव—
एक ही तस्वीर, एक ही सवाल, एक ही उम्मीद।
19 महीने बीत गए।

27 जनवरी 2015

उत्तराखंड के गंगोली गाँव में एक राहगीर से उन्होंने फिर पूछा—
“भाई, इसे कहीं देखा है?”
राहगीर ने तस्वीर को गौर से देखा और बोला—
“हाँ… देखा है।
यह औरत तो हमारे गाँव में घूमती रहती है… कुछ बौराई सी…”
विजेंद्र दौड़ते हुए उस गाँव पहुँचे।
एक चौराहे के कोने पर एक स्त्री बैठी थी…
वही आँखें…
जिनसे आँखें मिलने को तरस गई थीं…
वह लीला थी।
विजेंद्र ने उसका हाथ पकड़ा और छोटे बच्चे की तरह रो पड़े।
19 महीनों का दर्द, प्रतीक्षा और संघर्ष—
सब आँसुओं में बह निकला।
लीला की मानसिक स्थिति उस समय स्थिर नहीं थी।
वह उस व्यक्ति को भी नहीं पहचान पाई
जो उसे इस संसार में सबसे अधिक प्रेम करता था।
विजेंद्र ने बिना कोई शिकायत, बिना कोई प्रश्न—
उसे उठाया और घर ले आए।
12 जून 2013 से बिछड़े बच्चे
19 महीने बाद अपनी माँ को देख रहे थे।
आज के समय में, जहाँ पति–पत्नी के रिश्ते छोटी-छोटी बातों पर उलझ जाते हैं, जहाँ अहंकार संवाद से बड़ा हो जाता है और तकरार प्रेम पर भारी पड़ने लगती है—वहाँ यह कथा एक आईना बनकर खड़ी होती है। ज़रा सोचिए, जब असहमति या नाराज़गी के कारण रिश्ते टूटने लगते हैं, तब विजेंद्र का यह अटूट विश्वास हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम सुविधा का मोहताज नहीं होता। प्रेम वह नहीं जो साथ रहने में आसान हो, बल्कि वह है जो बिछड़ने के बाद भी हार न माने। आज जो लोग छोटी-छोटी बातों में मन-मुटाव कर बैठते हैं, उनके लिए यह कहानी एक मौन सीख है—कि रिश्ते निभाने के लिए तर्क नहीं, समर्पण चाहिए।
ये 19 महीने विजेंद्र सिंह राठौड़ के जीवन का सबसे कठिन समय थे।
पर इन कठिनाइयों के बीच
एक धागा था जो उन्हें बाँधे रहा—
 *प्रेम का धागा।* 

एक पति का अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और समर्पण
जिसने प्रकृति के आदेश को भी चुनौती दे दी।
केदारनाथ की बाढ़ में बह जाने वाले
अधिकतर लोग कभी लौटकर नहीं आए—
पर लीला लौट आई।
शायद विजेंद्र हर दिन प्रभु से यही कहते रहे—
“वह जीवित है।”
और शायद प्रभु को भी
इस प्रेम के आगे अपना निर्णय बदलना पड़ा
 *विशेष संदेश:- “जहाँ प्रेम सच्चा हो, वहाँ दूरी हार जाती है और जहाँ विश्वास अडिग हो, वहाँ समय भी झुक जाता है।”यह कथा एक पति के प्रेम की पराकाष्ठा को समर्पित है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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सोमवार, 19 जनवरी 2026

सतकर्म ही जीवन की सच्चाई है

*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सतकर्म ही जीवन की सच्चाई है ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑  माघ शुक्ल 2 तिथि, मंगलवार 20 जनवरी 2026 कलि काल के 12वें तीर्थंकर सर्व सुख कारक निधि प्रदाता श्री वासुपूज्य भगवान जी जिनकी आराधना से मंगल की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री वासुपूज्य भगवान जी का  केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑  माघ शुक्ल तिथि 4, गुरुवार 22 जनवरी 2026 कलि काल के   13 वें तीर्थंकर श्री विमलनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  विमलनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 08,15,17,18,20,22,24,28 व 30( 30 को बारस+तेरस समाहित तिथि )तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 11 व 26  जनवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 जनवरी  को है।*

*🔔🐎षोडष कारण महापर्व 04 जनवरी से 02 फरवरी को है।* 
*✅🔔 बसंत पंचमी 23 जनवरी*
*🎪🪔दशलक्षण महापर्व 22 से 31 जनवरी 👉30 जनवरी से 01 फरवरी रत्नत्रय व्रत* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  जनवरी माह में  नहीं है बसंत पंचमी का 23 जनवरी को स्वयं सिद्ध मुहूर्त है 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,12,14,19,21,28 व 29 जनवरी 🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 03040708,13,14,23,24 व 29 जनवरी ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  23 से 26 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*सतकर्म ही जीवन की सच्चाई है।* 

इस संसार में कोई भी प्राणी ऐसा नहीं जो कर्म से मुक्त हो। मनुष्य अपने शरीर, मन और वाणी से जो कुछ भी करता है, वही कर्म कहलाता है। संसार की गति, जीवन की निरंतरता और आत्मा का विकास—सब कर्म पर ही आधारित हैं। बिना कर्म के न शरीर का पोषण संभव है, न मन की शुद्धि और न ही जीवन का कोई उद्देश्य सिद्ध होता है। कर्म ही वह सेतु है जो मनुष्य को जड़ता से चेतना की ओर, 
अज्ञान से ज्ञान की ओर 
और सांसारिकता से आध्यात्मिक उन्नति की ओर 
ले जाता है।
निष्काम भाव से किया गया कर्म योगियों और संन्यासियों की सिद्धि माना गया है, किंतु सामान्य जन भी जब कर्तव्यबोध से प्रेरित होकर कर्म करता है, तब वह कर्मयोग के पथ पर अग्रसर होता है। स्वार्थ से परे होकर, केवल उत्तरदायित्व और धर्म के भाव से किया गया कर्म ही सच्चा और श्रेष्ठ है। अकर्मण्य बने रहना जीवन के प्रति अन्याय है; इसलिए भले ही किसी कर्म के पीछे कोई उद्देश्य हो, फिर भी कर्म करना अकर्म से कहीं अधिक श्रेष्ठ है। हे मनुष्य! उठो, जागो और निरंतर कर्मरत रहो—क्योंकि कर्म ही तुम्हारा धर्म है और कर्म से ही तुम्हारा कल्याण निहित है। इसलिए हमें सबसे पहले कोई भी कार्य करने से पहले विचार अवश्य ही करें कि इस कार्य से स्वयं को कितना लाभकारी या नुकसान दायक रहेगा।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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 *श्रीकृष्ण और अर्जुन प्रसंग* 

महाभारत के युद्धभूमि में अर्जुन मोहग्रस्त होकर धनुष छोड़ देना चाहता है। तब श्रीकृष्ण उसे समझाते हैं— “तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं।” श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यह नहीं कहा कि युद्ध छोड़ दो, बल्कि यह सिखाया कि कर्तव्य से विमुख होना पाप है। फल की चिंता किए बिना, धर्म के पथ पर चलकर कर्म करना ही जीवन की सच्ची साधना है। अर्जुन ने जब इस सत्य को समझा, तब वही युद्ध उसके लिए मोक्ष का मार्ग बन गया। *🔔👨‍👨‍👦‍👦⏰🌞विशेष: भव्य आत्माओं , फल की आसक्ति त्यागकर किया गया कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाता। जीवन में सफलता और शांति दोनों उसी को मिलती हैं, जो कर्म को बोझ नहीं, बल्कि धर्म समझकर स्वीकार करता है।भगवद्गीता के एक श्लोक *'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन'*(कर्म करो, फल की चिंता मत करो) का *अर्थ है कि आपको अपनी जिम्मेदारियों से भागना नहीं चाहिए, बल्कि बिना फल की इच्छा किए अपना कर्तव्य निभाते रहना चाहिए,क्योंकि जिम्मेदारी लेने से ही जीवन में प्रगति होती है और यह आपके कर्मों का ही परिणाम है कि आप आज जिस स्थिति में हैं। जिम्मेदारी से भागने से सिर्फ समस्याएँ बढ़ती हैं, इसलिए उनका सामना करें और कर्म करते रहें ।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

अकेलापन

*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 अकेलापन  ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑  माघ कृष्ण चतुर्दशी तिथि, शनिवार 17 जनवरी 2026 कलि काल के   प्रथम तीर्थंकर सर्व सुख कारक संस्कार प्रदाता श्री ऋषभनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री ऋषभनाथ  भगवान जी का  मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑  माघ अमावस्या तिथि, रविवार 18 जनवरी 2026 कलि काल के   11 वें तीर्थंकर श्री श्रेयांसनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  श्रेयांसनाथ भगवान जी का  केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 08,15,17,18,20,22,24,28 व 30( 30 को बारस+तेरस समाहित तिथि )तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 11 व 26  जनवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 जनवरी  को है।*

*🔔🐎षोडष कारण महापर्व 04 जनवरी से 02 फरवरी को है।* 
*✅🔔 बसंत पंचमी 23 जनवरी*
*🎪🪔दशलक्षण महापर्व 22 से 31 जनवरी 👉30 जनवरी से 01 फरवरी रत्नत्रय व्रत* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  जनवरी माह में  नहीं है बसंत पंचमी का 23 जनवरी को स्वयं सिद्ध मुहूर्त है 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,12,14,19,21,28 व 29 जनवरी 🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 03040708,13,14,23,24 व 29 जनवरी ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  23 से 26 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

          *अकेलापन* 

अकेलापन कोई साधारण भावना नहीं, यह भीतर-ही-भीतर इंसान को खोखला कर देने वाली सबसे गहरी सज़ा है। भीड़ में रहकर भी जब मन सूना हो जाए, जब कोई अपना पास होते हुए भी दूर लगे—तब समझ आता है कि *जीवन सिर्फ साँसों से नहीं, साथ से भी चलता है*। 

प्रस्तुत कहानी उसी साथ की ज़रूरत, उसकी ताकत और उसके अभाव की पीड़ा को बड़े सहज, लेकिन गहरे भावों में कहती है।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*अकेलापन संसार में सबसे बड़ी सज़ा है*

मेरी पत्नी ने कुछ दिनों पहले घर की छत पर कुछ गमले रखवा दिए थे। देखते-ही-देखते छत एक छोटे से गार्डन में बदल गई।
पिछले दिनों जब मैं छत पर गया, तो हैरान रह गया—कई गमलों में फूल खिल चुके थे, नींबू के पौधे पर दो नींबू 🍋🍋 झूल रहे थे और हरी मिर्चों की कतार भी मुस्कुरा रही थी।
तभी मैंने देखा कि पत्नी बांस 🎋 के एक गमले को घसीटकर दूसरे गमलों के पास ले जा रही है।
मैंने कहा, “इतना भारी गमला क्यों खिसका रही हो? पौधा सूख रहा है तो खाद डालो, पानी डालो 💦। पास रखने से क्या होगा?”
पत्नी हल्की-सी मुस्कान के साथ बोली—
“यह पौधा अकेला है, इसलिए मुरझा रहा है। इसे दूसरे पौधों के पास रख देंगे तो फिर से लहलहा उठेगा। पौधे भी अकेलेपन में सूख जाते हैं, लेकिन साथ मिल जाए तो जी उठते हैं।”
उसकी बात सुनकर मैं हँसना चाहता था, लेकिन हँसी भीतर कहीं अटक गई।
एक-एक कर कई तस्वीरें आँखों के सामने उभरने लगीं।
माँ के जाने के बाद पिताजी…
एक ही रात में बहुत बूढ़े हो गए थे।
सोलह साल तक वे हमारे साथ रहे, लेकिन सूखते हुए पौधे की तरह। माँ के रहते जिन्हें मैंने कभी उदास नहीं देखा, वे उनके जाने के बाद खामोशी की चादर ओढ़ चुके थे।
उस पल पत्नी की बात पर मुझे पूरा विश्वास हो गया—
वाकई, अकेलापन धीरे-धीरे जीवन का रस सोख लेता है।
मुझे बचपन की एक घटना याद आ गई।
मैं बाज़ार से एक छोटी-सी रंगीन मछली 🐠 लाया था। उसे शीशे के जार में रखा। खाना डाला, पानी बदला, पर वह चुप रही। दो दिन तक बस इधर-उधर तैरती रही और एक सुबह पानी की सतह पर उलटी पड़ी मिली।
काश, तब कोई मुझे बता देता कि मछलियाँ भी अकेले नहीं जी पातीं।
तो मैं एक नहीं, कई मछलियाँ लाता…
और वह मासूम यूँ तन्हा न मरती।

माँ की एक और बात याद आई—वह कहती थीं कि पुराने घरों में दीवारों में दीपक रखने के लिए दो मोखे इसलिए बनवाए जाते थे, क्योंकि अकेला मोखा भी उदास हो जाता है।
शायद सच ही है—
इस संसार में किसी को अकेलापन पसंद नहीं।
चाहे 
वह पौधा हो, 
मछली हो 
या इंसान।
*“साथ केवल सहारा नहीं होता, वह जीवन का पोषण होता है।”*
आज मन कहता है—
अगर आपके आसपास कोई अकेला दिखे, तो उसे अपना साथ दीजिए।
और अगर आप खुद अकेले हैं, तो किसी का हाथ थाम लीजिए।
मुरझाना प्रकृति नहीं, मजबूरी है।
*“अकेलापन वह सूखा है, जिसमें सबसे मजबूत जड़ें भी टूट जाती हैं।”*
गमले के पौधे को तो हाथ से खिसकाकर पास लाया जा सकता है,
लेकिन इंसान को करीब लाने के लिए रिश्तों को समझना पड़ता है, सहेजना पड़ता है…और कई बार अपने अहं को भी झुकाना पड़ता है।
अगर कभी लगे कि जीवन का रस सूख रहा है,
तो रिश्तों के प्यार का जल डालिए 💧।
कोई आपसे दूर हो गया हो, तो एक प्रयास कीजिए—
शायद वह भी किसी अपने का इंतज़ार कर रहा हो।
*“जो रिश्ते सींचे जाते हैं, वही जीवन को हरा-भरा रखते हैं।”
*विशेष :- अकेलापन सचमुच संसार की सबसे बड़ी सज़ा है। जीवन केवल अपने लिए नहीं, साथ निभाने के लिए है। रिश्ते समय माँगते हैं, समझ माँगते हैं—लेकिन वही जीवन को अर्थ देते हैं। किसी को अकेला न छोड़िए, और खुद भी अकेले मत रहिए। क्योंकि साथ में ही जीवन खिलता है।* 
सबसे महत्वपूर्ण सभी के लिए आज वर्तमान में सभी श्रावक प्रति दिन अपने षट् आवश्यक कर्म को नहीं कर रहे है जिसके कारण जीवन में उतार चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। अब मन में विचार आता है कि जब से होश संभाला है तब से जिन दर्शन व कुछ धार्मिक क्रिया कर रहे है किंतु हमें सफलता प्राप्त नहीं हो रही है।हमारी भाभी तो कभी जिन मंदिर नहीं जातीं और वह जबसे घर में आई है तब से उसका विकास हो रहा है और हमारा नहीं हो रहा। अब हम भी जिन दर्शन छोड़ कर मिथ्या दृष्टि की सेवा करेंगे। ऐसा विचार भी किसी के मन में आ सकता है। इस बात को ध्यान से समझें चौरासी लाख योनियों में सभी जीवों का उसके कर्मों से स्थान प्राप्त होता है।जो जीव आम का पेड़ बना हुआ है वह तो आम का ही फल देगा।उसी प्रकार जिस जीव का जन्म जैन कुल में हुआ है उसका आत्मकल्याण भी जैनदर्शन से ही संभव है। अगर वह दो धर्म याने दो नावों पर पैर रखकर सफर करेगा तो नियम से पानी में गिरेगा। अतः सभी अपने आत्मविश्वास को जागृत रखते हुए वीतरागी धर्म की आराधना करते हुए जीवन सार्थक करें।
*👨‍👨‍👦‍👦✅🪔कहानी में अकेलापन का सही अर्थ यह है कि जिस व्यक्ति विशेष में इंसानियत नहीं है वह आज भी असफल है और भविष्य में भी सफलता से कोसों दूर रहेगा। अतः सभी अपनी इंसानियत को समझकर जीवन सार्थक करें। बिना सच्चे धर्म के जीवन में अकेलापन ही रहता है।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 14 जनवरी 2026

सफलता का रहस्य

*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सफलता का रहस्य ✍️🐒*
 
*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑  माघ कृष्ण बारस तिथि, गुरुवार 15 जनवरी 2026 कलि काल के  10 वें तीर्थंकर  श्री शीतलनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शीतलनाथ  भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 08,15,17,18,20,22,24,28 व 30( 30 को बारस+तेरस समाहित तिथि )तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि  26  जनवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 जनवरी  को है।*
*🔔🐎षोडष कारण महापर्व 04 जनवरी से 02 फरवरी को है।* 
*✅🔔 बसंत पंचमी 23 जनवरी*
*🎪🪔दशलक्षण महापर्व 22 से 31 जनवरी 👉30 जनवरी से 01 फरवरी रत्नत्रय व्रत* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  जनवरी माह में  नहीं है बसंत पंचमी का 23 जनवरी को स्वयं सिद्ध मुहूर्त है 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,12,14,19,21,28 व 29 जनवरी 🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 03040708,13,14,23,24 व 29 जनवरी ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  23 से 26 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*🌞सफलता का रहस्य 🌞*

 *मेहनत के साथ समझदारी भी ज़रूरी है* 
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 *🌞जीवन में सफलता केवल कड़ी मेहनत से नहीं मिलती, बल्कि मेहनत के साथ सही दिशा में सोचने और समझदारी से निर्णय लेने की भी आवश्यकता होती है। जो व्यक्ति परिश्रम के साथ बुद्धि का सही उपयोग करता है, वही आगे बढ़ता है।* 
दो मित्र, एक जैसी पढ़ाई, एक जैसी नौकरी, एक जैसी मेहनत…फिर भी एक आगे निकल गया।....क्यों?
👉 क्योंकि उसने सिर्फ मेहनत ही नहीं की,
👉 उसने सोचकर काम किया।

एक ने कहा—“बाज़ार में दाम कितना है?” दूसरे ने सोचा—“यहाँ अवसर क्या है?”

यही फर्क होता है
कर्मचारी और सफल व्यक्ति में।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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आइये पुरी कहानी सुनते हैं।

यह कहानी दिल्ली महानगर में रहने वाले दो घनिष्ठ मित्रों की है—आदित्य और राहुल। दोनों एक ही मोहल्ले में पले-बढ़े, साथ पढ़े-लिखे और कॉलेज की पढ़ाई भी एक साथ पूरी की। दोस्ती इतनी गहरी थी कि भविष्य के सपने भी दोनों ने एक जैसे ही देखे थे।
पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने एक ही कंपनी में नौकरी के लिए आवेदन किया और सौभाग्यवश दोनों का चयन भी हो गया। शुरुआत में दोनों समान पद और समान वेतन पर कार्यरत थे। दोनों मेहनती थे, समय पर काम करते थे और ऑफिस में देर तक रुकने से भी नहीं कतराते थे।
समय बीतने लगा। धीरे-धीरे आदित्य को एक के बाद एक पदोन्नति मिलने लगी, जबकि राहुल वहीं का वहीं रह गया। अब राहुल के मन में असंतोष और जलन जन्म लेने लगी। वह स्वयं से पूछता—
“जब मेहनत हम दोनों बराबर कर रहे हैं, तो आगे सिर्फ वही क्यों बढ़ रहा है?”
एक दिन बॉस ने राहुल को एक अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी। परंतु राहुल झुंझला उठा और बॉस से बहस करने लगा। उसने कहा—
“सर, आप आदित्य को ही हर बार आगे बढ़ाते हैं। हमने एक साथ नौकरी शुरू की थी, फिर भी आप उसी को प्रमोशन देते जा रहे हैं। अब मैं यहां काम नहीं करूंगा।”
बॉस ने उसकी सारी बातें शांतिपूर्वक सुनीं और बोले—
“राहुल, मैं मानता हूँ कि तुम मेहनती हो, लेकिन सिर्फ मेहनत ही काफी नहीं होती।”
राहुल अपनी बात पर अड़ा रहा। तब बॉस ने कहा—
“ठीक है, मैं तुम्हें प्रमोशन और ज्यादा वेतन देने को तैयार हूँ, लेकिन पहले मेरी एक शर्त पूरी करो।”
राहुल ने शर्त मान ली।
बॉस ने कहा—
“ देखो हम प्रिंटर पेपर सेल पर भी आगे फोकस करने वाले है। बाज़ार जाओ और पता करके आओ कि स्टेशनरी मार्केट में प्रिंटर पेपर कितने विक्रेता बेच रहे हैं।”
राहुल बाज़ार गया, थोड़ी देर में लौटकर बोला—
“सर, वहाँ सिर्फ एक ही दुकानदार प्रिंटर पेपर बेच रहा है।”
बॉस ने कहा—
“अब जाकर यह पता करो कि प्रिंटर पेपर का दाम क्या है।”
राहुल फिर गया और लौटकर बताया—
“सर, प्रिंटर पेपर 300 रुपये प्रति रिम है।”
अब बॉस ने आदित्य को बुलाया और वही काम सौंपा।
आदित्य बाज़ार गया और कुछ देर बाद लौटकर बोला—
“सर, बाज़ार में थोक में एक ही दुकानदार है। वह डाइरेक्ट मील से खरीदता है। वह 300 रुपये प्रति रिम पर पेपर बेच रहा है।
लेकिन यदि हम उससे एक साथ थोक में रिम खरीदें, तो वह 260 रुपये प्रति रिम देने को तैयार है।
यदि हम भी डाइरेक्ट मील से थोक में माल खरीदे तो हम अपना बाजार बना सकते हैं।
इसके अलावा, अगले महीने शहर में पेपर की मांग बढ़ने वाली है—ऐसे में हम अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हैं।”
एक कोने में खड़ा राहुल यह सब सुन रहा था। उसे अपनी कमी साफ़ दिखाई देने लगी। उसने समझ लिया कि वह सिर्फ आदेश का पालन कर रहा था, जबकि आदित्य हर काम में सोच, विश्लेषण और अवसर ढूंढ रहा था।
राहुल ने बॉस से क्षमा माँगी और मन ही मन निश्चय किया कि अब वह केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि अपनी समझ और सोच को भी निखारेगा।
*👨‍👨‍👦‍👦✅🔔🪔विशेष: भव्य आत्माओं केवल परिश्रम सफलता की गारंटी नहीं है। सही दिशा में सोचना, अवसर पहचानना और अतिरिक्त प्रयास करना ही हमें दूसरों से आगे ले जाता है। “मेहनत अगर दिशा के बिना हो, तो वह सिर्फ थकान बन जाती है।”और जो सोचकर काम करता है, वही सच्चा व्यापारी बनता है।”*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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बुधवार, 7 जनवरी 2026

आत्मा के प्रति कर्तव्य

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 आत्मा के प्रति कर्तव्य ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑  माघ कृष्ण षष्ठी तिथि, गुरुवार 8 जनवरी 2026 कलि काल के  6 वें तीर्थंकर  श्री पद्मप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से सूर्य की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री पद्मप्रभ  भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 08,15,17,18,20,22,24,28 व 30( 30 को बारस+तेरस समाहित तिथि )तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 11 व 26  जनवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 जनवरी  को है।*

*🔔🐎षोडष कारण महापर्व 04 जनवरी से 02 फरवरी को है।* 
*✅🔔 बसंत पंचमी 23 जनवरी*
*🎪🪔दशलक्षण महापर्व 22 से 31 जनवरी 👉30 जनवरी से 01 फरवरी रत्नत्रय व्रत* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  जनवरी माह में  नहीं है बसंत पंचमी का 23 जनवरी को स्वयं सिद्ध मुहूर्त है 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,12,14,19,21,28 व 29 जनवरी 🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 03040708,13,14,23,24 व 29 जनवरी ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  23 से 26 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*✅आत्मा के प्रति कर्तव्य✅*
मनुष्य जीवन भर बाहर की दुनिया को गिनता-परखता रहता है—सुख, दुःख, संबंध, धन और उपलब्धियाँ। पर इस गिनती में वह स्वयं को ही भूल जाता है। प्रस्तुत कहानी उसी विस्मृति की ओर संकेत करती है, जहाँ सब कुछ होते हुए भी भीतर एक अभाव बना रहता है। *“आत्मा के प्रति कर्तव्य ”* हमें यह समझाती है कि वास्तविक कमी बाहर नहीं, बल्कि अपने भीतर आत्मा की उपेक्षा में छिपी है।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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बारह यात्री एक नगर से दूसरे नगर की ओर जा रहे थे। चलते-चलते उनके सामने एक गहरी नदी आ गई। न कोई पुल था, न नाव। पार जाना आवश्यक था, पर उपाय सूझ नहीं रहा था।
तभी उनमें से एक सयाने व्यक्ति ने कहा,
“घबराओ मत। सब एक-दूसरे का हाथ थाम लो। मिलकर चलेंगे, तो नदी पार हो जाएगी।”
सभी ने एक-दूसरे का हाथ मजबूती से पकड़ लिया और सावधानीपूर्वक नदी पार कर ली। दूसरे किनारे पहुँचकर स्याना बोला,
“अब गिनती कर लो, कहीं कोई साथी नदी में तो नहीं रह गया?”
एक ने कहा,
“तू ही सबसे बुद्धिमान है, तू ही गिन।”
स्याना गिनने लगा—
“एक, दो, तीन, चार, पाँच, छः, सात, आठ, नौ, दस, ग्यारह…”
वह स्वयं को गिनना भूल गया। घबराकर बोला,
“अरे! हम तो ग्यारह ही हैं। एक साथी कहाँ गया?”
दूसरे ने गिनती की, उसने भी स्वयं को छोड़ दिया। फिर तीसरे, चौथे—सबने गिना, पर हर बार संख्या ग्यारह ही निकली। सब रोने-बिलखने लगे कि एक साथी खो गया है।
तभी वहाँ से एक राहगीर गुज़रा। उसने उनके दुःख का कारण पूछा।
स्याने ने सारी कथा सुना दी।
राहगीर ने उन्हें ध्यान से देखा और मन-ही-मन गिन लिया—वे पूरे बारह थे।
वह मुस्कराकर बोला,
“अगर मैं तुम्हारा बारहवाँ साथी खोज दूँ, तो?”
वे बोले,
“तो हम तुम्हें भगवान मान लेंगे।”
राहगीर ने कहा,
“सब ज़मीन पर बैठ जाओ। मैं एक-एक को हल्की चपत मारूँगा। जिसे चपत लगे, वह क्रम से गिनता जाए।”
जैसे-जैसे चपत पड़ती गई, गिनती होती गई—
एक… दो… तीन… और देखते-देखते बारह पूरे हो गए।
सब खुशी से चिल्ला उठे—
“आप तो सचमुच भगवान हैं!”
हमें इन यात्रियों पर हँसी आती है,
पर सच्चाई यह है कि हम स्वयं भी यही भूल दोहराते हैं।
हम अपनी पाँच ज्ञानेन्द्रियों—
(आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा)
और पाँच कर्मेन्द्रियों—
(हाथ, पैर, वाणी, उपस्थ, गुदा)
को तो पहचानते हैं।
ग्यारहवें मन को भी मान लेते हैं,
पर बारहवीं आत्मा को भूल जाते हैं।
हम इन्द्रियों और मन की तृप्ति में उलझे रहते हैं, दुनिया-भर के बखेड़े करते हैं,
पर आत्मा के लिए कुछ नहीं करते।
इसी गिनती की भूल में मनुष्य दुःखी और अशान्त बना रहता है।
*🎪⏰✅👨‍👨‍👦‍👦विशेष :- जो व्यक्ति इन्द्रियों और मन से ऊपर उठकर अपनी आत्मा को पहचान कर आत्मकल्याण के लिए पुरुषार्थ करते  है, वही सच्चे अर्थों में पूर्ण होता है। बाहरी संसार की गिनती छोड़कर जब हम भीतर झाँकते हैं, तभी जीवन में शांति, संतुलन और वास्तविक सुख का अनुभव होता है।आत्मा के प्रति अपने कर्तव्यों को भूलना ही सबसे बड़ी कमी है, और उसे पहचान कर पुरुषार्थ करना सबसे बड़ी उपलब्धि।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

गुरुवार, 1 जनवरी 2026

सुसंस्कार सहित शिक्षा का महत्व

*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 सुसंस्कार सहित शिक्षा का महत्व ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष शुक्ल  चतुर्दशी ,शुक्रवार 2 जनवरी  2026 कलि काल के   चौथे तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री अभिनंदन नाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अभिनंदन नाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 पौष पूर्णिमा , शनिवार 3 जनवरी  2026 कलि काल के   15 वें तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री धर्मनाथ  भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री धर्मनाथ  भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 08,15,17,18,20,22,24,28 व 30( 30 को बारस+तेरस समाहित तिथि )तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 11 व 26  जनवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 जनवरी  को है।*
*🔔🐎षोडष कारण महापर्व 04 जनवरी से 02 फरवरी को है।* 
*✅🔔 बसंत पंचमी 23 जनवरी*
*🎪🪔दशलक्षण महापर्व 22 से 31 जनवरी 👉30 जनवरी से 01 फरवरी रत्नत्रय व्रत* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त  जनवरी माह में  नहीं है बसंत पंचमी का 23 जनवरी को स्वयं सिद्ध मुहूर्त है 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 01,04,12,14,19,21,28 व 29 जनवरी 🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 03040708,13,14,23,24 व 29 जनवरी ✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त इस माह नहीं है।*
*🐎✍️ पंचक  23 से 26 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*✅ सुसंस्कार सहित शिक्षा का महत्व⏰* 

    *🔑उदारता*  
*उदारता सिर्फ पैसे का दान नहीं होती, बल्कि यह इंसान के अच्छे मन और बड़े दिल की पहचान है। उदार सोच हमारे विचारों को फैलाती है और खुद पर भरोसा बढ़ाती है। जो व्यक्ति बिना स्वार्थ के दूसरों की मदद करता है, सहनशील रहता है और सेवा को अपना स्वभाव बनाता है, वही सच में जीवन में मन की शांति और संतोष पाता है।*
*✅🪔आज भारत देश में भ्रष्टाचार युक्त राजनीति के कारण शिक्षा में मिलावट और बहुत कुछ परिवर्तन कर दिया।इसका मुख्य कारण यह है कि भारतवासियों ने अपने बहुमूल्य वोट का महत्व नहीं समझा और भ्रष्टाचार युक्त राजनीति के भ्रष्ट राजनेताओं ने शिक्षा को व्यवसाय बना कर संस्कृति को समाप्त कर दिया।*
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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एक छोटे से कस्बे में हरिनाथ नाम का एक साधारण शिक्षक रहता था। वे न तो बहुत धनी थे, न ही किसी बड़े पद पर—पर उनके भीतर एक असाधारण उदारता थी। उनकी उदारता पैसे में नहीं, बल्कि समय, ध्यान और विश्वास में झलकती थी।
हर सुबह स्कूल खुलने से पहले वे आ जाते और उन बच्चों को पढ़ाते जो फीस नहीं दे पाते थे। कई लोग उनसे कहते,
“आप इतना समय क्यों गंवाते हैं? इससे आपको क्या मिलेगा?”
हरिनाथ मुस्कुरा कर बस इतना कहते,
“जो मिलेगा, वह हिसाब में नहीं आता।”
एक दिन स्कूल का एक छात्र मोहन, जो पढ़ाई में कमजोर था, परीक्षा में फिर असफल हो गया। पिता ने गुस्से में उसकी पढ़ाई छुड़वाने का निर्णय ले लिया। हरिनाथ यह सुनकर खुद मोहन के घर गए। उन्होंने न तो उपदेश दिया, न ही दबाव बनाया। बस इतना कहा,
“इसे एक साल और मुझे दीजिए, मैं जिम्मेदारी लूंगा।”
उस साल हरिनाथ ने मोहन को रोज़ अतिरिक्त समय निकालकर शिक्षा के साथ सुसंस्कार दिया —कभी स्कूल के बाद, कभी रविवार को। बदले में उन्हें कुछ नहीं मिला, सिवाय थकान के। लेकिन उनके भीतर एक शांति थी।
समय बीता। मोहन न केवल पास हुआ, बल्कि आगे चलकर एक सफल इंजीनियर बना। वर्षों बाद वही मोहन उस कस्बे में एक बड़ा प्रशिक्षण केंद्र खोलता है—निःशुल्क शिक्षा के लिए। उद्घाटन के दिन उसने मंच से कहा,
“अगर हरिनाथ गुरुजी ने अपना समय, धैर्य और विश्वास उदारता से न दिया होता, तो मैं आज यहां नहीं होता।”
हरिनाथ चुपचाप पीछे खड़े थे। उनकी आंखों में संतोष था—वह आत्मसंतोष, जो किसी धन, पुरस्कार या प्रशंसा से कहीं बड़ा होता है। 
*✅🪔🔑नोट:-आज आवश्यक है कि हमें भी हरिनाथ बनकर अपनी शक्ति अनुसार कम से कम एक व्यक्ति विशेष को सुसंस्कार सहित शिक्षा प्रदान कर जीवन सार्थक करना आवश्यक है।*

*🎪🪔⏰✅विशेष: - भव्य आत्मओं ,सच्ची उदारता वही है, जो स्वार्थ से नहीं, सद्भाव से उपजती है। सही व्यक्ति और सही उद्देश्य के लिए दिया गया समय, श्रम और प्रेम—समाज को बदलने की सबसे बड़ी पूंजी बन जाता है।आज भारतवासियों को आवश्यक है कि सुसंस्कार व शिक्षा की आवश्यकता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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