गुरुवार, 29 जनवरी 2026

अड़ियल स्वभाव

*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒  अड़ियल स्वभाव ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔विशेष आज 12/13 दोनों ही तिथियां 30 जनवरी को समाहित है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 माघ शुक्ल  12 , 30 जनवरी    शुक्रवार 2025 कलि काल के  चौथे तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री अभिनंदन भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अभिनंदन भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 माघ शुक्ल  13 , 30 जनवरी    शुक्रवार 2025 कलि काल के  पंद्रहवे तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री धर्मनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और धर्म में दिन दुगनी रात चौगुनी वृद्धि से मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री धर्मनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 08,15,17,18,20,22,24,28 व 30( 30 को बारस+तेरस समाहित तिथि )तारीख को  कल्याणक महोत्सव है।*
 *चतुर्दशी तिथि  31 जनवरी  को है।*

*🔔🐎षोडष कारण महापर्व 04 जनवरी से 02 फरवरी को है।* 
*🎪🪔दशलक्षण महापर्व 22 से 31 जनवरी 👉30 जनवरी से 01 फरवरी रत्नत्रय व्रत* 
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

 *अड़ियल स्वभाव* 

जीवन में अनेक बार हम चेतावनियों को अहंकार, हठ या स्वार्थवश अनदेखा कर देते हैं। हमें लगता है कि “मुझे सब पता है”, “मुझ पर कोई असर नहीं पड़ेगा।” लेकिन जब विवेक पर अहंकार भारी पड़ जाता है, तब परिणाम केवल नुकसान नहीं, बल्कि पश्चाताप बनकर सामने आता है। 
यह कहानी उसी मानवीय कमजोरी, सत्य की शक्ति और झूठ की पराजय का जीवंत उदाहरण है।
⬇️⬇️⬇️✅⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W 7891913125 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️✅⬆️⬆️⬆️

✅एक दिन एक घुड़सवार अपने गुस्सैल घोड़े को बेचने के लिए बाज़ार की ओर जा रहा था। रास्ते में उसे भूख लगी, तो वह एक बाग़ में रुक गया। उसने घोड़े को एक पेड़ से बाँध दिया। घोड़ा नीचे उगी हरी घास चरने लगा और घुड़सवार स्वयं भोजन करने बैठ गया।
कुछ ही देर में एक व्यक्ति अपने गधे के साथ वहाँ पहुँचा और उसी पेड़ पर गधे को बाँधने लगा। यह देखकर घोड़े का मालिक बोला—
“भाई, अपने गधे को इस पेड़ पर मत बाँधो। मेरा घोड़ा बहुत गुस्सैल है, यह तुम्हारे गधे को मार सकता है।”
गधे का मालिक अकड़ कर बोला—
“यह पेड़ केवल तुम्हारा नहीं है। मैं तो अपना गधा यहीं बाँधूँगा।”

घोड़े का मालिक शांत स्वर में बोला—“ अच्छी बात है भाई, पर मैंने तुम्हें पहले ही चेतावनी दे दी है। अगर कुछ हुआ, तो जिम्मेदारी तुम्हारी ही होगी।”
लेकिन गधे का मालिक नहीं माना। उसने गधे को उसी पेड़ से बाँध दिया और चला गया।
कुछ ही देर में घोड़े ने गधे पर लात मार दी। गधा नीचे गिर पड़ा। इससे पहले कि घोड़े का मालिक कुछ कर पाता, घोड़े ने लगातार लात मार-मारकर गधे को मार डाला।
थोड़ी देर बाद गधे का मालिक आया। मरे हुए गधे को देखकर वह चिल्लाने लगा—
“तुम्हारे घोड़े ने मेरे गधे को मार डाला! अब मुझे मेरा गधा दो, नहीं तो मैं तुम्हें यहाँ से जाने नहीं दूँगा!”
घोड़े का मालिक बोला—
“मैंने तुम्हें पहले ही चेतावनी दी थी कि मेरा घोड़ा गुस्सैल है। तुमने मेरी बात नहीं मानी। अब इसकी जिम्मेदारी मेरी नहीं, तुम्हारी है।”
दोनों में बहस होने लगी। तभी एक राहगीर आया और बोला—
“तुम दोनों राजा के दरबार चलो, वहीं न्याय होगा।”
दोनों राजा के दरबार पहुँचे।
राजा ने गधे के मालिक से पूछा—
“बताओ, तुम्हारा गधा कैसे मरा?”
उसने कहा—
“महाराज, मैने तो मेरा गधा पेड़ से बांधा था, अचानक इसका घोड़ा पागल हो गया और मेरे गधे को मार डाला।”
फिर राजा ने घोड़े के मालिक से पूछा—
“क्या तुम्हारे घोड़े ने गधे को मारा है? बोलो।”
घोड़े का मालिक चुप रहा।
राजा क्रोधित होकर बोले—
“क्या तुम बहरे हो? गूंगे हो? बोलते क्यों नहीं?”
फिर भी वह चुप रहा ।
तभी गधे का मालिक बोला—
“महाराज, यह गूंगा नहीं है। पहले तो मुझ पर चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा था कि अपने गधे को यहाँ मत बाँधो, मेरा घोड़ा इसे मार देगा। अब यहाँ चुप्पी साधे बैठा है।”
यह सुनते ही घोड़े का मालिक बोला—
“महाराज, मैंने जानबूझकर चुप्पी साधी थी, ताकि यह ही अपने मुँह से सच बोल दे—और इसने वही किया।”
राजा मुस्कुराए और बोले—
“तो सत्य स्पष्ट है। इस व्यक्ति ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि घोड़ा गुस्सैल है और गधे को यहाँ मत बाँधो। लेकिन तुमने अहंकार में उसकी बात नहीं मानी। इसलिए इस घटना के लिए अब तुम स्वयं ही जिम्मेदार हो।”
राजा ने निर्णय सुनाया—
“यह हानि तुम्हारी हठ और मूर्खता का परिणाम है। यदि तुम चाहते हो तो तुम्हारे गधे को दूसरे पेड़ से भी बांध सकते थे। इसलिए न्याय तुम्हारे पक्ष में नहीं हो सकता।”

दरबार में सन्नाटा छा गया… और सत्य मौन होकर भी सबसे ऊँचा बोल रहा था।
 कहानी का संदेश यही है कि झूठ कितना भी सजाया जाए, कितनी भी चालाकी से छुपाया जाए—सच अंततः स्वयं सामने आ जाता है। जो चेतावनी को अहंकार समझकर ठुकरा देता है, वह अक्सर अपने ही नुकसान का कारण बनता है। विवेक, विनम्रता और सत्य—यही जीवन के सच्चे रक्षक हैं।
*⏰🐎👨‍👨‍👦‍👦⛳🔔विशेष :-भव्य आत्माओं, इस कहानी के माध्यम से हम सभी को यह समझना आवश्यक है कि हमारा स्वभाव में कुछ निर्णय स्वयं के अड़ियल पने के शिकार हो सकते है। जैसे मैं यही व्यवसाय करुंगा, मैं घर से बाहर काम नहीं करुंगा, मैं इसी लड़के या लड़की से शादी करुंगा इस प्रकार के हजारों उदाहरण हो सकते है।इन उदाहरणों के कारण हम कई बार अपने हाथों से अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार लेते है। कुछ लोगों को जीवन भर पश्चाताप के अलावा कुछ भी प्राप्त नहीं होता। अतः सभी को समय के अनुसार अपनी योग्यता को देखकर ही निर्णय लेना चाहिए। प्रकृति का नियम है सही कार्य में साथ कोई बिरला व्यक्ति ही साथ देता और गलत कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वालों की गिनती करना मुश्किल है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें